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योगी सरकार का उपभोक्ताओं को बड़ा तोहफा, लगातार चौथे महीने बिजली बिल में राहत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की नीति का असर बिजली उपभोक्ताओं के बिलों पर दिखाई दे रहा है। विद्युत क्रय लागत में कमी का लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हुए अक्टूबर माह के बिजली बिल में 5.24 प्रतिशत की राहत दी जाएगी। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं। यूपीपीसीएल के निदेशक वाणिज्य प्रशांत वर्मा ने बताया कि अक्टूबर माह के लिए ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) की दर (-)5.24 प्रतिशत निर्धारित की गई है। ऋणात्मक एफपीपीएएस का लाभ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा। इससे प्रदेशभर के विद्युत उपभोक्ताओं को करीब 424 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि एफपीपीएएस के माध्यम से यह लगातार चौथा महीना है, जब बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है। इससे पहले जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत और सितंबर में 7.93 प्रतिशत की राहत दी जा चुकी है। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप यूपीपीसीएल विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के साथ ही विद्युत क्रय लागत में होने वाले अनुकूल बदलाव का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहा है। एफपीपीएएस व्यवस्था के तहत बिजली और ईंधन की खरीद लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव का समयबद्ध समायोजन बिलों में किया जाता है। लागत घटने पर उसका लाभ भी इसी व्यवस्था के जरिए उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।

मशरूम से अगरबत्ती-साबुन तक का कारोबार, डोंगरगढ़ की दिनेश्वरी बनीं लखपति दीदी

लखपति दीदी डोंगरगढ़ की दिनेश्वरी सोरी ने 'बिहान' योजना से बदली तकदीर मशरूम उत्पादन से लेकर अगरबत्ती, साबुन और गोबर के दीये निर्माण तक कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ाई आय रायपुर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में स्वसहायता समूह किस प्रकार मील का पत्थर साबित हो रहे हैं, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम धनडोंगरी की लखपति दीदी श्रीमती दिनेश्वरी सोरी ने पेश की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने सामान्य गृहिणी से लेकर एक सफल स्वरोजगार संचालक बनने का सफर तय किया है। समूह के सहयोग से शुरू किया कारोबार          श्रीमती दिनेश्वरी सोरी ‘जय सेवा जय बूढ़ा देव स्वसहायता समूह’ से जुड़ीं। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती थी, लेकिन समूह और ग्राम संगठन से मिले वित्तीय सहयोग ने उनकी राह आसान कर दी। समूह से प्राप्त ऋण और अनुदान की मदद से उन्होंने अगरबत्ती बनाने की मशीन खरीदी और व्यवस्थित उत्पादन शुरू किया। इसके बाद बैंक से एक लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर उन्होंने अपने कारोबार का और विस्तार किया। इन उत्पादों से हो रही है बंपर कमाई         स्थानीय बाजार की मांग और अपनी रुचि को ध्यान में रखते हुए श्रीमती सोरी ने कई आजीविका गतिविधियों को एक साथ अपनाया है। वर्तमान में वे मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती और साबुन निर्माण, निरमा, गुलाल और मोमबत्ती, गोबर के दीये और चूड़ी निर्माण संबंधी उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। वार्षिक आय हुई डेढ़ लाख रुपये           बिहान योजना से जुड़ने से पहले उनका परिवार मुख्य रूप से कृषि और मजदूरी पर निर्भर था, जिससे वार्षिक पारिवारिक आय महज 52 हजार रुपये थी। लेकिन स्वरोजगार के नए साधन विकसित होने से अब उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये हो गई है। नियमित आमदनी होने से न केवल परिवार की दैनिक जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं, बल्कि आर्थिक स्थिति भी बेहद मजबूत हुई है।            श्रीमती दिनेश्वरी की यह सफलता आज ग्रामीण इलाके की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने और मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रोजगार, डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास की दिशा में तीन महत्वपूर्ण पहल

