samacharsecretary.com

जनभागीदारी से रेडक्रॉस के सेवा कार्यों को दें विस्तार : चैयरमेन तोमन साहू

जनभागीदारी से रेडक्रॉस के सेवा कार्यों को दें विस्तार : चैयरमेन तोमन साहू रक्तदान, अंगदान और नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने युवाओं को जोड़ने पर जोर बिल्हा के विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति चलेगा जागरूकता अभियान बिलासपुर,  भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के राज्य चेयरमेन तोमन साहू की अध्यक्षता में जिला शाखा बिलासपुर की समीक्षा बैठक जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित की गई। उन्होंने जनभागीदारी से सेवा कार्यों का विस्तार करने और युवाओं की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल उपस्थित थे।       बैठक में जूनियर रेडक्रॉस एवं यूथ रेडक्रॉस को मजबूत करने, सदस्यता अभियान को गति देने तथा रक्तदान एवं अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर चर्चा हुई। सिकल सेल, टीबी एवं मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से कार्य करने पर जोर दिया गया। नशामुक्ति अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं एवं यूथ रेडक्रॉस के युवाओं की सहभागिता से नुक्कड़ नाटक, लघु चलचित्र और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जाएगा। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित रक्तदान शिविरों की जानकारी बैठक में दी गई। इन शिविरों में रक्तदान के साथ रक्त शर्करा, रक्तचाप, हीमोग्लोबिन एवं सिकल सेल की निःशुल्क जांच भी की जा रही है। शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित जिला स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता की जानकारी भी दी गई।       बस्ता एजुकेशन एंड हेल्थ फाउंडेशन की संस्थापक सुविनीता पटेल ने ‘प्रोजेक्ट आरुग’ के अंतर्गत मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति प्रस्तावित जागरूकता अभियान की विस्तृत जानकारी दी। एसईसीएल से सामाजिक उत्तरदायित्व मद में प्राप्त 48.96 लाख रुपये की राशि से रेडक्रॉस के सहयोग से बिल्हा विकासखंड के 114 हाई स्कूल एवं कुछ माध्यमिक विद्यालयों में अभियान संचालित किया जाएगा। बैठक में रेडक्रॉस कार्यालय के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय परिसर में स्थल चयन की जानकारी दी गई। भविष्य में रक्त भंडारण केंद्र की स्थापना, अंगदान के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन तथा युवाओं को ‘युवोदय रेडक्रॉस मितान योजना’ से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।       बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय, राज्य शाखा के वाइस चेयरमेन बालाराम साहू एवं सदस्य केशव साहू, प्रबंध समिति के चेयरमेन डॉ. बी.एल. गोयल, कोषाध्यक्ष अमरजीत सिंह दुआ, राज्य प्रतिनिधि ब्रजेन्द्र शुक्ला, प्रबंध समिति के सदस्य डॉ. राजीव अवस्थी, सुरेन्द्र गुम्बर एवं श्रीकांत सहारे, रेडक्रॉस सचिव डॉ. शुभा गरेवाल, नोडल अधिकारी डॉ. एम.ए. जीवानी, जिला समन्वयक सौरभ सक्सेना एवं सहायक जिला अधिकारी आदित्य पांडेय उपस्थित थे। लक्ष्मीनारायण मिश्रा, मनीष मिश्रा, रेडक्रॉस औषधि केंद्र के प्रबंधक सुशील राजपूत, सुविनीता पटेल, श्रीमती गीतेश्वरी चंद्रा, अन्नू पटेल, यश शर्मा, पूजा कैवर्त एवं प्रीति चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, चिकित्सक एवं रक्त बैंक के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।  

डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी लेकर आया। ट्रेड शो में मिले प्रस्तावों के जरिए डेयरी क्षेत्र की 22 कंपनियां उत्तर प्रदेश में 695.18 करोड़ का निवेश करेंगी। कुल निवेश से 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार व नौकरी मिलेगी। यहां डेयरी क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश ऐस इंटरनेशनल लि. की ओर से किया जाएगा। कंपनी हाथरस, अलीगढ़ व आगरा में 457 करोड़ का निवेश कर 1500 युवाओं को रोजगार/नौकरी देगी। वहीं केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से 100 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।  ऐस इंटरनेशनल लि. करेगी 457 करोड़ का निवेश, 1500 युवाओं को देगी रोजगार  ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड के आदित्य गोयल उत्तर प्रदेश को निवेश का सबसे उपयुक्त गंतव्य मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी यहां 457 करोड़ का निवेश करेगी। उन्होंने हाथरस, अलीगढ़, आगरा में प्रस्तावित निवेश को लेकर विभाग से समन्वय किया है। वे लगभग 1500 से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें समृद्धि के राह पर लाएंगे।  अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि.  केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से दुग्धशाला विकास विभाग को निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेशक अमित सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी। इसके जरिए 250 से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा।  सहकारी व निजी क्षेत्र के उद्यमियों को प्रदान किया गया प्रमाण पत्र  दुग्धशाला विकास विभाग की ओऱ से उप्र दुग्धशाला विकास व दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत यह निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। विभाग, सहकारी व निजी डेयरी उद्यमियों के स्टॉल पर लगभग काफी भीड़ भी रही। पराग-अमूल, नमस्ते इंडिया, पारस डेयरी, ज्ञान डेयरी, न्यू एरा डेयरी, अल्फा मिल्क फूड्स, सीपी मिल्क समेत अनेक कंपनियों ने हिस्सा लिया। वित्त नियंत्रक अरविंद कुमार सिंह, मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी एपी सिंह, दुग्धशाला विकास अधिकारी आईबी सिंह आदि ने निवेशकों, आगंतुकों को विभाग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी।  विभाग को मिले शीर्ष 5 निवेश प्रस्ताव  कंपनी                  निवेश प्रस्ताव     रोजगार    प्रस्तावित जनपद  ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड   457 करोड़   1500  हाथरस, अलीगढ़ व आगरा  केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि.    100 करोड़   250  अयोध्या, मेरठ, लखनऊ व बरेली अंजुम डेयरी         50 करोड़           40   मुरादाबाद, अमरोहा व रामपुर ग्विन व्हे प्रोटीन एलएलपी        27 करोड़    250   एटा, फिरोजाबाद व इटावा गौरी फूड एंड बेवरेजेज    14.65 करोड़      55   झांसी  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में दुग्धशाला विकास विभाग को 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेश से प्रदेश के अनेक जनपदों में यह प्रस्ताव धरातल पर उतरेंगे। इससे प्रदेश के 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार/नौकरी भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त विभाग अन्य निवेशकों को प्रदेश में आमंत्रित कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कार्य कर रहा है।  धनलक्ष्मी के.  दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश

झारखंड की महिलाओं को डेयरी और इंटीग्रेटेड फार्मिंग से जोड़ने की तैयारी, जल्द आएगी नई योजना

रांची  गव्य विकास निदेशालय द्वारा डेयरी के माध्यम से महिला सशक्तीकरण विषय पर आयोजित कार्यशाला में कृषि सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' लागू की जाएगी, जिसके तहत महिलाओं को इंटीग्रेटेड फार्मिंग (एकीकृत कृषि) से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जाएगी। कृषि सचिव ने जोर देकर कहा कि डेयरी का दायरा केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गाय पालन से जुड़े अन्य उत्पाद और दुग्ध प्रसंस्करण भी इसका मुख्य हिस्सा हैं। किसानों व महिलाओं को डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डेयरी उत्पादों से तीन गुना अधिक मुनाफा नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI), करनाल के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि पूर्वी भारत और विशेषकर झारखंड में डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। हरियाणा और पंजाब की तर्ज पर झारखंड की महिलाओं को भी को-ऑपरेटिव (सहकारिता) बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि NDRI झारखंड की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार है और जल्द ही महिलाओं के एक दल को प्रशिक्षण के लिए हरियाणा ले जाया जाएगा। 3 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह कर रहा झारखंड मिल्क फेडरेशन नेशनल मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने बताया कि झारखंड में पशुओं के नस्ल सुधार कार्य से बड़ा बदलाव आया है। वर्तमान में झारखंड मिल्क फेडरेशन प्रतिदिन 3 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह कर रहा है। वहीं, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के कुलपति डॉ. एस. सी. दुबे ने कहा कि झारखंड का समग्र विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील कार्यक्रम की शुरुआत में गव्य निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं से इनका लाभ उठाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो, मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार और गव्य विभाग के उप निदेशक डॉ. मनोज तिवारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी व महिला पशुपालक उपस्थित थे।

