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नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर की झलक, 21 साल में 10 बार बने सीएम, 6 बार इस्तीफा दिया

 पटना नीतीश कुमार मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और गुरुवार को यानी 15 अप्रैल को बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बन जाएगी. 2025 विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से अधिक बहुमत से जीते NDA की सरकार बने अभी 5 महीने ही हुए थे कि एक बार फिर सरकार बनने की कवायद की जा रही है. इसके साथ बिहार में नीतीश कुमार के युग का अंत माना जा रहा है।  भारतीय राजनीति में नीतीश कुमार का सियासी सफर मील की पत्थर की तरह है, दो दशक से बिहार की राजनीति उनके इर्द-गिर्द सिमटी हुई है. पिछले चार साल से हर साल नीतीश कुमार शपथ ले रहे हैं।  साल 2005 में पहली बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, उसके बाद से चार बार चुनाव हुए हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. ये अपने आपमें एक रिकॉर्ड है, लेकिन साथ ही छह बार मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने का काम भी किया है, जो किसी भारतीय राजनेता के लिए अनोखा रिकार्ड है।  चार साल में चार बार नीतीश ने ली शपथ नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है, उससे पहले नंवबर 2025 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके अलावा 2024 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने विपक्षी इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से हाथ मिला लिया था।  जनवरी 2024 में नीतीश ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इससे पहले उन्होंने 2022 में उन्होंने बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए से गठबंधन तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. इस तरह चार साल में चार बार शपथ लेने का रिकार्ड है, जिसमें तीन बार सीएम और एक बार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने का काम किया।   10 बार सीएम बने और 6 बार इस्तीफा नीतीश कुमार साल 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के चलते एक सप्ताह के बाद ही इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद दोबारा 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अपनी सियासी जड़े ऐसी जमाई कि दो दशक तक बिहार की सत्ता उनके इर्द-गिर्द सिमटी रही है. इस तरह 10 बार सीएम पद की शपथ और 6 बार इस्तीफा देने  का यह दोहरा रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम दर्ज है. यह सिर्फ सत्ता में बने रहने का ही नहीं बल्कि ऐसा पैटर्न दिखाता है कि पद छोड़ने के बाद भी उनकी राजनीतिक समीकरण ही सत्ता में बनाए रखा।  नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च, 2000 को मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वह सरकार सिर्फ़ कुछ ही दिनों तक चल पाई. ऐसे में बहुमत साबित करने में नाकाम रहने के बाद, उन्होंने 10 मार्च, 2000 को इस्तीफ़ा दे दिया. हालांकि, इस शुरुआती असफलता से उनके राजनीतिक उभार पर कोई रोक नहीं लगी. 2005 में, वह दोबारा सत्ता में लौटे और तब से लेकर अब तक बिहार की राजनीति में एक केंद्रीय हस्ती बने हुए हैं।  2005 के बाद से सत्ता की धुरी बने नीतीश  साल 2005 के बाद से बिहार की राजनीति के नीतीश कुमार सियासी धुरी बने हुए हैं. 2005  से उनकी राजनीतिक यात्रा एक चक्र की तरह चलती रही है इस्तीफ़ा देना, नए गठबंधन बनाना और फिर सत्ता में लौटना. समय के साथ यह पैटर्न और भी साफ़ होता गया. साल 2010 में नीतीश कुमार तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, लेकिन 2013 में बीजेपी के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए।  साल 2014 में, लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन फ़रवरी 2015 में, जीतन राम मांझी को हटाकर, उन्होंने चौथी बार फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.  साल 2015 में, विधानसभा चुनावों के बाद, RJD के साथ गठबंधन करके उन्होंने पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  2017 में, 'महागठबंधन' से रिश्ते तोड़ने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया,  लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर, NDA के साथ मिलकर छठी बार मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते हुए वह दोबारा सत्ता में लौट आए. 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने 7वीं बार CM पद की शपथ ली. 2022 में, उन्होंने NDA छोड़कर और विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाते हुए फिर से इस्तीफ़ा दे दिया, और 8वीं बार CM पद की शपथ ली।  2024 में भी यही सिलसिला फिर दोहराया गया, जब उन्होंने महागठबंधन छोड़ दिया और वापस NDA में चले गए. इस तरह नीतीश कुमार 9वीं बार CM पद की शपथ ली; और आख़िरकार, 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने का काम किया. इस तरह उन्होंने एक रिकार्ड अपने नाम किया।  नीतीश कुमार के हर इस्तीफा सियासी चाल नीतीश कुमार ने अपने सियासी सफर में इस्तीफा देने का रास्ता सिर्फ  एक राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चाल भी थी. इसने नीतीश कुमार को अपने गठबंधन नए सिरे से बनाने और सत्ता में बने रहने का मौक़ा दिया. इसीलिए उनका रिकॉर्ड सिर्फ़ आंकड़ों के बारे में नहीं, बल्कि राजनीति की एक अनोखी शैली के बारे में है।  नीतीश के राजनीति में एक और अहम बात इस कहानी को एक नया पहलू देती है. नीतीश कुमार ने कभी भी अपनी पार्टी की ताक़त पर अकेले दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं किया है. उनकी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), सरकार बनाने के लिए हमेशा अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रही है. चाहे वह NDA के तहत भारतीय जनता पार्टी के साथ हो, या महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ, गठबंधन ही उनके शासन की रीढ़ रहे हैं।  नीतीश को अकेले दम बहुमत नहीं मिला नीतीश कुमार भले ही 21 साल तक बिहार की राजनीति के बेताज बादशाह रहे हों, लेकिन एक बार भी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सके. 2010 में भी, जब उनकी सरकार को बहुत मज़बूत माना जा रहा था, तब भी जीत गठबंधन की थी, न कि अकेले JD(U) की. 2010 में JD(U) ने 115 सीटें हासिल की थीं. जो पिछले 20 सालों में JD(U) … Read more

