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MP Nursing Scam: फर्जी फैकल्टी रखने वाले कॉलेजों पर भारी एक्शन, ₹3 लाख फाइन के साथ 50 पौधे लगाने का आदेश

जबलपुर  मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ तीन-तीन लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट की इस सख्ती से उन तमाम कालेजों की नींद उड़ गई है, जो नियमों को ताक पर रखकर फर्जीवाड़े में लिप्त पाए गए थे। एक महीने में जमा करना होगा जुर्माना हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कॉलेज प्रबंधन को जुर्माने की यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर लगने वाले तीन लाख रुपये में से दो लाख रुपये एमपीएनआरसी (MPNRC) और एक लाख रुपये जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा कराने होंगे। निर्धारित अवधि में जुर्माने की राशि जमा करने वाले कॉलेजों को ही उपयुक्त माना जाएगा। इसके बाद ही उनके विद्यार्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने और उनके रुके हुए रिजल्ट जारी करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, डुप्लीकेट टीचिंग फैकल्टी वाले कॉलेजों को प्रति डुप्लीकेट फैकल्टी 3 लाख रुपए का जुर्माना जमा करना होगा। जुर्माना जमा करने के बाद ही संबंधित कॉलेजों को पात्र माना जाएगा और उनके छात्रों की परीक्षाएं आयोजित हो सकेंगी। पहले हो चुकी परीक्षाओं के रोके गए रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे। कोर्ट ने प्रत्येक संबंधित कॉलेज को परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के भी निर्देश दिए हैं। पौधारोपण की तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी। मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित सभी संबंधित मामलों की सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी। डुप्लीकेट फैकल्टी पर 3 लाख रुपए जुर्माना सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजों और डिफिशिएंट पाए गए 153 कॉलेजों में टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी मिली है। वहीं, 35 सूटेबल कॉलेज ऐसे हैं, जहां डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली। हाईकोर्ट ने डुप्लीकेट फैकल्टी वाले कॉलेजों के लिए प्रति फैकल्टी 3 लाख रुपए जुर्माना तय किया है। इसमें 2 लाख रुपए एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) और 1 लाख रुपए जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा करने होंगे। कॉलेजों को यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। इसके बाद संबंधित कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा और रिजल्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। प्रदेश में करीब एक हजार डुप्लीकेट शिक्षक हैं। 50 पौधे लगाने और देखरेख के निर्देश हाईकोर्ट ने संबंधित कॉलेजों को अपने परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने के निर्देश भी दिए हैं। कॉलेजों को इन पौधों की पेड़ बनने तक देखरेख करनी होगी। पौधारोपण के बाद उसकी तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी। कोर्ट के इस निर्देश का पालन संबंधित कॉलेजों को परीक्षा संबंधी राहत हासिल करने की प्रक्रिया के तहत करना होगा। BSc, MSc और पोस्ट बेसिक BSc छात्रों को राहत हाईकोर्ट के आदेश से बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग के छात्रों को राहत मिलेगी। जिन छात्रों ने पहले परीक्षा दे दी है, उनके रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे। वहीं, पात्र कॉलेजों के जिन छात्रों की परीक्षाएं रुकी हुई थीं, उनके लिए परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है। MPNRC को सख्त हिदायत हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को नए नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देते समय पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेजों के निरीक्षण और तय मापदंडों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही होने पर संबंधित नियामक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग कॉलेजों का रिकॉर्ड भी तलब किया है। मामले में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आलोक बागरेचा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट के सामने कई तथ्य रखे। हाईकोर्ट ने मान्यता प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को लेकर संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई जांच में सामने आया था बड़ा फर्जीवाड़े का जाल ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई की जांच में प्रदेशभर के 695 नर्सिंग कॉलेजों की पड़ताल की गई थी, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में पाया गया कि सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजों और डिफिशिएंट पाए गए 153 कॉलेजों में बड़े पैमाने पर टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी चल रही थी। केवल 35 सूटेबल कॉलेज ऐसे थे, जहां कोई डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली।     