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आतंकी मसूद अजहर का नया ऑडियो जारी, सुसाइड बॉम्बरों की धमकी के बाद भारत सतर्क

वाशिंगटन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का एक सनसनीखेज ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में वह भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए दावा कर रहा है कि उसके पास हजारों सुसाइड बॉम्बर तैयार हैं, जो किसी भी क्षण हमला करने के लिए बेताब हैं। तो वैश्विक मीडिया दहल जाएगा… अजहर ने डराने वाले लहजे में कहा कि एक हजार से अधिक आत्मघाती हमलावर उस पर भारत में घुसपैठ की अनुमति देने का दबाव बना रहे हैं। उसने चेतावनी दी कि यदि हमलावरों की असली संख्या उजागर हुई, तो वैश्विक मीडिया दहल जाएगा। यह ऑडियो स्पष्ट करता है कि प्रतिबंधित संगठन अभी भी बड़ी आतंकी साजिश रचने में जुटा है।   'ऑपरेशन सिंदूर' से टूटी कमर और बौखलाहट विशेषज्ञों का मानना है कि मसूद अजहर की यह धमकी उसकी बढ़ती बौखलाहट का नतीजा है। दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में जैश-ए-मोहम्मद को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई में अजहर के कई करीबी रिश्तेदार और चोटी के कमांडर मारे गए थे। जानकारों के अनुसार, जब कोई आतंकी संगठन भारी दबाव में होता है, तो वह अपने कैडर्स का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसे ऑडियो संदेश जारी करता है। जांच के घेरे में 'साजिश' और सुरक्षा की तैयारी फिलहाल यह ऑडियो सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में जैश के पास इतनी बड़ी संख्या में फिदायीन हमलावर हैं या यह केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है? हालांकि, ऑडियो की गंभीरता को देखते हुए देश की सुरक्षा में तैनात शीर्ष कमान ने निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित घुसपैठ या हमले को नाकाम किया जा सके।  

जंग की धमकी तेज: ईरान बोला– अमेरिकी हमले पर इजराइल समेत सैन्य बेस होंगे निशाने पर, प्रदर्शनकारियों को फांसी

ईरान ईरान में इस्लामी शासन को चुनौती देते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं। राजधानी तेहरान, दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद और कई अन्य इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। ईरान में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं पूरी तरह बंद हैं, जिससे वास्तविक हालात की जानकारी बाहर पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। विदेशों में आशंका जताई जा रही है कि सूचना ब्लैकआउट का फायदा उठाकर ईरानी सुरक्षा बल निर्मम कार्रवाई कर सकते हैं। इसी बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ ने अमेरिका और इजरायल को सीधी धमकी दी। संसद में “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारों के बीच उन्होंने कहा,“अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इजरायल और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने हमारे वैध लक्ष्य होंगे।” क़ालीबाफ ने यह भी कहा कि ईरान सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खतरे के संकेत मिलते ही पहले भी हमला कर सकता है। हालांकि किसी भी युद्ध का अंतिम फैसला 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथ में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कहा है कि अमेरिका ईरान के लोगों के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप से खेल मत खेलिए, वह जो कहते हैं, करके दिखाते हैं।”   मीडिया और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को ईरान पर हमले के सैन्य विकल्प सौंपे गए हैं, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। तेहरान के पुनाक इलाके में हजारों लोग सड़कों पर मोबाइल की रोशनी जलाकर प्रदर्शन करते दिखे, जबकि मशहद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। कूड़ेदानों में आग लगाई गई और सड़कों को जाम किया गया। मशहद में स्थित इमाम रज़ा दरगाह के कारण वहां के प्रदर्शन शासन के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों और उनकी मदद करने वालों को “ईश्वर का दुश्मन” माना जाएगा  यह आरोप मृत्युदंड तक ले जा सकता है। ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को तब शुरू हुए थे, जब ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख से नीचे चली गई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव में पहले से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था ने आग में घी का काम किया।

‘पिंक कोकीन’ से दहशत: अमेरिका में उभरा खतरनाक नशा, खाते ही शरीर का रंग बदलने का दावा

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई चल रही है। कैरेबियन में ड्रग बोट्स पर हमले, वेनेजुएला जैसे देशों पर सैन्य ऑपरेशन, और बड़े पैमाने पर जब्तियां। लेकिन फिर भी अमेरिका में नया खतरनाक ड्रग पिंक कोकीन (जिसे तुसी या Tuci भी कहते हैं) क्लबों और पार्टियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Axios की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग अब बड़े शहरों से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है, और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।   पिंक कोकीन आखिर है क्या? असल में यह कोकीन नहीं है, बल्कि एक खतरनाक कॉकटेल है यानी कई नशीले पदार्थों का मिश्रण। मुख्य रूप से इसमें केटामाइन (डिसोसिएटिव) और एमडीएमए (एक्सटेसी) होते हैं। जांच में अक्सर मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स, फेंटानिल जैसे घातक तत्व भी मिलते हैं। ऊपर से इसे आकर्षक बनाने के लिए गुलाबी फूड कलरिंग मिलाई जाती है, जो देखने में 'कूल' लगता है। यही वजह है कि हर बैच अलग होता है। कोई हल्का लगता है, तो कोई सीधे जान ले लेता है। ओवरडोज होने पर सांस रुक सकती है, दिल की धड़कन बिगड़ सकती है, और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से नीला पड़ना ( Cyanosis) जैसी स्थिति आ सकती है। यह ड्रग नहीं, जहर है दरअसल, हाल के महीनों में अमेरिका के कई बड़े शहरों जैसे लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में पिंक कोकीन से जुड़े छापे और चेतावनियां जारी हुई हैं। 2025 में न्यूयॉर्क में एक तस्करी केस में पिंक कोकीन के साथ दर्जनों हथियार जब्त किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 तक कई मौतें इससे जुड़ी पाई गईं। बताया जा रहा है कि 2024 की शुरुआत से अब तक चार राज्यों में कम से कम 18 मामले सामने आए, जिनमें ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। कहां से शुरुआत? अब सवाल उठता है कि इसकी शुरुआत कहां से हुई? बताया जाता है कि इसकी शुरुआत कोलंबिया से मानी जाती है, जहां इसे क्लब और पार्टी ड्रग के तौर पर पेश किया गया। वहां इसे 2सी (एक साइकेडेलिक ड्रग) से प्रेरित होकर 'तुसी' नाम दिया गया और गुलाबी रंग को ब्रांडिंग बना दिया। धीरे-धीरे यह लैटिन अमेरिका से अमेरिका और यूरोप तक फैल गया। एक्सपर्ट का कहना है कि पिंक कोकीन अब सिर्फ एक ड्रग नहीं, बल्कि एक 'कॉन्सेप्ट' बन चुका है। तस्करों को किसी फिक्स सप्लाई की जरूरत नहीं है, जो भी नशे उपलब्ध हों, उन्हें मिलाकर नया बैच तैयार कर देते हैं। यह कैसे बन जाता है जानलेवा? रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा यह है कि पिंक कोकीन का कोई सीधा इलाज या एंटीडोट नहीं है। डॉक्टर और फर्स्ट रिस्पॉन्डर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं, जब तक नशा शरीर से बाहर न निकल जाए। कई बार जान बचाना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब यह ड्रग सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण इलाकों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

चीन से पाक तक जुड़े तार, ताइवानी सरगना निकला डिजिटल ठगी का मास्टरमाइंड; 100 करोड़ की ठगी उजागर

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।   कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं। यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं। फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए। जांच और गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई। सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे। ताइवानी कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साजिश फॉरेंसिक जांच से खुलासा हुआ कि SIM बॉक्स डिवाइस ताइवानी नागरिकों द्वारा सप्लाई और कॉन्फिगर किए गए थे। इनका समन्वय एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए किया जा रहा था। पुलिस ने रणनीतिक जाल बिछाकर ताइवान के नागरिक आई-त्सुंग चेन (30) को भारत बुलाया और 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, चेन इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था और कथित तौर पर ताइवान-आधारित अपराधी गिरोह के लिए काम कर रहा था, जिसका नेतृत्व गैंगस्टर शांगमिन वू करता है। पाकिस्तान, क्रिप्टो और दक्षिण भारत तक फैला नेटवर्क जांच आगे बढ़ने पर मोहाली (पंजाब) में SIM बॉक्स हब मिला, जहां से सरबदीप सिंह और जसप्रीत कौर को गिरफ्तार किया गया। दोनों पहले कंबोडिया स्थित स्कैम कॉल सेंटर्स में काम कर चुके थे। आरोप है कि एक पाकिस्तानी हैंडलर इस नेटवर्क को फंडिंग और दिशा-निर्देश दे रहा था। जांच में पाकिस्तान-ऑरिजिन IMEI नंबरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिसे पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता मान रही है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल का खुलासा हुआ, जहां से दिनेश के. को गिरफ्तार किया गया। वहीं मुंबई के मलाड इलाके से एक और SIM बॉक्स सेटअप बरामद हुआ और अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी विस्तृत और अत्याधुनिक था। जांच में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों और बाकी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों की तलाश जारी है। यह मामला भारतीय नागरिकों के खिलाफ भय और आतंक के नाम पर चलाए गए संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध को उजागर करता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और ऐसी धमकियों पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की है।

देशभर में टेरर का नेटवर्क: 6 गैंग का मास्टरमाइंड असली रहमान डकैत सूरत में दबोचा गया

सूरत रहमान डकैत की दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है… इस एक डायलॉग ने फिल्म धुरंधर में निभाए एक किरदार ने अक्षय खन्ना को सदा के लिए लोगों का दीवाना बना दिया है। लोगों को फिल्म से ही मालूम चला कि पाकिस्तान के लियारी में खौफ का दूसरा नाम रहे रहमान की कितनी दहशत थी,लेकिन हम आपसे कहें कि भारत में भी एक रहमान डकैत है, तो शायद आप चौंक जाएं। गुजरात के सूरत में पुलिस को कई राज्यों तक फैले नेटवर्क और गैंग चलाकर खतरनाक वारदात को अंजाम देने वाले रहमान डकैत को गिरफ्तार किया है। रहमान डकैत का नाम असल में राजू ईरानी ऊर्फ आबिद अली उर्फ रहमान डकैत है। एमपी का ये खतरनाक अपराधी सूरत क्राइम ब्रांच ने बकायदा भारत के असल अपराधी रहमान डकैत की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि सूरत सिटी क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय इरानी गैंग के सरदार आबिद अली उर्फ राजू उर्फ रहमान डकैत को सूरत में किसी वारदात को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। वह कई राज्यों में अपराध करने के लिए जाना जाता है। यह एक 'इरानी गैंग' है जो अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है, यानी यह गैंग एक से अधिक राज्यों में अपराध करता है। बता दें कि राजू ईरानी उर्फ रहमान डकैत असल में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का रहने वाला है। सूरत क्राइम ब्रांच के डीसीपी भावेश रोजिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि रहमान डकैत सूरत में किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से आया था, हमें जैसे ही सूचना मिली हमने उसे पकड़ लिया। कई चौंकाने वाले खुलासे पुलिस की पूछताछ में इस खतरनाक अपराधी के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी राजू ईरानी भोपाल के ‘ईरानी डेरा’ इलाके से अपना पूरा नेटवर्क चलाता है। वह अपने भाई जाकिर अली के साथ मिलकर इस पूरे गिरोह को संभालता है। इनके नीचे 6 से ज्यादा अलग-अलग गैंग काम कर रहे हैं, जो देश के 14 राज्यों में सक्रिय हैं। राजू ईरानी फिलहाल 6 से अधिक राज्यों की पुलिस की तलाश में है और उसके खिलाफ 10 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं। राजू उर्फ रहमान डकैत खुद अपराध करने कम जाता था। वह एक मैनेजर की तरह यह तय करता था कि कौन सी गैंग किस राज्य में जाएगी और क्या काम करेगी। यह गिरोह ज्यादातर सीनियर सिटीजन (बुजुर्गों) को अपना शिकार बनाता था। कभी खुद को पुलिस या CBI अफसर बताकर लोगों को डराते और उनके गहने उतरवा लेते थे। रास्ते में फर्जी चेकिंग के बहाने लोगों की नकदी और जेवर लूट लेते थे। लूट के अलावा यह गिरोह जमीनों पर कब्जा करने, अवैध हथियार रखने और चोरी का सामान बेचने जैसे कामों में भी शामिल है।  

‘आक्रमणकारी चले गए, आस्था बची रही’— सोमनाथ मंदिर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

सोमनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई भव्य शौर्य यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं की स्मृति में निकाली गई, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। यात्रा को साहस, बलिदान और वीरता का प्रतीक बताया गया। शौर्य यात्रा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह इसे अपना बड़ा सौभाग्य मानते हैं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस स्वाभिमान पर्व की सेवा का अवसर मिला। उन्होंने देश और दुनिया से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए “जय सोमनाथ” का उद्घोष किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह समय, यह वातावरण और यह उत्सव अपने आप में अद्भुत है। एक ओर भगवान महादेव की उपस्थिति, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रोच्चार की गूंज और भक्तों की आस्था, यह सब मिलकर इस पर्व को दिव्य बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गौरव, गरिमा और आध्यात्मिक अनुभूति का संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने 72 घंटे तक चले अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने बताया कि ड्रोन शो के जरिए सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्षों के इतिहास को दर्शाया गया, जिसमें वैदिक गुरुकुलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि 108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की प्रस्तुति अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रही, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। 1000 साल पुराने इतिहास का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और विश्वास की रक्षा के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि आक्रांता यह सोचते रहे कि उन्होंने सोमनाथ को नष्ट कर दिया, लेकिन हजार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर उसी शान से खड़ा है और भारत की शक्ति का प्रतीक बना हुआ है। 'आक्रांता इतिहास बन गए, सोमनाथ आज भी अडिग' : पीएम पीएम मोदी ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक जिन आक्रांताओं ने सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश की, वे इतिहास के पन्नों में सिमट गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी सागर तट पर अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का अर्थ ही अमरता और शक्ति से जुड़ा है, जो विनाश के बाद भी पुनर्निर्माण का संदेश देता है। सोमनाथ का इतिहास हार नहीं, विजय का है प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश या पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने बताया कि यह पर्व केवल विध्वंस की याद नहीं, बल्कि हजार वर्षों की यात्रा और भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि यह वर्ष विशेष है, क्योंकि एक ओर सोमनाथ पर पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, वहीं 1951 में हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। आजादी के बाद मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध हुआ था प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद कुछ लोगों ने सोमनाथ जैसे पवित्र स्थलों से दूरी बनाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इतिहासकारों और नेताओं ने आक्रांताओं के अत्याचारों को छिपाने का प्रयास किया और धार्मिक हमलों को केवल लूट तक सीमित बताया गया। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा सोमनाथ के पुनर्निर्माण की घोषणा का भी विरोध हुआ था और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। 'आज भी भारत को बांटने की ताकतें सक्रिय' : पीएम पीएम मोदी ने कहा कि जो ताकतें पहले तलवारों से हमला करती थीं, वे आज अलग-अलग रूपों में भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट और सतर्क रहकर ऐसी साजिशों का मुकाबला करना होगा। भारत ने दिल जीतने का रास्ता दिखाया प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत की सभ्यता घृणा नहीं, बल्कि प्रेम और सृजन का मार्ग दिखाती है। भारत ने दुनिया को दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतना सिखाया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का हजार साल का इतिहास हमें आने वाले हजार वर्षों के लिए भी प्रेरणा देता रहेगा।  

भारत में 100 करोड़ की ‘डिजिटल डकैती’ का भंडाफोड़

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं। यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं। फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए। जांच और गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई। सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे। ताइवानी कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साजिश फॉरेंसिक जांच से खुलासा हुआ कि SIM बॉक्स डिवाइस ताइवानी नागरिकों द्वारा सप्लाई और कॉन्फिगर किए गए थे। इनका समन्वय एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए किया जा रहा था। पुलिस ने रणनीतिक जाल बिछाकर ताइवान के नागरिक आई-त्सुंग चेन (30) को भारत बुलाया और 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, चेन इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था और कथित तौर पर ताइवान-आधारित अपराधी गिरोह के लिए काम कर रहा था, जिसका नेतृत्व गैंगस्टर शांगमिन वू करता है। पाकिस्तान, क्रिप्टो और दक्षिण भारत तक फैला नेटवर्क जांच आगे बढ़ने पर मोहाली (पंजाब) में SIM बॉक्स हब मिला, जहां से सरबदीप सिंह और जसप्रीत कौर को गिरफ्तार किया गया। दोनों पहले कंबोडिया स्थित स्कैम कॉल सेंटर्स में काम कर चुके थे। आरोप है कि एक पाकिस्तानी हैंडलर इस नेटवर्क को फंडिंग और दिशा-निर्देश दे रहा था। जांच में पाकिस्तान-ऑरिजिन IMEI नंबरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिसे पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता मान रही है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल का खुलासा हुआ, जहां से दिनेश के. को गिरफ्तार किया गया। वहीं मुंबई के मलाड इलाके से एक और SIM बॉक्स सेटअप बरामद हुआ और अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी विस्तृत और अत्याधुनिक था। जांच में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों और बाकी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों की तलाश जारी है। यह मामला भारतीय नागरिकों के खिलाफ भय और आतंक के नाम पर चलाए गए संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध को उजागर करता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और ऐसी धमकियों पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की है।

शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला कर गाड़ी पर बरसाईं लाठियां

पश्चिम मेदिनीपुर. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर शनिवार रात पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना में हमला हुआ। भाजपा नेता ने इसे लेकर तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए पुलिस चौकी के अंदर धरना दिया। अधिकारी के अनुसार, यह घटना रात करीब 8:20-8:30 बजे गरबेटा पुलिस थाना क्षेत्र के चंद्रकोना रोड बाजार इलाके के पास हुई, जब वह पुरुलिया में जनसभा को संबोधित करने के बाद नंदीग्राम लौट रहे थे। भाजपा कार्यकर्ता उन्हें लेने के लिए रास्ते में जमा हुए थे, तभी आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक समूह ने अचानक चौराहे पर काफिले को रोक दिया। भाजपा ने आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी की गाड़ी पर बांस की लाठियों और डंडों से हमला किया गया और दोनों पक्षों की ओर से नारे लगाए गए। बताया जा रहा है कि यह झड़प आम रास्ते पर करीब एक घंटे तक चली। अधिकारी का दावा है कि लंबे समय तक चले इस हंगामे के बावजूद पुलिसकर्मियों ने मौके पर हस्तक्षेप नहीं किया। अधिकारी ने अपने फेसबुक हैंडल पर लिखा, 'रात करीब 8:20 बजे, जब मैं पुरुलिया से लौट रहा था, चंद्रकोना रोड, पश्चिम मेदिनीपुर जिले में टीएमसी के गुंडों ने मुझ पर बेरहमी से हमला किया। ममता बनर्जी सरकार की हिंसा और दंडमुक्ति की संस्कृति से उत्साहित इन कायरों ने ममता पुलिस की मौजूदगी में मुझ पर हमला किया। कानून के रखवाले मूक दर्शक बनकर खड़े रहे।' जमीन पर बैठकर दिया धरना शुभेंदु अधिकारी चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी में घुस गए और जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने घोषणा की कि जब तक हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे परिसर नहीं छोड़ेंगे। पुलिस चौकी पर अधिकारी ने एक वकील की मदद से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त बल को इलाके में भेजा गया है और घटना की जांच की जाएगी ताकि पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ था। भाजपा की आई कड़ी प्रतिक्रिया इस घटना पर केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और एक्स पर एक कड़ा बयान पोस्ट किया। मजूमदार ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, 'पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पूर्ण पतन अब बहस का विषय नहीं रहा, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विफल और निरंकुश शासन में, उनकी पूरी तरह से पक्षपाती, अक्षम और रीढ़विहीन पुलिस प्रशासन की मदद से यह हर दिन खुलेआम प्रदर्शित हो रहा है।' उन्होंने कहा कि नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के माननीय नेता सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर हिंसक और सुनियोजित हमले का शिकार हुए।

सीरिया में ऑपरेशन चलकर ISIS के ठिकानों पर US ने बरपाया कहर

न्यूयार्क. अमेरिका शनिवार की रात ईरान में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के ठिकानों पर कहर बनकर टूट पड़ा। इसे तीम अमेरिकी नागरिकों की मौत के बदले के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका के विदेश विभाग और सेंट्रल कमांड ने वीडियो जारी कर पूरी तस्वीर दुनिया के सामने रखी है। आपको बता दें कि यह कार्रवाई "ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक" का हिस्सा है, जिसे पिछले महीने अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले का बदला लेने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शुरू किया गया था। सेंट्रल कमांड द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को बेस से उड़ान भरते और सीरिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो फुटेज में कई ठिकानों को हवाई हमलों में ध्वस्त होते दिखाया गया है। पलमायरा हमले का प्रतिशोध अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि ये हमले 13 दिसंबर 2025 को पलमायरा में हुए उस हमले का जवाब हैं, जिसमें एक ISIS आतंकवादी ने घात लगाकर हमला किया था। इस दुखद घटना में आयोवा नेशनल गार्ड के दो बहादुर सैनिक, एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार (25) और विलियम नथानिएल हॉवर्ड (29) शहीद हुए थे। एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की भी जान गई थी। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद से सीरिया में अमेरिकी बलों पर यह पहला प्राणघातक हमला था। हम तुम्हें ढूंढ लेंगे और मार देंगे सेंट्रल कमांड ने वीडियो के साथ जारी बयान में आतंकियों को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। सेना ने कहा, "हमारा संदेश बहुत मजबूत है। यदि आप हमारे योद्धाओं को नुकसान पहुंचाएंगे, तो हम आपको दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढ निकालेंगे और खत्म कर देंगे। आप न्याय से बचने के लिए कितनी भी कोशिश कर लें, सफल नहीं होंगे।" क्या है ऑपरेशन हॉकआई यह ऑपरेशन 19 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब पहले चरण में मध्य सीरिया में करीब 70 ठिकानों को नष्ट किया गया था। इस अभियान में अमेरिका के साथ जॉर्डन की सेना भी सक्रिय रूप से शामिल है। शनिवार के इन हवाई हमलों से ठीक एक दिन पहले सीरियाई सुरक्षा बलों ने 'लेवेंट' क्षेत्र में ISIS के मुख्य सैन्य कमांडर को गिरफ्तार करने का दावा किया था। 2010 के दशक के मध्य में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर ISIS के कब्जे के बाद से ही अमेरिकी सेना वहां मौजूद है। वर्तमान में भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक सीरिया में तैनात हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से खत्म करना और भविष्य के हमलों को रोकना है।

लश्कर के नंबर 2 आतंकी ने पाकिस्तान के स्कूल में भाषण देकर करवाई थू-थू

इस्लामाबाद. लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है। सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, 'पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?' यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था। आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।