लखनऊ–कानपुर टेरर मॉड्यूल मामले में मिन्हाज समेत तीन को आजीवन कारावास

कानपुर स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई शहरों को दहलाने की साजिश रचने वाले तीन आतंकियों मिन्हाज अहमद, मुशीरुद्दीन और तौहीद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इनकी गिरफ्तारी लखनऊ से हुई थी, लेकिन बाद में यह दावा किया गया कि मिन्हाज और मुशीरुद्दीन ने कानपुर में भी आतंकी नर्सरी तैयार करने की योजना बनाई थी और इसके लिए एक बिल्डर की मदद से चमनगंज में इनके लिए ठिकाना तैयार किया जा रहा था। मिन्हाज और मुशीरुद्दीन के कानपुर कनेक्शन को लेकर कोई जांच रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन इस बार के पुख्ता सबूत बताए गए थे कि दोनों का कानपुर से गहरा नाता था। दावा था कि मिन्हाज ने बताया था कि उसने कानपुर में टेरर क्लास रूम प्लान किया था। इसके लिए जगह की जिम्मेदारी चमनगंज के एक बड़े बिल्डर को दी गई थी। उसने बताया था कि यहां नौजवानों को रेडिकलाइज करके आतंक का पाठ पढ़ाया जाना था। यह भी सामने आया था कि रहमानी मार्केट से मिन्हाज के लिए दो प्री-एक्टिवेटेड सिम और एक मोबाइल उपलब्ध कराया गया था। उस वक्त मीडिया में बिल्डर को उठाकर उनसे पूछताछ की खबर भी सामने आई थी, लेकिन उसकी कभी पुष्टि नहीं हो सकी। यह भी सामने आया था कि मिन्हाज ने चमनगंज के हिस्ट्रीशीटर से एक पिस्टल भी खरीदी थी। इसका फाइनेंसर नई सड़क का एक बिल्डर था। उस वक्त एटीएस व जांच एजेंसियों की चहलकदमी चमनगंज के अलावा पेंचबाग में भी सामने आई थीं। स्लीपर सेल की तरह किया काम जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ साल तक मिन्हाज ने स्लीपर सेल की तरह काम किया और फिर नौकरी जाने के बाद वह सक्रिय रूप से अलकायदा के साथ जुड़कर काम करने लगा। सूत्रों के मुताबिक वह इतना कट्टर हो चुका था कि वह खुद को मानव बम बनाने पर भी राजी हो गया था।  

