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फायर सेफ्टी में खामियां मिलीं, अंबाला के चमन वाटिका स्कूल के हॉस्टल पर बड़ा एक्शन

 चंडीगढ़  देश-प्रदेश में लगातार सामने आ रही भवन गिरने और आगजनी की घटनाओं से हरियाणा सरकार ने सबक लिया है। खासकर ऐसे भवन, जो पुराने हैं, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुके हैं अथवा जिनमें अग्नि सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हैं, वे जांच के दायरे में हैं। इसके लिए सरकार ने भवनों का सुरक्षा और फायर सेफ्टी ऑडिट आरंभ कर दिया है। इस अभियान की पहली बड़ी कार्रवाई अंबाला के चमन वाटिका स्कूल में हुई है। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर स्थित इस स्कूल परिसर में बने छात्रावासों में फिलहाल विद्यार्थियों के रहने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में सामने आया कि परिसर में अग्निशमन की बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदेश सरकार के निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक स्कूल परिसर में किसी विद्यार्थी को रहने की अनुमति नहीं होगी। चमन वाटिका स्कूल का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि हाल ही में अंबाला में एक भवन गिरा है, जिसमें कई लोग मारे गए। चमन वाटिका का करीब 35 वर्ष पुराना भवन तीन बार बाढ़ का सामना कर चुका है। छात्रावास और स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए यहां छात्राओं के लिए संचालित आवासीय गुरुकुल को मार्च 2026 में बंद कर दिया गया था। गुरुकुल के तत्कालीन प्रबंधन ने चमन वाटिका से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को धोखे में रखकर अक्टूबर 2026 से इसमें दाखिले होने की सूचना प्रसारित की जा रही है, जिसे फायर सेफ्टी विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। अंबाला के अग्निशमन अधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन के पास जो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट है, वह केवल 374.86 वर्ग मीटर के ग्राउंड कवरेज के लिए है, जबकि मौके पर परिसर का वास्तविक कवर क्षेत्र इससे काफी अधिक पाया गया। परिसर के तीन गर्ल्स हास्टल ब्लॉक, मेस और स्विमिंग पूल क्षेत्र मौजूदा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के दायरे में नहीं आते। सरकार ने स्कूल को नया स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही हास्टल और स्कूल भवनों के सक्षम अधिकारी से स्वीकृत नक्शे भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं अग्निशमन विभाग ने साफ कर दिया है कि सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिसर के सभी भवन और वास्तविक क्षेत्र उसके दायरे में होने चाहिए। इसी तरह पुराने अथवा प्राकृतिक आपदा झेल चुके भवनों के लिए संरचनात्मक स्थिरता का प्रमाण भी जरूरी होगा। दिल्ली-अंबाला समेत हालिया घटनाओं के बाद शुरू हुआ सुरक्षा ऑडिट यह संकेत दे रहा है कि सरकार अब संभावित रूप से असुरक्षित भवनों की पहचान कर उन्हें हादसे का कारण बनने से पहले कार्रवाई के दायरे में ला रही है। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले भवनों की जांच पर रहेगा जोर हरियाणा में सुरक्षा ऑडिट की यह कवायद ऐसे समय शुरू हुई है, जब दिल्ली, अंबाला और देश के अन्य हिस्सों में भवन गिरने तथा आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने खासतौर पर स्कूलों, हास्टलों और ऐसे सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जहां बड़ी संख्या में बच्चे और लोग एकसाथ मौजूद रहते हैं। सरकार अब ऐसे भवनों की पहचान और जांच पर जोर दे रही है, जिनकी संरचनात्मक मजबूती संदिग्ध है या जिनमें अग्निरोधी व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। सुरक्षा ऑडिट का उद्देश्य हादसा होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले ही जोखिम वाले भवनों की पहचान करना है।  