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मंत्रालय महानदी भवन में रोजगार, डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास के क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री  साय ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में चयनित युवा उप अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। नागरिकों तक शासकीय डिजिटल सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यापक और सुविधाजनक बनाने के लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू किया गया। साथ ही नवा रायपुर में प्रस्तावित नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटन का पत्र सौंपा गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर, नागरिकों को सरल और पारदर्शी शासकीय सेवाएं तथा नई पीढ़ी को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कौशल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार रोजगार सृजन, कौशल विकास, डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक अधोसंरचना को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ नागरिकों तक आसानी और समयबद्धता के साथ पहुंचे। तकनीक के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम की जा रही है। वहीं युवाओं को सरकारी सेवाओं के साथ उद्योग, निजी क्षेत्र, उद्यमिता और कौशल आधारित रोजगार के लिए भी तैयार किया जा रहा है। नवा रायपुर के निर्माण में युवा अभियंताओं की होगी महत्वपूर्ण भूमिका मुख्यमंत्री  साय ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में उप अभियंता के पद पर चयनित युवा अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने नवनियुक्त अभियंताओं के अभिभावकों को भी बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवा रायपुर भविष्य के छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं का शहर है। यहां आधुनिक अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाओं और योजनाबद्ध विकास को निरंतर विस्तार दिया जा रहा है। नवनियुक्त अभियंताओं को इस आधुनिक शहर के निर्माण और विकास में योगदान देने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। उन्होंने युवा अभियंताओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और तकनीकी दक्षता का उपयोग जनहित में करते हुए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। विभिन्न विभागों में नियमित भर्तियां की जा रही हैं और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया गया है। सभी युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं हो सकतीं, इसलिए राज्य सरकार उद्योग, निजी क्षेत्र, उद्यमिता, स्टार्टअप और कौशल विकास के माध्यम से भी व्यापक अवसर तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति 2024-30 में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत अब तक 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों के एमओयू हुए हैं और अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है। आने वाले वर्षों में लगभग पौने दो लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्योगों के लिए औद्योगिक नीति में विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से पारदर्शी चयन प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। गरीब, किसान और सामान्य परिवारों के बच्चे अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर चयनित होकर आगे बढ़ रहे हैं। भर्ती प्रक्रियाओं को और गति देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का भी गठन किया गया है। डिजिटल गवर्नेंस को नई गति, चिप्स और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। चिप्स की ओर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मयंक अग्रवाल तथा कॉमन सर्विस सेंटर स्पेशल पर्पस व्हीकल की ओर से स्टेट हेड  जय नारायण पटेल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के माध्यम से सेवा सेतु पोर्टल पर उपलब्ध नागरिक-केंद्रित सेवाओं को कॉमन सर्विस सेंटर के डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाएगा। इसी तरह कॉमन सर्विस सेंटर पर उपलब्ध सेवाओं को सेवा सेतु से जोड़ने की दिशा में कार्य होगा। इससे नागरिकों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता कम होगी और अधिक सेवाएं उनके नजदीकी केंद्रों पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। कॉमन सर्विस सेंटर और सेवा सेतु केंद्रों की पहचान को नागरिकों के लिए अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से इन केंद्रों पर एकरूप ब्रांडिंग और साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। केंद्रों पर उपलब्ध प्रमुख सेवाओं की जानकारी भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अंतिम छोर तक शासकीय सेवाएं पहुंचाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर के ग्राम स्तरीय उद्यमी नेटवर्क और सेवा सेतु केंद्रों का समन्वित उपयोग किया जाएगा। 