बीकानेर में सेना का बड़ा अभ्यास, NH-911 पर उतरे रुद्र-ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टर

बीकानेर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी भूभाग में मंगलवार को एक अनूठा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नजारा देखने को मिला। बीकानेर जिले के दंतौर क्षेत्र में आम दिनों की तरह दौड़ने वाला नेशनल हाइवे-911 कुछ समय के लिए पूरी तरह से एक अस्थायी मिलिट्री रनवे में तब्दील हो गया। भारतीय सेना की एविएशन इकाइयों ने इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशेष हाईवे लैंडिंग अभ्यास को अंजाम दिया। इस दौरान देश के आधुनिक सैन्य बेड़े में शामिल रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने निर्धारित हाईवे स्ट्रेच पर न केवल सफलतापूर्वक लैंडिंग की, बल्कि सटीक टेकऑफ प्रक्रिया भी पूरी की। सीमावर्ती रेगिस्तान में इस तरह का प्रशिक्षण भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। रेगिस्तानी वातावरण और सामरिक चुनौतियों के बीच अभ्यास दंतौर का यह क्षेत्र भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के काफी करीब स्थित है। पश्चिमी राजस्थान के इस रेगिस्तानी इलाके में लंबी दूरियां, गर्म और शुष्क मौसम, धूलभरी आंधियां और तेज हवाएं सैन्य अभियानों के सामने हमेशा से एक अलग तरह की चुनौतियां पेश करती रही हैं। ऐसे कठिन भौगोलिक वातावरण में सैन्य एविएशन इकाइयों के लिए पारंपरिक एयरबेस या हेलीपैड के अलावा वैकल्पिक लैंडिंग क्षेत्रों की पहचान करना और उनका सुरक्षित उपयोग करना बेहद जरूरी होता है। इसी सामरिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास किया गया, ताकि युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में पारंपरिक रनवे उपलब्ध न होने की स्थिति में इन वैकल्पिक स्थानों से भी सुरक्षित संचालन किया जा सके। अभ्यास की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी प्रक्रिया सड़क पर हेलीकॉप्टर उतारना केवल पायलट की व्यक्तिगत दक्षता का मामला नहीं होता, बल्कि इसके लिए बेहद सटीक योजना और तकनीकी समन्वय की आवश्यकता होती है। इस अभ्यास के दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया। सतह और दृश्यता का आकलन: लैंडिंग से पहले एयरक्रू द्वारा हाईवे की सतह, आसपास के दायरे, हवा की गति और दृश्यता का बारीकी से मूल्यांकन किया गया। सटीक समन्वय: सुरक्षित लैंडिंग से लेकर दोबारा उड़ान भरने तक हवा में मौजूद एयरक्रू और जमीन पर तैनात ग्राउंड क्रू के बीच तालमेल बिठाया गया। विविध प्लेटफार्मों की भूमिका: अभ्यास में शामिल रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने अलग-अलग सैन्य भूमिकाओं—जैसे सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक सहायता और निगरानी—के तहत अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और सैन्य गतिशीलता आधुनिक सैन्य अभियानों में किसी एक स्थायी बुनियादी सुविधा पर निर्भरता को कम करना और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत वैकल्पिक विकल्पों का इस्तेमाल करना सबसे अहम माना जाता है। हेलीकॉप्टरों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वे बेहद सीमित स्थानों से भी सुगमता से संचालित हो सकते हैं। हाईवे लैंडिंग जैसे प्रशिक्षण एयरक्रू को गैर-पारंपरिक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अमूल्य अनुभव प्रदान करते हैं। बीकानेर के इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस सैन्य अभ्यास ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा और त्वरित कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

