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मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में शिव प्राण प्रतिष्ठा की शोभायात्रा निकाली गई

उमरिया.  उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में शिव प्राण प्रतिष्ठा की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शिव मंदिर बिरसिंहपुर से होते हुए बिलासपुर बस स्टैंड बोगदा चौराहा आसमानी मंदिर से होते हुए मां बिरासिनी मंदिर में शोभा यात्रा का समापन किया गया। महादेव जी की प्राण प्रतिष्ठा मां बिरासिनी मंदिर प्रांगण की जाएगी। शिव प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 21 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक चलेगा। वही 24 अप्रैल को विशाल भंडारे का कार्यक्रम रखा गया है। कार्यक्रम मां बिरासिनी समिति एवं बोल बम की कमेटी के द्वारा किया गया है।

विधवा अधिकारों पर सख्त रुख: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा—उत्तराधिकार में भेदभाव अस्वीकार्य

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि संविधान लागू होने के बाद कोई भी ऐसा रिवाज या प्रथागत कानून लागू नहीं किया जा सकता, जो महिला और पुरुष उत्तराधिकारियों के बीच भेदभाव करता हो। अदालत ने विधवा के संपत्ति अधिकार को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी भी सिविल कोर्ट द्वारा ऐसे भेदभावपूर्ण कस्टमरी लॉ को मान्यता नहीं दी जा सकती।यह महत्वपूर्ण निर्णय जस्टिस निधि गुप्ता की पीठ ने सुनाया। अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें मृतक के भाई ने खुद को “निकटतम पुरुष रिश्तेदार” बताते हुए विधवा के पक्ष में दिए गए निचली अदालतों के फैसले को चुनौती दी थी। मामला नूंह का है, जहां एक व्यक्ति की 2015 में बिना संतान के मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसकी पत्नी ने संपत्ति का एक हिस्सा तीसरे पक्ष को बेच दिया। मृतक के भाई ने इस बिक्री को अवैध बताते हुए दावा किया कि मेव समुदाय की पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार विधवा को केवल जीवन-निर्वाह तक सीमित अधिकार होता है और वह बिना पुरुष रिश्तेदारों की अनुमति के संपत्ति का हस्तांतरण नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में रिवाज ए आम का हवाला देते हुए कहा कि इस परंपरा के तहत संपत्ति का उत्तराधिकार केवल पुरुष वंश में ही चलता है। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि “कस्टमरी ला भी संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत ‘कानून’ की श्रेणी में आता है, और यदि वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे लागू नहीं किया जा सकता।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को द्वितीय श्रेणी का उत्तराधिकारी मानने वाली कोई भी प्रथा असंवैधानिक है।हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत कानून और प्रथागत कानून अलग-अलग क्षेत्र हैं। जहां पर्सनल ला धार्मिक ग्रंथों और विधिक परविधान पर आधारित होता है, वहां कस्टमरी ला एक अपवाद के रूप में विकसित होता है, जिसे सख्ती से सिद्ध करना आवश्यक होता है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता केवल एक पुरानी और भेदभावपूर्ण परंपरा के आधार पर दावा कर रहा था, जिसे न तो पर्याप्त रूप से साबित किया गया और न ही वर्तमान संवैधानिक ढांचे में स्वीकार किया जा सकता है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी और विधवा के संपत्ति अधिकार को पूर्ण रूप से मान्यता दी।

भीषण गर्मी पर अलर्ट: पंजाब स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी, 12-3 बजे तक घर में रहें

