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मानव तस्करी पर सख्ती: पुलिस मुख्यालय में राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित

मानव दुर्व्‍यापारके विरुद्ध प्रभावी विवेचना, समन्वय एवं पुनर्वास को लेकर पुलिस मुख्यालय में एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीड़ित-केंद्रित जांच, अंतरराज्यीय समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई पर दिया गया विशेष बल भोपाल  महिला सुरक्षा शाखा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय के नवीन भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में "Capacity Building Seminar on Investigation & Response to Human Trafficking Cases" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के अधिकारी, महिला अपराधों की विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का शुभारंभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा)अनिल कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मानव दुर्व्‍यापारएक बहुआयामी एवं संगठित अपराध है, जिसकी प्रभावी रोकथाम केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हो सकती। उन्होंने जागरूकता, रोकथाम, बचाव एवं पुनर्वास को मानव दुर्व्‍यापारनिरोधक तंत्र के चार प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि पुलिस, अन्य विभागों एवं समाज के समन्वित प्रयासों से ही इस अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने सभी जिलों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को और अधिक सक्रिय बनाते हुए लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा तथा पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। उप पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती सिमाला प्रसाद ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की भूमिका, सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा मानव दुर्व्‍यापारकी संवेदनशील एवं प्रभावी विवेचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गुमशुदगी के प्रकरण में मानव दुर्व्‍यापारकी आशंका का गंभीरता से परीक्षण कर पूरे नेटवर्क का पता लगाना आवश्यक है। उन्होंने घटना के बाद पहले 48 घंटे को "गोल्डन आवर" बताते हुए त्वरित कार्रवाई, पीड़ित-केंद्रित एवं निष्पक्ष विवेचना, जनजागरूकता तथा मानव दुर्व्‍यापारसे जुड़े अपराधियों का व्यवस्थित डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। डीआईजी डॉ. किरणलताकेरकेट्टा ने "Bridging the Gaps: Strengthening Investigation & Prosecution of Child Trafficking Cases" विषय पर व्याख्यान देते हुए बाल तस्करी के मामलों में सशक्त विवेचना, प्रभावी अभियोजन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। आवाज़ एनजीओ के निदेशक प्रशांत कुमार दुबे ने "Born to Live, Not to be Sold: Address the Trafficking of Newborn and Adolescent Girls"विषय पर व्याख्यान देते हुए मध्यप्रदेश के नवजात शिशुओं एवं किशोरियों की तस्करी, अवैध दत्तक ग्रहण (Illegal Adoption) तथा इससे जुड़े संगठित अपराधों के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ऐसे अपराधों की प्रभावी रोकथाम के लिए संवेदनशील एवं वैज्ञानिक विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई तथा विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), इंदौर डॉ. सीमा अलावा ने भी अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए अवैध दत्तक ग्रहण एवं बाल तस्करी से जुड़े मामलों में साक्ष्य संकलन, पीड़ित-केंद्रित जांच तथा पुलिस, न्यायपालिका एवं संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (IJM) की एडवोकेट तृप्ति पाटिल ने "AHTUs As Guardians of Childhood: Combating Trafficking through Early Intervention" विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि प्रारंभिक हस्तक्षेप, संवेदनशील समुदायों की पहचान तथा समय रहते की गई कार्रवाई से बाल तस्करी की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। कार्यशाला में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एएचटीयू की भूमिका केवल पीड़ित के रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित के सुरक्षित पुनर्वास, काउंसलिंग, संरक्षण, न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग तथा भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संस्थागत समन्वय, त्वरित जांच एवं समयबद्ध विचारण पर दिए गए निर्देशों की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई। प्रत्येक जिले की एएचटीयू को राज्य स्तर पर स्थापित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो (AHTB) के साथ सतत समन्वय बनाए रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी जिलों को लंबित मानव दुर्व्‍यापारप्रकरणों की समीक्षा कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों एवं अपराध के पैटर्न की पहचान कर लक्षित कार्रवाई करने के लिए भी निर्देशित किया गया। महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम सहित अन्य संबंधित विभागों तथा सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ नियमित समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानव दुर्व्‍यापारजैसे संगठित अपराधों की रोकथाम में पुलिस एवं अन्‍यविभागों तथा सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ही प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में नियमित समन्वय बैठकें आयोजित कर सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने तथा लंबित प्रकरणों की सतत समीक्षा किए जाने की आवश्यकता बताई गई। कार्यशाला के दौरान मानव दुर्व्‍यापारके मामलों में पुनर्वास की प्रक्रिया को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि केवल पीड़ित की काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों की भी समुचित काउंसलिंग की जानी चाहिए, ताकि पारिवारिक परिस्थितियों को समझते हुए पीड़ित का सफल एवं स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा) श्रीमती प्रियंका शुक्ला ने सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।  

