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योगी सरकार का जोर: जल जीवन मिशन को मिला बढ़ा हुआ बजट, लक्ष्य जल्द पूरा होगा

योगी सरकार में जल जीवन मिशन को मिल रहा भरपूर बजट, जल्द पूरा होगा लक्ष्य केंद्र और प्रदेश सरकार के लगभग 28 हजार करोड़ रुपये से पूरे होंगे अधूरे काम जल जीवन मिशन 2.0 के विस्तार से ग्रामीण जनता को राहत देगी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) न केवल एक सरकारी योजना है, बल्कि यह ग्रामीण जीवनशैली में एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मिशन को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्र से उत्तर प्रदेश के लिए 13,425 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित हो चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये वर्ष 2026-27 में योजनाओं को पूरा करने के लिए देगी। इस 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में कोई बाधा नहीं आएगी।  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में 2.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को अब जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए हासिल किया जाएगा। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुका है। इसमें जल जीवन मिशन की डेड लाइन जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है। साथ ही जारी वित्तीय वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश को 13,425 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं। एसडब्ल्यूएसएम, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि मिशन के नए स्वरूप और बजट के साथ नई जिम्मेदारियों को भी जोड़ा गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विंध्य और बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई इलाकों में पानी में रासायनिक तत्वों की जांच कर उन्हें पीने योग्य बनाना सबसे जरूरी है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। जनभागीदारी भी इसका दूसरा सबसे अहम बिंदु है। प्रदेश में जलापूर्ति के लिए जितने भी पंप हाउस, पानी की टंकी समेत अन्य निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम एवं पेयजल स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) को सौंपा जाएगा। 10 वर्षों तक जल निगम, (वीडब्ल्यूएससी), निर्माण एजेंसियां व ठेकेदार मिलकर इनके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करेंगे। पानी के स्रोत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि एक बार निर्माण हो जाने के बाद कोई भी बोरवेल, पंप या पानी का स्रोत सूखे नहीं। इससे सभी ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी। प्रभास कुमार ने बताया कि वर्ष 2027 में सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सभी नई प्राथमिकताओं को प्रदेश में लागू कराया जाएगा। तेजी से पूरा किया जा रहा लक्ष्य विभाग के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत अभी तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026-27 में 2.62 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य पूरा करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा दांव, मंत्रिमंडल में 60% ओबीसी व एससी समाज शामिल

