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लुधियाना में पति की हैवानियत: पत्नी के प्राइवेट पार्ट में डाली बीयर की बोतल, बेडरूम के हिडन कैमरे में कैद हुई दरिंदगी

लुधियाना पंजाब के लुधियाना से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पति पर अपनी पत्नी के साथ कई सालों तक जबरदस्ती अवैध  संबंध बनाने का आरोप लगा है. पीड़िता ने बताया कि वह कई सालों तक इस अत्याचार को सहती रही है. लेकिन जब पति की इस दरिंदगी से परेशान हो कर उसने इसका विरोध करना शुरू किया तो पति ने उसे मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया।  महिला ने कहा कि जब भी वह घर के खर्च और बच्चों की स्कूल फीस के लिए पैसे मांगती थी, तो उसका पति उसे मजबूर करता था कि वह उसकी बात माने. इस तरह वह अपने आर्थिक जरूरतों का फायदा उठाकर लगातार शोषण करता था।  महिला ने पुलिस से क्या कहा? महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी करीब 18 साल पहले हुई थी. शुरुआती कुछ वर्षों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन वर्ष 2013 के बाद पति के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा. वह उसे जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने लगा और विरोध करने पर शारीरिक हिंसा करता था. पीड़िता ने समाज और अपने दो बेटों के भविष्य को देखते हुए लंबे समय तक यह सब सहन किया, लेकिन अत्याचार लगातार बढ़ते ही गए।  पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति उसकी मजबूरी का फायदा उठाता था. जब भी वह घर के खर्च या बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे मांगती, तो आरोपी अपनी घिनौनी शर्तें सामने रखता. इनकार करने पर उसे बेरहमी से पीटा जाता था. हालात इतने बिगड़ गए कि 6 अप्रैल की रात को आरोपी ने नशे की हालत में अपनी पत्नी के साथ बर्बरता की हद पार कर दी. उसने मारपीट करने के साथ-साथ महिला के निजी अंगों में बीयर की बोतल डाल दी. दर्द से तड़पती महिला की चीखें भी उसे नहीं रोक सकीं।  महिला ने जुटाए सबूत लंबे समय से जारी इस अत्याचार से तंग आकर महिला ने साहस दिखाया और सबूत जुटाने का फैसला किया. उसने अपने कमरे में पर्दे के पीछे मोबाइल कैमरा छिपाकर पति की करतूतों को रिकॉर्ड कर लिया. यह कदम उसके लिए निर्णायक साबित हुआ. अगले दिन, जब आरोपी ने उसे घर से बाहर निकाल दिया तो वह घायल अवस्था में अपने मायके पहुंची. वहां से अस्पताल में इलाज कराने के बाद उसने थाना दुगरी में शिकायत दर्ज कराई।  पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की और आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया. उसे अदालत में पेश कर दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है. साथ ही, पीड़िता की मेडिकल जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. यह मामला समाज में घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।  विरोध करने पर बढ़ी क्रूरता पीड़िता के मुताबिक, पति ने हैवानियत की सारी हदें तब पार कर दीं, जब उसने अपनी पत्नी के प्राइवेट पार्ट में बीयर की खाली बोतल डाल दी. पति ने बोतल को लगभग एक मिनट तक उसके प्राइवेट पार्ट में डाले रखा. पत्नी चीखती रही लेकिन बेरहम आदमी को बिल्कुल तरस नहीं आया।  आखिरकार जब महिला यह सब सहन नहीं कर पाई, तो उसने इसके खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया. इसके बाद आरोपी पति ने उसे बुरी तरह पीटा और घर से बाहर निकाल दिया. जख्मी हालत में महिला अपने छोटे बेटे के साथ अपने माता-पिता के घर गई, जहां उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।  पुलिस में दर्ज कराई शिकायत  इस घटना के बाद पीड़िता ने दुगरी पुलिस स्टेशन में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हमला और बलात्कार की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।  महिला ने पुलिस को बताया कि उसके पास पति द्वारा किए गए अत्याचारों के कुछ वीडियो भी हैं, जिन्हें वह सबूत के तौर पर जमा कराएगी जिससे उसके पति की हरकतों का पर्दाफाश होगा।  शादी के बाद से ही जारी था अत्याचार पीड़िता ने पुलिस को अपनी शिकायत में कहा कि उसकी शादी साल 2008 में हुई थी और शादी के पहले दिन से ही उसका पति उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान कर रहा था. उसने यह भी आरोप लगाया कि साल 2013 से पति उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ अवैध सबंध बनाता रहा. जब वह इनकार करती थी तो वह उसे पीटता था. पीड़िता बार-बार मना करती रही लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। 

