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लोक अदालत में मिल रहा त्वरित न्याय: राजीनामे के जरिए मामलों का हो रहा निराकरण

रायपुर. रायपुर. आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए मामलों का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के तत्वावधान में आज देशव्यापी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) बिलासपुर द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित की जा रही है। यह कैलेण्डर वर्ष 2026 की दूसरी लोक अदालत है। लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है। नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे। इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है। नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे। इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा।

CGBSE D.P.Ed. Result 2026 आउट: फर्स्ट ईयर में 51% और सेकंड ईयर में छात्रों ने मारी बाजी

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से आयोजित D.P.Ed. परीक्षा 2026 का रिजल्ट गुरुवार 8 मई को घोषित कर दिया गया। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा डीपीएड परीक्षा के परिणाम जारी किए गए है। परीक्षार्थी सीजीबीएसई की वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित डी.पी.एड. (DPEd-) परीक्षा वर्ष 2026 का परीक्षा परिणाम आज 08 मई 2026 को घोषित कर दिया गया है। उक्त परीक्षा में प्रथम वर्ष के 51 तथा द्वितीय वर्ष के 52 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए थे। सभी परीक्षार्थी मण्डल की आधिकारिक वेबसाइट https://www.cgbse.nic.in/ पर अपना अनुक्रमांक प्रविष्ट कर परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

ASI ने बताया: नेटवर्क पर सख्त निगरानी, प्रोडक्शन वारंट से होगी पूछताछ

फरीदकोट  फरीदकोट की केंद्रीय जेल में बंद कैदियों और हवालातियों से मोबाइल फोन बरामद होने का सिलसिला लगातार जारी है। जेल प्रशासन ने एक बार फिर विभिन्न बैरकों की तलाशी के दौरान चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस को भेजी शिकायत में जेल के सहायक अधीक्षक करमजीत सिंह ने बताया कि जेल अधीक्षक के दिशा-निर्देशों पर जेल कर्मचारियों की टीम ने शुक्रवार रात विभिन्न बैरकों का औचक निरीक्षण किया। तलाशी अभियान के दौरान जेल में बंद हवालाती बठिंडा निवासी दलेर सिंह, फाजिल्का निवासी जशनप्रीत सिंह, मोगा निवासी अमरजीत सिंह, दिलबाग सिंह और हरजीत सिंह के पास से चार मोबाइल फोन बरामद हुए। थाना सिटी पुलिस ने उक्त पांचों हवालातियों के खिलाफ जेल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी-जांच अधिकारी इस संबंध में जांच अधिकारी और जेल इन्वेस्टिगेशन सेल के इंचार्ज एएसआई गुरपाल सिंह ने बताया कि आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी। यह भी जांच की जाएगी कि जेल के अंदर मोबाइल फोन किस तरह पहुंचे। यदि किसी जेल अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसे भी मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया जाएगा।  

गोबर और दूषित पानी बहाने वाले डेयरी संचालक पर लुधियाना में कानूनी कार्रवाई

लुधियाना लुधियाना की लाइफलाइन माने जाने वाले बुड्ढा दरिया (नाला) को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जल संसाधन विभाग (ड्रेनेज-कम-माइनिंग और जियोलॉजी मंडल) की शिकायत पर थाना नंबर 7 की पुलिस ने एक डेयरी संचालक के खिलाफ की करवाई।  कार्यकारी इंजीनियर लुधियाना ड्रेनेज-कम-माइनिंग मंडल को सूचना मिली थी कि गुरु नानक नगर गांव भामियां कलां स्थित एक डेयरी द्वारा सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जांच में पाया गया कि आरोपी डेयरी संचालक सुरिंदर कुमार उर्फ रोमी अपनी डेयरी का गोबर, गंदगी और दूषित पानी सीधे बुड्ढा दरिया में बहा रहा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 10 फरवरी 2026 को प्राप्त हुई लिखित शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि डेयरी वेस्ट के कारण नाले का पानी न केवल जहरीला हो रहा है, बल्कि इससे जल शोधन परियोजनाओं में भी बाधा आ रही है। इन धाराओं में फंसा आरोपी पुलिस ने आरोपी सुरिंदर कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और ड्रेनेज एक्ट U/S 70 NIC & Drainage Act 1873 सरकारी जलमार्गों में कचरा फेंकने और नियमों के उल्लंघन में धारा 271, 272, 279 BNS के तहत केस दर्ज किया है। जन स्वास्थ्य को खतरे में डालने लापरवाही से प्रदूषण फैलाने और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने के मामले में। प्रशासन की चेतावनी: अब नरमी नहीं ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि बुड्ढा नाला का कायाकल्प मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसके बावजूद कई डेयरी संचालक और फैक्ट्रियां चोरी-छिपे वेस्ट पाइपों के जरिए नाले में कचरा डाल रहे हैं। थाना 7 के जांच अधिकारी ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। आरोपी की डेयरी पर भी विभाग द्वारा आगामी कार्रवाई की जा सकती है, ताकि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति ऐसी हिम्मत न करे।  

सदस्यता अभियान के साथ युवा कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता, चुनावी तैयारी भी तेज

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में भारतीय युवा कांग्रेस के बहुप्रतीक्षित संगठनात्मक चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक नई टीम के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। संगठन के भीतर नए नेतृत्व, नई रणनीति और युवा चेहरों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया से पहले बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस बार संगठन का फोकस ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़कर जमीनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। सदस्यता शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और संसाधनयुक्त बनाने की तैयारी मानी जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगी संचालित युवा कांग्रेस इस बार पूरी चुनाव प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित करने की तैयारी में है। सदस्यता से लेकर मतदान तक अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी कराई जा सकती हैं। संगठन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं की भागीदारी पहले से ज्यादा होगी। ब्लॉक स्तर तक चुनाव कराकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू  जानकारी के अनुसार चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चयन में संगठनात्मक सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और उम्र जैसे पहलुओं को अहम माना जाएगा। इधर चुनावी आहट के साथ ही प्रदेशभर में युवा नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। जिलों में लगातार बैठकों, संपर्क अभियानों और कार्यकर्ताओं के बीच समर्थन जुटाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।  इन नामों पर हो रही चर्चा  इस बार जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही। है उनमें हन्नी बगा, आदित्य भगत ,निखिल कांत साहू , सत्येंद्र चेलक, प्रशांत बोकड़े, हर्षित बघेल, संदीप वोरा समेत कई युवा नेता शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डिजिटल चुनाव प्रणाली, बढ़े हुए सदस्यता अभियान और संगठन में नई ऊर्जा की कोशिशों के चलते इस बार युवा कांग्रेस का संगठनात्मक चुनाव पहले की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प हो सकता है। साथ ही कई नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, कई अधिकारी मौके पर

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी. सुबह करीब 7 बजे सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी पर ED अधिकारियों का काफिला पहुंचा. करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों के साथ भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया. CIA और स्पेशल फोर्स के करीब तीन दर्जन जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया. जानकारी के मुताबिक सुबह 7:25 बजे औपचारिक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. ED की यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की जा रही है. एजेंसी चंडीगढ़ और दिल्ली-NCR में संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े सहयोगियों के कुल चार ठिकानों पर जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई दो दिन पहले शुरू हुई बड़ी जांच का विस्तार मानी जा रही है, जिसमें बिल्डर अजय सहगल, मोहिंदर सिंह और अन्य कारोबारियों के यहां भी छापेमारी हुई थी।  इस कार्रवाई के समानांतर पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर की 9वीं मंजिल पर चल रही ED रेड भी शुक्रवार देर रात खत्म हुई. यह सर्च ऑपरेशन करीब 40 घंटे तक चला. कारोबारी नितिन गोहल और प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घरों और दफ्तरों पर लगातार जांच चलती रही. सूत्रों के मुताबिक प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घर से ED की टीम रात करीब 11 बजे निकली, जबकि नितिन गोहल के यहां कार्रवाई देर रात 12:30 से 1 बजे के बीच खत्म हुई. हालांकि अधिकारियों ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि ED अधिकारी कई बैग और दस्तावेज लेकर बाहर निकले. अभी तक एजेंसी ने बरामदगी, जब्ती या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।  एक महीने में दूसरी बार, एक साल में तीसरी रेड पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ED पहुंची है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे कोई ताकत झुका नहीं सकती. मान ने आरोप लगाया कि ED और BJP मिलकर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है।  बिल्डर नेटवर्क से जुड़ रही जांच की कड़ियां सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले पंजाब और दिल्ली-NCR में बिल्डर और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की थी. उसी जांच के तार अब संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है. अधिकारियों ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ती छापेमारी से यह साफ है कि जांच का दायरा बड़ा हो चुका है।  सुरक्षा घेरे में पूरा इलाका ED रेड के दौरान चंडीगढ़ के सेक्टर-2 इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी रही. मंत्री आवास के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था. सुबह से लेकर देर शाम तक मीडिया और स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा रही. अधिकारियों ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।  क्या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है? फिलहाल ED ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब की राजनीति में इस कार्रवाई को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

देश का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क भोपाल में आज खुलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी। इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है। इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी। इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग। इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी। अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है। इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे। भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण? भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए। 'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा। 3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:     प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।     प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।     मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

यूसीसी में बड़ा बदलाव, एमपी में एक समुदाय को मिलेगी 70% तक छूट

भोपाल   मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो सकती है। सरकार ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के मुख्य सचिव को अलग से कहा है कि वे समिति से समन्वय के लिए अपनी निगरानी में अधिकारियों के एक दल को लगाएं ताकि समिति की बैठकें समय-समय पर होती रहें। समिति को जो सहयोग चाहिए, वह राज्य की ओर से उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि प्रदेश में यूसीसी में आदिवासियों को 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। असल में उत्तराखंड व गुजरात ने यूसीसी लागू कर दिया है। अब सीएम चाहते हैं कि मप्र इन दोनों राज्यों के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बने। हालांकि भाजपा व एनडीए शासित दूसरे राज्यों में भी यह कवायद तेजी से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक यूपी व असम में भी तैयारियां हो चुकी हैं। समिति को 60 दिन में करने होंगे ये काम प्रदेश में मौजूदा विभिन्न व्यक्तिक, पारिवारिक विधियों, जिनमें विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण- पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक, लिव-इन का अध्ययन। उत्तराखंड-गुजरात में अपनाए गए मॉडल व प्रक्रिया का अध्ययन। राज्य के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित-व्यावहारिक विधिक संरचना का प्रस्ताव देना। विभिन्न हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां लेकर उनका निराकरण कराना। सुनवाई व परामर्श बैठकें कर प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता। प्रस्तावित व्यवस्था में महिला- बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, समानता एवं सुरक्षा से जरुरी प्रावधानों पर विचार देना। लिव-इन संबंधों के विनियमन, पंजीयन से उत्पन्न अधिकारों के संबंध में सुझाव देना। विधेयक के विधिक, प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का परीक्षण करना, ताकि भविष्य में विधिक जटिलता का सामना न करना पड़े। क्या कहता है यूसीसी विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामले वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों द्वारा शासित हैं। यूसीसी में कहा गया है कि यह सभी नागरिकों के बीच समानता, निष्पक्षता और कानूनी स्पष्टता वाले होने चाहिए। एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी संरचना से देश व राज्यों के विकास में सहायता मिलेगी। मप्र में अब तक ये काम हुआ 27 अप्रेल को यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई को अध्यक्ष बनाया है। जबकि सेवानिवृत्त आइएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद् अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह को सदस्य बनाया है। समिति के सचिव का जिम्मा जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया को दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में यूसीसी को लेकर की जा रही तैयारियों पर अधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। पिछले सप्ताह सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में भी इस संबंध में जानकारी ली गई थी। कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में, विरोध पर कर रही विचार उधर कांग्रेस भी यूसीसी पर नजर गड़ाए बैठी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक दल यूसीसी को लेकर सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों को देख रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में है।