16 हजार से अधिक सेवा सेतु केंद्र, 54 लाख से अधिक आवेदन वर्तमान में सेवा सेतु के माध्यम से 38 विभागों की 907 सेवाएं 16,619 केंद्रों के जरिए ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु पोर्टल पर 54 लाख 23 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 90 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निराकरण किया गया है। प्रदेश में 28,450 सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी 600 से अधिक शासकीय एवं व्यावसायिक सेवाएं नागरिकों को प्रदान की जा रही हैं। एमओयू के बाद सेवा सेतु की 907 शासकीय सेवाओं की पहुंच सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों तक भी विस्तारित होगी। इससे विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को अपने नजदीक ही अधिक सेवाएं प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। एक हजार से अधिक सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा सेतु को नागरिक सेवाओं के एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार की सेवाओं के साथ केंद्र सरकार की 166 सेवाओं को भी इससे जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इससे एक हजार से अधिक सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि … Read more

फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि: सीएम योगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति और असली पहचान ऊंची इमारतों से नहीं होती। समाज की प्रगति उस व्यवस्था में होती है, जहां शासन की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मजबूती से पहुंचता है। यही सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार इसी सूत्र पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि में जल्द ही फिर वृद्धि किए जाने की घोषणा की। उन्होंने सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं। सीएम योगी बुधवार को सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 509 लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, स्मार्टफोन, स्मार्टकेन, ब्रेल किट सहित विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में 12 वर्षों में देश में बिना भेदभाव शासन की योजनाओं का समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्तियों तक पहुंचा है। डबल इंजन सरकार ने किसी भी योजना में व्यक्ति, मत, मजहब, क्षेत्र, भाषा आदि का कभी भेदभाव नहीं किया। सिर्फ एक लक्ष्य रहा- सबका साथ और सबका विकास। सबका विश्वास और सबका प्रयास।  पीएम मोदी जैसा योजक तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कहा गया है, ‘अयोग्यो पुरुषो नास्ति’। यानी, हमारी संस्कृति में किसी भी व्यक्ति को अधूरा नहीं माना गया है। भारतीय मनीषा कहती है कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता। अगर कोई किसी को अयोग्य कहता है तो इसका मतलब यह है कि कोई योजक नहीं है। जब देश में प्रधानमंत्री मोदी जी जैसा योजक है तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता है। उनके नेतृत्व में जरूरतमंदों को आवास, शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन, पेंशन, युवाओं को रोजगार-नौकरी उपलब्ध कराई गई। केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर व्यक्ति का स्वावलंबन और सबके जीवन में खुशी लाना है।  जल्द बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन राशि सीएम योगी ने दिव्यांगजन कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि जल्द ही उनकी पेंशन धनराशि में एक बार फिर वॄद्धि की जाएगी। पहले दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन मिलती थी। सरकार ने इसे पहले 500 और फिर 1000 रुपये किया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर बढ़ोतरी की जाएगी।   सभी मंडलों में संचालित होंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में यह केंद्र शुरू हो चुका है। उन्होंने गोरखपुर में स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक एवं बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र का उल्लेख किया। कहा कि नॉर्मल कैंपस में आश्रय एवं प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और बचपन डे केयर सेंटर भी संचालित हैं। दिव्यांगजन के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में शिविर सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर सरकार का जोर है। इसी क्रम में तीन से सात वर्ष के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों को सीएम युवा, पीएम स्वनिधि, ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट पर छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो प्रतिभा अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकती है। उन्होंने महान ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के साथ पैरालंपिक खिलाड़ियों दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र, भाविना पटेल, वैभव गौतम, प्रवीण कुमार, प्रीति पाल आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, बल्कि मजबूत हौसले से जीते जाते हैं। इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए। पीएम मोदी ने किया दृष्टि बदलने का प्रयास सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग कर समाज की ‘दृष्टि’ बदलने का प्रयास किया। यह दृष्टि बताती है कि डबल इंजन सरकार दिव्यांगजन को अधिकार और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दृष्टि से ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां दिव्यांगजन के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं। साढ़े नौ वर्षों में आया अभूतपूर्व बदलाव: नरेंद्र कश्यप कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साढ़े नौ वर्षों के दौरान दिव्यांगजन के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उन्होंने दिव्यांगजन से जुड़ी हर योजना के लिए समुचित बजट देकर अपनी संवेदनाएं दिखाई हैं। पीडीए का ढिंढोरा पीटने वाली सपा जब सत्ता में थी तब दिव्यांगजन विभाग का बजट महज 665 करोड़ रुपये था। जबकि सीएम योगी की उदारता से वर्ष … Read more

उमरिया को जल्द ही मिलेगी बड़ी फूड प्रोसेसिंग यूनिट की सौगात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के साथ अनेक जनहितैषी निर्णय लिए हैं। किसानों को नई तकनीक का लाभ दिया जा रहा है। उमरिया जिला कोयला भंडारों के लिए प्रसिद्ध है, जिसे काला सोना भी कहते हैं। यहां स्थित बांधवगढ़ किला मध्यप्रदेश की शान है। उमरिया जिला प्राकृतिक औषधि और वन्यजीव संपदा से समृद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उमरिया जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री  नरेंद्र शिवाजी पटेल, किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष  जयपाल सिंह चावड़ा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले के किसानों को उपज का समुचित मूल्य दिलवाने के लिए नई कृषि तकनीक और खाद्य प्रसंस्करण को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तम खेती के लिए सिंचाई सुविधाएं बेहद जरूरी है। इसीलिए राज्य सरकार ने हर गांव और हर खेत को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान धान और अन्न फसलों के उपार्जन के लिए समय रहते पंजीयन कराएं, ताकि एमएसपी का लाभ मिलता रहे। उन्होंने कहा कि इसी सीजन से किसानों को दिन में भी 10 घंटे बिजली मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला प्रशासन को किसान चौपाल लगाकर हितग्राहियों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं किसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान गोपालन, दूध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यानिकी फसलों और जैविक-प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं। उन्होंने उमरिया के किसानों को बताया कि शीघ्र ही जिले में एक बड़ी फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होगी। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला प्रशासन को पंचायत स्तर पर दुग्ध संकलन समितियों के पंजीयन कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कस्टम हायरिंग सेंटर और सोलर पंप जैसी कृषक कल्याण योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सेवा कार्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश में सेवा से संकल्प अभियान जारी है। राज्य सरकार जिलों में जन विश्वास अभियान के जरिए भी पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दे रही है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्र के अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री करवाई जा रही है। किसानों को भी इस स्वामित्व योजना का लाभ मिल रहा है। संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री मिलने से हितग्राही बैंक लोन और अन्य आवश्यकताओं के लिए इसे उपयोग कर पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षित और समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने के लिए राज्य सरकार स्कूली बच्चों को कई सौगातें दे रही है। शासकीय स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी दी गई हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस और साइकिलें वितरित की जा रही हैं। प्रदेशभर में सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बलराम कृषि महोत्सव के लिए उमरिया में उपस्थित मंत्री  नागर सिंह चौहान और पूर्व मंत्री सु मीना सिंह से भी संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय जन उपस्थित थे।  

