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भाजपा प्रदेश कार्यालय में गूंजा ‘नारी शक्ति वंदन’ का संदेश: नरेंद्र मोदी के संबोधन को महिला कार्यकर्ताओं ने उत्साह से सुना

भोपाल. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोमवार को नई दिल्ली में ‘नारी शक्ति वंदन‘ अधिनियम को नई दिल्ली में दिए गए संबोधन को देश भर सहित मध्यप्रदेश के पार्टी कार्यकर्ता एवं महिला कार्यकर्ताओं द्वारा श्रवण किया गया। प्रधानमंत्री के संबोधन को भाजपा प्रदेश कार्यालय में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे के नेतृत्व में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, जिला पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियां एवं हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ताओं व मातृशक्ति ने सुना। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व ‘नारी शक्ति वंदन‘ अधिनियम की प्रदेश टोली की सह संयोजक अश्विनी परांजपे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर की नारी शक्ति को संबोधित करते हुए महिलाओं की भागीदारी को सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए अधिनियम के महत्व पर प्रकाश डाला है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई। अभियान के तहत महिलाओं ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया। साथ ही 9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर भी अधिनियम के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया। इस पहल से महिलाओं में जागरूकता और उत्साह का माहौल देखने को मिला। महिला सशक्तिकरण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नारी शक्ति ने समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का संचालन महिला मोर्चा की प्रदेश में महामंत्री मोना सुस्तानी ने किया। आभार महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष वंदना जाचक ने माना। इस अवसर पर भाजपा की प्रदेश मंत्री अर्चना सिंह, विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक साधना स्थापक, महिला मोर्चा महामंत्री ज्योति सिंह राजपूत, कार्यालय मंत्री भावना सिंह, सह कार्यालय मंत्री विमला तिवारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी हर्षा सिंह ठाकुर, आईटी प्रभारी सुधा सुखियानी, प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी स्मृति जैन, सह सोशल मीडिया प्रभारी सारिका उपाध्याय, नीति एवं शोध सह प्रभारी इंदु चौधरी सहित हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ता व मातृशक्ति उपस्थित रहीं।

स्पोर्ट्स में हरियाणा की नई रणनीति: टैलेंट हंट के जरिए ओलंपिक तक पहुंचाने की तैयारी – गौरव गौतम

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए अच्छी योजनाएं निर्धारित करने का लक्ष्य निर्धारित होगा जिसको लेकर लगातार खेल विभाग के अधिकारियों को मंत्री गौरव गौतम की तरफ से दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। देश और प्रदेश में खेलों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए सरकार और खेल संस्थाएं अब युवा खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। नई योजनाओं के तहत स्कूल और जिला स्तर से ही प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है। भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलें शुरू की गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को शुरुआती स्तर से ही सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना है। ‘टैलेंट सर्च प्रोग्राम’ के जरिए गांव और छोटे शहरों से उभरते खिलाड़ियों को चिन्हित किया जा रहा है। खेल मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं में खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, आधुनिक सुविधाएं और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में खेल को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक युवा इसमें भाग ले सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही दिशा में निवेश और मार्गदर्शन जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ओलंपिक 2036 को ध्यान में रखते हुए अभी से युवा खिलाड़ियों की तैयारी शुरू कर दी गई है। युवा खिलाड़ियों पर बढ़ता फोकस न केवल देश के खेल भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को फिट और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगा।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा, मुख्यमंत्री ने महिलाओं की भूमिका को बताया अहम