बरनाला. बढ़ते तापमान और चिलचिलाती धूप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग बरनाला ने आम जनता को गर्मी और लू के प्रकोप से बचाने के लिए एक विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। इस संबंध में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन बरनाला डॉ. हरीपाल सिंह सिद्धू ने लोगों से अपील की है कि वे संभावित मौसम की मार से बचने के लिए एहतियात बरतें। डॉ. सिद्धू ने बताया कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक का समय सबसे अधिक गर्म होता है, इसलिए इस दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से संवेदनशील समूहों को सतर्क रहने की सलाह दी है, जिनमें नवजात और छोटे बच्चे, 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूर और किसान, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रैशर और मोटापे से पीड़ित व्यक्ति, खुले में कड़ी मेहनत करने वाले खिलाड़ी और बेघर लोग शामिल हैं। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि इन व्यक्तियों के शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है, जिससे वे लू की चपेट में आ सकते हैं। जिले के निवासियों की सुविधा के लिए सिविल अस्पताल बरनाला, सब-डिविजनल अस्पताल तपा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनौला, महल कलां और भदौड़ में लू से निपटने के लिए आपातकालीन दवाओं और ओ.आर.एस. के पैकेटों का पर्याप्त प्रबंध किया गया है। क्या करें और क्या न करें? जिला मास मीडिया अधिकारी कुलदीप सिंह मान और बी.सी.सी. समन्वयक हरजीत सिंह ने बचाव के उपाय साझा करते हुए बताया: बढ़ती तपिश और लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी • क्या करें: अधिक से अधिक पानी, लस्सी, नींबू पानी और ओ.आर.एस. का सेवन करें। बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, चश्मा लगाएं और सिर को ढक कर रखें। मौसमी फलों और सब्जियों का प्रयोग अधिक करें। रसोई और घरों को हवादार रखें। • क्या न करें: चाय, कॉफी जैसे गर्म पेय पदार्थों और नशीले पदार्थों के सेवन से बचें। तीखे, मसालेदार और बासी खाने से परहेज करें। बच्चों और पालतू जानवरों को पार्क किए गए वाहनों में बंद न छोड़ें। तेज धूप में नंगे पैर बाहर न जाएं।

बच्चों के विकास पर फोकस: एमसीबी आयोजित करेगा स्किल बेस्ड समर प्रतियोगिता, 26-27 अप्रैल तय

एमसीबी. जिले के विद्यार्थियों में भाषायी एवं संख्यात्मक दक्षता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्किल बेस्ड समर प्रतियोगिता 2026 आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह प्रतियोगिता विकासखंड स्तर पर 27 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे। जारी आदेश के अनुसार प्रतियोगिता दो स्तरों के प्राथमिक (कक्षा 3री से 5वीं) एवं माध्यमिक (कक्षा 6वीं से 8वीं) में आयोजित होगी। सभी शासकीय विद्यालयों के इच्छुक विद्यार्थियों को इसमें सम्मिलित किया जाएगा। प्रतियोगिता व्यक्तिगत (एकल) एवं समूह दोनों स्वरूपों में होगी, जिससे विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ-साथ टीम वर्क एवं सहयोग की क्षमता का भी विकास हो सके। रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों का समावेश इस प्रतियोगिता में कुल 7 प्रकार की गतिविधियां शामिल की गई हैं, जिनमें चित्र देखकर कहानी लेखन, प्रश्नोत्तरी, डिक्शनरी खोजो, शब्दों से वाक्य निर्माण, सुलेख, मापन तथा ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसी रचनात्मक गतिविधियां शामिल हैं। अधिकांश प्रतियोगिताओं की समय सीमा 25 मिनट निर्धारित की गई है, जबकि कुछ गतिविधियां 10 से 15 मिनट की अवधि में सम्पन्न कराई जाएंगी। जिला स्तरीय प्रतियोगिता 4 मई को निर्देशानुसार विकासखंड स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाएगा। जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन 4 मई 2026 (सोमवार) को प्रातः 8रू00 बजे किया जाएगा। पुरस्कार एवं सम्मान की व्यवस्था प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विकासखंड एवं जिला स्तर पर प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं संकुल शैक्षिक समन्वयकों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। सफल संचालन हेतु निर्देश जारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को प्रतियोगिता का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आयोजन उपरांत पालन प्रतिवेदन एवं फोटोग्राफ 3 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस प्रतियोगिता के सफल संचालन हेतु सहायक परियोजना समन्वयक (समग्र शिक्षा) सूर्यदेव सिंह तथा जिला नोडल अधिकारी सुश्री खुशबू पी. दास को संपर्क अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता, तार्किक क्षमता एवं सीखने की रुचि को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

भोपाल में जनगणना का अपडेट: प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, 6000 से ज्यादा घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत जिले के चार लाख घरों की मैपिंग व रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा। स्व गणना के तहत अपने घर व परिवार की ऑनलाइन पोर्टल से जानकारी देने में भोपाल के नागरिक सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच दिन में 6000 से अधिक घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज हो चुकी है। इसमें तेजी आ रही है। अगले 10 दिनों में चार लाख घरों की मैपिंग होने का अनुमान है। ये कुल घरों का 70 फीसदी है। यानी एक मई से प्रगणकों को घर पहुंचने पर ज्यादा मशक्कत नहीं करना होगी। सिर्फ स्व गणना का 11 डिजिट का नंबर दर्ज करने से उन्हें स्थिति पता चल जाएगी। गौरतलब है कि एक प्रगणक को 200 घरों की मैपिंग का लक्ष्य दिया गया है। मौजूदा स्थिति में भोपाल में दस दिन में प्रगणक इस लक्ष्य का प्राप्त कर सकेंगे। जनवरी 2027 से आबादी की जातिगत गणना शुरू होगी। स्वगणना अभी 74 फीसदी अभी स्वगणना के लिए सेंसस के ऑनलाइन पोर्टल पर भोपाल अभी करीब 74 फीसदी पर है। आबादी के अनुसार स्वगणना की संख्यात्मक स्थिति देखें तो भोपाल के साथ सिर्फ मंदसौर व सागर ही बेहतर कर रहे हैं। इंदौर जैसे बड़े शहर भोपाल से काफी पीछे हैं। भोपाल में वेब पोर्टल पर प्रति 90 सेकंड में एक फार्म सबमिट हो रहा है। ये संख्या शुरुआत में डेढ़ मिनट थी। अफसरों के अनुसार अगले दो दिन में ये 20 से 22 सेकंड तक पहुंचेगी तो फार्म बढ़ेंगे। बता दें कि जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जनगणना कार्य को तय समयसीमा में पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। 32 फीसदी आवास शेड वाले स्वगणना के तहत जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें जिले में 32 फीसदी आवास शेड व कच्चे सामने आ रहे हैं। यानि यहां पर आगामी समय में मकानों को लेकर बड़ा काम होगा। आवासीय उपयोग के इंफास्ट्रक्चर की बड़ी संभावना है। सरकारी स्तर पर भी आवास की बड़ी योजनाएं हैं। जर्जर व पुराने घरों को लेकर भी बड़ा आंकड़ा सामने आ रहा है। रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है… मकान सूचीकरण की गणना में रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है। हालांकि बदलते समय के साथ इसके लिए दिए ऑप्शन में स्मार्टफोन से एमपी रेडियो चलाने का विकल्प है। आप इसे सबमिट कर सकते हैं। स्वगणना का फार्म भरने की तकनीकी दिक्कतें खत्म हो गई है। घर की जियो टैगिंग के साथ आसानी से फार्म जमा हो रहे हैं। लोगों में काफी उत्साह है। भुवन गुप्ता, उप जिला जनगणना अधिकारी

