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रीवा में एयरबस जैसे बड़े विमान की लैंडिंग, 2300 मीटर रनवे बनाने के लिए 140 एकड़ भूमि का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा

रीवा रीवा एयरपोर्ट पर भविष्य में एयरबस (Airbus A320) जैसे 150 से 180 सीटर बड़े विमानों की लैंडिंग कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर 2300 मीटर की जाएगी और 140 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।  140 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण, रिपोर्ट भोपाल भेजी रीवा एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिसके बाद इसे 'हवाई हब' के रूप में विकसित करने की योजना है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 140 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन द्वारा जमीन के सीमांकन का कार्य पूरा कर रिपोर्ट भोपाल भेज दी गई है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 830 किसान प्रभावित होंगे, जिन्हें सरकार द्वारा 340 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। नियमित विमान सेवा शुरू होने के बाद पांच माह में रीवा में 20,000 लोगों ने हवाई सफर किया। जिससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि रीवा में हवाई यात्रा को लेकर काफी पोटेंशियल है। जिस वजह से सरकार ने भी रीवा एयरपोर्ट का विस्तार करने पर सहमति जताई है। 2300 मीटर होगा रनवे, अभी सिर्फ ATR-72 की होती है लैंडिंग वर्तमान में रीवा एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1800 मीटर लंबा है। यह रनवे अभी केवल ATR-72 जैसे छोटे विमानों के लिए ही उपयुक्त है और अब तक यहां ऐसे ही विमान संचालित होते रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर करीब 2300 मीटर की जाएगी। रनवे के इस विस्तार के बाद Airbus A320 जैसे 150 से 180 सीट क्षमता वाले बड़े विमान भी रीवा एयरपोर्ट पर आसानी से उतर सकेंगे। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए शुरू होंगी सीधी उड़ानें एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार होने और बड़े विमानों की लैंडिंग की सुविधा मिलने के बाद रीवा से देश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी हवाई सेवाएं शुरू होने की संभावना है। भविष्य में यहां से मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जा सकती हैं। इन महानगरों से सीधी कनेक्टिविटी होने से न केवल रीवा बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र की यातायात सुविधा मजबूत होगी। साथ ही इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश और पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।

बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर, लखनऊ से इंदौर तक बनेगा

सागर  लंबे समय से प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ने का इंतजार कर रहे बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है. बुंदेलखंड प्रगति पथ के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर अब बुंदेलखंड को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि बुंदेलखंड प्रगति पथ का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों मिलने जा रहा है।  ये कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास जैसे औद्योगिक शहरों से जुड़ेगा तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ से जुड़ जाएगा।  एक्सप्रेसवे की तर्ज पर होगा तैयार प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाना है. ये ऐसा प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा है, जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा. इस औद्योगिक गलियारे से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इंदौर, भोपाल, देवास, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़ जाएगा. इसका फायदा दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड यानि उत्तरप्रदेश के साथ जिलों और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को होगा।  बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पीछे जाने के कारण पलायन यहां की मजबूरी है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड की नई तस्वीर गढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे के कारण औद्योगिक विकास होगा और लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।  330 किमी लंबा एक्सप्रेस वे होगा बुंदेलखंड विकास पथ बुंदेलखंड विकास पथ मध्यप्रदेश का प्रस्तावित इकानामिक कॉरिडोर है. ये करीब 330 किमी लंबा एक्सप्रेसवे है. इसको डिजाइन करने का उद्देश्य पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसको ऐसा डिजाइन किया गया है कि सागर के जरिए ये झांसी-ललितपुर-देवास-सागर को जोड़कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को दोनों राज्यों के प्रमुख औद्योगिक शहरों से कनेक्टिविटी है। बदलेगी बुंदेलखंड की की तस्वीर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते है "बुंदेलखंड प्रगति पथ प्रस्तावित है. फिलहाल शुरुआती सर्वे और अध्ययन चल रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से दोनो राज्यों के बुंदेलखंड को कनेक्ट करेगा. सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगा. पर्यटन और व्यापार में गति आएगी. मालवा और बुंदेलखंड के बीच परिवहन को रफ्तार देगा।  

