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CM योगी आज वाराणसी से लॉन्च करेंगे ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज

मख्यमंत्री योगी बुधवार को वाराणसी से करेंगे 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना' का शुभारंभ    -लगभग 12 लाख शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, विशेष शिक्षक, रसोइये एवं अन्य कार्मिक परिवार सहित होंगे लाभान्वित -प्रति शिक्षक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम का भुगतान करेगी राज्य सरकार, लगभग ₹447 करोड़ होगा वार्षिक व्यय – डीबीटी से 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में पहुंचेंगे ₹1320 करोड़ शिक्षा विभाग का एसबीआई के साथ सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू भी होगा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कार्मिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को नई मजबूती देने जा रही है। मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी से 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना' का शुभारंभ करेंगे। इसी कार्यक्रम में परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में डीबीटी से धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी समझौता (एमओयू) का आदान-प्रदान होगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों को भी सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (सीडब्ल्यूएसएन), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डेन, पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइये तथा अन्य पात्र कार्मिक और उनके परिवार लाभान्वित होंगे। इस योजना से लगभग 12 लाख शिक्षक, रसोइये एवं अन्य कार्मिक परिवार सहित स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आएंगे। योजना में प्रति शिक्षक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम का पूरा भुगतान राज्य सरकार करेगी। इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹447 करोड़ का व्यय किया जाएगा। योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज के माध्यम से होगा। लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। योजना में लगभग 1900 उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं। इनमें सामान्य उपचार से लेकर गंभीर बीमारियों, जटिल सर्जरी, हृदय रोग, कैंसर, किडनी रोग सहित अनेक उपचार शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री प्रतीकात्मक रूप से शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी वितरित करेंगे। अभिभावकों के खातों में ₹1320 करोड़ की धनराशि डीबीटी से भेजी जाएगी  कार्यक्रम में शैक्षिक सत्र 2026-27 के प्रथम चरण में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में ₹1320 करोड़ की धनराशि डीबीटी से भेजी जाएगी। यह राशि यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, स्वेटर, जूते-मोजे और स्टेशनरी की खरीद के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अभिभावकों को बच्चों की आवश्यक शैक्षणिक सामग्री समय पर उपलब्ध कराने में सुविधा मिलेगी। शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच होगा एमओयू    समारोह के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू भी होगा। इससे लगभग 10 लाख शिक्षक एवं अन्य कार्मिक सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जुड़ेंगे। उन्हें समूह जीवन बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, स्थायी एवं आंशिक दिव्यांगता कवर, एयर एक्सीडेंट कवर तथा आकस्मिक परिस्थितियों में बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए अतिरिक्त सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। जिन कार्मिकों के वेतन खाते पहले से भारतीय स्टेट बैंक में हैं, उन्हें इन सुविधाओं का लाभ स्वतः मिलेगा। अन्य पात्र कार्मिकों को भी बैंक में वेतन खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक होंगे सम्मानित  कार्यक्रम में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय (एसएचवीआर) योजना के राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई और बेहतर विद्यालयी वातावरण विकसित करने के उत्कृष्ट प्रयासों के लिए दिया जाएगा।

नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में पौधरोपण कर 22240 से अधिक हेक्टेयर भूमि को आच्छादित करेगी योगी सरकार