नर्सिंग कॉलेजों में डुप्लीकेट फैकल्टी मिलने पर प्रति फैकल्टी 3 लाख का जुर्माना।     जुर्माने की राशि का दो हिस्सा: 2 लाख MPNRC और 1 लाख जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा होगा।     कॉलेजों को अपने परिसर में लगाने होंगे 50-50 पौधे, निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होगी फोटो।     जुर्माना जमा करने के बाद ही छात्रों को परीक्षा और रिजल्ट की मिलेगी अनुमति।     हाईकोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी कॉलेजों का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

बांग्लादेशी नागरिकों के डबरा में रहने का खुलासा, बौद्ध भिक्षु बनकर कर रहे थे प्रवास; अब होगी कार्रवाई

ग्वालियर बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हिंदू नाम से भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में जांच अब केवल पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों तक सीमित नहीं रही है. इस पूरे प्रकरण में पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी जांच के केंद्र में आ गई है. ग्वालियर के डबरा थाने से शुरू हुई सत्यापन प्रक्रिया एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल तक पहुंची और इसके बाद संबंधित दस्तावेज पासपोर्ट सेवा केंद्र भेजे गए. अब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित फर्जी दस्तावेज और गलत पहचान आखिर किस स्तर पर नहीं पकड़ी गई।  एसटीएफ की टीम ग्वालियर एसपी कार्यालय पहुंची और पासपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड जुटाए. टीम दस्तावेजों की पड़ताल के साथ यह भी देख रही है कि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया था. जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि थाना स्तर से क्लियर रिपोर्ट भेजे जाने के बाद एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में दस्तावेजों की स्क्रूटनी किस तरह की गई।   बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में एसटीएफ अब पुलिस सत्यापन की पूरी कड़ी खंगालेगी। पड़ताल में सामने आया है जिस समय 22 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट डबरा के पते पर बने, उस समय यह लोग सिमरिया ताल गांव स्थित बौद्ध विहार में ही बौद्ध भिक्षु बनकर रहते थे। पासपोर्ट केंद्र में आवेदन के बाद जब पुलिस वेरीफिकेशन की बारी आई, तब एसपी कार्यालय की पासपोर्ट शाखा से फाइल ऑनलाइन डबरा थाने भेजी गई। यहां डबरा थाने के तत्कालीन एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर को भौतिक सत्यापन करना था, घर जाकर देखना था और आसपास के लोगों भी पूछताछ करनी थी, लेकिन यह पूरी कार्रवाई थाने में ही बैठकर कर दी। सीधे टीप लगा दी- सब सही है।   डबरा थाने से शुरू हुई थी सत्यापन की प्रक्रिया जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार संदिग्ध पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन डबरा थाने के स्तर से किया गया था. उस अवधि में विनायक शुक्ला डबरा थाना प्रभारी के पद पर थे. वर्तमान में वे दतिया जिले में एसडीओपी बड़ौनी के पद पर पदस्थ हैं. थाना क्षेत्र में संबंधित आवेदकों के पते और पहचान के भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी बीट स्तर पर थी।  उस समय डबरा थाने के बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर थे. बताया जा रहा है कि बीट प्रभारी ने आवेदकों के बताए गए पते और पहचान का मौके पर सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर थाना स्तर से पासपोर्ट के लिए पुलिस क्लियरेंस दी गई और इसे आगे एसपी कार्यालय भेजा गया।  अब एसटीएफ का मुख्य सवाल यही है कि बीट प्रभारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट वास्तव में किस आधार पर तैयार हुई. क्या आवेदकों के पते पर जाकर उनका भौतिक सत्यापन किया गया था या दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई? एसटीएफ इस बिंदु पर रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।  एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की भूमिका भी जांच में थाना स्तर से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में पहुंची थी. यहां दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट की स्क्रूटनी के बाद प्रकरण पासपोर्ट सेवा केंद्र तक गया. अब जांच एजेंसी इस पूरी कड़ी को जोड़कर देख रही है।  