लू से बचाव के लिए नया टाइम टेबल: दोपहर में बंद रहेंगी राशन दुकानें, सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक खुलेंगी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए सरकारी राशन दुकानों के संचालन के समय में बदलाव किया गया है। अब हितग्राहियों को राहत देने के लिए खाद्यान्न वितरण सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक किया जाएगा। नए आदेश के अनुसार दोपहर की तेज गर्मी को ध्यान में रखते हुए राशन दुकानें दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक बंद रहेंगी। इसके अलावा निर्धारित छुट्टियों के दिनों में दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। पहले राशन दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित हो रही थीं, जिससे तेज धूप में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। समय में बदलाव से अब लोगों को सुबह और शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में राशन लेने की सुविधा मिल सकेगी। सरकार के इस फैसले से खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और मजदूर वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने सभी उचित मूल्य दुकानों को नए समय का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। हितग्राहियों को मिलेगी राहत रायपुर खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि, गर्मी में हितग्राहियों को राहत देने के लिए यह आदेश जारी किया है। छुट्टियों के दिन भी खुलेंगी दुकानें इस आदेश के साथ विभाग ने अब छुट्टियों के दिन सोमवार एवं रविवार को भी दुकानें खोलने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब कोई भी दुकानदार रविवार और सोमवार को दुकान बंद नहीं करेगा। किसी कारणवश अगर बंद करना है, तो इसके लिए विभाग से अनुमति लेनी होगी। 10 से शाम 5 बजे तक खुल रही थीं दुकानें अभी तक उचित मूल्य की दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुल रही थीं, लेकिन जिस तरह से भीषण गर्मी पड़ रही है, इसे देखते हुए कलेक्टर गौरव सिंह के निर्देश पर खाद्य विभाग ने सभी दुकानों के खुलने के समय में बदलाव किया है, ताकि लोगों को दोपहर में चिलचिलाती धूप एवं गरम हवा से राहत मिल सके। इस आदेश के तहत अब सभी दुकानें सुबह 7 बजे खुलेंगी और रात 9 बजे बंद होंगी। हालांकि दोपहर में 2 घंटे दुकानदारों को दुकानें बंद रखने की छूट दी गई है। गर्मी को देखते हुए लिया गया फैसला खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बढ़ती गर्मी और लू के प्रभाव को देखते हुए राशन दुकानों के समय में विस्तार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि लोग सुबह या शाम के समय आसानी से राशन प्राप्त कर सकें और दोपहर की तेज धूप से बचें। दोपहर में 1 से 3 बजे तक बंद रखने की छूट आदेश के अनुसार दुकानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक आवश्यकतानुसार बंद रखा जा सकता है। यह निर्णय दुकानदारों और कर्मचारियों को भी गर्मी से राहत देने के लिए लिया गया है।

योगी सरकार के तहत बेसिक शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक बदलाव

योगी सरकार में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, नामांकन से लेकर गुणवत्ता तक ऐतिहासिक सुधार  स्कूल चलो अभियान से लाखों बच्चों की वापसी, सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा  ऑपरेशन कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और DBT योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था हुई मजबूत  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने व्यापक और ठोस बदलाव दर्ज किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम के रूप में सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन इसका प्रमाण है। इस वर्ष अप्रैल माह से गतिशील इस अभियान के अंतर्गत 20 अप्रैल तक, यानी मात्र 20 दिनों में ही 8 लाख 79 हजार से अधिक नए बच्चों का नामांकन दर्ज किया जा चुका है, जो परिषदीय शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। योगी सरकार ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा है। अवस्थापना के स्तर पर 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प से जोड़ा गया। 2017-18 में मात्र 36 प्रतिशत स्कूल ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त थे, जो अब बढ़कर 96.30 प्रतिशत हो गए हैं। 