पौधरोपण महायज्ञ- 2026   योगी सरकार 13 प्रमुख नदियों के तट क्षेत्र पर रोपेगी 3.83 करोड़ से अधिक पौधे    नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में पौधरोपण कर 22240 से अधिक हेक्टेयर भूमि को आच्छादित करेगी योगी सरकार     गंगा तीरे 4495 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 79.86 लाख पौधरोपण  यमुना नदी के किनारे 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर में लगेंगे 1.08 करोड़ पौधे  गंगा नदी के किनारे 603, गोमती किनारे 297, सरयू किनारे 254 स्थलों पर होगा भव्य पौधरोपण कार्यक्रम लखनऊ  योगी सरकार पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत उत्तर प्रदेश में 13 प्रमुख नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करेगी। गंगा, यमुना, गोमती, सरयू, समेत कई प्रमुख नदियों के किनारे पौधरोपण होगा। गंगा के किनारे 4495.72 हेक्टेयर में 79.86 लाख से अधिक पौधरोपण होगा तो यमुना किनारे सर्वाधिक 647 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां पौधरोपण कराए जाएंगे। नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में कुल 2673 स्थल चिह्नित किए गए हैं, इनके किनारे 22240 हेक्टेयर से अधिक में 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण होगा।  यमुना नदी के तट क्षेत्र पर होंगे सर्वाधिक पौधरोपण  सीएम योगी के निर्देश पर नदियों के किनारे पौधरोपण होंगे। अविरल धारा पौधरोपण कार्यक्रम के तहत यमुना नदी के तट पर सर्वाधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। यमुना के कैचमेंट एरिया में 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 1 करोड़, 8 लाख, 18 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। वहीं गंगा नदी के किनारे 603 स्थलों पर 4495.72 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसके किनारे 79.86 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। गंगा किनारे के वन प्रभागों प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, वाराणसी, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही, काशी वन्यजीव व बलिया आदि में यह पौधरोपण प्रस्तावित है।  इन 13 नदियों के समीप होगा अविरल धारा पौधरोपण क्रम  नदी    स्थल   क्षेत्रफल (हेक्टेयर)   पौधों की संख्या  1  यमुना       647      6531.77         1,08,18,731 2 गंगा         603       4495.72          79,86,512 3 गोमती        297      1521.5          31,37,845 4 सरयू/घाघरा   254      1635.58         27,75,860 5  सई        238      1032.52          23,29,609 6  बेतवा       171       3281.76         52,35,132 7 राप्ती       155          1037.67         16,60,272 8 छोटी गंडक   105       513.00          8,20,800 9  सोन        67        970.63         14,77,158  10  रामगंगा    51        268.51         4,49,978 11  केन       39       667.9            10,68,381 12  हिंडन     33        131.55          3,16,480 13  चंबल     13         152.00           2,28,200 कुल–     2673        22240.11        3,83,04,958 पौधरोपण महायज्ञ-2026 के दौरान वन विभाग की तरफ से प्रदेश में 13 नदियों के किनारे अविरल धारा पौधरोपण कराया जाएगा। इसमें मां गंगा, मां यमुना, मां सरयू आदि के नदियों के तट से 5 किमी. की परिधि में पौधरोपण होगा। नदियों के किनारे 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण को लेकर भी विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशन में पौधरोपण महायज्ञ उत्सव के साथ मनाया जाएगा।   

इंदौर में बीच ट्रैक पर रुकी DEMU, समोसे लेने उतरा लोको पायलट! VIDEO वायरल होते ही रेलवे एक्शन में

इंदौर बारिश का मौसम हो और गरमा-गरम समोसे की खुशबू आए, तो किसी का भी मन ललचा सकता है. लेकिन अगर यही लालच चलती ट्रेन को बीच रास्ते में रोकने का हो तो मामला सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का बन जाता है. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश से आया है. यहां इंदौर और महू के बीच चलने वाली डेमू ट्रेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि लोको पायलट ने बीच रास्ते में समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोक दी. हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. रेलवे का कहना है कि अगर लोको पायलट की तरफ से बीच रास्ते ट्रेन रोककर अपना पर्सनल कार्य किया गया है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।    समोसे खरीदने की वजह से लेट हो जाती है ट्रेन वायरल वीडियो राऊ के रंगवासा रोड क्षेत्र का बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इंदौर-महू डेमू ट्रेन यहां नियमित रूप से कुछ मिनट के लिए रुकती है. आरोप है कि लोको पायलट ट्रेन से नीचे उतरकर पास की दुकान से समोसे खरीदता है, जिससे ट्रेन करीब 10 मिनट या उससे ज्यादा लेट हो जाती है. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो क्षेत्र के लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।  वहीं इस मामले पर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है और इसे वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया है. पूरे मामले की जांच कराई जा रही है. यदि जांच में यह सामने आता है कि लोको पायलट ने बिना किसी अधिकृत कारण, सिग्नल या परिचालन संबंधी आवश्यकता के ट्रेन रोकी और केबिन से उतरकर निजी कार्य किया, तो रेलवे नियमों के अनुसार उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल रेलवे जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। 