 लखनऊ  सत्ता की हैट-ट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार के जरिए जातीय से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों के संतुलन का रणक्षेत्र सजा लिया है। 19वीं विधानसभा के लिए लगभग आठ माह बाद होने वाले चुनाव को लेकर सपा जिस पीडीए के अस्त्र को धार दे रही है, भाजपा ने विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर उसको कुंद करने का बड़ा दांव चला है। सपा चुनाव के लिए जाट, गुर्जर, पाल, वाल्मीकि, पासी आदि जातियों में पैठ बढ़ाने में जुटी है। भाजपा ने सपा की इसी रणनीति को ध्वस्त करने का ताना-बाना मंत्रिमंडल के सहारे बुना है। ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ दो को प्रोन्नत किया गया है। दलित समाज से भी दो और मंत्री बनाए गए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब 60 प्रतिशत मंत्री ओबीसी और एससी समाज से पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। रविवार के विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज का ही प्रतिनिधित्व हो गया है। क्षत्रिय व वैश्व समाज की भागीदारी यथावत रखते हुए पार्टी ने सवर्ण समाज से एक मात्र मनोज पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर यूजीसी सहित अन्य मुद्दों को लेकर समाज में उपजी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया गया है। चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार के कई मायने चुनाव से आठ माह पहले किया गया विस्तार कई मायनों में अहम है। बनाए गए मंत्रियों को भले ही अन्य की तरह लंबा कार्यकाल नहीं मिलेगा लेकिन इस बहाने सत्ताधारी भाजपा, विरोधियों के साथ ही कार्यकर्ताओं को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। चूंकि प्रदेश की राजनीति आज भी जातीय संतुलन पर ही टिकी है, इसलिए दूसरे विस्तार में खासतौर से जातीय गणित का ही ध्यान रखा गया है। चुनाव में ओबीसी जातियों की निर्णायक भूमिका होने के नाते विस्तार में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में आने वाले लोध (कैलाश राजपूत), पाल (अजीत सिंह), विश्वकर्मा (हंसराज), गुर्जर (सोमेन्द्र तोमर) व जाट (भूपेन्द्र चौधरी) बिरादरी का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया है। इससे पहले भाजपा पिछड़े में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को पार्टी की कमान सौंप चुकी है। पिछड़े समाज को बनाया वोट बैंक सूबे की सत्ता हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की नजर पहले से ही राज्य के लगभग 44 प्रतिशत आबादी वाले पिछड़े समाज के वोट बैंक पर है। दोनों पार्टियों ने पिछड़े समाज से आने वाले नेताओं को ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप रखी है। अनुसूचित जाति से पहली बार वाल्मीकि (सुरेन्द्र दलेर) के साथ ही पासी(कृष्णा पासवान) बिरादरी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस संग सपा, पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए भाजपा को बड़ा झटका दे चुकी है। विस्तार के बाद अधिकतम 60 मंत्रियों वाले योगी मंत्रिमंडल में पिछड़े समाज से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित सर्वाधिक 25 मंत्री हो गए हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के 11, सवर्ण समाज से भी 22 (ब्राह्मण समाज के आठ, राजपूत के छह, वैश्य के चार, दो भूमिहार, एक-एक खत्री व कायस्थ समाज से) मंत्री अब हो गए हैं। विस्तार के जरिए भाजपा ने जिस तरह से सवर्णों के साथ ही गैर यादव ओबीसी बिरादरी को साधने की कोशिश की है, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा के सामने इसमें सेंधमारी करने की ही बड़ी चुनौती होगी। विदित हो कि लोकसभा चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। यथावत ही रही सहयोगी दलों की हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भले ही काफी समय से एनडीए के सहयोगी दल बयानबाजी के साथ दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे थे लेकिन दूसरे विस्तार में किसी को भी मौका नहीं मिला। इसके बाद भी सहयोगी दलों के नेता पूरी तरह से शांत हैं। माना जा रहा है कि बिहार के बाद बंगाल, असम एवं पुडुचेरी विधान सभा चुनाव में भी मिली बड़ी जीत के बाद सहयोगी दल, भाजपा पर अब दबाव बनाने से बच रहे हैं। सहयोगी दलों को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह का माहौल भाजपा के पक्ष में बना हुआ है उसका असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी रहने वाला है। ऐसे में किसी तरह का दबाव बनाने से सत्ताधारी भाजपा में उनकी स्थिति बिगड़ सकती है। सपा सहित विरोधियों के साथ खड़े होने से फिलहाल फायदा मिलने का आसार नहीं है। 2017 में अपना दल और सुभासपा से हुआ था अलायंस गौरतलब है कि भाजपा वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपना दल ( सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी थी। सरकार बनने पर सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में निषाद पार्टी का भी भाजपा से गठजोड़ हुआ लेकिन मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए जाने पर सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से किनारा कर लिया। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी तो भाजपा के साथ रहीं लेकिन सुभासपा ने सपा के साथ चुनाव लड़ा था। छह विधायक भी जीते लेकिन सपा से अनबन के बाद राजभर ने फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व रालोद भी सपा से नाता तोड़कर भाजपा के साथ आ गई। भाजपा के साथ खड़े दलों का एक-एक विधायक वर्तमान में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री है।  

योगी सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर फोकस

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विश्वविद्यालयों के कायाकल्प के बाद, अब राज्य सरकार ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने का लक्ष्य तय किया है। जिस तरह यूपी के सात विश्वविद्यालयों ने नैक (NAAC) की 'A++' रैंकिंग हासिल कर देशभर में मिसाल पेश की है, ठीक उसी तर्ज पर अब डिग्री कॉलेजों को भी उत्कृष्ट श्रेणी में लाने के लिए 'मिशन मोड' में काम शुरू हो गया है। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेजों तक: रैंकिंग का नया रोडमैप उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का विजन अब केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है।  विशेष कार्यशालाएं: प्रदेशभर के डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें नैक रैंकिंग की बारीकियों, डेटा संकलन और गुणवत्ता सुधार के मंत्र दिए जा रहे हैं। रिसर्च और डिजिटल कल्चर: कॉलेजों को केवल 'डिग्री बांटने' वाला केंद्र न मानकर, उन्हें शोध (Research) और डिजिटल शिक्षा का हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बी-ग्रेड का दौर खत्म, ए++ की लगी झड़ी योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अक्सर रैंकिंग के मामले में पिछड़ जाती थी। ऐतिहासिक सुधार: पहले जहां विश्वविद्यालय बी या बी-प्लस ग्रेड तक ही पहुंच पाते थे, आज कुलाधिपति (राज्यपाल) और सरकार के साझा प्रयासों से राज्य के सात विश्वविद्यालय ए++ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं। ग्लोबल बेंचमार्क: उत्तर प्रदेश के दो विश्वविद्यालय अब 'क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग' में शामिल हैं, जबकि छह संस्थानों ने 'क्यूएस एशिया रैंकिंग' में अपनी जगह पक्की की है। तीन विश्वविद्यालय यूजीसी की 'ग्रेड-1' श्रेणी का गौरव हासिल कर चुके हैं। छात्र सुविधाएं और रोजगार: नई शिक्षा नीति का आधार उच्च शिक्षा में यह गुणात्मक सुधार केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ छात्रों को मिल रहा है।  इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और बेहतर छात्र सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।  नई शिक्षा नीति (NEP): पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाकर छात्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।  प्रतिस्पर्धा: कॉलेजों के बीच बेहतर रैंकिंग हासिल करने की होड़ से अंततः शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।  

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत में, पटना में घरेलू और व्यावसायिक गैस महंगी

पटना पटना में पीएनजी, सीएनजी और उद्योगों के उपयोग में आने वाली गैस की सभी श्रेणियों में इजाफा किया गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस के आयात में आ रही कमी के कारण गैस मूल्यों में इजाफा किया गया है। घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (डी-पीएनजी) की कीमतों में 50 पैसे प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके पहले इसकी कीमत 49.44 रुपये एससीएम थी। घरेलू गैस की कीमतों में इजाफा होने से पटना में डी-पीएनजी का उपयोग करने वाले 32 हजार उपभोक्ता सीधे प्रभावित होंगे। CNG के दाम में 1 रुपये की बढ़ोतरी व्यावसायिक कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। पटना में सीएनजी की बढ़ी हुई कीमत 89.90 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। पहले सीएनजी के दाम 88.90 रुपये प्रति किलोग्राम थे। इससे 40 हजार से ज्यादा वाहनों पर सीधा असर पड़ेगा। इन वाहनों में 15 से 20 हजार ऑटो और सामान ढोने वाले वाहन हैं। अप्रैल 2026 के बाद व्यावसायिक और औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस (सी-पीएनजी और आई-पीएनजी) की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। सी-पीएनजी की कीमत प्रति एससीएस 5.38 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब 93.27 रुपये प्रति एससीएम मिलेगी। इससे शहर के होटलों, रेस्टोरेंटों, बैंक्वेट हॉल आदि के परिचालन लागत में इजाफा होना तय है। औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमत में भी पांच रुपये प्रति एससीएम बढ़ी है। यह गैस अब उद्योगों को 85.95 और 86.25 रुपये प्रति एससीएम मिलेगी। पीएम मोदी ने देशवासियों से की सहयोग की अपील बता दें कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई दिनों से जारी जंग से कई देश लगातार प्रभावित हो रहे हैं। इस बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के मद्देनजर देश के लोगों से सहयोग करने की अपील की है। पीएम ने उन्होंने देश के नागरिकों से विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा समय का जो संकट है उसे देखते हुए हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर बहुत जोर देना होगा। उन्होंने कहा, “हमें तय करना होगा कि जब यह संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है तो कम से कम एक साल के लिए विदेशों में जाने की बातों को टालना चाहिए। भारत में बहुत सारी जगह हैं वहां हम जा सकते हैं। भारत में बहुत कुछ किया जा सकता है।” पीएम मोदी ने देश के लोगों से अगले एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील भी की है। इस दौरान उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल तथा रसोई गैस बचाने तथा सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की भी अपील की। तनाव कम होने के नहीं दिख रहे आसार इधर ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव कम होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने संबंधी उसके (ईरान) प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार देते हुए खारिज कर दिया है। डोनल्ड ट्रंप को रविवार को ईरान का प्रस्ताव प्राप्त हुआ और उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने में सफलता मिलेगी। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम, समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जिससे कई देश ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने रविवार को 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया, 'मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया – यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।' ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस से कहा, ‘मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह ठीक नहीं है। मुझे उनकी प्रतिक्रिया पसंद नहीं आई।’

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, 15 मई से लगेंगे विशेष सहायता कैंप

