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चार दशक की बदलाव यात्रा! ग्रामीण भारत में ISECТ इंडिया की परिवर्तनकारी पहल ने बदली लाखों जिंदगियां

भोपाल  भारत के विकास का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उसके लाभ गांवों, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचें। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी यही चुनौती लंबे समय तक बनी रही। एक समय ऐसा था, जब कंप्यूटर शिक्षा केवल महानगरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिकांश युवाओं के लिए आधुनिक तकनीकी शिक्षा तक पहुंचना एक कठिन सपना था। ऐसे समय में कुछ लोगों ने केवल परिस्थितियों को स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्हें बदलने का संकल्प लिया। ऐसे ही दूरदर्शी व्यक्तित्व थे वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार और चिंतक संतोष चौबे। वर्ष 1985 में उन्होंने ऑल इंडिया सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना इस विश्वास के साथ की कि भारत का भविष्य तभी सशक्त होगा, जब शिक्षा, तकनीक और कौशल का लाभ गांवों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का आधार थी। यही सोच आगे चलकर आईसेक्ट की कार्यसंस्कृति, विस्तार और विकास यात्रा की मूल प्रेरणा बनी। इस सोच को व्यवहार में उतारते हुए वर्ष 1986 में भोपाल में पहला प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। यह केवल एक शिक्षण केंद्र नहीं था, बल्कि ग्रामीण भारत में तकनीकी शिक्षा के लोकतांत्रीकरण की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम था। संस्था ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ही प्रशिक्षक बनाया, जिससे शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, नेतृत्व और आत्मविश्वास के नए अवसर विकसित हुए। धीरे-धीरे यह प्रयास एक व्यापक सामाजिक पहल में बदलने लगा। आईसेक्ट ने यह सिद्ध किया कि यदि आधुनिक शिक्षा को स्थानीय आवश्यकताओं और समुदाय की भागीदारी से जोड़ा जाए, तो परिवर्तन दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।   शिक्षा से कौशल, कौशल से आत्मनिर्भरता वर्ष 1995 आईसेक्ट की विकास यात्रा का महत्त्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। इसी अवधि में संस्था ने अपने कार्यों का विस्तार करते हुए बहुउद्देशीय प्रशिक्षण केंद्र की अवधारणा विकसित की। इन केंद्रों में शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और सामुदायिक विकास की गतिविधियों को एक साथ जोड़ा गया। इससे प्रशिक्षण केंद्र केवल शिक्षण संस्थान नहीं रहे, बल्कि स्थानीय विकास के केंद्र के रूप में विकसित होने लगे। इसी समय अधिकृत केंद्र मॉडल को अपनाकर स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को संस्था के साथ जोड़ा गया। इससे शिक्षा के विस्तार में जनभागीदारी बढ़ी और अनेक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर भी बने। जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के प्रति समाज का विश्वास बढ़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा की स्वीकार्यता मजबूत हुई। संस्था के बढ़ते कार्यक्षेत्र को अधिक व्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्ष 2003 में आईसेक्ट लिमिटेड की स्थापना की गई। इसके साथ शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार और अधिक संगठित रूप में आगे बढ़ा। यही वह दौर था, जब आईसेक्ट ने प्रशिक्षण संस्था की सीमाओं से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास को एक-दूसरे से जोड़ने वाले व्यापक मॉडल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।   उच्च शिक्षा, नवाचार और भविष्य की तैयारी तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार करने के बाद आईसेक्ट ने उच्च शिक्षा को भी अपनी विकास यात्रा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उद्देश्य स्पष्ट था कि महानगरों तक सीमित गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को राज्यों और क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाना, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अवसर अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें। इस दिशा में वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इसके बाद वर्ष 2010 में भोपाल में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, 2016 में झारखंड के हजारीबाग में आईसेक्ट विश्वविद्यालय, 2018 में बिहार के वैशाली तथा मध्य प्रदेश के खंडवा में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। आगे बढ़ते हुए वर्ष 2023 में भोपाल में स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय की स्थापना ने कौशल आधारित उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान की। इन विश्वविद्यालयों के माध्यम से शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रखकर कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग-शिक्षा समन्वय और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण का प्रयास किया गया, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यवहारिक दक्षता भी प्रदान कर सके। इसी अवधि में डिजिटल प्रौद्योगिकी ने देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन में व्यापक परिवर्तन किए। शिक्षा और सेवाओं का स्वरूप भी तेजी से बदला। आईसेक्ट ने इस परिवर्तन के साथ कदम मिलाते हुए डिजिटल माध्यमों, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया। इससे अनेक युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिला।   चार दशक, एक सतत संकल्प चार दशकों की इस यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह रहा कि आईसेक्ट ने विकास का केंद्र ग्रामीण भारत को बनाया। जहां अनेक शैक्षणिक पहले बड़े शहरों तक सीमित रहीं, वहीं संस्था ने गांवों, छोटे कस्बों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास का आधार तैयार करने का प्रयास किया। स्थानीय युवाओं को अवसर देना, समुदाय की भागीदारी बढ़ाना और शिक्षा को आत्मनिर्भरता से जोड़ना इस यात्रा की प्रमुख विशेषताएं रहीं। वर्ष 2026 में आईसेक्ट इंडिया के रूप में नई पहचान अपनाना इसी निरंतर विकास का अगला चरण है। यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टि का प्रतीक है, जिसके केंद्र में भविष्य उन्मुख शिक्षा, कौशल, नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प है। आज भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में शिक्षा, कौशल और तकनीक की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। चार दशकों की यह यात्रा इस विश्वास को सशक्त करती है कि जब शिक्षा समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ती है, जब अवसर गांवों तक पहुंचते हैं और जब युवा अपनी प्रतिभा को विकसित करने का अवसर पाते हैं, तब परिवर्तन केवल व्यक्तियों के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला बन जाता है। इसी विश्वास के साथ आईसेक्ट इंडिया की चालीस वर्षों की यात्रा आज एक नए पड़ाव … Read more

यूपी के शिक्षकों को बड़ी सौगात! चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के करीब 12 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रितों के लिए बड़ी राहत की खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को सुबह 10 बजे वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे. इस योजना के शुरू होते ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने लगेगी।  इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इलाज के समय शिक्षकों और उनके परिवारों को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. तय अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे आर्थिक बोझ काफी कम होगा. लंबे समय से शिक्षक इस तरह की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की मांग कर रहे थे।  इसके साथ ही प्रदेश के करीब 1.10 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 1,200 रुपये भी भेजे जाएंगे. यह राशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, स्वेटर और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री के लिए दी जाएगी. इसके अलावा करीब 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अन्य लाभ भी दिए जाएंगे, जिससे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और मजबूत होगी।  वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को दोपहर 2 बजे चित्रकूट और मानिकपुर में 951 करोड़ रुपये की लागत वाली 124 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे. इन परियोजनाओं के जरिए सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। 

जाति प्रमाण पत्र विवाद पर मंत्री प्रतिमा बागरी का जवाब, बोलीं- 110 साल पुराने दस्तावेज दिए, फैसला जांच समिति करेगी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मंगलवार को अपने अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को लेकर लगे आरोपों को खारिज किया। बागरी ने कहा कि उन्होंने राज्य की उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष सभी दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत कर दिए हैं और उनका जाति प्रमाण पत्र वैध है। विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बागरी अनुसूचित जाति श्रेणी से नहीं आती हैं और उन्होंने गलत जानकारी के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। क्या लगा था आरोप उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा बागरी राजपूत समुदाय से हैं और आरोप लगाया कि उन्होंने आरक्षित रैगांव निर्वाचन क्षेत्र से 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा और बाद में एक अमान्य जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करके मंत्री बनीं। अहिरवार ने उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द करने, विधानसभा से अयोग्य घोषित करने और राज्य मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की थी। सोमवार को जांच समिति के सामने पेश हुईं प्रतिमा बागरी ने बताया कि वह सोमवार को जाति जांच समिति के सामने पेश हुईं और अपने दावे के समर्थन में सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि समिति के साथ बैठक हुई थी और उन्होंने 110 साल से अधिक पुराने सबूतों सहित सभी दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। दस्तावेजों की जांच के बाद किसी को भी कोई अनियमितता नहीं मिली और उनका जाति प्रमाण पत्र असली है। मंत्री ने दर्ज कराया था बयान सोमवार को बागरी ने समिति के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अनुसूचित जाति सूची में बागड़ी समुदाय के शामिल होने से संबंधित दस्तावेज सहित दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए। अहिरवार भी समिति के समक्ष पेश हुए और उनकी जातिगत स्थिति को चुनौती देने वाले दस्तावेज प्रस्तुत किए।     प्रतिमा बागरी ने कहा- मेरा जाति प्रमाण पत्र सही     जांज समिति को मेरे जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति नहीं     मंत्री ने कहा- 110 साल पुराने दस्तावेज समिति को सौंपे     जांच समिति का फैसला आना अभी बाकी है जांज समिति का फैसला आना बाकी कांग्रेस नेता के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री प्रतिमा बागरी ने उन पर राजनीतिक कारणों से झूठे दावे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है और यह साबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि अहिरवार ने झूठे आरोप लगाए हैं और मीडिया के सामने गलत तथ्य पेश किए हैं, और अब सच्चाई सामने आ गई है। जांच समिति दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर रही है और अपनी जांच पूरी करने के बाद इस मामले पर फैसला सुनाएगी।

मानसून से पहले पंजाब सरकार का बड़ा कदम, बाढ़ से बचाव के लिए 414.75 करोड़ रुपये किए खर्च

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने मानसून सीजन के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने मंगलवार को जल संसाधन विभाग के मुख्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर बाढ़ सुरक्षा और ड्रेनेज प्रबंधन कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी बाढ़ संभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखी जाए तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार लोगों के जान-माल, कृषि भूमि और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पूरे राज्य में मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किया है ताकि मानसून के दौरान किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। उन्होंने अधिकारियों को नदियों, ड्रेनों, बांधों और अन्य बाढ़ सुरक्षा ढांचे की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा जहां भी कोई कमी मिले, उसे तुरंत दूर करने के निर्देश दिए। तैयारियों का निरीक्षण जारी समीक्षा बैठक में ड्रेनों की सफाई, बोल्डर स्टोन और हाइब्रिड सुरक्षा कार्य, तटबंधों को ऊंचा और मजबूत करने, फ्लड कंट्रोल गेटों की कार्यशीलता तथा संवेदनशील स्थानों पर किए जा रहे सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने हाल ही में स्वयं विभिन्न बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर तैयारियों का निरीक्षण भी किया था। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राज्य में अब तक 101 बोल्डर स्टोन एवं हाइब्रिड सुरक्षा कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा 17 बांधों को ऊंचा उठाने, 22 तटबंधों को मजबूत करने, 188 ड्रेनों की सफाई और पांच फ्लड कंट्रोल गेटों के संचालन से जुड़े कार्य किए गए हैं। इन सभी परियोजनाओं पर लगभग 414.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गाद निकालने का काम किया गया मंत्री ने गाद निकालने के कार्यों की भी समीक्षा करते हुए कहा कि मानसून के चरम दौर से पहले सभी लंबित कार्य समय पर पूरे किए जाएं ताकि जल निकासी व्यवस्था सुचारु रहे और भारी बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने सभी फील्ड अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार, मुख्य अभियंता (ड्रेनेज) हरदीप सिंह मैंदीरत्ता सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत कई जिलों में अगले चार दिन बारिश के आसार

  पटना बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रवेश किए एक हफ्ता गुजर चुका है पर इस दौरान छिटपुट बारिश ही दर्ज की गई है। झमाझम बारिश के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। मौसम विभाग पटना के मुताबिक बुधवार को पटना समेत 19 जिलों में एक या दो स्थान पर, जबकि बाकी जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है। 4-5 दिनों में राज्य के अनेक स्थानों के तापमान में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी का पूर्वानुमान है। मंगलवार को पटना में हल्की बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया। बुधवार को एक या दो स्थानों पर बारिश के बाद दूसरे दिन पटना समेत 14 जिलों में मौसम का रुख सख्त रहेगा। आज से 4 दिन तक बारिश की संभावना पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मुजफ्फरपुर जिले में मौसम में बदलाव शुरू हो गया है। इससे तापमान में कमी आई है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले तीन दिनों में औसत बारिश 13.8 एमएम दर्ज की गई है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो दिनों तक धूप-छांव के बीच हल्की बारिश होते रहने के आसार है। उसके बाद अगले तीन दिनों तक मेघगर्जन, वज्रपात तेज झोंकेदार हवा के साथ झमाझम बारिश होने की संभावना है। मंगलवार को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मौसम विभाग के द्वारा अगले पांच दिनों का पूर्वानुमान जारी किया गया है। वरीय मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि आठ से 10 जुलाई तक आसमान में बादल छाये रहेंगे। कहीं-कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान 31 व न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा। 8-12 तारीख तक दक्षिण बिहार के हिस्सों में बारिश की संभावना भागलपुर में मानसून के सक्रिय होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। सुबह का मौसम सुहावना था। जिले के कुछ हिस्सों में 0.4 एमएम बारिश दर्ज की गई है। शहर के कई इलाकों में भी हल्की बारिश के कारण लोगों को बेहतर मौसम मिला। बिहार कृषि विवि (बीएयू) सबौर एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक आठ से 12 जुलाई तक दक्षिण बिहार के जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी चलने एवं हल्की से मध्यम वर्षा का अनुमान है। अधिकतम तापमान 33-34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। उक्त जानकारी बीएयू के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल अधिकारी डॉ. बिरेद्र कुमार ने दी। मौसम वैज्ञानिक डॉ. नेहा पारिक ने बताया कि मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस रहा। बीते दिनों में हुई वर्षा जल का लाभ उठाते हुए धान की सबौर दीप, किस्मों जैसे प्रभात, शुष्क सम्राट, सहभागी की बुआई 10 जुलाई तक किसान कर सकते हैं।

CG Transfer News: पांच जिला पंचायत CEO बदले, एक्का संभालेंगे SUDA का अतिरिक्त जिम्मा

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंगलवार को जारी आदेश के तहत पांच जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) का तबादला किया गया है। इसके अलावा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक रेमिजियुस एक्का को राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। आदेश के अनुसार, रेमिजियुस एक्का (भा.प्र.से. 2011) अपने वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ SUDA के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। इसके अलावा निम्न अधिकारियों के तबादले किए गए हैं – गजेन्द्र सिंह ठाकुर। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी को उप सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा पुनर्वास विभाग में पदस्थ किया गया है। प्रतीक जैन को जिला पंचायत बस्तर से जिला पंचायत कोरबा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। सुरुचि सिंह को जिला पंचायत राजनांदगांव से आयुक्त, नगर पालिक निगम भिलाई पदस्थ किया गया है। जयंत नाहटा को जिला पंचायत दंतेवाड़ा से जिला पंचायत धमतरी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। एम. भार्गव अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), डोंगरगढ़ को जिला पंचायत दंतेवाड़ा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। तनय खत्रा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कटघोरा को जिला पंचायत बस्तर का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। दुर्गा प्रसाद अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), घरघोड़ा को जिला पंचायत राजनांदगांव का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

कवर्धा दौरे पर CM विष्णु देव साय, आज नए BJP कार्यालय का उद्घाटन करेंगे मुख्यमंत्री

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह 11:10 बजे रायपुर से कवर्धा के लिए रवाना होंगे. कवर्धा में वे नवीन भाजपा कार्यालय का लोकार्पण करेंगे. इसके बाद दोपहर 1:30 बजे कवर्धा से रायपुर लौटेंगे. दोपहर 2:10 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्यमंत्री नया रायपुर स्थित मंत्रालय में कार्यालयीन कार्य करेंगे. इसके बाद शाम 4 बजे से 5:30 बजे तक साय कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता करेंगे. 5:30 बजे से 6:00 बजे तक मंत्रिमंडल उप समिति की बैठक में शामिल होंगे. शाम 6 बजे से 6:15 बजे तक मुख्यमंत्री शासकीय कर्मचारियों के लिए अल्पकालीन ऋण सुविधा योजना कार्यक्रम में भाग लेंगे. वहीं, रात 7:30 बजे डुमरतराई फेस-2 स्थित थोक बाजार में आयोजित नामकरण एवं लोकार्पण समारोह में शामिल होंगे. कार्यक्रमों के बाद रात 8:30 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे. मानसून सत्र से पहले आज होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक रायपुर. मानसून सत्र से पहले आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी. शाम 4 बजे मंत्रालय महानदी भवन में होने वाली इस बैठक में 13 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र की तैयारियों और रणनीति पर चर्चा की जाएगी. बैठक में जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा. साथ ही प्रदेशहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और फैसलों पर कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना है. उद्योगों के वृक्षारोपण कार्यों की आज होगी समीक्षा रायपुर. आज पर्यावरण संरक्षण मंडल की अहम बैठक आयोजित की जाएगी. बैठक की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद करेंगे. बैठक में उद्योगों को दिए गए वृक्षारोपण लक्ष्यों और उनकी प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी. इसके साथ ही लगाए गए पौधों के संरक्षण और रखरखाव की व्यवस्था पर चर्चा होगी. उद्योगवार वृक्षारोपण कार्ययोजना की समीक्षा कर आगामी रणनीति भी तय की जाएगी. स्व. तीजन बाई को मुक्ताकाशी मंच से  दी जाएगी श्रद्धांजलि रायपुर. आज पद्म विभूषण स्वर्गीय तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी. दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच में आयोजित कार्यक्रम में लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें नमन करेंगे. श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री, सांसद, विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल होंगे. इसके अलावा पद्मश्री और राज्य अलंकरण से सम्मानित अनेक कलाकार भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर स्व. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

बाबरी ढांचे पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले दे रहे आस्था पर उपदेश, राम जन्मभूमि को बदनाम करने का प्रयास: सीएम योगी

