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मलावी में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, सिख समुदाय ने किया जोरदार स्वागत

चंडीगढ़ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने मलावी, अफ्रीका में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा की स्थापना की। महाराजा रणजीत सिंह, जिन्हें शेर-ए-पंजाब के नाम से जाना जाता है, एक महान भारतीय योद्धा और दूरदर्शी नेता थे। इस प्रतिमा का औपचारिक अनावरण 19 अप्रैल को बैसाखी समारोह के अवसर पर भारत के उच्चायुक्त श्री अमराराम गुजर और ब्लैंटायर सिटी के काउंसलर आइजैक जोमो उस्मान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह में सिख समुदाय के 400 से अधिक सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत सरकार द्वारा उपहार स्वरूप प्रदान की गई यह प्रतिमा महाराजा रणजीत सिंह के जीवन और विरासत को समर्पित है। उनके साहस, कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता आज भी विश्वभर में पीढ़ियों को प्रेरित करती है। इस अवसर पर आइसीसीआर की महानिदेशक के. नंदनी संगला ने कहा कि यह स्थापना प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर सिख समाज, के लिए अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उच्चायुक्त श्री अमराराम ने इस ऐतिहासिक संबंध को महाराजा रणजीत सिंह के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बताया।

Census 2026: 1 मई से सर्वे में बदला पैटर्न, अब लाइफस्टाइल और खान-पान पर भी पूछे जाएंगे सवाल

राजनांदगांव. वर्ष 2011 के बाद पूरे देशभर में जनगणना कार्य शुरू हो गया है। एक मई से प्रगणक घर घर जाकर 33 बिन्दुओं में लोगों से जानकारी लेगें। इसमें रहने, खाने और लाइफ स्टाइल की जानकारी मांगी जाएगी। स्मार्ट फोन व घर के फर्श में उपयोग होने वाले सभी बिन्दुओं की जानकारी इस बार ली जाएगी। राज्य के गृह मंत्रालय ने जनगणना के लिए निर्देश जारी कर दिए है। जिसके तहत 33 बिन्दुओ के अंदर लोगों को जानकारी मांगी जाएगी। जिसमें लोगों के रहने, खाने, मनोरंजन, इंटरनेट व कौन से अनाज खा रहे सहित मोबाइल नंबर मांगे जाएंगे। बहरहाल जनगणना के पहले चरण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जानकारी अनुसार वर्ष 2011 में जनगणना होने के बाद दुबारा सर्वे नही हो पाया था । प्रत्येक दस साल में होने वाला जनगणना कार्य अब होने जा रहा हैं। इसकी तैयारी वर्ष 2025 के अंतिम माह से शुरू हो गई है। गृह मंत्रालय द्वारा इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई हैं। जिसमें 33 बिन्दु निर्धारित किए गए है प्रक्रियाः पूरी तरह से पेपरलेस, डिजिटल डेटा संग्रह मोबाइल ऐप के माध्यम से होगा। ये प्रश्न पूछे जाएंगे जनगणना में 1. भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकरण अथवा जनगणना नंबर ) 2. जनगणना मकान नंबर 3. मकान के फर्श में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री 4. मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री 5. मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री 6. मकान के उपयोग 7. मकान की हालत 8. परिवार की जानकारी 9 परिवार में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11. परिवार के मुखिया का लिंग 12. क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य से संबन्धित है 13. मकान के स्वामित्व की स्थिति 14. परिवार के पास रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या 15. परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या 16. पेयजल का मुख्य स्रोत 17. पेयजल स्रोत की उपलब्धता 18. प्रकाश का मुख्य स्रोत 19. शौचालय की सुलभता 20. शौचालय का प्रकार 21. गंदे पानी की निकासी 22. बाथरूम की चाबियों की उपलब्धता 23. रसोई घर और एलपीजी, पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, 24. खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईधन 25. रेडियो ट्रांजिस्टर 26. टेलिविजन 27. इंटरनेट सुविधा 28 लैपटॉप कम्प्यूटर 29. टेलीफोन, मोबाइल फोन, स्मार्ट फोन 30. साइकिल, स्कूटर, मोटर साइकिल, मोपेड 31. कार, जीप, वैन 32. परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज 33. मोबाइल नंबर की जानकारी देनी होगी। चार सहायक उप निरीक्षकों को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति भिलाईनगर। दुर्ग जिला में पदस्थ सहायक उप निरीक्षकों गोरख नाथ चौधरी, पूर्ण बहादुर कांकी, चन्द्रशेखर सोनी व केशव दयाल तिवारी को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल ने पदोन्नत अधिकारियों को स्टार लगा कर शुभकामनाएं दी तथा नई जिम्मेदारियों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, अनुशासन एवं जनोन्मुख पुलिसिंग के साथ करने के लिए प्रेरित किया गया। पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों ने अपने दायित्वों के प्रति समर्पण दोहराते हुए कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण एवं आमजन की सुरक्षा के प्रति और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया गया।