Bhopal-Delhi Vande Bharat को मिला नया लुक, 708 किमी की दूरी सिर्फ 7.30 घंटे में होगी पूरी

ग्वालियर  रानी कमलापति (भोपाल) से ग्वालियर होते हुए हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही बिल्कुल नए रंग-रूप में नजर आएगी। ट्रेन का बाहरी रंग पारंपरिक नीले-सफेद की जगह अब आकर्षक केसरिया होगा। इसके लिए ट्रेन को झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप भेजा गया है, जहां अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक से पेंटिंग और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे है। झांसी मंडल में पहली बार इस स्तर पर वंदे भारत का ऐसा मेकओवर किया जा रहा है। रोबोटिक तकनीक से तैयार हो रहा नया लुक झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप में वंदे भारत के कोचों की पेंटिंग अत्याधुनिक रोबोट कर रहे हैं। इससे पेंट की गुणवत्ता बेहतर होगी, पूरी ट्रेन को एक समान फिनिश रंग लंबे समय तक टिकेगा और मिलेगी। रेलवे के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के जरिए तेज और अधिक सटीक तरीके से पूरी की जा रही है। 7.30 घंटे में 708 किमी. का सफर रानी कमलापति से हजरत निजामुद्दीन के बीच 708 किलोमीटर का सफर वंदे भारत महज 7 घंटे 30 मिनट में पूरा करती है। यही दूरी अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों को तय करने में करीब 9 से 10 घंटे लगते हैं। यह ट्रेन भोपाल, झांसी, ग्वालियर और आगरा कैंट स्टेशन पर ठहराव लेते हुए दिल्ली पहुंचती है। मेक इन इंडिया की पहचान वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित ट्रेन है। आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, बेहतर रफ्तार और यात्री सुविधाओं के कारण यह भारतीय रेलवे की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल है। रेलवे का मानना है कि नए स्वरूप और बेहतर सुविधाओं से यात्रियों का सफर और अधिक आरामदायक होगा। क्या-क्या बदलेगा -वॉश बेसिन की गहराई बढ़ाई गई है। -टॉयलेट में अब अधिक रोशनी वाली एलईडी लाइटिंग। -चार्जिंग पॉइंट तक आसान पहुंच। -सीटों में अधिक कुशनिंग, लंबी यात्रा में आराम बढ़ेगा एग्जीक्यूटिव चेयर कार में बड़ा फुटरेस्ट। अंदर भी बदलेगा… केवल बाहरी रंग ही नहीं, ट्रेन के इंटीरियर में भी कई बदलाव किए जा रहे हैं ताकि यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा मिल सके। अधिकारी बोले….. अब पहले से बेहतर अनुभव रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत को केसरिया रंग में तैयार किया जा रहा है। झांसी कारखाने में रोबोटिक पेंटिंग के साथ यात्रियों की सुविधा से जुड़े कई तकनीकी सुधार भी किए जा रहे हैं, ताकि यात्रा का अनुभव पहले से बेहतर हो। – मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी रेल मंडल

Dog Bite Case: पालतू कुत्ते के हमले का जिम्मेदार ठहरा मालिक, कोर्ट ने लगाया जुर्माना और दी सजा

