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भाजपा ने बूथ स्तर पर शुरू किया डिजिटल प्रशिक्षण अभियान, 6 जुलाई बाद आएगा परिणाम

उलखनऊ  त्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए व्यापक डिजिटल प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। पार्टी प्रदेश के सभी बूथों पर 20-20 कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की डिजिटल परीक्षा आयोजित करा रही है। इस परीक्षा के माध्यम से न केवल कार्यकर्ताओं की वैचारिक और संगठनात्मक समझ का आकलन किया जा रहा है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए सक्षम और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं का चयन भी किया जाएगा। परीक्षा का परिणाम 6 जुलाई के बाद घोषित किया जाएगा। बीजेपी ले रही कार्यकर्ताओं की डिजिटल परीक्षा भाजपा की इस डिजिटल परीक्षा में अधिकांश प्रश्न केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख उपलब्धियों, भाजपा के इतिहास, संगठन की विचारधारा और विभिन्न योजनाओं से जुड़े हैं। परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) प्रदान किया जाएगा। साथ ही उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा चुनाव के दौरान विशेष जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं। प्रदेश में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा जिलों और मंडलों तक फैला है। पार्टी का मानना है कि चुनावी सफलता की सबसे मजबूत कड़ी बूथ स्तर का संगठन होता है। इसी कारण बूथ प्रबंधन और माइक्रोमैनेजमेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के साथ उन्हें चुनावी रणनीति के अनुरूप तैयार कर रही है। 'सरल एप' के जरिए हो रही परीक्षा डिजिटल परीक्षा 'सरल एप' के माध्यम से आयोजित की जा रही है, जहां बूथ स्तर के कार्यकर्ता ऑनलाइन प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं। इस अभियान में महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा का उद्देश्य हर वर्ग के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को संगठन की गतिविधियों से जोड़ना और चुनावी तैयारियों में उनकी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित करना है। हाल ही 64 सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी का गठन आपको बता दें इससे पहले 25 जून को भाजपा ने 64 सदस्यीय नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की थी, जिसमें छह क्षेत्रीय अध्यक्षों और छह मोर्चों को भी शामिल किया गया। नई टीम के गठन के बाद पार्टी संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने में जुटी है। इससे पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के तहत 11 विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित कर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया था। अब डिजिटल परीक्षा के माध्यम से ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान की जा रही है, जिन्हें भविष्य में चुनावी अभियानों, संगठनात्मक कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकें। भाजपा का मानना है कि प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्यकर्ता ही बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाकर चुनावी सफलता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।  

पक्का घर, रोजगार और सम्मान के साथ मुख्यधारा में लौटे, बने आत्मनिर्भर जीवन की मिसाल

रायपुर सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली के निवासी मड़कम भीमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के सहयोग से आज वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना पक्का घर मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिली। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक घर में रह रहा है। इस योजना ने उनके जीवन में स्थिरता और भविष्य के प्रति नया विश्वास पैदा किया। मनरेगा से मिला रोजगार, बढ़ी आत्मनिर्भरता मड़कम भीमा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने गांव के विकास कार्यों में मेहनत से काम किया और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा। नई सोच के साथ बदली जिंदगी आज मड़कम भीमा अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। वे मानते हैं कि शासकीय योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है। अब वे विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपने परिवार का बेहतर भविष्य बना रहे हैं। दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत मड़कम भीमा की सफलता की कहानी बताती है कि शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। यह कहानी युवाओं को संदेश देती है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग अपनाने से जीवन में नई शुरुआत संभव है। शासन समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ मजबूती से खड़ा है।