बच्चों के नाम बदलने की पहल, शिक्षा विभाग ने तैयार की 3000 नामों की लिस्ट

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें अपने अजीबोगरीब नाम या सरनेम की वजह से अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर शिक्षा विभाग ने 'सार्थक नाम अभियान' की पूरी तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास का आधार होता है. इसी सोच के साथ अब उन बच्चों के नाम और उपनाम बदले जाएंगे जो सुनने में नकारात्मक या अर्थहीन लगते हैं. विभाग ने तैयार की 3 हजार 'सार्थक' नामों की लिस्ट इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3000 सार्थक और गौरवपूर्ण नामों की एक आधिकारिक लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में बालिकाओं के लिए 1529 और बालकों के लिए 1409 बेहतरीन नाम शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि ये नाम बच्चों की राशि और उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और विश्वास के अनुसार सही नाम का चुनाव कर सकें. शिक्षा मंत्री का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में बच्चों के नाम 'कजोड़मल', 'शेरू' या 'घीसा' जैसे रख दिए जाते हैं, जिससे बड़े होने पर उन्हें समाज में अजीब लगता है. विभाग अब इन नामों की जगह सम्मानजनक विकल्प दे रहा है. इस अभियान का एक अहम पहलू बच्चों के सरनेम में बदलाव करना भी है. सरकार ने उन उपनामों को बदलने का सुझाव दिया है जो आज के दौर में गरिमापूर्ण नहीं माने जाते. शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन पुराने उपनामों की जगह 'वाल्मीकि' या अन्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. इससे न केवल बच्चों की सामाजिक छवि बेहतर होगी, बल्कि उनमें जातिगत हीन भावना को खत्म करने में भी मदद मिलेगी. शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. चयन के लिए पेरेंट्स की लिखित सहमति जरूरी स्कूलों में होने वाली एसएमसी (SMC) और पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान शिक्षक उन बच्चों की पहचान करेंगे जिनके नाम सुधारने की जरूरत है. इसके बाद विभाग द्वारा सुझाई गई लिस्ट अभिभावकों को दिखाई जाएगी. यदि माता-पिता अपने बच्चे का नाम या सरनेम बदलने के लिए तैयार होते हैं, तो उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही सरकारी दस्तावेजों, शाला दर्पण पोर्टल और यूडीआईएसई प्लस पर नाम बदला जाएगा. यह प्रक्रिया फिलहाल कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए ही लागू की गई है. विरोध के स्वर: नाम जरूरी या सुविधाओं में सुधार? जहां सरकार इसे बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों ने इसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त अभिभावक संघ और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को बच्चों के नाम बदलने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने, स्कूलों के जर्जर ढांचे को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका तर्क है कि नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि शिक्षा का असली सुधार धरातल पर सुविधाओं को बढ़ाने से होगा.

Housing Scheme Update: 13 करोड़ की पहली किश्त जारी, हजारों गरीब परिवारों को मिलेगा लाभ