4 जुलाई से दो दिन के मध्यप्रदेश दौरे पर रहेंगे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, अहम बैठकों का कार्यक्रम

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार दो दिवसीय प्रवास पर 4 जुलाई को आएंगे मध्यप्रदेश इंदौर में जुटेंगे 1500 से अधिक बीएलओ, करेंगे सीधा संवाद इंदौर भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार 4 और 5 जुलाई को दो दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आ रहे हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला मध्यप्रदेश दौरा है। दो दिवसीय दौरे के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त इंदौर में बूथ लेवल ऑफिस से बात करेंगे एवं दूसरे दिन ओंकारेश्वर और महेश्वर के भ्रमण पर रहोगे। इंदौर में जुटेंगे 5 जिलों के 1500 से अधिक बीएलओ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त 4 जुलाई को इंदौर पहुंचेंगे। यहां पर लता मंगेशकर सभागृह में आयोजित बीएलओ कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। इसे दौरान वे इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और खंडवा जिले के 1,500 से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के साथ संवाद करेंगे। उल्लेखनीय है कि ज्ञानेश कुमार देश के ऐसे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर चुनाव व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इससे पहले दिल्ली में भी बीएलओ और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के साथ सीधे संवाद की अनूठी पहल की थी। धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का करेंगे भ्रमण इंदौर में बीएलओ के साथ महत्वपूर्ण बैठक और चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ओंकारेश्वर और महेश्वर जाएंगे। इस दौरान वे ओंकारेश्वर में दर्शन और नर्मदा जी का पूजन करेंगे, जिसके बाद ऐतिहासिक महेश्वर किले का भी भ्रमण करेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सायंकाल इंदौर से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।  

बालाघाट बाढ़: फंसे ग्रामीणों के लिए देवदूत बनी मध्यप्रदेश पुलिस, सुरक्षित निकाले गए लोग

बालाघाट में बाढ़ में फंसे ग्रामीणों के लिए मध्यप्रदेश पुलिस बनी जीवनरक्षक 16 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया किरनापुर पुलिस, हट्टा पुलिस, एसडीआरएफ एवं हॉक फोर्स के संयुक्त अभियान से खेतों में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला वर्षा के मौसम में सावधानी रखने की अपील बालाघाट प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा के बीच मध्यप्रदेश पुलिस आपदा की प्रत्येक स्थिति में आमजन की सुरक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में बालाघाट जिले के थाना किरनापुर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे 16 ग्रामीणों का पुलिस, एसडीआरएफ एवं हॉक फोर्स के संयुक्त अभियान के माध्यम से सफलतापूर्वक सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा के कारण थाना किरनापुर क्षेत्र के ग्राम भानपुर में खेतों पर कृषि कार्य करने गए लगभग 16 ग्रामीण अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण चारों ओर से बाढ़ के पानी में घिर गए। नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से उनके वापस लौटने का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और सभी ग्रामीण बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही थाना किरनापुर पुलिस ने बिना विलंब किए थाना हट्टा पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) एवं हॉक फोर्स की टीम के साथ संयुक्त रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। तेज बहाव एवं विषम परिस्थितियों के बावजूद टीम ने साहस, सूझबूझ और उत्कृष्ट समन्वय का परिचय देते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर सभी 16 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाला तथा सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। समय पर की गई त्वरित कार्रवाई के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। जनसुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की अपील मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि लगातार वर्षा के दौरान नदी-नालों, पुल-पुलियों एवं जलमग्न मार्गों को पार करने का प्रयास न करें। खेतों अथवा अन्य स्थानों पर जाने से पूर्व मौसम एवं जलस्तर की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा प्रशासन एवं पुलिस द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूर्णतः पालन करें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस द्वारा आवश्यक बैरिकेड एवं सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। आमजन से अनुरोध है कि प्रतिबंधित मार्गों से आवागमन न करें तथा किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल डायल-112 अथवा निकटतम पुलिस थाने को सूचना दें। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशवासियों की सुरक्षा के लिए 24*7 सतर्क एवं प्रतिबद्ध है तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्यरत है।  

