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गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, सीएम ने पानी-बिजली पर कड़ा रुख अपनाया

रांची  राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के उपायुक्तों और वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गर्मी के इस दौर में आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी क्षेत्रों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जलापूर्ति योजनाओं, चापाकलों और टैंकरों की नियमित मॉनिटरिंग हो तथा जहां भी जल संकट की सूचना मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। बिजली आपूर्ति को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है। ट्रांसफार्मर खराबी, बिजली कटौती और अन्य तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हीटवेव और लू से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में पूरी तैयारी रहनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयां, ओआरएस, पेयजल और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। ऑफिस से निकलें, जमीनी हकीकत जानें अधिकारी सीएम ने राज्य के सभी उपायुक्तों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और जमीनी हकीकत का आकलन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी आम लोगों से सीधे संवाद करें, उनकी समस्याएं सुनें और त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। बैठक में प्रशासनिक समन्वय पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि किसी भी नागरिक को पानी, बिजली या स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव (गृह) वंदना दादेल सहित सभी जिलों के उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

बस्तर पर विष्णु देव साय की नजर: नवाचार-रोजगार पर होगी चर्चा, सुशासन तिहार बना आकर्षण का केंद्र

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जगदलपुर दौरे के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि वे महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित नवाचार महाकुंभ में शामिल होंगे। बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। इस कार्यक्रम में खास तौर पर बस्तर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी। अब सरकार का फोकस यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश में चल रहे सुशासन तिहार को लेकर कहा कि इसे लेकर जनता में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। पिछले दो दिनों में 6 जिलों का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान वे ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक पहुंचकर पेड़ों के नीचे चौपाल लगाकर लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता यह जानना है कि योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंच रही है या नहीं। लोग राशन, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना का लाभ भी पा रहे हैं और आम जनता संतुष्ट नजर आ रही है। पीएम मोदी के बयान का समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस को “अर्बन नक्सल” कहे जाने वाले बयान पर मुख्यमंत्री साय ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र के साथ देश का नेतृत्व कर रहे हैं। वो कुछ बोल रहे हैं तो सोच समझ के बोल रहे हैं। विपक्ष पर साधा निशाना चुनावी हार के बाद विपक्ष के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्हें जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हार के बाद आरोप-प्रत्यारोप करना स्वाभाविक है और विपक्ष “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” जैसी स्थिति में है। हार से बौखलाए लोग चुनाव आयोग और ईवीएम पर दोषारोपण कर रहे हैं।

योगी सरकार का बड़ा कदम, गोबर से बनेगी कमाई और ऊर्जा का नया स्रोत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि और पशुपालन के एकीकरण से ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने अब राज्य की गोशालाओं को आत्मनिर्भर 'बिजनेस मॉडल' के रूप में ढालने की तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य गोबर आधारित कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़कर एक मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क स्थापित करना है। केमिकल मुक्त खेती और मिट्टी की उर्वरता पर फोकस पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने हाल ही में कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर जैविक खेती को मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश में उपलब्ध लाखों मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाई जाए। गोबर खाद के उपयोग से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाकर बंजर होती जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने पर जोर दिया जाए। सफल मॉडलों का होगा प्रदेशव्यापी विस्तार झांसी, चंदौली, कानपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में बायोगैस और जैविक खाद के सफल प्रयोगों को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।     दोहरा लाभ: किसानों को बायोगैस से सस्ती ऊर्जा मिलेगी और संयंत्र से निकलने वाली 'स्लरी' का उपयोग खेतों में सर्वोत्तम खाद के रूप में होगा।     सीबीजी प्लांट: प्रदेश भर में कम्प्रेश्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों के जाल को विस्तार देने की योजना है, जिससे कचरे से कंचन बनाने की राह आसान होगी। मार्केटिंग और मानकीकरण सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। असली जोर गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर है।     मानकीकरण: खाद की पैकेजिंग, नमी और पोषक तत्वों के कड़े मानक तय किए जाएंगे ताकि किसानों का भरोसा बढ़े।     सहकारी नेटवर्क: सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक उत्पादों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।     रिसर्च: कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे कम लागत वाले सरल मॉडल विकसित करें, जिन्हें आम किसान भी अपना सके।  

पीएम आवास राशि गबन, पेयजल संकट, अतिक्रमण, अवैध खनन और राजस्व मामलों पर प्रशासन ने दिखाई गंभीरता

बिलासपुर कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने आज आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में जिलेभर से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए। जनदर्शन में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 103 आवेदन विभिन्न विषयों से संबंधित प्राप्त हुए। इस दौरान नगर निगम आयुक्त  प्रकाश सर्वे एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  संदीप अग्रवाल ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनीं। कलेक्टर ने जनदर्शन में पहुंचे प्रत्येक आवेदक से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने कहा। जनदर्शन में राजस्व, आवास, पेयजल, अतिक्रमण, सामाजिक सुरक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों की अधिकता रही।        जनदर्शन में पचपेड़ी तहसील के ग्राम बिनौरी निवासी बुजुर्ग  तुलसीराम कुर्रे ने प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत राशि में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम स्वीकृत 95 हजार रुपए की किश्त अन्य व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कर राशि का दुरुपयोग किया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को जांच कर राशि वापस दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। बेलतरा तहसील के बैमा गांव के ग्रामीणों ने मुक्तिधाम से अतिक्रमण हटाने संबंधी तहसीलदार के आदेश का पालन नहीं होने की शिकायत की। ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान भूमि से कब्जा हटाने में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। कलेक्टर ने एसडीएम बिलासपुर को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।         तखतपुर क्षेत्र से भी कई आवेदन प्राप्त हुए। ग्राम सिलतरा निवासी मती गुलाबा बाई साहू ने शौचालय निर्माण हेतु आर्थिक सहायता की मांग की, वहीं ग्राम चनाडोंगरी निवासी  राजेश कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत मजदूरी भुगतान लंबित होने की शिकायत दर्ज कराई। दोनों मामलों में जिला पंचायत को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने कहा गया। मोछ गांव के ग्रामीणों ने सामूहिक आवेदन देकर कुम्हार तालाब में अवैध मशीनों से खुदाई कर मुरूम चोरी की शिकायत की। ग्रामीणों ने बताया कि इससे जनजीवन और जलस्रोत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कलेक्टर ने उप संचालक खनिज को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।        रतनपुर तहसील के ग्राम पोंड़ के ग्रामीणों ने चारडबरी तालाब को एक निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज किए जाने और उनके द्वारा जलस्रोत को पाटे जाने की शिकायत की। कलेक्टर ने कोटा एसडीएम को जांच कर नामांतरण की वैधता परीक्षण करने तथा तालाब संरक्षण हेतु कार्रवाई के निर्देश दिए। तखतपुर के ग्राम कुवां निवासी  प्रतिम वास ने गैस कनेक्शन स्वीकृत होने के बावजूद सिलेंडर सुविधा नहीं मिलने की शिकायत की। कलेक्टर ने खाद्य नियंत्रक को मामले की जांच कर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने कहा।        बिल्हा विकासखंड के ग्राम गोढ़ी एवं ग्राम पत्थरखान से पेयजल संकट के मामले भी जनदर्शन में पहुंचे। ग्राम गोढ़ी की सरपंच ने बताया कि गांव में जलस्तर 500 मीटर से नीचे पहुंच गया है तथा जल जीवन मिशन की टंकी वर्षों से बंद पड़ी है। कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को परीक्षण कर शीघ्र व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए। इसी तरह इमलीभांटा स्थित अटल आवास ब्लॉक-ए के रहवासियों ने आवासीय समस्याओं को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर नगर निगम आयुक्त को आवश्यक निराकरण सुनिश्चित करने कहा गया। जनदर्शन में आज राजस्व सीमांकन, अतिक्रमण, आवास निर्माण, पेयजल और जनसुविधाओं से जुड़े मामलों पर प्रशासन की सक्रियता देखने को मिली। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निराकरण प्राथमिकता से कर आम नागरिकों को राहत पहुंचाई जाए।