1857 की क्रांति को डिजिटल रूप में दिखाएगा भव्य शहीद स्मारक

अंबाला  मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से 1857 की क्रांति और अंबाला के शहीद स्मारक के जिक्र ने इस परियोजना की जिज्ञासा को बढ़ा दिया है। 600 करोड़ रुपये की लागत से अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंतरराष्ट्रीय शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है। यह स्मारक आजादी की पहली लड़ाई को प्रदर्शित करेगा और अनसंग नायकों के बारे में बताएगा। शहीद स्मारक का कार्य पूर्ण हो चुका है और अब आधिकारिक रूप से उद्घाटन के लिए यह तैयार है। अहम बात है कि इस स्मारक की परिकल्पना कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने की थी। स्मारक का सही से संचालन हो इसके लिए अनिल विज के कहने पर यहां पर करीब 27 कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इनकी भर्ती परियोजना की नोडल एजेंसी कर रही है। डिजिटल माध्यम से दिखेगी क्रांति की गाथा  स्मारक के भीतर वीरों की गाथा को डिजिटल फिल्मों और ऑडियो के माध्यम से हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यहां पर्यटकों के लिए इंटरप्रेटेशन सेंटर, म्यूजियम, ओपन एयर थिएटर, मेमोरियल टावर और हेलीपैड जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। निर्माण एजेंसी उद्घाटन के बाद तीन साल तक स्मारक का रखरखाव करेगी।  

जेसीबी से खुदाई के दौरान निकली मूर्ति, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर

चाईबासा  पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर और आनंदपुर के सीमावर्ती इलाके में स्थित कोयल नदी में पानी के लिए जेसीबी से चार फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा था. अचानक दोपहर डेढ़ बजे एक तेज आवाज के साथ खुदाई कर रही मशीन का पंजा किसी बेहद कठोर वस्तु से टकराकर ठिठक गया. ड्राइवर ने कोशिश की, लेकिन मशीन आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी. पहले लगा कि कोई बड़ा पत्थर या चट्टान है, लेकिन जैसे ही वहां से बालू हटाई गई, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं. अंधेरी गहराइयों से भगवान राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा मुस्कुराती हुई प्रकट हुई. ग्रामीण इसे अद्भुत घटना मान रहे हैं. कोयल नदी के गर्भ से भगवान राधा-कृष्ण की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा बालू के करीब चार फीट नीचे दबी थी. खुदाई में यह सुंदर मूर्ति जैसे ही बाहर निकली, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई. देखते ही देखते नदी का तट एक अस्थायी मंदिर के रूप में तब्दील हो गया है. लोग इसे एक मूर्ति की खोज नहीं, बल् एक साक्षात सनातन चमत्कार मान रहे हैं जिसने पल भर में नदी के सूखे तट को भक्ति के सरोवर में बदल दिया है. जेसीबी की खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा मिली जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण कोयल नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. ग्रामीणों की प्यास बुझाने और पास के गांव तक पानी पहुंचाने के लिए नदी में जेसीबी मशीन से खुदाई का काम चल रहा था. रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे, खुदाई के दौरान मशीन अचानक किसी ठोस चीज से टकराकर रुक गई. जब सावधानी से उस जगह की दोबारा खुदाई की गई तो बालू के नीचे से राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा निकली. मूर्ति के निकलते ही वहां मौजूद लोग जयकारे लगाने लगे. झारखंड चमत्कार: खुदाई के दौरान कोयल नदी से निकली भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर. श्रद्धालुओं ने बनाया अस्थायी दरबार मूर्ति मिलने की सूचना मिलते ही मनोहरपुर और आनंदपुर प्रखंड के गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोग कोयल नदी के तट पर पहुंचने लगे. लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि उन्होंने तुरंत उस स्थान पर भगवा झंडा गाड़ दिया. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से भगवान को बचाने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी और पेड़ों की टहनियों से एक अस्थायी छत (शेड) भी बना दी है. अब यहां सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना और कीर्तन का दौर चल रहा है. मंदिर स्थापना की तैयारी में ग्रामीण नदी के बीचों-बीच मिली इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह है. कई ग्रामीणों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं बल्कि ईश्वरीय संकेत है. गांव की प्रबंध समिति और बुजुर्ग अब इस प्रतिमा को विधि-विधान के साथ किसी सुरक्षित स्थान या नवनिर्मित मंदिर में स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल, वनशक्ति देवी मंदिर के पास स्थित यह नदी क्षेत्र एक तीर्थ स्थल बन गया है.  

