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रोहतास का 150 साल पुराना ऐतिहासिक बराज फिर से बनेगा आकर्षण का केंद्र

 रोहतास सोन नदी पर बना 150 साल पुराना ऐतिहासिक एनीकट बराज एकबार फिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। ब्रिटिश काल में यह प्रमुख पर्यटक स्थल था, जहां लोग नौकायन करने आते थे। सुविधाओं के अभाव में इसकी रौनक फीकी पड़ गई थी। सोन के सतही जल का उपयोग कर डेहरी, सासाराम और औरंगाबाद शहर के लिए 1350 करोड़ की पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर एनीकट बराज के पास जल भंडारण के बाद अब जल संसाधन विभाग इसे नए सिरे से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है। जल संसाधान विभाग के अधिकारियों के अनुसार 1874 में निर्मित एनीकट बराज सिंचाई के साथ-साथ इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। 70 के दशक तक में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे। सोन नदी में नौकायन, बराज के फाटकों से गिरते पानी का नजारा और सूर्यास्त देखने के लिए लोग घंटों बैठते थे। आज भी भारी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक को यहां आते है। बराज में सिल्ट भरने से जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो गई थी। जिससे नहरों में पर्याप्त जलापूर्ति में परेशानी उत्पन्न होने पर 1965 में इंद्रपुरी बराज के निर्माण के बाद पर्यटकों ने आना बंद कर दिया। फिर नौकायन का आनंद उठा सकेंगे पर्यटक विभागीय योजना के तहत यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ नौकायन फिर शुरू किया जाएगा। बराज परिसर में सेल्फी प्वाइंट, चिल्ड्रेन पार्क, पाथवे, लाइट एंड साउंड शो और फूड कोर्ट बनाए जाएंगे। रात में आकर्षक लाइटिंग से बराज जगमगाएगा। सोन आरती का हो रहा आयोजन सामाजिक संगठन द्वारा प्रत्येक रविवार की शाम यहां सोन आरती का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारी संख्या में लोग भाग ले रहे है।  सोन तट के सौंदर्यीकरण का डीपीआर तैयार किया जा रहा है। टेंडर के बाद काम शुरू होगा। प्रयास है कि अगले मानसून सीजन तक बराज को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए अजय कुमार, मुख्य अभियंता जलसंसाधन विभाग डेहरी। बराज के पुनर्विकास से फिर यहां रोजगार बढ़ेगा और डेहरी की पहचान पर्यटन मानचित्र पर बनेगी।  पहले यहां हर दिन मेला सा लगता रहता था। नाविक, दुकानदार और फोटोग्राफर सभी को रोजगार मिलता था। अनुभा सिन्हा, शिक्षाविद

चुनावी ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हुआ आरक्षक, कवर्धा में उपचार के दौरान मौत

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे में घायल पुलिस आरक्षक रुपेश राजपूत की आज इलाज के दौरान मौत हो गई, एक पुलिसकर्मी समेत दो लोगों का इलाज जारी है। यह घटना लोहारा थाना क्षेत्र की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक रुपेश राजपूत डीएसबी शाखा में पदस्थ थे। सोमवार को अपने एक साथी आरक्षक रेखूराम धुर्वे के साथ लोहारा नगर पंचायत उपचुनाव से जुड़ी जानकारी एकत्रित करने ड्यूटी पर गए थे। ड्यूटी पूरी कर दोनों बाइक से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान लोहारा नगर पंचायत की सीमा में सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। दो पुलिसकर्मी समेत तीन घायल हादसा इतना भीषण था कि दोनों पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी बाइक सवार युवक भी घायल हुआ। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों की मदद से तीनों घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल आरक्षक रुपेश राजपूत को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान आरक्षक की मौत रायपुर के एक निजी अस्पताल तीन दिन जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़के के बाद आखिर में आरक्षक रुपेश राजपूत ने दम तोड़ दिया। हादसे में घायल अन्य दो लोगों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने क्या कहा ? लोहारा थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि दो दिन पूर्व दो बाइकों की भिड़ंत में दो पुलिसकर्मियों समेत तीन लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल पुलिस जवान रुपेश राजपूत की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

