samacharsecretary.com

रायपुर: बैगा बहुल ग्रामों में महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान

रायपुर : बैगा बहुल ग्रामों में महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष अभियान स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं महिलाएं रायपुर  खैरागढ़, छुईखदान, गंडई जिले के कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के निर्देशानुसार बीते दिनों विकासखंड छुईखदान के बैगा बहुल ग्राम सरई पतेरा एवं लालपुर में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विशेष अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बैगा जनजाति की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाना एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पद्मफुलबासन यादव के मार्गदर्शन में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के महत्व एवं उससे होने वाले लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि समूह से जुड़कर वे अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं, साथ ही सामाजिक रूप से भी सशक्त बन सकती हैं। इस दौरान महिलाओं को समूह की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। अभियान में लगभग 150 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें से कई महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए संभावित सदस्यों की सूची तैयार कर आगे समूह गठन की प्रक्रिया को गति देने की पहल की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अधिकारी-कर्मचारी, डीपीएम, बीपीएम, एसी, पीआरपी, एफएलसीआरपी, सक्रिय महिलाएं, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पचमढ़ी में गर्म जलवायु में सेब के बागान, मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे स्थान पर पर्यटकों का आकर्षण

नर्मदापुरम  देश के चुनिंदा हिल स्टेशनों में शामिल पचमढ़ी विभिन्न वैरायटी के आमों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां शासकीय पोलो उद्यान ने नया प्रयोग करके सभी को हैरान कर दिया है. पचमढ़ी में जल्द ही सेब बागान आकर्षण का केंद्र होंगे. क्योंकि यहां हिमाचल प्रदेश के सेब के पौधे लगाकर उत्पादन करने का प्रयोग सफल हो गया है. दो साल पहले गर्म वातावरण में भी फल देने वाले सेब की तीन वैरायटियों के पौधे लगाए गए थे, जिनमें फल आने लगे हैं. जिसका स्वाद अगस्त-सितंबर महीने में पकने पर मिल पाएगा. इसी के साथ ही प्रदेश की दूसरी सरकारी नर्सरियों में भी सेब के पौधे लगाने की तैयारी होगी. वहीं किसानों को पचमढ़ी के उद्यान में पौधे तैयार करके लगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिससे गर्म वातावरण में पैदा होने वाले सेब किसानों की आय का जरिया बन सकें।  सभी वातावरण में मिलते हैं फल पचमढ़ी के शासकीय पोलो उद्यान में लगाए गए 500 पौधों में से 35% फलदार हो गए हैं. वहीं 40% पौधों में फूल लगे हैं, जो जल्द ही फल बनने की प्रक्रिया में पहुंच जाएंगे. दो साल पहले पोलो उद्यान की दो एकड़ जमीन पर हिमाचल प्रदेश की एचआर 99, अन्ना इजरायल और डोरसेट गोल्डन वैरायटी के पौधों का रोपण हुआ था. यह पौधे वहां की प्राइवेट नर्सरियों से लाए गए थे. जो अब चार से पांच फीट तक ऊंचाई के हो गए हैं. सेब की इन वैरियटयों का चुनाव गर्म और सर्द वातावरण में पौधों के पनपने और फल देने के कारण किया गया था. इन वैरायटी के सेब पौधों को ज्यादा ठंडे वातावरण की आवश्यकता नहीं होती है. सामान्य तापमान में भी सेबों की पैदावार होती है. पचमढ़ी के वातावरण में सेब के पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण के कारण यह फल देने लगे हैं।  सेब से मिल सकता है लाखों का मुनाफा पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर बताया, "शुरुआत के 4 साल बाद एक सेब के पौधे से 25 से 30 किलो तक फल मिल सकते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे पौधा बड़े पेड़ का रूप लेगा तब उत्पादन दोगुना हो जाएगा. एचआर 99 प्रजाति के 800 पौधे एक एकड़ में लगाए जा सकते हैं. यदि किसान 1 एकड़ में 500 पौधे लगाकर उत्पादन लेता है तो एक पौधे से 25 किलो के हिसाब से कुल 12500 किलो सेब प्राप्त कर सकता है. जिसका थोक मूल्य 4 से 5 लख रुपए तक जा सकता है।  सेब लगाने का प्रयोग हुआ सफल पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर ने बताया, "2 साल पहले पचमढ़ी में सेब के उत्पादन का प्रयोग किया गया था. जो सफल हुआ है. हिमाचल प्रदेश से जो पौधे ले गए थे आज इनमें फूल और फल दोनों लग रहे हैं. प्रदेश में पचमढ़ी का वातावरण हिमाचल के सेब पौधों के लिए उपयुक्त था, क्योंकि यहां गर्मी में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक रहता है. सर्दी में एक डिग्री तक तापमान पहुंचता है. मिश्रित वातावरण के कारण सेब का बागान लगाने का प्रयोग सफल हुआ है।  उन्होंने आगे बताया, "अगस्त में जो फल लगे हैं वह पकना शुरू होंगे. तब यह देखा जाएगा कि कितने पौधों से कितना उत्पादन हुआ. इसके बाद पौधों की संख्या बढ़ाई जाएगी और मैदानी क्षेत्र की नर्सरी और किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. किसानों को सेब के पौधे और उनका उत्पादन बढ़ाने का उन्नत प्रशिक्षण देने की भी हमारी तैयारी है. भविष्य में पचमढ़ी के साथ कई अन्य स्थानों पर भी सेब के बागान देखने को मिल सकते हैं। 