एसटीएफ यह पता कर रही है कि थाना स्तर से भेजी गई रिपोर्ट में ऐसी कौन-कौन सी जानकारियां थीं, जिनके आधार पर पासपोर्ट प्रक्रिया आगे बढ़ी. यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति थी तो वह एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की जांच में क्यों सामने नहीं आई. इसके साथ ही पासपोर्ट सेवा केंद्र के स्तर पर हुई जांच की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया गया है।  जांच एजेंसी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि एक व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने वाली अलग-अलग प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की विश्वसनीयता की जांच किस स्तर पर हुई. पुलिस सत्यापन, जिला स्तर की स्क्रूटनी और पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया के बीच यदि कोई खामी रही है तो उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।  सात राज्यों तक पहुंची संदिग्धों की तलाश मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसटीएफ की जांच का दायरा ग्वालियर तक सीमित नहीं है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों की तलाश में सात राज्यों में टीमें भेजी गई हैं. जांच में कुछ संदिग्धों के भारत से बाहर निकलकर थाईलैंड पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।  बताया जा रहा है कि इनमें कुछ संदिग्ध बौद्ध भिक्षु के रूप में रह रहे हैं. हालांकि विदेश में मौजूद संदिग्धों के संबंध में जांच एजेंसी उपलब्ध जानकारी और रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है. भारत में मौजूद अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है।  एसटीएफ अब यह भी जोड़ने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पहचान बदलने, पुलिस सत्यापन हासिल करने और पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था. अलग-अलग स्थानों से मिले दस्तावेज और रिकॉर्ड की कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।  फर्जी पासपोर्ट रद्द कराने की तैयारी जांच में जिन पासपोर्ट को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया हुआ पाया जाएगा, उन्हें रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. एसटीएफ के अनुसार ऐसे मामलों में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा, ताकि संबंधित पासपोर्ट को निरस्त कराया जा सके।  जांच एजेंसी की चिंता उन संदिग्धों को लेकर भी है, जो अभी भारत में मौजूद हैं. फर्जी दस्तावेजों से तैयार पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वे देश से बाहर न निकल सकें, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. वहीं जो संदिग्ध विदेश पहुंच चुके हैं, उनके संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा सकती है।  अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान होंगे दर्ज एसटीएफ अब उन सभी लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट प्रक्रिया में रही. तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और तत्कालीन बीट प्रभारी भूपेंद्र … Read more

श्वेतांबर-दिगंबर विवाद पर SC की सख्त टिप्पणी, पूछा- भगवान क्या इससे खुश होंगे?

जयपुर  सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध 'श्री महावीर जी जैन मंदिर' के प्रबंधन और संचालन को लेकर जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के बीच चल रहे विवाद पर बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली। फैसला बाद में सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस मामले में संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा, जिस भगवान के नाम पर दोनों पक्ष लड़ रहे हैं, क्या वह इस तरह कानूनी लड़ाई से खुश होंगे? न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले पर बुधवार को सुनवाई की। दोनों पक्षों को आठ दिन के भीतर लिखित बहस पेश करने के निर्देश दिए हैं। लोक न्यास अधिनियम, 1959 के तहत कार्यवाही से विवाद शुरू हुआ था। मंदिर प्रबंधन से दिगंबर समिति अध्यक्ष और सचिव को हटाने तथा श्वेतांबर संप्रदाय की नई प्रबंध समिति बनाने की मांग की गई। विवाद करें समाप्त सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पारदीवाला ने दोनों पक्षों से कहा, यह बहुत ही संवेदनशील मामला है और किसी भी पक्ष की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना विवाद को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने दोनों पक्षों से पूछा कि क्या ऐसा संभव है कि सुबह श्वेतांबर संप्रदाय अपनी परंपरा के अनुसार भगवान की पूजा करे और शाम को दिगंबर संप्रदाय भगवान के वस्त्र बदलकर अपनी पद्धति से पूजा करे। आप अनावश्यक मुकदमेबाजी कर भगवान को क्यों परेशान कर रहे हैं? क्या आपको लगता है भगवान