अडानी ग्रुप की एंट्री से चमकी JP की जमीन, खबर आते ही शेयरों में उछाल

कानपुर भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने आज घरेलू बाजार में एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट सौदा करने का ऐलान किया है। अडानी पोर्ट्स संकट में फंसी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रेजोल्यूशन प्लान (दिवाला प्रक्रिया समाधान) के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (JFIL) में 100% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। यह पूरा सौदा ₹1,500 करोड़ की नकद (Cash) डील के जरिए होगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। इस अधिग्रहण (Acquisition) के बाद जेपी फर्टिलाइजर्स की सहायक कंपनी कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (KFCL) पर अडानी पोर्ट्स का अप्रत्यक्ष (Indirect) नियंत्रण हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डील के जरिए अडानी ग्रुप को कानपुर में 243 एकड़ बेशकीमती इंडस्ट्रियल और कमर्शियल जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा, जो आने वाले समय में उत्तर भारत के व्यापार की दिशा बदल सकता है। उम्मीद की जा रही है कि इससे हजारों लोगों को नौकरियां मिलेंगी। भले ही यह सौदा एक फर्टिलाइजर कंपनी का दिख रहा हो, लेकिन अडानी पोर्ट्स की नजर इस कंपनी की कानपुर वाली जमीन पर है। अडानी ग्रुप इस 243 एकड़ जमीन का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर भारत में एक विशाल मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) और आधुनिक वेयरहाउसिंग (गोदाम) हब बनाने के लिए करने जा रहा है। रणनीतिक फायदा:- कानपुर को उत्तर भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। इस जमीन पर लॉजिस्टिक्स पार्क बनने से अडानी ग्रुप का जमीनी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (Inland Logistics) बेहद मजबूत हो जाएगा। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि साल 2031 तक वह देश में अपने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या को 12 से बढ़ाकर 16 करेगी और अपनी वेयरहाउसिंग क्षमता को लगभग चार गुना तक बढ़ाएगी। कानपुर का यह प्रोजेक्ट इसी महा-प्लान का एक अहम हिस्सा है। जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaypee Group) लंबे समय से कर्ज के जाल में फंसी थी, जिसके समाधान के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवाला प्रक्रिया चल रही थी। इस साल की शुरुआत में वित्तीय लेनदारों (लेंडर्स) के बहुमत के समर्थन से एनसीएलटी ने जेपी एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप के ₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। दिलचस्प बात यह है कि दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी 'वेदांता' ने इसके लिए अधिक बोली लगाई थी, लेकिन बैंकों और कर्जदाताओं ने वेदांता के प्रस्ताव को खारिज कर अडानी के प्लान पर भरोसा जताया। अडानी पोर्ट्स ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि जेपी एसोसिएट्स के लिए यह रेजोल्यूशन प्लान अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा सबमिट किया गया था। इसे मार्च 2026 में NCLT (National Company Law Tribunal) की इलाहाबाद बेंच ने मंजूरी दी थी और बाद में मई 2026 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने भी इस फैसले को सही ठहराया। इस सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) की जरूरी मंजूरी अगस्त 2025 में ही मिल चुकी थी। नियमों के अनुसार, 17 मार्च 2026 को मिली एनसीएलटी की मंजूरी के बाद अगले 90 दिनों के भीतर इस ₹1,500 करोड़ के अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह से फाइनल (Consummated) कर लिया जाएगा। अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd) के शेयरों में आज (21 मई 2026) हल्की लेकिन सकारात्मक तेजी देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक स्टॉक 0.78% चढ़कर ₹1,786.40 पर कारोबार कर रहा था। हाल ही में कानपुर फर्टिलाइजर्स (Kanpur Fertilizers) अधिग्रहण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। जून 2010 में बनी जेपी फर्टिलाइजर्स (JFIL) का सालाना टर्नओवर पिछले कुछ सालों में नाममात्र (FY24 में ₹25,000 और FY25 में ₹2,000) का रह गया था। लेकिन, अडानी ग्रुप के हाथों में आने के बाद इसकी खाली पड़ी जमीनों का उपयोग देश के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। यह डील उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी।

खान एवं भूतत्व विभाग में नई नियुक्तियां, खनन क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

 पटना बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग में नव-नियुक्त 8 खनिज विकास पदाधिकारियों ने योगदान दिया। इस अवसर पर खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये युवा पदाधिकारी राज्य के खनन क्षेत्र को नई ऊर्जा देने का काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए बिहार को खनन क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का आह्वान किया। खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार सरकार में आज नव-नियुक्त 08 खनिज विकास पदाधिकारियों (MDOs) ने योगदान समर्पित किया। इस अवसर पर माननीय खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी नव नियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई दी। माननीय मंत्री द्वारा सभी पदाधिकारियों को “शुभकामना पत्र” भी वितरित किया गया। अपने संबोधन में माननीय मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार एवं विभाग नव नियुक्त पदाधिकारियों की हर संभव सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए बिहार तथा खान एवं भूतत्व विभाग का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें। माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार खनिज संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है और खनन क्षेत्र राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नव नियुक्त पदाधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। सभी नव-नियुक्त खनिज विकास पदाधिकारी ऊर्जा से भरपूर हैं और बिहार के खनन क्षेत्र को नई ऊर्जा देंगे। इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री अवनीश कुमार सिंह ने नव नियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते  हुए कहा कि विभागीय कार्यों में अनुशासन, जवाबदेही एवं जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव एवं ज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू कर राज्य के खनन प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है। इस अवसर पर विभाग के निदेशक (खान) श्री मनेश कुमार मीणा सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी नव-नियुक्त खनिज विकास पदाधिकारी 25.05.2026 से बिपार्ड में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अपने-अपने पदस्थापित जिलों में योगदान देंगे।