आंगन मिलन सेवा में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश

सेवा संकल्प अभियान  आंगन मिलन सेवा में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश बिलासपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मस्तुरी ब्लॉक के ग्राम मनिकचौरी में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समुदाय के लोगों को स्वस्थ हृदय के लिए आवश्यक सावधानियों, संतुलित जीवनशैली और हृदय रोगों से बचाव के उपायों के बारे में स्वास्थ्य शिक्षा एवं जागरूकता प्रदान की गई।       कार्यक्रम के दौरान लोगों को बताया गया कि स्वस्थ हृदय के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त आराम और तनाव से बचाव बेहद जरूरी है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने तथा शरीर में दिखाई देने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने के लिए प्रेरित किया गया। स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने, खान-पान में सावधानी बरतने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का संदेश दिया गया। हृदय रोगों से बचाव के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलावों के महत्व को समझाते हुए समुदाय के लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से ग्रामीण समुदाय तक स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी पहुंचाने और लोगों में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।  

मंगला में सेवा संकल्प अभियान के तहत जल संरक्षण और स्वच्छता गतिविधियां आयोजित

मंगला में सेवा संकल्प अभियान के तहत जल संरक्षण और स्वच्छता गतिविधियां आयोजित बिलासपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मंगला में जल संरक्षण एवं स्वच्छता को लेकर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल स्रोत सुधार, नदी घाट स्वच्छता अभियान, जल चौपाल एवं जल संकल्प जैसी गतिविधियां मंगला (पासीद) एनीकट क्षेत्र में की गईं।     कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत बिल्हा के अध्यक्ष श्री रामकुमार कौशिक तथा श्री सोमेश तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नागरिकों को जल के महत्व और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में कुल 121 नागरिकों ने सहभागिता निभाई। जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण के साथ ही लोगों ने जल की बर्बादी रोकने और भविष्य के लिए जल बचाने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों को जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और स्वच्छ एवं सुरक्षित जल स्रोतों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।     इस अवसर पर सेवा सहकारी समिति पासीद के अध्यक्ष नारोत्तम यादव, उपाध्यक्ष मनोज साहू, ग्राम पंचायत मंगला के सरपंच प्रतिनिधि उमेश खुसरो, पूर्व सरपंच घनश्याम यादव, जल संसाधन निर्माण उपसंभाग बिलासपुर के बी.एम. चौहान तथा उप अभियंता कुमारी श्रुति गौरहा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं नागरिक मौजूद रहे।  

निवेशकों के लिए खुशखबरी, राजस्थान में 4700 से ज्यादा औद्योगिक भूखंडों की ई-लॉटरी

जयपुर राजस्थान में उद्योग लगाने की तैयारी कर रहे निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 का 14वां चरण शुरू हो गया है। राइजिंग राजस्थान के तहत शुरू किए गए इस चरण में प्रदेश के 94 औद्योगिक क्षेत्रों में 4700 से अधिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक भूखंड निवेशकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इच्छुक निवेशक 12 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। भूखंडों का आवंटन 15 अक्टूबर को ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य निवेशकों को बिना लंबी प्रक्रिया के औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराना है। राइजिंग राजस्थान के तहत राज्य सरकार के साथ एमओयू करने वाले निवेशक योजना का लाभ ले सकेंगे। जिन निवेशकों ने अभी तक एमओयू नहीं किया है, वे भी ईएमडी की अंतिम तिथि तक एमओयू कर पात्र बन सकते हैं। भूखंडों का इस तरह से होगा वर्गीकरण इस चरण में 4,116 भूखंड अनारक्षित श्रेणी में रखे गए हैं। इसके अलावा 27 लॉजिस्टिक भूखंड उपलब्ध हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए 168, महिला वर्ग के लिए 167, भूतपूर्व सैनिकों के लिए 95, बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए 124 तथा सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के मृतकों के आश्रितों के लिए 59 भूखंड आरक्षित किए गए हैं। एक आवेदन तो सीधा आवंटन, ज्यादा आवेदन पर ई-लॉटरी रीको की योजना में आवंटन की प्रक्रिया भी स्पष्ट रखी गई है। किसी भूखंड के लिए केवल एक आवेदन प्राप्त होने पर उसे सीधे आवंटित किया जाएगा। वहीं एक ही भूखंड के लिए एक से अधिक आवेदन आने की स्थिति में ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटन होगा। इससे आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया गया है। 13 चरणों में 2335 भूखंड आवंटित, 21 हजार करोड़ का निवेश प्रत्यक्ष आवंटन योजना के 13 चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं। इन चरणों में 2,335 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया गया। रीको के अनुसार, इन भूखंडों के माध्यम से प्रदेश में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 46 हजार से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार सृजन का रास्ता तैयार हुआ है। इसके अलावा 444 भूखंडों का आवंटन अभी प्रक्रियाधीन है, जिनसे 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश की संभावना है निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें योजना का 14वां चरण 28 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर है। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को ई-लॉटरी आयोजित की जाएगी। रीको का कहना है कि योजना के जरिए प्रदेश में औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसरों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