UP बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं के 53 लाख छात्रों का रिजल्ट आज शाम 4 बजे घोषित होगा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) 10वीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट आज 23 अप्रैल को शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट घोषित होने के बाद परीक्षा में शामिल छात्र आधिकारिक वेबसाइट – upsmp.edu और upresults.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख और मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए छात्रों को अपने लॉगिन डिटेल्स जैसे रोल नंबर आदि दर्ज करने होंगे।  आज खत्म हो जाएगा 53 लाख छात्रों का इंतजार एशिया के सबसे बड़े बोर्ड में शामिल यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आज , शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय से घोषित किया जाएगा. इस साल बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच कराई गई थीं और इन्हें केवल 15 कार्य दिवसों में पूरा कर लिया गया. इस साल कक्षा 10वीं-12वीं की परीक्षा में कुल 53 लाख 37 हजार 778 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें हाईस्कूल के 27 लाख 61 हजार 696 और इंटरमीडिएट के 25 लाख 76 हजार 82 विद्यार्थी थे. वहीं, परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बोर्ड ने सख्त इंतजाम किए थे. इसके अलावा, इस बार पूरे प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।  52 लाख छात्रों का आज  होगा इंतजार खत्म  यूपी बोर्ड के 52 लाख से ज्यादा छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. पहले ऐसे कहा जा रहा था कि  रिजल्ट 25 अप्रैल को जारी होगा, लेकिन बोर्ड की ओर से आधिकारिक तारीख का ऐलान कर दिया गया है. रिजल्ट के साथ ही बोर्ड टॉपर्स की लिस्ट भी जारी कर सकता है. सचिव भगवती सिंह की तरफ से रिजल्ट की तारीख बताई गई है. पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो हाई स्कूल में 90.11 प्रतिशत छात्र पास हुए, वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में 81.15 फीसदी छात्रों ने बाजी मारी।  फेल होने पर परेशान न हो छात्र  यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. यूपी बोर्ड ऐसे छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा का आयोजन करेगा. इसकी सूचना रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद दी जाएगी. इसके अलावा, छात्र अपनी कॉपियों की स्क्रूटनी के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  डिजीलॉकर पर मिलेगा रिजल्ट  यूपी बोर्ड इस साल भी छात्रों को डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल मार्कशीट उपलब्ध कराएगा. छात्र अपना आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर उपयोग कर डिजिलॉकर अकाउंट बना सकते हैं. रिजल्ट के कुछ घंटों बाद ही डिजिटल मार्कशीट वहां अपलोड कर दी जाएगी, जो कि भविष्य के एडमिशन और अन्य सरकारी कार्यों के लिए पूरी तरह से वैध मानी जाएगी।  UP Board 10th-12th Result 2026: कहां देख सकेंगे यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं रिजल्ट? यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे जारी होने के बाद छात्र अपना रिजल्ट ऑनलाइन आसानी से देख सकेंगे. इसके लिए बोर्ड ने कई आधिकारिक वेबसाइट उपलब्ध कराई हैं, जहां से छात्र बिना किसी परेशानी के अपना परिणाम चेक कर सकते हैं. रिजल्ट देखने के लिए छात्र इन वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं: – upmsp.edu.in – upresults.nic.in – results.upmsp.edu.in – results.digilocker.gov.in UP Board 10th-12th Result 2026: कैसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट 2026? UP Board 10th-12th Result 2026 LIVE: अगर आप यूपी बोर्ड का रिजल्ट देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।  2. वेबसाइट के होमपेज पर आपको 10वीं (हाईस्कूल) और 12वीं (इंटरमीडिएट) रिजल्ट 2026 का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।  3. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको अपना रोल नंबर भरना होगा. रोल नंबर डालने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।  4. जैसे ही आप सबमिट करेंगे, आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा।  5. अब आप अपनी मार्कशीट को ध्यान से देख सकते हैं, उसे डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट भी निकालकर रख लें। 

अमरनाथ यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन के लिए सरल तरीका, 5 आसान स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन

भोपाल  इस बार अमरनाथ यात्रा की शुरुआत तीन जुलाई से होगी। हिमालय की गुफा में विराजमान बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए भक्तों के अपार उत्साह है। इसके कारण 20 जुलाई तक की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फुल हो चुके हैं। कोई ओंकारेश्वर तो कोई खंडवा पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया। इस बार तो हालात ये बने की ग्रुप के सभी सदस्यों को दर्शन के लिए एक समान तारीख तक नहीं मिल रही है। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। लोग कैसे भी करके रजिस्ट्रेशन कराना चाह रहे है। 26 जुलाई तक फुल रजिस्ट्रेशन अमरनाथ यात्री मनोज शंखपाल व जयंत मुंशी ने बताया कि इस बार भक्तों में उत्साह ज्यादा है। बुरहानपुर से 3 हजार से अधिक भक्त इस बार यात्रा पर जा रहे हैं, जबकि यह आंकड़ा प्रति वर्ष 1500 के करीब रहता है। इस बार रजिस्ट्रेंशन संˆख्या अधिक हो गई। ऑनलाइन में बालटाल से 20 जुलाई और पहलगाम से 26 जुलाई तक फुल चल रहा है। हमने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 200 से अधिक भक्तों की डाक जšम्मू श्रीनगर श्राइन बोर्ड ऑफिस भेजी है। कई भक्त भी मनचाही तिथि के लिए जšम्मू या श्रीनगर पहुंचकर तत्काल पंजीयन का विकल्प चुन रहे हैं। पहलगाम और बालटाल के मार्ग से होने वाली इस यात्रा के लिए आएफआइडी कार्ड अनिवार्य है। कैसे कराएं अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन तरीका: आप ऑनलाइन (वेबसाइट/ऐप) और ऑफलाइन (बैंक शाखाएं) दोनों तरीके से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फीस: लगभग 150 से 220 प्रति व्यक्ति। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आधार कार्ड, वैध मेडिकल सर्टिफिकेट (CHC – अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र), और फोटो। ऐज लिमिट: 13 साल से कम और 70 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को अनुमति नहीं है। यात्रा मार्ग: बालटाल (Baltal) और पहलगाम (Pahalgam)। ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन -SASB की वेबसाइट jksasb.nic.in पर जाएं। -'Online Services' > 'Register' पर क्लिक करें। -फॉर्म भरें, रूट और तारीख चुनें। -फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करें। -फीस का भुगतान करें और परमिट डाउनलोड करें। केदारनाथ यात्रा भी शुरू 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम व देश के चारधाम में शामिल बद्रीनाथ धाम के लिए भी उत्साह है। यहां पर गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन का भी महत्व है। अक्षय तृतीय से यात्रा की शुरुआत हो गई। आंकड़े एक नजर में -15 अप्रेल से शुरू हुए रजिस्ट्रेशन -28 अगस्त को राखी पर होगा समापन -03 हजार के करीब संभावित यात्री जाएंगे अमरनाथ यात्रा पर

भोपाल मेट्रो के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किया गया तेज

भोपाल   भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 80 एकड़ जमीन तुरंत चाहिए। इसके लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तत्काल आदेश जारी करते हुए एक्सचेंज स्टेशन के लिए आरा मशीरों को शिफ्ट करने को कहा है। साथ ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरणों को तेजी से निराकृत करने के भी निर्देश दिए। धारा 19 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एमआइडीसी, वन एवं राजस्व विभाग केअधिकारियों को भी निर्देशित किया कि मेट्रो निर्माण से प्रभावित आरा मशीनो के स्थानांतरण की कार्रवाई जल्द पूरी करें। सभी एसडीएम को मिशन मोड में काम करने का कहा गया। उन्होंने चिन्हित भूमि का सीमांकन कर कंपनी को सौंपने के भी निर्देश दिए। जहां कहीं मेट्रो में भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो, वहां प्रकरण को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर उसका त्वरित समाधान कराने का कहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर भूमि संबंधी कोई विवाद नहीं है, वहां मेट्रो कंपनी काम शुरू करे। ऑरेंज लाइन का चल रहा काम गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो परियोजना के अंतर्गत ऑरेंज लाइन (प्रायोरिटी कॉरिडोर) सुभाष नगर से केन्द्रीय विद्यालय बोर्ड ऑफिस चौराहा होते हुए एम्स तक विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त ब्लू लाइन रूट भदभदा डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, लाल परेड मैदान, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, जेके रोड, इंद्रपुरी, पिपलानी और रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित है। बैठक में अपर कलेक्टर सुमित पांडे, मेट्रो मंडल प्रबंधक, नगर निगम के अपर आयुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं एसडीएम उपस्थित थे। 3.36 किमी की अंडरग्राउंड लाइन वहीं दूसरी ओर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी। तेज होगा काम प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर्स के अनुसार, जून से मानसूनी हलचल शुरू होने के बाद गहराई में काम करना कठिन होगा। इस दौरान अन्य काम पूरे किए जाएंगे। टनल का काम फिर अक्टूबर से ही शुरू होगा। यानी तीन माह में पूरा होने वाला काम 8 से 9 माह में पूरा होगा।

किराए के मकान में रहने के लिए बतानी होगी वजह, 2027 की जनगणना में गड़बड़ी करने वालों के लिए नया प्रावधान