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लोकसभा में पारित होने से पहले प्रदेश की महिलाओं से सीधा संवाद किया. मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षा, पुलिस, सामाजिक संगठनों और लघु उद्योग से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय है. इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिलेगा. इससे नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे देश के विकास में और अधिक सशक्त भूमिका निभा सकेंगी. "कुछ लोगों को डर हो सकता है कि…" मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कुछ लोगों को यह डर हो सकता है कि यदि महिलाएं राजनीति में आगे आ गईं तो क्या होगा. लेकिन महिलाएं प्रशासन और व्यवस्था को और बेहतर तरीके से चला सकती हैं. जब वे घर का संचालन कुशलता से कर सकती हैं, तो राष्ट्र का संचालन भी उतनी ही क्षमता से कर सकती हैं. योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को मिली मजबूती मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का जिक्र किया. राज्य सरकार की ओर से लाडो प्रोत्साहन योजना, मा वाउचर योजना, मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना और दुग्ध उत्पादक संबल योजना जैसी पहलों से महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है.      लखपति दीदी योजना पर कही ये खास बात मुख्यमंत्री ने ‘लखपति दीदी' योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में 16 लाख से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं. उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इन महिलाओं का कोई भी खाता एनपीए नहीं है, यानी उन्होंने समय पर ऋण का भुगतान किया है. यह दर्शाता है कि महिलाएं देश की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं. महिलाओं की बढ़ती भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं खेल, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा, उद्यम और कला समेत हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि आज जिस हेलीकॉप्टर से वे यात्रा करते हैं, उसकी पायलट भी एक महिला है. जब वह महिला पायलट हेलीकॉप्टर उड़ाती है तो उन्हें गर्व, सुकून और विश्वास का अनुभव होता है.

हाईकोर्ट की सख्ती: निजी कंपनी पर 3 लाख का जुर्माना, याचिका खारिज

 चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक निजी निर्माण कंपनी पर तीन लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब केवल सरकारी अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि निराधार और फालतू याचिकाएं दायर करने वाले निजी पक्षकारों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। यह आदेश जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने एम/एस वी के कंस्ट्रक्शन द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि रोहतक-बावल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का कार्य पूरा करने के बावजूद उसके बिलों का भुगतान नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की जाए।हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह याचिका उसी मामले में दूसरी अवमानना याचिका है। इससे पहले 2023 के आदेश के अनुपालन न होने पर एक अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसे मई 2025 में यह कहते हुए निपटा दिया गया था कि संबंधित प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता की शिकायत पर निर्णय ले लिया है।अदालत ने कहा कि इसके बावजूद दोबारा अवमानना याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का “स्पष्ट दुरुपयोग” है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की याचिकाएं न केवल अदालत के बहुमूल्य समय की बर्बादी करती हैं, बल्कि सरकारी अधिकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान भी करती हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग अत्यंत सावधानी और विवेक के साथ किया जाना चाहिए और केवल उन्हीं मामलों में किया जाना चाहिए, जहां आदेश की जानबूझकर अवहेलना स्पष्ट रूप से सिद्ध हो। इसे व्यक्तिगत द्वेष निकालने या अधिकारियों को परेशान करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सामान्यत जब अधिकारी कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है और यह राशि उनके वेतन से वसूली जाती है। लेकिन वर्तमान मामला इसका उल्टा उदाहरण है, जहां अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन किया, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार निराधार याचिकाएं दाखिल करने से न केवल न्यायिक संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि वास्तविक मामलों की सुनवाई भी प्रभावित होती है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए याचिकाकर्ता पर तीन लाख का जुर्माना लगाया जाता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।

67 करोड़ बकाया वसूली के लिए बिजली विभाग का बड़ा एक्शन प्लान

करनाल एक लाख रुपये से अधिक राशि के डिफाल्टरों को बिजली निगमों ने निशाने पर ले लिया है। करोड़ों रुपये की अपनी रिकवरी करने के लिए बिजली निगम पहली बार सख्ती बरतते हुए डिफाल्टर उपभोक्ताओं की संपत्ति नीलाम की प्रक्रिया अपनाएगा। सबसे पहले एसडीओ संबंधित उपभोक्ता को तीन नोटिस देगा और इसके बाद कार्यकारी अभियंता एक नोटिस देगा। इसके बाद भी उपभोक्ता द्वारा बिल अदा नहीं किया तो निगम बैंक की तर्ज पर तहसीलदार के माध्यम से संबंधित की प्रॉपर्टी नीलाम करेगा। गौर हो कि हरियाणा में निगमों का 8247 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें उत्तर हरियाणा का 3573 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का 4674 करोड़ रुपये शामिल है। करनाल जिले की बात करें तो ऐसे 2710 डिफाल्टर हैं जिन पर करीब 67 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें सबसे अधिक 1178 डिफाल्टर सब अर्बन और मेरठ रोड क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर हैं। इसलिए ऐसे डिफाल्टरों से बकाया वसूलने के लिए निगम ने सख्ती से पेश आने का फैसला लिया है। सबसे पहले एसडीओ अपने स्तर पर तीन बार और एक्सईएन अपने स्तर पर एक बार नोटिस जारी करेंगे। इसके बावजूद भुगतान न करने पर मामला तहसीलदार के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम नोटिस जारी होगा। यदि डिफाल्टर फिर भी भुगतान नहीं करते हैं तो लैंड रिकवरी एक्ट के तहत उनकी जमीन, वाहन, मशीनें और यहां तक कि गहनों की भी नीलामी की जा सकती है। बिजली अधिकारियों के अनुसार, एक लाख रुपये से अधिक राशि वाले डिफाल्टरों पर ही यह विशेष जांच की जाएगी। डिफाल्टर नहीं खरीद बेच सकेगा प्रॉपर्टी जिले में ऐसे जितने भी बिजली बिल डिफाल्टर हैं, जिन्होंने सालों से लाख से करोड़ों रुपये का अपना बिल जमा नहीं करवाया है। जब तक वह ऐसा नहीं करते हैं तो भविष्य में वह अपनी प्रॉपर्टी खरीद व बेच नहीं सकेंगे। इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम 26 डिफाल्टरों के केस भेज चुका: एसई बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता नसीब सिंह ने बताया कि निगम ने ऐसे 26 डिफाल्टरों के केस जिनके ऊपर दो करोड़ 27 लाख का बिजली बिल पेंडिंग है, उनको तहसीलदार के पास भेज दिया है। आगे भी ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर तहसीलदार को भेजे जाएंगे। दो हजार से अधिक ऐसे डिफाल्टर हैं, जिनके ऊपर करोड़ों में बिल पेंडिंग हैं। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत जमीन कुर्क की जा सकती है। सालों से है बिल बकाया जिले के सभी सब डिवीजनों में हजारों की संख्या में बिजली बिल न भरने के कारण डिफाल्टर घोषित किए हुए हैं जिनकी बिल की राशि बड़ी है और जिन्होंने सालों से बिजली का बिल नहीं जमा करवाया है। ऐसी स्थिति में कईयों के कनेक्शन काट दिए गए हैं। लेकिन बावजूद इसके कुछ उपभोक्ताओं को छोड़कर अभी भी डिफाल्टर बकाया बिल नहीं जमा करवा रहे हैं।  

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा सौर तकनीक की ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं गांवों में सौर बिजली संबंधी समस्याओं का मिल रहा जल्द समाधान रोजगार और आय के नए अवसरों से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “सोलर दीदी” योजना ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनकर उभर रही है। इस पहल के माध्यम से गांवों की महिलाओं को सौर ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अब महिलाएं सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रहकर ऊर्जा क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं और गांवों में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। योजना के तहत महिलाओं को सोलर लैंप, सोलर पैनल, चार्जिंग यूनिट और अन्य सौर उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें तकनीकी खराबियों को ठीक करने और उपकरणों की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। परिणामस्वरूप, जहां पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब “सोलर दीदी” गांव-गांव में ऊर्जा का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरीं हैं। इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के रूप में देखने को मिल रहा है। सोलर उत्पादों की बिक्री और सेवाओं के माध्यम से महिलाएं नियमित आय अर्जित कर रहीं हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। सोलर दीदियां न केवल तकनीकी कार्य कर रहीं हैं, बल्कि वे जागरूकता अभियान का भी अहम हिस्सा हैं। वे ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के फायदे समझाकर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह योजना लगातार विस्तार पा रही है। आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की योजना है, ताकि हर गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। “सोलर दीदी” पहल न केवल गांवों में रोशनी फैला रही है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई दिशा भी दे रही है।