जबलपुर  पड़ोसी के 8 वर्षीय बच्चे को पालतू कुत्ते के काटने के मामले में न्यायालय ने करीब छह साल बाद कुत्ते के मालिक को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) दीप्ती चौहान ने आरोपी को कोर्ट उठने तक के साधारण कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। अभियोजन के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित कौशल्या अपार्टमेंट के पास रहने वाले सलीम रहमान 27 अक्टूबर 2020 को अपनी पंचर मोटरसाइकिल को पैदल मरम्मत के लिए ले जा रहे थे। उनका 8 वर्षीय बेटा अतौर रहीम रहमान पीछे-पीछे दौड़ रहा था। इसी दौरान पड़ोसी गैविन डिसूजा के पालतू कुत्ते ने बच्चे को काट लिया। घटना के बाद आरोपी के घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चे का इलाज कराने और कुत्ते को बांधकर रखने की बात कही गई तो गैविन डिसूजा ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। सलीम रहमान ने घटना की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 289, 294 और 506 (भाग-बी) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को धारा 294 और 506 (भाग-बी) के आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, जानवर को लापरवाही से छोड़ने (धारा 289) के अपराध में दोषी मानते हुए कोर्ट उठने तक के कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एसडीओपी रवि कुमार मौर्य ने पैरवी की।  

Love Jihad पर सख्त कदम! गैर-मुस्लिम से शादी के लिए वक्फ बोर्ड से लेनी होगी मंजूरी, जानें पूरा मामला

रायपुर  छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह व्यवस्था में पारदर्शिता लिए एक नई पहल करने जा रहा है, जिसमें अगर कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन भी होगा. नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. केवल रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा सकेंगे।  बोर्ड का कहना है कि इससे फर्जी पहचान, दस्तावेज छिपाकर विवाह कराने और विवादित मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी. हर निकाह का पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा. निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड के माध्यम से जारी किया जाएगा. वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली हैं, इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है।  वक्फ बोर्ड के पास रहेगा रिकॉर्ड बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के अनुसार, वर्तमान में कई स्थानों पर निकाह का कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, जिससे बाद में वैवाहिक स्थिति, पहचान और कानूनी मामलों में विवाद पैदा होते हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक निकाह का रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रहेगा और प्रमाणपत्र भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी किया जाएंगे।  वक्फ बोर्ड क्या होता है? वक्फ बोर्ड एक वैधानिक संस्था है, जो मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक, सामाजिक या जनकल्याण के उद्देश्य से दान की गई संपत्तियों का प्रबंधन और संरक्षण करती है. इसका गठन वक्फ अधिनियम, 1995 (बाद में संशोधित) के तहत किया जाता है।  भारत में वक्फ बोर्ड लगभग हर राज्य का अपना राज्य वक्फ बोर्ड होता है.इनके अलावा एक केंद्रीय वक्फ परिषद भी है, जो केंद्र सरकार के अधीन सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करती है। 

हरियाली की छांव में होगा सिंहस्थ, उज्जैन बनेगा देश का पहला ‘ग्रीन कुंभ’ मॉडल

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की नई पहचान देने की दिशा में उज्जैन प्रशासन ने व्यापक हरित अभियान शुरू कर दिया है। पहली बार सिंहस्थ महापर्व को 'ग्रीन कुंभ' की अवधारणा के साथ आयोजित किया जाएगा। इसके तहत पूरे शहर और सिंहस्थ क्षेत्र में 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जबकि 114 किलोमीटर लंबी सड़कों को हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रशासन ने इस महाअभियान की शुरुआत कर दी है और अब तक तीन लाख से अधिक गड्ढों की खुदाई पूरी की जा चुकी है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले पूरे क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित कर श्रद्धालुओं को स्वच्छ, छायादार और पर्यावरण अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। 84 हजार बड़े छायादार पेड़ों से सजेगा सिंहस्थ मार्ग योजना के तहत सिंहस्थ क्षेत्र की प्रमुख सड़कों के दोनों ओर 84 हजार बड़े और छायादार पौधे लगाए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन सहित ऐसी प्रजातियों को शामिल किया गया है, जिनकी ऊंचाई 10 से 12 फीट होगी और जो कम समय में तेजी से विकसित होकर पर्याप्त छाया प्रदान कर सकें। प्रशासन का मानना है कि बढ़ते तापमान और हीटवेव की चुनौती को देखते हुए यह पहल केवल सुंदरीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचना तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। नीम, करंज और जामुन के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे श्रद्धालुओं को देंगे प्राकृतिक छाया इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन और अन्य छायादार प्रजातियों के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे। इन प्रजातियों का चयन इसलिए किया गया है कि ये कम समय में अच्छी वृद्धि कर सकें और सिंहस्थ-2028 तक श्रद्धालुओं को प्राकृतिक छाया उपलब्ध करा सकें। बढ़ते तापमान और हीटवेव को देखते हुए यह चयन केवल सुंदरीकरण के लिए नहीं, बल्कि जलवायु अनुकूल अधोसंरचना विकसित करने की रणनीति का हिस्सा है। कितने हेक्टेयर मे फैलेगा वन क्षेत्र उज्जैन की पहचान अब सिर्फ महाकाल नगरी तक सीमित नहीं रहेगी.शहर के नवलखी आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू विकसित किया जाएगा. यह आधुनिक जू पर्यटकों को वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में बेहद करीब से देखने का अनूठा अनुभव देगा. उज्जैन वन मंडल के डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार, यहां 300 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों को बसाने की योजना है.परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि प्रशासनिक के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है. पहला चरण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  पहले चरण में लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र काम यह फॉरेस्ट जू दो चरणों में तैयार होगा. पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित किया जाएगा, जहां केवल भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास जैसे माहौल में रखा जाएगा. यहां विशाल ड्राइव-थ्रू सफारी, खुले प्राकृतिक बाड़े और अत्याधुनिक विजिटर सुविधाएं होंगी. पर्यटक बिना जंगल जैसा रोमांचक अनुभव ले सकेंगे, जिससे वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी।  दूसरे चरण मे दिखेंगे दुर्लभ वन्यजीव फॉरेस्ट जू के दूसरे चरण में इसे ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ थीम के आधार पर विकसित किया जाएगा. इस चरण में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दुर्लभ वन्यजीवों को शामिल करने की योजना है. उद्देश्य यह है कि उज्जैन का यह फॉरेस्ट जू केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने।  अनोखी डिजाइन मे दिखेगा जू  उज्जैन में बनने वाला विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू अपनी अनोखी डिजाइन के कारण खास होगा. जू का क्षेत्र फोरलेन और पंचकोशी मार्ग से दो हिस्सों में बंटा होने के बावजूद, 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और अंडरपास दोनों हिस्सों को जोड़ेंगे. ओवरब्रिज पर बैटरी संचालित इलेक्ट्रिक सफारी और पैदल पर्यटकों के लिए अलग रास्ते होंगे, जबकि घने पेड़-पौधे वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण का एहसास कराएंगे. परियोजना के पहले चरण में 60 हेक्टेयर में ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित होगा, जहां केवल भारत के वन्यजीव प्राकृतिक आवास जैसे खुले वातावरण में नजर आएंगे. ड्राइव-थ्रू सफारी और आधुनिक सुविधाएं पर्यटकों को असली जंगल जैसा रोमांचक अनुभव देंगी।  घाट, उद्यान और जलाशय भी होंगे अभियान का हिस्सा निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और संपर्क मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के तट, शासकीय परिसरों और विभिन्न संस्थागत क्षेत्रों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि उनके संरक्षण, देखभाल और जीवित रहने की नियमित निगरानी की जा सके। आस्था और प्रकृति संरक्षण का साझा संकल्प सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे वृक्षों को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। धार्मिक ग्रंथों में पौधारोपण को पुण्य और यज्ञ के समान बताया गया है। ऐसे में सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित यह 10 लाख पौधों का अभियान केवल हरियाली बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर प्राकृतिक विरासत तैयार करने का सामूहिक संकल्प भी माना जा रहा है। प्रशासन निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण करेगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के किनारे, शासकीय परिसरों और संस्थागत क्षेत्रों को भी इस हरित अभियान से जोड़ा गया है। पौधों की होगी जियो-टैगिंग, सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि संरक्षण और जीवित रहने की भी लगातार निगरानी की जा सके। सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे पेड़ों को देवतुल्य माना गया है। पुराणों में पौधारोपण को यज्ञ और पुण्य का कार्य बताया गया है। ऐसे में सिंहस्थ-2028 के लिए 10 लाख पौधों का अभियान केवल हरियाली बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण का सामूहिक संकल्प भी है। फैक्ट फाइल     3 लाख से ज्यादा गड्ढों की खोदाई पूरी।     10 से 12 फीट ऊंचे होंगे लगाए जाने वाले पौधे।      29 किमी निर्माणाधीन घाट और मार्गों पर भी पौधारोपण होगा।      400 से ज्यादा उद्यान भी हरित अभियान से जुड़ेंगे।   

Fish Farming Subsidy: बिहार में मछली पालन के लिए 60% अनुदान, जानें आवेदन की अंतिम तिथि

पटना  बिहार सरकार राज्य में तेजी से कम हो रही देसी मछलियों की प्रजातियों को बचाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना शुरू की है. इसके तहत किसान और इच्छुक लोग देसी मछली पालन पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी/अनुदान का लाभ ले सकते हैं।  इस योजना का मुख्य लक्ष्य देसी मछलियों की घटती प्रजातियों को बचाना और संरक्षण करना है. साथ ही  मछली पालकों (किसानों और मछुआरों) की आय को बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि लोग पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन भी शुरू करें और अच्छी कमाई करें।  इस सरकारी योजना के तहत माइनर कार्प, कैट फिश, वायु-श्वासी मछलियां, झींगा (श्रिंप) पालन और मोती उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. जिसमें निर्धारित लागत का 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से मछली पालन की लागत काफी कम हो जाएगी. मत्स्य विभाग के अनुसार, इस योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जिसके लिए 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  कैसे करें आवेदन?     इस योजना का लाभ लेने के लिए सिर्फ ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे.     इच्छुक लाभार्थी fisheries.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.     आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई है. बिहार के सभी 38 जिलों में लागू होगी योजना विभाग ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह योजना बिहार के सभी 38 जिलों में लागू रहेगी. योजना के तहत निजी या सरकारी तालाबों, जिन्हें पट्टे पर लिया गया हो, को भी सब्सिडी का लाभ मिलेगा. इसके लिए विकसित हैचरी तकनीक से तैयार अच्छी गुणवत्ता के मछली बीज उपलब्ध कराकर पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।  इन योजनाओं पर मिलेगा लाभ     माइनर कार्प पालन मत्स्यिकी योजना (छोटी देशी मछलियां)     कैट फिश और अन्य देसी मछलियों की पालन योजना     झींगा पालन योजना     मोती पालन योजना बता दें कि एक व्यक्ति या परिवार को पालन मत्स्यिकी के केवल एक अवयव पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से एक ओर जहां विलुप्त होती देशी मछलियों का संरक्षण होगा. वहीं, दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे. मत्स्य पालन से जुड़े किसान आधुनिक तकनीक के साथ देशी प्रजातियों का पालन कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे। 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में अरपा-बिहान के विष्णुभोग चावल की धूम, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सराहा