लखनऊ  ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। पूर्वांचल के उपभोक्ता 8010968292, मध्यांचल के 7669003409, पश्चिमांचल के 7859804803, दक्षिणांचल के 8010957826 तथा केस्को कानपुर के 8287835233 मोबाइल नंबर पर अपना बिजली कनेक्शन नंबर वाट्सअप कर बिल हासिल कर सकते हैं। अब नया बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के पोस्टपेड मोड में ही मिलेगा। प्रदेशभर में अब तक 83 लाख से अधिक प्रीपेड मोड में किए जा चुके स्मार्ट मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में करने के साथ ही उपभोक्ताओं को पहले की तरह जून से बिल देने के संबंध में पावर कारपोरेशन के एमडी ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए हैं। मई में उपभोग की गई बिजली का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। उपभोक्ताओं को अगले 15 दिन में बिल जमा करने की सुविधा मिलेगी। 15 दिन में बिल न जमा करने पर अगले सात दिन में कनेक्शन काट दिया जाएगा। 30 अप्रैल तक के बकाए बिल का घरेलू उपभोक्ता 10 किस्तों में जबकि अन्य श्रेणियों के उपभोक्ता तीन किस्तों में विलंब अधिभार सहित जमा कर सकेंगे। तकनीकी दिक्कतों के चलते स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चार मई को प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की थी। चार दिन बाद गुरुवार को कारपोरेशन के एमडी नितीश कुमार ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल डिस्काम व केस्को के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में परिवर्तित करने संबंधी निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि अब सभी नए कनेक्शन स्मार्ट मीटर के माध्यम से पोस्टपेड मोड में ही दिए जाएंगे। मई में बिजली खपत संबंधी बिल पोस्टपेड पद्धति में उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं। स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि स्मार्ट मीटर की आटोमैटिक रीडिंग न उपलब्ध होने पर मैनुअल रीडिंग कर अनिवार्य रूप से 10 तक बिल उपलब्ध कराया जाए। उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर रजिस्टर्ड न हो या गलत हो तो उसे डिस्काम के संबंधित वाट्सएप नंबर पर कनेक्शन संख्या के माध्यम से अपडेट कराने के बारे में बताया जाए। 1912 के माध्यम से भी बिल हासिल किया जा सकेगा

बिहार में विकास पर जोर, मंत्रियों को नीतीश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

 पटना बिहार सीएम की पद छोड़ने से पहले नीतीश कुमार ने कहा था कि वे राज्यसभा जा रहे हैं पर बिहार नहीं छोड़ेंगे। राज्य का विकास और जनता की सुख सुविधाओं का ख्याल रखेंगे। इसका असर दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सरकार की सभी योजनाओं का असर सीधे जनता तक दिखना चाहिए। सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रियों ने नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है कि सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने विभाग के कार्यों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन मंत्री अनिवार्य रूप से करें। नीतीश कुमार से रविवार को मिलने गये मंत्रियों को उन्होंने सरकार के आगे के कार्यकलापों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिये। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि सभी मंत्री अपने विभाग की योजनाओं को समय पर पूरा करायें। नियमित रूप से योजनाओं की निगरानी करें और जिलों में वह धरातल पर पूरी तरह से उतरे, इसे भी सुनिश्चित करायें। खासकर जदयू के नवनियुक्त मंत्री अपने-अपने विभागों में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने उनके आवास सात सर्कुलर रोड में रविवार को गये थे। इसके साथ ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी वहां पहुंचे थे। हालांकि, कई मंत्री शनिवार को भी अपने नेता नीतीश कुमार से मिले थे। रविवार को मिलने वालों में मंत्री अशोक चौधरी, लेशी सिंह और शीला कुमारी आदि शामिल रहीं। इस दौरान केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार न बीस सालों के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार की नई दिशा दी। विकास की नई इबारत लिखी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में उनके सीएम रहते काफी काम हुआ। सात निश्चय योजना के तहत रोजगार, नागरिक सुविधाएं और पार्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सम्राट चौधरी भी कहते हैं के नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेगी। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नीतीश कुमार ने भी जदयू नेताओं के साथ मीटिंग में बिहार में एक नई यात्रा का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा का कार्यों के बाद वे बिहार को ही समय देंगे। रविवार को मंत्रियों ने अपने नेता नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश कुमार के बेटे और बिहार से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी कहते हैं कि पिता के कार्यों को जन जन तक पहुंचाएंगे। निशांत बिहार की सद्भाव यात्रा की शुरुआत बाल्मीकिनगर से कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा सरकार के अभिभावक नीतीश कुमार हैं। उनके मार्गदर्शन का पालन किया जाएगा।

सरकार के तर्कों पर अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. राज्य सरकार ने बीते दिनों हाईकोर्ट में दलील देते हुए समय मांगा था. हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच दलीलों से सहमत नहीं दिखी. बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार भी लगाई. हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है. फिर दी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की दलील सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई. जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा, "आदेश निकायों को लेकर था तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है." कोर्ट ने सरकार के तर्क किए खारिज कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है. जून में हीटवेव चलती है और जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है. ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा. लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है. 18 मई को अवमानना याचिका दायर हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. वहीं, परिसीमन पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की डेडलाइन दी गई थी. अब सरकार और चुनाव आयोग ने समय मांगा है. जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.

2022 नियम उल्लंघन के कारण 3500 अभ्यर्थी 2027 नगर निकाय चुनाव में नहीं लड़ सकेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 अभ्यर्थियों को आगामी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की ओर से ये कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की गई है। ये वे प्रत्याशी हैं, जो चुनाव खर्च का सही ब्यौरा पेश नहीं कर पाए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित उपचुनाव के साथ साल 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां भी शुरु कर गी हैं। 2022 के चुनाव में जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित 30 दिन की अवधि में निर्वाचन व्यय का ब्योरा नहीं दिया था, उन्हें सुनवाई का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें आयोग के भोपाल स्थित कार्यालय आने की जरूरत भी नहीं है। NIC ने की ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने संबंधित अभ्यर्थी के जिला मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) से जुड़कर पक्ष रखने की व्यवस्था की है। हर गुरुवार सुनवाई के लिए डेढ़ घंटे निर्धारित किए हैं। अब तक करीब 3,500 अभ्यर्थियों के मामलों का निराकरण कर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया है। इसमें कुछ लोगों को 2 साल तो कुछ को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। यानी इस हिसाब से ये सभी 2027 के जून-जुलाई में होने वाले निकाय चुनाव तक अयोग्यता अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए ये चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। खर्च का हिसाब न देने वाले अयोग्य घोषित यही नहीं, जिन नेताओं को 5 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, वो 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नियम के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों में हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पाई-पाई का ब्यौरा देना जरूरी होता है। लेकिन, आयोग की जांच में सामने आया कि, इन 3500 अभ्यर्थियों ने या तो खर्च का हिसाब दिया और ना ही ऐसी जानकारी दी, जिसे पूरा और संतोषजनक माना जाए। आयोग ने इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन साक्ष्य पेश न कर पाने के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। भोपाल के 82 अभ्यर्थी प्रदेशभर की बात करें तो यहां 3500 के आसपास अभ्यार्थी अयोग्य घोषित किए गए हैं। जबकि, इनमें भोपाल के 82 और बैरसिया के 3 अभ्यर्थियों सहित जिला स्तर पर बड़ी सूची तैयार की गई है। बता दें कि, भोपाल में 100 डिफॉल्टरों की लिस्ट बनाई गई थी, इनमें से सिर्फ 12 ने ही स्पष्ट जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई है, इसी के चलते अब यही अभ्यार्थी आगे चुनाव लड़ सकेंगे, बाकी 82 को दो और पांच साल तक के लिए बाहर किया गया है। अयोग्यता की अवधि 2 से 5 साल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगा है, जो आगामी उपचुनावों या अगले स्थानीय चुनावों में फिर से दावेदारी की तैयारी कर रहे थे। अयोग्य घोषित होने के बाद अब ये अभ्यर्थी अयोग्यता की अवधि (2 से 5 वर्ष तक) पूरी होने तक किसी भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे। भोपाल में 82 अभ्यार्थियों पर एक्शन भोपाल के अलग अलग वार्डों में हुई इस कार्रवाई ने क्षेत्र के समीकरण तक बदल दिए हैं। 2 और 5 साल के लिए प्रतिबंधित होने वाले प्रमुख नामों में जिन्हें शामिल किया गया है, वो कुछ इस प्रकार हैं…। -वार्ड-1 से इमाम खां एडवोकेट, बेनी प्रसाद मीना को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड-2 से शेलेंद्र सोनू तोमर जैसे अभ्यर्थियों को 2 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। -वार्ड 12 से समीर खान और वसीम खान को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड 19 से ओसाफ अली, आदिल खां और महेंद्र सिंह को अयोग्य घोषित किया गया है। -अन्य दिग्गज: बसंती बाई, हरीश कुशवाह, इमाम हुसैन, रु म्याना रशीद, नंदा परिहार और अंजली यूनानी को भी अयोग्य घोषित किया है। पारदर्शिता से समझौता नहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि, चुनाव में धनबल के उपयोग पर लगाम लगाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने से आगे चुनाव लड़ने वाले ये सुनिश्चित करेंगे कि, अभ्यर्थी चुनाव लड़ने के 30 दिन के भीतर चुनाव खर्च का ब्यौरा देना है।