पंजाब में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: ‘रोशन पंजाब योजना’ से गांव होंगे रोशन, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

जालंधर. पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलने और वहां सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशाल परियोजना की घोषणा की है। प्रदेश के लगभग 13 हजार गांवों को रोशन करने के लिए तीन लाख सौर स्ट्रीट लाइटें लगाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। ‘मुख्यमंत्री रोशन पंजाब योजना’ के तहत गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थलों को आधुनिक सौर ऊर्जा प्रणाली से लैस किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार की उम्मीद है। 550 करोड़ का बजट और कार्यान्वयन की रणनीति जालंधर में आयोजित एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस पूरे मिशन पर अनुमानित 550 करोड़ रुपये की लागत आएगी। विभाग ने इसकी निविदा प्रक्रिया को शीघ्र अति शीघ्र आरंभ करने के निर्देश दिए हैं। योजना का मुख्य केंद्र बिंदु गांवों के वे सार्वजनिक स्थान और घनी आबादी वाले मोहल्ले हैं, जहां वर्तमान में प्रकाश व्यवस्था का अभाव है। सुरक्षा और आर्थिक प्रगति पर विशेष ध्यान अंधेरा दूर होने से न केवल गांवों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि इससे स्थानीय निवासियों की कार्यक्षमता और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। सौर लाइटों के लगने से रात के समय होने वाली आपराधिक वारदातों में कमी आएगी और विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है, जिसके तहत जून से कार्य शुरू होकर अक्टूबर तक संपन्न किया जाएगा। पूरी व्यवस्था के प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय नियंत्रण केंद्र बनाया जा रहा है और नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। रखरखाव की जिम्मेदारी और वित्तीय ढांचा परियोजना की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। जिस कंपनी को लाइटें लगाने का अनुबंध मिलेगा, वही अगले सात वर्षों तक इनके परिचालन और मरम्मत के लिए उत्तरदायी होगी। यदि कोई लाइट खराब होती है, तो उसे 72 घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा, अन्यथा कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस योजना के कुल व्यय का 70 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत का योगदान ग्राम पंचायतें करेंगी। इसके साथ ही गांवों में पहले से मौजूद बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को भी इस अभियान के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

भटके कदमों को नई दिशा: सुकमा में पुनर्वास से विकास की कहानी लिख रही है सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद मोबाइल, आवास की चाबी और नियुक्ति पत्र का वितरण, ‘पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन रायपुर  नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। मुख्यमंत्री साय  ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं।  कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए।  इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर महेश कश्यप  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

फर्जी डॉक्टर नेटवर्क का भंडाफोड़, आहूजा अस्पताल मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

कानपूर किडनी ट्रांसप्लांट के मामले  में 25 हजार के इनामिया सरगना फर्जी डॉक्टर रोहित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कमिश्नरी पुलिस ने तीन फर्जी डॉक्टर अली, डॉ अफजल के खिलाफ 25-25 रूपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। मसवानपुर स्थित आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना पर पुलिस ने 31 मार्च को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ दबिश दी थी। जहां से साक्ष्य के बाद पुलिस ने पनकी कल्याणपुर के प्रिया अस्पताल में छापेमारी की थी। जहां पुलिस को पारुल तोमर भर्ती मिलीं। ट्रांसप्लांट कर उन्हें किडनी लगाई गई थी, जबकिआवास विकास कल्याणपुर के मेडलाइफ अस्पताल में बिहार के बेगूसराय का आयुष चौधरी भर्ती मिला। जिसने अपनी किडनी पारुल को दी थी। मामले में रावतपुर थाने के दारोगा मुकेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, एम्बुलेंस चालक शिवम अग्रवाल और मेडलाइफ व प्रिया अस्पताल के संचालकों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में गाजियाबाद के डॉ. रोहित, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अनुराग के साथ ही ओटी मैनेजर अली और डॉ. अफजाल का नाम सामने आया था। पुलिस ने इनमें से डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल व ओटी मैनेजर अली पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया था। रावतपुर पुलिस ने फर्जी डॉक्टर रोहित को गिरफ्तार कर लिया है बाकी अन्य। आरोपियों के लिए दबिश दी जा रही है। इस मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल सोमवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं।  