शामली-बागपत से दिल्ली तक फैला मिलावटी तेल का नेटवर्क, रोज 1 लाख लीटर खपाने का दावा

 शामली हरियाणा के बहालगढ़, यूपी के बागपत, शामली और मेरठ से डीजल व पेट्रोल की तस्करी केवल वेस्ट यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और देहरादून तक बड़े स्तर पर की जा रही है। गिरोह के सदस्य 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। संवाददाता ने तस्करी के इस खेल की हकीकत जानने के लिए 12 दिन तक लगातार पड़ताल की। जांच में सामने आया कि हरियाणा के बहालगढ़, यूपी के शामली, बागपत और मेरठ से सस्ता तेल टैंकरों और ड्रमों के जरिये दिल्ली, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और देहरादून तक पहुंचाया जा रहा है। प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक तेल विभिन्न शहरों में खपाया जा रहा है। एक ड्रम में 260 लीटर पेट्रोल 75 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 19,500 रुपये में, जबकि डीजल 72 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 18,720 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।  तेल माफियाओं से संवाददाता की बातचीत में यह खुलासा हुआ स्थान- सोनीपत का बहालगढ़, मेन रोड पर बाइक की दुकान के सामने संवाददाता : भाई, हाल ही में एक नया पेट्रोल पंप खुला है, मिलावटी डीजल और पेट्रोल चाहिए, मिल जाएगा क्या। गुर्गा : मिल जाएगा, मगर भाई अभी कमी चल रही है। संवाददाता : रेट बताओ, वही मिलेगा। गुर्गा : पेट्रोल 75 जबकि, डीजल 72 रुपये लीटर उपलब्ध करा दिया जाएगा। संवाददाता : कोई दिक्कत तो नहीं होगी। गुर्गा : ड्रम जहां कहो उतरवा देंगे संवाददाता : सैंपल के तौर पर पेट्रोल दो। गुर्गा : 100 रुपये लेकर दो बोतल पेट्रोल दे देता है। संवाददाता : ठीक है, मैं आपको कल बताता हूं। स्थान- शामली के कैराना में कांधला रोड पर संवाददाता : भाई माल चाहिए, मिल जाएगा क्या। गुर्गा : पेट्रोल 82, जबकि डीजल 80 रुपये लीटर मिलेगा। संवाददाता : कहां-कहां उपलब्ध करा दोगे। गुर्गा : हमारी सर्विस ऑल इंडिया है, वेस्ट यूपी में तो कोई दिक्कत ही नहीं है। स्थान- बागपत के बड़ौत की छपरौली चुंगी संवाददाता : भाई, पेट्रोल और डीजल कितने में मिलेगा। गुर्गा : भाई, ईरान युद्ध के बाद से ज्यादा कमी चल रही है। पेट्रोल 82, जबकि डीजल 68 रुपये लीटर मिलेगा। संवाददाता : कहां-कहां पहुंचा सकते हो। गुर्गा : शामली, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरियाणा के किसी भी जिले और दिल्ली कहीं भी पहुंचा देंगे।  एक लीटर पर बच रहे 23 रुपये हाल ही में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। शामली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 91.95 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि माफिया 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक तेल बेच रहे हैं। यानी एक लीटर पर इन्हें 23 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। मिलावटी तेल के प्रयोग से वाहनों को यह होता है नुकसान कार मैकेनिक रिजवान और साजिद के अनुसार मिलावटी तेल के नुकसान 1. गाड़ी की स्वाभाविक आवाज बदल जाती है। 2. वाल्व कट सकते हैं 3. गाड़ी ज्यादा धुआं देती है 4. माइलेज कम हो जाता है 5. गाड़ी रुक-रुक कर चलती है 6. रिंग-पिस्टन खराब हो सकते हैं 7. इंजन सीज होने का खतरा रहता है 8. तेल की खपत बढ़ जाती है 9. जहरीला धुआं निकलता है  

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में अंधविश्वास पर जताई नाराजगी, अफसर बदला

नागौर  आज के आधुनिक दौर में भी क्या पुलिस किसी चोर को पकड़ने के लिए तांत्रिकों और अंधविश्वास का सहारा ले सकती है? आपका जवाब होगा- बिल्कुल नहीं. लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है. यहां चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस खुद पीड़ित परिवार को लेकर एक तांत्रिक (भोपी) के पास पहुंच गई और उसके इशारे पर जांच भी शुरू कर दी. इस मामले पर अब राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि देश का कानून अंधविश्वास से नहीं चलता और जांच केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए. क्या है यह पूरा मामला? यह अजीबो-गरीब मामला नागौर जिले के श्री बालाजी थाने का है. याचिकाकर्ता खेमी देवी ने जोधपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. खेमी देवी ने बताया कि इसी साल 7 मार्च 2026 को उनके घर में एक बड़ी चोरी हुई थी, जिसमें चोरों ने घर में रखे सोने-चांदी के गहने और मोटी नकदी साफ कर दी थी. पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन जांच का जिम्मा जिस हेड कांस्टेबल रतिराम को सौंपा गया, उनके काम करने का तरीका बड़ा अनोखा था. जब सबूत नहीं मिले, तो 'भोपी' के दरबार में ले गई पुलिस याचिका में पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि जब काफी दिनों तक चोरी का कोई सुराग नहीं लगा, तो जांच अधिकारी रतिराम ने खुद पीड़ित महिला और गांव के कुछ लोगों को एक तरकीब सुझाई. उन्होंने कहा कि अलवर में एक बैठती है, जो सब सच बता देती है. हद तो तब हो गई जब हेड कांस्टेबल खुद इन लोगों को लेकर अलवर पहुंच गया. वहां उस भोपी ने बिना किसी सबूत के परिवादिया की बहू के पिता मोहनराम का नाम ले दिया और कहा कि चोरी इसी ने की है. इसके बाद पुलिस ने असली चोर को ढूंढने के बजाय मोहनराम को ही आरोपी मानकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. कोर्ट में सरकारी वकील ने भी माना सच खेमी देवी की तरफ से पैरवी कर रहे वकील मनोहर सिंह राठौड़ ने हाईकोर्ट को बताया कि भारतीय कानून में कहीं भी किसी तांत्रिक या भोपी के कहने पर जांच आगे बढ़ाने का कोई नियम नहीं है. हैरान करने वाली बात तब हुई, जब कोर्ट रूम में मौजूद सरकारी वकील ने भी इस बात को स्वीकार किया कि हां, जांच अधिकारी सचमुच अलवर में उस भोपी के ठिकाने पर गया था. हाईकोर्ट ने बदल दिया जांच अफसर इस पूरे अंधविश्वास के खेल को सुनकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने माना कि इस तरीके से कभी भी निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती. जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट ने नागौर के पुलिस अधीक्षक को तुरंत आदेश जारी किया है कि इस मामले की जांच वर्तमान हेड कांस्टेबल से तुरंत वापस ली जाए. इस केस की डायरी को श्री बालाजी थाने से हटाकर किसी दूसरे थाने में ट्रांसफर किया जाए. अब इस चोरी के मामले की जांच किसी सब इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी से करवाई जाए, जो अगले 15 दिनों में अपनी जांच शुरू करे.

डिजिटल ट्रांसफर सिस्टम लागू, 6884 पुलिसकर्मियों को मिली मनपसंद पोस्टिंग

 करनाल  हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव, हरियाणा में हजारों तबादले अब ऑनलाइन प्रक्रिया से

