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UP Tex-2026 में ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बोले- नई तकनीक और निवेश से तेजी पकड़ रहा उत्तर प्रदेश का वस्त्र उद्योग

बहुत तेजी से तरक्की कर रहा उत्तर प्रदेश का वस्त्र उद्योग: ब्रजेश पाठक  डिप्टी सीएम ने यूपी टेक्स-2026 के समापन समारोह को किया संबोधित  लखनऊ आज का उत्तर प्रदेश बहुत तेजी से तरक्की कर रहा है। वस्त्र उद्योग भी पीछे नहीं है। एक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं में रोटी, कपड़ा और मकान होता है। आज वस्त्र उद्योग ने भी बहुत तरक्की की है। नई तकनीक के आधार पर वस्त्रो का उत्पादन हो रहा है।  यह कहना है प्रदेश की डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का। वे बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय “यूपी टेक्स-2026” के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। हमारी सरकार ने दिया वस्त्र उद्योग को मार्केट डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य में वस्त्र पहले से स्थापित है लेकिन उसे मार्केट नहीं मिल पाता था। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने वस्त्र को मार्केट दिया और आज उत्तर प्रदेश का वस्त्र देश और दुनिया में जा रहा है। उत्तर प्रदेश में वस्त्र उद्योग को लेकर काफी निवेश भी आ रहा है।  उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। समृद्ध हथकरघा एवं वस्त्र परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत  उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध हथकरघा एवं वस्त्र परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ लाखों कारीगरों, बुनकरों एवं उद्यमियों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। यह आयोजन प्रदेश की पारंपरिक कला, आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को एक मंच पर लाने का सराहनीय कार्य है।हमारी सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को सशक्त बनाते हुए उनके हुनर को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए, ताकि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को और मजबूती मिले। इस अवसर पर मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार राकेश सचान, प्रमुख सचिव, हथकरघा अनिल कुमार सागर, आयुक्त एवं निदेशक, हथकरघा के. विजेंद्र पांडियन, विशेष सचिव, हथकरघा शेषमणि पांडेय, महासचिव, सी०आई०टी०आई चंद्रिमा चटर्जी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

जिम्मेदारों पर कठोरतापूर्वक कार्रवाई की जाए सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आमजन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, सागर के अवैध शराब मामले की होगी न्यायिक जांच : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लापरवाही और अनियमितता पर ज़ीरो टालरेंस, सबकी जवाबदेही तय की जाएगी सागर के अवैध शराब मामले में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा और कड़ा एक्शन इरशाद वली बनाए गए सागर संभाग के नए आईजी सागर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को विदेश दौरे से लौटते ही सागर में अवैध शराब से मृत्यु के मामले में बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर के अवैध शराब मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आमजन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मामले में सभी दोषियों पर कठोरतम  कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही और अनियमितता पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। सभी की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर दिलीप कुमार ने सागर संभाग के आयुक्त पद की कमान संभाल ली है। इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त और निर्णायक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए इरशाद वली को सागर पुलिस रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की जिम्मेदारी सौंपी है। जिम्मेदारों पर कठोरतापूर्वक कार्रवाई की जाए सुनिश्चित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से लोगों की हुई मृत्यु के प्रकरण में कठोरतापूवर्क कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाए। जिले में नशा मुक्ति अभियान भी चलाया जाए जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना भी व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सागर के बुन्देलखंड मेडिकल चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपराध और असामाजिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले के साथ-साथ आस-पास और सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा जहाँ कहीं भी शंका या संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश हो, वहाँ तत्परता से पड़ताल की जाए और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी निर्दोष के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो। अफवाह फैलाने वालों पर करे सख्त कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की मंशा से सोशल मीडिया या अन्य विभिन्न माध्यमों पर अनावश्यक अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। समाज को साथ लेकर चलेगा नशा विरोधी अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में नशा विरोधी अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जनजागरूकता और नशा मुक्ति के प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जाएं। प्रदेश में कठोर कानून का है प्रावधान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार के रहते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय कठोर कानून बनाया गया कि इसमें धारा 49 और बाकी 304 जोड़ते हुए हत्या से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा देने का प्रावधान है। इस प्रकार की घटना में लिप्त है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हमने प्रशासन को फ्री हैंड दिया है कि वह उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें, जिनके अवैध अतिक्रमण हैं या अलग से किसी ने इस प्रकार से अपना साम्राज्य चलाया है, उस पर भी काम करें। नशा मुक्ति के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत हमने पूरे राज्य में निर्देश जारी किए हैं कि नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए धार्मिक संस्थाओं के साथ, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ अलग-अलग स्तर पर शासन की ओर से भी नशा मुक्ति के अभियान चलाने की आवश्यकता है। हम सबको इससे निपटने के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रतिबद्धता की जरूरत पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने अस्पताल के वार्डों में जाकर जाना बंडा के प्रभावितों का हाल, परिजन को बंधाया ढांढस बंडा के अवैध शराब मामले के प्रभावितों को त्वरित राहत देने और उनका ढांढस बंधाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों का कुशलक्षेम जाना और पीड़ित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने परिजन से कहा कि सरकार हर स्थिति में आपके साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रत्येक मरीज के पास जाकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति देखी। पीड़ितों के परिजनों से पूछा—"परिवार में कौन-कौन है? चिंता मत करिए, सरकार हर स्थिति में आपके साथ खड़ी है।" निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीएमसी के प्रभारी डीन, अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सकों से पीड़ितों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। साथ ही आवश्यक दवाओं, टेस्ट और विशेषज्ञों की तैनाती 24 घंटे सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। इस दौरान दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, रहली विधायक गोपाल भार्गव, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे, देवरी विधायक ब्रज बिहारी पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, श्याम तिवारी, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, डाक्टर्स, मौजूद थे।  

UP Education: AI से नहीं बदलेगी शिक्षकों की भूमिका, ब्रजेश पाठक ने बताया शिक्षा में तकनीक का नया रास्ता

एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं, शिक्षा को नई दिशा देने का माध्यम : ब्रजेश पाठक इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स के शिक्षण संवाद कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने रखे विचार  कहा- शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की ओर से लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर रोजगार समाप्त होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन तकनीक के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। एआई को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में स्वीकार करने की जरूरत है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय हमारी गौरवशाली शैक्षिक विरासत के प्रतीक हैं। आज बदलते तकनीकी दौर में शिक्षा व्यवस्था को भी समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। एआई और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  शिक्षक भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक हैं। बदलते शिक्षा परिवेश में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा से जुड़े अभियानों के माध्यम से प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों से जुड़ रहे हैं। 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से कर रहे काम डिप्टी सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में करीब 40 मेडिकल कॉलेज थे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में भी लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें। ओडीओपी से पूरी दुनिया में मिली पहचान उन्होंने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पहचान मिल रही है। स्थानीय हुनर और उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षकों के सवालों का दिया जवाब कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों के साथ शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी बदलाव, एआई, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से संवाद किया। शिक्षकों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल और सुझाव रखे, जिनका उपमुख्यमंत्री ने जवाब दिया। कार्यक्रम में इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की प्रेरणा त्रिपाठी सहित लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के सम्मानित एवं प्रतिष्ठित शिक्षण समुदाय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश में बनेगा नया न्यू हाथरस सिटी, करीब 10 हजार एकड़ में होगा विकास; जेवर एयरपोर्ट से होगी शानदार कनेक्टिविटी