रामभक्तों के सहयोग से भव्य राममंदिर निर्माण सहन नहीं हो रहा सपा व कांग्रेस से: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुल्तानपुर को दी ₹819 करोड़ से अधिक की 99 विकास परियोजनाओं की सौगात बाबरी ढांचे पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले दे रहे आस्था पर उपदेश, राम जन्मभूमि को बदनाम करने का प्रयास सपा-कांग्रेस चाहती हैं कि वक्फ की लूट जारी रहे और वे आस्था से खिलवाड़ करते रहें सुल्तानपुर,  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या धाम और राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर विपक्ष के दुष्प्रचार का मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रामभक्तों के सहयोग से प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनना समाजवादी पार्टी व कांग्रेस से सहन नहीं हो रहा है। रामभक्तों पर गोलियां चलाने वाले और बाबरी ढांचे के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वाले आस्था पर उपदेश दे रहे हैं। एसआईटी की रिपोर्ट पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बावजूद अयोध्या को टारगेट किया जा रहा है। ये लोग चाहते हैं कि वक्फ के नाम पर लूट मची रहे और वे मंदिरों को बदनाम करते रहें। यह दोहरा चरित्र जनता को स्वीकार नहीं। मुख्यमंत्री मंगलवार को जनपद सुल्तानपुर में ₹819 करोड़ से अधिक लागत वाली 99 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सुल्तानपुर व इसौली विधानसभा क्षेत्रों समेत पूरे जनपद के नागरिकों को इन कल्याणकारी योजनाओं के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। रामायण कालीन स्मृतियों से जुड़ी सुल्तानपुर की पावन धरा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का नया उत्तर प्रदेश 'विरासत और विकास' के अद्भुत समन्वय के साथ आगे बढ़ रहा है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और भारी बारिश के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में जनता का उमड़ना इस बात का प्रमाण है कि लोग विकास की राजनीति के साथ मजबूती से खड़े हैं। राम जन्मभूमि को बदनाम करने का प्रयास सीएम ने कहा कि अयोध्या में एक घटना घटित हुई। ट्रस्ट के विनम्र अनुरोध पर एसआईटी गठित की गई। जब तक यह नहीं गठित हुई थी, सपा-कांग्रेस व अन्य सेक्युलर दल इसकी मांग करते थे। एसआईटी की रिपोर्ट पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, लेकिन सपा-कांग्रेस ने पावन धाम आयोध्या को बदमान करने की मुहिम चला रखी है। राम जन्मभूमि को बदमान करने और आस्था पर प्रहार करने का कार्य किया जा रहा है। सपा के लोग कह रहे हैं कि अयोध्या की घटना से आस्था आहत हुई है। जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलाई हों, वे किस मुंह से आस्था की बात करते हैं? तुष्टीकरण की राजनीति पर कड़ा प्रहार सीएम ने तुष्टिकरण की राजनीति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा-कांग्रेस ने वक्फ कानून का विरोध किया, नागरिकता कानून का विरोध किया। ये लोग विकास का पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के निर्माण में खर्च करते थे, जबकि आज वही पैसा बथुआ धाम (बिजेथुआ महावीरन धाम) जैसे पवित्र मंदिरों के सौंदर्यीकरण और विकास पर खर्च हो रहा है। पहले 'चाचा-भतीजे' की जोड़ी युवाओं की नियुक्तियों और जमीनों पर डकैती डालती थी, जबकि वर्तमान सरकार ने बिना भेदभाव पूरी पारदर्शिता के साथ 9 वर्षों में 9 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरियां दी हैं। गत वर्ष पुलिस भर्ती में सुल्तानपुर के भी सैकड़ों युवाओं को भी नौकरी मिली है। माफिया राज बनाम मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कोई भी सार्वजनिक जमीन दिखने पर सपा का गुंडा पार्टी का झंडा लगाकर कब्जा कर लेता था। हमारी सरकार आई तो गुंडों के कब्जे से 64 हजार एकड़ जमीन खाली कराई गई। पिछली सरकार हर जनपद में एक माफिया और हर थाना क्षेत्र में गुंडा पालती थी, जो गरीबों, व्यापारियों और बेटियों को प्रताड़ित करते थे। लेकिन हमारी डबल इंजन सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज दे रही है। सुल्तानपुर में अब अपना मेडिकल कॉलेज संचालित हो चुका है और आज यहां नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए शिलान्यास भी किया गया है, जो बेटियों के लिए शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की गारंटी बनेगा।   शानदार कनेक्टिविटी और इंडस्ट्रियल क्लस्टर 2017 से पहले की बदहाल कानून-व्यवस्था और ठप पड़े विकास कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सुल्तानपुर बेहतरीन कनेक्टिविटी से जुड़ चुका है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, अयोध्या फोर-लेन, और प्रयागराज-वाराणसी मार्गों के सुदृढ़ीकरण से सुल्तानपुर की दूरी अब अयोध्या एयरपोर्ट से मात्र 45 मिनट और लखनऊ-प्रयागराज से महज डेढ़ घंटे की रह गई है। इसके साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर एक इंडस्ट्रियल क्लस्टर भी विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय नौजवानों को उनके गृह जनपद में ही रोजगार और नौकरी के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।     खेल और युवा शक्ति को प्रोत्साहन मुख्यमंत्री ने खेल क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि ओलंपिक में मेडल जीतने वाले उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल को सीधे डिप्टी एसपी पद पर नियुक्त किया गया है। राज्य में इंडोर स्टेडियम, ग्रामीण स्टेडियम और खेल के मैदानों का निर्माण कर युवाओं को एक बड़ा प्लेटफॉर्म दिया जा रहा है।   डबल इंजन सरकार ही करेगी विकास मुख्यमंत्री ने इसौली विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां डबल इंजन सरकार का प्रतिनिधि नहीं है, वहां विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं ली जा रही है। उन्होंने सुल्तानपुर की जनता से आह्वान किया कि सुरक्षित, समृद्ध और सुशासन युक्त व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार पर अपना आशीर्वाद और विश्वास इसी तरह बनाए रखें। इस सरकार ने बेटी-बहन, व्यापारी, आम नागरिक सबको समान सुरक्षा उपलब्ध कराई है। सुरक्षा का वातावरण बना तो निवेश आया, विकास के काम हुए, रेलवे लाइन-फ्लाइओवर बने। हाईवे, ब्रिज, फोर-सिक्स लेन सड़कें व बाईपास आदि बन रहे हैं। मासूम बच्ची ने छुए सीएम के पैर कार्यक्रम की शुरूआत में सीएम ने महिलाओं को पोषण पोटली दी और बच्चों का अन्नप्राशन कराया। इस दौरान मां के साथ मौजूद एक बच्ची ने सीएम के हाथ से चॉकलेट मिलने पर उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। सीएम ने यहां आयोजित प्रदर्शनी में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, निषाद राज वोट सब्सिडी योजना समेत कई स्टॉल्स पर जाकर जानकारी ली। उन्होंने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्टॉल पर मौजूद छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्हें चॉकलेट व स्कूल बैग किट भी प्रदान की। इस … Read more