मप्र कांग्रेस कार्यालय में बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती संपन्न

भोपाल.  आज मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) मुख्यालय में अनुसूचित जाति विभाग द्वारा संविधान निर्माता, भारत रत्न परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से मनाई गई। इस अवसर पर बाबासाहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। भाजपा केवल दिखावा करती है, हकीकत में संविधान विरोधी है: प्रदीप अहिरवार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा कि बाबासाहेब ने हमें "शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो" का जो मूलमंत्र दिया था, आज उस पर पहरा देने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करना चाहती है। आज भाजपा के नेता जो बाबासाहेब का नाम ले रहे हैं, वह केवल एक राजनीतिक पाखंड और झूठा दिखावा है। ग्वालियर मूर्ति विवाद और दलितों का अपमान प्रदीप अहिरवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकारों के संरक्षण में ही बाबासाहेब की मूर्तियों को खंडित किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बाबासाहेब की प्रतिमा लगने नहीं दी जा रही है, जिसके पीछे मनुवादी विचारधारा वाले लोगों और भाजपा से जुड़े व्यक्तियों का हाथ है। यह सीधे तौर पर बाबासाहेब का अपमान है। दलित बजट में भ्रष्टाचार का आरोप प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में दलितों के उत्थान के लिए कागजों पर तो भारी-भरकम बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन हकीकत में दलितों के लिए इनके मन में खोट है। वह पैसा दलित समाज के विकास पर खर्च होने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है और भाजपा नेताओं की जेबों में जा रहा है। सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प इस अवसर पर अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) विनय मालवीय, शहर अध्यक्ष नीरज चंडाले और प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश बंसल, कन्हैया मोरे ,शुभम इंद्रासे ,आकाश चौहान सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बाबासाहेब को नमन किया। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि कांग्रेस पार्टी बाबासाहेब के संविधान की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

हरियाणा बीजेपी ने निकाय चुनाव को लेकर बनाया ‘मिशन मोड’ प्लान

पंचकूला  हरियाणा बीजेपी के प्रदेश कार्यालय 'पंचकमल' में आज कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने की। बैठक में आगामी निकाय चुनावों की रणनीति, संगठन के आगामी कार्यक्रमों और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। निकाय चुनाव के लिए 'मिशन मोड' में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने स्पष्ट किया कि पार्टी निकाय चुनावों को लेकर पूरी तरह तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के लिए निकाय चुनाव वाले क्षेत्रों के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी 16 से 18 अप्रैल तक संबंधित निगम, परिषद और पालिकाओं का दौरा करेगी। इस बीच कमेटी स्थानीय विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए 20 अप्रैल को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है। संगठनात्मक चर्चा और विपक्षी घेराबंदी बैठक के बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि बैठक में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम', पीएम के 'मन की बात' कार्यक्रम और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के आयोजनों पर भी मंथन हुआ। पार्टी अंबेडकर जयंती को बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े उत्साह के साथ मना रही है। बैंक फ्रॉड मामला: पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड पर बड़ौली ने कहा कि सरकार को पूरा पैसा ब्याज समेत वापस मिल चुका है और विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। कैप्टन अभिमन्यु का विपक्ष पर तीखा हमला कैप्टन अभिमन्यु ने मंडियों में फसल खरीद की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले हुड्डा सरकार में किसानों को दो-दो रुपये के चेक मिलते थे और खाद के लिए थानों से पर्चियां कटवानी पड़ती थीं। आज किसानों के खातों में 24 से 48 घंटे के भीतर सीधे पैसा (DBT) पहुंच रहा है, जो पहले के समय में सपना था। कैप्टन ने कहा कि कहा कि विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है।  