हाथरस यूपी में हाथरस जिले में 10 हजार एकड़ में नया शहर बसाने की तैयारी है.यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) मास्टर प्लान 2041 (फेज 2) के तहत ये नया शहर बसा जा रहा है. करीब 4000 हेक्टेयर में ये इंडस्ट्रियल और आवासीय शहर हाथरस अर्बन सेंटर या न्यू हाथरस नाम से बसाया जा रहा है. यीडा ने इसके लिए तीन-चार जगहें चिन्हित की हैं और कंसल्टेंट कंपनी ने यमुना अथॉरिटी को रिपोर्ट सौंप दी है. अगले 15 सालों के भीतर ये नया शहर एनसीआर के पास सबसे बड़ी आवासीय परियोजना हो सकती है।      10,000 एकड़ का एरिया न्यू हाथरस का     हाथरस, सासनी तहसील के 50 गांव     यमुना अथॉरिटी के 358 गांव अधिसूचित हाथरस के ये गांव फायदे में रहेंगे हाथरस जिले के 358 गांव यमुना अथॉरिटी के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल हैं. ये इलाका यमुना एक्सप्रेसवे से करीब 45 किलोमीटर में फैला है.इसका प्रारंभिक सर्वे कराया गया है.अथॉरिटी से जगह फाइनल होने के बाद एजेंसी व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी. न्यू हाथरस का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. यमुना एक्सप्रेसवे से बिल्कुल सटे हाथरस की सादाबाद तहसील के 127 गांव इसमें आते हैं.  हाथरस (सदर) तहसील के 180 से 215 गांव इसके दायरे में होंगे, जो हाथरस शहर के करीब अलीगढ़-आगरा हाईवे (NH-93) के समीप हैं।  सासनी-सादाबाद तहसील के पास सासनी तहसील में 42 से 79 गांव में ब्लॉक और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इसमें होंगे. सासनी एवं सादाबाद क्षेत्र में सासनी देहात, टुकसान, केवलगढ़ी, बीछिया, ताजपुर, धातरा खुर्द, धातरा कलां, खेड़ा बरामई, गढ़ी जैनी, रोहई, रामगढ़, जटोई, बंका, फरसौटी गांव इसमें आ सकते हैं. सदर एवं चंदपा में चंदपा, कोटा, अहवरनपुर, चंद्रगढ़ी, फुसकरा, नगला शीशम, खरगू, कोरना चमरुआ, बुधु नगला हेमराज गांव आ सकते हैं।  हाथरस अर्बन सेंटर (न्यू हाथरस) से शहरों की दूरी मथुरा : 40–45 किमी: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर, विश्राम घाट  वृंदावन: 45–50 किमी: बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर आगरा: 50–60 किमी: ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी  अलीगढ़:30–35 किमी: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और देश का प्रमुख ताला-हार्डवेयर हब राया हेरिटेज सिटी (यीडा): 25–30 किमी: यमुना एक्सप्रेसवे किनारे धार्मिक पर्यटन टाउनशिप  गोवर्धन और बरसाना: 65–70 किमी: गोवर्धन परिक्रमा, राधा रानी मंदिर बरसाना ग्रेटर नोएडा : 100–125 किमी: यमुना एक्सप्रेसवे से 1- 1.5 घंटे का सफर हाथरस अर्बन सेंटर 4 हिस्सों में  हाथरस अर्बन सेंटर को चार हिस्सों में बांटा गया है. इसमें इंडस्ट्रियल जोन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, एमएसएमई और एक्सपोर्ट इकाइयां लगाई जाएंगी. आवासीय परियोजना में औद्योगिक कर्मचारियों और आम जनता के लिए हाउसिंग सेक्टर, ऊंची इमारतें और किफायती आवास बनेंगे.लॉजिस्टिक्स हब में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल, मॉल-रेस्तरां और वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स पार्क बनाया जाएगा. ग्रीन एरिया के लिए पर्यावरण संतुलन के लिए कुल क्षेत्रफल का 15% से अधिक हिस्सा पार्क, ग्रीनरी और ओपन स्पेस के लिए रखा गया है।  हाथरस के हींग उद्योग को फायदा हाथरस के ODOP उत्पाद हींग और गुलाल उद्योग को पैकेजिंग, लैब टेस्टिंग और सीधी एक्सपोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी. फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उद्योग को भी दिल्ली एनसीआर के बाहर भी बड़ा बाजार मिलेगा. यहां कांच के मोती और पीतल के आभूषण, मशीन टूल और इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जे के उद्योगों को फायदा मिलेगा.मेडिकल और पावर ग्रिड मशीनरी यूनिट का यहां की इकाइयां भी फायदा उठाएंगी।  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नजदीक हाथरस अर्बन सेंटर जेवर एयरपोर्ट से लिंक है. यह जेवर एयरपोर्ट के डायरेक्ट कैचमेंट एरिया में आता है.यीडा अलग से एक्सप्रेस रोड नेटवर्क बना रहा है. यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे, NH-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा हाईवे और हाथरस रेलवे जंक्शन से सीधे जुड़ा है. ये आगरा का सैटेलाइट टाउन बन सकता है. आगरा पर बढ़ रहे औद्योगिक कारखानों और आबादी के दबाव घटाने में यह मददगार होगा।  यमुना एक्सप्रेसवे किनारे तीन शहरी केंद्र बनेंगे यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी का मास्टर प्लान-2041 तैयार हो चुका है. यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी फेज-2 के तहत तीन शहरी केंद्रों का प्लान है.यीडा मास्टर प्लान 2041 के फेज-2 में ये तीन अर्बन नोड्स बनने हैं।   टप्पल-बाजना अर्बन सेंटर अलीगढ़ में 11,104 हेक्टेयर में ये नया शहर बसाया जाएगा. यहां लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब के साथ टाउनशिप बनेगी. जेवर एयरपोर्ट के बेहद नजदीक यहां मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रांसपोर्ट हब और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनाया जा रहा है।  राया अर्बन सेंटर  मथुरा में राया अर्बन सेंटर नाम से हेरिटेज सिटी बन रही है. धार्मिक पर्यटन एवं हेरिटेज टाउनशिप 11653 हेक्टेयर में है. मथुरा-वृंदावन के धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को संजोते हुए 753 एकड़ में ये शानदार हेरिटेज सिटी, यमुना रिवरफ्रंट, थीम पार्क और वेलनेस सेंटर बनाए जा रहे हैं।  आगरा अर्बन सेंटर या न्यू आगरा ताजनगरी में आगरा अर्बन सेंटर या न्यू आगरा बसाया जा रहा है. 14 हजार हेक्टेयर के इस शहर में आईटी, पर्यटन एवं प्रदूषण मुक्त उद्योगों के साथ आगरा में यह सबसे बड़ा नोड होगा. इसमें आईटी पार्क, हॉस्पिटैलिटी, एक्सपो सेंटर और ग्रीन इंडस्ट्री भी होगा। 