75 जनपदों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। तकनीक, प्रशिक्षण और पोषण योजनाओं के साथ शिक्षा को समग्र रूप से मजबूत किया गया है। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और परिणाम अब व्यवस्थित रूप में दिख रहे हैं। नामांकन और मुख्यधारा से जुड़ाव प्रदेश में स्कूल चलो अभियान और सर्वे आधारित रणनीति ने शिक्षा से दूर बच्चों को जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को कक्षा-1 में सीधे प्रवेश दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा गया। यह प्रयास केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को धरातल पर लागू करने का उदाहरण है। लगातार बढ़ते नामांकन से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। निःशुल्क सुविधाएं और छात्र हित सरकार ने आर्थिक बाधाओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया है। प्रतिवर्ष 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 प्रति छात्र की सहायता दी जाती है। कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन उपायों से अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई। अवस्थापना विकास में बड़ा सुधार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है। 1.32 लाख से अधिक विद्यालय इस अभियान से आच्छादित हुए हैं। हर विद्यालय में डेस्क-बेंच, शौचालय, पेयजल, बिजली और कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। मॉडल विद्यालयों से नई दिशा प्रदेश में शिक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। 75 जनपदों में 150 विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और कुल बजट 4500 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हर विद्यालय में 1500 से अधिक छात्रों के अध्ययन की व्यवस्था होगी, जिससे कुल 2.25 लाख विद्यार्थी सीधे लाभान्वित होंगे। साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। यह पहल शिक्षा के मानकों को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो रही है। तकनीक आधारित शिक्षा का विस्तार शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया है। हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब स्थापित की गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनी है। वर्ष 2024-25 में 4.53 लाख शिक्षकों और शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2025-26 में 4.33 लाख शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसी क्रम में 1,32,828 परिषदीय विद्यालयों में पुस्तकालय स्थापित कर उन्हें क्रियाशील बनाया गया है। समग्र शिक्षा और पीएम योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 तक कुल 25,954 विद्यालयों को स्मार्ट क्लास से आच्छादित किया गया है। 2025-26 में 5,924 अन्य विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए। इसके साथ ही 880 ब्लॉक संसाधन केंद्रों में आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं तथा 2023-24 और 2024-25 में 5,817 विद्यालयों को आईसीटी लैब से जोड़ा गया है, जबकि 2025-26 में 8,291 विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापना की गई।  बालिका शिक्षा को मजबूती कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 746 विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 12 तक उच्चीकृत किया गया है। इनमें 87,647 बालिकाएं नामांकित हैं। स्मार्ट क्लास, ICT लैब, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों से बालिकाओं का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा, बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 29, 241 बच्चों को और 2025-26 में 25,397 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए। इसके साथ ही सहायक उपकरण, एस्कॉर्ट अलाउंस और छात्रवृत्ति DBT के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हर बच्चे को शिक्षा के दायरे में लाने का प्रयास सफल होता दिख रहा है। पीएम योजना और आरटीई के तहत अवसर पीएम योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,722 विद्यालयों को आच्छादित किया गया है, जहां स्मार्ट क्लास, ICT लैब और खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वहीं आरटीई के तहत 2024-25 में 1.65 लाख और 2025-26 … Read more