मध्यप्रदेश में तबादला एक्सप्रेस: 9 IPS अफसरों के ट्रांसफर, जानें किसे मिली कौन-सी नई जिम्मेदारी

भोपाल  प्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात नौ IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए। रुचिवर्धन मिश्र पुलिस महानिरीक्षक भोपाल ग्रामीण जोन होंगी। वहीं, हरिनारायण चारी अब पुलिस मुख्यालय में एससीआरबी के स्थान पर प्रशासन का दायित्व संभालेंगे‌। शहडोल के पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव की जगह कुमार अग्रवाल और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के स्थान पर प्रियंका शुक्ला को भेजा गया है।गृह विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार चंद्रशेखर सोलंकी पुलिस महानिरीक्षक विशेष सत्र बल इंदौर रेंज को पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम जोन बनाया है। यशपाल सिंह राजपूत पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर और रामजी श्रीवास्तव सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस अकादमी भौंरी होंगे। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन आदर्श कटियार को दूरसंचार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं, अनुराग पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन के पास पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल और आइएपीटीसी इंदौर का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद कुमार तिवारी पुलिस अधीक्षक इंदौर रेल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे। भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर को मिली नई जिम्मेदारी इस फेरबदल में सबसे बड़ा नाम भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र का है. उन्हें अब पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रुचिवर्धन मिश्र को भोपाल (ग्रामीण) जोन की कमान सौंपी गई है. वह अपनी कार्यशैली के लिए भी प्रसिद्ध रहे हैं. चंद्रशेखर सोलंकी नर्मदापुरम जोन के आईजी बनाए गए हैं. वहीं सिमाला प्रसाद को खरगोन रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा मिथिलेश शुक्ला को सागर जोन की कमान मिली है।  इन जिलों के बदले गए एसपी (SP) गृह विभाग द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार शहडोल और शाजापुर जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदल दिया गया है. प्रियंका शुक्ला को अब शाजापुर का नया एसपी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले के एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  किस IPS को मिली कौन-सी जिम्मेदारी शासन स्तर पर हुए बड़े फेरबदल को आगामी कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।  किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी: चंद्रशेखर सोलंकी: इन्हें आईजी, नर्मदापुरम ज़ोन की जिम्मेदारी दी गई है. मिथिलेश शुक्ला: इन्हें आईजी, सागर जोन का नया कमान संभाला गया है. सिमाला प्रसाद: इन्हें डीआईजी (DIG), खरगोन रेंज के पद पर नियुक्त किया गया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर रहे हरिनारायण चारी मिश्र PHQ में IG (प्रशासन) बने हैं. रुचिवर्धन मिश्र को IG, भोपाल (ग्रामीण) जोन की जिम्मेदारी दी गई है. प्रियंका शुक्ला को एसपी, शाजापुर की जिम्मेदारी मिली है. संजय कुमार अग्रवाल एसपी, शहडोल बनाए गए हैं.

PM मोदीआज करेंगे जोधपुर के नए टर्मिनल ‘खास महल’ का उद्घाटन, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

जोधपुर राजस्‍थान के जोधपुर शहर में एक ‘खास महल’ तैयार हुआ है. इस खास महल की भव्‍यता किसी राजमहल से कम नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को इसका उद्घाटन करने वाले हैं. जी हां, यहां पर हम बात जोधपुर के नए एयरपोर्ट की कर रहे हैं. करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से बने इस नए एयरपोर्ट की क्षमता हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने की है. इसका डिजाइन राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित है, जिसमें मेहराब और झरोखों का खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है. वर्ल्‍ड क्‍लास सुविधाओं से लैस यह टर्मिनल जोधपुर के पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई रफ्तार देने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  इसी एयरपोर्ट से मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम की शुरूआत करने जा रहे है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई 2026 की सुबह करीब 10:45 बजे वह जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देश में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम भी लॉन्च करेंगे। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। वर्ल्‍ड क्‍लाइस सुविधाओं से लैस यह एयरपोर्ट पैसेंजर्स के ट्रैवल एक्‍सपीरियंस को बेहतर बनाने के मकसद से डिजाइन किया गया है।  23 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल हर साल करीब 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इसमें आधुनिक चेक-इन सिस्टम, बेहतर वेटिंग एरिया, सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा के लिए कई नई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। एयरपोर्ट में दिखेगी शहर की एतिहासिक झलक: जोधपुर के नए एयरपोर्ट टर्मिनल का डिजाइन शहर की ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  इसकी प्रेरणा 1931 में महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा स्थापित 'जोधपुर फ्लाइंग क्लब' और राजपूताना स्थापत्य कला से ली गई है। टर्मिनल के इंट्री गेट पर विशाल नक्काशीदार गुंबद, कमल कलश, मेहराब और ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। टर्मिनल के अंदर स्थानीय कलाकारों की बनाई गई कलाकृतियां लगाई गई हैं. इनमें मरुधरा के पारंपरिक मोर, राजसी दरबार और मारवाड़ी संस्कृति को आधुनिक अंदाज में दर्शाया गया है। जोधपुर एयरपोर्ट को ऊर्जा बचत, जल संरक्षण और ग्रीन बिल्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसे 5-स्टार GRIHA रेटिंग मिल सके। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल और मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम मिलकर राजस्थान सहित पूरे देश में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे। 

