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पश्चिम बंगाल की कोयल बार ने छुआ शीर्ष स्थान, वेटलिफ्टिंग में बनाया इतिहास

कलकत्ता पश्चिम बंगाल का हावड़ा अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वेटलिफ्टरों के लिए एक केंद्र बन गया है. इससे पहले, यहां कि अचिंत्य शेउली ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं. अब, कोयल बार (Koyel Bar) ने चल रही राष्ट्रमंडल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर कमाल कर दिया है. संयोग से, इन दोनों वेटलिफ्टरों के पहले कोच अष्टम दास रहे हैं. 17 साल की उम्र में बना दिए दो विश्व रिकॉर्ड गणेश चतुर्थी के अवसर पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई क्योंकि 17 वर्षीय कोयल बार ने राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया. कोयल के स्वर्ण पदक के दो सकारात्मक पहलू भी हैं क्योंकि उसने युवा और जूनियर वर्ग में कई रिकॉर्ड भी तोड़े हैं इस युवा एथलीट ने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के महिलाओं के 53 किलोग्राम युवा वर्ग में कुल 192 किलोग्राम (85 किलोग्राम + 107 किलोग्राम) वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने पहले 85 किलोग्राम वजन उठाकर युवा विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की. फिर, कोयल ने कुल 192 किलोग्राम वजन उठाकर 188 किलोग्राम के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. बेटी की उपलब्धि पर यकीन नहीं हुआ कोयल के पिता, मिथुन बार, जो पेशे से मीट विक्रेता हैं, को अपनी बेटी की उपलब्धि पर यकीन नहीं हुआ. ईटीवी भारत से बेटी की उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए वह भावुक भी हो गए और कहा कि जो लोग पहले कोयल की आलोचना करते थे, अब वही तारीफ कर रहे हैं. बता दें कि कोयल की पिता, मिथुन बार दस तक पढ़ाई की है, बाद में वो योग सीखने लगे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपने सपने का त्याग करना पड़ा और फिर वो अपनी बेटी को कोचिंग के लिए अष्टम दास के पास ले आए, जो वेटलिफ्टिंग के महान कोच है. 'वजन उठाते समय, मुझे अपने पिता का चेहरा याद आता था' अपनी जीत के बाद भावुक कोयल ने कहा कि पारिवारिक विवाद के कारण उनके पिता की दुकान बंद होने के बावजूद, उन्हें पैसों की कभी चिंता नहीं करनी पड़ी. कोयल ने कहा, 'वजन उठाते समय, मुझे बस अपने पिता का चेहरा याद आता था. मेरे पिता ने हमें कभी अपने शरीर पर एक खरोंच तक नहीं आने दी. मेरे पिता की कड़ी मेहनत के बिना इस मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं था.' कोयल ने आगे कहा, 'आज इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मैंने जो संघर्ष किया है, वह मेरे पिछले संघर्षों के सामने कुछ भी नहीं है. मुझे शुरू से ही बहुत आत्मविश्वास था. जब मैं इतनी सफल हो गई, तो मुझे लगा कि मैं अब सब कुछ कर सकती हूं.' बुखार होने पर भी उसने अभ्यास किया कोयल बार के कोच अष्टम ने कोयल की मेहनती प्रकृति की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, 'कोयल की कारीगरी मेरे साथ है. मैं उसे दस साल की उम्र से वेटलिफ्टिंग के गुण सिखा रहा हूं. उसने मेरे प्रशिक्षण में जिला और राज्य स्तर पर कई पदक जीते हैं. कोयल की तकनीक बचपन से ही बहुत अच्छी रही है. मैं उसकी ताकत बढ़ाने के लिए उसे तरह-तरह के व्यायाम कराता था. उसने कभी अपनी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी, बुखार होने पर भी उसने अभ्यास किया है.'

इतिहास रचने का सपना टूटा, पीवी सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप से बाहर

पेरिस  भारत की अनुभवी शटलर पीवी सिंधु का वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2025 में सफर समाप्त हो गया है. पेरिस में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में 29 अगस्त (शुक्रवार) को पीवी सिंधु वूमेन्स सिंगल्स में अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला हार गईं. 15वीं वरीयता प्रात सिंधु को इंडोनेशिया की कुसुमा वर्दानी के हाथों 14-21, 21-13, 16-21 से हार का सामना करना पड़ा. 9वीं वरीयता हासिल वर्दानी ने यह मुकाबला 1 घंटा और 8 मिनट में जीता. देखा जाए तो पीवी सिंधु के लिए साल 2025 कुछ खास नहीं रहा है. पीवी सिंधु ने इस साल 13 मैच हारे हैं, जबकि उन्होंने केवल नौ में जीत हासिल की. सिंधु इस साल केवल दो बार किसी टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में कामयाब रहीं. वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप से पहले सिंधु साल की शुरुआत में इंडिया ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थीं. पीवी सिंधु इंडिया ओपन के बाद इंडिनेशिया मास्टर्स में खेलीं, जहां वो राउंड ऑफ 32 में हारकर बाहर हुईं. इसके बाद ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप और स्विस ओपन में सिंधु अपने पहले राउंड के मुकाबले गंवा बैठीं. फिर बैडमिंटन एशियन चैम्पियनशिप में सिंधु को राउंड ऑफ 16 में जापान की अकाने यामागुची ने हराया. मलेशिया मास्टर्स में पीवी सिंधु पहले राउंड में हारीं. जबकि सिंगापुर ओपन और इंडोनेशिया ओपन में उन्हें राउंड ऑफ 16 में हार झेलनी पड़ी. पीवी सिंधु ने जापान ओपन में भी भाग लिया, जहां वो पहले ही दौर में हार गईं. जबकि चाइना ओपन में उन्हें हमवतन उन्नति हुड्डा राउंड ऑफ-16 में हरा दिया. … तो इतिहास रच देतीं पीवी सिंधु पीवी सिंधु का विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में दमदार रिकॉर्ड रहा है. सिंधु ने साल 2019 में इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता था. इसके अलावा सिंधु इस टूर्नामेंट में दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं. सिंधु यदि वर्दानी के खिलाफ मुकाबला जीत लेतीं तो वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पिनशिप में उनका ये छठा पदक होता. देखा जाए तो सिंधु वर्ल्ड चैम्पियनशिप में महिला सिंगल्स में छह पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनने चूक गईं. पीवी सिंधु ने इस टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-2 चीनी खिलाड़ी झी यी वांग के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था. तब ऐसा लगा था कि वो फॉर्म में लौट आई हैं, लेकिन इंडोनेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ वो अपना बेस्ट नहीं दे पाईं. सिंधु ने रियो ओलंपिक (2016) में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था. फिर उन्होंने टोक्यो ओलंपिक (2020) में भी ब्रॉन्ज हासिल किया.

बैडमिंटन में भारत की बड़ी जीत, सात्विक-चिराग ने रचा इतिहास, मेडल सुनिश्चित

पेरिस  सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का पेरिस में खेले जा रहे वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप 2025 में शानदार प्रदर्शन जारी है. अब सात्विक-चिराग मेन्स डबल्स स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बनाकर भारत के लिए कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया. क्वार्टर फाइनल में सात्विक-चिराग ने दूसरी वरीयता प्राप्त एरॉन चिया और सोह वूई यिक की मलेशियाई जोड़ी को 21-12, 21-19 से हराया. 9वीं सीड सात्विक-चिराग को ये मुकाबला जीतने में महज 43 मिनट लगे. इस मैच से पहले तक मलेशियाई खिलाड़ियों के खिलाफ सात्विक-चिराग का हेड टू-हेड रिकॉर्ड 3-11 था. यानी ज्यादातर बार मलेशियाई जोड़ी ने ही उन्हें हराया था, लेकिन इस बार भारत के दोनों सितारे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों पर भारी पड़े. यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले साल पेरिस ओलंपिक में इसी जोड़ी ने सात्विक-चिराग की पदक जीतने की उम्मीदें तोड़ी थीं. इस बार सात्विक-चिराग ने उसी जोड़ी को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और साथ ही मेडल भी सुनिश्चित किया. यह सात्विक-चिराग का वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में दूसरा मेडल है. इससे पहले साल 2022 में सात्विक-चिराग ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था. सात्विक-चिराग की जीत से भारत ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में मेडल जीतने का वो सिलसिला बरकार रखा है, जो सला 2011 से चला आ रहा है. ऐसा रहा क्वार्टर फाइनल मुकाबला पहले गेम में सात्विक-चिराग ने शानदार शुरुआत करते हुए लगातार 6 प्वांइट्स जीतकर 8-2 की बढ़त बना ली. सात्विक ने जहां पीछे से जोरदार स्मैश लगाए, तो चिराग ने नेट पर आक्रामक इंटरसेप्शन किए. दोनों ने अपने आक्रामक खेल से मलेशियाई जोड़ी को परेशान किया. नतीजा ये हुआ कि पहला गेम सात्विक-चिराग ने आसानी से 21-12 से जीत लिया, दूसरा गेम थोड़ा तनावपूर्ण रहा. सात्विक-चिराग ने एक समय 11-7 की बढ़त बना ली थी और लग रहा था कि वे मैच आसानी से जीत जाएंगे. लेकिन मलेशियाई जोड़ी ने जोरदार वापसी की और स्कोर 19-19 हो गया. इस वक्त दबाव ज्यादा था, लेकिन सात्विक-चिराग ने हिम्मत दिखाते हुए लगातार अटैक किए और दो अंक लेकर 21-19 से गेम जीत लिया. अब सात्विक-चिराग के सामने चीनी चुनौती क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान साइडलाइन से कोच बी. सुमीत रेड्डी लगातार सात्विक-चिराग को आक्रामक बने रहने की सलाह देते रहे. मुकाबले के बाद दोनों खिलाड़ियों का जश्न साफ बता रहा था कि यह जीत कितनी मायने रखती है. अब सात्विक-चिराग सेमीफाइनल में 11वीं वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी चेन बोयांग और लियू यी से भिड़ेंगे.

ये 5 क्रिकेटर नहीं बन पाएंगे एशिया कप का हिस्सा, टीम इंडिया अगले हफ्ते करेगी उड़ान

नई दिल्ली  भारतीय टीम आगामी एशिया कप में हिस्सा लेने के लिए चार सितंबर को दुबई में एकत्रित होगी। सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व वाली भारतीय टीम 10 सितंबर को अपने अभियान की शुरुआत करेगी। हालांकि बीसीसीसीआई ने कथित तौर पर फैसला किया है कि आगामी एशिया कप 2025 के लिए चुने गए पांच स्टैंडबाय खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल, प्रसिद्ध कृष्णा, वाशिंगटन सुंदर, रियान पराग और ध्रुव जुरेल मुख्य टीम के साथ दुबई नहीं जाएंगे।   भारत टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में 10 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात से भिड़ेगा और उसके बाद 14 सितंबर को दुबई में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान का सामना करेगा। सुपर फोर चरण से पहले उसका तीसरा ग्रुप मैच 19 सितंबर को ओमान के खिलाफ होगा। जब बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी से पूछा गया कि क्या कोई स्टैंडबाय खिलाड़ी टीम के साथ यात्रा करेगा, तो अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "नहीं, स्टैंडबाय खिलाड़ी मुख्य टीम के साथ दुबई नहीं जाएंगे।" अधिकारी के मुताबिक जरूरत पड़ने पर ही खिलाड़ी को बुलाया जाएगा। भारतीय टीम में शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन बतौर ओपनर खेल सकते हैं। यशस्वी जायसवाल की जरूरत तभी पड़ेगी जब उनमें से कोई चोटिल हो। यही बात प्रसिद्ध पर भी लागू होती है, जो जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह या हर्षित राणा के चोटिल होने पर खेल सकते हैं। गौरतलब है कि भारत ने अपनी टीम में केवल 15 खिलाड़ियों को शामिल किया, जबकि एशिया कप के नियम के अनुसार उन्हें 17 खिलाड़ियों की टीम चुनने की अनुमति थी। एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा गुरुवार को शुरू हुए दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में उत्तर क्षेत्र की तरफ से पूर्व क्षेत्र के खिलाफ जबकि कुलदीप यादव मध्य क्षेत्र की तरफ से उत्तर पूर्व क्षेत्र के खिलाफ खेल रहे हैं। सूर्यकुमार एशिया कप में 15 सदस्यीय भारतीय टीम की अगुवाई करेंगे जबकि टेस्ट कप्तान शुभमन गिल उनके उप कप्तान होंगे। एशिया कप के सभी मैच दो स्थान दुबई और अबुधाबी में आयोजित किए जाएंगे।  

मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में बदलाव, नई टीम के साथ सिंधिया परिवार का वारिस अध्यक्ष बनने को तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव छह साल बाद 2 सितंबर को होने जा रहे है। इस बार कार्यकारिणी में सभी नए चेहरे होंगे, क्योकि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के अनुसार दो बार पद पर रहने वाले पदाधिकारी तीसरी बार नहीं रह सकते है। इस बार भी चुनाव निर्विरोध होने के आसार है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया का नाम एमपीसीए अध्यक्ष के लिए चर्चा में है। अभी तक अन्य किसी सदस्य ने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी नहीं की है। इसके अलावा सचिव के पद की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय अंपायर सुधीर असनानी की जा सकती है। वर्तमान में एमपीसीए अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर है। शुक्रवार से चुनाव के लिए नामांकन फार्म मिलना शुरू हो जाएंगे। 2 सितंबर को एजीएम में नए अध्यक्षों के नामों की घोषणा हो जाएगी। महाआर्यमन के लिए की जा रही थी जमीन तैयार   सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी एमपीसीए के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रही है। इससे पहले वर्षों तक पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया एमपीसीए के अध्यक्ष रहे। उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया अध्यक्ष रहे।दो बार उन्हें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की चुनौती का सामान भी करना पड़ा। विजयवर्गीय की दावेदारी के कारण एमपीसीए में दो बार चुनाव हुए, लेकिन विजयवर्गीय सिंधिया को हरा नहीं पाए। अब दोनो ही एक ही दल में है। इस कारण एमपीसीए में सर्वसम्मति से कार्यकारिणी घोषित हो रही है। एमपीसीए के अध्यक्ष के दावेदार महाअार्यम सिंधिया के लिए उनके पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहले ही जमीन तैयार कर ली थी। उन्हे पहले ग्वालियर संभागीय एसोसिएशन का उपाध्यक्ष बनाया गया। वे दो बार ग्वालियर में मध्य प्रदेश लीग सफलतापूर्वक आयोजित करवा चुके है। अब एमपीसीए की कमान सौंपने की तैयारी की जा रही है।  

हर खिलाड़ी बनेगा फिटनेस का ब्रांड एंबेसेडर, 10 नागरिकों को प्रेरित करने का आह्वान : खेल मंत्री सारंग

खिलाड़ियों को दिलाई फिट इंडिया शपथ राष्ट्रीय खेल दिवस पर मंत्री सारंग ने मेजर ध्यानचंद को पुष्पांजलि अर्पित की भोपाल  हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 120वीं जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने तात्या टोपे स्टेडियम भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मेजर ध्यानचंद को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हॉकी के जादूगर, ‘पद्म भूषण’ मेजर ध्यानचंद ने विश्व हॉकी में भारत का परचम लहराया है। उनका जीवन साहस, अनुशासन और खेल भावना का अद्वितीय उदाहरण है, जो सदैव हम सभी को प्रेरित करता रहेगा। मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों को फिट इंडिया की शपथ भी दिलाई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खेलों के प्रति बना सकारात्मक माहौल मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में खेलों का अभूतपूर्व विकास हुआ है। फिट इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने हर आयु वर्ग में खेल और फिटनेस के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। आज भारत एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में ऐतिहासिक सफलताएँ हासिल कर रहा है और गाँव–गाँव तक खेल संस्कृति को नई पहचान मिल रही है। नंबर 1 पर पहुंचना हमारा लक्ष्य मंत्री सारंग ने कहा कि पहले के समय में खेल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। प्रदेश में अत्याधुनिक अधोसंरचना, विभिन्न खेलों की अकादमी, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और अन्तरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं के कारण आज मध्यप्रदेश शीर्ष 3 राज्यों में शामिल हो चुका है। अब हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश को देश का नंबर 1 खेल राज्य बनाया जाए। इसके लिये बेहतर व्यवस्थाओं के साथ ही स्कूल–कॉलेज स्तर से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की ठोस योजना पर कार्य हो रहा है। मंत्री सारंग ने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और सरकार के संकल्प से मध्यप्रदेश जल्द ही भारत का अग्रणी खेल राज्य बनेगा। हर खिलाड़ी 10 लोगों को खेल व फिटनेस के लिये प्रेरित करें मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों से आहवान किया कि वे सिर्फ मैदान तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में खेल और फिटनेस के ब्रांड एंबेसडर बनें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खिलाड़ी अगले तीन माह में अपने आसपास के कम से कम 10 लोगों को खेल और फिटनेस की ओर प्रेरित करे। ये लोग परिवारजन, पड़ोसी, मित्र या छात्र भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ी नागरिकों को खेल और फिटनेस से जोड़ेंगे, तो यह एक जनआंदोलन का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी न केवल पदक जीतकर बल्कि समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाकर भी देश की सेवा करते हैं। जब हर घर से कोई न कोई खेलों से जुड़ेगा, तभी भारत ‘फिट इंडिया’ और ‘हिट इंडिया’ बन पाएगा। ’एक घंटा खेल मैदान में’ के तहत रस्साकशी में लिया भाग ‘एक घंटा खेल मैदान में’ थीम के तहत मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के साथ रस्साकशी में भी भाग लिया। इस अवसर पर म.प्र. वॉटर स्पोर्ट्स व हॉकी टीम के खिलाड़ियों के बीच भी रस्साकशी का मैत्री मैच हुआ, जिसमें 2-1 से म.प्र. वॉटर स्पोर्ट्स की टीम विजेता रही। मंत्री सारंग ने स्टेडियम में 100 मीटर स्प्रिंट पुरुष व महिला, फुटबॉल, पॉल वॉल्ट समेत अन्य खेलों का अवलोकन कर खिलाड़ियों से संवाद किया तथा उनका उत्साहवर्धन किया। मार्शल आर्ट अकादमी का किया भ्रमण राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मंत्री सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम स्थित मार्शल आर्ट अकादमी का भ्रमण किया। यहां उन्होंने रेसलिंग, बॉक्सिंग व फेंसिंग खेलों का अवलोकन किया एवं उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण के उप-सचिव अजय श्रीवास्तव, संचालक राकेश गुप्ता, संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। 31 अगस्त तक प्रदेश में होंगे खेल आयोजन राष्ट्रीय खेल दिवस के तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत 30 अगस्त को सुबह 11:30 बजे नर्मदा क्लब में खेल विषयक विशेष सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। जिसमें स्पोर्ट्स इंजरी, साइकोलॉजी एवं एंटी-डोपिंग जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे बिचारपुर और सरदारपुर की महिला टीमों के बीच फुटबॉल मैच खेला जाएगा। तीसरे दिन 31 अगस्त को सुबह 7:30 बजे राजधानी भोपाल में “संडे ऑन साइकिल” रैली का आयोजन होगा, जो राजा भोज सेतु से प्रारंभ होकर वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी पर खत्म होगी।  

क्रिकेट का कुख्यात ‘थप्पड़ कांड’ 17 साल बाद आया सामने, हरभजन-श्रीसंत चर्चा में

नई दिल्ली  आईपीएल के इतिहास की सबसे बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी की बात हो और उसमें हरभजन सिंह और श्रीसंत का 'थप्पड़ कांड' शामिल ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। यह घटना आईपीएल के पहले सीजन के दौरान घटी थी जब मुंबई इंडियंस को पंजाब किंग्स के हाथों मोहाली के मैदान पर करारी हार का सामना करना पड़ा था। 25 अप्रैल 2008 को हुए इस मुकाबले में मुंबई की कप्तान हरभजन सिंह कर रहे थे। पंजाब ने उन्हें 66 रनों से धूल चटाई थी। मैच खत्म होने के कुछ ही देर बाद, कैमरों ने श्रीसंत को रोते हुए देखा। फिर पता चला था कि हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ लगाया है। मगर कभी उस थप्पड़ का वीडियो किसी ने नहीं देखा।   मगर अब इस घटना के 17 साल बाद सोशल मीडिया हरभजन सिंह के थप्पड़ कांड का वीडियो सामने आया है। फैंस इस वीडियो को देखकर काफी हैरान है। वीडियो में देखने को मिल रहा है, मैच खत्म होने के बाद जब दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में हाथ मिला रहे हैं तो हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ लगाया। पहले कुछ सेकंड श्रीसंत समझ नहीं पाए उनके साथ क्या हुआ है, मगर फिर जब बाकी खिलाड़ी पास आए तो वह गुस्से में भज्जी की ओर बढ़ने लगे। फिर साथी खिलाड़ियों ने मिलकर मामले को शांत कराया। इस थप्पड़ कांड के बाद हरभजन सिंह को पूरे सीजन के लिए बैन कर दिया गया था और उन पर 5 वनडे मैचों के लिए भी बैन लगाया गया था। हालांकि हरभजन सिंह को आज तक इस बात का पछतावा है। हरभजन सिंह कई बार बड़े मंच पर अपनी गलती स्वीकार कर चुके हैं, मगर श्रीसंत की बेटी की कही हुई एक बात उन्हें आज भी परेशान करती है। ‘मैं आपसे बात नहीं करना चाहती, आपने मेरे पापा को मारा था।’ ये वो लाइन है जो श्रीसंत की बेटी ने हरभजन सिंह से कही थी। भज्जी का मानना है कि वो श्रीसंत की बेटी की नजरों में एक बुरे इंसान है और वह अपनी इमेज सुधारने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब श्रीसंत की बेटी ने उन्हें ऐसा कहा तो वह रोने लगे थे। भज्जी ने अश्विन के यूट्यूब चैनल पर कहा था, “एक चीज जो मैं अपने जीवन में बदलना चाहता हूं, वह है श्रीसंत के साथ हुई घटना। मैं उस घटना को अपने करियर से हटाना चाहता हूं। यही वह घटना है जिसे मैं अपनी सूची से बदलना चाहता हूं। जो हुआ वह गलत था और मुझे वह नहीं करना चाहिए था जो मैंने किया। मैंने 200 बार माफी मांगी। मुझे सबसे बुरा यह लगा कि उस घटना के सालों बाद भी, मैं हर अवसर या मंच पर माफी मांगता रहा हूं।"

एशिया कप हॉकी: भारत ने राजगीर में चीन को 4-3 से हराया, भारतीय टीम का विजयी आगाज

राजगीर भारतीय हॉकी टीम ने एशिया कप 2025 में जीत के साथ आगाज किया है. 29 अगस्त (शुक्रवार) को बिहार के राजगीर में खेले गए मुकाबले में भारत ने चीन को 4-3 से हराया. भारत की ओर से कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने तीन गोल (20वें मिनट, 33 वें मिनट और 47वें मिनट) दागे. जबकि जुगराज सिंह ने एक गोल (18वें मिनट) किया. चीन की तरफ से दु शिंहाओ (12वें मिनट), चेन बेनहाई (35वें मिनट) और गाओ जिशेंग (41वें मिनट) गोल करने में सफल रहे. भारतीय टीम अब अपने अगले मुकाबले में 31 अगस्त को जापान का सामना करेगी. मुकाबले में पहले क्वार्टर में भारतीय टीम चीन पर हावी रही, लेकिन वो कोई गोल नहीं कर पाई. दूसरी ओर दु शिंहाओ ने खेल के 12वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके चीनी टीम को 1-0 की लीड दिला दी. फिर दूसरे क्वार्टर के तीसरे मिनट में जुगराज सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके भारतीय टीम को बराबरी दिला दी. इसी क्वार्टर के पांचवें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी गोल किया, जिसके चलते भारत ने 2-1 की लीड ले ली. हाफटाइम तक स्कोर यही रहा. इसके बाद तीसरे क्वार्टर के तीसरे मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके भारत को 3-1 की लीड दिला दी. हालांकि कुछ मिनट बाद ही चेन बेनहाई ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके स्कोर 3-2 कर दिया. गाओ जिशेंग ने तीसरे क्वार्टर के 11वें मिनट में गोल दागा जिससे स्कोर 3-3 हो गया. फिर चौथे एवं आखिरी क्वार्टर के दूसरे मिनट में हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके भारत को 4-3 की निर्णायक लीड दिलाई. भारत ने कितनी बार जीता एशिया कप? एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट का ये 12वां संस्करण है. भारतीय टीम अब तक तीन बार एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट अपने नाम कर चुकी है. भारतीय टीम ने 2003, 2007 और 2017 में खिताब जीता था. पाकिस्तानी टीम भी तीन बार (1982, 1985, 1989) एशिया कप में विजेता रह चुकी है. साउथ कोरिया ने सर्वाधिक पांच बार (1994, 1999, 2009, 2013, 2022) एशिया कप जीता है. भारत को पूल-ए में चीन, कजाकिस्तान और जापान के साथ रखा गया है. जबकि पूल-बी में साउथ कोरिया, मलेशिया, बांग्लादेश और चीनी ताइपे की टीमें हैं. देखा जाए तो कजाकिस्तान की टीम तीन दशक में पहली बार एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में भाग ले रही है. कजाकिस्तान ने ओमान की जगह ली है. उधर बांग्लादेश ने पाकिस्तान का स्थान लिया है. पाकिस्तानी टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया था. दोनों पूल से शीर्ष पर रहने वाली दो-दो टीमें सेमीफाइनल खेलेंगी. खिताबी मुकाबला सात सितंबर को खेला जाएगा. इस टूर्नामेंट की विजेता टीम अगले साल 14 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेगी. यानी भारत के पास एशिया कप खिताब जीतकर वर्ल्ड कप का टिकट पाने का बेहतरीन मौका है. भारत ने पहला मौका गंवा दिया क्योंकि वह खराब प्रदर्शन के चलते एफआईएच प्रो लीग में सातवें स्थान पर खिसक गया था. एशिया कप के लिए भारत का स्क्वॉड गोलकीपर: सूरज करकेरा, कृष्ण बहादुर पाठक. डिफेंडर: हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, सुमित, संजय, जुगराज सिंह. मिडफील्डर: मनप्रीत सिंह, विवेक सागर प्रसाद, राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह. फॉरवर्ड: मनदीप सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा.

ब्रॉन्को टेस्ट पर विवाद, पूर्व खिलाड़ी बोले- रोहित शर्मा को बाहर करने की साजिश

नई दिल्ली पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने विस्फोटक दावा करते हुए कहा है कि कोई है जो रोहित शर्मा को पसंद नहीं करता। वह नहीं चाहता कि हिटमैन वनडे टीम का हिस्सा हों। उन्हें टीम से बाहर करने के लिए ही भारतीय क्रिकेट में नए ब्रोन्को टेस्ट को लाया गया है। आम तौर पर रग्बी खिलाड़ियों को इस टेस्ट से गुजरना पड़ता है लेकिन टीम इंडिया के स्ट्रेंथ ऐंड कंडिशनिंग कोच एड्रिय ले रॉक्स की देखरेख में इसे भारतीय टीम के लिए एक अतिरिक्त लेयर के तौर पर लाया गया है। अब टीम में शामिल होने के लिए खिलाड़ियों को यो-यो टेस्ट, 2 किलोमीटर की दौड़ और ब्रोन्को टेस्ट तीनों को क्लियर करना पड़ेगा। क्रिकट्रैकर से बातचीत में तिवारी ने दावा किया कि ब्रोन्को टेस्ट लाने की टाइमिंग और इस फिटनेस टेस्ट के पीछे की मंशा से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब जब भारतीय टीम 2027 वर्ल्ड कप से पहले संक्रमण के दौर से गुजर रही है। मनोज तिवारी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि विराट कोहली को 2027 वर्ल्ड कप की योजना से बाहर रखना बहुत मुश्किल होगा। लेकिन मुझे संदेह है कि वे रोहित शर्मा को लेकर कुछ सोच रहे हैं।’ तिवारी ने कहा कहा, 'देखिए, भारतीय क्रिकेट में क्या कुछ हो रहा है, उसे मैं बहुत ही बारीकी से देखता हूं। और मुझे विश्वास है कि यह ब्रोन्को टेस्ट जिसे कुछ दिन पहले ही इंट्रोड्यूस किया गया है, मुझे लगता है कि यह रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों के लिए है। मुझे लगता है कि कोई है जो नहीं चाहता कि वह भविष्य में टीम का हिस्सा रहे। और इसीलिए इसे इंट्रोड्यूस किया गया है।' बोन्को टेस्ट की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'सवाल है कि अभी क्यों? तब क्यों नहीं जब नए हेड कोच आए और पहली सीरीज की जिम्मेदारी संभाले? ये किसका आइडिया है? किसने इंट्रोड्यूस किया? किसने कुछ दिन पहले इस ब्रोन्को टेस्ट को लागू किया? ये वो सवाल हैं जिसका मुझे उत्तर नहीं मिल रहा लेकिन ऑब्जर्वेशन कहता है कि रोहित शर्मा के लिए मुश्किल होने वाली है क्योंकि वह अपनी फिटनेस को लेकर बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करते। और मुझे लगता है कि ब्रोन्को टेस्ट के जरिए उन्हें रोक दिया जाएगा।'  

कौन हैं दानिश मालेवार? जिनकी पारी से दलीप ट्रॉफी में बना रिकॉर्ड

नई दिल्ली दलीप ट्रॉफी में 21 साल के दानिश मालेवार ने दोहरा शतक जड़ इतिहास रच दिया है। वह इस टूर्नामेंट में विदर्भ के लिए ऐसा कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी बने हैं। दानिश ने अपना यह दोहरा शतक दलीप ट्रॉफी के डेब्यू मैच में जड़ा। नोर्थ जोन रिटायर आउट होने से पहले सेंट्रल जोन के दानिश ने 203 रनों की शानदार पारी खेली। इन 203 रनों के साथ उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी 1000 रन का आंकड़ा भी छूआ। उन्होंने यह कमाल मात्र 16 पारियों में किया। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड यशस्वी जायसवाल, रूसी मोदी और अमोल मजूमदार के नाम है जिन्होंने यह कारनामा मात्र 13-13 पारियों में किया था। कौन है दानिश मालेवार? 2024 के अंत में फर्स्ट क्लास में डेब्यू करने के बाद से मालेवार तेजी से उभर रहे हैं। उन्होंने अपने पहले रणजी सीजन में 783 रन बनाए, जिसमें केरल के खिलाफ फाइनल में खेली गई 153 ​​रनों की महत्वपूर्ण पारी भी शामिल है, जिसने विदर्भ को अपना तीसरा रणजी ट्रॉफी खिताब दिलाया। वह उस सीज़न में यश राठौड़ और करुण नायर के बाद विदर्भ के लिए तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। अब, वह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में विदर्भ के पहले शतकवीर भी बन गए हैं। 2024 के रणजी ट्रॉफी नॉकआउट चरणों में उनका शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। मालेवार ने सेमीफाइनल में मुंबई के खिलाफ 79 रनों की जुझारू पारी खेली और फिर केरल के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 52.20 की औसत से सीजन खत्म किया और सीजन के पांचवें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले दानिश की तुलना अभी से राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे खिलाड़ियों से हो रही है। नागपुर में जन्मा यह खिलाड़ी भी द्रविड़ और पुजारा की तरह शांत स्वभाव का है, मगर गेंदबाजों को आड़े हाथ लेता है। केवल 10 फर्स्ट क्लास मैचों में, उन्होंने पांच बार पचास से ज्यादा का स्कोर बनाया है, कई स्कोर को शतकों में बदला है उनका औसत फिलहाल 65 के पार का है।। हालाँकि, इस युवा खिलाड़ी के लिए राह आसान नहीं रही है, क्योंकि वह एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं।