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पंजाब में रेल रोको आंदोलन तीन दिन के लिए स्थगित, किसान यूनियनों का अहम फैसला

चंडीगढ़  पंजाब की मंडियों में गेहूं खरीद शुरू न होने से नाराज किसानों ने आज रेल रोको आंदोलन का एलान किया था। अब इसे तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि यह फैसला रणनीति के तहत लिया गया है।  पंधेर ने सरकार के रवैए पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के बजाय टालमटोल की नीति अपना रही है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो किसान फिर से आंदोलन को तेज करेंगे। पंधेर ने स्पष्ट किया कि किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो ‘रेल रोको’ आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से फसल पहले ही प्रभावित है लेकिन सरकार खरीद को लेकर गंभीर नहीं दिख रही। मंडियों में गेहूं खराब हो रहा है और कीमतों में कटौती की जा रही है। किसानों ने तुरंत खरीद शुरू करने बारदाने की कमी दूर करने और मंडियों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी है। 

प्रदेश भाजपा में नए बदलाव, बैठकों और दौरों के लिए सख्त समयसीमा, पार्टी करेगी टिफिन मीटिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश में बीजेपी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए पहली बार बैठकों और प्रवास के लिए सख्त टाइमलाइन तय की है। अब प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर तक हर कार्यकर्ता को महीने भर की गतिविधियों का स्पष्ट शेड्यूल मिलेगा। पहले 10 दिन: दौरे और जिला बैठकें नई कार्ययोजना के तहत प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और वरिष्ठ नेता महीने के शुरुआती 10 दिनों में मैदानी दौरों और जिला स्तरीय बैठकों पर फोकस करेंगे। इसका उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। पहला सप्ताह: मंडल स्तर पर फोकस (1–7 तारीख) महीने के पहले सप्ताह में मंडल स्तर की बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि मंडल और वार्ड स्तर तक समन्वय मजबूत हो सके। दूसरा सप्ताह: जिला स्तर की बैठकें (7–10 तारीख) दूसरे चरण में जिला मुख्यालयों पर बैठकें होंगी। संभाग प्रभारी, जिला प्रभारी और जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में योजनाओं की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी। तीसरा सप्ताह: प्रदेश बैठकें और प्रवास (11–20 तारीख) महीने के मध्य में प्रदेश स्तरीय बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के प्रवास का आयोजन होगा। 15 से 20 तारीख के बीच महत्वपूर्ण बैठकें होंगी, जबकि मोर्चा अध्यक्ष अलग-अलग संभागों का दौरा कर जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। चौथा सप्ताह: मंडल और शक्ति केंद्र बैठकें (21–25 तारीख) इस दौरान मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी और बूथ अध्यक्षों की बैठकें होंगी। इनमें ‘मन की बात’ कार्यक्रम और बूथ स्तर की रणनीति तय की जाएगी। प्रदेश स्तरीय बैठक और वरिष्ठ नेताओं के दौरे महीने के बीच का समय अब प्रदेश स्तरीय बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के दौरे के लिए रखा गया है। हर महीने 15 से 20 तारीख के बीच प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी और जिला प्रभारी की अहम बैठकें होंगी। इसी दौरान 11 से 20 तारीख के बीच मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष अलग-अलग संभागों का दौरा करेंगे। यह तय किया गया है कि, सभी मोर्चा अध्यक्ष एक ही जगह पर न रुककर अलग-अलग इलाकों में जाकर संगठन के कामों की समीक्षा करेंगे। मन की बात कार्यक्रम महीने के चौथे हफ्ते में अब विशेष इकाइयों और शक्ति केंद्रों पर ध्यान दिया जाएगा। 21 से 25 तारीख के बीच मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी और बूथ अध्यक्षों की बैठकें होंगी। इस दौरान खास तौर पर अगले रविवार को होने वाले पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम और बूथ समिति की बैठक का एजेंडा तय किया जाएगा। ये बैठकें हर महीने दो महीने के रोटेशन के आधार पर 50% मंडलों में आयोजित की जाएंगी। अंतिम सप्ताह (23 से 30 तारीख): टिफिन बैठक महीने के अंतिम चरण में कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सामंजस्य और एकता बढ़ाने के लिए अनोखी ‘टिफिन बैठक’ का आयोजन किया जाएगा। शक्ति केंद्र टोली की बैठक के बाद 23 से 30 तारीख के बीच यह बैठक अनिवार्य रूप से होगी। इसके साथ ही, महीने के आखिरी रविवार को बूथ स्तर पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें बूथ की 11 सदस्यीय टीम के साथ स्थानीय वरिष्ठ कार्यकर्ता और प्रमुख मतदाताओं को भी शामिल किया जाएगा।