पंचकूला. हरियाणा के विभिन्न शहरों में 2646 गरीब परिवारों को जल्द ही प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) 2.0 के तहत मकान मिलेंगे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (एसएलएसएमसी) की बैठक में 51 शहरी स्थानीय निकायों के 2409 लाभार्थियों की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसी दौरान नौ अन्य शहरी स्थानीय निकायों में 237 अतिरिक्त लाभार्थियों की परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इस प्रकार कुल 60 शहरी स्थानीय निकायों में गरीब परिवारों के लिए आवासीय परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। सभी के लिए आवास विभाग के आयुक्त एवं सचिव मोहम्मद शाइन ने बताया कि केंद्र सरकार के यूनिफाइड वेब पोर्टल के माध्यम से अब तक एक लाख 69 हजार 483 आवेदकों ने आवास मांगे हैं। इनमें से 97 हजार 584 आवेदन बेनिफिशियरी लेड कंस्ट्रक्शन (बीएलसी) श्रेणी में हैं, जबकि 71 हजार 899 आवेदन अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) श्रेणी में हैं। 46902 आवेदनों का हुआ सत्यापन बीएलसी श्रेणी के अंतर्गत अब तक 46 हजार 902 आवेदनों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 17 हजार 465 आवेदन स्वीकृत और 29 हजार 437 आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 12 हजार 552 मकानों की जियो टैगिंग भी की जा चुकी है, जो लाभार्थियों को केंद्रीय सहायता जारी करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 17 हजार 430 लाभार्थियों की आवास परियोजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। यह मंजूरी पिछले साल 20 मार्च और 15 अक्टूबर को बैठकों में दी गई। केंद्र सरकार द्वारा 2174 मकानों के लिए केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त के रूप में 13 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। पीएमएवाई यू 2.0 के तहत मिलेंगे ढाई लाख रुपये पीएमएवाई-यू 2.0 के बीएलसी घटक के तहत पात्र लाभार्थियों को पक्का मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये दिए जाते हैं, जिसमें डेढ़ लाख केंद्र सरकार और एक लाख राज्य सरकार देती है। मकान का न्यूनतम कार्पेट एरिया 30 वर्ग मीटर तथा अधिकतम 45 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों और तीन शहरी विकास प्राधिकरणों में 32 सिटी लेवल टेक्निकल सेल क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव है।

Punjab Crime: इंस्टाग्राम वीडियो ने खोली ‘चिट्टे’ नेटवर्क की पोल, लुधियाना में हड़कंप

लुधियाना. लुधियाना के मॉडल टाउन स्थित मनहोर नगर मंडी एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां कथित तौर पर ‘चिट्टे’ (नशे) के कारोबार का मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद गरमा गया है। इंस्टाग्राम पर परमिंदर काका द्वारा सांझा की गई वीडियो तेजी से फैल रही है, जिसमें इलाके में खुलेआम नशे के व्यापार के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि इस इलाके में लंबे समय से नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, इलाके में तस्करों के हौसले बुलंद हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि पुलिस रेड से पहले  ही आरोपी मौके से सारा सामान हटा कर फरार हो जाते हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी पुलिस ने मनहोर नगर मंडी में छापेमारी की थी, लेकिन मौके से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। परमिंदर काका ने अपनी वायरल वीडियो के माध्यम से पुलिस कमिश्नर (CP) से अपील करते हुए कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने मांग की है कि न केवल नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे का यह काला कारोबार इलाके के युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। अभिभावकों में डर का माहौल है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या सच में इस नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाता है या नहीं।

Korba News: हसदेव नदी प्रदूषण मामले में HTPP पर 18 करोड़ का जुर्माना

कोरबा. एक तरफ हसदेव नदी को संरक्षित करने प्रयास किए जा रहे हैं, दूसरी ओर एचटीपीपी प्रबंधन नदी के पानी में राखड़ घोल कर प्रदूषण फैला रहा है. बार बार की जा रही लापरवाही पर जल संसाधन विभाग ने संयंत्र पर 18 करोड़ से अधिक का जुर्माना जिले के अन्य औद्योगिक संयंत्रों के संचालन में समस्या खड़ी हो रही थी. निगम के जल शोधन में भी परेशानी हो रही थी. जिस पर जल संसाधन विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है. हसदेव नदी के जल प्रदूषण को लेकर जल संसाधन विभाग ने सख्त रूख अपनाया है. छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के दर्री स्थित एचटीपीपी पर यह जुर्माना ठोका गया है. बताया जा रहा है कि एचटीपीपी की इस लापरवाही से संयंत्र पर 18 करोड़ रूपए से अधिक का भारी भरकम जुर्माना ठोंका गया है. नगर निगम आयुक्त ने पूर्व में कटघोरा एसडीएम को नदी में किए जा रहे प्रदूषण को तत्काल रोकने के निर्देश देते हुए पत्र लिखा गया था. जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जिले के अन्य संयंत्र भी हसदेव नदी के पानी का इस्तेमाल संयंत्र संचालन के लिए करते हैं. राखड़ युक्त पानी के कारण उक्त संयंत्रों के संचालन में परेशानी आ रही थी. जिसे लेकर जल संसाधन विभाग ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जांच की. जांच में एचटीपीपी प्रबंधन द्वारा नदी में राखड़ घोले जाने की पुष्टि होने पर दो बार वार्निंग दी गई.