मंत्री सिलावट ने जलाशयों की स्थिति की समीक्षा, अधिक जलभराव वाले बांधों पर निगरानी के निर्देश

मंत्री सिलावट ने की जलाशयों में जलभराव स्थिति की समीक्षा अधिक जलभराव वाले बांधों की सतत निगरानी और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के दिये निर्देश भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने प्रदेश में वर्षा एवं जलाशयों में जलभराव की स्थिति की वृहद समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश जलाशयों में जलभराव की स्थिति संतोषजनक है। आगामी रबी सीजन की सिंचाई एवं पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध जल का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अधिक जलभराव वाले जलाशयों में सतत निगरानी रखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता के आधार पर अभी से जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए। मंत्री सिलावट ने कहा कि प्रदेश में अब तक प्रदेश में कुल 908.30 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो दीर्घावधि औसत 949.50 मिलीमीटर की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत कम है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में 773.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो औसत से 12 प्रतिशत कम है, जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश में 1083.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो औसत से 4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने अधिकारियों को वर्षा की क्षेत्रवार स्थिति को ध्यान में रखते हुए जलाशयों के जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। 54 प्रमुख बांधों में 89.32 प्रतिशत जलभराव प्रदेश के बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के अंतर्गत 54 प्रमुख बांधों में वर्तमान में औसत जलभराव 89.32 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 95.13 प्रतिशत था, जबकि विगत पांच वर्षों का औसत 88.45 प्रतिशत रहा है। वर्तमान में 35 बांध 90 प्रतिशत से अधिक भरे हुए हैं। 9 बांधों में 75 से 90 प्रतिशत, 5 में 50 से 75 प्रतिशत, 4 में 25 से 50 प्रतिशत तथा एक बांध में 10 से 25 प्रतिशत जलभराव है। मंत्री सिलावट ने 90 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले 35 बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बांध में जलस्तर, पानी की आवक और निकासी की नियमित समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता के अनुसार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जल प्रबंधन किया जाए। बांधों के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दलों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए। कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए विशेष जल प्रबंधन मंत्री सिलावट ने पश्चिमी मध्यप्रदेश में औसत से कम वर्षा को देखते हुए उज्जैन तथा नर्मदा-ताप्ती बेसिन में उपलब्ध जल की विशेष समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में सिंचाई, पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए उपलब्ध जल का बेसिनवार एवं परियोजनावार जल बजट तैयार किया जाए। किसानों को सिंचाई के लिए संभावित जल उपलब्धता की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा में बताया गया कि बेसिनवार जलभराव की स्थिति में गंगा बेसिन 99 प्रतिशत, यमुना बेसिन 94 प्रतिशत तथा नर्मदा बेसिन 95 प्रतिशत है। चंबल-बेतवा एवं सागर बेसिन में 82-82 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 81 प्रतिशत, वैनगंगा में 80 प्रतिशत, उज्जैन में 71 प्रतिशत तथा नर्मदा-ताप्ती बेसिन में 57 प्रतिशत औसत जलभराव दर्ज किया गया है। मंत्री सिलावट ने अधिकारियों से कहा कि मानसून समाप्त होने के बाद जलाशयों, बांधों, नहरों एवं जल वितरण प्रणालियों का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव की कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में स्थानीय जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

राजा वड़िंग की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष? पायलट की रिपोर्ट पर कांग्रेस हाईकमान लेगा फैसला