पचपदरा रिफाइनरी से बदलेगा राजस्थान का भविष्य: जोगाराम पटेल

जोधपुर कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल (Jogaram Patel) ने जोधपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत की. मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी दौरे को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि 21 अप्रैल को बालोतरा जिले के पचपदरा में होने वाला रिफाइनरी उद्घाटन राजस्थान के विकास की दिशा बदल देगा. मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि पचपदरा में बनने वाली यह रिफाइनरी सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के भविष्य को संवारने वाला मील का पत्थर साबित होगी. यह देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी में से एक होगी और इसके जुलाई तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की संभावना है. सालाना करीब 21 हजार करोड़ रुपए मिलेगा राजस्व इस रिफाइनरी से देश को करीब 21 हजार करोड़ रुपये का सालाना राजस्व मिलने की संभावना है. वहीं, राजस्थान को 4 से 5 हजार करोड़ रुपये का लाभ होगा. साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और बायो-प्रोडक्ट आधारित उद्योगों के विस्तार से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से चल रहा- पटेल जोगाराम पटेल ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनें. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़कों का बड़ा नेटवर्क, नए अस्पताल, कॉलेज, तहसील और पुलिस व्यवस्थाओं जैसे कई विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं. महिला आरक्षण बिल पर कही ये बात महिला आरक्षण बिल से पूछे गए सवाल पर मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा और भविष्य में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने पर भी विचार किया जा सकता है.  

अम्बिकापुर : प्राकृतिक आपदा में मृतकों के वारिसों को 48 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत

अम्बिकापुर अपर कलेक्टर सरगुजा द्वारा प्राकृतिक आपदा में मृतकों के वारिसों को 48 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। जिसमें तहसील बतौली के बांसाझाल निवासी प्रदीप कुजूर की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस संध्या, तहसील बतौली के शिवपुर निवासी चकलू की मृत्यु आकाशीय बिजली से होने पर उनके वारिस फुलसुंदरी, तहसील बतौली के विसुनपुर निवासी फुलकुवंर की मृत्यु सांप के काटने से होने पर उनके वारिस नईहर साय, तहसील बतौली के भटको निवासी नेहरू की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस भुली बाई, तहसील सीतापुर के केरजू निवासी आरव अग्रवाल की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस नवीन अग्रवाल, तहसील सीतापुर के गुतुरमा निवासी आंचल अचगले की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस भीमबली अचगले, तहसील सीतापुर के शिवनाथपुर निवासी संजीत कुमार की मृत्यु आकाशीय बिजली से होने पर उनके वारिस उमेश राम, तहसील सीतापुर के भंवराडांड निवासी रामपति मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस खन्नू राम, तहसील सीतापुर के देवगढ़ निवासी मयंक पैकरा की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस तिजेश्वर पैकरा, उप तहसील राजापुर के बंदना निवासी सुनीला मांझी की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस धरमसाय नाग,  उप तहसील राजापुर के कोटछाल निवासी तिहारो बाई की मृत्यु मधुमक्खी के काटने से होने पर उनके वारिस विशाल एक्का,  उप तहसील राजापुर के जामकानी निवासी जितेंन्द्र पैकरा की मृत्यु पानी में डूबने से होने पर उनके वारिस जगरमति एवं तहसील मैनपाट के कण्डराजा निवासी सरजू यादव की मृत्यु आकाशीय बिजली से होने पर उनके वारिस जगवन्ती यादव को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की है। इस राशि की मंजूरी राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 6-4 संशोधित प्रावधानों के तहत प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत दी गई है।

