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योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की

कुष्ठावस्था पेंशन योजना बनी सहारा, हजारों दिव्यांगजनों को मिल रहा सम्मान और संबल योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की   नौ वर्षों में लाभार्थियों की संख्या 4765 से बढ़कर 13667 पहुंची पीएफएमएस एवं ई-पेमेंट प्रणाली से सीधे खातों में पहुंच रही पेंशन राशि लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत एवं सुरक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कुष्ठावस्था पेंशन योजना कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक एवं सामाजिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। वर्तमान में प्रदेश के 13 हजार से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 3000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना ऐसे व्यक्तियों के लिए है जो कुष्ठरोग के शिकार होने के बाद दिव्यांग भी हो जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को मिल रही सहायता दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य कुष्ठ रोग से प्रभावित आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत ऐसे सभी पात्र दिव्यांगजन लाभान्वित किए जाते हैं, जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं है तथा जो किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं।  योगी सरकार ने सहायता राशि 2500 से बढ़ाकर 3000 रुपये की योजना के प्रारंभ में लाभार्थियों को 2500 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जाती थी, जिसे साल 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील सोच और गरीब कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के दृष्टिगत बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था। इससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में जहां 4765 लाभार्थियों को योजना का लाभ प्राप्त हो रहा था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 13667 हो गई है। सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जा रही योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाता है। इस योजना के तहत ऐसे व्यक्तियों को पात्र माना जाता है जिनमें कुष्ठरोग का शिकार होने के कारण दिव्यांगता आ जाती है। विशेष बात यह है कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए दिव्यांगता प्रतिशत की कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं है। पात्र लाभार्थियों को पेंशन की धनराशि पीएफएमएस प्रणाली एवं कोषागार की ई-पेमेंट व्यवस्था के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी हुई है। योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं आवेदक प्रदेश सरकार द्वारा आवेदन प्रक्रिया को भी पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है। पात्र आवेदक sspy-up.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी सुविधा प्राप्त हुई है तथा सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की समस्या में कमी आई है। पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा- उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि कुष्ठावस्था पेंशन योजना के माध्यम से कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, योगी सरकार विकसित करेगी इनोवेशन कल्चर

परिषदीय और केजीबीवी में इनोवेशन कल्चर विकसित करेगी योगी सरकार – 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की तैयारी – विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, क्विज और निबंध प्रतियोगिताएं होंगी आयोजित – गांव और कस्बों के बच्चों तक आधुनिक और नवाचार आधारित शिक्षा पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम लखनऊ,  योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश के उभरते इनोवेशन और तकनीकी बदलावों से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करने में जुट गई है। 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से पहली बार गांव और कस्बों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी, रिसर्च, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू की गई है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे तक भी वही आधुनिक सीखने का माहौल पहुंचे, जो अब तक चुनिंदा संस्थानों और बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था। सरकार द्वारा अब परिषदीय और केजीबीवी विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, नवाचार क्विज और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन कल्चर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मई 2026 के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सहभागिता से विभिन्न नवाचार आधारित गतिविधियां कराई जाएंगी। प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में 'विकसित भारत के नवाचार परिदृश्य' विषय पर संगोष्ठी, 'डीप टेक्नोलॉजी' विषय पर विशेष कक्षाएं, 'भारत क्विज- भारत के नवाचार को कौन जानता है?' प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से हो सकेंगे तैयार योगी सरकार की रणनीति है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश और दुनिया में हो रहे तकनीकी बदलावों और नवाचारों से परिचित हों। यही कारण है कि अब परिषदीय विद्यालयों में भी इनोवेशन और रिसर्च आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब बच्चों को शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिक सोच, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाएगा तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि गतिविधियों को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसमें शामिल हो सकें। इसके साथ ही विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों की फोटो, वीडियो और नवाचार से जुड़ी जानकारियों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास योगी सरकार पहले ही निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने पर काम कर रही है। अब 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान को उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ा अलर्ट, रायपुर में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो फंसेंगे