जांच एजेंसियां न जुटा पाईं सबूत, छत्तीसगढ़ में 76 CRPF जवानों की हत्या के सभी आरोपी हाईकोर्ट से बरी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में सभी आरोपियों की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। अदालत ने अपने फैसले में प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और जांच में प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया है। जांच में गंभीर खामियां नजर आईं चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एक खंडपीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पीठ ने जांच और अभियोजन पक्ष की कार्रवाई में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है। यह आदेश पांच मई को पारित किया गया था और गुरुवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सीआरपीएफ कर्मियों पर बड़ा हमला आदेश में कहा गया है कि सीआरपीएफ कर्मियों पर हुए एक बड़े हमले के मामले में आरोपियों की रिहाई को बरकरार रखा गया। ऐसा प्रत्यक्ष सबूतों की कमी कि परिस्थितिजन्य सबूतों के अधूरेपन, जांच में प्रक्रियागत खामियों और अपराध की गंभीरता के बावजूद, आरोपियों के दोष को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता के कारण किया गया है। अप्रैल 2010 में हुआ था हमला यह मामला छह अप्रैल, 2010 को हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। यह हमला तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले के चिंतागुफा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़मेटला गांव के जंगलों में हुआ था। यह जगह अब सुकमा जिले में है। सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन का एक दल, राज्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर इलाके में गश्त पर था। इसी दौरान भारी हथियारों से लैस माओवादियों ने कथित तौर पर उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में मारे गए थे 76 जवान सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इनमें 75 सीआरपीएफ के और एक राज्य पुलिस का जवान शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक माओवादी हमलों में से एक था। जांच के बाद, 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कोंटा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया। बाद में इस मामले को दंतेवाड़ा स्थित सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। सभी 10 आरोपियों को कर दिया बरी सुनवाई के बाद सात जनवरी, 2013 को दंतेवाड़ा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में विफल रहा है। आरोपियों पर थें ये धाराएं आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र, दंगा करना और हत्या के साथ डकैती डालना शामिल था। बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए, राज्य सरकार ने 2014 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस मामले के 10 आरोपियों जिन्हें सत्र अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था, में से दो की मौत हो चुकी है। अहम सबूतों को नहीं समझ पाई अदालत हाईकोर्ट में महाधिवक्ता विवेक शर्मा और उप महाधिवक्ता सौरभ पांडे ने यह दलील दी कि निचली अदालत अहम सबूतों को ठीक से समझने में नाकाम रही। इन सबूतों में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज एक आरोपी का इकबालिया बयान और घटनास्थल से बरामद विस्फोटक शामिल थे। कोर्ट ने गवाही की अर्जी कर दी थी खारिज राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर उस अर्जी को खारिज करके गलती की, जिसमें हमले के चश्मदीद गवाह रहे सीआरपीएफ के सात घायल जवानों की गवाही कराने की मांग की गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह कहा कि आरोपियों को हत्याओं से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत या चश्मदीद गवाह की गवाही मौजूद नहीं थी, और किसी भी चश्मदीद गवाह ने उन्हें अपराधी के तौर पर नहीं पहचाना था। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिया गया कथित इकबालिया बयान किसी भी स्वतंत्र सबूत से पुष्ट नहीं होता है। घटनास्थल से नहीं बरामद हुए हथियार वहीं, अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन विस्फोटकों और हथियारों का जिक्र किया गया था, वे अपराध स्थल से बरामद हुए थे, न कि आरोपियों के कब्ज़े से, साथ ही, जब्त की गई चीजों के विस्फोटक होने की पुष्टि करने वाली फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी। अदालत ने की तीखी टिप्पणी  इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यह देखकर अत्यंत पीड़ा होती है कि सीआरपीएफ के 75 कर्मियों की जान जाने के बावजूद, जिसमें राज्य पुलिस का एक सदस्य भी शामिल था, कथित तौर पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक क्रूर हमले में, अभियोजन एजेंसियां अपराध के असली अपराधियों की पहचान स्थापित करने या इस तरह के बर्बर कृत्य के लिए उन्हें न्याय के दायरे में लाने में सक्षम नहीं हुई हैं। विश्वसनीय सबूत नहीं पेश किया अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर भी उतना ही दुख हुआ कि इतने गंभीर मामले को, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ, अंततः इस तरह से निपटाया गया कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया जा सका। नतीजतन, निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इन परिस्थितियों में, हमारे पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के आदेश को विकृत, अनुचित या तर्क या न्यायिक औचित्य को चुनौती देने वाला नहीं कहा जा सकता। हालांकि, उच्च न्यायालय ने जांच में पाई गई कमियों पर चिंता जाहिर की और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाली गंभीर अपराधों की जांच में, खासकर उन मामलों में जिनमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ हो और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, जांच के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य को यह निर्देश भी दिया कि वह जांच की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम … Read more

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत, मंत्री ने कहा—धार्मिक संस्थानों में मिलेगी उपयोगी ट्रेनिंग

भोपाल मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अब प्रशिक्षित और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंदिरों में तेजी से बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या मंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के दूसरे बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले जहां विशेष पर्व, शिवरात्रि या सावन जैसे मौकों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब हर शनिवार-रविवार और छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में अब सामान्य दिनों में भी एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सुविधाओं को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। क्या पढ़ाया जाएगा टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में? इस नए कोर्स में सिर्फ धार्मिक पहलुओं पर नहीं बल्कि आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर फोकस किया जाएगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग और डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्च और मस्जिद में भी काम आएगा यह मैनेजमेंट इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह एक जैसे होते हैं। जो छात्र यहां प्रशिक्षण लेंगे, वे चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी शुरुआत मंदिरों से इसलिए की है क्योंकि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट, फिर दूसरे विश्वविद्यालयों में  सरकार फिलहाल इस कोर्स को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन में शुरू करेगी। इसके बाद छात्रों की रुचि, एडमिशन और परिणामों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले साल इसे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी शुरू करने की कोशिश की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाद में जबलपुर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स लागू किया जा सकता है। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, मंदिरों की व्यवस्थाएं ज्यादा प्रोफेशनल होंगी और धार्मिक स्थलों का संचालन अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। विपक्ष के सवालों पर मंत्री का जवाब विपक्ष द्वारा इस कोर्स को राजनीति और धर्म से जोड़ने पर मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्थाओं और मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों पर बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं, वे इसकी वास्तविक जरूरत को समझ नहीं पा रहे हैं। सरकार समय की मांग के अनुसार धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।