अरविंद केजरीवाल मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का बड़ा बयान: ‘गरिमा को चुनौती दी गई थी’

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली आबकारी नीति मामले से उन्हें हटाने की मांग की गई थी। एक कड़े फैसले में जस्टिस शर्मा ने अपने ऊपर लगे पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अविश्वास के बीज बोने के लिए दरवाजे नहीं खोले जा सकते। जस्टिस शर्मा ने कहा कि मुझे पता है कि मुझे कितना और क्या करना है। अगर मैं बिना सुने अलग हो जाती तो मैं अपना कर्तव्य त्याग देती। याचिकाएं न्यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने जैसा बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि जज के निष्पक्ष होने की एक धारणा होती है। जो पक्षकार जज को हटाने की मांग करता है उसे इस निष्पक्षता की धारणा को गलत साबित करना होता है। जस्टिस शर्मा ने फैसला सुनाया कि केजरीवाल और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई याचिकाएं न्यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने जैसा था। उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ने वाले ने न्यायपालिका संस्था को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। मैंने विवाद को सुलझाने का रास्ता चुना है। न्यायपालिका की ताकत उसके आरोपों पर फैसला करने के पक्के इरादे में निहित है। मैंने बिना किसी चीज से प्रभावित हुए यह आदेश लिखा है। जजों के बच्चों को वकालत करने से नहीं रोका जा सकता इस दलील के संबंध में कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और उनके द्वारा इस मामले की सुनवाई करने में हितों का टकराव होगा, जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस तरह का टकराव इस विशेष मामले में स्पष्ट रूप से दिखाया जाना चाहिए। जज शर्मा ने कहा कि अगर किसी राजनेता की पत्नी राजनेता बन सकती है, अगर किसी राजनेता के बच्चे राजनेता बन सकते हैं, तो यह कैसे कहा जा सकता है कि किसी जज के बच्चे कानून के पेशे में नहीं आ सकते? इसका मतलब होगा कि जजों के परिवार के मौलिक अधिकार छीन लिए जाएं। झूठ को कई बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता उन्होंने आगे कहा कि उनके बच्चों में से कोई भी आबकारी नीति मामले से जुड़ा हुआ नहीं है। जज ने आगे कहा कि सच अपनी ताकत सिर्फ इसलिए नहीं खो देता कि झूठ को कई बार दोहराया गया हो। इस अदालत के एक अधिकारी के तौर पर मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि झूठ, चाहे अदालत में या सोशल मीडिया पर हजार बार भी दोहराया जाए, सच नहीं बन जाता। वह झूठा ही रहता है। संस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता जज ने कहा कि सिर्फ यह कह देना कि कोर्ट से राहत नहीं मिलेगी, जज को केस से हटाने की मांग करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जज खुद को केस से हटा लेते हैं तो इससे लोगों को यह लगने लगेगा कि जज किसी खास राजनीतिक पार्टी या विचारधारा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले से स्वयं को अलग रखने के निर्णय के संविधान पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे और संस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा। न्यायालय आरोपों और इशारों से प्रभावित नहीं हो सकता जज शर्मा ने कहा कि आवेदनों में दिए गए विवरण अनुमानों पर आधारित थे। अगर मैं उन्हें स्वीकार कर लेती हूं तो यह एक चिंताजनक मिसाल कायम करेगा। मैंने अपने समक्ष सभी प्रश्नों का निडरता से निर्णय लिया है। यह न्यायालय आरोपों और इशारों से प्रभावित नहीं हो सकता। यह न्यायालय तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक ऐसा करने से संस्था की विश्वसनीयता पर ही असर पड़ेगा। यह न्याय का प्रशासन नहीं बल्कि न्याय का प्रबंधन होगा। फैसले में कहा गया है कि आवेदकों की व्यक्तिगत आशंका पूर्वाग्रह की उचित आशंका की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बर्खास्तगी की याचिका सबूतों के साथ नहीं, बल्कि संकेतों के साथ दायर की गई थी। याचिका सबूतों के साथ नहीं आई थी जज ने कहा कि अंत में मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि बर्खास्तगी की याचिका सबूतों के साथ नहीं आई थी। यह मेरे पास मेरी सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और तटस्थता पर लांछन, संकेतों और संदेहों के साथ आई थी। जज ने कहा कि गहरी चिंता की बात यह है कि मीडिया द्वारा निर्मित कथा को कार्यवाही से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जवाबदेही के बिना मानहानि के उदाहरण भी शामिल हैं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बर्खास्तगी विवेक नहीं, बल्कि कर्तव्य का त्याग और आत्मसमर्पण का कार्य होगा। सवाल जज की निष्पक्षता के बारे में था अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस मामले में बहस एक जज की निष्पक्षता और खुद संस्था के बारे में थी। जब मैंने यह फैसला लिखना शुरू किया तो कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया था। जो बचा था, वह था एक जज होने का शांत बोझ। एक ऐसा जज जिसने भारत के संविधान की शपथ ली थी। मुझे एहसास हुआ कि एक जज के तौर पर मेरी चुप्पी ही असल में कसौटी पर थी और अब सवाल जज की निष्पक्षता और खुद संस्था के बारे में था। मेरी निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल उठाए गए थे उन्होंने कहा कि केजरीवाल और अन्य लोगों की तरफ से दी गई खुद को मामले से अलग करने की अर्जियों ने उनकी निष्पक्षता और गरिमा को चुनौती दी थी। यह बात साफ थी कि मुझे खुद को इस मामले से अलग कर लेना चाहिए या नहीं। मेरी निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल उठाए गए थे। आसान रास्ता यही होता कि मैं अर्जी पर सुनवाई किए बिना ही खुद को अलग कर लेता। लेकिन मैंने अर्जी पर फैसला करने का निर्णय लिया, क्योंकि यह एक संस्था का मामला था। मैंने तय किया कि मैं इन आरोपों से प्रभावित हुए बिना ही इस पर फैसला करूंगी। केजरीवाल के तर्कों में विरोधाभास था उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि केजरीवाल द्वारा दिए गए तर्कों में विरोधाभास था। कहा कि जिस बात ने इस काम को मुश्किल बना दिया है, वह यह है कि बहस के दौरान विरोधाभासी रुख अपनाए गए हैं। उन्होंने … Read more