बिहार के शहरों में घटेगा प्रदूषण और गर्मी, मियावाकी तकनीक से बनेंगे माइक्रो-फॉरेस्ट

पटना बिहार के प्रमुख शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और कंक्रीट के जंगलों के कारण उत्पन्न हो रही अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक ठोस कदम उठाया है। शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जापान की प्रसिद्ध 'मियाबाकी' तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है। पानी के अस्थाई छिड़काव जैसे उपायों के बजाय अब प्राकृतिक और स्थाई समाधान के रूप में इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलते ही इस पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। बढ़ते पीएम-10 और हीट वेव से समाधान की पहल बिहार के शहरी क्षेत्रों में धूलकणों (PM-10) की बढ़ती मात्रा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। कंक्रीट के विस्तार से शहरों में सामान्य तापमान पर भी तीखी गर्मी और हीट वेव का अनुभव हो रहा है। पहले अपनाए गए पानी के छिड़काव जैसे तात्कालिक उपाय अपर्याप्त साबित हो रहे थे। इसी समस्या के दीर्घकालिक और स्थाई समाधान के लिए दोनों विभागों ने मियावाकी विधि से सघन पौधरोपण करने की योजना बनाई है। जानिए क्या है जापानी मियावाकी तकनीक कम जगह में घना जंगल विकसित करने की यह जापानी विधि शहरी पर्यावरण के लिए बेहद प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक के जरिए बहुत ही कम समय और सीमित क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के अधिक से अधिक पौधे लगाए जाते हैं। इसमें पौधों को अत्यंत पास-पास लगाया जाता है, जिससे यह बहुत कम समय में एक घने जंगल का रूप ले लेता है। इसमें अलग-अलग ऊंचाई वाले पौधे जैसे झाड़ी, छोटे पेड़, मुख्य पेड़ और कैनोपी (ऊंचे पेड़) एक साथ रोपे जाते हैं। पारंपरिक पौधरोपण की तुलना में मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधे 10 गुना तेजी से विकसित होते हैं। ये विधि आम पौधरोपण से थोड़ी खर्चीली है, फिर भी सीमित जगह वाले शहरों के लिए इसे सर्वोत्तम विकल्प माना जाता है। सार्वजनिक स्थलों और खाली जमीनों का होगा चयन मियावाकी तकनीक से पौधरोपण करने के लिए शहरों के प्रमुख चौक-चौराहों, भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक इलाकों, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों के किनारे उपलब्ध खाली जमीनों को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय नगर निकायों से आवश्यक सहमति प्राप्त कर इन स्थलों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। आम नागरिकों को भी पौधरोपण के लिए किया जाएगा प्रेरित सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ आम जनता को भी इस हरित अभियान से जोड़ने की योजना है। नागरिकों को उनके घरों के आसपास मौजूद खाली जमीनों पर मियावाकी शैली में छोटे-छोटे सघन उपवन (माइक्रो-फॉरेस्ट) विकसित करने के लिए प्रोत्साहित और जागरूक किया जाएगा, ताकि पूरे शहर का हरित आवरण तेजी से बढ़ सके।

मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला, मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने दोषी माना