बरेली दूसरे और पीलीभीत तीसरे स्थान पर रहे

 लखनऊ  योगी सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। रामपुर ने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है जबकि बरेली ने दूसरा और पीलीभीत ने तीसरा स्थान हासिल किया है। रामपुर ने 10 में से 9.42 अंक प्राप्त कर बाजी मारी मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खासतौर पर जनशिकायतों के समाधान में जिले ने बेहतर कार्य करते हुए शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया। शिकायतों के निस्तारण के बाद प्राप्त सकारात्मक फीडबैक ने भी जिले की रैंकिंग को मजबूत किया। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.42 अंक प्राप्त हुए। इसके साथ ही रामपुर ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं, बरेली ने 9.41 अंक के साथ दूसरा और पीलीभीत ने 9.36 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। टॉप टेन जिलों में इटावा, हमीरपुर, महराजगंज ने स्थान प्राप्त किया सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें इटावा ने 9.35 अंक हासिल कर चौथा, हमीरपुर ने 9.33 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह महराजगंज ने 9.31 अंक हासिल कर छठवां, शाहजहांपुर ने 9.30 अंक हासिल कर सांतवां, सीतापुर ने 9.29 अंक हासिल कर आठवां, हरदोई ने 9.27 अंक हासिल कर नौवां और औरैया ने 9.26 अंक हासिल कर दसवां स्थान प्राप्त किया है। इन सभी जिलों ने जनशिकायतों के समाधान, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश के जिलों के बीच बेहतर कार्य करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड योगी सरकार का एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योगी सरकार को जिलों के प्रदर्शन की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होता है, वहां प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

कोयला चोरी और ओवररिपोर्टिंग पर लगेगी लगाम, डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता

 धनबाद कोयला स्टाक की मैन्युअल जांच में लगातार सामने आ रही ओवररिपोर्टिंग, गलत आकलन और कोयले की हेराफेरी की शिकायतों के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने नई हाईटेक व्यवस्था लागू कर दी है। संशोधित 'न्यू येलो बुक' के तहत पहली बार थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और आधुनिक डिजिटल तकनीक से कोयला स्टाक की जांच पूरी कर ली गई है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह जांच कर रिपोर्ट भी कोल इंडिया मुख्यालय को सौंप दी गई है। नई तकनीक लागू होने से स्टाक की ओवररिपोर्टिंग, कोयला चोरी और हेराफेरी पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हुआ है। इसके साथ ही उत्पादन, डिस्पैच और उपलब्ध स्टाक के आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ी है तथा भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिली है। अप्रैल 2026 से संशोधित नियम लागू होने के बाद अब खदानों में स्टाक की माप पूरी तरह वैज्ञानिक और डिजिटल प्रणाली से की जा रही है। हेरफेर की बनी रहती थी आशंका अब तक अधिकांश खदानों में कोयला स्टाक की माप पारंपरिक सर्वे और मानवीय अनुमान के आधार पर की जाती थी। इस प्रक्रिया में त्रुटि और हेरफेर की आशंका बनी रहती थी। कई परियोजनाओं में वास्तविक स्टाक से अधिक कोयला दिखाने, रिकॉर्ड में अंतर और चोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही थीं। सूत्रों के अनुसार कई बार स्टाक के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिलने के बावजूद सटीक सत्यापन संभव नहीं हो पाता था। नई येलो बुक लागू होने के बाद पहली बार कोयला स्टाक की जांच थ्रीडी लेजर स्कैनर से की गई। जांच के दौरान पूरे कोयला स्टाक की त्रिआयामी डिजिटल स्कैनिंग कर वास्तविक आयतन और घनत्व का सटीक आकलन किया गया। इसके बाद विशेष साफ्टवेयर के माध्यम से सीधे स्टाक और वाल्यूम की गणना की गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से प्राप्त आंकड़े पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक सटीक और पारदर्शी पाए गए हैं। इसके बाद अब इसे सभी परियोजनाओं और ओपनकास्ट खदानों में लागू कर दिया गया है।