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हांसी में पेयजल समस्या का समाधान, गांव को मिलेगा 1 करोड़ का विकास फंड

 हांसी  प्रदेश के लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि चानौत गांव की पेयजल समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री और धरना कमेटी की बैठक सकारात्मक रही है। बैठक में मुख्यमंत्री ने गांव की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए भाखड़ा नहर से चानौत तक अलग पाइपलाइन बिछाकर पर्याप्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। साथ ही गांव के विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की राशि देने की घोषणा करते हुए संबंधित अधिकारियों को राशि जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पीडब्ल्यूडी के विश्रामगृह में प्रेसवार्ता में कैबिनेट मंत्री गंगवा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने धरना कमेटी की सभी बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि गांव में अन्य विकास कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे और किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि बैठक में पेयजल समस्या पर विस्तार से चर्चा हुई। चनौत गांव को मिलेगा स्वच्छ पेयजल मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता चानौत गांव को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से अलग पाइपलाइन बिछाने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि हांसी शहर के लिए अमृत-2 योजना के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइन से टी-कनेक्शन देकर गांव को पानी देना नियमों के अनुरूप नहीं है। सीएम ने दिए ये प्रमुख आश्वासन     चानौत तक अलग पाइपलाइन बिछाकर स्वच्छ पेयजल दिया जाएगा।     गांव के विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा।     अधिकारियों को राशि जारी करने के मौके पर ही निर्देश।     गांव के अन्य विकास कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएंगे।     पेयजल समस्या का स्थायी समाधान सरकार की प्राथमिकता होगी। अवैध टी-कनेक्शन लगाने वालों पर होगी कार्रवाई कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन में अवैध टी-कनेक्शन लगाने के मामले में कुछ लोगों की पहचान कर ली गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। अभय ने दी चानौतवासियों के लिए आंदोलन की चेतावनी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला ने शुक्रवार को हांसी के चानौत गांव के मुद्दे पर कहा कि सरकार पहले से बिछी पाइपलाइन से गांव को पानी देने को तैयार नहीं है। चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए चौटाला ने दावा किया कि 30 जून तक सफाई पूरी करने की समय सीमा तय थी, लेकिन अब तक करीब 60 प्रतिशत नहरों और ड्रेनों की सफाई नहीं हो सकी है। सरकार ने नहरों से गाद निकलवाने की बजाय अपने चहेतों को बिना लाइसेंस क्रशर चलाने की छूट दे दी। इससे सिरसा, फतेहाबाद और यमुनानगर सहित कई जिलों में बाढ़ की आशंका है।

बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में ट्राइबल बाजार, संस्कृति और प्रदर्शनी बनेगी आकर्षण

रांची  राज्य सरकार विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष नौ अगस्त को आदिवासी महोत्सव का आयोजन करती है। पिछले वर्ष दिशोम गुरु शिबू सोरन के निधन के कारण इस अवसर पर आदिवासी महोत्सव का आयोजन नहीं हो सका था। इस वर्ष आदिवासी महोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी है। इस बार यह आयोजन तीन दिनों का होगा। राज्य सरकार इसकी तैयारी में जुट गई है। इस वर्ष भी आदिवासी महोत्सव रांची स्थित बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में आयोजित किया जाएगा। इस बार ट्राइबल बाजार इस महोत्सव का विशेष आकर्षण होगा, जिसमें जनजातीय समुदाय द्वारा तैयार सामग्री की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा जनजातीय कला एवं संस्कृति, उनके खान-पान, झारखंड और राष्ट्र के निर्माण में जनजातीय समुदाय की भूमिका को रेखांकित करनेवाली भी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस बार प्रदर्शनी को एक पारंपरिक प्रदर्शनी के बजाय एक इमर्सिव कल्चरल इकोसिस्टम के तौर पर डिज़ाइन करने का निर्णय लिया गया है। एक नालेज ज़ोन भी होगा, जिसमें लोगों को जनजातीय समुदाय की विशेषताओं की जानकारी दी जाएगी। इकोनामिक जोन में आगंतुकों के खाने-पीने आदि के अलावा सेल्फ हेल्प ग्रुप द्वारा तैयार हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम आदि के स्टाल भी लगाए जाएंगे। महोत्सव की शुरुआत जतरा से होगी, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकार सम्मिलित होंगे। इसमें 10 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है। ड्रोन, लेजर एवं लाइट शो में दिखेगी जनजातीय संस्कृति तीन दिनों के आयोजन में ड्रोन एवं लाइट शो भी हाेगा। लेजर शो भी होगा। इसमें जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर फायरवर्क शो भी हाेगा। दिशोम गुरु पर केंद्रित कई कार्यक्रम इस बार आदिवासी महोत्सव में पद्म भूषण दिशोम गुरू शिबू सोरेन पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। विभिन्न प्रकार के शो के अलावा एलईडी के माध्यम से झारखंड के निर्माण में उनके योगदान को दर्शाया जाएगा।  

क्लीन ट्रांसपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार, इंदौर में EV-ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव; निवेशकों ने दिखाई रुचि

इंदौर  इंदौर में आयोजित कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों। ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस सकॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शहर की स्वच्छ और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आई। कॉन्क्लेव में ईवी इकोसिस्टम, बैटरी एवं ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर एक्सपर्टस ने विस्तृत चर्चा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चयनित स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। लगभग 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के समक्ष अपने नवाचार और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गए। सम्मेलन में कईअग्रणी कंपनियों की भागीदारी रही। आयोजन ने उद्योग, निवेशकों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया। एचईवी सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे मंच नवाचार तथा निवेश को नई गति प्रदान करते हैं। वहीं, सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय पहचान और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और ईवी आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।  

सुरक्षा दावों के बीच धनबाद में बढ़ा अवैध कोयला कारोबार, ड्रोन निगरानी भी नाकाम

धनबाद कोयला चोरी पर अंकुश लगाने के तमाम दावों के बावजूद धनबाद में अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि कोयला चोरों को स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ के कुछ कर्मियों का संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी जारी है। जनवरी से मई 2026 के बीच कोयला चोरी के 522 मामले बीसीसीएल ने दर्ज किए गए। यह आंकड़ा बीसीसीएल मुख्यालय के पास दर्ज है। इसी को लेकर लगातार सुरक्षा एजेंसी, बीसीसीएल प्रंबधन के साथ समीक्षा भी हो रही है। इस दौरान करीब 2972.13 मीट्रिक टन कोयला चोरी करने का प्रयास हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 2.37 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी, ड्रोन सर्विलांस और संयुक्त अभियान के बावजूद चोरी की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। कोयला कंपनियों और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगातार कार्रवाई के बावजूद चोरी के प्रयास जारी हैं। पांच महीनों में कुल 30 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि कई मामलों में तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई की गई। मई में सबसे अधिक मामले सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन का मानना है कि संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई के बिना कोयला चोरी पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं होगा। ड्रोन से 333 बार निगरानी, फिर भी नहीं थमी चोरी कोयला चोरी रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। जनवरी से मई तक कुल 333 बार ड्रोन सर्विलांस किया गया। निगरानी के आधार पर 140 कार्रवाई की गईं, लेकिन चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी। जनवरी में 78, फरवरी में 87, मार्च में 120, अप्रैल में 109 और मई में 128 घटनाएं दर्ज होने के बावजूद पुलिस और प्रबंधन की ओर से लगातार कार्रवाई जारी है। 232 अवैध खनन स्थलों को किया गया बंद अवैध खनन रोकने के लिए पांच महीनों में 232 अवैध माइनिंग साइटों को भरकर बंद किया गया। अप्रैल में सबसे अधिक 57 और मई में 51 स्थलों पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा मार्च में 44, फरवरी में 39 तथा जनवरी में 41 अवैध खनन स्थलों को बंद कराया गया। आईसीसीसी की निगरानी से पकड़े गए 476 मामले इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की निगरानी से 476 मामले चिन्हित किए गए। इनमें 474 मामलों में कार्रवाई की गई तथा 118 मीट्रिक टन कोयला बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत 10.12 लाख रुपये बताई गई है। मानसून से पहले बढ़ी चुनौती अधिकारियों के अनुसार मानसून से पहले अवैध खनन और कोयला चोरी की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इसे देखते हुए सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस और कोयला कंपनियों की सुरक्षा टीमों द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है। रात में गश्त बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात करने की भी व्यवस्था की गई है। सबसे ज्यादा मामले मई : 128 मामले मार्च : 120 मामले अप्रैल : 109 मामले फरवरी : 87 मामले जनवरी : 78 मामले  