सीएम योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक छलांग

सीएम योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक छलांग जून 2026 में राज्य ने 71,888 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया  घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापना में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, अब महाराष्ट्र को पीछे छोड़ने की तैयारी लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। जून 2026 में राज्य ने 71,888 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह न केवल उत्तर प्रदेश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन है, बल्कि किसी भी राज्य द्वारा एक माह में की गई घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है।    उत्तर प्रदेश में अब तक 10,89,716 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं तथा 6,36,745 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना पूरी की जा चुकी है। उत्तर प्रदेश लगातार कई महीनों से देश में सर्वाधिक मासिक स्थापनाएं दर्ज कर रहा है और घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में देश का सबसे तेजी से उभरता हुआ राज्य बन गया है।    इस वर्तमान रुझानों को देखते हुए अनुमान है कि जुलाई 2026 के अंत तक उत्तर प्रदेश कुल घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं में महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर देश का दूसरा सबसे बड़ा घरेलू रूफटॉप सोलर राज्य बन सकता है। इसके बाद राज्य का अगला लक्ष्य गुजरात को पीछे छोड़ते हुए कुल घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं में भारत का नंबर-1 राज्य बनना है।      घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां भी अभूतपूर्व हैं। राज्य में अब तक 2,148 मेगावाट से अधिक क्षमता स्थापित की जा चुकी है तथा ₹5,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं को वितरित की जा चुकी है। इस क्षेत्र में 7,000 से अधिक कंपनियां और वेंडर्स कार्य कर रहे हैं तथा 80,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। राज्य में घरेलू रूफटॉप सोलर से प्रतिदिन लगभग 96 लाख यूनिट निःशुल्क बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित मूल्य ₹6 करोड़ प्रतिदिन से अधिक है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में ₹40 करोड़ से अधिक का दैनिक कारोबार हो रहा है और 9,000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है, जो बड़े पैमाने पर भूमि आधारित विद्युत परियोजनाओं की तुलना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।     उत्तर प्रदेश की यह सफलता जागरूक उपभोक्ताओं, सोलर वेंडर्स, यूपीनेडा, बैंकिंग संस्थानों, डिस्कॉम एवं सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में राज्य की यह तेज प्रगति न केवल स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को भारत की घरेलू रूफटॉप सोलर क्रांति का नया नेतृत्वकर्ता भी बना रही है। मासिक स्थापना में देश का नंबर-1 बनने के बाद अब उत्तर प्रदेश का लक्ष्य कुल घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं में भी भारत का नंबर-1 राज्य बनना है।

57 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड

रायपुर दिव्यांग बच्चों के लिए बलरामपुर में लगा विशेष यूडीआईडी कैंप प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुगमता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष यूडीआईडी अभियान संचालित किया जा रहा है।  इसी कड़ी में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जिला अस्पताल परिसर में विशेष यूडीआईडी कैंप का आयोजन किया गया। कलेक्टर के निर्देशन में आयोजित इस विशेष शिविर का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के लिए विशिष्ट पहचान पत्र तैयार कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना है। जिला चिकित्सालय में आयोजित शिविर में जिले के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे 57 बच्चों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक चिकित्सकीय मूल्यांकन किया गया। परीक्षण उपरांत पात्र बच्चों को नियमानुसार दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड जारी किए गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक पात्र बच्चे का पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय परीक्षण सुनिश्चित करते हुए प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं, उपचार सुविधाओं तथा पुनर्वास सेवाओं का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि यूडीआईडी कार्ड दिव्यांग बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज है, जिसके माध्यम से उन्हें विभिन्न शासकीय सेवाओं और सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी। राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सामाजिक समावेशन, सशक्तिकरण एवं बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना पर हाईकोर्ट का स्टे, 27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

 उज्जैन  मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर निर्मित होने वाला उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे विवादों से बाहर आने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जावरा से लेकर उज्जैन तक किसानों ने इस सड़क का विरोध किया। मजबूरन सरकार ने इसे सामान्य हाईवे बनाने के साथ किसानों को चार गुना मुआवजा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि किसानों को चार गुना मुआवजा मिला नहीं है। वहीं अब मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर स्टे दे दिया है। न्यायालय ने गांव मंगरोला, सोडंग और झिरनिया उन्हेल के किसानों की याचिका पर सुनवाई कर विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इस स्टे पर आगामी सुनवाई 27 जुलाई को होगी। भूमि अधिग्रहण के नियमों का नहीं हो रहा पालन- याचिकाकर्ता याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे। जिन पर प्रशासन द्वारा विधिसम्मत विचार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया। अधिवक्ता विशाल चौहान ने बताया कि उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। अन्य किसानों के लिए हो सकता है फायदा तीन गांवों के किसानों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका लगाने और स्टे मिलने के बाद अन्य किसानों के लिए भी हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। क्योंकि अब भी क्षेत्र के कई किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं सरकार ने चार गुना मुआवजे की घोषणा की थी, परंतु नागदा-खाचरौद विधानसभा के ही कई किसानों को दोगुना मुआवजा ही दिया गया है। यहीं नहीं किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध करने पर प्रशासनिक और पुलिस अमला उन्हें डरा भी रहा है। जिसके कई वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए है। ऐसे में वह किसान जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है और जमीन अधिग्रहण हो रही है, वह भी हाईकोर्ट की शरण ले सकते है।

UP News: CM योगी ने बढ़ाया मानसिक दिव्यांग और निराश्रितों का अनुदान, दिए कई अहम निर्देश

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित लोगों के लिए बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और हाफ वे होम में रहने वाले संवासियों की भरण-पोषण अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने के निर्देश दिए हैं।इस निर्णय का उद्देश्य संस्थागत देखभाल पर निर्भर दिव्यांगजनों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित व्यक्ति पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर आश्रित होते हैं। ऐसे में उनके लिए पौष्टिक भोजन, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित करने के निर्देश बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर तथा अन्य आवश्यक सहायक उपकरण समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उन्हें दैनिक जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए मुख्यमंत्री ने श्रवण बाधित बच्चों की शीघ्र पहचान और कॉक्लियर इंप्लांट के बाद उनके प्रभावी पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ-साथ उनके पुनर्वास और शिक्षा की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों की समयबद्ध नियुक्ति पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की सभी योजनाओं का मूल उद्देश्य दिव्यांगजनों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। इसी अवधि में 34,420 पात्र लाभार्थियों को 43,689 सहायक उपकरण वितरित किए गए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अब तक 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इंप्लांट कराया जा चुका है। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 68 जिलों से 335 बच्चों की पहचान की गई है। इसके अलावा सरकार निश्शुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, विवाह प्रोत्साहन सहायता, दुकान संचालन सहायता तथा रोडवेज बसों में निश्शुल्क यात्रा जैसी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी संचालन कर रही है।  

रिकॉर्ड समय में मरम्मत के बाद तान नदी ब्रिज फिर शुरू, आवागमन बहाल

रायपुर बड़ी राहत : आवाजाही के लिए खुला तान नदी ब्रिज कटघोरा से अंबिकापुर के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कटघोरा-शिवनगर खंड पर गुरसियाँ स्थित तान नदी ब्रिज को मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद आम यातायात के लिए पुनः खोल दिया है। परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए ब्रिज की आवश्यक संरचनात्मक मरम्मत रिकॉर्ड समय में पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही इस मार्ग पर यातायात पुनः पूर्ण क्षमता के साथ सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है। पुल की रेलिंग के बचे कार्य को कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्य मरम्मत कार्य पूरा होने से कटघोरा-अंबिकापुर मार्ग पर आवागमन सामान्य हो गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों तथा भारी वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि एनएचएआई सुरक्षित, निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।