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बेंगलुरु की पहल: 59 भाषाओं में किताब पढ़कर सुनाने वाला AI स्मार्ट चश्मा तैयार

 बोकारो Blind Vision Foundation Bangalore की ओर से दृष्टिबाधित बच्चों की सुविधा के लिए स्मार्ट विजन चश्मा बनाया गया है। एआई व मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित यह चश्मा बच्चों की शिक्षा में सहयोग करेगा। वह बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी सहित 59 भारतीय भाषाओं में लिखित पुस्तकों को पढ़ कर सुनाएगा। उन्हें न केवल पाठ्य पुस्तकों, बल्कि जनरल नालेज की भी जानकारी देगा। यह चश्मा बच्चों को रास्ते में आने वाली बाधा, वाहन आदि की भी जानकारी देगा। साथ ही उनके स्वजनों को उनके सही लोकेशन की भी जानकारी उपलब्ध कराएगा। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों का सहारा बनेगा। उनके जीवन की राह को आसान करेगा। इसके माध्यम से बच्चे न केवल बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, अपितु जीवन की राह पर मजबूती से आगे कदम बढ़ा सकेंगे। ऐसे काम करता है स्मार्ट विजन चश्मा ब्लाइंड विजन फाउंडेशन बेंगलुरु के प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल ने कहा कि इस चश्मा के बीच में कैमरा लगा रहता है। चश्मा में सेंसर, बजर, बैटरी, फ्लैश लाइट, स्पीकर आदि लगा रहता है। स्मार्ट फोन में इससे संबंधित एप्लीकेशन डाउनलोड किया जाता है। इसमें लगे कैमरे व सेंसर उपयोगकर्ता के परिवेश को स्कैन करते हैं और एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो (आवाज) के रूप में बदलकर बताते हैं। चश्मे में लगा फ्रंट कैमरा उपयोगकर्ता के सामने की तस्वीर खींचता है, जबकि लिडार सेंसर आसपास की दूरी और बाधाओं का पता लगाते हैं। कैप्चर की गई छवियों और डेटा को एआई माडल द्वारा प्रोसेस किया जाता है। यह बाब्जेक्ट्स (कुर्सी, मेज आदि) लोगों के चेहरों और लिखित शब्दों को पहचानता है। चश्मे में लग बजर सक्रिय हो जाता है। स्पीकर से बीप की आवाज आने लगती है। उपयोगकर्ता को बताया जाता हैं कि उनके सामने दीवार, गड्ढ़ा, वाहन आदि हैं। वे किसी किताब के लिखे हुए शब्दों को पढ़कर सुनाते हैं। जैसे ही दृष्टिबाधित विद्यार्थी चश्मे के आगे पुस्तक को रखते हैं, वैसे ही चश्मे में लगा कैमरा उसकी तस्वीर खींच लेता है। इसके बाद एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो के रूप में बदल देता है। स्पीकर के जरिए उपयोगकर्ता को पुस्तक में लिखे शब्द सुनाए जाते हैं। वह इस डाटा को सुरक्षित रख सकता है। इसके माध्यम से परीक्षा की तैयारी कर सकता है। यह चश्मा भारत सहित विभिन्न देशों की करेंसी की भी पहचान करता है। बच्चों को जनरल नालेज से संबंधित जानकारी देता है। इसमें इमरजेंसी मोड होता है, जो उपयोगकर्ता का फोटो व लाइव लोकेशन स्वजनों को वाट्स एप पर उपलब्ध कराता है। साथ ही मोबाइल फोन से उनके लोकेशन की जानकारी देता है। उपयोगकर्ता अपनी पसंद के गाने भी सुन सकते हैं। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक है। कहा कि कारपोरेट सीएसआर के सहयोग से यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों को निश्शुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। आशा लता केंद्र के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल व प्राचार्य प्रमोद दुबे ने कहा कि इस चश्मा से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा। इसके सहारे बच्चे न केवल बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे, बल्कि बेहतर तरीके से रोजमर्रा के काम कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया बदली, रिश्तों के प्रमाण के लिए अब अलग दस्तावेज जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री वगैरह में आधार कार्ड को सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज माना जाएगा। उस पर दर्ज माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य संबंधों की जानकारी को रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। यूपी में संपत्तियों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब रजिस्ट्री कार्यालयों में आधार कार्ड को केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाएगा। आधार कार्ड पर लिखी माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक संबंधों की जानकारी को कानूनी रूप से रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों के लिए नया आदेश जारी कर दिया है। रिश्ते साबित करने के लिए दूसरे कागज देने होंगे। आदेश के अनुसार, जहां भी किसी आवेदन, योजना और विलेख में पारिवारिक संबंध का सत्यापन आवश्यक होगा, वहां आवेदकों को वैध सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। रिश्ते की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकारी संबंधी अभिलेख या सरकार द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। अब तक कई मामलों में संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान लोग आधार कार्ड पर दर्ज पारिवारिक जानकारी के आधार पर रिश्तों का सत्यापन करवा लेते थे। खास तौर पर विरासत, उत्तराधिकार या पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण के मामलों में आधार कार्ड का उपयोग किया जाता था। आगे से आधार कार्ड दिखाकर ऐसा करना बंद हो जाएगा। आधार कार्ड सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज महानिरीक्षक निबंधन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण है, न कि पारिवारिक संबंधों का। इसी स्पष्टीकरण के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। रजिस्ट्री से पहले तैयार कराने होंगे दस्तावेज नए नियम के लागू होने के बाद संपत्ति खरीदारों, विक्रेताओं और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में शामिल लोगों को रजिस्ट्री से पहले अपने संबंधों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होंगे। यदि किसी मामले में पारिवारिक संबंध साबित करना आवश्यक होगा, तो केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं माना जाएगा। निबंधन विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और गलत दस्तावेजों या रिश्तों के आधार पर होने वाले विवादों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि रजिस्ट्री कराने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। अब फैमिली प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में इन नियमों का पालन किया जाएगा।

बिहार में आम महोत्सव का भव्य आगाज, स्वर्णरेखा और मल्लिका किस्म के आम बने आकर्षण

पटना  बिहार के आम उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ने और उपभोक्ताओं तक रसायन-मुक्त आम पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित नाबार्ड आम महोत्सव-2026 का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। पटना के बिहार राज्य सहकारी संघ परिसर में शुरू हुए दो दिवसीय महोत्सव में जहां किसानों को बड़े खरीदारों और निर्यातकों से जुड़ने का अवसर मिला, वहीं आम प्रेमियों ने विभिन्न प्रजातियों के स्वादिष्ट आमों की खरीदारी कर मेले को जीवंत बना दिया। महोत्सव में स्वर्णरेखा और मल्लिका प्रजाति के   बड़े आकार के आम आकर्षण का केंद्र बने रहे। बिहार के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि आम केवल फलों का राजा नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जर्दालु, लंगड़ा, चौसा, दशहरी और फजली जैसी किस्में देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी विशेष गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने किसानों से आधुनिक खेती तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और विपणन के नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों और खरीदारों के बीच सीधा संपर्क नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि आम महोत्सव का उद्देश्य किसानों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं, थोक व्यापारियों और बड़े खरीदारों तक पहुंचा सकें। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत बागवानी और जनजातीय विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में 33 वाडी (बगीचा) परियोजनाएं संचालित हैं, इनसे करीब 19 हजार परिवारों को स्थायी आजीविका मिली है। इसके अलावा 302 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए गए हैं, जिनसे लगभग 1.40 लाख किसान जुड़े हैं। कार्बाइड-मुक्त आमों की रही मांग महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता किसानों द्वारा सीधे लाए गए कार्बाइड-मुक्त आम हैं। उपभोक्ताओं ने इन प्राकृतिक तरीके से पकाए गए आमों को हाथोंहाथ लिया। लोगों ने इसे सुरक्षित और स्वादिष्ट विकल्प बताते हुए खरीदारी में विशेष रुचि दिखाई। आयोजकों के अनुसार आम प्रेमियों को बागवानों से सीधे आम खरीदने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें ताजा और गुणवत्तापूर्ण फल उचित कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। स्वर्णरेखा और मल्लिका बने आकर्षण का केंद्र महोत्सव में प्रदर्शित आमों की विविधता ने आगंतुकों को खूब लुभाया। दूधिया मालदा, सफेद मालदा, बम्बईया, आम्रपाली, हेमसागर, जर्दालु, गुलाबखास, बीजू, बेलखास, लाल मोहन और लोकनायक जैसी किस्मों के बीच स्वर्णरेखा और मल्लिका ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। कई स्टालों पर एक किलोग्राम तक वजन वाले बड़े-बड़े आम लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने रहे। आगंतुक पहले इन आमों को देखने पहुंचे, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता की जानकारी मिलने के बाद खरीदार भी बन गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इन दुर्लभ किस्मों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। आम के साथ अचार की भी खूब बिक्री महोत्सव में केवल ताजे आम ही नहीं, बल्कि विभिन्न किस्मों के आम के अचार भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। महिलाओं और गृहिणियों ने स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए पारंपरिक अचारों में विशेष रुचि दिखाई। इससे किसानों और स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। बड़ी संख्या में पहुंचे किसान और अधिकारी कार्यक्रम में बिहार स्टेट को-ऑपरेशन फेडरेशन के अध्यक्ष विनय कुमार शाही, बिहार स्टेट को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, एनसीसीएफ एवं बिस्कोमान के अध्यक्ष विशाल सिंह, मुजफ्फरपुर को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष अमरनाथ पांडेय, गोपालगंज को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष महेश राय, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश सिंह तथा बिहार ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक दीपक कुमार सहित बैंकिंग एवं सहकारिता क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नाबार्ड के एजीएम डॉ. अनुपम लाल कुसमाकर ने किया जबकि सहायक महाप्रबंधक नवीन चंद्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आज भी जारी रहेगा महोत्सव आम महोत्सव 26 जून तक जारी रहेगा। समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों ने आम जनता से बड़ी संख्या में पहुंचकर बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध आमों का स्वाद लेने और किसानों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है

यूट्यूब-व्हाट्सएप जाल में फंसकर 72 लाख गंवाए, चित्तौड़गढ़ में बड़ी साइबर ठगी

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ में शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ के नाम पर 72 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है. गोपाल लाल शर्मा को टीना मल्होत्रा नाम की एक महिला ने आईआईएफएल कंपनी की फर्जी सेक्रेटरी बनकर अपना शिकार बनाया. ठगों ने पीड़ित को यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जाल में फंसाया और फर्जी ऐप डाउनलोड कराया. अधिक मुनाफे का लालच देकर पीड़ित और उनके परिवार के 7 अलग-अलग बैंक खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करा लिए. जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ऐप पर फिशिंग वॉर्निंग आ गई और आरोपियों के नंबर बंद हो गए. यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाया दरअसल, पीड़ित गोपाल राशमी उपखंड के पहुंना के रहने वाले हैं. फर्जी सेक्रेटरी टीना मल्होत्रा ने जमा कराई गई राशि पर 5 से 20 फीसदी तक प्रॉफिट होने का झांसा दिया था. इसके बाद 26 मार्च को डीएमए मार्केट ट्रेडिंग अकाउंट रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरवाया गया. जब पीड़ित ग्रुप से जुड़ा तो व्हाट्सएप ग्रुप में उसे यह टिप्स दिए जाते थे कि कौन-सा शेयर कब खरीदना है और कब बेचना है. ठगों ने पैसे ट्रांसफर करने के बाद व्हाट्सएप ग्रुप में ही स्क्रीनशॉट भी भेजे. 25 हजार से शुरू हुई ठगी, 72 लाख तक पहुंचा नुकसान 2 अप्रैल 2026 को पीड़ित ने आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में 25 हजार रुपए ट्रांसफर किए. इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच देकर 2 अप्रैल से 3 जून 2026 के बीच ठगों ने पीड़ित गोपाल और उनके परिवार के एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी, आईसीआईसीआई, कोटक महिंद्रा और फेडरल बैंक समेत अलग-अलग बैंक खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा लिए. पीड़ित गोपाल शर्मा ने बताया कि यह राशि होम लोन, पर्सनल लोन और उनकी पत्नी चन्द्रकला और पिता देवी लाल के खातों में जमा पैसे और परिचितों से लेकर जुटाई गई थी, जिसे ठगों ने बताए गए खातों में जमा करा लिया. 26 लाख से ज्यादा का फर्जी प्रॉफिट कुछ ही दिनों में आईआईएफएल वीआईपी ऐप पर 26 लाख 31 हजार 544 रुपए का प्रॉफिट दिखाया गया. जब पीड़ित ने पैसे विड्रॉल करने की रिक्वेस्ट डाली तो ऐप पर फिशिंग वॉर्निंग आ गई और अकाउंट में जीरो बैलेंस दिखाई देने लगा. कैसे खुला ठगी का राज? पीड़ित ने टीना मल्होत्रा समेत ग्रुप के अन्य सदस्यों से संपर्क किया, लेकिन सभी आरोपियों के नंबर बंद मिले. इसके बाद पीड़ित ने आईआईएफएल कंपनी से संपर्क किया, जहां बताया गया कि टीना मल्होत्रा नाम की कोई सेक्रेटरी कंपनी में नहीं है और न ही वह वहां काम करती है. इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ साइबर ठगी हो चुकी है. साइबर थाने में मामला दर्ज ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने 24 जून को साइबर पुलिस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस थाना चित्तौड़गढ़ में आईटी एक्ट की धारा 66डी और बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के तहत टीना मल्होत्रा और आर. वेंकटरमन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. साइबर पुलिस थानाधिकारी मधु कंवर मामले की जांच कर रही हैं.

बिहार में 100 साल पुराने जमीन के दस्तावेज़ खंगाले जाएंगे, रियासतों से मांगे गए कैडस्ट्रल खतियान

सहरसा. बिहार के विभिन्न जिलों में जमीन के कैडस्ट्रल सर्वे के दौरान तैयार खतियान सरकार के पास नहीं होने के कारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम सूचना जारी कर रैयतों से अपील की है कि अगर उनके पास यह है तो उसे उपलब्ध कराएं। खतियान को अंचल कार्यालयों और जिला अभिलेखागार में संरक्षित किया जाएगा। बिहार में ब्रिटिश काल में जमीन का सर्वे किया गया था। इसे कैडस्ट्रल सर्वे का नाम दिया गया था। इसके आधार पर खतियान तैयार किया गया। इसके बाद रीविजनल सर्वे किया गया। इससे नया खतियान बना। अब भी जमीन के पुराने विवाद पर दोनों खतियान का मिलान किया जाता है। इसके आधार पर भी मालिकाना हक मिलता है। सीओ मौनी बहन ने बताया कि सरकार ने सभी खतियान को डिजिटाइज्ड कर दिया है। इस क्रम में राज्य के 9334 मौजे का कैडस्ट्रल सर्वे उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। सौ साल से अधिक समय पहले का खतियान कैडस्ट्रल सर्वे ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1900 से 1910 के बीच किया गया था। कुछ क्षेत्रों में यह 1892 से 1920 तक चला था। यह बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 के तहत पहला व्यापक भू-सर्वेक्षण था। यह दस्तावेज काफी महत्वपूर्ण है। जिले में खासमहाल की जमीन को लेकर कैडस्ट्रल सर्वे से ही कई निर्णय लिए जा रहे हैं। इसके अलावा बड़े जमींदारों की जमीन का खतियान भी इसमें शामिल है।

मध्यप्रदेश पुलिस में बड़ा प्रमोशन, 8 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को मिलेगा IPS कैडर; DPC ने तय किए नाम

 भोपाल राज्य पुलिस सेवा के आठ (1997 बैच के एक और 1998 बैच के सात) अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे। गुरुवार को मंत्रालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में इनके नाम तय किए गए। लगभग दो माह में अधिसूचना जारी होने पर इन्हें आईपीएस संवर्ग आवंटित होगा। कुल नौ पदों के लिए डीपीसी की बैठक की गई थी, जिसमें 1997 बैच के अमृत लाल मीणा का नाम विचार में लिया गया, पर निर्णय घोषित नहीं किया गया। मीणा का जाति प्रमाण पत्र का मामला छानबीन समिति में लंबित है। वहीं, राजेश मिश्रा और संदीप मिश्रा के नामों पर विचार नहीं किया। राजेश मिश्रा के विरुद्ध विभागीय जांच चल रही है, जबकि संदीप मिश्रा की एसीआर अनुकूल नहीं होने के चलते उन्हें बाहर रखा गया है। डीपीसी में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य संजय वर्मा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और एसीएस होम संजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे। 27-28 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति यह डीपीसी वर्ष 2025 के लिए हुई है। पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को 2017 बैच आवंटित होगा। 27 से 28 वर्ष की सेवा के बाद इन्हें पदोन्नति मिलने जा रही है। बड़े राज्यों में सबसे देरी से पदोन्नति मध्य प्रदेश में ही हो रही है। तेलंगाना सहित कुछ राज्यों में तो 2010 से 2012 बैच तक के पुलिस अधिकारी पदोन्नत होकर आईपीएस बन चुके हैं। यानी पदोन्नति में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा 10 वर्ष पीछे चल रहे हैं। बता दें, राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में 13 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए भी शीघ्र डीपीसी की बैठक होने वाली है। इसमें वर्ष 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार चल रहा है। ये अधिकारी होंगे पदोन्नत 1997 बैच के सीताराम सस्त्या, 1998 बैच की मनीषा पाठक सोनी, निमिषा पांडेय, मलय जैन, अमित सक्सेना, सुमन गुर्जर, सव्यसाची सराफ और समर वर्मा।  

परियोजना बंद तो खत्म हुई नौकरी, संविदा वैज्ञानिक को राहत नहीं; पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत संविदा वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी  अपील   खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस परियोजना के लिए नियुक्ति की गई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और ऐसी स्थिति में संविदा सेवा को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जिसमें एकल पीठ द्वारा पारित 23 मार्च और 6 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मूल  याचिका अभी भी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। 2011 में जॉइन की थी सेवा याचिकाकर्ता दिव्या कौशिक की ओर से कहा गया कि उन्हें वर्ष 2011 में पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। उन्होंने  याचिका में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके पद को समाप्त कर दिया गया था। एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाई जाती है तो यथास्थिति का आदेश जारी रहेगा, अन्यथा परिषद उस आदेश से बाध्य नहीं होगी। इस आदेश को वापस लेने की मांग भी 6 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई थी। 5 वर्षों के लिए थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 'पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर' परियोजना पांच वर्ष की अवधि के लिए थी और यह 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है। इसलिए परियोजना के साथ सह-समाप्त (को-टर्मिनस) संविदा नियुक्ति भी स्वत  समाप्त हो गई। परिषद ने यह भी बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि परियोजना की अवधि समाप्त होने पर अनुबंध समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा पारित आदेश न तो अवैध हैं और न ही उनमें किसी प्रकार की त्रुटि है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और वह पूर्ण हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अपील खारिज कर दी।

डिग्री की देरी खत्म होगी, बिहार सरकार विश्वविद्यालय व्यवस्था में करेगी बड़ा बदलाव

