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ईरान के राष्ट्रपति ने अल्लाह के खिलाफ युद्ध बताकर दी सजा-ए-मौत की चेतावनी

तेहरान. ईरान में आर्थिक तंगी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब अपने दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं। इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल ने प्रदर्शनकारियों को 'अल्लाह का शत्रु' घोषित करते हुए उन्हें फांसी की सजा देने की धमकी दी है। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर बयान देते हुए कहा कि जो कोई भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या दंगाइयों की मदद कर रहा है, उसे 'मोहारेबेह' (अल्लाह के खिलाफ युद्ध) का दोषी माना जाएगा। ईरानी कानून के तहत इस अपराध की सजा सिर्फ मौत है। उन्होंने निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और दया के इन लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी संकेत दिए हैं कि देशव्यापी स्तर पर अब बड़ा क्रैकडाउन शुरू किया जा सकता है। ईरान ने बाहरी दुनिया से संपर्क काटने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद, मानवाधिकार संस्थाओं से मिली जानकारी के अनुसार हालात बेहद चिंताजनक हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के अनुसार, अब तक कम से कम 72 लोग मारे गए हैं। प्रदर्शनों के दौरान 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, गचसरन में बासिज बल के 3 सदस्य मारे गए हैं और हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा अधिकारियों की मौत की खबरें हैं। ट्रंप सरकार की ईरान को सख्त चेतावनी अमेरिका ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, "अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है।" वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खेल न खेलें। जब वे कुछ कहते हैं, तो उसका मतलब होता है। क्या है इस गुस्से की वजह? प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था के कारण हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल अब तक के सबसे निचले स्तर 1.4 मिलियन (14 लाख) प्रति डॉलर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम की वजह से आम जनता दाने-दाने को मोहताज है। अब यह आर्थिक गुस्सा सीधे तौर पर देश की धार्मिक सत्ता को चुनौती देने वाले राजनीतिक विद्रोह में बदल गया है।

ओवैसी बोले-हिजाब वाली को अपना पार्टी अध्यक्ष बनाओ

मुंबई. 10 जनवरी को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कुछ ऐसा बोल दिया जिसने राजनीतिक गलियारों में तूफान मचा दिया। ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है, चाहे वह हिजाब पहनने वाली महिला हो। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संविधान की तुलना की और कहा कि पाकिस्तान में केवल एक खास धर्म के व्यक्ति ही शीर्ष पदों पर पहुंच सकते हैं, जबकि भारत का संविधान सभी को समान अवसर देता है। इस पर भाजपा ने तीखा पलटवार करते हुए ओवैसी से कहा कि व पहले अपनी पार्टी की अध्यक्ष को हिजाब पहनने वाली महिला को बनाएं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले महाराष्ट्र के सोलापुर में शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "पाकिस्तान के संविधान के अनुसार, वहां केवल एक धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है, लेकिन डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी नागरिक महापौर, राज्य का मुख्यमंत्री, या यहां तक कि देश का प्रधानमंत्री भी बन सकता है। उन्होंने कहा, "इंशाअल्लाह, वह दिन आएगा जब न तो मैं और न ही वर्तमान पीढ़ी जीवित रहेगी लेकिन हिजाब पहनने वाली एक बेटी भारत की प्रधानमंत्री जरूर बनेगी।" ओवैसी ने सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि वह दिन जरूर आएगा… मुसलमानों के खिलाफ जो नफरत फैलायी जा रही है, वह ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।" BJP का तीखा पलटवार ओवैसी के बयान पर भाजपा ने तुरंत करारा जवाब दिया। विभिन्न नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और विभाजनकारी बताया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा- संविधान के अनुसार कोई रोक नहीं है, कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है। लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र और हिंदू सभ्यता वाला देश है। हमें पूरा भरोसा है कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही रहेगा। BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ओवैसी को खुली चुनौती देते हुए कहा- संविधान किसी को नहीं रोकता, लेकिन ओवैसी मियां, पहले आप अपनी पार्टी AIMIM का अध्यक्ष किसी पसमांदा मुस्लिम या हिजाब/बुर्का पहनने वाली महिला को बनाकर दिखाएं। बड़े सपने देखने से पहले अपनी पार्टी में समावेशिता दिखाइए। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी तीखा हमला बोला- यह हिंदू राष्ट्र है, जहां 90% आबादी हिंदू है। हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिलाएं प्रधानमंत्री या मुंबई की मेयर नहीं बनेंगी। ऐसे लोगों के लिए यहां कोई जगह नहीं है। अगर इतना ही शौक है तो इस्लामिक देशों (जैसे इस्लामाबाद या कराची) में जाकर सपने पूरे करें। यह पूरा विवाद महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के बीच उठा है, जहां BJP और सहयोगी दलों ने मुंबई महापौर को हिंदू-मराठी बनाने पर जोर दिया है। ओवैसी ने इसे चुनावी राजनीति करार दिया और अल्पसंख्यकों व युवाओं से लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी की अपील की। भाजपा के सांसद अनिल बोंदे ने ओवैसी के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि हैदराबाद के सांसद आधा सच पेश कर रहे हैं। बोंदे ने दावा किया कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब नहीं पहनना चाहतीं। बोंदे ने ईरान में महिलाओं द्वारा हिजाब के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए दावा किया कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब नहीं चाहतीं क्योंकि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