द्वारका एक्सप्रेसवे पर बिजवासन टोल के पास यू-टर्न अंडरपास की तैयारी शुरू

गुरुग्राम द्वारका एक्सप्रेसवे स्थित बिजवासन टोल प्लाजा पर यू-टर्न अंडरपास निर्माण की तैयारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शुरू कर दी है। मौजूदा वक्त में यहां यू-टर्न की सुविधा न होने के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। कई बार लोग टोल से बचने के लिए गलत दिशा में गाड़ी चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग साढ़े आठ एकड़ जमीन की जरूरत है, जिसमें कुछ हिस्सा जीएमडीए का और कुछ निजी बिल्डरों का है। इस दो लेन के अंडरपास के बनने से यात्रियों का समय और ईंधन बचेगा। जमीन मिलने के बाद बनाया जाएगा इस्टीमेट इसमें कुछ जमीन गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की है तो कुछ बिल्डरों की है। जमीन मिलने के बाद इस्टीमेट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। गत 28 जनवरी को एनएचएआई अध्यक्ष संतोष यादव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम के आयुक्त और जिला उपायुक्त मौजूद थे। बिजवासन टोल प्लाजा के समीप यू-टर्न नहीं अधिकारियों ने बैठक में बताया था कि बिजवासन टोल प्लाजा के समीप यू-टर्न नहीं है। बजघेड़ा निकासी पर यदि वाहन चालक नहीं उतर पाता है तो वह बिजवासन टोल प्लाजा पर पहुंच जाता है। टोल से बचने के लिए वाहन चालक गलत दिशा में वाहन चलाते हैं। स्थानीय लोगों की तरफ से भी बिजवासन टोल प्लाजा पर यू-टर्न निर्माण का आग्रह किया है। मौके पर यदि नहीं होगी सरकारी जमीन तो होगा अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अध्यक्ष ने इस बैठक में आदेश जारी किए थे कि यदि मौके पर सरकारी जमीन है तो उसे जीएमडीए के माध्यम से लिया जाए। निजी जमीन यदि यू-टर्न के निर्माण में आ रही है तो उसका अधिग्रहण किया जाए। इसको लेकर एनएचएआई के परियोजना अधिकारी ने एक सलाहकार कंपनी को यू-टर्न निर्माण के लिए सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी से सर्वे कर के एनएचएआई को सौंपी रिपोर्ट सलाहकार कंपनी ने सर्वे करके रिपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के हवाले कर दी है। इसके मुताबिक दो लेन के यू-टर्न अंडरपास के निर्माण के लिए जीएमडीए की करीब पौने सात एकड़ जमीन की जरूरत है। पौने दो एकड़ जमीन आसपास रिहायशी और व्यावसायिक परियोजना बना रहे बिल्डरों की है। लोगों को परेशानी हो रही सलाहकार कंपनी ने बताया कि यू-टर्न की कमी से दैनिक यात्रियों के लिए यात्रा की दूरी और समय में वृद्धि हुई है। अनावश्यक ईंधन की खपत और परिचालन अक्षमताएं बढ़ी हैं। टोल प्लाजा और विलय क्षेत्रों के पास यातायात बढ़ा है। गलत दिशा में चलने से हादसे की संभावना है। अचानक लेन बदलने से दुर्घटनाओं का खतरा है।