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में अगले 48 घंटे के बीच बड़ा बदलाव हो सकता है। इसको लेकर दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से लेकर पंजाब तक हलचल तेज है। कांग्रेस हाईकमान से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक पंजाब में पार्टी प्रभारी सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद ये बदलाव होगा।  कांग्रेस के भीतरी सोर्सेज के मुताबिक यह बदलाव पार्टी प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग को लेकर हो सकता है लेकिन अभी तक इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। पायलट ने हाल ही में यूथ कांग्रेस और जिला प्रधानों से दिल्ली में मीटिंग कर इसका फीडबैक लिया था। पायलट ने राहुल-खरगे को सौंपी फीडबैक रिपोर्ट पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर संगठन को लेकर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पंजाब कांग्रेस को लेकर अहम बैठक हुई. बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट मौजूद रहे. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राहुल गांधी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है।  संगठन के भीतर चल रही खेमेबाजी और नेताओं के बीच मतभेद को लेकर फीडबैक दिया गया है. रिपोर्ट में प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली का भी जिक्र है. सूत्रों के मुताबिक, सचिन पायलट की रिपोर्ट में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर भी फीडबैक दिया गया है. रिपोर्ट में संगठन के कामकाज, नेताओं के बीच समन्वय और प्रदेश नेतृत्व को लेकर सामने आई बातों का उल्लेख किया गया है।  चन्नी खेमे की शिकायतों को भी रिपोर्ट में जगह सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चरणजीत सिंह चन्नी खेमे की ओर से उठाई गई शिकायतों और आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है. चन्नी खेमे की ओर से प्रदेश संगठन और नेतृत्व को लेकर जो बातें हाईकमान के सामने रखी गई थीं, उन्हें भी पायलट के फीडबैक में शामिल किए जाने की जानकारी है. पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग खेमों के बीच मतभेद की स्थिति रही है. हाल में सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग एक ही मंच पर नजर आए थे।  रिपोर्ट के बाद अब हाईकमान के फैसले पर नजर सूत्रों के मुताबिक, पायलट की रिपोर्ट में पंजाब कांग्रेस की जमीनी स्थिति से लेकर संगठन के अंदरूनी समीकरणों तक का फीडबैक शामिल है. अब निगाह इस बात पर है कि पायलट की रिपोर्ट और राहुल गांधी-खरगे के साथ हुई चर्चा के बाद पंजाब कांग्रेस के संगठन को लेकर हाईकमान क्या कदम उठाता है।  PM मोदी का दो दिवसीय चिंतन शिविर शुरू, सुधारों पर होगा मंथन पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व के लिए संगठन के भीतर समन्वय और सामूहिक नेतृत्व अहम मुद्दा बना हुआ है. पायलट पहले ही कह चुके हैं कि कांग्रेस पंजाब चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी और राहुल गांधी चुनाव अभियान का चेहरा होंगे।   

36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के कलाकारों को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने का बड़ा मौका दे रही है। राज्य ललित कला अकादमी (संस्कृति विभाग) की ओर से '36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27' का आयोजन किया जा रहा है। इसमें चित्र, रेखांकन, ग्राफिक यानी छापा कला, मूर्ति, पोर्ट्रेट यानी व्यक्ति चित्र-मूर्ति, वॉश और पारंपरिक कला विधाओं में कलाकार अपनी कृतियां भेज सकेंगे। प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए प्रविष्टि शुल्क और छायाचित्र जमा करने की प्रक्रिया पहली अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगी। अकादमी की ओर से प्रदर्शनी में चयनित अति विशिष्ट कृतियों के लिए 10 कलाकारों को 25-25 हजार रुपये, प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न दिए जाएंगे। प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए 300 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। शुल्क निदेशक राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश के नाम नकद, मनीऑर्डर या लखनऊ में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है। विवरण पत्र यानी शेड्यूल, छायाचित्र, जीवन परिचय और पोट्रेट से संबंधित सामग्री कलाकार स्वयं या उचित माध्यम से अकादमी के पते पर भेज सकते हैं। एक कलाकार केवल एक ही विधा में भाग ले सकेगा। आवेदन अकादमी द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर ही करना होगा। चयन के पहले चरण में आवेदन के साथ भेजे गए छायाचित्रों के आधार पर कृतियों का चयन होगा और दूसरे चरण में चयनित कृतियों में से पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा। 1 अक्टूबर 2025 के बाद बनाई गई कृतियां ही इस प्रदर्शनी के लिए स्वीकार की जाएंगी। ऐसी कृति स्वीकार नहीं की जाएगी जो पहले किसी राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदर्शित हो चुकी हो। छायाचित्र 5×7 इंच के दो-दो स्पष्ट रंगीन फोटो के रूप में भेजने होंगे। फोटो के पीछे केवल कृति का शीर्षक, माध्यम, मूल्य और निर्माण वर्ष लिखा जाना चाहिए। निर्धारित आकार से छोटा फोटो या अतिरिक्त जानकारी लिखे होने पर उसे अस्वीकार किया जा सकता है। चित्र का अधिकतम आकार 4×4 फीट और मूर्ति का अधिकतम आकार 4×4×4 फीट, जबकि मूर्ति का न्यूनतम आकार 2×2 फीट निर्धारित है। मूर्तियां धातु, लकड़ी, पत्थर और फाइबर ग्लास जैसे टिकाऊ पदार्थों की होनी चाहिए।  छायाचित्रों के चयन के बाद अकादमी की ओर से चयनित कृति भेजने के लिए कलाकारों को अलग से सूचना दी जाएगी। कलाकार अपनी ओर से सीधे कृति अकादमी को नहीं भेज सकेंगे, जब तक अकादमी की ओर से उसे आमंत्रित न किया जाए। निर्धारित समय में कृति अकादमी को नहीं पहुंचने पर उसे प्रदर्शनी और कैटलॉग में शामिल नहीं किया जाएगा। चयन एवं निर्णायक समिति का निर्णय अंतिम होगा। सभी पर ‘अन्तर्वस्तु 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27, लखनऊ के लिए है’ लिखना होगा। प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों को एक-एक निशुल्क कैटलॉग भी दिया जाएगा। चयनित कृति को प्रदर्शनी समाप्त होने से पहले हटाने की अनुमति नहीं होगी। प्रदर्शनी से संबंधित आवेदन और पत्राचार राज्य ललित कला अकादमी, लाल बारादरी भवन, ललित कला अकादमी मार्ग, कैसरबाग, लखनऊ-226001 के पते पर किया जा सकता है। अकादमी का दूरभाष 0522-2616033 और ईमेल slka_up@yahoo.com है।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ही कलाकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन देना योगी सरकार की प्राथमिकता है। राज्य ललित कला अकादमी के माध्यम से युवा, उभरते, स्थापित और वरिष्ठ कलाकारों को प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी प्रदेश के कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा सामने लाने और राज्य स्तर पर पहचान बनाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले कलाकार भी कला गतिविधियों से जुड़ें और उन्हें प्रशिक्षण, प्रदर्शन, पुरस्कार व आर्थिक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

हरियाणा BJP विधायकों की PM मोदी से मुलाकात, 3 अक्टूबर को दिल्ली में होगा कार्यक्रम

चंडीगढ़  हरियाणा की राजनीति में 3 अक्टूबर का दिन भाजपा के लिए अहम रहने वाला है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता की अगुवाई में पार्टी के सभी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ विधायकों की यह मुलाकात दोपहर 3 बजे प्रस्तावित है। इसके लिए प्रदेश भाजपा ने विधायकों को दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री से मुलाकात से करीब एक घंटे पहले दोपहर 2 बजे सभी विधायक हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ लंच करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सभी विधायक प्रधानमंत्री से मिलने जाएंगे। एक साथ होने वाली इस मुलाकात को सरकार और संगठन के बीच समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायकों के साथ प्रधानमंत्री की सीधी बातचीत का कार्यक्रम मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के भाजपा विधायकों से सीधे संवाद कर सकते हैं। हालांकि, बैठक का विस्तृत एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आने की संभावना है। मुख्यमंत्री नायब सैनी की अगुवाई में भाजपा सरकार के कार्यों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी प्रधानमंत्री के समक्ष जानकारी रखे जाने की संभावना है। लंच से लेकर प्रधानमंत्री मुलाकात तक सियासी मायने विधायकों का पहले हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री के साथ एक साथ बैठना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। विधानसभा के भीतर और अपने-अपने क्षेत्रों में विधायकों की भूमिका, जनता से जुड़े मुद्दों और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री के साथ अनौपचारिक चर्चा का अवसर मिलेगा। इसके बाद प्रधानमंत्री के साथ सामूहिक मुलाकात से केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश सरकार और विधायकों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा। हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब पार्टी सरकार और संगठन के स्तर पर अपने कामकाज को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में 3 अक्टूबर का कार्यक्रम केवल शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित रहने के बजाय प्रदेश के राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर संवाद का अवसर भी बन सकता है।  

बिहार में ₹6,282 करोड़ की कोसी-मेची परियोजना, 39,548 हेक्टेयर खेतों को मिलेगा सिंचाई का पानी

किशनगंज  कोसी नदी में मानसून के दौरान तबाही मचाने वाले अतिरिक्त पानी को सीमांचल के खेतों की प्यास बुझाने के काम में लाने वाली महत्वाकांक्षी 'कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक परियोजना' अब धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। किशनगंज जिले में परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर कुल 571 एकड़ भूमि चिह्नित कर ली गई है। इसमें 552 एकड़ रैयती (निजी) भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जबकि 19 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है। भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा बहादुरगंज अंचल से अधिग्रहित किया जाएगा। परियोजना की कार्ययोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित नहर प्रणाली के जरिए महानंदा नदी बेसिन तक पहुंचाया जाना है। 117.50 किलोमीटर लंबी इस लिंक नहर का अंतिम छोर किशनगंज जिले के माखनपुर गांव के समीप मेची नदी में होगा। कोसी से निकला पानी नहर के रास्ते किशनगंज पहुंचेगा और मेची नदी में विसर्जित होकर महानंदा नदी तंत्र का हिस्सा बन जाएगा। बहादुरगंज अंचल में सबसे अधिक 454 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण प्रशासन द्वारा तैयार किए गए भूमि विवरणी के अनुसार, बहादुरगंज अंचल में सर्वाधिक 454 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जिसमें 13 एकड़ सरकारी जमीन है। इसके अलावा टेढ़ागाछ अंचल में 99 एकड़ (3 एकड़ सरकारी) और ठाकुरगंज अंचल के एक गांव में 17 एकड़ (2 एकड़ सरकारी) भूमि अधिग्रहण के दायरे में आएगी। कोसी-मेची लिंक परियोजना     चिह्नित कुल भूमि: 571 एकड़ (552 एकड़ निजी + 19 एकड़ सरकारी)।     अंचलवार भूमि विवरण:         बहादुरगंज अंचल: 454 एकड़ (13 एकड़ सरकारी)।         टेढ़ागाछ अंचल: 99 एकड़ (3 एकड़ सरकारी)।         ठाकुरगंज अंचल: 17 एकड़ (2 एकड़ सरकारी)।     नहर की संरचना (कुल लंबाई 117.50 किमी):         भाग-1: वीरपुर बराज से फारबिसगंज तक पूर्वी कोसी मुख्य नहर (41.30 किमी) का विस्तार।         भाग-2: फारबिसगंज से किशनगंज के माखनपुर तक नई नहर (76.20 किमी)।     अंतिम पड़ाव: किशनगंज का माखनपुर गांव (मेची नदी संगम)।     लागत व समय-सीमा: अनुमानित 6,282.32 करोड़ रुपये (केंद्र अंशदान ₹3,652.56 करोड़); मार्च 2029 तक लक्ष्य।     लाभान्वित प्रखंड (किशनगंज): टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन। 41.30 किमी पुरानी नहर का विस्तार, 76.20 किमी बनेगी नई नहर कोसी-मेची लिंक परियोजना को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। पहले हिस्से में वीरपुर बराज से फारबिसगंज तक पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) के 41.30 किलोमीटर हिस्से का जीर्णोद्धार और क्षमता विस्तार होगा। इसके बाद फारबिसगंज से लेकर किशनगंज के माखनपुर तक 76.20 किलोमीटर लंबी पूरी तरह नई नहर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के जरिए पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल वहन क्षमता को 15 हजार क्यूसेक से बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक किया जाएगा। किशनगंज के 4 प्रखंडों में 39,548 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित इस परियोजना से किशनगंज जिले के चार प्रमुख प्रखंडों—टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। जिले के 39,548 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सालोंभर सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा उपलब्ध होगी। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए चार मुख्य शाखा नहरों और छह वितरणियों (डिस्ट्रीब्यूटरी) का विस्तृत नेटवर्क बिछाया जाएगा। बाढ़ प्रबंधन के साथ 2.14 लाख हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य मानसून के दौरान कोसी नदी से लगभग 2,050 मिलियन क्यूबिक मीटर अतिरिक्त बाढ़ के पानी को डायवर्ट कर सीमांचल भेजा जाएगा। इससे कोसी क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका कम होगी और अररिया, पूर्णिया, किशनगंज व कटिहार जिलों के 2,14,813 हेक्टेयर खेतों को पानी मिलेगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) में शामिल इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार 3,652.56 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है। इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिले में कोसी-मेची लिंक परियोजना के फेज-टू के तहत भूमि अधिग्रहण की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसका औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा गया है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही नहर निर्माण का कार्य तेजी से शुरू कराया जाएगा। — नवीन कुमार, जिलाधिकारी, किशनगंज