मानसरोवर में जमीन घोटाले का खुलासा, मुख्य आरोपी फरार

 जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर में भूमाफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. जिसमें पुलिस ने जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में सख्त कदम उठाए हैं. जयपुर के मानसरोवर थाने में दर्ज इस मामले में प्रमोद शर्मा सहित कुल 9 लोगों को नामजद किया गया है. पुलिस के अनुसार मामला बदरवास क्षेत्र की एक बेशकीमती जमीन से जुड़ा है जहां अवैध कब्जा और धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं. जमीन कब्जे और साजिश के आरोप परिवादी की शिकायत के आधार पर आरोप है कि आरोपियों ने मिलकर जमीन पर अवैध कब्जा किया और धोखाधड़ी को अंजाम दिया. एफआईआर में आपराधिक साजिश धमकी और कब्जे जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए जा रहे हैं. पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रमोद शर्मा को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था. उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए थाने बुलाया गया था लेकिन नोटिस के बाद से ही वह फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस की पहुंच से बाहर होने के बाद उनकी तलाश तेज कर दी गई है. तलाश के लिए बनाई गई विशेष टीम प्रमोद शर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने और उसे जल्द पकड़ने के प्रयास जारी हैं. कार्रवाई से पहले प्रमोद शर्मा अपने जन्मदिन कार्यक्रम को लेकर चर्चा में थे. उनके घर पर समर्थकों की भीड़ जुटी थी लेकिन बाद में उन्होंने कार्यक्रम स्थगित करने की जानकारी दी. पुलिस बोली जांच जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है. अन्य आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है और जांच के आधार पर आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सुखेर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, सरकारी जमीन कब्जे से मुक्त

उदयपुर  राजस्थान के उदयपुर शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) इन दिनों फुल एक्शन मोड में है. इसी कड़ी में प्राधिकरण की टीम ने गुरुवार को शहर के सुखेर इलाके में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. यहां नामी होटल मनसा गार्डन और रेस्टोरेंट (Hotel Mansa) द्वारा सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण पर प्राधिकरण का बुलडोजर चला है. क्या है पूरा मामला? प्राधिकरण के कमिश्नर अभिषेक खन्ना ने बताया कि सुखेर के आराजी संख्या 1526 (मीन) में प्राधिकरण का एक अनुमोदित प्लान (Approved Plan) है. इस प्लान के तहत कुछ जमीन रिजर्व रखी गई थी. लेकिन होटल मनसा गार्डन और रेस्टोरेंट ने नियमों को ताक पर रखकर इस रिजर्व भूमि पर कब्जा कर लिया और वहां निर्माण खड़ा कर दिया. नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं सिर्फ प्राधिकरण ही नहीं, बल्कि उस इलाके के रहने वाले लोग भी इस अवैध कब्जे से परेशान थे. कॉलोनीवासियों ने कई बार प्राधिकरण में इसकी शिकायत की थी. इसी के चलते प्राधिकरण ने होटल को धारा 70 के तहत नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. हालांकि, होटल मालिक के पास कब्जे को सही ठहराने के लिए कोई कानूनी दस्तावेज नहीं था. जवाब संतोषजनक न होने पर कमिश्नर ने अतिक्रमण हटाने के कड़े आदेश जारी किए, जिसके बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई. मौके पर टीम ने क्या किया? आदेश मिलते ही तहसीलदार डॉ. अभिनव शर्मा के नेतृत्व में एक भारी-भरकम टीम मौके पर पहुंची. टीम में भू-अभिलेख निरीक्षक राजेश मेहता, प्रतापसिंह राणावत, दूलीचन्द शर्मा और पटवारी दीपक जोशी शामिल थे. होमगार्ड के जाब्ते के साथ पहुंची टीम ने देखते ही देखते अवैध निर्माण को ढहा दिया और सरकारी जमीन को मुक्त कराया. अतिक्रमणकारियों को खुली चेतावनी कमिश्नर अभिषेक खन्ना ने साफ कर दिया है कि यह तो बस शुरुआत है. उन्होंने कहा, 'शहर में जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे या निर्माण हुए हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. प्राधिकरण की यह मुहिम आगे भी इसी तरह जारी रहेगी.'

रायपुर : बड़े कारंली एनीकट में तटरक्षण कार्य के लिए 4.97 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा दंतेवाड़ा जिले के विकासखण्ड-गीदम के बड़े कारंली एनीकट में तटरक्षण कार्य हेतु 4 करोड़ 97 लाख 65 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना से बांयी तट में 330 मीटर एवं दायीं तट में 250 मीटर कुल 580 मीटर में तटरक्षण कार्य किया जाएगा। एनीकट तटरक्षण को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

NOON कंपनी ने UAE में राइडर्स की भर्ती की घोषणा, हर महीने 1 लाख तक कमाई का अवसर

जालंधर/फरीदकोट  खाड़ी देशों (UAE) में करियर बनाने का सपना देख रहे भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। दुनिया की प्रसिद्ध ई-कॉमर्स और डिलीवरी कंपनी ‘नून’ (Noon) बड़े स्तर पर डिलीवरी राइडर्स की भर्ती कर रही है। बता दें कि ‘नून’ मशहूर ‘एमार ग्रुप’ (Emaar Group) का हिस्सा है, जिसने दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा का निर्माण किया है। ​लाखों में कमाई और बेहतरीन सुविधाएं ​कंपनी की ओर से चुने गए उम्मीदवारों को न केवल बेहतर वेतन, बल्कि अन्य आकर्षक सुविधाएं भी दी जा रही हैं:     ​सैलरी: 2500 दिरहाम बेसिक सैलरी।     ​कुल कमाई: कमीशन और टिप्स मिलाकर एक राइडर हर महीने 3500 से 5000 दिरहाम तक कमा सकता है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹75,000 से ₹1,00,000 तक होती है।     ​अतिरिक्त लाभ: जब तक कैंडिडेट को दुबई का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल जाता, तब तक कंपनी फ्री रहने, खाने और काम करने की सुविधा प्रदान करेगी। ​भर्ती के लिए क्या है योग्यता? ​इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कंपनी ने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:     ​आयु: 20 से 40 वर्ष के बीच।     ​शिक्षा: कम से कम 10वीं पास होना अनिवार्य।     ​अनिवार्य दस्तावेज: कैंडिडेट के पास वैध भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। ​इंटरव्यू का समय और स्थान ​भारत सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंसी ‘श्रमण ओवरसीज’ (Shraman Overseas) इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को संचालित कर रही है। इच्छुक उम्मीदवारों के लिए क्लाइंट इंटरव्यू की तारीखें इस प्रकार हैं:     ​23 अप्रैल: जालंधर     ​24 अप्रैल: फरीदकोट ​कैसे करें आवेदन? ​रजिस्ट्रेशन और अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार सीधे ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं:         ​पता: 243, मोनिका टावर, मिलाप चौक, जालंधर।         ​हेल्पलाइन नंबर: +91 77079-30303, +91 98883-47348, +91 93177-70773     ​नोट: विदेश में नौकरी के लिए आवेदन करते समय सभी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच स्वयं जरूर कर लें।  

2200 करोड़ की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची टीम पर विरोध, कार्रवाई रुकी

जयपुर जयपुर में को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हालात बिगड़ गए, जब हाउसिंग बोर्ड की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. मामला बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कब्जा लेने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा था. उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने की शुरुआत की. इस दौरान बाउंड्री वॉल और अस्थायी ढांचों को तोड़ा जाने लगा. तभी प्रशासन की टीम को मौके पर विरोध झेलना पड़ा. महिलाओं ने जेसीबी पर फेंके पत्थर कार्रवाई शुरू होते ही वहां रह रहे लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ महिलाओं द्वारा जेसीबी पर पत्थर फेंके जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी. भू-माफियाओं ने किया घोटाला! बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में किया था और 1991 में इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं लिया जा सका. इसी बीच कथित तौर पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. सूत्रों के अनुसार, पुराने दस्तावेजों के सहारे जमीन का सौदा दिखाकर कई लोगों को कम दामों में भूखंड आवंटित किए गए. साल 2019 में कॉलोनी के नियमितीकरण का मामला उठा. तब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच एसीबी को सौंप दी गई थी. फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और स्थानीय विरोध के बीच यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

सियासी समीकरणों में बदलाव, बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में असंतोष

पटना  कहते हैं कि राजनीति में नेता भले ही अपने वोट बैंक के भरोसे रहें, लेकिन उनकी एक गलती बना-बनाया वोट बैंक न सिर्फ बिगाड़ सकती है बल्कि भड़का भी सकती है। सोशल मीडिया पर इन दिनों जिस तरह की चर्चा चल रही है, उसको देख कर बीजेपी के मामले में भी ऐसा ही लग रहा है। एक तरफ विजय कुमार सिन्हा का त्याग-तपस्या-बलिदान वाला बयान और दूसरी तरफ श्रेयसी सिंह की चुप्पी। उधर नीतीश ने इसी बहाने अपनी तरफ से मरहम लगा दिया। समझिए कैसे। बिहार में बीजेपी से कोर वोटर हुए नाराज बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने में भूमिहार ब्राह्मणों का बड़ा हाथ माना जाता रहा है। 2005 में जब ये वोटर लालू प्रसाद यादव के चलते कांग्रेस से बिदके थे, तो उन्होंने अपना सारा समर्थन बीजेपी की झोली में डाल दिया। पटना का बिक्रम विधानसभा क्षेत्र हो या फिर बेगूसराय में 2015 को छोड़ बाकी विधानसभा चुनाव। भूमिहार ब्राह्मण और ब्राह्मण बिरादरी बहुल क्षेत्रों में लोगों ने बीजेपी को हाथों-हाथ लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस को फिर से इसी समाज का समर्थन मिला और उसने वापसी भी की। लेकिन अब यही समाज बीजेपी से फिर से नाराज है। और तो और बीजेपी के कुछ चुनिंदा 'राय' यानी यादव वोटर भी नाराज दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिख रही नाराजगी सोशल मीडिया साइट्स पर आप जाएंगे तो आपको कई ऐसे पोस्ट मिलेंगे, जिसमें खुल कर बिहार बीजेपी को कोसा जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि बीजेपी को जब सरकार बनाने का मौका मिला तो अपने उन कोर वोटरों को ही भूल गई, जिसने उन्हें सत्ता के इस मुकाम तक पहुंचाया। अपनी पार्टी के किसी नेता को छोड़ बाहर से आए चेहरे पर भरोसा किया गया। ऐसे में कोर वोटरों को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनाए जाने से ज्यादा ऐतराज अपनी अनदेखी का है। वहीं जिस तरह से सियासी हवा में श्रेयसी सिंह का नाम तैरा, उसके बाद राजपूत वोटरों के एक तबके में भी नाराजगी दिख रही है। इन सबका असर भी देखने को मिला। बिहार में पहली बार बीजेपी सत्ता की ड्राइविंग सीट पर है, लेकिन इसकी खुशी बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ताओं में ही नहीं दिख रही है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि एक बार पटना बीजेपी ऑफिस घूम आइए, आपको सहज अंदाजा मिल जाएगा।     2005 में बीजेपी को नीतीश के जरिए सत्ता में लाने में सवर्ण वोटरों की बड़ी भूमिका     सवर्ण वोटरों ने बीजेपी को एकजुट होकर एकमुश्त वोट दिया था और देते रहे     लेकिन अब नए समीकरण गढ़ने पर बीजेपी को यही वोटर सुना रहे     नाराजगी सम्राट चौधरी को सीएम बनाने से नहीं बल्कि अपनी अनदेखी होने से नीतीश ने इसी मौके का उठाया फायदा पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की गद्दी तो छोड़ दी लेकिन जाते-जाते उन्होंने जातीय समीकरणों की ऐसी गोटी फिट की, जो भले ही सरकार को बनाए रखने में नींव का काम करे। लेकिन बीजेपी के लिए मुसीबत ही बनेगी। नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनवाकर बीजेपी के कोर वोटरों के दिल पर मरहम लगा दिया। बात ये रही कि कुर्मी जाति से किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली, तो जदयू में निशांत के नाम और राजनीति में आने के बाद संतुष्टि है, नाराजगी नहीं। अब क्या करेगी बीजेपी? ये फैसला कोई नहीं कर सकता कि बीजेपी क्या करेगी? ये पूरी तरह से उसका अंदरुनी मसला है, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद जिस तरह से विजय कुमार सिन्हा ने त्याग-तपस्या-बलिदान और कमांडर वाली बात की, उससे उन्होंने काफी हद तक बीजेपी में भूमिहार वोटरों की सहानुभूति अपनी ओर खींच ली। ऐसे में अब बिहार बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि वो अपने कोर वोटरों को मनाए कैसे, क्योंकि ये वोटर ऐसी जमात है जो नाराज होने पर शिफ्ट होने में देर नहीं करते। अब बीजेपी इन्हें फिर से कैसे पाले में लाती है, जाहिर है इसके लिए उसके थिंक टैंक में मंथन जरूर हो रहा होगा।