रायपुर. राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो के ऑनलाइन पंजीयन के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इस अभियान का शुभारंभ किया। जनहित फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किए गए क्यूआर कोड और ऑनलाइन पंजीयन लिंक के जरिए ई-रिक्शा चालकों और मालिकों को अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पूरी जानकारी होगी दर्ज ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में ई-रिक्शा मालिक और चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस अभियान से राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। साथ ही वाहन संचालकों का पूरा डेटा भी पुलिस के पास उपलब्ध रहेगा। बिना पंजीयन पर होगी कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने 5 जून तक विशेष पंजीयन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। ई-रिक्शा और ऑटो चालक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी आसानी से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 5 जून के बाद बिना पंजीयन के संचालित होने वाले ई-रिक्शा और ऑटो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में यातायात व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

समर वेकेशन में खुल रहे स्कूलों पर कड़ा एक्शन, DEO को DPI का आदेश जारी

रायपुर. भीषण गर्मी के बीच ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूल संचालित करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर अब कार्रवाई की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को ऐसे स्कूलों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए भी कहा गया है। 20 अप्रैल से 15 जून तक घोषित है ग्रीष्मकालीन अवकाश राज्य सरकार की ओर से सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय विद्यालयों में 20 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। इसके बावजूद कई निजी स्कूलों में बच्चों को बुलाकर नियमित कक्षाएं संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। आदेश की अनदेखी कर स्कूल चला रहे कई निजी संस्थान जानकारी के मुताबिक कुछ अशासकीय विद्यालय शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभिन्न कारणों से स्कूलों का संचालन कर रहे हैं। शासन ने इसे आदेश का उल्लंघन माना है और ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हाल ही में हाई कोर्ट ने भी अवकाश अवधि के दौरान निजी स्कूलों में कक्षाएं संचालित किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