योगी सरकार का बड़ा कदम, स्कूलों को नारी शक्ति के निर्माण केंद्र में बदला जाएगा

योगी सरकार का बड़ा कदम, स्कूल बनेंगे नारी शक्ति का निर्माण केंद्र – 16 से 20 अप्रैल तक ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’, प्रदेशभर के स्कूलों में होंगे विशेष आयोजन – योग, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों से बालिकाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता पर फोकस लखनऊ उत्तर प्रदेश में नारी सशक्तीकरण को जमीनी स्तर पर नई दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब स्कूलों को ही नारी शक्ति के निर्माण का केंद्र बनाते हुए प्रदेशभर में ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ को शुरू किया जा रहा है। 16 से 20 अप्रैल तक चलने वाले इस विशेष अभियान के अंतर्गत परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में व्यापक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।  अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस अभियान को राज्यव्यापी स्तर पर लागू किया जा रहा है। ज्ञात हो कि ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना है, ताकि उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही सशक्त बनाया जा सके। 16 अप्रैल को ‘नारी शक्ति वंदन दिवस’ जारी दिशा-निर्देश के अनुसार 16 अप्रैल को ‘नारी शक्ति वंदन दिवस’ के रूप में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति वाली बालिकाओं के अभिभावकों का सम्मान किया जाएगा। इसके साथ ही केजीबीवी परिसर में बालिकाओं एवं महिला अध्यापकों द्वारा नारी शक्ति मानव श्रृंखला का निर्माण किया जायेगा और विकास खण्ड स्तर पर महिला वंदन के दृष्टिगत नारी सशक्तीकरण संबंधी कार्यक्रम का आयोजन होगा। 17 अप्रैल को छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर रहेगा फोकस 17 अप्रैल को छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए योगाभ्यास, खेलकूद एवं अनुशासन आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बालिकाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। 20 अप्रैल को निबंध, कविता, पोस्टर, रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिताएं 20 अप्रैल को छात्राओं की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए निबंध, कविता, पोस्टर, रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। इन गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं में नेतृत्व क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत किया जाएगा। विभागीय स्तर पर सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि इन कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।  यह है कार्यक्रम 16 अप्रैल को नारी शक्ति सम्मान – सभी परिषदीय विद्यालयों में 70 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति वाली बालिकाओं की अभिभावकों (माता/पिता) को सम्मान – कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय परिसर में बालिकाओं एवं महिला अध्यापकों द्वारा नारी शक्ति मानव श्रृंखला निर्माण – विकासखण्ड स्तर पर महिला वंदन के दृष्टिगत नारी सशक्तीकरण संबंधी कार्यक्रम का आयोजन  17 अप्रैल को आत्मरक्षा प्रदर्शन, समाज सेवा एवं सांस्कृतिक गतिविधियां – कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एनसीसी एवं स्काउट/गाइड की छात्राओं द्वारा अनुशासन एवं वीरता के प्रदर्शन हेतु ड्रिल प्रदर्शन – बालिकाओं द्वारा महिला विभूतियों के जीवन पर आधारित लघु नाटिका, लोकगीत, लोकनृत्य जैसे सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता – बालिकाओं हेतु विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन – रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के अन्तर्गत विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन 20 अप्रैल को वाद-विवाद एवं लेखन प्रतियोगिता – नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का भावी पीढ़ी पर प्रभाव अथवा विकसित भारत नारी की भूमिका विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता  – सशक्त नारी समृद्धि भारत विषय पर निबन्ध, स्वरचित कविता एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन

IMD का अनुमान: MP में मानसून कमजोर, इंदौर-ग्वालियर में सूखा और भोपाल में ज्यादा बारिश के संकेत