लोहावट की 3 ढाणियों में पेयजल व्यवस्था मजबूत, ₹1.50 करोड़ से बने जलाशय और पाइपलाइन

जयपुर कभी पानी का इंतजार रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। जरूरत के पानी के लिए व्यवस्था पर निर्भरता थी और हर किसी की उम्मीद यही रहती थी कि पानी की सुविधा बेहतर हो और समय पर मिले। फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर) में अब इसी इंतजार की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। इन ढाणियों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत करीब 1.50 करोड रुपये की लागत से किए गए कार्यों ने ग्रामीण पेयजल तंत्र को नया आधार दिया है। तीन उच्च जलाशयों के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने सहित अन्य आवश्यक कार्य पूरे होने के बाद इन क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था में सुधार आया है। आज 2,805 ग्रामीण इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। बजट में घोषणा हुई और गांव तक पहुंचा बदलाव किसी गांव के लिए पानी की सुविधा केवल एक सरकारी परियोजना नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरत है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इन तीनों ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल तंत्र को सुदृढ़ करने का कार्य किया गया। 15 जनवरी, 2025 को कार्यादेश जारी होने के बाद प्रस्तावित कार्यों को पूरा किया गया। उच्च जलाशयों के निर्माण के साथ पाइपलाइन संबंधी जरूरी कार्य किए गए ताकि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके। तीन ढाणियां, हजारों ग्रामीणों की बदली तस्वीर सुथारों की ढाणी, डूडियो की ढाणी और पुनियों की ढाणी – नाम भले तीन हों लेकिन इनसे जुड़ी जरूरत एक ही थी – बेहतर और मजबूत पेयजल व्यवस्था। आज जब इन क्षेत्रों में पेयजल तंत्र पहले से मजबूत हुआ है और 2,805 ग्रामीणों तक योजना का लाभ पहुंच रहा है तो यह बदलाव सिर्फ बने हुए जलाशयों या बिछी पाइपलाइनों में नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देता है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा से विकास की असली तस्वीर बड़े शहरों की इमारतों में ही नहीं, बल्कि गांव की उन ढाणियों में भी दिखाई देती है, जहां एक बेहतर पेयजल सुविधा लोगों के लिए सुविधा, राहत और भरोसे का आधार बन जाती है।  