अजीत डोभाल आज भी फोन और इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करते

नई दिल्ली. आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं। डोभाल ने कहा, "फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए। उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से। कौन हैं अजीत डोभाल? अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में 'कीर्ति चक्र' पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। पाकिस्तान में 7 साल 'अंडरकवर' अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक 'अंडरकवर' एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

मेयर ममदानी के न्यूयॉर्क की सड़कों पर हमास के समर्थन में नारेबाजी

न्यूयॉर्क. अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान "हम हमास का समर्थन करते हैं" के नारों ने राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। यह नारेबाजी क्वींस के एक प्रमुख यहूदी बहुल इलाके में की गई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेयर जोहरान ममदानी सहित कई शीर्ष नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को फिलिस्तीनी झंडे लहराते और हमास के समर्थन में नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि हमास को अमेरिकी सरकार द्वारा एक आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। यह घटना तब हुई जब प्रदर्शनकारी एक ऐसे पड़ोस से गुजर रहे थे जहां यहूदी आबादी अधिक है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इन नारों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए कहा कि आतंकवादी संगठनों का समर्थन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने एक्स पर लिखा, "आतंकवादी संगठन के समर्थन में नारों के लिए हमारे शहर में कोई जगह नहीं है। हम यह सुनिश्चित करना जारी रखेंगे कि न्यूयॉर्क के लोग बिना किसी डर के अपने इबादतगाहों में आ-जा सकें, साथ ही हम विरोध करने के संवैधानिक अधिकार की भी रक्षा करेंगे।" दिग्गज नेताओं ने जताई नाराजगी इस घटना पर न्यूयॉर्क की गवर्नर और कांग्रेस की वरिष्ठ सदस्य ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। गवर्नर कैथी होचुल ने कहा, "हमास एक आतंकी संगठन है जो यहूदियों के नरसंहार का आह्वान करता है। आपकी राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, इस तरह की बयानबाजी घृणित और खतरनाक है। न्यूयॉर्क में इसके लिए कोई जगह नहीं है।" कांग्रेस महिला ओकासियो-कोर्टेज ने इसे यहूदी विरोधी हरकत बताया। उन्होंने कहा, "एक यहूदी बहुल इलाके में जाकर 'हम हमास का समर्थन करते हैं' के नारे लगाना बेहद घृणित है।" मेयर के पुराने बयानों पर उठे सवाल मेयर ममदानी द्वारा इस बार हमास की निंदा करने पर उनके पुराने बयानों की भी चर्चा शुरू हो गई है। पिछले साल अक्टूबर में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान जब उनसे हमास की निंदा करने को कहा गया था, तब उन्होंने सीधे तौर पर ऐसा करने से इनकार कर दिया था और चर्चा को न्यूयॉर्क की महंगाई और खर्चों की ओर मोड़ दिया था। हालांकि, ताजा घटना के बाद उन्होंने अपने रुख में बदलाव दिखाया है।