भोपाल  भोपाल में जनगणना 2027 के तहत अभी पंद्रह दिन स्वगणना की प्रक्रिया की जा रही है। एक मई से हर घर पहुंचकर मकान सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण किराएदारों की डिटेल जुटाना है। किराए के मकान में रहने की वजह भी पूछी जाएगी। किराएदार किस तरह के घर में रह रहे हैं, फार्म में इसकी जानकारी देनी होगी। किराए के मकान के नाम पर गड़बड़ी करनेवालों के लिए जनगणना 2027 में यह बड़ा प्रावधान किया गया है। स्वगणना के साथ ही एक मई से शुरू होने वाली प्रगणकों द्वारा गणना में कोई गलत जानकारी दी तो जुर्माने के साथ सजा भी हो सकती है। प्रशासन के सामने किराएदारों की वास्तविक डिटेल निकालना बड़ी चुनौती है। इसलिए प्रगणकों को किराएदारी वाले मकान को लेकर विशेष सतर्कता के साथ काम करने के लिए कहा गया है। इस बीच स्व गणना की गति बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। प्रशासन की ओर से इसके लिए लोगों को जागरूक करने का कहा गया है। उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास खुद का मकान : मकान सूचीकरण के तहत उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास शहर में या अन्य कहीं खुद का मकान है और वे यहां किराए से रह रहे हैं। इसकी वजह भी पूछी जाएगी। आगामी समय में इस तरह की स्थितियों को लेकर सरकार कोई योजना बना सकती है। खुद का मकान होने के बाद भी लोग किराए से रह रहे हैं तो कारण पता लगाए जाएंगे। प्रशासन को आशंका, परिवार का घर, किराएदार न दर्ज करवा दें: प्रशासन को ये आशंका है कि एक ही घर में कई परिवार रह रहे हों, वहां कुछ खुद को किराएदार के तौर पर दर्ज न करवा दें। सरकार की आवासीय योजनाओं का लाभ लेने की मंशा इसमें शामिल हो सकता है। ऐसे में अतिरिक्त पूछताछ करने के लिए कहा जा रहा है। प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा जा रहा है। अभी स्वगणना में भोपाल प्रदेशभर में तीसरे नंबर पर है। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा उप जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता बताते हैंं कि जनगणना 2027 को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

एमपी में दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन, हॉकर्स कॉर्नर की जियो टैगिंग से खाद्य लाइसेंस मिलेगा

भोपाल  एमपी में अब दुकानों का डिजिटल वेरिफिकेशन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर व बड़े भवनों में खानपान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिल पाएगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी भोपाल जिले में शुरुआत हो रही है। इसमें मौके पर मौजूद दुकान का ही लाइसेंस मिल पाएगा। दुकानदार को भी लाइसेंस के लिए कार्यालयों में भटकना नहीं होगा। प्रशासन को पता होगा कि जिले में किस लोकेशन पर किस तरह की दुकान है, जिससे दुकानों की निगरानी मजबूत होगी। एक क्लिक में फूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड के पोर्टल से डिटेल मिल जाएगी। ऐसे समझें स्थिति: खाद्य प्रतिष्ठान के डिजिटल सत्यापन और जियो- टैगिंग का सीधा मतलब तकनीक के जरिए आपकी दुकान या फैक्ट्री की लोकेशन और अस्तित्व को सुनिश्चित करना है। जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी आपके प्रतिष्ठान का निरीक्षण करेंगे, तो वे ऐप से दुकान की फोटो खींचेंगे। उसके साथ जगह की सटीक लोकेशन अपने आप सिस्टम में सेव हो जाएगी। ऐसे मिलेगा लाभ पहले कई बार लोग कागजों पर दुकान दिखाकर लाइसेंस ले लेते थे, जबकि मौके पर कोई दुकान होती ही नहीं थी। जियो- टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस उसी पते के लिए दिया गया है, जहां वास्तव में काम हो रहा है। इससे यह साबित होगा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी वास्तव में आपकी दुकान पर जांच के लिए पहुंचा था, क्योंकि ऐप तभी काम करेगा, जब अधिकारी उस लोकेशन के आसपास होगा। सरकार के पास एक डिजिटल मैप तैयार होगा कि शहर के किस इलाके में कितने रेस्टोरेंट, डेयरी या राशन की दुकानें हैं। आपको भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होती, सब कुछ स्कैन करके अपलोड होता है। आधार कार्ड के जरिए व्यापारी का डिजिटल सत्यापन किया जाता है। खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश भोपाल के खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अधिकारी पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि खाद्य सुरक्षा को डिजिटली व हाईटेक तौर तरीकों से बेहतर करने की कोशिश है। इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस कदम से दुकानों के नाम पर होता फर्जीवाड़ा रुक जाएगा। बिना दुकान के भी लाइसेंस ले लेेने पर अंकुश लगेगा, जियो- टैगिंग से हर हाल में केवल वास्तविक दुकानदारों को ही लाइसेंस मिल सकेगा। पहले पते में दिए मौके पर कई बार कोई दुकान ही नहीं होती थी। अब दुकान के पते पर उपस्थित होने पर ही लाइसेंस सुनिश्चित होगा। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा।