MP में 17 सितंबर से बीजेपी का बड़ा अभियान, 20 यात्राओं से कवर होंगे 55 जिले; जानें पूरा प्लान

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा 17 सितंबर से वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक 10-10 यात्राएं निकालने जा रही है। इन यात्राओं के लिए ऐसे रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि एक यात्रा का मार्ग दूसरी यात्रा से न टकराए। मध्यप्रदेश से होकर गुजरने वाले अलग-अलग मार्गों के जरिए प्रदेश के सभी 55 जिलों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी स्तर पर इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन यात्राओं में उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा कवर होगा। गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली से होकर ये यात्राएं गुजरेंगी। अलग-अलग नेताओं को दी जिम्मेदारी अब तक 13 रूट फाइनल किए जा चुके हैं, जबकि बाकी रूट को लेकर मंथन चल रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है। यात्राओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा। इनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने, सेवा गतिविधियों और 2047 के संकल्प को भी शामिल किया जाएगा। आम लोगों के सुझाव लेंगे बीजेपी नेता यात्रा की कार्ययोजना में जनभागीदारी, विकास, सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रमुखता दी गई है। हर प्रमुख पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, लाभार्थियों और समुदाय के दूसरे वर्गों को गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। सरकारी योजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक सहायता और नागरिकों के सुझाव दर्ज करने की भी योजना है। 25 आइकॉन में चुने जाएंगे मेधावी '25 आइकॉन' अभियान में हर पड़ाव से किसान, शिक्षक, महिला उद्यमी, युवा या खिलाड़ी जैसे स्थानीय प्रेरक व्यक्ति को चुना जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की छोटी वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप पर दिखाने का प्रस्ताव है। साथ ही 'चिट्ठी 2047 के नाम' के जरिए लोगों से पूछा जाएगा कि वे 2047 तक अपने क्षेत्र को किस रूप में देखना चाहते हैं। हर पड़ाव पर 'मेरे लिए भारत की प्रगति…' जनवाणी के जरिए नागरिकों की बात रिकॉर्ड की जाएगी। वाराणसी में इन आवाजों को जोड़कर 90 सेकेंड की फिल्म बनाने का प्रस्ताव है। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों और सामग्री निर्माताओं को भी यात्रा से जोड़ा जाएगा। शहीदों की मिट्टी से लेकर चिकित्सा शिविर तक यात्रा के दौरान जिन क्षेत्रों का संबंध स्वतंत्रता सेनानियों या देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से है, वहां उनके गांव, स्मारक या समाधि स्थल की मिट्टी कलश में एकत्र करने की योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। इसके अलावा चयनित पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और शुगर की जांच तथा परामर्श होगा। हर पड़ाव पर सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण एवं सहायता डेस्क लगाने का भी प्रस्ताव है। 2001 से 2026 तक की विकास यात्रा भी दिखाई जाएगी यात्रा में बुजुर्गों के अनुभव रिकॉर्ड किए जाएंगे। 'पहले और अब' प्रदर्शनी दीवार के जरिए पुरानी और मौजूदा तस्वीरों व दस्तावेजों के माध्यम से सड़क, स्कूल, घर और बिजली जैसी सुविधाओं में आए बदलाव दिखाने की योजना है। वहीं, 'विकास की यात्रा' नुक्कड़ नाटक में 2001 से 2026 तक एक परिवार की कहानी के जरिए बिजली, गैस कनेक्शन, आवास और शिक्षा जैसी सुविधाओं में हुए बदलाव को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। नारी शक्ति सम्मेलन और क्विज भी होंगे स्थानीय योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान, नारी शक्ति सम्मेलन, पोस्टर प्रतियोगिता और नमो ऐप के पीपल्स कॉर्नर पर विजेता प्रविष्टियां प्रदर्शित करने का प्रस्ताव भी है। इसके साथ चलती-फिरती 'विकसित भारत 2047' संकल्प एवं हस्ताक्षर दीवार यात्रा के साथ चलेगी और अंत में वाराणसी में प्रस्तुत की जाएगी। जहां रात्रि पड़ाव, वहां 25 दीप जलाएंगे लाभार्थी रात्रि पड़ावों पर '25 साल, 25 दीप' कार्यक्रम होगा, जिसमें 25 लाभार्थी 25 दीप जलाकर दिन का सांस्कृतिक और भावनात्मक समापन करेंगे। प्रमुख पड़ावों पर पौधारोपण भी किया जाएगा और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय व्यक्ति, संस्था या विद्यालय को देने का प्रस्ताव है।

MP की लाड़ली बहनों को ₹1500 का इंतजार खत्म होने वाला! 40वीं किस्त की संभावित तारीख आई सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के आधार लिंक और DBT-enabled बैंक खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर किए जाते हैं।अब महिलाओं को योजना की 40वीं किस्त का इंतजार है। सामान्य तौर पर सरकार हर महीने 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी करती है। ऐसे में इस बार भी 15 सितंबर से पहले राशि खाते में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। 19 अगस्त को जारी हुई थी 39वीं किस्त इससे पहले सरकार ने रक्षाबंधन से पहले 19 अगस्त को लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त जारी की थी। उस दौरान पात्र महिलाओं के बैंक खातों में नियमित 1500 रुपये की किस्त के साथ 250 रुपये अतिरिक्त गिफ्ट के तौर पर भी ट्रांसफर किए गए थे।अब अगली किस्त को लेकर महिलाओं की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर बनी हुई है। किन महिलाओं को मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ? लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को दिया जाता है। योजना में विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।पात्रता के अनुसार आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र कम से कम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए। इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ योजना के तहत कुछ श्रेणियों को अपात्र रखा गया है। यदि महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो वह योजना का लाभ नहीं ले सकती।इसके अलावा परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी पात्रता नहीं होगी। सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी कर्मचारी या संविदाकर्मी के रूप में काम करने वाले सदस्य वाले परिवार भी योजना से बाहर हैं।सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त करने वाले परिवारों को भी योजना का लाभ नहीं दिया जाता। दूसरी सरकारी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की पात्रता यदि कोई महिला किसी अन्य सरकारी योजना के माध्यम से हर महीने 1250 रुपये या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होगी। जमीन और वाहन को लेकर भी नियम योजना की पात्रता में परिवार की कृषि भूमि और वाहन की स्थिति को भी शामिल किया गया है। 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकते।इसी तरह ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं। महिलाओं को आधिकारिक घोषणा का इंतजार फिलहाल 40वीं किस्त को लेकर 15 सितंबर से पहले भुगतान की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, राशि ट्रांसफर की अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी।  किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ? लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को मिलता है। इसमें विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं। आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए। किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ? जिस महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, वह पात्र नहीं होगी। परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थाईकर्मी या संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत सदस्य वाले परिवार भी अपात्र होंगे। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, जो महिला किसी अन्य सरकारी योजना से प्रतिमाह 1250 रुपये या उससे अधिक प्राप्त कर रही है, वह पात्र नहीं होगी। वर्तमान या भूतपूर्व सांसद/विधायक के परिवार, चयनित या मनोनीत बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम के अध्यक्ष, संचालक अथवा सदस्य के परिवार भी अपात्र हैं। स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (पंच और उपसरपंच को छोड़कर) के परिवार, 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार और ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना का लाभ नहीं ले सकते।  