जांच से पहले कार्रवाई! जबलपुर में हादसे वाला क्रूज तोड़ने पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर. बरगी बांध हादसे की जांच अभी जारी है, लेकिन हादसे में शामिल क्रूज को तोड़े जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। लापता पर्यटकों की की तलाश के बीच दुबे क्रूज को तट पर लाने के बाद शनिवार को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया था. लोगों और मृतकों के स्वजन में गुस्सा बढ़ गया। उनका कहना है कि इस कदम से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं, जिससे हादसे की असली वजह सामने आना मुश्किल हो जाएगा। एसपी बोले- फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा था क्रूज अधिकारियों के बयान अलग-अलग सामने आए हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि क्रूज को अंदर फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा गया, जबकि पर्यटन मंत्री ने इसे निकालने के दौरान हुई क्षति बताया। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। हवा और लहरों से टकराकर डूबने से सुरक्षा पर उठे सवाल बरगी बांध में डूबा कू्ज फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) का था। क्रूज का दो वर्ष जुलाई, 2024 में पूर्ण रखरखाव किया गया था। इस क्रूज को वर्तमान में देश में प्रचलित क्रूजों में सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद तेज हवा और पानी की लहरों के भार को वह सहन नहीं कर सका। संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया हादसे में बचे वकील रोशन आनंद समेत अन्य पर्यटकों ने भी क्रूज को समय से पहले तोड़े जाने को संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया। बढ़ते विरोध के बीच राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे चंद मिनटों के अंदर डूब गया। जबलपुर के पास बरगी बांध में हुई इस घटना ने क्रूज की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़ कर दिए है। गुरुवार को घटना के समय क्रूज बरगी बांध में दूसरी बार राइड पर था। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे। तभी लहरों के बीच वह डूब गया था। 19 वर्ष से लगातार चल रहा था क्रूज का संचालन बरगी बांध से होता है। लेकिन क्रूज क्रय करने की प्रक्रिया और संचालन को लेकर व्यवस्था पर्यटन विभाग मुख्यालय अपने स्तर पर करता है। जिस क्रूज में हादसा हुआ इसे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने लिया था, 19 वर्ष से लगातार चल रहा था। निर्माता कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज क्रूज की 80 यात्री क्षमता थी। लोअर डेक एयर कंडीशनर था, जिसमें 30 यात्री सवार हो सकते थे। अपर डेक (खुला) की क्षमता 50 यात्रियों की थी। एमपीटी के कमांडर राजेंद्र निगम ने बताया कि यह क्रूज हैदराबाद बोट क्लब से खरीदा गया था। कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी संबंधित कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी है। यह क्रूज कैटामारन हाल तकनीक से बना था, जिसमें दो बोट को जोड़कर एक बड़ी बोट बनाई जाती है। यह क्रूज की वर्तमान में देश में प्रचलित आधुनिक तकनीक में से एक बताई जा रही है। जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता दो बोट को जोड़कर बनाए जाने वाले शिप का संतुलन पानी में बेहतर होता है। इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। फाइबर रिनइनफोर्स प्लास्टिक सामग्री के उपयेाग के कारण इसमें जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता है। हवा से पलटा, लहर से क्षतिग्रस्त हुआ, पानी भरा और डूबा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब क्रूज राइड पर निकला था तो मौसम सामान्य था। जब वह सफर पर आधी दूरी में पहुंचा तभी हवा तेज हो गई। क्रू केप्टन ने क्रूज को मोड़कर वापस लाना चाहा, लेकिन तभी तेज हवा और बांध के पानी में उठती लहरों से क्रूज डगमगाने लगा। लहरे लगातार क्रूज को ढकेल रही थी तेज लहरों के कारण क्रूज का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ। जहाज को आगे बढ़ाने और उसे घुमाने वाले प्रापेलर्स को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। आशंका है कि पानी की एक लहर ने क्रूज को नीचे की ओर खींचा और दूसरी लहर से उसे उफर उठाया। इसी दौरान वह पलटा और डूब गया। अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी क्रूज में अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी, लेकिन घटनाक्रम तेजी से घटा। क्रूज में मौसम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं था। संचालन से संबंधित जिम्मेदार मौसम विभाग की जारी होने वाली रिपोर्ट और स्थानीय मौसम की स्थितियों को देखकर क्रूज के संचालन का निर्णय करते थे।

झारखंड में स्मार्ट मीटर योजना जारी, रांची में 100% लक्ष्य की तैयारी

 रांची  केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों में बदलाव करते हुए स्मार्ट मीटरों के लिए प्रीपेड बिलिंग को अनिवार्य नहीं रखा है। अब प्रीपेड सुविधा उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हो गई है। संचार नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा के अनुसार जारी रहेगा। केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरदस्ती नहीं थोपा जाएगा। इस बीच उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के विरोध और बिलिंग संबंधी शिकायतों के कारण अप्रैल 2026 में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। एक तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है (नए कनेक्शन को छोड़कर)। झारखंड में क्या है स्थिति? झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम, विश्व बैंक सहायता प्राप्त झारखंड पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट और राज्य योजनाओं के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम लगातार आगे बढ़ा रहा है। राज्य में कुल 18.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जिसमें 13.41 लाख मीटर केंद्र की योजना के तहत शामिल हैं। जुलाई 2025 तक पूरे राज्य में करीब 7.7 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके थे। रांची 100 फीसदी लक्ष्य की ओर JBVNL का लक्ष्य है कि राजधानी रांची को पूर्ण रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाला शहर बनाया जाए। अप्रैल 2026 के अंत तक यहां 100 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में शहर में 3.35 लाख से 3.65 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में चल रहे हैं। अभी करीब 12,000 मीटर पोस्टपेड मोड में हैं और 13,000 से 16,000 कनेक्शन बाकी हैं। एचईसी क्षेत्र समेत बचे इलाकों में काम तेज गति से चल रहा है। JBVNL अधिकारियों ने बताया कि मीटर लगाना पूरी तरह मुफ्त है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप से अपनी बिजली खपत, बैलेंस की जांच और रिचार्ज आसानी से कर सकते हैं। बैलेंस बहुत कम होने पर स्वचालित कटौती का प्रावधान है, इसलिए उपभोक्ताओं को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी गई है। अनिवार्यता पर केंद्र की नई नीति केंद्र की नई लचीली नीति के बाद झारखंड में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह जबरदस्ती अनिवार्य नहीं है। फिर भी JBVNL नए कनेक्शन, खराब मीटर बदलने और संचार सुविधा वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को प्राथमिकता दे रहा है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के मार्च 2026 के आदेश में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर के बीच अलग बिजली दर नहीं रखी गई है। कुछ इलाकों में प्रीपेड मोड चुनने वालों को 3 प्रतिशत रिबेट जैसी छूट भी दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से लाभ और चुनौतियां स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होने, बिलिंग पारदर्शी बनने और सटीक खपत लेखांकन की उम्मीद है। रांची जैसे शहरों में बिल वसूली की दक्षता बढ़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन चुनौतियां भी सामने आई हैं। कुछ उपभोक्ताओं को पुराना बकाया दिखने, बैलेंस संबंधी भ्रम और स्वचालित कटौती की आशंका से परेशानी हुई है। JBVNL इन शिकायतों को प्राथमिकता से सुलझा रहा है और जागरूकता शिविर लगा रहा है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे फर्जी लोगों से सावधान रहें और आधिकारिक सुविधा पोर्टल पर ही आवेदन करें। केंद्र की अप्रैल 2026 की नीति अब राज्यों को ज्यादा लचीलापन दे रही है। यूपी में लगी रोक झारखंड में नहीं है, लेकिन उपभोक्ता शिकायतों को गंभीरता से लेकर सहमति और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। JBVNL का मुख्य लक्ष्य बिजली घाटा कम करना और बिजली विभाग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। केंद्र की योजना के तहत राष्ट्रीय लक्ष्य मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। कुछ जगह विरोध के बावजूद झारखंड में यह बदलाव बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बशर्ते उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखा जाए।

नायब सिंह सैनी का कुरुक्षेत्र में बड़ा बयान: ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को बताया प्राथमिकता, विपक्ष पर हमला

कुरुक्षेत्र. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुवि में आयोजित सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र विषय पर आयोजित सेमिनार में संबोधित करते हुए कहा की यह विषय महत्वपूर्ण है। नारी सशक्त होगी तो ही समाज सशक्त बनेगा। इसी धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने सर्व मानवजाति के लिए ज्ञान का कर्म का संदेश दिया था। महाभारत का कारण भी एक नारी का अपमान बना था। यह पावन भूमि हमें संदेश देती है जब न्याय की बात हो तो मौन नहीं बैठना चाहिए, निर्णय लेना जरूरी है। आज नारी सशक्तीकरण के लिए आवाज उठाना जरूरी है। संसद में महिलाओं के अधिकारों को कूचलने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले गुजरात को मॉडल बनाया। अब भारत का मान सम्मान पूरी दुनिया में गूंज रहा है। विकसित भारत के लिय भी 4 स्तंभों पर काम करने की बात कही थी । इसमे सबसे पहले महिला उसके बाद किसान और तीसरा युवाओं को रखा था। हरियाणा से शुरू हुआ था बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान चौथा गरीब को मजबूत करने की बात कही थी। 2014 में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान हरियाणा से ही शुरु किया था। आज कई पंचायतों में बेटियों की संख्या ज्यादा है। उन्होने कहा था बेटियां किसी पर निर्भर नहीं, वह आत्मनिर्भर हैं। आज हर क्षेत्र में बेटियां आगे हैं। सेना में, चिकित्सा क्षेत्र में, न्याय के क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने जब नौकरी में सिफारिश को बंद किया तो आज योग्यता के दम पर महिला शक्ति आगे आ रही है। हर 20 किलोमीटर पर बेटियों को एक राजकीय महाविद्यालय बनाया गया है। हमने एक दिन का विशेष सत्र बुलाया था की संसद में विपक्ष ने इसे पास नहीं होने दिया था। इसी को लेकर हमने सत्र बुलाया, लेकिन विपक्ष आया ही नहीं बाहर ही बैठ गए।

दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद की बैठक लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 38 हजार 555 करोड़ रूपये की स्वीकृति व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का निर्णय "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्यों के लिए 1295.52 करोड़ रूपये की स्वीकृति आंगनवाड़ी केन्द्रों और समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2,412 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए विभिन्न विभागों की 38 हजार 555 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का ऐतिहासिक निर्णय भी लिया है। यह निर्णय प्रदेश के बुनियादी ढांचे, कृषि आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से लिए गए हैं। बैठक के प्रमुख निर्णयों में 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-2031) के लिए सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय आवासों के रखरखाव के लिए सर्वाधिक 32 हजार 405 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी गई, इसमें आगामी 5 वर्षों में 2,442.04 करोड़ रुपये व्यय कर दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण और 'मिशन वात्सल्य' के सुचारू संचालन के लिए 2,412 करोड़ रुपये तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 1,295 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रि-परिषद ने 'राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड' के गठन का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जो व्यापारियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और सरकार के साथ सीधे संवाद का सशक्त माध्यम बनेगा। यह पहल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" की आगामी 5 वर्षों 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2442 करोड़ 04 लाख रूपये की स्वीकृति दी। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलहन फसलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन में से दलहन फसल को पृथक कर "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" 11 अक्टूबर 2025 को प्रारंभ किया गया। भारत सरकार ने केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में नए मिशन "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी है। मिशन का उददेश्य दलहनी फसलों के उत्पादन वृद्धि एवं क्षेत्रफल का विस्तार करना, किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल उन्नत बीजों का उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाना, कटाई के बाद प्रसंस्करण, भंडारण एवं प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। योजना में प्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" क्रियान्वयन से प्रजनक बीज, बीज उत्पादन, बीज वितरण, प्रदर्शन और ट्रेनिंग होगी। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई) इकाई विकसित होने से कृषक लाभान्वित होगें तथा दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उत्पादन में वृद्धि होगी। सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32,405 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सड़क एवं सेतु के संधारण से संबंधित योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 150 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया है। इसी तरह 'एफ' टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों के अनुरक्षण के लिए 1 हजार 345 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के लिए 24 हजार 300 करोड़ रूपये का अनुमोदन सहित सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों से जुड़ी योजना की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 की निरंतरता के लिए 610 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए। इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अंतर्गत इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य से संबंधित योजनाओं की निरंतरता और संचालन के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अनुसार आरसीबीसी , डीईजीएस और एनआईसी आदि केन्द्रों के आगामी पांच वर्षों 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालन के लिए 244 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। ई-दक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत राज्य के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्रि-परिषद द्वारा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए प्रदेश में इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना (EMC 2.0) के लिए 225 करोड़ 32 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी। इसके अंतर्गत भोपाल के बांदीखेड़ी में 209.47 एकड़ क्षेत्र में क्लस्टर की स्थापना की जायेगी। साथ ही सूचना प्रौ‌द्योगिकी निवेश प्रोत्साहन संबंधी योजना की निरंतरता के लिए 300 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा राज्य को आईटी एवं आईटीईएस सेवाओं के लिए आकर्षक गंत्वय के रूप में स्थापित करने के लिए पूंजीगत अनुदान कर संबंधी रियायतें, प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास तथा आईटी पार्क/ईएमसी (इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स) की स्थापना को बढ़ावा दिये जाने संबंधी कार्य किया जायेगा। इसका संचालन एमपीएसईडीसी के माध्यम से होगा। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क की स्थापना (स्वान) और संचालन संबंधी योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 526 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का उद्देश्य राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सभी शासकीय कार्यालयों को आपस में जोड़कर सुगम … Read more

पुलिस हिरासत में भी बेखौफ हिस्ट्रीशीटर, इंस्टाग्राम पर LIVE आकर किया शोऑफ

बिलासपुर  सकरी थाने के लॉकअप से एक हिस्ट्रीशीटर का इंस्टाग्राम लाइव वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में आरोपी सिगरेट पीते हुए नजर आ रहा है। उसके साथ जेल में तीन अन्य आरोपी भी दिखाई दे रहे हैं। “किंग ऑफ बिलासपुर” बताकर किया लाइव सोमवार दोपहर इंस्टाग्राम के “जय माता दी” पेज पर यह वीडियो पोस्ट किया गया। इसमें हिस्ट्रीशीटर विक्की पांडेय लॉकअप के अंदर से लाइव होकर खुद को “किंग ऑफ बिलासपुर” बताता दिख रहा है। वीडियो में उसने सीसीटीवी कैमरे, लॉकअप के अंदर के दृश्य और थाना प्रभारी के कक्ष तक का नजारा भी दिखाया। सोशल मीडिया पर उठे सवाल दोपहर 12:30 बजे वीडियो पोस्ट होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोगों ने सकरी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। कई यूजर्स ने आरोपी को “पुलिस का स्पेशल मेहमान” और “जिगरी दोस्त” तक करार दिया। लॉकअप में मोबाइल और सिगरेट पर सवाल आमतौर पर लॉकअप में आरोपियों की सख्त तलाशी ली जाती है और उन्हें किसी भी प्रतिबंधित वस्तु के साथ नहीं रखा जाता। ऐसे में आरोपी के पास मोबाइल और सिगरेट का होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यह मामला पुलिस और आरोपी के बीच संभावित मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। पहले भी सामने आ चुकी हैं घटनाएं लॉकअप में सुरक्षा को लेकर पहले भी कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। तीन वर्ष पहले तारबाहर थाने में श्याम मोहदीकर की मौत हुई थी। वहीं, 2016 में मुलमुला थाने में सतीश नोरगे की मौत के मामले में चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार हुए थे। 2017 में एक छात्र ने भी लॉकअप में आत्महत्या का प्रयास किया था। पुलिस ने दी सफाई इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने वायरल वीडियो को पुराना बताया है। हालांकि, घटना ने एक बार फिर पुलिस की सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो दो साल पुराना है। मुझे थाने में आए हुए 5-6 महीने हो चुके हैं और हिस्ट्रीशीटर विक्की को सिविल लाइन थाने में दर्ज एक आपराधिक प्रकरण में सजा हो चुकी है। करीब डेढ़ वर्ष से वह जेल में है। ऐसे में वर्तमान में लॉकअप में वीडियो बनाया जाना संभव नहीं है। वायरल वीडियो पुराना है।     -विजय चौधरी, थाना प्रभारी, सकरी  

महिला अध्यापकों के लिए राहत भरी खबर: जनगणना ड्यूटी में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश

चंडीगढ़. जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों को आ रही बढ़ती समस्याओं के बीच संयुक्त शिक्षक एसोसिएशन (JTA) और प्रशासन के बीच हुई बैठक से कुछ राहत मिली है। प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए महिला शिक्षकों की सुरक्षा और दोहरी ड्यूटी के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में शिक्षकों को राहत मिल सकती है। एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को चंडीगढ़ के डीसी निशांत यादव से मुलाकात कर जनगणना ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को आने वाली समस्याओं को उठाया। बैठक में महिला शिक्षकों की सुरक्षा, फील्ड में आने वाली दिक्कतें और स्कूल ड्यूटी के साथ दोहरे कार्यभार जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए। प्रशासन ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) अमनदीप भट्टी के साथ बैठक में महिला शिक्षकों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि इन मुद्दों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। महिला शिक्षकों की सुरक्षा के मद्देनजर फील्ड ड्यूटी के दौरान बीट पुलिस कर्मियों को उनके साथ तैनात किया जाएगा। इसके अलावा वार्ड काउंसिलरों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे प्रत्येक शिक्षक के साथ एक स्थानीय सहायक उपलब्ध कराएं, ताकि फील्ड में किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि जनगणना का कार्य स्कूल ड्यूटी के साथ जोड़ना व्यवहारिक नहीं है। इस पर डीसी ने भरोसा दिया कि इस मुद्दे को तुरंत शिक्षा सचिव और जनगणना विभाग के समक्ष उठाया जाएगा।