रक्षा तकनीक में बड़ा कदम, IIT रोपड़ विकसित करेगा AI टैंक और लेजर ड्रोन-रोधी सिस्टम

चंडीगढ़ भारतीय सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाब स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रोपड़ ने आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) से कुल 120 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। 27वें आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड साइकिल के तहत दिए गए इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए 'स्वायत्त बख्तरबंद वाहन' (Autonomous Armoured Vehicles) और 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (Directed Energy Weapons) विकसित करना है। यह कदम न केवल सीमा पर सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की युद्ध तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। बिना इंसानी मदद के चलेंगे बख्तरबंद वाहन इस पहल का पहला प्रमुख हिस्सा अगली पीढ़ी के कॉम्बैट प्लेटफॉर्म यानी स्वायत्त बख्तरबंद वाहनों का विकास है। ये ऐसे वाहन या टैंक होंगे जिन्हें चलाने के लिए इंसानों की कम से कम जरूरत पड़ेगी। आईआईटी रोपड़ के निदेशक राजीव आहूजा के अनुसार, ये सिस्टम नेविगेशन, खतरों की पहचान करने और युद्ध के मैदान में सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे दुश्मन के चुनौतीपूर्ण इलाकों और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम कर रहे हमारे सैनिकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाएगा। भविष्य की तकनीक: डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) आईआईटी रोपड़ का दूसरा प्रोजेक्ट 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' के विकास से जुड़ा है। ये हथियार आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए 'गेम-चेंजर' माने जा रहे हैं। इनमें दुश्मनों के खतरों को बेअसर करने के लिए अत्यधिक केंद्रित विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा बीम का इस्तेमाल किया जाता है। निदेशक आहूजा ने बताया कि एंटी-ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) अनुप्रयोगों के लिए इन प्रणालियों को आधुनिक युद्ध में बेहद मारक और उपयोगी माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट भारतीय सेना के सैन्य संचालन निदेशालय ) के तहत काम करने वाला एटीबी (ATB) उभरती तकनीकी आवश्यकताओं की पहचान करता है और उन्नत समाधान देने में सक्षम संस्थानों को महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास कार्य सौंपता है। आईआईटी रोपड़ को ये दोनों प्रोजेक्ट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, फोटोनिक्स और लेजर तकनीक में उसकी विशेषज्ञता के आधार पर मिले हैं। संस्थान के निदेशक ने इसे सेना द्वारा उनके रिसर्च इकोसिस्टम पर जताए गए भरोसे का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा, "हमारे संकाय और छात्र रक्षा प्रौद्योगिकी डोमेन में कठोर परिश्रम कर रहे हैं। हम इसे राष्ट्रीय सुरक्षा में सीधे योगदान के रूप में देखते हैं और इसे सामरिक रक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक अनुशासन के साथ पूरा करेंगे।" इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी रोपड़ के अधिकारियों का कहना है कि इन रक्षा कार्यक्रमों से क्षेत्र में भारी आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होंगी। कलपुर्जों के निर्माण और परीक्षण के लिए स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के बड़े तकनीकी कार्यक्रमों से रिसर्च संस्थानों के आसपास एक 'इनोवेशन इकोसिस्टम' तैयार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और विशेष उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

यूरोपियन टूरिस्ट्स के लिए जैसलमेर बना पसंदीदा डेस्टिनेशन, होटल और कारोबारियों में उम्मीद

 जैसलमेर रेगिस्तान की भीषण गर्मी के बीच जैसलमेर एक बार फिर विदेशी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. इस ऑफ-सीजन रहने में भी शहर यूरोपियन पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. 15 जुलाई से पर्यटकों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है. यूरोप में समर वेकेशन के चलते फ्रांस, इटली, स्पेन और जर्मनी समेत कई देशों से बड़ी संख्या में लॉन्ग-स्टे टूरिस्ट जैसलमेर पहुंचेंगे. इसे देखते हुए होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल एजेंसियां और टूर ऑपरेटर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं. भीड़भाड़ के बचने के लिए इन महीनों में आते हैं पर्यटक पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार, यूरोपीय पर्यटक भीड़भाड़ वाले पीक सीजन के बजाय जुलाई-अगस्त में जैसलमेर आना पसंद करते हैं. वे यहां की संस्कृति, लोकजीवन, विरासत और रेगिस्तानी परिवेश को करीब से समझने के लिए लंबे समय तक ठहरते हैं. इससे होटल उद्योग के साथ टैक्सी संचालकों, गाइड, हस्तशिल्प कारोबारियों और लोक कलाकारों को भी अच्छा रोजगार मिलता है. टूरिज्म सेक्टर से जुड़े जितेंद्र कुमार होटल कारोबारी जितेंद्र कुमार बिस्सा ने बताया कि जैसलमेर में पर्यटन सीजन की शुरुआत जुलाई से मानी जाती है. 15 जुलाई के बाद यूरोप से पर्यटकों का आगमन बढ़ जाता है और जुलाई से सितंबर तक का समय पर्यटन के लिए काफी महत्वपूर्ण रहता है. उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात सामान्य होने से इस बार पर्यटन कारोबार के बेहतर रहने की उम्मीद है. 'स्लो टूरिज्म' पसंद करते हैं यूरोपीय पर्यटक वहीं, फ्रेंच भाषी पर्यटन व्यवसायी कौशल के मुताबिक, शुरुआती दौर में अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बुकिंग को लेकर चिंता थी. अब यूरोप से लगातार बुकिंग मिल रही है. यूरोपीय पर्यटक 'स्लो टूरिज्म' को प्राथमिकता देते हैं और जैसलमेर की विरासत व संस्कृति को आराम से अनुभव करना चाहते हैं. टूरिज्म सेक्टर से जुड़े नरेंद्र छंगानी बताते हैं कि इस सीजन में होटलों के किराए अपेक्षाकृत कम रहते हैं. इससे पर्यटक लंबे समय तक रुकते हैं. सितंबर के बाद होटल दरें बढ़ने से पहले उन्हें बेहतर सुविधाएं और विशेष डिस्काउंट का लाभ मिलता है. यूरोप में गर्मियों की छुट्टियां होने के चलते पर्यटक जैसलमेर पहुंचेंगे. ऑफ-सीजन में टूरिज्म से जगी उम्मीद पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी उम्मीद है. उनका मानना है कि अगर हर साल की तरह इस बार भी यूरोपियन पर्यटकों का सिलसिला शुरू होता है तो ऑफ-सीजन में भी जैसलमेर का पर्यटन उद्योग गुलजार रहेगा. भीषण गर्मी के बावजूद स्वर्णनगरी की गलियां एक बार फिर विदेशी मेहमानों की चहल-पहल से आबाद नजर आएंगी.

न्यू बिलिंग सिस्टम लागू होने से डिजिटल बिजली सेवाओं पर अस्थायी रोक, उपभोक्ताओं को राहत भी मिली

 पटना बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा विभाग की ओर से एक बेहद जरूरी सूचना जारी की गई है। अगर आप भी अपने घर या दुकान का बिजली बिल ऑनलाइन जमा करते हैं या स्मार्ट मीटर रिचार्ज करने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को आज रात से अगले 24 घंटे तक किसी भी प्रकार की ऑनलाइन डिजिटल सेवाएं नहीं मिल सकेंगी। बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को भविष्य में अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक न्यू बिलिंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है। इसी तकनीकी अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस कार्य के चलते बिजली से जुड़ी तमाम डिजिटल सुविधाओं को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है। शनिवार की रात 8 बजे से 28 जून की रात 8 बजे तक बंद रहेगा पूरा पोर्टल इस तकनीकी बदलाव के कारण राज्य के उत्तर और दक्षिण दोनों बिजली डिस्कॉम के उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस वजह से शनिवार की रात 8 बजे से लेकर अगले दिन यानी 28 जून की रात 8 बजे तक बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित सभी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह और अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएंगी। इस 24 घंटे की अवधि के दौरान उपभोक्ता न तो आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना नया बिल देख पाएंगे और न ही पुराने बकाए बिल का भुगतान डिजिटल माध्यम से कर सकेंगे। इसके साथ ही नए कनेक्शन के आवेदन या लोड बढ़ाने जैसे ऑनलाइन काम भी इस दौरान पूरी तरह से रुके रहेंगे। रीचार्ज खत्म होने पर भी नहीं कटेगी बत्ती हालांकि, इस तकनीकी शटडाउन के बीच ऊर्जा विभाग ने राज्य के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को एक बहुतबड़ी राहत दी है, जिससे आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मेंटेनेंस अवधि के दौरान यदि किसी स्मार्ट मीटर उपभोक्ता का बैलेंस खत्म हो जाता है और रिचार्ज नहीं हो पाता है, तो भी उस स्थिति में उनके घर या प्रतिष्ठान की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। यानी बैलेंस शून्य या माइनस में जाने के बावजूद उपभोक्ताओं की बत्ती गुल नहीं होगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस अवधि में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि रविवार रात 8 बजे के बाद नई बिलिंग प्रणाली शुरू होते ही सभी सेवाएं पहले से अधिक तेज और बेहतर तरीके से काम करने लगेंगी।

खान सर मामले में नई केस डायरी दाखिल, अदालत ने बहस के लिए दी तारीख

पटना बिहार के हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक, खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर और उनके सहकर्मियों से जुड़ी एक बड़ी खबर पटना सिविल कोर्ट से सामने आई है। शनिवार को अदालत में इस मामले को लेकर बेहद सरगर्मी तेज रही। कोर्ट के पिछले आदेश का पालन करते हुए कदमकुआं थाना पुलिस और जांच अधिकारी ने आखिरकार मामले की पूरी तरह से 'अपडेटेड केस डायरी' अदालत के समक्ष सबमिट कर दी है। पुलिस द्वारा नई डायरी पेश किए जाने के बाद अदालत ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका पर अंतिम बहस और अगली सुनवाई के लिए 30 जून मंगलवार की तारीख दी है। अदालत ने केस डायरी का लिया संज्ञान शनिवार को हुई इस विशेष अदालती कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले। रौशन आनंद के वकील सत्यम झा ने कोर्ट परिसर में मीडिया से बात करते हुए बताया कि पुलिस द्वारा पहले जमा की गई डायरी अधूरी थी, जो सिर्फ 19 तारीख तक की ही थी। आज पुलिस ने जब नई अपडेटेड डायरी कोर्ट में पेश की, तो उसे रिकॉर्ड पर ले लिया गया। इसके तुरंत बाद रौशन आनंद के पक्ष के वकीलों ने इस नई और विस्तृत डायरी का गहराई से अध्ययन करने के लिए अदालत से कुछ समय की मांग की। अदालत ने इस व्यावहारिक मांग को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों को डायरी के नए पन्नों को पढ़ने और समझने के लिए तीन दिन का पर्याप्त समय दे दिया है। खान सर को 30 जून तक मिली बड़ी राहत इस सुनवाई के दौरान अदालत ने फैजल खान की गिरफ्तारी पर लगी रोक की अंतरिम सुरक्षा को आगामी 30 जून तक के लिए बरकरार रखा है। खान सर के वरिष्ठ वकील अरविंद कुमार महुआ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट में खान सर के साथ-साथ उनके स्टाफ और कलीग्स की एंटिसिपेटरी और रेगुलर बेल दोनों याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। चूंकि शनिवार की सुबह ही पुलिस ने अपडेटेड डायरी सौंपी है, इसलिए अब मंगलवार को इस मामले पर कोर्ट में आमने-सामने बहस होगी।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सब्सिडी से बढ़ा उत्साह, नए एक्सपोर्टर्स को मौका

 नोएडा ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में हिस्सा लेने के इच्छुक यूपी के नए निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर है। एक अप्रैल 2022 के बाद कारोबार शुरू करने वाले निर्यातकों को प्रदेश सरकार विशेष सब्सिडी के तहत बेहद रियायती दर पर स्टॉल उपलब्ध कराएगी। इसके तहत उन्हें नौ वर्गमीटर का स्टाल एक लाख रुपए से भी अधिक कीमत के बजाय सिर्फ 17 हजार रुपये में मिलेगा। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद नए निर्यातकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस व्यवस्था से मुरादाबाद के करीब ढाई सौ नए निर्यातकों को लाभ मिल सकेगा। मुरादाबाद से कई देशों को मेटल के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का एक्सपोर्ट कर रहे निर्यातक मो.नाजिम का कहना है कि नए निर्यातकों को सब्सिडाइज्ड दर पर मात्र 17 हजार रुपये के स्टाल हाल संख्या 14 में उपलब्ध होना उत्साहजनक है। एक निर्यातक अधिकतम दो स्टाल प्राप्त कर सकेगा। इस प्रावधान ने कारोबार को लेकर नए निर्यातकों का हौसला फलक पर पहुंचा दिया है। हाल संख्या 15 में नियमित श्रेणी के निर्यातकों को स्टाल लगाने का मौका मिलेगा, उन्हें सीधे तौर पर सब्सिडी देय नहीं होगी। उन्हें साढ़े सात हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्टाल मिल सकेगा। इसे लेकर उद्योग के संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हर साल सफलता की नई ऊंचाइयां छू रहा है। नए निर्यातकों को काफी कम कीमत पर स्टाल की उपलब्धता से अपने कारोबार को काफी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। नए निर्यातकों को आगे बढ़ने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सुनहरा मौका दिया गया है। स्टालों की उपलब्धता होने पर ही एक निर्यातक को दो स्टाल मिल सकेंगे। तीसरे शो ने हजार करोड़ से अधिक का कारोबार दिया पिछले वर्ष प्रदेश सरकार के तत्वावधान में ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण आयोजित हुआ था, जिसमें मुरादाबाद के प्रतिभागियों को हाथोंहाथ छह सौ करोड़ से अधिक का कारोबार मिला था। कई निर्यातकों को विदेशी खरीदारों की तरफ से बिजनेस ऑर्डर मिले जिसके चलते मेले की वजह से कारोबार एक हजार करोड़ के पार पहुंच गया। संयुक्त निदेशक उद्योग योगेश कुमार ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कारोबार की संभावनाएं जितनी तेजी से बढ़ी हैं उन्हें देखते हुए इस बार निर्यातकों में प्रतिभाग के लिए काफी ज्यादा मारामारी देखने को मिल सकती है। भाग लेने के इच्छुक निर्यातकों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।

दोबारा घर बसाने का सपना पड़ा महंगा, सागर में शादी के 3 दिन बाद दुल्हन नकदी-जेवर लेकर गायब

सागर/ जैसीनगर  जैसीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा पेगवार में शादी के तीसरे ही दिन दुल्हन घर से 30 हजार रुपये नकद व जेवर लेकर भाग गई। पीड़ित की शिकायत पर जैसीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार महुआखेड़ा पेगवार निवासी 36 वर्षीय नोनीराम पटेल ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वह दोबारा विवाह करना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से हुई, जिसने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी निवासी रुक्मणी चतुर्वेदी से विवाह कराने का भरोसा दिलाया। महिला को विधवा बताकर की ठगी पुलिस के अनुसार पीड़ित को बताया गया कि रुक्मणी के पति की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। रिश्ता तय कराने के एवज में रामनारायण दुबे को एक लाख 20 हजार रुपये दिए गए। नोनीराम के अनुसार ने बताया कि 19 जून को सागर में दोनों की कोर्ट मैरिज और अगले दिन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान रुक्मणी के साथ ओडिशा निवासी अरविंद विभार भी मौजूद था, जिसे उसने अपना जीजा बताया था। सुबह नींद खुली तो महिला फरार हो चुकी थी नोनीराम ने बताया कि 21 जून की रात रुक्मणी घर की अलमारी से 30 हजार रुपये नकद, करीब आधा किलो चांदी की करधोनी, लगभग 250 ग्राम चांदी की पायल और एक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गई। सुबह परिवार की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली। तलाश के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि देर रात एक कार गांव में आई थी और उसमें सवार युवक घर का पता पूछ रहा था। फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने उसकी पहचान शादी में आए अरविंद विभार के रूप में की। बिचौलिए से की जा रही पूछताछ पीड़ित ने जैसीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शुक्रवार को वह दोबारा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने बताया कि मामले में रिश्ता तय कराने वाले कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार महिला और उसके सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।