सुनील वर्मा को मिला ‘लोक संपर्क सम्मान’, भोपाल में जनसंपर्क विभाग में उत्साह

भोपाल पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया की भोपाल इकाई द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस-2026’ के अवसर पर 26 अप्रैल को जेके अस्पताल के सीएमई हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पत्रकारिता-जनसंपर्क क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इस श्रृंखला में जनसंपर्क विभाग के उप संचालक सुनील वर्मा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘लोक संपर्क सम्मान’ प्रदान किया गया। गौरतलब है कि, जनसंपर्क विभाग के उप-संचालक सुनील वर्मा ने अपने कार्यों के जरिए जनसंपर्क के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। उनका व्यक्तित्व सरल, सौम्य और विनम्र है। यह व्यवहार उन्हें सभी वर्गों में लोकप्रिय बनाता है। वे अपने व्यवहार और कार्यशैली से यह सिद्ध करते हैं कि जनसंपर्क केवल सूचना का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवेदनशील और भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की प्रक्रिया भी है। वे एक ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जो अपने सहयोगियों और आमजन दोनों के प्रति समान रूप से संवेदनशील रहते हैं और सभी का ध्यान रखते हैं। समर्पण और नवाचार के लिए सम्मान जनसंपर्क के प्रति वर्मा की निष्ठा और समर्पण उनके कार्यों में स्पष्ट झलकता है। संवाद को सशक्त बनाने, सूचनाओं को प्रभावी ढंग से प्रसारित करने और शासन तथा जनता के बीच मजबूत कड़ी बनने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। यही वजह है कि वे विभाग में एक विश्वसनीय और प्रेरणास्रोत नाम बन चुके हैं। उन्हें यह सम्मान जनहित के प्रति प्रतिबद्धता, उत्कृष्ट कार्यशैली और जनसंपर्क के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए दिया गया। नारी शक्ति का भी वंदन गौरतलब है कि, कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक निहारिका मीणा और हिमांशी बजाज को भी सम्मानित किया गया। मंच पर सभी हस्तियों को वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर, प्रख्यात साहित्यकार उर्मिला शिरीष और एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. नरेंद्र कुमार थापक ने सम्मानित किया। बदलते जनसंपर्क पर हुई चर्चा बता दें, कार्यक्रम के दौरान जनसंपर्क और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका और समाज के साथ प्रभावी संवाद की जरूरत जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित था, बल्कि अनुभवों के आदान-प्रदान और नए विचारों को साझा करने का मंच भी था।