यात्री परिवहन विजन समिट-2026: MP में बढ़ेगा बस नेटवर्क, 75% ग्राम पंचायतें बस सेवा से जुड़ेंगी

यात्री परिवहन विजन समिट-2026 मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन के विस्तार से निवेश, रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को करेंगे सुदृढ़ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को प्राथमिकता भोपाल  प्रदेश के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन समिट-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस समिट में प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर भी मंथन होगा। इसमें पूरे देश से आने वाले परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति-निर्माता प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किेया जायेगा। लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड अंतर्गत ‘मोबिलिटी विज़न: 2030’ का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान की जायेगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर दिया जाएगा विशेष जोर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से समिट में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। वर्तमान में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें प्रदेश में संचालित हैं। इसके साथ आगामी 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 इंटरसिटी बसें जोड़ी जाएंगी, जबकि वर्ष 2027 तक यह संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है। प्रदेश में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सोलर इंफ्रॉस्ट्रक्चर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे सालाना 70,000 टन से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। यात्री सुरक्षा, स्मार्ट तकनीक और 24×7 निगरानी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से बसों के संचालन, लोकेशन, टाइमिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। पीपीपी मॉडल के जरिए निजी ऑपरेटरों की सशक्त भागीदारी आमजन के आवागमन को सुगम बनाने के लिये जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। यह समिट निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित कर मध्यप्रदेश को देश के सबसे उन्नत, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीक-सक्षम सार्वजनिक परिवहन राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। परिवहन क्षेत्र में निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा समिट से यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। कल दोपहर 12 बजे तक करा सकेंगे पंजीयन समिट में शामिल होकर अपने सुझाव देने के लिए इच्छुक प्रतिभागियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। पंजीयन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है। इच्छुक प्रतिभागी दोपहर 12 बजे तक https://forms.gle/f9wEvWb444JkzJgX6 लिंक पर जाकर पंजीयन करा सकेंगे। साथ ही https://events.eletsonline.com/mpyatriparivahansummit/ लिंक पर जाकर समिट से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  

क्लाइमेट अलार्म! मध्यप्रदेश में मीथेन ने बढ़ाई चिंता, सैटेलाइट विश्लेषण में सामने आए 4 प्रदूषण क्षेत्र