धमतरी का बेंद्रानवागांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम

​नल से जल, स्वावलंबन से कल  धमतरी का बेंद्रानवागांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम ​ रायपुर         जब पानी घर के आंगन और चौखट तक पहुँचता है, तो केवल एक जीवनदायिनी सुविधा ही नहीं बदलती, बल्कि गाँव की दिनचर्या, स्वच्छता और पूरे ग्रामीण जनजीवन की तस्वीर बदल जाती है। सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की कल्याणकारी योजनाओं को जन-भागीदारी के ज़रिए धरातल पर उतारने की एक अनुकरणीय मिसाल धमतरी विकासखंड के ग्राम बेंद्रानवागांव से सामने आई है। दूर-दराज से पानी ढोने की मजबूरी को पीछे छोड़ते हुए बेंद्रानवागांव अब आधिकारिक रूप से ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम घोषित हो चुका है। इसके साथ ही यह धमतरी विकासखंड का 137वां प्रमाणीकृत गाँव बन गया है। यह उपलब्धि महज़ एक औपचारिक प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि गाँव के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की पहुँच और इस व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के सामूहिक संकल्प की प्रतीक है।          ​इस सफलता की नीव प्रशासनिक दक्षता और जन-भागीदारी के बेहतरीन तालमेल से रखी गई। योजना का कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच ने 24 सितंबर 2026 को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को इसकी आधिकारिक सूचना दी। इसके उपरांत 30 सितंबर को गाँव में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पंचायत के प्रतिनिधियों, सचिव, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता ने ग्राम सभा में उपस्थित होकर योजना के उद्देश्यों, जलापूर्ति व्यवस्था, संचालन और इसके रखरखाव की बारीकियों को ग्रामीणों के साथ साझा किया। ग्रामीणों ने इस नई व्यवस्था पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया, जिसके बाद सरपंच द्वारा विभाग को प्रमाणीकरण प्रमाण-पत्र सौंपा गया और विभाग की ओर से योजना का हस्तांतरण पत्र ग्राम पंचायत को जारी कर दिया गया।           ​बेंद्रानवागांव की इस विकास यात्रा की सबसे खास बात सुविधा से आगे बढ़कर स्वावलंबन की ओर बढ़ना है। अब इस जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और संधारण की पूरी कमान गाँव स्वयं संभालेगा। इसके लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (पानी समिति) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना को दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर बनाए रखने के उद्देश्य से पंचायत ने प्रति परिवार 70 रुपये प्रतिमाह जल कर निर्धारित किया है। इस राशि से बिजली बिल के भुगतान के साथ-साथ गाँव में ही कार्यरत पंप ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन और प्लम्बर की सेवाओं का भुगतान किया जाएगा।         ​शासन की पहल पर हर घर तक पहुँचा नल का जल अब बेंद्रानवागांव में सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बन चुका है। बेंद्रानवागांव का यह सफर स्पष्ट करता है कि जब प्रशासनिक प्रतिबद्धता, पंचायत का मजबूत नेतृत्व और ग्रामीणों की सहभागिता एक साथ जुड़ती है, तो विकास केवल आंकड़ों में दिखाई नहीं देता—वह हर घर की चौखट पर महसूस होता है।

गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक शीघ्र पहुंच रही मदद

कुशीनगर में बाढ़ राहत को युद्धस्तर पर किया गया सक्रिय, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत टीमें तैनात गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक शीघ्र पहुंच रही मदद बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय 13 हजार से अधिक लंच पैकेट और 2100 राशन किट बांटे, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे लोग प्रभावित गांवों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई सक्रिय, गांवों में पहुंचाई जा रही हर जरूरी राहत लखनऊ/कुशीनगर  उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को लेकर योगी सरकार की ओर से प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने प्राथमिकता पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही उन्हें समय पर भोजन, राशन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराया है। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक 29 सितंबर को सुबह आठ बजे बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के बिंदु 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर था। वाल्मीकि नगर बैराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया राहत कार्यों के तहत प्रभावित गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 10 बाढ़ चौकियां और 16 राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी भी तैनात बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी बाढ़ राहत दलों की टीमें तैनात की गई हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी नावों की व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य के लिए स्थानीय गोताखोरों की 66 सदस्यीय टीम भी सक्रिय है। 16 सामुदायिक रसोई से उपलब्ध कराया जा रहा भोजन प्रभावित लोगों को भोजन की समस्या न हो, इसके लिए खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में तीन सामुदायिक रसोई स्थापित की गई हैं। इन रसोइयों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं। राहत सामग्री की उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दो मेडिकल टीमों को लगाया गया है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन, विद्युत आपूर्ति सहित संबंधित विभागों को भी राहत एवं बचाव कार्य में सक्रिय रखा गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार बचाव एवं राहत कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। योगी सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के तहत प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नर्सिंग छात्रों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को दिया धन्यवाद, विद्यार्थियों के हित में सरकार प्रतिबद्ध