पटना बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विश्वविद्यालयों के लिए नया कानून लाया जाएगा। नया अधिनियम दूसरे राज्यों एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ प्रणालियों पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सय्यद अता हसनैन की अध्यक्षता में पटना स्थित लोक भवन में शुक्रवार को हुई बैठक में यह सहमति बनी। इस बैठक में उच्च शिक्षा के विकास को लेकर कई फैसले लिए गए। यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स की डिग्री की लेटलतीफी को भी जल्द खत्म किया जाएगा, इस पर मिशन मोड में काम चल रहा है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शुक्रवार को करीब 1 घंटे तक चली इस बैठक में यूनिवर्सिटी के पठन-पाठन, नामांकन, नियुक्ति, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। लोक भवन के द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नई पहल की जानकारी दी गई। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर भी मौजूद रहे। नए डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की संविदा पर नियुक्ति सीएम सम्राट ने कहा कि राज्य में ऐसी व्यवस्था हो कि उच्च शिक्षा के लिए बिहार के बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़े। वहीं, राज्यपाल सय्यद अता हसनैन ने 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालय समर्थ पोर्टल के 26 मॉड्युल्स पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए। बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य में खुले 211 नए डिग्री कॉलेजों में केंद्रीयकृत तरीके से सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी। डिग्री की लेटलतीफी बंद होगी विद्यार्थियों की लंबित डिग्रियों के जल्द और समयबद्ध वितरण के लिए मिशन मोड में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि इस कार्य को 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनुशासन एवं नियमितता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों के ट्रांसफर और पदोन्नति के लिए समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी जानकारी भी दी गई। सामान्य स्थानान्तरण केवल जून माह में होंगे तथा इससे इतर ट्रांसफर केवल अति आवश्यक होने पर ही कुलाधिपति के पूर्वानुमोदन से हो सकेगा। सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) एवं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार लोक भवन में आज राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार एवं प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई पहलों की समीक्षा की गई तथा शिक्षा की गुणवत्ता, सुशासन और संस्थागत मजबूती सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, दक्षता, डिजिटल प्रशासन एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए संचालित विभिन्न सुधारात्मक पहलों की विस्तृत समीक्षा की गई।

डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ के लिए जमीन अधिग्रहण विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को सुनवाई करने के निर्देश

बिलासपुर. हाईकोर्ट में डोंगरगढ़ के बहुचर्चित परिक्रमा पथ निर्माण मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने कलेक्टर राजनांदगांव को पीड़ित याचिकाकर्ता के शिकायत पत्र पर सुनवाई का अवसर देते हुए परीक्षण कर निराकरण किए जाने का निर्देश जारी किया है. बता दें, कि याचिकाकर्ता की कृषि भूमि को अवैध रूप से अधिग्रहित करने के प्रस्ताव एवं प्रस्तुत शिकायत पत्र पर विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा है. दरअसल, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के अंतर्गत बुधवारी पारा वार्ड नंबर 19 निवासी फहीम अख्तर ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि, उसकी कृषि भूमि ग्राम छीरपानी पटवारी हल्का नंबर 29 खसरा नंबर 196/2 में स्थित है. कुछ दिन पूर्व जानकारी मिली कि, उसके उक्त खसरा नंबर की भूमि को प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित किए जाने कार्रवाई जारी है. जबकि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक सहमति नहीं दी थी. वर्तमान में याचिकाकर्ता की उक्त भूमि पर सड़क निर्माण की कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है और याचिकाकर्ता को ज्ञापन जारी कर उसके उक्त कृषि भूमि को मनमाने अत्यधिक कम कीमत पर खरीदने के संबंध में शासन के द्वारा प्रस्ताव भी जारी कर दिया गया है. याचिकाकर्ता अपनी उक्त कृषि भूमि को बेचना नहीं चाहता और ना ही उसके बदले में किसी प्रकार का मुआवजा चाहता है. याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए कलेक्टर जिला राजनांदगांव के समक्ष एक शिकायत पत्र भी दिया था, कि उक्त प्रस्तावित परिक्रमा पथ के लिए किसी भी प्रकार से निजी भूमि अधिग्रहित करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास ही पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है, जिसके माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा सकता है. स्वीकृत नक्शे के विरूद्ध निजी भूमि का चयन किया जाना अनुचित है. यदि सड़क निर्माण उपलब्ध राजस्व भूमि से किया जाता है तो शासन को भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान में होने वाले अतिरिक्त व्यय से बचाया जा सकता है, साथ ही परिक्रमा पथ के लिए  पूर्व से ही मार्ग बना हुआ है. नए मार्ग की कोई जरूरत भी नहीं है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री ओ पी चौधरी आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा।                मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।               मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।              मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'सेवा सेतु' के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है। साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।             आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।             मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।            कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की श्रीमती पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।          इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त … Read more