करनाल. हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

निकाय चुनाव से पहले पंजाब में EVM विवाद तेज, अदालत पहुंचा मामला

चंडीगढ़. नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से ठीक पांच दिन पहले पंजाब में ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद और तेज हो गया है। गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने स्पष्ट कहा कि चुनावों के लिए मांगी गई ईवीएम मशीनें राजस्थान से पंजाब के लिए पहले ही रवाना की जा चुकी हैं और मशीनों की कमी का मुद्दा अब शेष नहीं रहा। आयोग ने यह भी दावा किया कि मशीनों की कमीशनिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रिया महज एक दिन में पूरी की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष ईसीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि 20 मई को पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के बाद सभी आशंकाएं दूर हो चुकी हैं। अदालत को बताया गया कि पंजाब की ओर से मशीनें स्वयं उठाने में अनिच्छा जताए जाने के बाद राजस्थान से मशीनें सीधे पंजाब भेजी जा रही हैं। सुनवाई के दौरान ईसीआई के वकील ने कहा, “मशीनें रास्ते में हैं। इस समय भी वे ट्रांजिट में हैं।” मोहाली तक पहुंचेंगी मशीनें आयोग की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि अब केवल यह तय किया जाना बाकी है कि मशीनें किस स्थान पर पहुंचाई जानी हैं और उन्हें रिसीव करने के लिए कौन अधिकारी अधिकृत होगा। ईसीआई ने कहा कि मशीनों को मोहाली तक पहुंचाने की व्यवस्था भी आयोग स्वयं कर रहा है। साथ ही फर्स्ट लेवल चेकिंग और कमीशनिंग प्रक्रिया में भी पूरा सहयोग दिया जाएगा। यह दावा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग पहले अदालत में कह चुका है कि यदि मशीनें उपलब्ध भी हो जाएं, तब भी उनकी जांच, तैयारी और तैनाती में 15 से 18 दिन का समय लगेगा। इसी आधार पर आयोग ने 27 मई को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला लिया था। ईसीआई ने समय समीक्षाा पेश की मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले को चुनौती दी गई है। एक दिन पहले ईसीआई ने अदालत में विस्तृत समय-सीमा पेश करते हुए दावा किया था कि देरी राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से हुई, न कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से। इसके बाद हाई कोर्ट ने पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने याचिका की सुनवाई पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत से याचिका की ग्राह्यता पर विचार करने का आग्रह किया।

ट्रांसफर के खिलाफ जनपद में विरोध तेज, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

कोरबा/पोंडी उपरोड़ा. कोरबा जिले के जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा में प्रशासनिक फेरबदल के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कोरबा द्वारा जारी एक ताजा आदेश के तहत पोंडी उपरोड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जय प्रकाश डड़सेना को अचानक जिला पंचायत कोरबा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। वहीं, उनके स्थान पर भूपेन्द्र कुमार सोनवानी को आगामी आदेश तक पोंडी उपरोड़ा जनपद पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपा गया है। ​इस अचानक हुए ट्रांसफर आदेश के बाद पोंडी उपरोड़ा जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त जनपद सदस्यों ने इस प्रशासनिक फैसले पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है और वर्तमान में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ (सुशासन सप्ताह) का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। ​”अच्छे अधिकारी को हटाकर विकास कार्य बाधित करने की कोशिश” ​जनपद उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों का कहना है कि वर्तमान सीईओ जय प्रकाश डड़सेना एक बेहद ईमानदार, मिलनसार और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को अच्छी तरह समझने वाले अधिकारी हैं। उनके कार्यकाल में जनपद के विकास कार्यों को गति मिल रही थी और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगी हुई थी। ‘सुशासन तिहार’ के बीच में ही ऐसे कर्मठ अधिकारी को कोरबा अटैच करना सीधे तौर पर पोंडी उपरोड़ा के विकास कार्यों को बाधित करने जैसा है। जनपद उपाध्यक्ष का बयान “पूरे छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार चल रहा है, जिसके तहत मौके पर ही लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। आगामी 5 जून तक यह अभियान चलना है, लेकिन इसी बीच अचानक हमारे मुख्य कार्यपालन अधिकारी को कोरबा अटैच कर दिया गया। उन्हें क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की और विकास कार्यों की पूरी जानकारी है। हम इस तरह के अटैचमेंट का पुरजोर विरोध करते हैं।” ​तालाबंदी और उग्र आंदोलन की चेतावनी ​जनपद जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया और पुराने सीईओ की वापसी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।   जनपद अध्यक्ष (महिला प्रतिनिधि) का बयान “आज हमारे पोंडी उपरोड़ा में सुशासन तिहार का आयोजन होना था, लेकिन हम सभी जनपद सदस्य इस अटैचमेंट के विरोध में इसका बहिष्कार कर रहे हैं। हमारे सीईओ साहब बहुत अच्छे हैं, उनका जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल है। अगर हमारे सीईओ साहब को वापस यहां नहीं लाया गया, तो हम जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी करेंगे और आगे कोई भी काम नहीं होने देंगे।” ​शांतिपूर्ण ढंग से रखेंगे अपनी बात ​जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे इस विषय को लेकर सबसे पहले जिले के प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्रियों और कलेक्टर महोदय के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखेंगे। यदि शासन-प्रशासन स्तर पर उनकी जायज मांग को स्वीकार नहीं किया जाता है, तो जनपद क्षेत्र के विकास को बचाने के लिए वे जनपद कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।