ग्वालियर में प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछेगा, 5 जिलों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली

ग्वालियर  मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछाया जाएगा। इनपर 18 से ज्यादा जलमग्नीय पुलों का प्लान तैयार किया गया है। इससे बारिश में टापू बनने वाले गांवों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) ने ग्वालियर चंबल संभाग की प्रमुख नदियों- सांख, क्वारी, सिंध और पार्वती पर जलमग्नीय (सबमर्सिबल) पुलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल बारिश में कट जाने वाले गांवों को मुख्य सडकों से जोड़ेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगा। ग्वालियर जिले के तीन प्रमुख पुलों के साथ संभाग के भिण्ड, मुरैना, श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनमें से कई को हरी झंडी मिल गई है। ग्वालियर- चंबल संभाग के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान मौत के सफर की तस्वीरें अब जल्द ही इतिहास बनने वाली हैं। योजना के तहत ग्वालियर में तीन पुलों पर काम शुरू हो गया है बोरिंग पूरी हो गई है। जिले में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर काम की स्पीड तेज हो गई है। मोतीझील- तिघरा कैनाल रोड से मेहंदपुर मार्ग के बीच सांख नदी पर 950 लाख रुपए की लागत से बनने वाला पुल सबसे अहम है। वर्तमान स्थिति: सांख नदी के साथ मोहना-उम्मेदगढ़ और घाटीगांव- जखोदा मार्ग पर प्रस्तावित पुलों के लिए बोङ्क्षरग का काम पूरा हो चुका है। जीएडी तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी गई है। जल्द ही इनका टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा। मुरैना और भिण्ड: कवारी नदी पर सबसे बड़ा दांव… मुरैना जिले में क्वारी नदी पर सबसे महंगे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। यहां 2235 लाख की लागत से कटेलापुरा- दोहाटी मार्ग और 2583 लाख की लागत से इटौरा सुजरमा मार्ग पर पुल बनने हैं। भिण्ड के कचोगरा में भी 1915 लाख का पुल प्रशासकीय स्वीकृति के अंतिम चरण में है। ये पुल मुरैना और भिण्ड के दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों से सालभर जोड़कर रखेंगे। शिवपुरी और श्योपुर: सिंध- पार्वती पर उम्मीदों का सेतु… संभाग में सबसे अधिक पुलों की सूची शिवपुरी जिले से है। यहां सिंध नदी पर मगरौनी-नरवर के बीच 3591 लाख और मिहाबरा-दोनी के बीच 2177 लाख के पुल बजट में शामिल हैं। वहीं, श्योपुर में पार्वती नदी पर 6400 लाख का विशाल पुल प्रस्तावित है, जिसका डिजाइन फाइनल हो चुका है। सेतु संभाग (लोक निर्माण विभाग) के कार्यपालन यंत्री जोगेंदर सिंह यादव के अनुसार ग्वालियर के तीन पुलों सहित संभाग भर के पुलों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कुछ प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि कुछ का तकनीकी मूल्यांकन जारी है। एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है। क्या होते हैं जलमग्नीय पुल ये पुल सामान्य ऊंचे पुलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं। मानसून में अत्यधिक बाढ़ आने पर ये पानी में डूब जाते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन होता है कि पानी उतरते ही ये पुन: यातायात के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये सबसे प्रभावी विकल्प माने जा रहे हैं। हर साल की नाव वाली कहानी पर लगेगा विराम : हर साल बारिश में ग्वालियर-चंबल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे दर्जनों गांव संपर्क विहीन हो जाते हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या ट्रैक्टर से नदी पार करते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार हादसे भी होते हैं। सेतु संभाग की इस योजना से नई उम्मीद जगी है।

‘मैदान कप’ से चमकेगा Bastar, Sachin Tendulkar के साथ खेलेंगे हजारों बच्चे

जगदलपुर. बदलते बस्तर में आज भारत रत्न और क्रिकेट जगत के महानायक सचिन तेंदुलकर का आगमन हुआ है। पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का बस्तर पहुंचना सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि उस परिवर्तन की तस्वीर है, जहां डर की जगह अब सपनों ने ले ली है। सचिन यहां बच्चों के खेल भविष्य को संवारने के मिशन के साथ पहुंचे हैं। सचिन के साथ उनकी बहु सानिया चंदोक, बेटी सारा तेंदुलकर एवं सचिन फाउंडेशन के 5 सदस्य भी पहुंचे हैं। कभी नक्सलवाद की दहशत से पहचान बनाने वाला बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिस धरती पर कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब खेल और विकास की आवाज बुलंद हो रही है। मीडिया से बातचीत करते हुए सचिन तेंदुलकर ने बताया कि बस्तर में 50 स्कूल मैदानों को विकसित किया जाएगा, जहां बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी। सचिन ने बताया, ‘मैदान कप’ प्रतियोगिता के जरिए हजारों बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा। इस पहल को मानदेशी और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है। करीब 5 हजार से ज्यादा बच्चों को इस अभियान से सीधा लाभ मिलेगा। कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसे खेलों के जरिए बस्तर के युवाओं को नई पहचान की तैयारी है। बच्चों के बल्ले पर दिया ऑटोग्राफ इस दौरान स्थानीय क्रिकेट प्रेमी बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने सचिन का स्वागत किया। सचिन तेंदुलकर ने बच्चों के बल्ले पर ऑटोग्राफ भी दिया, जिसे पाकर मासूम चेहरों पर खुशी झलक उठी। यह पल बच्चों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा बन गया। जो बस्तर कभी हिंसा की खबरों में रहता था, आज वही बस्तर खेल प्रतिभाओं की नई राजधानी बनने की ओर बढ़ रहा है। सचिन तेंदुलकर का यह दौरा साफ संदेश है कि अब बस्तर बंदूक नहीं, बल्ले और मेडल से पहचाना जाएगा। युवा क्रिकेटर द्रोण ने कहा – सचिन से मिलकर बहुत खुश हैं युवा क्रिकेटर द्रोण वर्मा ने बताया कि सचिन तेंदुलकर से मिलना उनके लिए बेहद खास पल रहा। सचिन ने उनके बैट पर ऑटोग्राफ देते हुए “Best Wishes” लिखा और आगे भी अच्छा खेलने के लिए प्रेरित किया। द्रोण ने कहा कि वह काफी देर से उनका इंतजार कर रहे थे और मुलाकात के बाद बहुत खुश हैं। बच्चों ने भी सचिन तेंदुलकर को बस्तर मॉडर्न आर्ट भेंट कर सम्मान किया। फाउंडेशन के कार्यों का जायजा लेने आए हैं सचिन : एसपी बस्तर एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि सचिन तेंदुलकर अपने फाउंडेशन के कार्यों का जायजा लेने बस्तर पहुंचे हैं। दौरे के दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि सचिन अपने निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल होंगे और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वापस लौटने की योजना है।

राजनीति गरमाई: Anil Vij ने Mallikarjun Kharge के बयान पर किया जोरदार पलटवार

चंडीगढ़. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कहे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश का कोई भी नागरिक अपने प्रधानमंत्री के बारे में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इनके अंदर तो विदेशियों की आत्माएं बोलती है जिनमें पाकिस्तान, चीन जैसे देश के दुश्मनों की बोलती है जो यह इस प्रकार के शब्द कहने का दुसाहस भी कर पाते हैं। विज आज पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। बंगाल व तमिलनाडू में कल से मतदान को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि देश में मोदी की लहर चल रही है सारे देश में विकास की राजनीति की लहर चल रही है। फिर चुनाव किसी भी प्रदेश में हो असर हर जगह है। हम इससे पहले हरियाणा, दिल्ली, बिहार, मुंबई में जीते हैं उसी प्रकार से आगे भी जहां-जहां चुनाव होंगे, भाजपा ही जीतेगी। सांसद पप्पू यादव द्वारा राजनीतिक क्षेत्र में आई महिलाओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर ऊर्जा मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार की शब्दावली का इस्तेमाल करना निंदनीय है। हो सकता है कि उनकी अपनी पार्टियों में ऐसा कुछ होता हो, मगर सारी पार्टियों, महिलाओं व देश को ऐसा नहीं कह सकते।