सिमरिया-टंडवा मार्ग के सुधार कार्य को मंजूरी, कोयला परिवहन होगा आसान और सुरक्षित

चतरा  जिले के सिमरिया-टंडवा मार्ग की जर्जर स्थिति अब जल्द ही अतीत बनने वाली है। पथ प्रमंडल, चतरा अंतर्गत सिमरिया-टंडवा पथ के कुल 26.85 किलोमीटर लंबी सड़क की राइडिंग क्वालिटी में सुधार कार्य के लिए 33 करोड़ 76 लाख 45 हजार 200 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।  गुरुवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में इसकी प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। इस स्वीकृति के बाद सड़क के उन्नयन का रास्ता साफ हो गया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। यह सड़क उत्तर कर्णपुरा कोयलांचल क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।  कोयला एवं फ्लाई ऐश परिवहन प्रभावित टंडवा स्थित कोयला खदानों और उत्तरी कर्णपुरा मेगा विद्युत ताप परियोजना से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहनों का आवागमन इसी मार्ग से होता है। लंबे समय से सड़क की खराब स्थिति के कारण कोयला एवं फ्लाई ऐश परिवहन प्रभावित हो रहा था, वहीं आम यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।  सड़क दुर्घटनाएं लगातार हो रही है। अब सड़क की राइडिंग क्वालिटी बेहतर होने से कोयला व फ्लाई ऐश परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और सुचारु हो सकेगा। सड़क के उन्नयन से सिमरिया, टंडवा तथा आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा।  सड़क बनने से यात्रा का समय कम होगा बेहतर सड़क बनने से यात्रा का समय कम होगा, दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी तथा वाहनों के रखरखाव पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। बरसात के मौसम में जलजमाव और गड्ढों की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। कोयला परिवहन से जुड़े उद्योगों, व्यवसायियों और परिवहनकर्ताओं को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी।  जिले की आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी साथ ही स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और आवश्यक सेवाओं की पहुंच भी अधिक आसान हो जाएगी। झामुमो जिला अध्यक्ष नीलेश ज्ञानेश ने प्रशासनिक स्वीकृति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा।  उनका कहना है कि यह सड़क चतरा जिले की आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी है और इसके बेहतर होने से विकास को नई गति मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की यातायात व्यवस्था मजबूत होगी तथा कोयला परिवहन के साथ-साथ आम जनजीवन भी अधिक सुगम और सुरक्षित बनेगा।

गुजरात ATS ने देवास से जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध सदस्य को दबोचा

देवास गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने गुरुवार को देवास के वारसी नगर से जैश ए मोहम्मद के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि गुजरात एटीएस ने पुख्ता इंटेल के बाद देवास में डेरा डाला था। एटीएस ने स्थानीय पुलिस काे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद देवास पुलिस के सहयोग से आराेपित को चिन्हित कर पकड़ा गया। सूत्रों के अनुसार पकड़े गए आरोपित का नाम बिलाल दुर्रानी घाघरा है। शंका है कि संदिग्ध गुजरात में जैश ए मोहम्मद का आतंकी नेटवर्क खड़ा करने के लिए यह स्लीपर सेल की तैयारी कर रहे थे। बता दें कि शहर का वारसी नगर क्षेत्र नाहर दरवाजा थाना क्षेत्र में आता है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती है। गिरफ्तारी के संबंध में स्थानीय पुलिस ने अधिक जानकारी नहीं दी है। हालांकि बताया जा रहा है कि एटीएस आरोपित काे लेकर रवाना हो चुकी है। इधर देवास से संदिग्ध पकड़ाने के बाद देवास पुलिस भी सतर्क हो गई है। मामले में जांच की जा रही है।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में आयोजित “शिक्षा संवाद” कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया सीधा संवाद, समस्याओं के त्वरित निराकरण के दिए निर्देश