मेरठ मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला जज की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी करार दिया है. कोर्ट ने दोनों को दोषी तो ठहराया, लेकिन अभी सजा का ऐलान नहीं किया है. अदालत के फैसले के बाद अब दोनों को मिलने वाली सजा पर फैसला होना बाकी है।  बता दें, यह मामला 3 मार्च 2025 का है. आरोप है कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ राजपूत का मर्डर कर शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर ऊपर से सीमेंट भरकर सील कर दिया था.  करीब 15 दिन बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में केस का ट्रायल शुरू हुआ. पुलिस ने मामले में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस दौरान 126 तारीखों पर सुनवाई हुई और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए. लंबी सुनवाई और अंतिम बहस के बाद 19 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।  हत्या से कोर्ट में फैसला सुरक्षित होने तक का पूरा घटनाक्रम सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ अपने घर लौटा था. अगले दिन 25 फरवरी को पत्नी मुस्कान ने उसके लौटने की खुशी में घर पर पार्टी रखी. इसके कुछ दिन बाद 28 फरवरी को परिवार ने बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया. इसके बाद 3 मार्च को मामले ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे घटनाक्रम को हत्या के केस में बदल दिया. टाइमलाइन के मुताबिक, मुस्कान ने डिनर में सौरभ को नींद की दवा मिला दी. इसके बाद साहिल शुक्ला को फोन करके बुलाया गया. आरोप है कि सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर दिया गया।  4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी पीहू को अपनी मां के घर छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल चली गई. इसके बाद 17 मार्च को मुस्कान हिमाचल से वापस लौटी और मायके पहुंचकर अपने पिता-मां को घटना के बारे में बताया. 18 मार्च को पुलिस इंद्रानगर स्थित घर पहुंची. वहां पुलिस को ड्रम में सौरभ की बॉडी मिली. इसके बाद पुलिस ने साहिल और मुस्कान को गिरफ्तार कर लिया. 19 मार्च को पुलिस ने साहिल और मुस्कान को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. इसी दौरान सौरभ के शव के चार टुकड़ों का पोस्टमार्टम कराया गया।  जांच आगे बढ़ी तो सामने आए कई अहम सुराग 12 मई को पुलिस ने 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस चार्जशीट में 34 गवाहों का जिक्र किया गया था. पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया गया. 17 जून को मुस्कान और साहिल पर हत्या और सबूत मिटाने के आरोप तय हुए. इसके बाद मामले में ट्रायल शुरू हुआ. 4 जुलाई को सौरभ के भाई बबलू की कोर्ट में गवाही हुई. इसके बाद जुलाई से नवंबर के बीच परिवार, पुलिस, डॉक्टर, डांसर और ड्रम बेचने वाले समेत कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किए गए।  ड्रम और दूसरे सामान को बनाया गया सबूत 19 दिसंबर को कोर्ट में नीला ड्रम और ट्रॉली बैग पेश किए गए. इन्हें मामले में महत्वपूर्ण सबूत बताया गया. इसके बाद 23 जनवरी 2026 को जियो के नोडल अधिकारी ने कोर्ट में कॉल डिटेल, चैट और मोबाइल लोकेशन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की. 21 अप्रैल को कोर्ट में मुस्कान और साहिल पर लगे आरोपों को लेकर सुनवाई हुई. दोनों ने अपने ऊपर लगे 32 साल की सजा वाले आरोपों को मानने से इनकार कर दिया।  इसके बाद 22 मई से 17 सितंबर के बीच मामले में अंतिम बहस चली. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. अब इस मामले में 19 सितंबर को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन कोर्ट ने फैसले की तारीख 30 सितंबर तय कर दी. यानी करीब सात महीने तक चली जांच, गवाहियों, सबूतों और अंतिम बहस के बाद अब मामले में फैसला आने का इंतजार है। 