इस सबसे खुश होंगे? बताते चलें कि साल 1970 में एसडीएम ने दिगंबर समिति के खिलाफ प्रार्थना पत्र मंजूर किया। दिगंबर समिति की ओर से पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत पेश प्रार्थना पत्र के आधार पर अक्टूबर 1994 में ट्रायल कोर्ट ने रोक लगा दी। हाईकोर्ट में अपील दायर की गई, जिसका दिगंबर समिति ने विरोध किया कि 1991 के अधिनियम के तहत कार्यवाही समाप्त हो चुकी थी। क्या है दोनों पक्षों की दलीलें? वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान का तर्कः इस मामले में पूजास्थल परिवर्तन की कोई मांग नहीं की गई है, इसलिए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 इस मामले में लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संपूर्ण जैन समुदाय के हित में मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है। दिगंबर समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम का तर्क हाईकोर्ट को अपील पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि 1991 के कानून के तहत कार्यवाही समाप्त कर दी गई और उसमें अपील का प्रावधान नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट में याचिका दायर होनी चाहिए थी। तथ्य यह है कि मूर्ति (देवता), मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों का नियंत्रण, कब्जा और प्रबंधन दिगंबर जैन संप्रदाय के पास ही रहा है।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण निर्माण कार्य में गुणवत्ता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश शहडोल   नगर पालिका परिषद शहडोल द्वारा नगर में नागरिकों को बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।  मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी ने पुराना नगर पालिका चौक से पुलिस लाइन होकर गुजरने वाली सीसी रोड के निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने निर्माणाधीन सड़क की कार्य-प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके। मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा झूला पुल के पास चल रहे निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने मौके पर उपस्थित संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार से कार्य की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर में संचालित सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। नगर पालिका परिषद द्वारा नगर के विकास एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न निर्माण कार्य निरंतर कराए जा रहे हैं। निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हों। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के उपयंत्री श्री सुखेंद्र सिंह तोमर, संबंधित ठेकेदार एवं नगर पालिका के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

नैमिषनगर और वरुण बिहार में बनेंगे आलीशान बंगले, जानें प्लॉट की कीमत और सुविधाएं

लखनऊ लखनऊ विकास प्राधिकरण की दो महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाएं वरुण बिहार और नैमिषनगर अब आकार लेने जा रही हैं। एलडीए दोनों योजनाओं में बड़े बंगलों के लिए भी भूखण्ड बेचेगा। बड़े बंगलों के लिए पांच पांच हजार वर्गमीटर के भूखण्ड मिलेंगे। प्राधिकरण 14 सितंबर को दोनों योजनाओं को लॉन्च करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनके शुभारंभ करेंगे। छोटे आकार के भूखंड भी विकसित किए जाएंगे, जिससे अलग-अलग आय वर्ग के लोगों को घर बनाने का अवसर मिलेगा। नैमिषनगर में आध्यात्मिकता और आधुनिक सुविधाओं का संगम नैमिषनगर योजना को धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक जीवनशैली से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यहां आध्यात्मिक साधना, योग एवं शांति जीवनशैली केंद्र, ध्यान केंद्र, आश्रम और सांस्कृतिक केंद्र बनाए जाएंगे। इसके अलावा एक जिला, एक उत्पाद केंद्र, वाणिज्यिक केंद्र, शिक्षा केंद्र, खुले व्यायाम स्थल, सामुदायिक पार्क और खरीदारी मार्ग जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। नैमिषनगर में भूखंडों की दर 3,800 रुपये प्रति वर्गफुट रखी गई है। यहां 5 हजार वर्गफुट का भूखंड 1.90 करोड़ रुपये में मिलेगा। इसके लिए 9.50 लाख रुपये पंजीकरण राशि देनी होगी। नैमिषनगर में भूखंडों की कीमत और पंजीकरण राशि भूखंड का आकार——– कीमत——— ————-पंजीकरण राशि 5,000 वर्गफुट——- ₹ 1.90 करोड़——- ———–₹9.50 लाख 3,200 वर्गफुट ——-₹ 1.21 करोड़ 60 हजार——- ₹6.08 लाख 2,178 वर्गफुट——- ₹ 82 लाख 76 हजार 400—— ₹ 4.13 लाख 1,800 वर्गफुट——- ₹ 68 लाख 40 हजार———— ₹ 3.42 लाख 1,250 वर्गफुट——— ₹ 47 लाख 50 हजार ————₹ 2.37 लाख 800 वर्गफुट———– ₹ 30 लाख 40 हजार ————-₹ 1.52 लाख वरुण बिहार में गोल्फ कोर्स, झील और वाणिज्यिक केंद्र आगरा रोड पर विकसित होने वाली वरुण बिहार योजना को बड़े पैमाने पर नियोजित किया जा रहा है। यहां बड़ा गोल्फ कोर्स, करीब 800 एकड़ में हरित पट्टी और पार्क, केंद्रीय व्यावसायिक केन्द्र, 300 एकड़ का माल परिवहन केंद्र और 70 एकड़ में झील विकसित करने की योजना है। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र, शिक्षा केंद्र और 20 एकड़ में खेल केंद्र भी प्रस्तावित है। वरुण बिहार में भूखंडों की दर 2,800 रुपये प्रति वर्गफुट निर्धारित की गई है। 5 हजार वर्गफुट का भूखंड 1.40 करोड़ रुपये में मिलेगा। वरुण बिहार में भूखंडों की कीमत और पंजीकरण राशि भूखंड का आकार— —कीमत ————-पंजीकरण राशि 5,000 वर्गफुट—- ₹ 1.40 करोड़ ——————–₹ 7 लाख 3,229 वर्गफुट—— ₹ 90 लाख 41 हजार——- ₹ 4 लाख 52 हजार 60 3,200 वर्गफुट ——-₹ 89 लाख 60 हजार—– ₹ 4 लाख 48 हजार 2,178 वर्गफुट —–₹ 60 लाख 98 हजार 400 —₹3 लाख 4 हजार 930 1,800 वर्गफुट—— ₹ 50 लाख 40 हजार——— ₹2 लाख 52 हजार 1,250 वर्गफुट——- ₹35 लाख——————- ₹ 1.75 लाख आरक्षित वर्ग को पंजीकरण में राहत दोनों योजनाओं में आरक्षित वर्ग के आवेदकों से 2.5 प्रतिशत, जबकि अन्य वर्ग के आवेदकों से 5 प्रतिशत पंजीकरण राशि लिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। ऐसे में अंतिम पंजीकरण राशि वर्ग और योजना पुस्तिका में निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। दोनों योजनाओं में क्या खास नैमिषनगर: आध्यात्मिक केंद्र, योग, ध्यान, आश्रम और सांस्कृतिक सुविधाएं। वरुण बिहार: गोल्फ कोर्स, 70 एकड़ की झील, हरित क्षेत्र और खेल केंद्र। बड़े बंगले: दोनों योजनाओं में 5 हजार वर्गफुट तक के भूखंड। छोटे भूखंड: 800 और 1,250 वर्गफुट जैसे विकल्प भी उपलब्ध। शुभारंभ: 14 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा योजना लॉन्च किए जाने की तैयारी।

संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा प्रमुख शरद कोल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने लिया सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संकल्प ब्यौहारी  संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर  ब्यौहारी में विशाल समरसता संकल्प यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का नेतृत्व ब्यौहारी विधायक श्री शरद कोल ने किया। यात्रा के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे एवं समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। समरसता संकल्प अभियान के तहत यात्रा प्लाजा तिराहा, ब्यौहारी से प्रारंभ होकर विनायक पैलेस पहुंची, जहां यात्रा का समापन हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।  यह कलश यात्रा संत शिरोमणि रविदास महाराज की जन्मभूमि वाराणसी से प्रारंभ होकर ब्यौहारी उपनगर तक पहुंची। यात्रा के दौरान संत रविदास महाराज के विचारों, सामाजिक एकता, भाईचारे एवं समरसता का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में सदस्य जिला योजना समिति श्रीमती अमिता चपरा, नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गुप्ता राजन, राम लखन खटीक, रामदुलारे प्रजापति, एसपी साकेत, सुंदरलाल साकेत,  कृष्णा देवी चौधरी, दीना साकेत, सरपंच हीरालाल साकेत, देवीदीन प्रजापति एवं राधा साकेत सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित जनसमुदाय ने संत रविदास के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज में एकता, भाईचारे एवं सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प मैदानी भ्रमण कर शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे अधिकारी, लंबित प्रकरणों के निराकरण पर रहेगा विशेष जोर अनूपपुर   मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के अंतर्गत 11 सितम्बर 2026 को आईटीआई बदरा में कैम्प आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत आमजन की समस्याओं के निराकरण, शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा मैदानी स्तर पर शासकीय संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का भ्रमण एवं विभिन्न संस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा। कलेक्टर श्री रत्नाकर झा ने अभियान से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैम्प के पूर्व संबंधित क्षेत्र में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा कर अधिकाधिक प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित किया जाए। भ्रमण तिथि तक शेष रहने वाले प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए यथासंभव मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित कराया जाए। अभियान के तहत अधिकारी क्षेत्र की विभिन्न शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। इनमें स्कूल, महाविद्यालय, पुलिस थाना, राशन दुकान, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र, छात्रावास, कृषि उपज मंडी तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं सहित अन्य संस्थाएं शामिल रहेंगी। निरीक्षण के दौरान संस्थाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन तथा नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया जाएगा और आवश्यक सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा। कैम्प दिवस के प्रथम चरण में अधिकारी पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार मैदानी क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे तथा दोपहर 12:30 बजे तक कैम्प स्थल पर पहुंचेंगे। कैम्प में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं मैदानी अमला उपस्थित रहकर नागरिकों से प्राप्त आवेदनों एवं समस्याओं के निराकरण की कार्यवाही करेंगे। कैम्प की समाप्ति तक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। कैम्प में प्राप्त आवेदनों का संधारण एवं निराकरण जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया के अनुरूप किया जाएगा। प्राप्त आवेदनों को जनआकांक्षा पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण की संक्षिप्त रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी। कैम्प के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राची अग्रवाल को नोडल अधिकारी तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अनूपपुर श्री रवि गुप्ता को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं में AI की एंट्री, सहिया से मरीजों तक डिजिटल मदद पहुंचाने की योजना

रांची  अब आपके स्वास्थ्य की देखभाल एआई फैमिली डॉक्टर जैसी आधुनिक तकनीक करेगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को उनके नेपाल हाउस सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को लेकर बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसपर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने के लिए एआई असिस्टेंट और एआई फैमिली डॉक्टर जैसे डिजिटल संसाधन विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने दोनों प्लेटफार्म के विकास के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। एआई असिस्टेंट स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत हेल्थ प्रोफेशनल्स और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए डिजिटल सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह उन्हें उनके दैनिक कार्यों की जानकारी और समय पर रिमाइंडर एवं अलर्ट उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उन्हें कब, कहां, किसके साथ और कौन-सा कार्य करना है, कार्य के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी तथा आवश्यक संसाधन क्या होंगे। उदाहरण के तौर पर एआई असिस्टेंट किसी सहिया को यह जानकारी दे सकेगा कि उसे किस स्थान पर, किस समय टीकाकरण करना है, कितने बच्चों का टीकाकरण होना है तथा इसके लिए किन तैयारियों की आवश्यकता है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों को अपने कार्य समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, उप सचिव ध्रुव प्रसाद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा एआई फैमिली डाक्टर प्रस्तावित एआई फैमिली डाक्टर आम लोगों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह मरीज द्वारा बताई गई स्वास्थ्य संबंधी समस्या के आधार पर संभावित बीमारी और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि एआई द्वारा सुझाई गई किसी भी दवा को तब तक वैध चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जाएगा, जब तक उसे किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा अनुमोदित न किया जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य एआई की सुविधा का लाभ उठाते हुए चिकित्सकीय सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित करना है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी योजना अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दोनों एआई प्लेटफॉर्म के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसके लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया। योजना के अनुसार, एआई फैमिली डाक्टर को प्रारंभिक चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा सकता है। पायलट परियोजना के परिणाम सफल रहने पर इसे राज्य के व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावना पर विचार किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों के दैनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने के साथ-साथ आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास आयुक्त पद से हटाई गईं IAS निधि निवेदिता, अब उनके कई पुराने आदेश रद्द

भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त रहीं आईएएस निधि निवेदिता को हटाने के बाद अब उनके कार्यकाल में जारी किए गए कई आदेश भी शासन ने वापस ले लिए हैं। पांच सितंबर को उनका तबादला राजस्व विभाग में किया गया था। इसके कुछ दिन बाद शासन ने उनके कार्य विभाजन और स्थानांतरण से जुड़े आदेश निरस्त कर दिए। निधि निवेदिता ने तीन सितंबर को विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए 14 अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली थीं। अब उनके आदेश को निरस्त कर दिया गया।  महिला एवं बाल विकास विभाग में आयुक्त रहते निधि निवेदिता ने क्या किया जिसे बदला गया ?     संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव को आधार और एमआईएस शाखा का प्रभार दिया जबकि पहले उनके पास पोषण आहार शाखा थी।     जवाहर बाल भवन के संचालक पद को लेकर जारी आदेश भी शासन ने रद्द कर दिया है।      निधि निवेदिता ने राजेश प्रताप सिंह को जवाहर बाल भवन का संचालक और वहां पदस्थ उषा सोलंकी को संचालनालय भेजा था अधिकारियों का तर्क था कि जवाहर बाल भवन के संचालक की नियुक्ति शासन स्तर से होती है। इसके अलावा सहायक ग्रेड-1 और सहायक ग्रेड-2 के 66 कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद की गई पदस्थापना का आदेश भी निरस्त कर दिया गया है। बैठक के विवाद के बाद बदला था माहौल 14 अगस्त को विभागीय बैठक के दौरान निधि निवेदिता और संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एकजुट होकर कार्यालय से बाहर आ गए और आईएएस के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया की मध्यस्थता मामला शांत हुआ था। जिसके बाद कर्मचारियों ने अपना प्रदर्शन बंद किया था।   क्या था थप्पड़ कांड जिससे आईं थीं चर्चा में       2020 में राजगढ़ कलेक्टर रहते हुए एक भाजपा नेता को थप्पड़ मारा      इसके बाद एक एएसआई ने भी थप्पड़ मारने आरोप लगाया     सीएए के समर्थन में भाजपा नेताओं ने रैली का आयोजन किया था। इस रैली में ही कलेक्टर और भाजपा कार्यकर्ताओं का विवाद हुआ था। उन्होंने आईएएस के खिलाफ कोर्ट ने इस्तगासा लगाया था। बाद में एएसआई ने भी कलेक्टर पर थप्पड़ मारने का आरोप लगाया था।     इसकी शिकायत के बाद जांच हुई थी, जिसमें शिकायत सही पाई गई थी। इस मामले में सरकार की तरफ से जांच कमेटी बनाई गई थी।     2020 में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद आईएएस निधि निविदेता को हटा दिया गया था।   किस बैच की हैं आईएएस निधि निवेदिता ? भारतीय प्रशासन सेवा की आईएएस निधि निवेदिता 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वह मूलत: झारंखड की रहने वाली हैं। उनकी पहली पोस्टिंग झाबुआ में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई थी। इसके बाद वह कई जिलो में अलग-अलग पद पर पदस्थ रही। पांच पांच सितंबर को निधि निवेदिता का तबादला राजस्व विभाग में कर दिया गया। उन्हें भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त, ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।   

लुधियाना-जाखल पैसेंजर ट्रेन का बढ़ा रूट, अब जींद तक मिलेगी सीधी रेल सेवा

हिसार. दैनिक यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे ने लुधियाना जंक्शन-जाखल जंक्शन पैसेंजर ट्रेन का विस्तार जींद जंक्शन तक करने का निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 54053 अप व 54054 डाउन अब जाखल से आगे जींद तक संचालित होगी। रेलवे ने विस्तारित रूट के लिए नई समय-सारणी जारी की है। लुधियाना से जाखल के बीच ट्रेन के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गाड़ी संख्या 54054 डाउन लुधियाना से शाम 6:30 बजे रवाना होकर रात 9:40 बजे जाखल पहुंचेगी। इसके बाद 9:45 बजे जाखल से रवाना होकर हिम्मतपुरा, टोहाना, कालवन, धमतान साहिब, धारोदी, नरवाना, घासो, उचाना, गांव बड़ौदा और बरसोला होते हुए रात 11:30 बजे जींद जंक्शन पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 54053 अप जींद जंक्शन से सुबह 3:40 बजे रवाना होगी। यह बरसोला से 3:50 बजे, गांव बड़ौदा से 3:54 बजे, उचाना से 4:02 बजे, घासो से 4:08 बजे, नरवाना से 4:16 बजे, धारोदी से 4:25 बजे, धमतान साहिब से 4:34 बजे, कालवन से 4:40 बजे, टोहाना से 4:47 बजे, हिम्मतपुरा से 4:55 बजे और जाखल से सुबह 5:20 बजे रवाना होकर लुधियाना पहुंचेगी। उत्तर रेलवे के अनुसार लुधियाना से चलने वाली गाड़ी संख्या 54054 का जींद तक विस्तार 11 सितंबर से प्रभावी होगा। वहीं गाड़ी संख्या 54053 अप जींद से लुधियाना के लिए 12 सितंबर से नए विस्तारित मार्ग पर संचालित होगी। आसपास के क्षेत्रों के दैनिक यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।