कैदियों को लेकर सख्त हुई हरियाणा सरकार, पैरोल-फरलो के बाद हेल्थ चेकअप जरूरी

चंडीगढ़. हरियाणा की जेलों में पैरोल अथवा फरलो से वापस लौटने वाले कैदियों की मेडिकल जांच होगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में नये निर्देश जारी किए हैं। किसी भी कैदी के जेल में प्रवेश करने या दोबारा लौटने के 24 घंटे के भीतर उसकी व्यापक चिकित्सा जांच अनिवार्य कर दी गई है। राज्य की 20 जेलों में 512 कैदी एचआइवी संक्रमित हैं। 83 कैदी टीबी से पीडि़त हैं। 352 कैदी मादक पदार्थों के सेवन के आदी मिल चुके हैं, जबकि 1263 कैदियों का अब तक नशामुक्ति उपचार किया जा चुका है। यह आंकड़े जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाते हैं। नई पहल का मुख्य उद्देश्य संक्रामक रोगों, पुरानी बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी स्थितियों से निपटने के लिए शुरुआती चरण है, ताकि समय पर उचित उपचार और रेफरल सुनिश्चित किया जा सके। नई एसओपी के तहत अब अंतरिम जमानत, पैरोल या फरलो से लौटने वाले हर कैदी का मेडिकल 24 घंटे के भीतर किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस हिरासत से वापस आने वाले, अस्पताल में भर्ती होकर लौटने वाले कैदियों और दूसरी जेलों से ट्रांसफर होकर आने वाले कैदियों का भी मेडिकल टेस्ट अनिवार्य किया गया है। नए नियमों के अनुसार मेडिकल जांच केवल सामान्य परीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शरीर के सभी प्रमुख अंगों की पूरी शारीरिक जांच की जाएगी। नई एसओपी के अनुसार नशे के सेवन या नशे की लत की जांच, रक्त और मूत्र परीक्षण, आवश्यकतानुसार छाती का एक्स-रे और तपेदिक (टीबी) की जांच जैसे व्यापक परीक्षण अनिवार्य किए गए हैं। सभी कैदियों की मेडिकल जांच के निष्कर्ष ई-जेल स्वास्थ्य माड्यूल के माध्यम से कैदी के पर्सनल मेडिकल रिकार्ड में दर्ज किए जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत सभी नए कैदियों के लिए हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआइवी जैसी प्रमुख संक्रामक बीमारियों की अनिवार्य लैब जांच होगी। जिन मामलों की पुष्टि होगी, उन्हें आगे की देखभाल और निगरानी के लिए विशेष उपचार केंद्रों में रेफर किया जाएगा। हरियाणा के जेल विभाग के महानिदेशक आलोक मित्तल के अनुसार पहले प्रवेश के समय कुछ चिकित्सा परीक्षण अनियमित रूप से किए जाते थे, लेकिन अब प्रक्रिया को व्यवस्थित और अनिवार्य बनाया गया है। इससे न केवल उपचार की दिशा तय करना आसान होगा, बल्कि ऐसे कैदियों की पहचान भी समय पर हो सकेगी जिन्हें स्वास्थ्य कारणों से अलग रखने की आवश्यकता है।

फगवाड़ा में हादसे से हड़कंप, सर्विस रिवॉल्वर से चली गोली, DSP ने गंवाई जान

फगवाड़ा. फगवाड़ा में डीएसपी योगेश कुमार की सरकारी रिवॉल्वर से ही गोली चलने से मौत हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार यह घटना सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस स्टेशन सदर फगवाड़ा के पास स्थित उनके सरकारी क्वार्टर में हुई। बताया जा रहा है कि गोली उनके सीने में लगी. जिसके बाद उन्हें तुरंत जालंधर के जोहल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूत्रों के अनुसार, डीएसपी योगेश कुमार हाल ही में एएनटीएफ पंजाब से ट्रांसफर होकर चंडीगढ़ में एजीसीएमएस, बीओआई में तैनात किए गए थे। एसपी फगवाड़ा माधवी शर्मा ने बताया कि सुबह वो अपनी सरकारी रिवॉल्वर को साफ कर रहे थे तो अचानक से गोली चल गई जोकि डीएसपी योगेश कुमार की छाती पर लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो वहां पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।