ई-रिक्शा व ऑटो में जेवर चोरी करने वाला महिला गैंग पकड़ा गया

लखनऊ ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा यात्रियों को उलझाकर जेवर चोरी व टप्पेबाजी करने वाले महिला गैंग का खुलासा करते हुए कृष्णानगर पुलिस ने तीन महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से चोरी की गई सोने की चेन, एक अंगूठी और पायल बरामद की गई है। डीसीपी दक्षिणी अमित आनंद ने बताया कि कृष्णानगर इलाके में नवंबर 2025 से बीते मार्च माह के बीच टप्पेबाजी की तीन घटनाएं घटी थीं। इस मामले में कृष्णानगर पुलिस की एक टीम को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे 600 से 700 सीसीटीवी कैमरों को चेक किया और वारदात को अंजाम देने वाले गैंग का पता लगाते हुए मंगलवार को डूडा कॉलोनी आशाराम बापू मार्ग मानसनगर से दुबग्गा सीतापुर बाईपास झुग्गी झोपड़ी निवासी शेषकला, उसके पति दयालाल, पूजा और गौरी देवी को गिरफ्तार किया। शेषकला, दयालाल और पूजा मूल रूप से नागपुर के रहने वाले हैं, जबकि आरोपी गौरी देवी बिहार के आरा की निवासी है। महिला दरोगा ने सादे कपड़े में एक हफ्ते तक रेकी की एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि इस गैंग का पकड़ने में कृष्णानगर थाने पर तैनात महिला दरोगा सिद्धि मिश्रा की सबसे अहम भूमिका रही। फुटेज मिलने के बाद उन्होंने सादे कपड़े में कई दिनों में घूम-घूम कर गैंग के बारे में पता किया। इसके बाद उन्होंने गैंग के निवास स्थान की पूरी रेकी कर जानकारी जुटाई और फिर पुलिस ने इस गैंग पकड़ा। एसीपी ने बताया कि शेषकला इस गैंग की लीडर है और पहले से उनके खिलाफ बख्शी का ताला, मड़ियांव, हरदोई, नाका में चोरी के कई मामले दर्ज हैं। उल्टी करने के बहाने या पिन चुभोकर वारदात को देते थे अंजाम एसीपी ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह लोग ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा में सफर करने वाले ऐसे वृद्धों को शिकार बनाते थे जो जेवर पहने होते थे। आरोपी महिलाएं उसी वाहन में सवार तो जाते थे, जिसमें पीड़ित बैठते थे। सफर के दौरान आरोपी महिलाएं उल्टी करने या पीड़ित को सेफ्टी पिन चुभोकर उनको उलझा कर जेवर चोरी कर लेते थे। आरोपी नागपुर से ट्रेन से लखनऊ व अन्य शहरों में जाकर इलाज के नाम पर या फेरी लगाने के बहाने से भीड़भाड़ वाले इलाके में वारदात को अंजाम देते थे। बार-बार पता बदले देते थे आरोपी पूछताछ में पुलिस को इस बात का पता चला है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपी न सिर्फ अपना ठिकाना बदलते थे, बल्कि आधार कार्ड पर भी पता बदलवा लेते थे। ऐसे में इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।  

Haryana Police Update: 22 HPS अधिकारियों का IPS में प्रमोशन तय, मुख्य सचिव ने दी हरी झंडी

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस सेवा के 22 अफसरों को जल्द ही आईपीएस.में प्रमोशन का तोहफा मिल जाएगा। इसके लिए सरकार स्तर पर कवायद तेज हो गई है। इस बार प्रमोशन की डीपीसी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्यालय के बजाए चंडीगढ़ में हो सकती है। बताया गया कि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने खराब स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली की मीटिंग में शामिल नहीं होने का अनुरोध आयोग से किया था। जिस पर आयोग ने चंडीगढ़ में मीटिंग करने की अपनी सहमति दे दी है। दरअसल डीपीसी में मुख्य सचिव की मौजूदगी जरूरी होती है। सूत्रों की माने, तो इसी सप्ताह डीपीसी की बैठक हो सकती है। मीटिंग में आयोग की ओर से सचिव सहित कुछ नामित सदस्य आते हैं। जिसमें मुख्य सचिव और एसीएस होम सुधीर राजपाल मौजूद रहेंगे। IPS बनने का इन अफसरों को मौका महीनों पहले मुख्य सचिव की ओर से 22 अफसरों को इंटेग्रिटी सर्टीफिकेट जारी किए गए थे। इनमें मुकेश कुमार, ध्यान सिंह पुनिया, धर्मवीर सिंह, चलजिंद्र सिंह, जयबीर सिंह, कुशाल सिंह, राजकुमार वालिया, ताहिर हुसैन, नरेंद्र सिंह, रविंद्र कुमार, राजेश कुमार, ममता खर्ब, रविंद्र विजय सिंह, सिद्वार्थ ढांडा, करण गोयल, संदीप कुमार, पूनम, भारती डबास, अमित दहिया, ऊषा देवी और जितेंद्र गहलावत सहित शामिल हैं।

Census Training Update: अंबेडकर जयंती में शामिल होने वालों को राहत, री-ट्रेनिंग का मौका

बिलासपुर. कलेक्टर एवं जिले के प्रमुख जनगणना अधिकारी संजय अग्रवाल ने 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर जनगणना प्रशिक्षण में शामिल प्रशिक्षार्थियों को बड़ी राहत दी है. कार्यक्रम में भाग लेने के कारण अनुपस्थित रहने वालों को अनुपस्थित नहीं माना जाएगा. उनका प्रशिक्षण बाद में पूरा कर लिया जाएगा. गौरतलब है कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल होते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि 14 अप्रैल 2026 को आयोजित जनगणना प्रशिक्षण में यदि कोई प्रशिक्षार्थी अंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों में भाग लेने के कारण अनुपस्थित रहता है, तो उसे अनुपस्थित की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी प्रशिक्षार्थियों का प्रशिक्षण बाद में किसी अन्य उपयुक्त जनगणना बैच के साथ पूर्ण कराया जाएगा, ताकि उनके प्रशिक्षण और जनगणना कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो. इससे अधिकारी-कर्मचारियों को जहां राष्ट्रीय महापुरुष की जयंती में सहभागिता का अवसर मिल सकेगा वहीं शासकीय कार्य भी प्रभावित नहीं होगी.

डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के रूप में हमें दिया लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

संविधान निर्माता होने के साथ नए भारत के निर्माता भी हैं बाबा साहेब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के रूप में हमें दिया लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ नारी सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे बाबा साहेब न्यूनतम मजदूरी, कम्पनी लॉ, महिला श्रमिकों के अधिकार हैं बाबा साहेब की देन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भीम जन्मभूमि (महू) पहुंचकर बाबा साहेब को अर्पित की पुष्पांजलि महू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्मभूमि पर उनकी जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। बाबा साहेब एक ऐसे युग दृष्टा थे, जिन्होंने एक हजार साल की गुलामी की कठिनाइयों को दूर करने और समाज के अंदर समानता के भाव को विकसित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी। बाबा साहेब के योगदान से हम सभी गौरवान्वित होते हैं। हमें उनके बनाए संविधान के अनुसार ही चलना चाहिए। इससे श्रेष्ठ संविधान और कोई नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. अम्बेडकर द्वारा महिला समानता और सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों और उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने बहनों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिलाने, तलाक के समय मुआवजा और मातृत्व अवकाश दिलाने के लिए सराहनीय कार्य किया। उन्होंने हमें माताओं-बहनों के लिए 'समान काम-समान वेतन' का दूरदृष्टि पूर्ण विचार दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को इंदौर के डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) में डॉ. अम्बेडकर की जन्मभूमि परिसर में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। लोकसभा और विधानसभा में सुनिश्चित होगा 33 प्रतिशत आरक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा साहेब महिला सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए बाबा साहेब ने अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी। न्यूनतम मजदूरी, कंपनी लॉ और महिला श्रमिकों को अधिकार हमें बाबा साहेब की ही देन है। केन्द्र सरकार संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चलते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय लेने जा रही है। आने वाले दिनों में लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पूर्ण रूप से लागू करने पर चर्चा होगी, इससे माताओं-बहनों को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के कल्याण के लिए डॉ. अम्बेडकर ने जो किया, इसके लिए देश उन्हें सदैव स्मरण करता रहेगा। बाबा साहेब ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण भारत माता की आराधना करते हुए समाज को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीम जन्मभूमि पर आज होली-दीवाली जैसा माहौल है। बाबा साहेब के जीवन से जुड़े सभी 5 पड़ावों को हमारी सरकार ने पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। जातिगत असमानता को खत्म करने के लिए अंतर्जातीय विवाह करने पर नवदम्पत्तियों को हमारी सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में 2 लाख रुपए दे रही है। अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्याण के लिए सरकार ने सालाना बजट का एक तिहाई हिस्सा इन्हें समर्पित किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनिल गजभिये और डॉ. सत्यभान मेश्राम द्वारा डॉ. अम्बेडकर के जीवन पर लिखी पुस्तक 'बाबा साहेब की दृष्टि में सामाजिक न्याय' का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने डॉ. सुदीप भगतदीप, डॉ. संदेश माधवराव, स्व. निशांत कायरे, डॉ. मीना गजभिये सहित 5 समाजेसवियों को 'भीमरत्न अवॉर्ड 2026' से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद सर्वजनों को 'बाबा साहेब अमर रहे' का नारा उद्घोष कराया। महू विधायक एवं पूर्व मंत्री सुऊषा ठाकुर ने कहा कि आज बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर हम उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करें। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम सब मिलकर संकल्प लें कि जीवन में कभी हिंसा, चोरी, नशा और कोई गलत काम नहीं करेंगे। बाबा साहेब समाज में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए कटिबद्ध थे। नारी शक्ति की समानता के उनके विचारों के आधार पर देश की संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय होने जा रहा है। वरिष्ठ विचारक आलोक कुमार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर बेहद उच्च शिक्षित व्यक्तित्व थे, फिर भी उनके साथ तत्कालीन समाज में भेदभाव हुआ। जब संविधान लिखने की बारी आई, तो महात्मा गांधी जी ने पं. जवाहरलाल नेहरू को सुझाव दिया था कि संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए एक ही व्यक्ति योग्य है और वह डॉ. भीमराव अम्बेडकर ही हैं। संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन की जिम्मेदारी डॉ. अम्बेडकर को उनकी योग्यता के कारण ही मिली थी। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज को बंधुता और भाईचारा दिया। उन्होंने समानता का संकल्प किया था। भारतीय संविधान की धारा 17 में लिखा गया कि अस्पृश्यता (छुआछूत) को समाप्त किया जाता है और समाज के एक बड़े वंचित वर्ग को इस अन्याय से मुक्ति मिली थी। छुआछूत और भेदभाव भारतीय संस्कृति का कभी भी आधार नहीं रहा। हम सभी को भारत के संविधान में उल्लेखित नियमों/उपनियमों का पालन करना चाहिए। सभी को समान मानते हुए देश के विकास के लिए काम करने की आवश्यकता है। समाज के हर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से समृद्ध बनाना है। कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, स्थानीय धम्म संस्था के अध्यक्ष धम्मदीप महाथेरो एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुयायियों संग सहभोज कर दिया समरसता का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर जन्मस्थली स्मारक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए अनुयायियों के साथ सहभोज कर सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर देशभर से पधारे श्रद्धालुओं के साथ पंक्तिबद्ध बैठकर सह भोज किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर का जीवन हमें समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। इस प्रकार का सहभोज समाज में भेदभाव मिटाने और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का … Read more

एमपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं रिजल्ट का इंतजार खत्म, कुछ घंटों में मोहन यादव करेंगे घोषणा

भोपाल   माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं का रिजल्ट का इंतजार कुछ घंटों में खत्म होने जा रहा है. एमपी बोर्ड की दोनों ही परीक्षाओं का रिजल्ट 15 अप्रेल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10वीं और 12वीं का रिजल्ट एक साथ जारी करेंगे. छात्र अपना रिजल्ट एमपी बोर्ड की बेवसाइट पर भी देख सकेंगे. इसके अलावा मोबाइल ऐप पर भी रिजल्ट को देखा जा सकेगा।  मोबाइल ऐप से देख सकेंगे रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट डिजिलॉकर के जरिए भी देख सकेंगे. इसके अलावा छात्र एमपी बोर्ड की मोबाइल ऐप पर जाकर भी रिजल्ट देख सकेंगे. इसके लिए स्टूडेंट्स को गूगल प्ले स्टोर से एमपी बोर्ड का मोबाइल ऐप एमपीबीएसई या फिर एमपी मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा. इसके बाद 'नो योर रिजल्ट' पर सिलेक्ट कर अपना रोल नंबर और आवेदन क्रमांक डालना होगा. इसे डालते ही रिजल्ट सामने होगा।  16 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे एमपी बोर्ड परीक्षा में 16 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे परीक्षा में एमपी बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश में 16 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था. इसमें करीबन 9 लाख 7 हजार स्टूडेंट्स कक्षा 10वीं में बैठे थे, जबकि 7 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी. परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 3856 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे. दोनों ही परीक्षाएं फरवरी माह में शुरू हुई थीं. बारहवीं की 10 फरवरी से 7 मार्च तक परीक्षाएं चली थीं, जबकि कक्षा 10वीं की 13 फरवरी से 6 मार्च तक परीक्षा चली थीं।  रिजल्ट बेहतर आने की उम्मीद इस बार एमपी बोर्ड का रिजल्ट 2025 के मुकाबले 21 दिन पहले जारी होने जा रहा है. 2025 में 6 मई को एमपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया था. एमपी बोर्ड का रिजल्ट इस बार पिछले साल के मुकाबले कुछ बेहतर आने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, बोर्ड के रिजल्ट में उतार-चढ़ावा आता रहा है।  एमपी बोर्ड का रिजल्ट और पिछले कुछ सालों के आंकड़े     साल 2025 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 76.22 फीसदी और 12वीं का 74.48 फीसदी रहा था.     साल 2024 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 58.10 फीसदी और 12वीं का 64.49 फीसदी रहा था.     साल 2023 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 63.29 फीसदी और 12वीं का 55.28 फीसदी रहा था.     mpbse मोबाइल ऐप या mpmobile ऐप के जरिए भी रिजल्ट देखा जा सकता है। कैसे चेक करें रिजल्ट?     सबसे पहले एमपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं     होमपेज पर कक्षा 10वीं या 12वीं का रिजल्ट लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें      अब आपके सामने लॉगिन पेज खुलेगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि जैसी जानकारी भरकर लॉगिन करें      इसके बाद आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखेगा     भविष्य के लिए रिजल्ट का प्रिंटआउट जरूर निकाल लें  

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगी पदोन्नति, नई नियमावली 2026 जारी

रांची  झारखंड सरकार ने चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में कार्यरत हजारों ग्रुप ‘घ’ कर्मियों को ग्रुप ‘ग’ के पदों पर प्रोन्नति का अवसर मिलेगा. इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. यह कदम कर्मचारियों के करियर विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किन पदों पर मिलेगी प्रोन्नति नए प्रावधान के तहत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को निम्न वर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर प्रोन्नत किया जाएगा. वहीं, सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों को कनीय सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलेगा. इससे कर्मचारियों को बेहतर जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र मिलेगा. साथ ही, उनके वेतन और पद की गरिमा में भी वृद्धि होगी. सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगा चयन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से दी जाएगी. यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित होगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. कुल रिक्त पदों के 15 प्रतिशत हिस्से पर इस परीक्षा के जरिए प्रोन्नति दी जाएगी. इससे योग्य और सक्षम कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. नई नियमावली 2026 जारी कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने ‘सीमित प्रतियोगिता ऑनलाइन परीक्षा नियमावली 2026’ जारी कर दी है. इस नियमावली में प्रोन्नति से संबंधित सभी दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं. साथ ही परीक्षा के पैटर्न और प्रक्रिया की भी स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि उम्मीदवार पहले से तैयारी कर सकें. शैक्षणिक योग्यता क्या होगी प्रोन्नति के लिए अलग-अलग पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. कनीय सचिवालय सहायक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी. वहीं, समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में कनीय लिपिक के पद के लिए इंटरमीडिएट या 10+2 पास होना जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदोन्नति के बाद कर्मचारी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें. कर्मचारियों को मिलेगा करियर ग्रोथ का अवसर इस फैसले से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा. लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उत्साहवर्धक साबित होगा. इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा. पारदर्शिता और दक्षता पर जोर ऑनलाइन परीक्षा और स्पष्ट नियमावली के जरिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी. साथ ही योग्य कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो राज्य की प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करेगा.