नर्सिंग विद्यार्थियों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल का जताया आभार सरकार विद्यार्थियों के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल  नर्सिंग विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम घोषित होने से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। परिणाम जारी होने से विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई, उच्च कक्षाओं में प्रवेश एवं करियर से जुड़ी बाधाओं का समाधान हुआ है। परीक्षा परिणाम घोषित होने पर नर्सिंग विद्यार्थियों एवं विभिन्न प्रतिनिधियों ने आज भोपाल स्थित उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के निवास कार्यालय में भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने परीक्षा परिणाम घोषित होने पर सभी विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए न्यायालय के समक्ष छात्र हित का पक्ष मजबूती से रखा। न्यायालय के आदेश के परिपालन में परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं। सरकार विद्यार्थियों के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आगे भी आवश्यक कदम उठाती रहेगी। विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित होने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है और उनकी आगे की शिक्षा एवं करियर का मार्ग प्रशस्त हुआ है। विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उप मुख्यमंत्री शुक्ल का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया तथा छात्र हित में किए गए प्रयासों के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।

दिल्ली दंगा केस: उमर खालिद-शरजील इमाम को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने बेल की अपील ठुकराई

नई दिल्ली साल 2020 के दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से राहत देने से इनकार कर दिया है और दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। बता दें कि दोनों आरोपी फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में लगभग 6 साल से बंद हैं।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह कोर्ट न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। आदालत ने आगे कहा कि वह शरजील इमाम और उमर खालिद पर लगाई गई शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता है। क्या थीं शर्तें दरअसल, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकते। उस आदेश में जमानत पाने के लिए कुछ शर्तें रखी गईं हैं, जिनमें पहली, संरक्षित गवाहों के बयान पूरे होने पर और दूसरी, आदेश पारित होने की तारीख 5 जनवरी, 2026 से एक साल पूरा होने पर ही जमानत पर विचार किया जा सकता है। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट से पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने बीते 4 जुलाई 2026 को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी 5 जनवरी 2026 को झटका दिया था। शरजील इमाम और उमर खालिद पर दिल्ली में दंगे भड़काने का आरोप बता दें कि शरजील इमाम और उमर खालिद पर मुख्य रूप से फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों की बड़ी साजिश रचने का आरोप है। दोनों पर देश विरोधी भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक दोनों ने CAA और NRC के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा भड़काने की सोची-समझी योजना बनाई थी।  

फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल प्रगति योजना से जुड़े, शहरी सुविधाओं पर बढ़ेगा फोकस

 चंडीगढ़  हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल शहरों को केंद्र सरकार की प्रगति योजना से जुड़ी 50 शहरों की सूची में शामिल किया गया है। केंद्र की सूची में इन तीनों शहरों के संबंधित नगर निकायों को भी स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। फरीदाबाद नगर निगम, गुरुग्राम नगर निगम और करनाल नगर निगम इस सूची में शामिल हैं। प्रगति यानी प्रो एक्टिव गवर्नेस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी और जमीनी स्तर पर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल होने वाला तंत्र है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली प्रगति की बैठकों में महत्वपूर्ण परियोजनाओं और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाती है। केंद्र सरकार फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल का चयन, नगर निकायों की भूमिका अहम के अनुसार प्रगति का जोर केवल योजनाएं बनाने पर नहीं, बल्कि उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और नागरिकों को दिखाई देने वाले परिणामों पर है। प्रगति की सूची में शहरों को शामिल किए जाने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि केंद्र सरकार शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन, कचरा प्रसंस्करण, स्वच्छता, हरियाली और नागरिक सुविधाओं को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है। मई 2026 की प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं और कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया था। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था भी शुरू की गई। हरियाणा के तीनों शहरों के लिए इसका सीधा मतलब शहरी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने से है। इसमें कचरे का संग्रह और निस्तारण, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, सड़क और फुटपाथ व्यवस्था, हरित क्षेत्र बढ़ाना तथा नागरिक सेवाओं की निगरानी जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे। फरीदाबाद और गुरुग्राम के मामले में स्वच्छता के साथ वायु प्रदूषण, सड़क की धूल, हरियाली और यातायात प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होंगे।