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान केंद्र हैं, जहाँ समाज की समस्याओं का समाधान करने वाले श्रेष्ठ, संवेदनशील, नैतिक एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार के योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम, उत्तरदायी एवं नवाचारी बनाना है। विश्वविद्यालयों को इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा। मंत्री  परमार बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित "शिक्षा संवाद" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी-केंद्रित व्यवस्था के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक निर्णय विद्यार्थी हित, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया जाए।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज को दिशा देने वाले सशक्त शैक्षणिक संस्थान बनें। मंत्री  परमार ने कहा कि आदर्श विश्वविद्यालय वही है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समयबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ, अनुशासित व्यवस्था, शोध की सशक्त संस्कृति, नवाचार तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त न करें, बल्कि समाज एवं राष्ट्र की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने वाले सक्षम नागरिक बनकर निकलें। मंत्री  परमार ने कहा कि प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'सार्थक ऐप' का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 'सार्थक ऐप' के माध्यम से दर्ज की जायेगी, जिससे नियमित उपस्थिति, अनुशासन, कक्षाओं में सहभागिता तथा शिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। मंत्री  परमार ने कहा कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं। परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, तकनीक आधारित एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सर्वोपरि हैं और उनसे किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालयों में शोध एवं नवाचार की सशक्त संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि अनुसंधान केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि समाज, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान से जुड़ा हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं, कौशल आधारित शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योगों के साथ समन्वय को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, अनुसंधान की प्रवृत्ति एवं राष्ट्रभावना का विकास करना है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम हो। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को ऐसे आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ से ज्ञान, कौशल, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण विद्यार्थी निकलकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ। मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित, अनुशासित एवं विद्यार्थी-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, खेल सुविधाएँ, डिजिटल संसाधन, शोध अवसंरचना, प्लेसमेंट गतिविधियाँ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शोध, उद्योगों से समन्वय, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बनाने पर बल दिया। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया संवाद मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने परीक्षा, शोध, छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, डिजिटल सुविधाओं, प्लेसमेंट, खेल गतिविधियों एवं अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े सुझाव और समस्याएँ गंभीरता से सुनीं। मंत्री  परमार ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जहाँ विद्यार्थियों की प्रत्येक समस्या का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ समाधान हो तथा संवाद की संस्कृति निरंतर सशक्त होती रहे। गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का किया निरीक्षण मंत्री  परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, अध्ययन कक्ष, स्वच्छ शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाए। छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल सके। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा, समाजसेवी  चेतस सुखाड़िया, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।  

गया में आधुनिक MSME ट्रेनिंग सेंटर बनेगा कौशल विकास और रोजगार का केंद्र

 बोधगया  गया जिले के खिजरसराय में निर्माणाधीन एमएसएमई टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग सेंटर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 20 एकड़ भूमि पर करीब 176 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर निर्माण कार्य जारी है। अब तक परिसर की बाउंड्री वॉल, मुख्य गेट और गार्ड रूम का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य भवनों की ड्राइंग और डिजाइन के अनुरूप निर्माण प्रक्रिया लगातार जारी है। निर्माण एजेंसी को इस परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। सेंटर का वास्तुशिल्प (आर्किटेक्चरल) डिजाइन दिल्ली के विशेषज्ञ आर्किटेक्ट्स द्वारा तैयार किया गया है, जो इसे आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देगा। कुल नौ ब्लॉकों में विकसित होगा अत्याधुनिक परिसर एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बहुउद्देशीय प्रशिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिसर में एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, एक्जीक्यूटिव हॉस्टल, कमर्शियल ब्लॉक, कन्वोकेशन हॉल, स्टाफ रेजिडेंसी, गर्ल्स हॉस्टल, डाइनिंग ब्लॉक, बॉयज हॉस्टल, ट्रेनिंग सेंटर, प्रोडक्शन ब्लॉक सहित कई भवन बनाए जाएंगे। सभी भवन दो मंजिला होंगे और आधुनिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण परियोजना पूरी होने के बाद यह संस्थान मगध क्षेत्र के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा। एमएसएमई विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यहां आठवीं कक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के छात्र-छात्राओं को विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाएंगे। संस्थान में डिप्लोमा इन टूल एंड डाई मेकिंग, मेकाट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स स्किल्स सहित कई आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होंगे। प्रशिक्षण की अवधि छह माह से एक वर्ष तक निर्धारित की जाएगी, ताकि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था सेंटर में हेवी इंजीनियरिंग, जनरल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल टेस्टिंग, प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े अलग-अलग विभाग स्थापित किए जाएंगे। वहीं, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, ब्यूटीशियन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास की नई नींव साबित होगी। इसके शुरू होने से हजारों युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

परमिट नवीनीकरण, नए परमिट और ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों पर छह जुलाई को फैसला