6.83 लाख महिलाओं को हर महीने मिल रही आर्थिक ताकत, डॉ. बलजीत कौर का बड़ा बयान

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य की विधवाओं और बेसहारा महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के मार्च महीने के लिए सरकार ने 102 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम जारी की है। इस बारे में जानकारी शेयर करते हुए सोशल सिक्योरिटी, महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार समाज के कमजोर तबके, खासकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह फाइनेंशियल मदद हजारों महिलाओं के लिए एक सहारा बन रही है, जिससे वे अपनी रोज़ाना की ज़रूरतें पूरी कर सकती हैं और भरोसे के साथ ज़िंदगी जी सकती हैं। मंत्री ने कहा कि अभी राज्य की 6,83,004 विधवाएं और बेसहारा महिलाएं इस स्कीम का फायदा उठा रही हैं और उन्हें हर महीने रेगुलर पेंशन दी जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए, सरकार ने हर योग्य बेनिफिशियरी को बिना किसी रुकावट के मदद मिले, यह पक्का करने के लिए 1200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट प्रोविजन किया है। उन्होंने कहा कि 58 साल से कम उम्र की विधवा और बेसहारा महिलाएं, 30 साल से ज़्यादा उम्र की अविवाहित महिलाएं और 60,000 रुपये तक की सालाना इनकम वाली महिलाएं इस स्कीम के लिए एलिजिबल हैं। मिनिस्टर ने दोहराया कि पंजाब सरकार महिलाओं के एम्पावरमेंट और वेलफेयर के लिए पूरी तरह से कमिटेड है और ऐसी स्कीम महिलाओं को इज्ज़तदार ज़िंदगी जीने में मदद कर रही हैं।

किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर कर रहा कार्य: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल. किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाना और खेती को लाभ का धंधा बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खरीफ सीजन-2026 के मद्देनजर किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी करते हुए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर तैयारी कर रहा है। किसानों के लिए समसामयिक सलाह मिट्टी परीक्षण कराएं : बोवनी से पहले खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। सभी विकासखंडों में निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाते हैं। बीज उपचार जरूरी : सोयाबीन, मूंग, उड़द व मक्का की बोवनी से पहले फफूंदनाशक व राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार करें। इससे 15-20 प्रतिशत उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। मौसम आधारित बोवनी : 4 इंच बारिश के बाद ही बोवनी करें। ‘एमपी किसान ऐप’ पर 7 दिन का मौसम पूर्वानुमान देखकर निर्णय लें। अन्न को अपनाएं : कम पानी में तैयार होने वाली कोदो, कुटकी, रागी जैसी मिलेट फसलों का रकबा बढ़ाएं। सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी। प्राकृतिक खेती : रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घन-जीवामृत व वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें। लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी। कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास मंत्री कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषि विभाग किसानों के कल्याण के लिए युद्ध-स्तर पर कार्य कर रहा है। खरीफ-2026 के लिए 28 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज, 45 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण पूरा कर लिया गया है। कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जा रही है औरकंट्रोल रूम सक्रिय हैं। ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ के तहत 75 हजार हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। 25 हजार नए खेत तालाब स्वीकृत किए गए हैं। ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से 1.5 लाख किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या 2500 की गई है। ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ में लगभग 90 लाख किसानों को सालाना 6000 रुपये की सहायता दी जा रही है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। एफपीओ के माध्यम से किसानों को प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और निर्यात से जोड़ा जा रहा है। ‘ओडीओपी’ के तहत हर जिले का विशेष उत्पाद ब्रांड किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश का किसान देश में सबसे समृद्ध हो। विभाग का हर अधिकारी-कर्मचारी खेत तक पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करेगा। किसान किसी भी समस्या के लिए कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर, ‘एमपी किसान ऐप’ या नजदीकी कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वयं अपना स्वगणना फॉर्म भरा

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जनगणना–2027 अंतर्गत स्व-गणना प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से स्व-गणना फॉर्म भरकर नागरिकों को प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि यह प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सहज है। उप मुख्यमंत्री ने समस्त नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह आधुनिक डिजिटल सुविधा नागरिकों को घर बैठे सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक तरीके से जनगणना में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है। कोई भी नागरिक पोर्टल पर लॉगिन कर कुछ आसान प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी एवं अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकता है। उप मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और जनगणना कार्य को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। सभी स्व-गणना करें और सशक्त, पारदर्शी एवं डेटा-संपन्न भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। उल्लेखनीय है कि जनगणना–2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य एक मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना हेतु पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस अवधि में नागरिक अपनी स्व-गणना समय रहते पूर्ण कर सकते हैं, जिससे आगामी प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके। इससे नागरिकों को घर, कार्यालय अथवा किसी भी स्थान से मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से सुरक्षित रूप से जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलती है। यह न केवल समय की बचत करता है, बल्कि डेटा संग्रहण को अधिक सटीक एवं प्रभावी भी बनाता है। जनगणना–2027 में पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया गया है, जो एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त एवं समावेशी प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास के लिए आवश्यक आंकड़ों का संकलन अधिक सुगमता से किया जा सकेगा। जनगणना का द्वितीय चरण, जिसमें जनसंख्या गणना की जाएगी, फरवरी 2027 में पूरे देश में संपन्न होगा। इस दृष्टि से वर्तमान स्व-गणना प्रक्रिया नागरिकों को प्रारंभिक चरण में ही जुड़ने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा, जिला प्रभारी जनगणना अधिकारी शशिकांत शुक्ला उपस्थित रहे।  

इंदौर का मेट्रो सफर सपना बनकर रह गया, सरकारी औपचारिकताएं और ‘अतिथि’ का इंतजार

इंदौर इंदौर की जनता का अपनी मेट्रो ट्रेन में सफर करने का सपना अब सरकारी औपचारिकताओं और 'अतिथि' के इंतजार में उलझकर रह गया है। गांधीनगर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो ट्रेन चलाने की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से क्लियरेंस मिलने के 23 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रेन का पहिया आम जनता के लिए नहीं घूम सका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार निर्माण कार्य और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया तो समय पर पूरी कर ली गई थी, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय न होने से शहरवासियों की उत्सुकता अब निराशा में बदल रही है। मार्च में ही अनुमति ले ली थी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बीते 26 मार्च को ही सुरक्षा आयुक्त से संचालन की अनुमति प्राप्त कर ली थी। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि पहले रामनवमी और फिर हनुमान जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को मेट्रो की सौगात मिल जाएगी, लेकिन यह दोनों ही बड़े अवसर बीत गए और स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, मेट्रो के संचालन की अंतिम मुहर अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के स्तर से लगनी है। राज्य शासन की ओर से पीएमओ को मेट्रो संचालन का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअली हरी झंडी दिखाने या फिर किसी केंद्रीय मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर भेजने की अनुमति मांगी गई है। हांलाकि सूत्रों का कहना है कि इंदौर में मेट्रो का संचालन पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के परिणाम आने के बाद ही हो पाएगा। चुनाव परिणाम के बाद ही इंदौर मेट्रो की तारीख की घोषणा की जाएगी। 4 मई के बाद ही शुरू होने की उम्मीद सांसद शंकर लालवानी ने इस मामले में कहा कि मेट्रो का संचालन कब शुरू होगा, यह शासन को तय करना है। आवासन एंव शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा इसके शुभारंभ की योजना बनाई जा रही है। लालवानी ने कहा कि वे केंद्र और राज्य स्तर पर बातचीत कर जल्द से जल्द ट्रेन शुरू कराने का प्रयास करेंगे। सूत्रों की मानें तो इंदौर मेट्रो की तारिखों की घोषणा 4 मई के बाद की जाएगी। इंदौर मेट्रो फेज-2 के स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भोरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)।  

अन्नदाता के लिए मुस्तैद पंजाब सरकार: 48 घंटे में भुगतान और सुचारू लिफ्टिंग के साथ गेहूं खरीद जारी

  पंजाब के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने टांडा की अनाज मंडी में गेहूं की खरीद व्यवस्था का निरीक्षण किया। राज्य की विभिन्न मंडियों में अब तक कुल 28 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की आवक दर्ज की जा चुकी है। विभागीय मुस्तैदी के चलते इसमें से 24 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा फसल की खरीद का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों को बिना किसी देरी के उनकी मेहनत का फल दिलाना है, जिसके लिए मंडियों में व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए हैं। किसानों को सीधा आर्थिक लाभ और पारदर्शी भुगतान कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत अब तक किसानों के बैंक खातों में 647 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। सरकार ने नियमों के अनुसार खरीद के 48 घंटों के भीतर भुगतान प्रक्रिया सुनिश्चित की है। इस कदम से किसानों को अपनी अगली फसल की तैयारी और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिल रही है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि फसल की लिफ्टिंग में तेजी लाई जाए ताकि मंडियों में अनावश्यक भीड़ जमा न हो। प्रशासनिक मुस्तैदी और बुनियादी सुविधाएं अनाज मंडी के दौरे के दौरान मंत्री ने स्थानीय अधिकारियों और खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने सुनिश्चित किया कि मंडियों में बारदाना, लेबर और परिवहन की कोई कमी न रहे। होशियारपुर जिले में 78 खरीद केंद्र सक्रिय हैं, जिनमें से 65 स्थायी और 13 अस्थायी केंद्र हैं। प्रशासन का अनुमान है कि अकेले इस जिले में 3,16,000 मीट्रिक टन गेहूं की आवक होगी। किसानों की सुविधा के लिए पीने के पानी और छाया के भी उचित प्रबंध किए गए हैं। फसल अवशेष प्रबंधन और बेमौसम बारिश की राहत सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाने के बजाय कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई मशीनरी का उपयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से प्रभावित फसलों के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार विशेष गिरदावरी (फसल निरीक्षण) शुरू कर दी गई है। फसल के नुकसान की पूरी भरपाई पंजाब सरकार द्वारा की जाएगी ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न पड़े। भविष्य की रणनीति और सरकारी प्रतिबद्धता स्थानीय विधायक जसवीर सिंह राजा गिल ने भी भरोसा दिलाया कि प्रशासन और सरकार मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि मंडी में आने वाला फसल का एक-एक दाना समय पर खरीदा जाए। खरीद केंद्रों पर किसी भी प्रकार की धांधली या अव्यवस्था को रोकने के लिए उच्चाधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। पंजाब सरकार की यह सक्रियता दिखाती है कि राज्य में कृषि और किसान कल्याण उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। आने वाले दिनों में आवक बढ़ने के साथ ही खरीद और लिफ्टिंग की गति को और तेज करने की योजना तैयार है।

8वीं पास को मिलेगा बिना ब्‍याज 10 लाख तक का लोन, सरकार की योजना से कैसे उठाएं लाभ

भोपाल  केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों की तरफ से युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं. इसी में से एक राज्‍य सरकार की ओर से भी एक योजना चलाई जा रही है, जिसका नाम मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना 2026 है. इस योजना को राजस्‍थान सरकार की ओर से शुरू किया गया है।  मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत राज्‍य के 30,000 युवाओं लोन देने का लक्ष्‍य रखा गया है. यह योजना राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा लागू की जा रही है. इस योजना के तहत युवा अपने खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना साकार कर सकते हैं।  क्‍या है ये स्‍कीम?  इस स्‍कीम की खास बात है कि इसके तहत बिना ब्‍याज के कर्ज दिया जाता है. इस योजना को जनवरी 2026 में शुरू किया गया, जो 3 मार्च 2029 तक लागू रहेगा. इस योजना के तहत सरकार का मकसद है कि रोजगार की दर का बढ़ाया जाए और कुल सालों में 1 लाख युवाओं को रोजगार दिया जाए।  कितनी मिलेगी मदद?  इस योजना के तहत ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. इसपर कोई भी ब्‍याज देना नहीं होता है, क्‍योंकि सरकार 100 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी देती है. यह लोन अमाउंट बीमा कवर भी होता है और बैंक की ओर से गारंटी भी दी जाती है।    कौन ले सकता है ये लोन?  अधिकार‍िक गाइडलाइन के अनुसार, राजस्‍थान का कोई भी स्‍थायी निवासी इस लोन को उठा सकता है. इसके लिए उम्र 18 से 45 वर्ष होनी चाहिए. कम से कम एजुकेशन 8वीं पास तो होनी ही चाहिए. साथ ही बैंक द्वारा आप डिफॉल्‍टर घोषित नहीं होने चाहिए. व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों आवेदन कर सकते हैं।  किन कामों के लिए मिलेगा ये लोन?  अगर आप खुद का बिजनेस मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में शुरू कर रहे हैं, सर्विस सेक्‍टर में या फिर अन्‍य ट्रेड सेक्‍टर में कर रहे हैं तो ही आपको लोन द‍िया जाएगा. इसका मतलब है कि आप दुकान, स्‍टार्टअप, सर्विस बिजनेस, छोटा उद्योग आदि के तहत अप्‍लाई करके लोन ले सकते हैं।  किसे कितना मिलेगा लोन अमाउंट? अगर आप 8वीं-12वीं पास हैं तो आपको ₹3.5 लाख – ₹7.5 लाख रुपये दिया जाएगा. लेकिन अगर आप ग्रेजुएट, डिप्लोमा की डिग्री ले चुके हैं तो आपको ₹5 लाख -₹10 लाख  रुपये का अमाउंट मिल सकता है।  कैसे करें अप्‍लाई?  इस योजना के तहत अप्‍लाई करने के लिए आपको पहले राजस्थान SSO पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. फिर मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का ऑप्‍शन सेलेक्‍ट करना होगा. अब फॉर्म भरें और दस्‍तावेजों को अपलोड कर दें, फिर सबमिट बटन क्लिक करें।   किन दस्‍तावेजों की जरूरत?  आवेदन करने के लिए आपके पास कुछ डॉक्‍यूमेंट होने आवश्‍यक हैं. आपके पास आधार कार्ड, जन आधार, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और एजुकेशन सर्टिफिकेट होनर जरूरी है. 

बीजेपी की महिला आरक्षण रैली आज, सीएम ने कहा- विधानसभा का विशेष सत्र होगा, कांग्रेस पर महिलाओं का हक छीनने का आरोप

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा कि लोकतंत्र एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह बेहद निंदनीय और कष्टकारी है। बता दें कि महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल मोदी सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। सीएम यादव ने आगे कहा कि द्रौपदी का चीरहरण तो हमने 5000 साल पहले का सुना था, लेकिन बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम संसद में जिस प्रकार हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी और निंदनीय है। प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी ने प्रस्तावक बनकर जो निर्णय लिया, उसमें शुरुआत से ही हर दल को सुझाव देने का अवसर दिया गया। मोदी जी ने सभी को खुला पत्र भी लिखा, ताकि कोई यह न कहे कि हमें बोलने का अवसर नहीं मिला या हमसे चर्चा नहीं की गई। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, मंत्री कृष्णा गौर, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे, विधायक अर्चना चिटनिस और मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी मौजूद रहे। विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि इस विषय पर विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस मुद्दे को जनता की अदालत में लेकर जाएगे। जन-जन तक बात को पहुंचाएंगे। सोमवार को आक्रोश रैली निकाली जाएगी। हम बहनों को उनका अधिकार दिलाकर रहेंगे और जिन्होंने गलत किया है, उनका पर्दाफाश करेंगे। आने वाले दिनों में जिलों में प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जाएंगी। हम रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह लोकतंत्र के लिए दुखद और निंदनीय है। यह महिलाओं को अधिकार देने का ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष के रवैये ने प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकार का प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस गंभीर मुद्दे को भी राजनीतिक लाभ का साधन बना लिया। उन्होंने कहा कि देश नारी शक्ति के अपमान को नहीं भूलेगा।  डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में जब यह विधेयक आया था, तब सभी दलों ने इसका समर्थन किया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने के समय विपक्ष पीछे हट गया। उन्होंने इसे अवसरवाद करार दिया।    कांग्रेस का रवैया लगातार महिलाओं के खिलाफ 2023 के बिल को लागू करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में ही स्पष्ट किया गया था कि 2029 तक महिलाओं को उनका अधिकार दिया जाएगा। इसके लिए 2029 के चुनावों में जनगणना के आधार की आवश्यकता थी, इसलिए मजबूरी में 2011 की जनगणना को आधार बनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान जनगणना के आधार पर आकलन किया जाए, तो यह प्रक्रिया 2034 के बाद ही संभव हो पाएगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया लगातार महिलाओं के खिलाफ रहा है। सीएम ने कहा कि हमारा एकमात्र राज्य हैं, जहां 17 महिला कलेक्टर हैं। दिव्यांग संभागायुक्त हैं। 10 से ज्यादा जिले ऐस है, जहां एसपी और कलेक्टर महिला है। एक संभाग ऐसा है, जहां संभागायुक्त, कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत, जनपद पंचायत सभी महिलाएं हैं।  70 साल से अधिकार की लड़ाई भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने कहा कि देश की महिलाएं पिछले 70 वर्षों से अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग लंबे समय से उठती रही, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में विपक्षी दलों ने केवल चुनावी मजबूरी में इस बिल का समर्थन किया, लेकिन अब इसके लागू होने की प्रक्रिया शुरू होते ही विरोध करने लगे।  विपक्ष की मानसिकता महिला विरोधी  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि लोकसभा में हुआ घटनाक्रम केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, खासकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों की मानसिकता महिला विरोधी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर विपक्ष का रुख उसकी वास्तविक सोच को दर्शाता है और बिल के गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है।  आज  निकलेगी नारी शक्ति वंदन यात्रा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और पार्टी अब जनता के बीच जाएगी। उन्होंने बताया कि आज सोमवार को नारी शक्ति वंदन पदयात्रा निकाली जाएगी और पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन होगा। सभी जिलों में प्रदर्शन किए जाएंगे। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और निंदा प्रस्ताव भी लाया जाएगा। सीएम ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है, जिसका पर्दाफाश जनता के बीच किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह अभियान प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हो चुका है और अब हर स्तर पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा, सरकार इस मुद्दे पर रुकने वाली नहीं है। चुनाव में समय है, तो विपक्ष विरोध कर रहा सीएम ने कहा कि 2023 में जिस अधिनियम को सभी ने पास किया था और समर्थन दिया था, उसी मामले में अब विपक्ष पलट गया। जब चुनाव नजदीक थे तो समर्थन किया, लेकिन अब जबकि चुनाव में समय है, तो विरोध कर रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मानसिकता लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि अलगाववादी नजर आती है और मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। सीएम ने कहा कि आज जब बहनों को अधिकार देने की बात आई, तो विपक्ष ने किंतु-परंतु लगाकर उन्हें अपमानित करने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले भी तीन तलाक जैसे मुद्दों पर गलत निर्णय लिए और महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की। उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह खड़ा किया जा रहा सीएम ने कहा कि 1971 में देश की आबादी 55-54 करोड़ थी और आज 140 करोड़ से ज्यादा हो गई है, तो उसी अनुपात में सीटें भी बढ़नी चाहिए। गृहमंत्री ने इस विषय पर हर सवाल का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह … Read more

29 अप्रैल को पीएम मोदी गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करेंगे, यूपी की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया गति

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 29 अप्रैल को जनपद हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। यह अवसर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिसका सीधा लाभ करोड़ों लोगों को मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है, गंगा एक्सप्रेसवे उसी का एक सशक्त उदाहरण है। वर्ष 2020 में मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया गया और रिकॉर्ड समय में इसे साकार करने की दिशा में कार्य हुआ। यह एक्सप्रेसवे “नए उत्तर प्रदेश” के निर्माण का मजबूत आधार बन रहा है। पश्चिम से पूर्व तक मजबूत कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 594 किलोमीटर है, जो मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव के पास समाप्त होगा। यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ते हुए प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करेगा और यात्रा को तेज, सुरक्षित व सुगम बनाएगा। 12 जिलों के विकास को मिलेगी रफ्तार इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 प्रमुख जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इन जिलों के 519 गांव इस परियोजना से जुड़े हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में यूपी का दबदबा वर्तमान में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है। गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ यह हिस्सेदारी बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे यूपी देश में एक्सप्रेसवे विकास का अग्रणी राज्य बनकर और मजबूत स्थिति में आ जाएगा। निवेश, उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे नए औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होकर निवेश आकर्षित करेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। कृषि और व्यापार को मिलेगा सीधा फायदा प्रदेश के किसानों के लिए यह परियोजना वरदान साबित होगी। अब कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे उनकी गुणवत्ता और कीमत बेहतर होगी। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन मजबूत होने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई गति गंगा एक्सप्रेसवे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। प्रयागराज सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से “एक्सप्रेसवे प्रदेश” के रूप में उभर रहा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा दे रहे हैं। आर्थिक विकास की नई धुरी बनेगा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला इंजन है, जो प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।