पूर्व CM का महिला IAS अधिकारी के साथ वीडियो वायरल, कांग्रेस ने SP ऑफिस के बाहर किया विरोध प्रदर्शन

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और निलंबित आईएएस अधिकारी सौम्या चौरसिया से जुड़ा एक कथित AI जनित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर साजिश और चरित्र हनन का मामला बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। दुर्ग, भिलाई और ग्रामीण कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो इंस्टाग्राम पर एक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया, जिसमें भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया को कथित रूप से निजी संबंधों में दिखाया गया है। वीडियो में दोनों को बाइक पर घूमते, साथ समय बिताते और धूम्रपान करते हुए दर्शाया गया है।  कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य पूर्व मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। गौरतलब है कि भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सौम्या चौरसिया उनकी सचिव रह चुकी हैं। इसी वजह से इस वीडियो ने राजनीतिक हलकों में और अधिक चर्चा पैदा कर दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की छवि खराब करने का प्रयास नहीं, बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत विपक्ष को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश है। दुर्ग जिला कांग्रेस, भिलाई कांग्रेस और ग्रामीण कांग्रेस के पदाधिकारियों ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भाजपा से जुड़े लोग शिकायत करते हैं तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन कांग्रेस नेताओं के मामले में प्रशासन चुप्पी साध लेता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि दो दिनों के भीतर FIR दर्ज नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीण दुर्ग कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की अश्लील और भ्रामक सामग्री लगातार फैलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फर्जी कंटेंट के जरिए कांग्रेस नेताओं की छवि खराब करने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह का वीडियो जारी करना न केवल अनैतिक है, बल्कि उसके परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। पुलिस अधीक्षक ने मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ता इस बार केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह मामला सड़क से लेकर सदन तक गूंजेगा। AI तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग ने अब राजनीति को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सवाल केवल एक वीडियो का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा, व्यक्तिगत सम्मान और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग का है। आने वाले दिनों में यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।  

‘AAP में घुटन महसूस हो रही थी’, राघव चड्ढा ने बताए अलग होने के कारण

चंडीगढ़. सांसद राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। अपने खून-पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है, पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है और ये पार्टी आज चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है, जो अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रही है। पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं। राघव ने गिनाए तीन विकल्प तीसरा विकल्प कि मैं अपनी ऊर्जा और अनुभव लेकर किसी और पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसलिए अकेले मैंने ही नहीं, मेरे साथ छह और सांसदों ने यह फैसला लिया कि हम इस पार्टी से रिश्ता तोड़ देंगे। एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। वे अनगिनत शिक्षित लोग जो इस पार्टी के साथ जुड़े थे, क्या वे सारे लोग गलत थे? आप ऐसे समझिए, आप में से जितने ऑफिस जाने वाले लोग हैं, अगर आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक बन जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस जगह को छोड़ दें। शायद हमने भी वही किया। आप में से कई लोगों ने पूछा कि क्या मैं आम लोगों के मुद्दे वैसे ही उठाता रहूंगा? तो मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी समस्याओं को लगातार और जोश के साथ उठाऊंगा, और अच्छी बात यह है कि अब हम उन दिक्कतों के हल भी ढूंढ पाएंगे। कुछ दिन पहले बीजेपी में हुए थे शामिल कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने साथ-साथ छह और सासंदों के आप छोड़क बीजेपी में शामिल होने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी झटका था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हर भजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता आदि बीजेपी में शामिल हो गए थे।  

बदले पैटर्न ने बढ़ाई मुश्किल, अभ्यर्थियों ने बताया पेपर रहा कठिन

अंबाला  हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को हुई। परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। बातचीत में अधिकांश परीक्षार्थियों ने स्वीकार किया कि इस बार का पेपर न सिर्फ कठिन था बल्कि सवालों का पैटर्न पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। वहीं एलाइड सर्विस के प्रश्नपत्र से विद्यार्थी खुश नजर आए। इस परीक्षा के लिए दोनों पालियों में 8712 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। यह आया कठिन अभ्यर्थियों के मुताबिक, सामान्य अध्ययन के पेपर में सीधे सवाल पूछने के बजाय कथन और निष्कर्ष और जोड़े मिलाओ वाले सवालों की भरमार थी। भूगोल में महासागरीय धाराओं और खनिज क्षेत्रों कुद्रेमुख, बालाघाट पर आधारित सवालों ने अभ्यर्थियों को परेशानी में डाला। रसायन विज्ञान में मेथनॉल की विषाक्तता और कोलाइड्स से जुड़े तकनीकी सवालों का स्तर काफी ऊंचा रहा। वहीं राज्य की संस्कृति से जुड़े सवालों में लूर नृत्य और झाड़ू फिरी जैसी रचनाओं के मिलान ने भी परीक्षार्थियों को उलझाए रखा। पेपर काफी विस्तृत था। खासकर कथन-1 और कथन-2 वाले सवालों में बहुत समय बर्बाद हुआ। अगर कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं है, तो तुक्का लगाना नामुमकिन था।  अमित कुमार, अभ्यर्थी उकलाना एचपीएससी अब पूरी तरह यूपीएससी के पैटर्न को फॉलो कर रहा है। इकोनॉमिक्स में बेरोजगारी और जीडीपी से जुड़े सवाल बेसिक लग रहे थे लेकिन उनके विकल्प बहुत उलझाने वाले थे।  स्नेहा, अभ्यर्थी पिंजौर नेगेटिव मार्किंग का डर परीक्षा में 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग और पांचवें विकल्प (ई) की अनिवार्यता ने भी छात्रों पर मानसिक दबाव बनाए रखा। कई छात्रों ने बताया कि समय कम होने के कारण वे भूगोल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कुछ सवाल हल नहीं कर पाए। वहीं कोचिंग विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि पेपर का स्तर काफी कठिन श्रेणी में था। ऐसे में इस बार सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ पिछली बार के मुकाबले कम रहने का अनुमान है। कुल 100 सामान्य अध्ययन के प्रश्नों के उत्तर के लिए 2 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। इस बार की परीक्षा में हरियाणा की संस्कृति और वैश्विक पर्यावरण समझौतों पर अधिक ध्यान दिया गया। प्रशासन ने की थी हाई-टेक व्यवस्था जिले के 31 केंद्रों पर रविवार को एचसीएस की प्रारंभिक परीक्षा तकनीक के चक्रव्यूह में संपन्न हुई। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार हाई-टेक व्यवस्था अपनाई। केंद्रों के गेट पर अभ्यर्थियों का पहले फेस स्कैन किया गया, फिर बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान मिलने के बाद ही एंट्री दी गई। केंद्रों के पास धारा 163 लागू रही और फोटोस्टेट की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस बल और कंट्रोल रूम के जरिए परीक्षा पर नजर रखी गई। एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा रही आसान जिले में रविवार को आयोजित एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा उम्मीद से कहीं ज्यादा सरल रही। प्रश्नपत्र का स्तर आसान होने के कारण अधिकतर अभ्यर्थियों ने निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले ही अपनी ओएमआर शीट जमा कर दी। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते ही युवा अपने साथियों के साथ उत्तरों का मिलान करने और अंकों का गणित जोड़ने में व्यस्त हो गए। अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र काफी संतुलित था। विशेषकर इतिहास और डाक विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत दी। बंगाल का विभाजन और सुभाष चंद्र बोस के नारे जैसे सीधे सवालों ने स्कोरिंग को आसान बना दिया। वहीं, डाक नियमों से जुड़े तकनीकी सवाल भी विभागीय तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सरल रहे।  

पंजाब में गर्मी का तांडव, तापमान 40°C पार; मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया

लुधियाना  रविवार को पंजाब के विभिन्न जिलों में मौसम ने गर्मी का कहर बरपाया। लू के चलते तापमान लगातार तीसरे दिन 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। बठिंडा में सुबह 1.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, लेकिन इसके बाद तेज धूप ने तापमान को 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। लुधियाना और पटियाला में तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि फरीदकोट में 42.8 डिग्री सेल्सियस, रूपनगर में 41.4 डिग्री सेल्सियस, चंडीगढ़ में 40.8 डिग्री सेल्सियस, एसबीएस नगर में 40.5 डिग्री सेल्सियस, अमृतसर में 39.3 डिग्री सेल्सियस, फिरोजपुर में 39.0 डिग्री सेल्सियस और होशियारपुर में 38.0 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। अन्य जिलों में तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को पंजाब के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना है, जबकि अन्य जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं। 28 से 30 अप्रैल तक धूल भरी हवाओं और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई गई है। एक मई को मौसम साफ रहेगा, जबकि दो मई को फिर से धूल भरी हवा और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। पंजाब और हरियाणा में लू के थपेड़े पंजाब और हरियाणा के ज्यादातर जिलों में दोपहर 12 बजे से देर शाम तक गर्म हवाएं चल रही हैं। हरियाणा के रोहतक, पानीपत और फरीदाबाद जैसे जिलों में गर्मी ने लोगों का बुरा हाल कर दिया है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है और मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहां न केवल गर्मी, बल्कि खराब वायु गुणवत्ता (AQI 222) ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूपी और राजस्थान में पारा 46 के पार उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा। वहीं, राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में भी तापमान 46 डिग्री दर्ज किया गया है। ओडिशा के झारसुगुड़ा में भी तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि तटीय इलाकों में लोग उमस से परेशान हैं। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग (IMD) ने भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर भी दी है। 28 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और हल्की बारिश हो सकती है। यह मौसम 2 मई तक बना रह सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना अधिक जताई गई है।  

नक्सलमुक्त जिले में बदली तस्वीर, जगरगुंडा में पुलिस की वापसी से फिर बसने लगी जिंदगी

सुकमा. कभी शाम होते ही बंद हो जाने वाला जगरगुंडा अब रात में भी जाग रहा है। दो दशकों तक भय के साए में जीने वाला इलाका अब बदलता नजर आ रहा है। सड़कों के निर्माण से बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से संपर्क आसान हुआ है। बाजारों में फिर से चहल-पहल लौटने लगी है। कभी इमली मंडी के लिए मशहूर क्षेत्र फिर व्यापार की राह पकड़ रहा है। महुआ, इमली और चिरौंजी का कारोबार दोबारा गति पकड़ रहा है। जनवरी 2026 में वर्षों बाद बैंक शाखा खुलना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सैकड़ों ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। अब लोग पैसे निकालने दूर-दराज नहीं जा रहे। रात में भी लोगों का बेखौफ बाहर निकलना बदलाव का संकेत है। हालांकि नेटवर्क और अधूरी सड़कें अब भी चुनौती बनी हुई हैं। जगरगुंडा अब खौफ नहीं, विकास की नई कहानी लिख रहा है। नक्सलमुक्त जिले में पुलिस लौटी खाकी पहचान में कोंडागांव को नक्सलमुक्त घोषित किए जाने के बाद बड़ा बदलाव दिखा है। जिला पुलिस ने ड्यूटी में पारंपरिक खाकी वर्दी पहनने के निर्देश दिए हैं। पहले संवेदनशील इलाकों में कैमफ्लाज वर्दी का उपयोग किया जाता था। यह वर्दी ऑपरेशन और सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से जरूरी थी। अब फोकस कानून व्यवस्था और जनसेवा पर केंद्रित किया गया है। खाकी वर्दी से पुलिस आमजन के बीच अधिक सहज दिखेगी। जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होने की उम्मीद है। पहचानने योग्य पुलिसिंग से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अधिकारियों ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है। सूचना या शिकायत पर नजदीकी थाने से संपर्क करने कहा गया है। यह बदलाव शांति और सामान्य हालात का प्रतीक माना जा रहा है। कोंडागांव अब सुरक्षा से विकास की ओर कदम बढ़ा रहा है।