सहमति वाला प्यार अपराध नहीं, SC ने सुझाया ‘रोमियो-जूलियट’ क्लॉज

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए POCSO अधिनियम के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए एक पवित्र और नेक इरादे का प्रतीक है, लेकिन कई मामलों में यह बदले की भावना से इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों का खासकर उन मामलों में तेजी से दुरुपयोग हो रहा है जहां किशोरों (टीनएजर्स) के बीच सहमति से बने रिश्तों को कठोर आपराधिक कार्रवाई के तहत लाया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने और ऐसे मामलों में राहत देने के लिए 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाने पर विचार करने को कहा है, ताकि वास्तविक किशोर जोड़ों को अनावश्यक आपराधिक मुकदमों से बचाया जा सके। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले में दिए गए व्यापक निर्देशों को रद्द करते हुए केंद्र सरकार से ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ शामिल करने पर विचार करने का सुझाव दिया है। यह क्लॉज उन वास्तविक किशोर संबंधों को कानून की कठोरता से बचाने का प्रावधान देगा, जहां दोनों पक्ष सहमति से रिश्ते में हों और उम्र में मामूली अंतर हो। क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला? शीर्ष अदालत की ये टिप्पणी उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनुरुद्ध मामले में आई, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए राज्यभर में लागू होने वाले कुछ निर्देश जारी किए थे। इनमें शामिल था कि हर POCSO मामले की जांच की शुरुआत में पीड़िता की उम्र का मेडिकल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाए और अदालतें स्कूल या जन्म प्रमाणपत्रों पर संदेह होने पर जमानतें खारिज कर सकती हैं। हाईकोर्ट की सीमाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की सुनवाई करते समय अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर निर्देश जारी कर दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के लिए सुनवाई में अदालत केवल आरोपी की रिहाई या निरोध पर फैसला कर सकती है, न कि जांच प्रक्रिया में बदलाव या सामान्य निर्देश जारी कर सकती है। यह संवैधानिक शक्तियों और वैधानिक शक्तियों का अनुचित मिश्रण है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत अदालतें 'मिनी ट्रायल' नहीं कर सकतीं, न ही विवादित तथ्यों- जैसे उम्र पर अंतिम निर्णय दे सकती हैं। साथ ही, संसद द्वारा तय प्रक्रिया को दरकिनार कर कोई नया मानक भी निर्धारित नहीं किया जा सकता। सहमति वाले किशोर रिश्तों में पॉक्सो के दुरुपयोग पर चिंता हालांकि हाईकोर्ट के निर्देशों को खारिज करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े सामाजिक और कानूनी संकट की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि पॉक्सो कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण और उत्पीड़न से बचाना है, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल उन परिवारों द्वारा किया जा रहा है जो युवाओं के आपसी रिश्तों के खिलाफ हैं। कोर्ट ने कहा- पॉक्सो अधिनियम बच्चों की रक्षा के लिए बनाया गया एक अत्यंत पवित्र कानून है। लेकिन जब इस तरह के नेक उद्देश्य वाले कानून का बदले और निजी दुश्मनी के हथियार के रूप में इस्तेमाल होता है, तो न्याय की अवधारणा ही उलट जाती है। पीठ ने यह भी नोट किया कि देशभर की अदालतों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लड़की की उम्र जानबूझकर 18 साल से कम दिखाई जाती है ताकि लड़के को पॉक्सो की कठोर धाराओं में फंसाया जा सके, जबकि रिश्ता सहमति से और उम्र में बहुत कम अंतर वाला होता है। असली पीड़ित और कानून के दुरुपयोग के बीच गहरी खाई सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो के दुरुपयोग से एक गहरी असमानता पैदा होती है। एक ओर वे बच्चे हैं जिन्हें वास्तव में संरक्षण की जरूरत है, लेकिन गरीबी, डर और सामाजिक कलंक के कारण वे न्याय व्यवस्था तक नहीं पहुंच पाते। दूसरी ओर, वे लोग हैं जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक संसाधनों के बल पर कानून का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। केंद्र सरकार को भेजी गई प्रति, रोमियो–जूलियट क्लॉज का सुझाव इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की प्रति केंद्रीय विधि सचिव को भेजने का निर्देश दिया और केंद्र सरकार से कहा कि वह पॉक्सो कानून के दुरुपयोग को रोकने के उपायों पर विचार करे। अदालत ने सुझाव दिया कि कई देशों की तरह भारत में भी रोमियो–जूलियट क्लॉज लाया जा सकता है, जिससे सहमति वाले, उम्र में नजदीक किशोर रिश्तों को आपराधिक कार्रवाई से बाहर रखा जा सके। रोमियो-जूलियट क्लॉज क्या है? यह एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जो कई देशों में लागू है। इसमें उम्र में मामूली अंतर (जैसे 2-4 साल) वाले किशोरों के बीच सहमति से बने रिश्तों को यौन अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाता है, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से आपराधिक न बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस तरह का क्लॉज POCSO में जोड़ने पर विचार करने को कहा है, साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का तंत्र बनाने का सुझाव दिया है जो कानून का बदले के लिए दुरुपयोग करते हैं। वकीलों की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी अदालत ने वकीलों की भूमिका पर भी जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं को बिना सोचे-समझे ऐसे मामले दाखिल नहीं करने चाहिए, जहां साफ हो कि कानून का उपयोग बदले या दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। बार को एक फिल्टर की भूमिका निभानी चाहिए, ताकि सुरक्षा के लिए बने कानून किसी को नुकसान पहुंचाने का साधन न बनें। उम्र तय करने पर कानून की स्थिति उम्र निर्धारण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ क्रम तय है- पहले स्कूल या जन्म प्रमाण पत्र देखे जाएं। केवल तब, जब ऐसे दस्तावेज उपलब्ध न हों, मेडिकल जांच जैसे ऑसिफिकेशन टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है। मेडिकल जांच हर मामले में अनिवार्य नहीं हो सकती। अन्य कानूनों के दुरुपयोग से तुलना सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह समस्या केवल पॉक्सो तक सीमित नहीं है। Section 498A IPC और दहेज निषेध अधिनियम जैसे कानूनों के दुरुपयोग में भी यही … Read more

‘दुनिया के सबसे अमीर बच्चे’ को बुला रहा पूरा ईरान?

तेहरान. एक हाथ में रईसी थी, दूसरे में तन्हाई… और साथी था सिर्फ एक कुत्ता। 1970 के दशक की उस वायरल खबर का नायक आज ईरान की सड़कों पर गूंज रहे नारों का केंद्र बन गया है। आज ईरान की सड़कें एक बार फिर आग उगल रही हैं। दिसंबर 2025 के आखिर से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब एक राष्ट्रीय क्रांति में बदलते प्रतीत हो रहे हैं। आर्थिक संकट, महंगाई, रियाल की रिकॉर्ड गिरावट और इस्लामिक रिपब्लिक की दमनकारी नीतियों से तंग आकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा गूंज रहा है एक नाम- रजा पहलवी का। वे ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बड़े बेटे और ईरान के 'क्राउन प्रिंस' हैं। तो सवाल ये है कि वो शख्स, जिसे बचपन में दुनिया का सबसे अमीर बच्चा कहा जाता था और जिसका सबसे करीबी दोस्त सिर्फ एक कुत्ता था, वह आज 47 साल के निर्वासन के बाद भी ईरान के दिलों में क्यों जिंदा है? वह पुरानी तस्वीर और 'सोने का पिंजरा' 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में जन्मे रजा पहलवी को जन्म से ही क्राउन प्रिंस का दर्जा मिला। उनके पिता मोहम्मद रजा शाह उस वक्त ईरान के शक्तिशाली शासक थे- तेल की कमाई से देश अमीर हो रहा था और शाह का निजी साम्राज्य अरबों डॉलर का था। रजा को फ्रेंच गवर्नेस ने पाला, निजी पैलेस स्कूल में पढ़ाई हुई, बॉडीगार्ड्स 24/7 साथ रहते थे। लेकिन ये वैभव अकेलेपन के साथ आया। हाल ही सोशल मीडिया पर ईरान की एक पत्रिका की कटिंग वायरल हो रही है। यह 1978 के आसपास की है। उस समय रजा पहलवी की उम्र महज 17 साल थी। हेडलाइन में लिखा है- दुनिया का सबसे अमीर बच्चा, जिसका दोस्त सिर्फ उसका कुत्ता है। उस दौर में रजा पहलवी के पास वह सब कुछ था जो एक इंसान सपने में भी नहीं सोच सकता। अपना हवाई जहाज, कस्टम मेड कारें, महलों में सुरक्षा गार्ड और बेहिसाब दौलत। लेकिन उस रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास जो नहीं था, वह था- 'सच्चा दोस्त'। उनका सबसे करीबी साथी उनका स्पैनियल कुत्ता 'जूडी' था। यह उस दौर की बात है जब ईरान को मिडिल-ईस्ट का पेरिस कहा जाता था और रजा पहलवी उसके भविष्य के बादशाह थे। 1979 की क्रांति और सब कुछ खो जाना इस तस्वीर के छपने के कुछ ही समय बाद, रजा पहलवी की किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि किसी फिल्मी कहानी को भी मात दे दी। 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई। उनके पिता, शाह मोहम्मद रजा पहलवी को देश छोड़ना पड़ा। वह लड़का, जो 'दुनिया का सबसे अमीर बच्चा' था, अचानक 'दुनिया का सबसे हाई-प्रोफाइल रिफ्यूजी' बन गया। महलों की जगह निर्वासन ने ले ली। जिस देश पर उन्हें राज करना था, वहां उनके परिवार के लिए मौत के फरमान जारी हो गए। रजा पहलवी ने अपनी जवानी अमेरिका में एक निर्वासित राजकुमार के रूप में बिताई, अपने देश को दूर से जलते हुए देखते रहे। आज पूरा ईरान उन्हें क्यों बुला रहा है? कहानी का सबसे अहम मोड़ अब, यानी 2023-2025 के बीच आया है। आज ईरान की सड़कों पर, हिजाब विरोधी प्रदर्शनों में और सरकार विरोधी रैलियों में एक नारा अक्सर गूंजता है- रजा शाह, रूहता शाद (रजा शाह, तुम्हारी आत्मा को शांति मिले) और ए शहजादे, वापस आओ। ईरान में प्रदर्शन दिसंबर 2025 में तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए, जहां व्यापारियों ने महंगाई के खिलाफ हड़ताल की। जल्द ही ये पूरे देश में फैल गए- तेहरान, शिराज, इस्फहान, मशहद, यहां तक कि छोटे शहरों में। सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं, लेकिन लोग नहीं रुके। मौतें सैकड़ों में हैं, हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन नारे अब सिर्फ आर्थिक नहीं- पूरी तरह ब्रांडाजन के हैं। और इसी बीच रजा पहलवी ने वीडियो मैसेज जारी किए: 6 जनवरी को पहली बार उन्होंने लोगों से शाम 8 बजे एक साथ नारे लगाने को कहा। 8-9 जनवरी को फिर फ्रेश कॉल दिया- शहर के सेंटर कब्जाने, पुराना शेर और सूरज झंडा लहराने और शहरों पर कब्जा करने की अपील। उन्होंने कहा- मैं जल्द ही अपनी मातृभूमि में वापस आऊंगा। प्रदर्शनकारियों ने उनकी कॉल पर अमल किया- लाखों सड़कों पर उतरे, और नारे सिर्फ मौत बर खामनेई नहीं, बल्कि पहलवी वापस आएगा भी लगे। इसके पीछे के प्रमुख कारण: आर्थिक बदहाली: ईरान की करेंसी (रियाल) रसातल में जा चुकी है। महंगाई चरम पर है। लोगों को वह दौर याद आ रहा है जब शाह के राज में ईरान की इकोनॉमी मजबूत थी और तेल का पैसा विकास में लग रहा था। धार्मिक कट्टरता से उब चुकी जनता: महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए आंदोलनों ने यह साफ कर दिया है कि ईरान की नई पीढ़ी (Gen Z) इस्लामी गणतंत्र के सख्त नियमों (जैसे अनिवार्य हिजाब) को नहीं मानती। वे उस सेक्युलर और आधुनिक ईरान की कल्पना करते हैं, जिसका प्रतिनिधित्व पहलवी परिवार करता था। नेतृत्व का अभाव: ईरान में विपक्ष पूरी तरह बिखरा हुआ है। ऐसे में रजा पहलवी, जो अब 63 वर्ष के हैं, एक जाने-पहचाने चेहरे और 'एकता के प्रतीक' के रूप में उभरे हैं। वे लोगों के लिए उस 'खोए हुए सुनहरे दौर' की निशानी हैं। लेकिन क्या सब चाहते हैं राजशाही? नहीं। कुछ विरोधी कहते हैं कि शाह के दौर में भी दमन था (SAVAK की बदनामी), असमानता बढ़ी थी। कुछ नारे लगाते हैं: न शाह, न मुल्ला। ईरानी सेना और शासन ने प्रदर्शनों को अमेरिका और इजराइल की साजिश करार दिया है। लेकिन आज की तस्वीर में पहलवी सबसे मजबूत और सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त चेहरा हैं। दिलचस्प बात यह है कि रजा पहलवी खुद को अब 'राजा' के रूप में प्रोजेक्ट नहीं करते। हालिया इंटरव्यूज और भाषणों में उन्होंने साफ किया है कि वे राजशाही वापस लाने के लिए नहीं, बल्कि ईरान में लोकतंत्र लाने के लिए लड़ रहे हैं। वे कहते हैं- मुझे सत्ता नहीं चाहिए, मैं बस अपने लोगों को चुनने का अधिकार देना चाहता हूं। यह बदलाव उन्हें उस 17 साल के रईस बच्चे से एक परिपक्व राजनेता बनाता है।

पलक्कड़ विधायक को रेप के आरोप में क्राइम ब्रांच ने देर रात किया गिरफ्तार

तिरुवनंतपुरम. कांग्रेस से निष्कासित विधायक राहुल ममकूटाथिल को यौन उत्पीड़न के मामले में शनिवार रात पलक्कड़ से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें रविवार सुबह एक पुलिस शिविर में भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पथनमथिट्टा जिले की महिला की शिकायत के बाद पलक्कड़ के विधायक के खिलाफ हाल में यौन उत्पीड़न का तीसरा मामला दर्ज किया गया था। सूत्रों ने कहा कि उनके खिलाफ इसी तरह के दो अन्य मामलों की तफ्तीश कर रहे विशेष जांच दल (SIT) को इस ताजा मामले की छानबीन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। ममकूटाथिल पलक्कड़ के एक होटल में ठहरे हुए थे और उन्हें देर रात हिरासत में लेकर पथनमिट्टा लाया गया। पुलिस ने कहा कि उनकी औपचारिक गिरफ्तारी बाद में दर्ज होने की संभावना है। केरल उच्च न्यायालय ने इससे पहले ममकूटाथिल को पहले मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था, जो एक महिला से बलात्कार और उसे गर्भपात के लिए मजबूर करने के आरोपों से संबंधित है। दूसरे मामले में, तिरुवनंतपुरम की एक सत्र अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। इन आरोपों के बाद कांग्रेस ने ममकूटाथिल को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। मानहानि मामले में कांग्रेस नेताओं को जमानत तिरुवनंतपुरम की अदालत ने बीते दिनों कांग्रेस नेताओं (संदीप वारियर और रंजीता पुलिक्कन) को एक महिला से जुड़े ऑनलाइन मानहानि मामले में अग्रिम जमानत दे दी। इसी महिला की शिकायत पर कांग्रेस से निष्कासित विधायक राहुल ममकूटाथिल के खिलाफ बलात्कार व जबरन गर्भपात का मामला दर्ज किया गया है। तिरुवनंतपुरम की जिला और प्रधान सत्र न्यायाधीश नाज़ीरा एस. ने केरल प्रदेश कांग्रेस के नेता वारियर और महिला कांग्रेस की पथनमथिट्टा जिला सचिव पुलिक्कन की याचिकाएं मंजूर कर लीं। तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने कार्यकर्ता राहुल ईश्वर, पुलिक्कन, वकील दीपा जोसेफ, वारियर और पलक्कड़ के एक व्लॉगर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। याचिका में वारियर ने कहा कि उन्होंने महिला को बदनाम नहीं किया और लोगों ने केवल शिकायतकर्ता के विवाह समारोह की तस्वीरें साझा की थीं, जिन्हें खुद उसने पिछले साल अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया था।

क्या ईरान पर हमला करने वाला है अमेरिका?

वाशिंगटन. ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जो दिसंबर 2025 के अंत में आर्थिक कठिनाइयों से शुरू हुए थे। अब यह पूरे देश में फैल चुका है और इस्लामी गणराज्य के अंत की मांग करने वाला राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हाल ही में ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर ब्रिफिंग दी गई है। इन विकल्पों में तेहरान के चुनिंदा स्थानों, विशेष रूप से शासन की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े गैर-सैन्य ढांचों पर हमले शामिल हैं। हालांकि, अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ट्रंप प्रशासन ईरानी अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य उपायों पर विचार कर रहा है। ईरानी शासन ने विरोध को दबाने के लिए देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट लगाया है। सुरक्षा बलों की ओर से लाइव गोलीबारी और गिरफ्तारियों की खबरें आ रही हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान पहले कभी इतनी आजादी की ओर नहीं देख रहा था। अमेरिका मदद के लिए तैयार है!' मेक ईरान ग्रेट अगेन का दिया नारा रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए लिखा कि ईरानी लोगों का लंबा दुःस्वप्न जल्द खत्म होने वाला है। उन्होंने मेक ईरान ग्रेट अगेन का नारा देकर आयतुल्लाह शासन के खिलाफ मजबूत संकेत दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी जीतेंगे और मदद रास्ते में हम हैं। मानवाधिकार संगठनों और इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, 10 जनवरी को 15 प्रांतों में 60 विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें से कई मध्यम और बड़े स्तर के थे। प्रदर्शन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है, जिसमें युवा, छात्र और विभिन्न वर्ग शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को उन्मादी और अमेरिका-इजरायल के एजेंट करार दिया है।

पारा @2.9 डिग्री, खूब ठिठुर रही दिल्ली

नई दिल्ली. दिल्ली में ठंड का सितम जारी है। सुबह घना कोहरा और दिनभर चलने वाली शीतलहर लोगों को अंदर तक ठिठुरने पर मजबूर कर रही है। रविवार को भी दिल्ली की सबसे सर्द सुबह दर्ज की गई। न्यूनतम पारा 4.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। दिल्ली का आया नगर सबसे ठंडा रहा जहां न्यूबनतम पारा 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। राहत की उम्मीद लगाए दिल्लीवासियों को फिलहाल इसी कड़कड़ाती ठंड से जूझना पड़ेगा। मौसम विभाग ने शीतलहर का येलो अलर्ट भी जारी कर दिया है। सुबह कोहरे वाली दिल्ली में आज पालम, रिज और आयानगर जैसे क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। संभावना है कि शीतलहर की यह स्थिति कल भी जारी रहेगी। आज सुबह पालम एयरपोर्ट पर दृश्यता (visibility) 450 मीटर दर्ज की गई। वहीं सफदरजंग में दृश्यता 600 मीटर रही। शनिवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान गिरकर 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके साथ ही शहर के कुछ हिस्सों में बारिश भी हुई। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी भी दिल्ली के मौसम में बदलाव की जिम्मेदार है। स्टेशन अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) वर्षा (mm) सफदरजंग 20.2 4.8 000.0 पालम 16.2 3.0 000.0 लोधी रोड 20.0 4.6 000.0 रिज (Ridge) 20.0 3.7 000.0 आयानगर 19.0 2.9 000.0 आगे कैसा रहेगा मौसम? 12 जनवरी यानी सोमवार को भी शीतलहर का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इस दौरान न्यूनतमन तापमान 3-5 डिग्री तो वहीं अधिकतम 17-19 डिग्री तक रहेगा। मध्यम कोहरा भी सुबह के वक्त परेशान करक सकता है। 13 जनवरी से कोल्ड वेव से थोड़ी राहत मिल सकती है। 13 जनवरी से 16 जनवरी तक न्यूनतम तापमान 8 डिग्री तक जाएगा वहीं अधिकतम तापमान 20 डिग्री पर रहेगा। हल्के से मध्यम कोहरा परेशान कर सकता है। इस दौरान बारिश का अलर्ट नहीं है। कैसा है पलूशन का हाल? दिल्ली में वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार देखा गया है और अब यह 'बहुत खराब' (very poor) श्रेणी से सुधरकर 'खराब' (poor) श्रेणी में आ गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 298 दर्ज किया गया। हालांकि औसत में सुधार हुआ है, लेकिन दिल्ली के कई इलाकों में अब भी AQI का स्तर 300 से ऊपर बना हुआ है।

राफेल सौदे में नई रफ्तार, 114 विमानों की डील के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति दिल्ली में होंगे मौजूद

नई दिल्ली भारत का MRFA प्रोग्राम के तहत फाइटर जेट खरीदने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे संकेत मिले हैं, जिनके दम पर कहा जा रहा है कि 114 राफेल फाइटर जेट की डील जल्द फाइनल हो सकती है. दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस डील से देश की एयरोस्पेस की तस्वीर बदल जाएगी. इस डील के तहत भारत राफेल-F4 और राफेल-F5 खरीदेगा, जिसे सुपर राफेल डील भी कहा जाता है. इस डिफेंस डील के पीछे सबसे बड़ा डेवलपमेंट फ्रांसीसी राष्ट्रपति का भारत विजिट है.  फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने प्रस्तावित भारत दौरे की खुद पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि डिप्लोमैटिक कोर संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट-2026 में वे शामिल होंगे. यह समिट 19-20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित किया जाएगा. इस समिट की घोषणा पीएम मोदी ने फ्रांस में की थी.   इमैनुएल आ रहे दिल्ली मैक्रों के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम व्यापारिक और रक्षा समझौते हो सकते हैं. इस दौरान सबसे अहम समझौता रक्षा समझौता होगा. जो भारत और फ्रांस के बीच G2G होगा. यानी सरकार से सरकार के बीच डील होगी. यह दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस डील बताई जा रही है, जो भारत और फ्रांस के बीच होने जा रही है. इस डील के तहत भारत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदेगा. खास बात है कि यह डील भारत और फ्रांस की तरफ से फाइनल मानी जा रही है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसकी वजह भी भारत है. फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने तो सार्वजिक ने तौर पर डील की घोषणा कर दी थी.  भारत की तरफ से नहीं मिला AON बता दें कि पिछले दिनों फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर डील से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए थे. जिस पर भारत ने आपत्ति जताई तो फ्रांस ने दस्तावेजों को हटा लिया. वहीं भारत की बात करें तो यह डील अंतिम स्टेज में पहुंच चुकी है. डील संबंधित सभी शर्तों पर बातचीत हो चुकी है. इस प्रोजेक्ट में भारत की तरफ से MRFA और सरकार दोनों शामिल हैं. अभी तक MRFA प्रोजेक्ट में मुख्य भूमिका निभा रहा था. अब सिर्फ  Acceptance of Necessity (AoN) बाकी है.  G2G डील होगी फाइनल IAF से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार सीधे डसॉल्ट एविएशन से बातचीत करना चाह रही है.  इससे लंबे और जटिल MRFA टेंडर प्रोसेस को दरकिनार किया जा सकता है, जिसमें आमतौर पर 4–5 साल लग जाते हैं. वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी चाहते हैं कि यह सौदा पहले की तरह सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल पर हो, ताकि फाइटर स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा किया जा सके. इस समय IAF की स्क्वाड्रन संख्या तय मानक से काफी कम है. अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान इस डील को राजनीतिक स्तर पर बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है. नागपुर बनेगा राफेल सिटी सूत्रों का कहना है कि 114 राफेल जेट्स का ऑर्डर लगभग तय माना जा रहा है और इनका निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए Dassault की सब्सिडियरी भारत में प्रोडक्शन लाइन लगाएगी. यह फैक्ट्री सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में राफेल के एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी काम कर सकती है.  राफेल का निर्माण नागपुर स्थित Dassault Reliance Aerospace Limited (DRAL) प्लांट में किया जा सकता है. हालांकि, इस जॉइंट वेंचर की संरचना में बड़ा बदलाव संभव है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Dassault कंपनी अनिल अंबानी की Reliance Defence की हिस्सेदारी खरीदकर प्लांट का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहती है, जिसके लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी जरूरी होगी. मंजूरी मिलते ही प्लांट को फुल-स्केल फाइटर जेट प्रोडक्शन के लिए अपग्रेड किया जाएगा.