भोपाल मध्यप्रदेश में कार्बन डाई ऑक्साइड के बाद मीथेन गैस हवा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रही है। सैटेलाइट विश्लेषण में राज्य में चार अलग-अलग प्रदूषण क्षेत्रों की पहचान की गई है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में उद्योग परिवहन प्रमुख स्रोत हैं। सिंगरौली कोयला खनन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है। सागर, मुरैना, व में रीवा, खरगोन और छिंदवाड़ा सहित अन्य जिलों में पशुधन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास जलाने से ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन हो रहा है। इन प्रदूषकों के चलते 2030 के दशक तक मप्र के औसत अधिकतम तापमान में 1.8-2.0 डिग्री सेल्सिसयस और न्यूनतम तापमान में 2.0-2.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभावित है। राज्य का पूर्वी हिस्सा तेजी से गर्म हो रहा है। डिंडोरी, भिंड और सीधी जैसे जिले कम अनुकूलन क्षमता के कारण विशेष रूप से जोखिम में हैं। गैर कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी ऐसे एक बहु-क्षेत्रीय आकलन के नाम से पर्यावरण विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन केंद्र, एप्को, इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट और दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट- टेरी के विशेषज्ञों ने तैयार की है। प्रदूषकों की समस्याओं से निपटने के रास्ते बताए गए हैं। कहा गया है कि शॉर्ट लिव्ड क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स को कम करना जरूरी है। स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रभावी उपाय लागू किए जाएं तो 2047 तक सामान्य स्थिति की तुलना में सल्फर डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 80%, नाइट्रोजन ऑक्साइड में 78%, नॉन मीथेन वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड में 61% ब्लैक कार्बन में 56% तक कमी लाई जा सकती है। यह सुझाए तात्कालिक रास्ते रिपोर्ट में नॉन सीओटू प्रदूषकों को कम करने रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ाने, बिजली क्षेत्र में गैस के इस्तेमाल, इंडस्ट्री में साफ़ ईंधन और ट्रांसपोर्ट में ईवी अपनाने, पुरानी गाड़ियां हटाने का सुझाव है। प्राकृतिक तरीके से धान की खेती में मीथेन उत्सर्जन 65% तक कम हो सकता है। चारे के सही प्रबंधन से पशुपालन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में 10-15% की कमी तेजी से और कम लागत में हो सकती है। कम्युनिटी-लेवल पर बायोगैस, एंटरिक फर्मेंटेशन रोकने वाले उपाय, कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन को पकड़ने, जलाने जैसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने से ये तीनों सेक्टर 2030 के बाद उत्सर्जन में और ज़्यादा और लंबे समय तक कमी लाने में अहम साबित होंगे। भविष्य के लिए बताई यह योजना -अलग-अलग सेक्टर की एसएलसीपी रणनीतियों को राज्य के जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ने के लिए सेक्टर और विभागों के बीच तालमेल के सिस्टम को मजबूत करना चाहिए। -खनन, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक रोडमैप बनाया जाए, जिसमें उत्सर्जन कम करने के लिए समय-सीमा वाले लक्ष्य तय हों। -पशुपालन, खेती और कोयला खनन जैसे सेक्टर्स में खास तौर पर उत्सर्जन कम करने की रणनीतियां लागू करना चाहिए। ये राज्य में गैर सीओटू उत्सर्जन के ऐसे स्रोत हैं, जिनमें सुधार की सबसे ज्यादा गुंजाइश है, लेकिन जिन पर अब तक कम ध्यान दिया गया है। -ग्रीन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए राष्ट्रीय मिशनों और केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए और कम-कार्बन वाले इंफास्ट्रक्चर के लिए क्लाइमेट फाइनेंस और सीएसआर फंड जुटाना चाहिए। -नियम लागू करने और हालात के हिसाब से प्रबंधन के लिए मज़बूत मॉनिटरिंग और मूल्यांकन सिस्टम बनाना जरूरी है, जिसमें रियल-टाइम उत्सर्जन ट्रैकिंग और रिमोट सेंसिंग शामिल हो।

अल्पसंख्यक आयोग के नव-नियुक्त अध्यक्ष मोहसिन रज़ा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की शिष्टाचार भेंट।

लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (चेयरमैन) का पदभार ग्रहण करने के उपरांत  मोहसिन रज़ा जी ने आज मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी महाराज से उनके शासकीय आवास 5, कालिदास मार्ग, लखनऊ पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर  मोहसिन रज़ा जी ने आयोग के अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। भेंट के दौरान प्रदेश में अल्पसंख्यक समाज के कल्याण, सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहनता से चर्चा हुई।   मोहसिन रज़ा जी ने मुख्यमंत्री जी को आश्वस्त किया कि आयोग पूरी निष्ठा के साथ समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करेगा

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रज़ा ने प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह जी से की भेंट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (चेयरमैन) का पदभार ग्रहण करने के पश्चात  मोहसिन रज़ा जी ने आज भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन महामंत्री माननीय  धर्मपाल सिंह जी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर  मोहसिन रज़ा जी ने यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाने पर प्रदेश संगठन महामंत्री जी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। भेंट के दौरान प्रदेश में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा अल्पसंख्यक समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए आयोग की भूमिका और आगामी कार्ययोजनाओं पर भी सार्थक चर्चा हुई।