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : अरपा-बिहान के विष्णुभोग चावल को मिला जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का भरपूर समर्थन महज 30 मिनट में 45 हजार रुपये से अधिक के विष्णुभोग चावल की हुई बिक्री गौरेला-पेंड्रा-मरवाही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा उत्पादित एवं प्रसंस्कृत अरपा-बिहान विष्णुभोग चावल को जिले में लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के जिले के प्रवास एवं असेंबली हॉल पेण्ड्रा में आयोजित स्थानीय जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं नागरिकों ने विष्णुभोग चावल की सराहना करते हुए उत्साहपूर्वक इसकी खरीदी की।            कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपची, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं से विष्णुभोग चावल खरीदकर उनका उत्साहवर्धन किया। स्थानीय निवासी पंकज तिवारी ने 200 किलोग्राम विष्णुभोग चावल खरीदकर अब तक के सबसे बड़े खरीदार बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके अलावा रायपुर एवं जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों ने भी चावल खरीदकर महिलाओं के उत्पादों को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम के दौरान मात्र 30 मिनट में महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) द्वारा 45 हजार रुपये से अधिक मूल्य के विष्णुभोग चावल की बिक्री की गई, जिसे महिलाओं के आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।            उल्लेखनीय है कि विष्णुभोग धान का उत्पादन स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से किया जाता है। बिहान के अंतर्गत गठित महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से धान का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन किया जाता है, जिससे उत्पाद को बेहतर बाजार और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मुकेश रावटे द्वारा जिले के विभिन्न कार्यक्रमों एवं मंचों पर विष्णुभोग चावल को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे इसकी मांग और उत्पादन दोनों में वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि मिशन के अंतर्गत 179 सीएमएसए ग्रामों का चयन किया गया है। इस वर्ष 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विष्णुभोग धान का उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें।

3 साल तक मिले सिर्फ आश्वासन, डिंडौरी के आदिवासियों ने खुद बनवा दिया सरकारी स्कूल

डिंडौरी सरकारी दावों और खोखले आश्वासनों से जब मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के आदिवासियों का सब्र टूट गया, तो उन्होंने सिस्टम के भरोसे बैठना छोड़ दिया। जिले के समनापुर ब्लॉक के एक आदिवासी बहुल गांव में ग्रामीणों ने मिलकर खुद ही अपने बच्चों के लिए स्कूल की इमारत खड़ी करने का फैसला कर लिया। इसके लिए न केवल फंड जुटाया गया, बल्कि गांव के पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग खुद राजमिस्त्री और मजदूर बनकर तगाड़ी-फावड़ा उठाए नजर आ रहे हैं। दरअसल, इस आदिवासी टोले में एकमात्र सरकारी प्राथमिक स्कूल था, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने तीन साल पहले 'जर्जर और असुरक्षित' घोषित कर जमींदोज कर दिया था। अधिकारियों ने तब जल्द ही नया भवन बनाने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी वहां एक ईंट तक नहीं रखी गई। 100 परिवारों ने जोड़े 500-500 रुपये सरकारी फाइलों में बजट की लेट-लतीफी से बच्चों की पढ़ाई दांव पर लगी देख, इस महीने गांव के करीब 100 परिवारों ने एक आपात बैठक बुलाई। तय हुआ कि हर घर से 500-500 रुपये का योगदान दिया जाएगा ताकि निर्माण सामग्री खरीदी जा सके। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पूरा गांव मिलकर सीमेंट का मसाला तैयार कर रहा है, ईंटें ढो रहा है और स्कूल की नींव तैयार कर रहा है। प्रशासन को 'गिफ्ट' करेंगे स्कूल ग्रामीणों का कहना है कि दर्जनों अर्जियां और अफसरों के साथ कई बैठकें बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने यह सामूहिक कदम उठाया है। ताज्जुब की बात यह है कि ग्रामीणों ने तय किया है कि वे स्कूल तैयार होने के बाद इसे जिला प्रशासन को 'गिफ्ट' कर देंगे ताकि वहां शिक्षक भेजे जा सकें। उधर, इस पूरे मामले पर जिला परियोजना समन्वयक (DPC) दिवाकर तिवारी ने ग्रामीणों के गुस्से को जायज ठहराया है। उन्होंने दबी जुबान में अपनी लाचारी कबूल करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग को अभी तक स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी फंड ही प्राप्त नहीं हुआ है।