सरदार सरोवर डैम विवाद खत्म! अमित शाह की मौजूदगी में MP, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता

केन्द्रीय गृह मंत्री शाह की मौजूदगी में ऐतिहासिक समझौता, महाराष्ट्र-गुजरात-राजस्थान-एमपी के बीच सुलझा सरदार सरोवर डैम का मुद्दा – सरदार सरोवर परियोजना का दीर्घकालिक मसला समाप्ति की ओर – परियोजना की निर्माण की लागत साझाकरण के मुद्दों पर था विवाद – चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किए हस्ताक्षर भोपाल/नई दिल्ली  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बीच नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में 7 जुलाई को नई दिल्ली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में केन्द्र एवं चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से नर्मदा अवॉर्ड के लंबित भुगतान का विवाद चल रहा था, जिसका आज सौहार्दपूर्ण समाधान निकल गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ यह हुआ है कि हम में एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है, राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं। सरकारों के रचनात्मक सहयोग की सराहना  केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने इस महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय परियोजना पर आम सहमति बनाने में मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों द्वारा दिए गए रचनात्मक सहयोग की सराहना की। मंत्री शाह ने कहा कि इस परियोजना से विशेषकर मध्यप्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान को बहुत लाभ हुआ। बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची। उन्होंने कहा कि राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, पर जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल के नेतृत्व में देश में चल रहे जल विवाद या जल वितरण से जुड़े विवाद एक-एक कर सुलझाए जा रहे हैं।  राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रख कर सुलझाएं मसले गृह मंत्री शाह ने कहा कि पिछले दिनों हरियाणा और राजस्थान के बीच का जल विवाद सुलझाया गया। चाहे किशाऊ बांध परियोजना का मुद्दा हो या राजस्थान, हरियाणा के बीच जल विवाद हो या आज का यह समझौता, ये सभी सहकारी संघवाद के स्वर्णिम उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि चाहे गुजरात हो, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा या महाराष्ट्र, पानी देश के लोगों, खासकर किसानों के ही काम आता है। मंत्री शाह ने कहा कि पानी का उपयोग चाहे देश के किसी भी हिस्से में हो उससे लाभान्वित होने वाला एक भारतीय ही होगा। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी विवाद से होने वाले राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रख कर उसे सुलझाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका लाभ अपने राज्य को भी मिलता है।

Shilp Sampada Yojana: हरियाणा के शिल्पकारों के लिए बड़ी सौगात, ₹10 लाख लोन और मुफ्त ट्रेनिंग

सिरसा पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े पिछड़े वर्ग के कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरियाणा पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम की शिल्प संपदा सावधि ऋण योजना एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। इस योजना के तहत राज्य सरकार पात्र शिल्पकारों को अपने व्यवसाय को आधुनिक संसाधनों और नई तकनीक से जोड़ने के लिए 10 लाख रुपये तक का सावधि ऋण उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत लाभार्थियों को न केवल वित्तीय सहायता दी जाएगी, बल्कि कंप्यूटर, कैड डिज़ाइन और अन्य आधुनिक तकनीकी उपकरणों का निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे कारीगर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार अपने उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन को बेहतर बना सकेंगे। किन्हें मिलेगा लाभ और पात्रता     आयु सीमा: आवेदक की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।     आय सीमा: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक न हो।     दस्तावेज: आवेदक हरियाणा का स्थायी निवासी हो और पिछड़ा वर्ग से संबंध रखता हो। आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बैंक विवरण और पासपोर्ट फोटो अनिवार्य हैं। पात्र आवेदक निगम के पोर्टल https://hbews.org.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। निगम के जिला प्रबंधक धर्मेंद्र खोथ ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक तंगी के कारण कई हुनरमंद कलाकार अपने पैतृक व्यवसाय को आगे नहीं बढ़ा पाते। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने और पारंपरिक कला को जीवित रखने में मील का पत्थर साबित होगी।