भोपाल  इस साल मानसून के कमजोर रहने की संभावना है। दो साल अच्छी बारिश होने के बाद इस साल सामान्य से कम बारिश होने के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है। धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।  भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने  अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि इस वर्ष देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान होने वाली वर्षा सामान्य से कम (लगभग सेंटीमीटर) रहने की संभावना है, जो भारत में मौसमी बारिश का दीर्घकालिक औसत (एलपीए-1971-2020) 87 सेंटीमीटर का लगभग 92 फीसदी है। एलपीए के 90 से 95% के बीच की बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी करीब 94% बारिश का अनुमान लगाया है। जून में मानसून सीजन शुरू हो जाएगा। 24 से 26 जून के बीच अंचल में मानसून की दस्तक हो जाती है। 2025 में मानसून समय से पहले आ गया था और अक्टूबर तक बारिश की थी। 2025 में हुई बारिश से अंचल के बाद व प्राकृतिक जल स्रोत भर गए थे। बारिश ने 90 साल का रिकॉर्ड भी तोड़कर नया बनाया था। 2026 के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इस पूर्वानुमान के अनुसार कम बारिश होगी। खंड बर्षा की वजह से बारिश असंतुलत रहेगी। कहीं सूखा रहेगा और कही बारिश होगी। इस कारण प्रभावित हुआ है मानसून -प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में तापमान में बदलाव देखा जा रहा है। कमजोर ला–नीना जैसी स्थिति अब तटस्थ हो रही है और आगे चलकर एल नीनो जैसी स्थिति बनने की संभावना है। एल–नीनो के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आने वाली नमी कमजोर पड़ती है और मानसूनी बारिश घटती है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि मात्रात्मक रूप से पूरे देश में मौसमी वर्षा एलपीए का 92 प्रतिशत' रहने की संभावना है, जिसमें 5 फीसदी की कमी- बेसी हो सकती है। पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है। इनको छोड़कर देश के शेष हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की उम्मीद है। सामान्य से कम वर्षा का एक कारण जून में प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है। आमतौर पर जब भी अल नीनो की स्थिति बनती है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखे की स्थिति बनने का खतरा रहता है। हालांकि, हिंद महासागर में एक सकारात्मक द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति बन रही है। डॉ. महापात्रा ने कहा कि सकारात्मक आईओडी में सामान्य से अधिक वर्षा होती है। इसलिए उम्मीद है कि यह मानसून के दूसरे भाग में अल नीनो के प्रभाव को कम करने में सहायक होगा। आईओडी हिंद महासागर के पश्चिमी (अफ्रीका तट) और पूर्वी (इंडोनेशिया तट) हिस्सों के बीच समुद्र की सतह के तापमान का एक अनियमित अंतर (दोहराव) है। भारत के लिए मानसूनी बारिश अहम भारत की कुल वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत मानसून के मौसम में होता है, जो सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है। लगभग 64 प्रतिशत भारतीय कृषि पर निर्भर हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है क्योंकि कुल बोए गए क्षेत्र का केवल लगभग 55 प्रतिशत ही सिंचाई के अंतर्गत आता है। देश के विभिन्न भागों में जलाशयों के भरने के लिए भी मानसूनी वर्षा महत्वपूर्ण है, जिनसे पेयजल की आपूर्ति होती है। कम बारिश से घटेगा उत्पादन पिछले दो साल से अच्छी बारिश होने से फसलों को काफी फायदा पहुंचा। नतीजा ये रहा है कि सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 2 क्विंटल तक बढ़ गया था। वहीं, गेहूं-चने के लिए भी अच्छा पानी मिला था। इससे उत्पादन बढ़ गया। इस साल यदि कम बारिश होती है तो पेयजल के साथ सिंचाई के लिए भी दिक्कतें खड़ी हो सकती है। 2017 में हुई भी सबसे कम बारिश, 2019 में जमकर बरसा पिछले 10 साल के बारिश के आंकड़े पर नजर डालें तो साल 2017 में सबसे कम बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। इसके मुकाबले औसत 29.9 इंच बारिश हुई थी। साल 2018 में 34.3 इंच बारिश दर्ज की गई थी। सबसे ज्यादा पानी वर्ष 2019 में 53 इंच हुई थी। वहीं, 2021 और 2023 में सामान्य से थोड़ी ही कम बारिश हुई थी। 2024 में 44.1 इंच पानी गिरा तो 2025 में आंकड़ा 45.2 इंच तक पहुंच गया। इस तरह कह कहते हैं कि पिछले 7 साल से प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है। अब इस साल मानसून से भी यही उम्मीदें हैं।। यह अपडेट साल 2025 का है। इसमें पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने का अनुमान जताया था, जो सही निकला था, लेकिन साल 2026 में बारिश को लेकर स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है। यह पड़ेगा प्रभाव कम बारिश का धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर फसल कम होती है, तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर है। ग्रामीण इलाकों में आय कम होने से बाजार में मांग कम हो सकती है, जिसका असर देश की जीडीपी विकास पर भी पड़ सकता है। गर्मी ने पकड़ा जोर….. उत्तर पश्चिम में उछला पारा, पूर्वोत्तर में बारिश जारी देश के मौसम में इन दिनों स्पष्ट विभाजन देखने को मिल रहा है। एक और उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई राज्यों में लू की स्थिति बनने लगी है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत में बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं जारी हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर भारत में तापमान में अगले कुछ दिनों में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इस बीच सौराष्ट्र, कच्छ, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग दिनों में लू चलने का अनुमान है, जबकि गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को भी बढ़ती गर्मी के बीच फसलों की हल्की सिंचाई करने … Read more

अल नीनो का असर, मानसून कमजोर पड़ने की आशंका

जयपुर अगर आप भीषण गर्मी के बाद झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं, तो मौसम विभाग का यह ताजा अपडेट आपको थोड़ा निराश कर सकता है. विभाग के पहले पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का केवल 92 प्रतिशत ही रह सकती है, यानी सीधा-सीधा 8 प्रतिशत का घाटा. क्यों रूठेंगे बादल? 'अल नीनो' है बड़ी वजह जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने मंगलवार को NDTV राजस्थान से बातचीत में बताया कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह 'अल नीनो' को माना जा रहा है. दरअसल, प्रशांत महासागर का पानी जब गर्म होने लगता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है. इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है, जिससे न सिर्फ मानसून की शुरुआत धीमी होगी, बल्कि उसकी रफ्तार पर भी ब्रेक लग सकता है. राजस्थान समेत इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर आंकड़ों की मानें तो उत्तर भारत के राज्यों- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका है. मध्य भारत में भी 5 से 10 प्रतिशत की कमी रह सकती है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है. पिछले 10 साल में यह दूसरी बार है जब मानसून इतना कमजोर रहने वाला है. जेब और खेती पर पड़ेगा बुरा असर देश की 75 प्रतिशत बारिश मानसून पर टिकी है. अगर बारिश कम हुई, तो धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है. जब पैदावार कम होगी, तो बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ सकती है. इसके अलावा, कम बारिश का मतलब है पानी की कमी और बिजली की बढ़ती मांग. राजस्थान में 44 डिग्री का 'टॉर्चर' शुरू मानसून तो बाद में आएगा, लेकिन गर्मी ने अभी से पसीने छुड़ा दिए हैं. पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है. मौसम विभाग का कहना है कि 17 और 18 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव (लू) चलने की भी चेतावनी दी गई है. आमतौर पर देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर तक रह सकती है. यह गिरावट भले बहुत बड़ी न लगे लेकिन इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है.

प्रदूषण रोकथाम,गाजियाबाद फैक्टरियों में धुएं पर नई सीमा लागू

 गाज़ियाबाद गाजियाबाद जिले की 385 फैक्टरियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं पर इस साल लगाम लगेगी। फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 50 तक लाना होगा। इसके लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा तय की गई है। जिले के लोनी, ट्रोनिका सिटी और साहिबाबाद समेत एक दर्जन से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है। सर्दियों में तापमान गिरने के साथ यही धुआं स्मॉग में बदलकर स्थिति को और गंभीर बना देता है। इस साल बिगड़े हालातों को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने निर्णय लिया था कि अब प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों के धुएं में पीएम की मात्रा को 80 से 50 करना है। सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे जिले में रेड और येलो जोन वाली ऐसी 385 फैक्टरी हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता है। इन फैक्टरियों को धुएं में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक सूक्ष्म कण छोड़ने की अनुमति थी, जिसे अब घटाकर 50 कर दिया गया है। यानी धुएं में मौजूद महीन कणों को करीब 35 से 40 फीसदी तक कम करना होगा। यही कण सांस के जरिए शरीर में जाकर फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का कारण बनते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। इकाइयों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी सभी फैक्टरियों में ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली लगाने के पहले से निर्देश हैं। ऐसा न करने वाली 55 इकाईयों को बीते दिनों सील भी किया गया था। इसी प्रणाली से नए मानकों का उल्लंघन भी सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पता चल जाएगा। 30 सितंबर तक नए मानकों का पालन न हुआ तो एक अक्तूबर से सतत निगरानी प्रणाली के ही जरिए उल्लंघन करने वाली फैक्टरियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। मैदान में 16 टीमें उतारी गईं सीएक्यूएम ने जिले में नए मानकों को लागू कराने के लिए 16 टीमें उतारी हैं। ये टीमें चिह्नित फैक्टरियों में जाएंगी और चिमनी का निरीक्षण कर उद्यमियों को बताएंगी कि धुएं में पीएम की मात्रा कैसे घटाई जाए। हर फैक्टरी का उत्पादन अलग होता है और उसी के अनुसार धुएं की प्रकृति भी बदलती है। ऐसे में एक ही समाधान सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। टीमें फैक्टरी के काम का आकलन कर उसी हिसाब से सुधार के सुझाव दे रही हैं। अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी, ''सीएक्यूएम के निर्देश पर फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं कि धुएं में पीएम की मात्रा 50 तक लाने की प्रक्रिया शुरू कर दें। पालन न करने वाली इकाइयों को एक अक्टूबर से बंद कराया जाएगा।''

गैस संकट से राहत की उम्मीद, एचईसी कॉलोनी में पहुंचे गेल अधिकारी

रांची झारखंड की राजधानी रांची स्थित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) परिसर में जारी एलपीजी संकट के बीच अब राहत की उम्मीद दिखाई देने लगी है. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे एचइसी कॉलोनी के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन की तैयारी शुरू होने से लोगों में राहत की उम्मीद जगी है. खबर के असर से सक्रिय हुए अधिकारी एचईसी में गैस संकट को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. “महज एक माह का बचा है गैस” शीर्षक खबर सामने आने के बाद हालात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए जाने लगे. इसके बाद गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के अधिकारी एचइसी परिसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. पीएनजी कनेक्शन का प्रस्ताव गेल के अधिकारियों ने एचईसी आवासीय परिसर में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. इस योजना के तहत पूरे कॉलोनी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने की बात कही गई है. अधिकारियों ने एचइसी प्रबंधन से इसके लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी की मांग की है, ताकि परियोजना पर काम शुरू किया जा सके. 11 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ एचईसी आवासीय परिसर में 11 हजार से अधिक क्वार्टर हैं, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार रहते हैं. वर्तमान में एलपीजी की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यदि पीएनजी योजना लागू होती है, तो इन सभी परिवारों को नियमित और निर्बाध गैस आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें आसान हो जाएंगी. औद्योगिक इकाई को भी मिलेगा फायदा यह योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि एचइसी की औद्योगिक इकाइयों के लिए भी महत्वपूर्ण है. फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) यूनिट में फर्नेस संचालन के लिए एलपीजी का उपयोग किया जाता है. यहां फोर्जिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं. पीएनजी कनेक्शन मिलने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारू और स्थिर हो सकेगी. प्रबंधन की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया एचईसी प्रबंधन ने बताया है कि गेल के प्रस्ताव पर जल्द ही एनओसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जैसे ही अनुमति मिलती है, पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जा सकता है. प्रशासन का मानना है कि यह योजना न केवल घरेलू गैस संकट को दूर करेगी, बल्कि औद्योगिक उत्पादन को भी स्थिरता प्रदान करेगी. लोगों में राहत की उम्मीद लगातार गैस संकट से जूझ रहे एचईसी के लोगों के लिए यह प्रस्ताव बड़ी राहत लेकर आया है. कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यदि पीएनजी सुविधा शुरू हो जाती है, तो उन्हें एलपीजी सिलेंडर की कमी और महंगाई से छुटकारा मिल जाएगा. इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी. भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी कनेक्शन की यह पहल एचईसी के लिए एक स्थायी समाधान साबित हो सकती है. इससे न केवल वर्तमान गैस संकट समाप्त होगा, बल्कि भविष्य में भी ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी. यह कदम एचइसी के विकास और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.