‘अंबाला से दिल्ली तक होंगे धमाके’, स्कूलों और CM दफ्तर को मिली धमकी से हड़कंप

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के स्कूलों को फिर एक बार बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। जहां धमकी आने के बाद हड़कंप मच गया है और पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में है। चंडीगढ़ पुलिस ने तुरंत एक्शन में आते हुए स्कूलों की घेराबंदी कर ली है। कई आलाधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं और बम स्क्वायड, डॉग स्क्वायड के साथ तत्परता से स्कूलों को खाली कराते हुए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सर्च ऑपरेशन के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एंबुलेंस भी मौजूद हैं। स्कूलों और आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को बम या कुछ भी संदिग्ध बमनुमा जैसी चीज नहीं मिली है। हरियाणा CM के दफ्तर को भी निशाना बनाने की बात सिर्फ चंडीगढ़ के स्कूलों को ही बम से उड़ाने की धमकी नहीं दी गई है बल्कि शहर के सेक्टर-1 स्थित हरियाणा CM के दफ्तर को भी निशाना बनाने की बात कही गई है। जिसके बाद सीएम ऑफिस की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ऐतियातन वहां भी गहन छानबीन की जा रही है। इसके अलावा धमकी में यह भी कहा गया है कि अंबाला से दिल्ली तक बम धमाके किए जाएंगे। अंबाला से दिल्ली रेलवे ट्रैक पर धमाकों की बात कही गई है। जिसके बाद रेलवे प्रबंधन भी अलर्ट मोड में है और जांच की जा रही है। धमकी के बाद दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियां भी अपना काम कर रहीं हैं। ईमेल के जरिए बम की धमकी दी गई जानकारी के मुताबिक, स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी इस बार भी ईमेल के जरिए ही दी गई है। बताया जा रहा है कि रात में ईमेल के माध्यम से धमकी भेजी गई। जिसमें खालिस्तान का जिक्र किया गया और चंडीगढ़ के स्कूलों समेत हरियाणा CM के दफ्तर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। ईमेल में लिखा गया कि चंडीगढ़ बनेगा खालिस्तान और स्कूलों में धमाके होंगे। हरियाणा सीएम दफ्तर को भी निशाना बनाया जाएगा। इधर धमकी की सूचना मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस भी तुरंत एक्शन में आई और आगे की कार्रवाई की। पुलिस द्वारा मौके पर सभी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए और एहतियात के तौर पर स्कूलों को खाली कराया गया है। फिलहाल सर्च ऑपरेशन अभी जारी है। चंडीगढ़ प्रशासन ने की लोगों से अपील बताया जा रहा है कि धमकी भरे ईमेल में स्कूलों के साथ-साथ रेलवे ट्रैक को भी निशाना बनाने की बात कही गई है, जिसके बाद पूरा प्रशासन सतर्क हो गया है। फिलहाल साइबर सेल की टीम ईमेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी हुई है। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और शहर में शांति बनाए रखें। गौरतलब है कि चंडीगढ़ के स्कूलों में 23 मई से गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने जा रही हैं, लेकिन उससे पहले मिली इस धमकी के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों में डर का माहौल बना हुआ है। साइबर सेल टीम जांच में जुटी धमकी के संबंध में चंडीगढ़ पुलिस ने गंभीरता से जांच भी शुरू कर दी है। इसी के साथ चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से पैनिक न होने की अपील की गई है। चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल टीम यह पता लगाने में जुट गईं हैं कि आखिर स्कूलों को धमकी भरी ईमेल किसने और कहां से भेजी? वहीं आशंका यही जताई जा रही है कि यह धमकी दहशत फैलाने के लिए किसी की जानबूझकर की शरारत या साजिश हो सकती है। लेकिन पुलिस इसे गंभीरता से लेते हुए जरूरी कार्रवाई कर रही है। पुलिस की हर एंगल से जांच जारी है। पुलिस अपनी तरफ से अपनी पूरी जांच और छानबीन के बाद ही राहत की सांस लेगी। वहीं इस धमकी के बाद चंडीगढ़ में अलर्ट जारी है और स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस द्वारा आसपास के सीसीटीवी कैमरे भी चेक किए जा रहे हैं। पहले भी कई फर्जी धमकियां मिलीं गौरतलब है कि इससे पहले भी बीते कुछ महीनों के अंदर कई बार चंडीगढ़ के स्कूलों को बम से उड़ाने की फर्जी धमकियां दी जा चुकी हैं। यह फर्जी धमकियां भी ईमेल के जरिए ही आईं। वहीं सिर्फ चंडीगढ़ के स्कूल ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ जिला अदालत, पंजाब सचिवालय, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट, हरियाणा सचिवालय, हरियाणा सीएम आवास को भी पिछले दिनों बम से उड़ाने की बात कही जा चुकी है। जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल बनता रहा और हर बार पुलिस टीम और बम स्क्वायड ने गहन सर्च ऑपरेशन चला छानबीन की कार्रवाई भी की। हालांकि, बार-बार बम होने की सूचना अफवाह ही साबित हुई। मसलन सर्च ऑपरेशन में कोई भी बम नहीं मिला। बढ़ रहा है धमकियों का सिलसिला धमकियों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। सिर्फ चंडीगढ़ के स्कूल या अन्य संस्थान ही नहीं बल्कि पंजाब में मोहाली, अमृतसर, पटियाला, जालंधर और हरियाणा के अंबाला समेत अन्य शहरों के स्कूलों को भी पिछले दिनों बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है। इसके अलावा पंचकूला में जिला अदालत को बम से उड़ाए जाने की धमकी मिल चुकी है। वहीं इसी के साथ दिल्ली के स्कूलों को भी बम से उड़ाने की बात कही जा चुकी है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इसके अलावा दिल्ली-NCR में कई अदालतों, विमानों, मॉल, क्लब, होटलों में भी बम रखे जाने की फेक धमकी दी जा चुकी है। ये सिर्फ डराने की साजिश या कोई बड़ी प्लानिंग? पिछले कुछ दिनों से जिस तरह लगातार स्कूलों को बम से उड़ाने की फेक धमकी दी जा रही है। ये सिर्फ डराने की साजिश है या कोई बड़ी प्लानिंग? फिलहाल तो यह बेहद चिंताजनक और सुरक्षा को लेकर खतरे की स्थिति है। इससे पहले वास्तव में कोई बड़ी घटना हो। पुलिस और जांच-सुरक्षा एजेंसियों को इसे कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए और इसे रोकने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम उठाना चाहिए। अगर कोई इस तरह की शरारत भी कर रहा है तो उसके खिलाफ पुलिस को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिये की नजीर बने और आगे से फिर कोई और ये काम … Read more

एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं प्रसंस्करण नीति की उच्च स्तरीय समीक्षा की एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से शुरू की जा सकती है परियोजना, बड़े पैमाने पर उपलब्ध है भूमि: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर दिया जोर, मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाने का दिया निर्देश मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएः मुख्यमंत्री अल नीनो के संभावित प्रभाव के चलते मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश, राज्य के खाद्यान्न भंडार पर्याप्त और मजबूत होने चाहिए “प्रोजेक्ट गंगा” के तहत जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाएः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों, उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एनसीआर क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी टेक कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर  प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा  एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है। इसके तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 5 गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2040 तक दुनिया की नई अर्थव्यवस्था एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे “फ्यूचर एरेना” के इर्द-गिर्द विकसित होगी, जिनका संयुक्त वैश्विक बाजार 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत के लिए एआई सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज, क्लाउड सर्विसेज, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर्स, एयरोस्पेस और ईवी जैसे सेक्टर भविष्य के प्रमुख आर्थिक इंजन होंगे। बैठक में उत्तर प्रदेश की पांच प्रमुख संरचनात्मक ताकतों- भौगोलिक स्थिति, विशाल भूमि उपलब्धता, बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व को रेखांकित किया गया। कहा गया कि उत्तर प्रदेश का इनलैंड लोकेशन इसे समुद्री जोखिमों और चक्रवातों से सुरक्षित बनाता है, जबकि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तेजी से विकसित हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज और 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण राज्य में विशाल तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध है। बैठक में उत्तर प्रदेश को “एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एवं कनेक्टेड इनलैंड एआई टेरिटरी” बताया गया। कहा गया कि देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है। राज्य के भीतर 5 मिलीसेकंड से कम लेटेंसी तथा मुंबई और चेन्नई जैसे डिजिटल हब तक 5–12 मिलीसेकंड कनेक्टिविटी उपलब्ध है। वैश्विक टेक कंपनियों के लिए यूपी कम लागत, बेहतर स्केलेबिलिटी और अधिक नेटवर्क रिडंडेंसी वाला आदर्श एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब है। प्रोजेक्ट गंगा मुख्यमंत्री ने “प्रोजेक्ट गंगा” यानी गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्य करने वाली कंपनियां भी इन युवाओं का उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत से ही डिजिटल उद्यमियों को उचित इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य केवल इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं बल्कि टेलीमेडिसिन, डिजिटल शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, ई-गवर्नेंस, डिजिटल रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (डीएसपी) के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और 1 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। योजना के तहत 20 लाख से अधिक घरों को फाइबर आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक डीएसपी अपने क्षेत्र में 200 से 300 घरों को कनेक्ट कर सकेगा। महिला उद्यमिता को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है और लगभग 50 प्रतिशत महिला उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में बताया गया कि केवल मोबाइल इंटरनेट के जरिए सीमित सेवाएं संभव हैं, जबकि वास्तविक डिजिटल परिवर्तन के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड आवश्यक है। एआई आधारित कृषि, ड्रोन मॉनिटरिंग, स्मार्ट विलेज, वर्चुअल लैब, टेलीमेडिसिन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी बताया गया। प्रोजेक्ट गंगा के तहत डीएसपी केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का संपूर्ण नेटवर्क विकसित करेंगे। वे हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, आईपीटीवी, ओटीटी एक्सेस, सीसीटीवी समाधान, पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी जैसी सेवाएं प्रदान करेंगे। योजना के तहत प्रत्येक डीएसपी को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना फिलहाल 21 प्राथमिक जिलों में “प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट” के रूप में शुरू करने की तैयारी में है और इसके बाद इसे … Read more

क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा मुद्दों पर हुई चर्चा, बैठक में शामिल हुए योगी आदित्यनाथ

मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की अध्यक्षता, चार राज्यों के मुख्यमंत्री हुए शामिल कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने एवं राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे अहम विषयों पर हुई चर्चा  लखनऊ मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक  छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मेजबान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी मौजूद रहे।  बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में सहभाग किया। बैठक में जनकल्याण, सुशासन, क्षेत्रीय विकास, कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने एवं राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे अहम विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने लिखा कि सहकारी संघवाद, समन्वित विकास और राज्यों के मध्य बेहतर तालमेल को नई दिशा देने वाला यह मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'विकसित भारत' के सामूहिक संकल्प को और अधिक सशक्त करेगा।

स्टाफ से झगड़े के बाद नशा छुड़वाने वाले सेंटर में हंगामा, 30 युवक भागे

मोगा  पंजाब के मोगा जिले में स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र से करीब 28 से 30 युवकों के फरार होने की घटना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि बुधवार शाम केंद्र के अंदर किसी बात को लेकर मरीजों और कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया था। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि कुछ युवक गुस्से में आ गए और स्टाफ को धक्का देकर मुख्य गेट का ताला तोड़ते हुए बाहर निकल गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। अचानक बिगड़ा माहौल, कर्मचारियों से हुई बहस गांव जनेर में बने सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में उस समय तनाव का माहौल बन गया जब कुछ मरीजों की वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ कहासुनी हो गई। पहले मामूली बहस हुई लेकिन कुछ ही देर में मामला बढ़ता चला गया। कई युवक गुस्से में आ गए और उन्होंने स्टाफ के साथ धक्का मुक्की शुरू कर दी। स्थिति इतनी खराब हो गई कि कर्मचारियों को खुद को संभालना मुश्किल पड़ गया। इसी दौरान कुछ युवकों ने मौके का फायदा उठाया और मुख्य गेट की तरफ दौड़ पड़े। वहां पहुंचकर उन्होंने गेट का ताला तोड़ दिया और बाहर निकल गए। केंद्र में थे 95 मरीज, कई युवक भागने में सफल सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में उस समय कुल 95 मरीज भर्ती थे। इनमें से करीब 28 से 30 युवक भागने में सफल हो गए, जबकि बाकी मरीज केंद्र के अंदर ही मौजूद रहे। घटना के बाद केंद्र में अफरा तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा गार्ड्स ने युवकों को रोकने की कोशिश भी की लेकिन अचानक हुए हंगामे के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। कुछ मरीजों को मौके पर ही पकड़ लिया गया, जबकि कई युवक वहां से फरार हो गए। सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना नशा मुक्ति केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है। पुलिस अब कैमरों की फुटेज को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि युवक किस दिशा में भागे और उनके साथ कौन कौन लोग थे। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज की मदद से फरार युवकों की पहचान करने में आसानी होगी। इसके अलावा आसपास लगे दूसरे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी जा रही है ताकि उनकी लोकेशन का पता लगाया जा सके। पुलिस ने शुरू की तलाश घटना की सूचना मिलते ही थाना कोट इसे खां की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने केंद्र के कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड्स से पूछताछ की। इसके साथ ही फरार युवकों के घरों और आसपास के इलाकों में भी नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि कई टीमें युवकों की तलाश में लगी हुई हैं और जल्द ही उन्हें वापस पकड़ लिया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

ग्राम सोनझरी में ‘हर घर जल ग्राम” के रूप में मिली नई पहचान’

कबीरधाम/रायपुर. कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनझरी में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी है। वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे इस गांव में अब हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और गांव को “हर घर जल ग्राम” के रूप में नई पहचान मिली है। पहले ग्राम सोनझरी में खासकर गर्मी के दिनों में, गांव के लोगों को पानी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों को पानी लाने के लिए तपती धूप में दूर-दूर तक जाना पड़ता था और घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। पानी के इस इंतजाम में उनका काफी समय और मेहनत बर्बाद हो जाती थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता था। इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत गांव में तेजी से काम किया गया। इसके अंतर्गत सोनझरी गांव में पाइपलाइन का विस्तार किया गया, जल स्रोतों को सुधारा गया और एक ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया गया। इसके बाद गांव के सभी घरों में घरेलू नल कनेक्शन देकर नियमित रूप से पानी की सप्लाई शुरू की गई। गांव की एक बुजुर्ग निवासी पंचकुंवर बाई ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहले इस उम्र में दूर से पानी लाना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था, और सुबह होते ही पानी की चिंता सताने लगती थी। लेकिन अब घर के पास ही साफ पानी मिलने से उनका जीवन बेहद आसान हो गया है। उन्होंने इसके लिए शासन और प्रशासन का आभार जताया है। सोनझरी गांव में आई इस बड़ी तब्दीली के बाद अब चौतरफा सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। महिलाओं का कीमती समय बच रहा है, बच्चों की पढ़ाई अब बाधित नहीं होती और साफ पानी मिलने से जलजनित बीमारियों में भी भारी कमी आई है। इस सफलता को आधिकारिक रूप देने के लिए बीते 13 मई 2026 को सोनझरी में एक ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। इस बैठक में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ष्हर घर जलष् प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया गया और सोनझरी को आधिकारिक रूप से “हर घर जल ग्राम” घोषित कर दिया गया। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन केवल पानी पहुंचाने की योजना नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण जीवन में सुविधा, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मान का नया सवेरा लाया है।

माघ मेला 2027 को हाईटेक बनाने की तैयारी, प्रयागराज में शुरू होगी वाटर मेट्रो सेवा

 प्रयागराज  तीर्थराज में नदियों के माध्यम से परिवहन को सुगम बनाने के लिए वाटर मेट्रो चलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माघ मेला 2027 में इसके शुभारंभ की तैयारी चल रही है। यहां गंगा और यमुना में वाटर मेट्रो का संचालन किया जाएगा। इसके लिए आठ मेट्रो स्टेशन बनाने का प्रस्ताव जल्द ही तैयार किया जाएगा, जिसके लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है।गंगा में दो मेट्रो स्टेशन बनाने पर विचार चल रहा है। यहां दारागंज में नागवासुकि के पास तथा झूंसी में छतनाग के पास स्टेशन बनेगा। इसी तरह संगम में फ्लोटिंग स्टेशन बनाया जाएगा। यमुना में करैलाबाग, बलुआ घाट, बोट क्लब, किला घाट तथा अरैल में स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों पर कार्ट और ई-रिक्शा की सुविधा दी जाएगी। साथ ही कैफेटेरिया भी संचालित होगा। भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज में संगम के लिए ही वाटर मेट्रो का प्रमुखता से उपयोग हो सकेगा 18 शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना यह पर्यटकों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होगा। केंद्र सरकार द्वारा देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना के तहत प्रयागराज को पहले चरण के शहरों में शामिल किया गया है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी योजना के पहले चरण में प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी, श्रीनगर और पटना के साथ-साथ गुवाहाटी को चुना गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए जल आधारित एक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन का साधन प्रदान करना है। इससे शहर के सड़क मार्गों पर ट्रैफिक जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों का सफर आसान होगा। वाटर मेट्रो नावों को बैट्री और हाइब्रिड ईंधन से चलाया जाएगा, जिससे नदियों में प्रदूषण नहीं होगा। भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण के नोडल अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि करैलाबाग से संगम तथा इसके आगे तक इसका संचालन किया जाएगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही कोच्चि से वाटर मेट्रो आ जाएगी। इसे पर्यटन विभाग को संचालित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।