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की महत्वपूर्ण बैठक छह जुलाई को परिवहन आयुक्त कार्यालय लखनऊ में आयोजित होगी। इसमें परमिटों के नवीनीकरण, परमिट हस्तांतरण, नए स्टेज कैरिज और अन्य परमिटों के आवेदन, प्रति हस्ताक्षर (काउंटर सिग्नेचर) से जुड़े प्रकरण, व मोटरयान अधिनियम-1988 की धारा 86 के तहत परमिटों को निरस्त या निलंबित किए जाने के मामलों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा जिन चालक प्रशिक्षण केंद्रों (ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर) को एक वर्ष से अधिक समय पहले लेटर आफ इंटेंट (एलओआइ) जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक केंद्र के प्रत्यायन (एक्रेडिटेशन) के लिए आवेदन नहीं किया है, उनके एलओआइ को निरस्त करने के प्रस्ताव पर भी निर्णय होगा। परिवहन विभाग ने संबंधित आवेदकों और पक्षकारों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखने की सुविधा दी है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति अपने जिले के परिवहन कार्यालय में निर्धारित समय पर उपस्थित होकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष अपनी बात रख सकेंगे। अधिवक्ता भी अपनी सुविधा के अनुसार बैठक में शामिल होकर पक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों का असर प्रदेश में बस संचालन, यात्री परिवहन, मालवाहक वाहनों के संचालन, परमिट व्यवस्था और ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्रों की मान्यता पर पड़ता है। नए परमिटों की मंजूरी, पुराने परमिटों के नवीनीकरण और नियमों का पालन न करने वाले मामलों में कार्रवाई से प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

वन विभाग की अभिनव पहल बनी लोगों के लिए सुरक्षा कवच

रायपुर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित 'एलीफेंट अलर्ट सिस्टम' हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है। समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है। पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है। तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है। दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।  

बिहार की चुनिंदा सड़कों और पुलों पर टोल टैक्स, रखरखाव पर होगा खर्च

पटना  राज्य उच्च पथ की चुनिंदा सड़कें और पुल पर टोल टैक्स (Bihar Toll Tax) लगाने के निर्णय से पथ निर्माण विभाग को एक साल में सात से आठ सौ करोड़ रुपए का राजस्व हासिल होगा। इस राशि का इस्तेमाल सड़कों के रख रखाव पर किया जाएगा। वित्तीय संस्थाओं की ऋण राशि से बनी सड़कें आ जाएंगी टोल की परिधि में पथ निर्माण विभाग ने बड़ी संख्या में राज्य उच्च पथों (एसएच) को एशियन डेवलपमेंट बैंक व कुछ सड़कों किसी दूसरी वित्तीय संस्थाओं की ऋण राशि से विकसित किया है। वित्तीय संस्थाओं की मदद से तैयार राज्य उच्च पथों को टोल टैक्स के दायरे में लाया जाना तय है। जल्द ही पथ निर्माण विभाग इस आशय की अधिसूचना जारी करेगा कि कौन-कौन से राज्य उच्च पथों पर टैक्स लिए जाएंगे। टोल की वसूली के लिए टोल एजेंट को मिलेगी जिम्मेवारी अलग-अलग इलाके में स्थित सड़कों पर टोल टैक्स की वसूली के लिए टोल एजेट नियुक्त करेगा पथ निर्माण विभाग। पथ निर्माण विभाग इन दिनाें डिजिटल मोड़ में यह आकलन कर रहा है कि किसी सड़क पर 24 घंटे के भीतर औसतन कितने वाहनों का परिचालन होता है। इसके आधार पर टोल एजेंट को जिम्मेवारी दी जाएगी। पेमेंट गेटवे के लिए केंद्र सरकार की संस्था की मदद ली जाएगी स्टेट हाईवे पर लगने वाले टोल टैक्स के पेमेंट गेटवे के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की मदद ली जाएगी। राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच) पर टोल टैक्स वसूली के लिए जो फास्ट टैग प्रचलन में हैं उन्हीं का इस्तेमाल राज्य उच्च पथ (एसएच) पर भी टोल के लिए किया जा सकेगा। इसकी अनुमति मिल जाने के बाद एसएच के लिए टोल मद में फास्ट टैग के माध्यम से जो राशि आएगी वह पथ निर्माण विभाग के खाते में चली जाएगी। इसके लिए पथ निर्माण विभाग अलग से कोई फास्ट टैग की व्यवस्था नहीं करेगा।  

डीएमएफ से 13 विकास कार्यों के लिए 35.77 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा। आईटीआई भवनों के उन्नयन से बढ़ेगा कौशल विकास स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। कृषि अधोसंरचना को मिलेगा नया आधार तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 24.73 करोड़ रुपये से मजबूत होगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।