उज्जैन में तनाव के बीच 250 दुकानें बंद, 2 दिन में 10 करोड़ के कारोबार का दावा

उज्जैन  उज्जैन में सिंहस्थ 2028 कुंभ के चलते सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही शाही मस्जिद को हटाने के दौरान हुए उपद्रव के बाद अब मीनार हटाने की तैयारी शुरू हो गई है।  मीनार पर मचान बांधने का काम शुरू किया गया। जल्द ही मीनार सहित मस्जिद का संबंधित हिस्सा हटा दिया जाएगा।मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को लेकर हुए विवाद के 48 घंटे बाद भी क्षेत्र की 250 से अधिक दुकानें और घर बंद हैं। छत्री चौक और आसपास के इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर रखी है। प्रशासन ने छत्री चौक, लखेरवाड़ी, सराफा, कालिदास स्कूल के पास का क्षेत्र, गोपाल मंदिर, ढाबा रोड, खड़े हनुमान और सती गेट से कंठाल तक का क्षेत्र बंद करवा रखा है। करीब दो दिन से व्यापार प्रभावित होने के कारण व्यापारियों ने करीब 10 करोड़ रुपए के नुकसान की बात कही है। उन्हें यह नहीं पता की ये दुकानें कब खुलेगी। रोजाना 4 से 5 करोड़ का कारोबार प्रभावित कपड़ा व्यापारी शीतलदास चंदनानी ने बताया कि क्षेत्र की दुकानें पूरी तरह बंद हैं। पिछले तीन दिनों से यही स्थिति है और यह कब तक चलेगी, कहना मुश्किल है। उनके अनुसार तनावपूर्ण माहौल का सबसे ज्यादा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ रहा है।  उपद्रव करने वालों का मेडिकल टेस्ट शाही मस्जिद के हिस्से को तोड़ने को लेकर हुए उपद्रव के मामले में 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। बुधवार सुबह खाराकुंवा पुलिस 9 आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के लिए चरक अस्पताल लेकर पहुंची। यहां सभी का मेडिकल कराया गया। पुलिस आरोपियों को आज कोर्ट में पेश करेगी। दरअसल, सोमवार को छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को तोड़ने को लेकर ढाबा रोड और सब्जी मंडी की ओर से आए कुछ लोगों ने विवाद किया था। इसके बाद पथराव भी हुआ। भीड़ को भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर कुछ मैसेज भी वायरल किए गए थे। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। बुधवार को गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। इस दौरान आरोपी मुंह छिपाकर अस्पताल में जाते हुए नजर आए। विवाद की जड़ में 12 से 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण सिंहस्थ 2028 के लिए कोयला फाटक से गोपाल मंदिर तक रोड चौड़ीकरण किया जाना है। पहले से मौजूद 12 मीटर रोड को 15 मीटर किया जा रहा है। इस मार्ग पर कुल 323 मकान और 15 धर्मस्थल चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। कोयला फाटक से कंठाल चौराहे तक 8 धर्मस्थलों को बिना विवाद हटाकर शिफ्ट किया जा चुका है। इस हिस्से में 15 मीटर सड़क भी चौड़ी कर दी गई। विवाद तब बढ़ा, जब नगर निगम कंठाल से गोपाल मंदिर की ओर आगे बढ़ा और छत्री चौक पर शाही मस्जिद के 4.5 बाय 9 फीट हिस्से को हटाने की बात सामने आई। प्रशासन के अनुसार अब तक 12 धर्मस्थलों को हटाया जा चुका है। शाही मस्जिद का भी एक हिस्सा सड़क के दायरे में आया है। आठ एफआईआर, 20 से ज्यादा गिरफ्तार एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि कुछ लोग दूसरे शहरों से आकर दंगा कराने का प्रयास कर रहे थे। मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं से चर्चा के बाद मुस्लिम कमेटी द्वारा स्वयं मस्जिद हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि ढाई हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी पूरे इलाके में तैनात हैं और अगली शिफ्ट में भी इतनी ही संख्या में बल तैनात रहेगा। अब तक 30 आरोपी चिन्हित किए गए पुलिस ने सोमवार तक 20 आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज की जांच के आधार पर 10 से ज्यादा नए लोगों की पहचान की गई और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस तरह पुलिस के अनुसार अब तक करीब 30 आरोपियों को चिन्हित किया जा चुका है। खारा कुंवा थाने में 22 के खिलाफ मामला खारा कुंवा थाने में साजिद खान, इमरान, गुलरेज खान, बिल्लू पठान, साजिद खान, इमरान खान, बिलाल, लालू हेला, सलीम, नदीम, तौफीक खान, शाकिर, शाहनवाज उर्फ कल्लू खां, अरसद हुसैन, ईशान खान, तैयब मंसूरी, हुसैन सलमान, कासिम शेख, साहिल खान, साबिर शेख, शेख अल्फेज और समीर सरोठी के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले भी शामिल हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत

 नई दिल्ली दिल्ली दंगे से जुड़े साजिश वाले केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। दोनों करीब 6 साल से जेल में बंद हैं और जमानत के लिए निचली से सबसे ऊपरी अदालत तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। फरवरी 2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों को लेकर दर्ज 'वृहत साजिश' वाले यूएपीए केस में जमानत के लिए दोनों आरोपियों ने जमानत की अर्जी दायर की थी। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और दिनेश भट्ट की बेंच ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से इस केस में दायर तीसरी याचिका खारिज की। बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के फैसले को नहीं बदल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों से कहा गया था कि वे गवाही पूरी होने या आदेश पारित होने की तारीख से एक साल की अवधि पूरी होने, इनमें से जो भी पहले हो, उसके बाद जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर उपजे विरोध प्रदर्शन के बाद हुए सांप्रदायिक दंगे में 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि 700 से अधिक लोग जख्मी हुए थे। उमर खालिद और शरजील इमाम पर दिल्ली पुलिस ने दंगों के मास्टरमाइंड होने के आरोप लगाए हैं। एक्टिविस्ट खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन जैसे अन्य लोगों पर भी वृहत साजिश केस में आरोप लगे हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जांच कर रही है। 2020 में हुई थी गिरफ्तारी इससे पहले निचली अदालत ने भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की हैं, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था। इमाम को इस मामले में 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में इन याचिकाओं का विरोध करते हुए दावा किया कि दोनों दंगों के 'मुख्य साजिशकर्ता' हैं।

पानीपत में 9 कॉलोनियों को वैध कराने की कवायद तेज, 35 अवैध कॉलोनियों पर भी कार्रवाई

 पानीपत नगर निगम ने शहर की नौ कॉलोनियों को वैध कराने की ओर कदम बढ़ाया है। इससे कालोनियों में रहने वाले 50 हजार से अधिक परिवारों को सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहले से और भी बेहतर होने की उम्मीद जगी है। निदेशालय की ओर से बताई गई तकनीकी और दस्तावेजों की कमियों को दूर करने के बाद प्रस्ताव पुनः भेजे गए हैं। वहीं, निगम ने अवैध रूप से विकसित की जा रही 35 कॉलोनियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज करते हुए संबंधित कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए हैं। निगम का उद्देश्य पात्र कालोनियों को राहत देने के साथ नई अवैध कालोनियों के विस्तार पर रोक लगाना है। आयुक्त डा. पंकज राव ने बताया कि निदेशालय की ओर से बताई गई तकनीकी एवं दस्तावेजी कमियों को दूर कर प्रस्ताव दोबारा भेजे गए हैं। अब इन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। पहले निदेशालय ने बताई थीं ये कमियां पहले भेजे प्रस्ताव में निदेशालय की जांच में पाया था कि कालोनी सीमाओं के अक्षांश देशांतर, अप्रोच रोड, खसरा नंबर, सड़क का नेटवर्क, खाली भूमि तथा सैटेलाइट इमेजरी संबंधी जानकारी अधूरी थी। नगर निगम की टाउन प्लानिंग शाखा ने इन सभी बिंदुओं पर सुधार करते हुए संशोधित प्रस्ताव तैयार किए। गुर्जर कॉलोनी और साई कॉलोनी एक्सटेंशन सहित अन्य कॉलोनियों में भी आवश्यक तकनीकी संशोधन किए गए हैं। जानिये… कॉलोनियों के प्रस्ताव के बारे में 1. विकास नगर-1 (38.40 एकड़) 2. गुर्जर कालोनी (3.13 एकड़) 3. साई कॉलोनी एक्सटेंशन (1.30 एकड़) 4.गोपाल कॉलोनी (9.01 एकड़) 5. विर्क नगर (14.02 एकड़) 6. गाबा कॉलोनी (11.58 एकड़) 7. एकता विहार कॉलोनी उझा रोड (1.73 एकड़) 8. ज्योति नगर (2.37 एकड़) और 9. विराट नगर फेज-3 (21.09 एकड़) है। समझें अब तक चली प्रक्रिया के बारे में चार साल के अंतराल में नगर निगम 21 कॉलोनियां वैध करने के लिए प्रस्ताव भेज चुका है। इनमें से दो कॉलोनियां पहले से स्वीकृत हो पाई हैं। 10 कॉलोनियां मानदंड पूरे नहीं कर पाईं। जिनमें से नौ कॉलोनियों के प्रस्ताव सुधार के लिए लौटाए थे। अब संशोधित प्रस्ताव भेजे हैं। इस पर अंतिम निर्णय सरकार और निदेशालय स्तर पर होगा। कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजरों को नोटिस नगर निगम जहां पात्र कॉलोनियों को वैध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, वहीं शहर और आसपास अवैध रूप से विकसित की जा रही 35 कॉलोनियों के मालिकों को नोटिस भी जारी किए हैं। निगम का उद्देश्य एक ओर पुराने निवासियों को राहत देना है, वहीं भविष्य में अनियोजित और अवैध कालोनियों के विस्तार पर रोक लगाना है। मिलेंगे ये पांच बड़े लाभ 1. सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसे विकास कार्यों का रास्ता आसान होगा। 2. सरकारी योजनाओं- आधारभूत सुविधाओं के लिए बजट मिलने की संभावना बढ़ेगी। 3. संपत्तियों के खरीद-फरोख्त और रिकार्ड संबंधी विवाद कम होंगे। 4. पानी, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार में आसानी होगी। 5. क्षेत्र के नियोजित विकास और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति मिलेगी।  

राजस्थान के सरकारी स्कूलों का बदलेगा समय, 1 अक्टूबर से सुबह 10 से शाम 4 बजे तक

जयपुर  राजस्थान में एक अक्टूबर 2026 से सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव होने जा रहा है। शिविरा पंचांग के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में एक अक्टूबर से नया समय लागू होगा। एक पारी में संचालित होने वाले स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है। स्कूल समय में यह बदलाव हर वर्ष शिविरा पंचांग में निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार किया जाता है। गर्मी के मौसम में तापमान और विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव रहता है। वहीं अक्टूबर की शुरुआत के साथ मौसम में बदलाव को देखते हुए स्कूलों का समय सामान्य किया जाता है। तेज गर्मी के कारण पिछले चार साल में से तीन साल शिक्षा विभाग एक अक्टूबर के स्थान पर 16 अक्टूबर से स्कूलों का समय परिवर्तन किया था। हालांकि पिछले वर्ष शिक्षा विभाग ने शिविरा पंचाग के अनुसार ही एक अक्टूबर को ही स्कूलों का समय परिवर्तन किया था। इस बार भी कई शिक्षक संघ एकल पारी के स्कूलों का समय परिवर्तन एक अक्टूबर के स्थान की अपेक्षा 16 अक्टूबर से ही करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन तीस सितम्बर तक शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। शिविरा पंचांग के अनुसार होता है निर्धारण राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों और स्कूल संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय शिविरा पंचांग के अनुसार किए जाते हैं। इसी के तहत मौसम के अनुसार विद्यालयों के समय में भी परिवर्तन किया जाता है। एक अक्टूबर से नया समय लागू होने के बाद एक पारी वाले स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे।