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उमर खालिद–शरजील की जमानत खारिज: यह न्याय नहीं, अन्याय की कहानी है, महबूबा की बेटी का बयान

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आया है, जहां दोनों पर UAPA के तहत साजिश रचने के आरोप लगे हैं। दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा घायल हुए थे। SC के फैसले पर ढेर सारी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इसे गर्भ में न्याय की मौत कहा है। एक्स पर उन्होंने पोस्ट करके कहा, ‘सुप्रीम कंटेम्प्ट ऑफ इंडिया, मिसकैरेज ऑफ जस्टिस।’ अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और जमानत देने का आधार नहीं बनता। पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद और कार्यकर्ता शरजील इमाम लंबे समय से जेल में हैं। एससी के ताजा फैसले से मानवाधिकार संगठनों में हलचल मच गई है, जबकि सरकारी पक्ष ने इसे कानून की जीत बताया। फैसले की सुनवाई जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने की। दोनों आरोपियों ने दावा किया था कि लंबी हिरासत उनके अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर याचिका अस्वीकार की। यह मामला CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहां भाषणों को दंगे भड़काने का माध्यम माना गया। दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। उनके खिलाफ यूएपीए और आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से 2 सितंबर को इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।  

निकलस मादुरो की गिरफ्तारी पर बेटे का ऐलान: मां की कसम, लड़ाई जारी रहेगी

वेनेजुएला वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन में गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया। इसे लेकर, मादुरो के बेटे निकोलस मादुरो गुएरा ने सोशल मीडिया पर ऑडियो मैसेज जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि इतिहास बताएगा कि गद्दार कौन था। गुएरा ने आंतरिक साजिश की आशंका जताई और कहा, 'इतिहास बताएगा कि गद्दार कौन था और यह इतिहास ही उजागर करेगा। हम देखेंगे।' वह ला गुएरा राज्य के सांसद और सत्तारूढ़ PSUV पार्टी के सदस्य हैं। गुएरा ने समर्थकों से 5 जनवरी को सड़कों पर उतरकर एकजुटता दिखाने की अपील की। उन्होंने बाहरी आक्रमण का सामना करने के लिए राजनीतिक और सैन्य एकता की जरूरत पर जोर दिया।   निकोलस मादुरो के बेटे गुएरा ने कहा कि पार्टी एकजुट रहेगी और हार नहीं मानेगी। उन्होंने अपनी मां की कसम खाते हुए भावुक अंदाज में कहा, 'हम ठीक हैं और शांत हैं। आप हमें सड़कों पर लोगों के साथ देखेंगे। वे हमें कमजोर देखना चाहते हैं, लेकिन हम गरिमा के साथ झंडा उठाएंगे। हमें दुख तो है, गुस्सा तो है, लेकिन वे जीत नहीं पाएंगे। मैं अपनी जान, अपनी मां और सिलिया की कसम खाता हूं।' वेनेजुएला में समर्थक सड़कों पर उतरने भी लगे हैं। ड्रग तस्करी की साजिश के आरोप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि बड़े पैमाने पर हमले के बाद मादुरो दंपति को काराकास से पकड़ा गया और USS इवो जिमा युद्धपोत के जरिए अमेरिका लाया गया। उन पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी की साजिश के आरोप हैं, जिनका मुकदमा न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में सोमवार को शुरू होने वाला है। यह अभियान अमेरिकी विशेष बलों की ओर से किया गया, जिसमें वेनेजुएला में कई ठिकानों पर हमले भी हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान की निंदा भी हो रही है और इसे कानून का उल्लंघन बताया जा रहा है।  

वेनेजुएला की चीनी रडार प्रणाली अमेरिकी हमले में हुई नाकाम, JYL-1 और JY-27A सिस्टम हुए पूरी तरह फेल

काराकस     दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस 'कबाड़' बन गई. अमेरिकी विशेष सेनाओं ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया. इस दौरान अमेरिकी हेलीकॉप्टर और विमान बिना किसी रोक-टोक के काराकस में घुसे. वजह? वेनेजुएला की एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फेल हो गई. खासकर चीन में बने JYL-1 लंबी दूरी के 3D सर्विलांस रडार और JY-27A एंटी-स्टेल्थ रडार एक भी अमेरिकी विमान या हेलीकॉप्टर को डिटेक्ट नहीं कर सके. ये रडार स्टेल्थ हंटर कहे जाते थे, लेकिन अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से अंधे हो गए. वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने क्या बताया था इस साल की शुरुआत में, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि वेनेजुएला की सेना ने चीन निर्मित JY-27A एंटी-स्टील्थ रडार का उपयोग करके 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांच अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों को सटीक रूप से निशाना बनाया था। हालांकि, अमेरिकी हवाई हमले के दौरान यह रडार सिस्टम कथित तौर पर "पूरी तरह से निष्क्रिय" हो गया। ऐसी आशंका है कि अमेरिका ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के जरिए JY-27A एंटी-स्टील्थ रडार को जाम कर दिया। इससे अमेरिकी सेना को बिना किसी रोक-टोक के वेनेजुएला में घुसने का मौका मिला। चीनी रडार सिस्टम का इस्तेमाल करता है वेनेजुएला वेनेजुएला अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा के लिए कई चीनी रडार का इस्तेमाल करता है। इनमें चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन का JYL-1 लंबी दूरी का निगरानी रडार और "एंटी-स्टील्थ हथियार" JY-27 रडार शामिल हैं। JY-27 रडार मीटर वेव फिक्वेंसी बैंड (240-390MHz) का इस्तेमाल कर स्टील्थ लड़ाकू विमानों को डिटेक्ट करता है। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने एक बार दावा किया था कि 2025 तक, उन्होंने 300 किलोमीटर से अधिक की पहचान सीमा के साथ अमेरिकी F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान का कई बार सफलतापूर्वक पता लगा लिया था। कुछ रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि लॉक-ऑन रेंज 75 से 500 किलोमीटर तक है। वेनेजुएला में चीन के 12 रडार फेल रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रडार, एस-बैंड जेवाईएल-1 और जेवाई-11बी रडारों के साथ मिलकर, लंबी दूरी की प्रारंभिक चेतावनी और सटीक स्थिति निर्धारण को मिलाकर एक एयर डिफेंस नेटवर्क बनाता है। यह रूसी निर्मित एस-300वीएम और बुक वायु रक्षा मिसाइलों को निर्देशित करके हमले भी कर सकता है, जिससे एक बंद-लूप "डिटेक्शन-लॉक-इंटरसेप्शन" प्रणाली का निर्माण होता है। वेनेजुएला ने कम से कम 12 ऐसे रडार तैनात किए हैं, जिससे एक राष्ट्रव्यापी एंटी-स्टील्थ निगरानी नेटवर्क का निर्माण हुआ है, जो चीन के असममित रक्षा प्रौद्योगिकी निर्यात का एक विशिष्ट उदाहरण बन गया है। वेनेजुएला में चीनी एयर डिफेंस भी नाकाम इसके अतिरिक्त, वेनेजुएला ने चीनी FK-3 (HQ-12 का एक्सपोर्ट वेरिएंट) मध्यम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम को भी शामिल की है, जो चीनी रडार सिस्टमों के साथ मिलकर राजधानी काराकस और प्रमुख स्थानों की सुरक्षा करता है। हालांकि, वेनेजुएला में तैनात ये चीनी एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी हवाई हमलों का पता लगाने में नाकाम रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हमले के कुछ घंटों पहले अमेरिका ने शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध शुरू किया था। इसमें वेनेजुएला के रडार को निष्क्रिय करने के लिए विद्धुत चुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल किया गया। इसने वेनेजुएला के एयर डिफेंस को नाकाम कर दिया और वह लगभग अंधा हो गया।   वेनेजुएला ने चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप से कई रडार खरीदे थे…     JYL-1: लंबी दूरी (300-470 किमी) का 3D रडार, हवा की निगरानी के लिए.     JY-27/JY-27A: मीटर-वेव बैंड रडार, जो स्टेल्थ विमानों (जैसे F-35) को पकड़ने का दावा करता है. डिटेक्शन रेंज 300-500 किमी बताई जाती है. ये रडार दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस का हिस्सा थे, साथ में रूसी S-300 और Buk-M2 मिसाइल सिस्टम. चीनी मीडिया ने पहले दावा किया था कि ये रडार अमेरिकी F-35 को 75 किमी दूर ट्रैक कर सकते हैं. लेकिन अमेरिकी हमले में ये पूरी तरह पैरालाइज हो गए. अमेरिका ने EA-18G ग्राउलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमानों से जैमिंग की, जिससे रडार ब्लाइंड हो गए. शुरुआती हमलों में ही एयर डिफेंस नेटवर्क खत्म हो गया. पाकिस्तान से मिलती-जुलती नाकामी यह पहली बार नहीं जब चीनी रडार फेल हुए हैं. 2025 की ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान की एयर डिफेंस को आसानी से तोड़ा. पाकिस्तान के चीनी रडार (HQ-9, LY-80 आदि) भारतीय मिसाइलों और ड्रोनों को डिटेक्ट नहीं कर सके. भारत ने लाहौर समेत कई जगहों पर रडार साइट्स नष्ट कर दीं. पाकिस्तान की चीनी सप्लाई वाली डिफेंस सिस्टम ब्लाइंड हो गई, ठीक वेनेजुएला जैसा. पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ्रीकी देशों और अब वेनेजुएला में चीनी हथियारों की नाकामी का पैटर्न साफ है. असल लड़ाई में ये सिस्टम अमेरिकी या भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के सामने टिक नहीं पाते. क्यों फेल होते हैं चीनी रडार?     इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग: अमेरिका जैसे देशों के पास एडवांस जैमिंग टेक्नोलॉजी है, जो रडार सिग्नल को ब्लॉक कर देती है.     ऑपरेटर ट्रेनिंग और मेंटेनेंस: कई देशों में रखरखाव की कमी और ट्रेनिंग कम होती है.     हाइप vs रियलिटी: चीनी मीडिया में बड़े-बड़े दावे, लेकिन असल जंग में कमजोर पड़ जाते हैं. यह घटना चीनी मिलिट्री इक्विपमेंट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है. वेनेजुएला की सबसे मजबूत एयर डिफेंस कुछ घंटों में कबाड़ बन गई. पाकिस्तान की तरह, यहां भी चीनी टेक्नोलॉजी ने निराश किया. भविष्य में ऐसे हथियार खरीदने वाले देश सोचेंगे दो बार.

ठंड का कहर! IMD ने किया दो दिनों के लिए घने कोहरे और शीतलहर का अलर्ट जारी

नई दिल्ली उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप और बढ़ गया है। राजधानी नई दिल्ली में दिन का तापमान गिरा है और राजस्थान के कई हिस्सों में कोहरे के कारण दृश्यता बहुत कम है। कश्मीर में भी तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में घाटी के ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश या हिमपात का पूर्वानुमान जताया है। IMD ने 5-6 जनवरी को उत्तर और मध्य कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या हिमपात का अनुमान जताया गया है। इसने बताया कि उत्तराखंड के कुछ इलाकों में 6 जनवरी को बारिश या हिमपात हो सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले तीन दिन मध्य और पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है, जिसके बाद अगले चार दिनों तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। अगले पांच दिनों में गुजरात में न्यूनतम तापमान बढ़ने की संभावना है। भारत के शेष हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव का पूर्वानुमान नहीं है, जहां ठंड का प्रकोप बना रहेगा। सुबह और शाम के वक्त घने कोहरे की मार अभी जारी रहने वाली है। 6 जनवरी तक और बिगड़ेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में रविवार को अधिकतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसम के औसत से 2 डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक है। 6 जनवरी तक शीतलहर का प्रकोप बना रहेगा। वहीं, राजस्थान में कुछ स्थानों पर मध्यम से घना कोहरा छाया हुआ है। सीकर जिले के फतेहपुर में न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। न्यूनतम तापमान लूणकरनसर में 2.8 डिग्री सेल्सियस, वनस्थली में 4 डिग्री सेल्सियस और सिरोही, पाली व चूरू में 4.4 डिग्री दर्ज किया गया। शीतलहर का प्रकोप और तेज कश्मीर घाटी में न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप और तेज हो गया है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो पिछली रात के शून्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किये गए तापमान से कम है। उत्तरी कश्मीर का प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग सबसे सर्द स्थान बना हुआ है। गुलमर्ग में लगातार दूसरी रात न्यूनतम तापमान शून्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। दक्षिण कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में यह 0-5 डिग्री सेल्सियस नीचे बना हुआ है।

सोमनाथ: आक्रमण से पुनर्निर्माण तक, 1000 साल की यात्रा पर प्रधानमंत्री मोदी की भावनात्मक कलम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रांताओं द्वारा सोमनाथ मंदिर के बार-बार विध्वंस और इसके पुनर्निर्माण की कहानी पर एक भावुक ब्लॉग लिखा है. भारत के गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर को पहली बार 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के हाथों विध्वंस का सामना करना पड़ा, जिसमें पवित्र ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया था. इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी (1299), जफर खान (1395) और औरंगजेब (1706) जैसे मुगल शासकों ने भी हिंदू आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर हमले किए. हर विध्वंस के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रयास किए गए. भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इसका आधुनिक स्वरूप निर्मित हुआ.  पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'सोमनाथ… ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है. भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है. ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है…सौराष्ट्रे सोमनाथं च…यानी ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है. ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है.' उन्होंने आगे लिखा, 'शास्त्रों में ये भी कहा गया है: सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते। लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥ अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है. मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है. दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था. वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं. जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था. यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था.'   पीएम मोदी ने सोमनाथ पर हमले को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि इतनी बार विध्वंस का सामना करने के एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है. साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे. मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका. संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है. 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे. उन्होंने लिखा कि 1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है. जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है. हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है. हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा. सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था. ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था. ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी. हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे.   पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है. ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है. 1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया. यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था. लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया. और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया. उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा, 'महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका. सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ. उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही. साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है. वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है. ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया. उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें.'   प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया. 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की. उन्होंने कहा, 'दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे. ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे.' इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है. ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए. … Read more

ट्रंप की मोदी को लेकर फिर से तारीफ, लेकिन क्या यह भारत के लिए नई परेशानी का संकेत है?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर एक बार फिर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा- ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है.’ डोनाल्ड ट्रंप की यह नई चेतावनी ऐसे समय आई है, जब पहले से वॉशिंगटन में रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि रूस से तेल खरीदना उसकी घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी है लेकिन ट्रंप लगातार इस बात का दबाव बना रहे हैं. भारत पर पहले से ही 50 फीसदी टैरिफ लगा चुके ट्रंप ने इसे और भी बढ़ाने की धमकी दी है. क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप? डोनाल्ड ट्रंप का ये बयान उस फोन कॉल के कुछ ही हफ्तों बाद आया है, जिसमें ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपस में बातचीत की थी. तब दोनों नेताओं ने टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बावजूद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था. अब ट्रंप ने इस मामले पर फिर से भारत को धमकी दी है, हालांकि एक बार फिर उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ भी की. ट्रंप ने कहा – ‘वे मुझे खुश करना चाहते थे. पीएम मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था, ऐसे में उन्हें मुझे खुश करना जरूरी लगा.’ हालांकि ट्रंप ने लगातार ये भी कहा कि भारत अगर रूस से तेल खरीदना कम नहीं करता, तो वे भारत पर जल्द ही टैरिफ बढ़ा सकता है. डोनाल्ड ट्रंप चाहते क्या हैं? भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच व्यापार विवाद सुलझाने के लिए नई बातचीत भी शुरू हुई. भारत-अमेरिका की ट्रे़ड डील पर बात इस साल की शुरुआत में शुरू हुई थी, लेकिन अमेरिका ने जब भारतीय सामान पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया, तो ये डील अटक गई थी. डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि भारत, रूस से तेल लेना बंद कर दे और ऐसा नहीं करने पर वे टैरिफ बढ़ाने की धकी फिर दे रहे हैं. अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले के बाद तेल का मुद्दा एक बार फिर उठा है. वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है. अमेरिकी प्रतिबंधों और निवेश की कमी की वजह से इसका उत्पादन कम हो गया है, जिसे अब ट्रंप बढ़ाना चाहते हैं.

सत्ता के नशे में ट्रंप? कभी युद्ध की चेतावनी, कभी भारत से ट्रेड डील पर बड़े-बड़े दावे

वाशिंगटन वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को अपनी बड़ी जीत बताने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब और ज्यादा आक्रामक होते दिख रहे हैं. ताजा बयान में उन्होंने दो देशों को धमकी दी है, जिनमें से एक अमेरिका का पुराना दोस्त है. ट्रंप ने खुले तौर पर कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और यह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मामला है. यह बयान इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि ग्रीनलैंड, अमेरिका का नहीं बल्कि डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क, अमेरिका का पुराना NATO सहयोगी है. डेनमार्क और ब्रिटेन के बीच में समुद्र है. इस लिहाज से यह ब्रिटेन का पड़ोसी ही हुआ. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड इस वक्त ‘बेहद रणनीतिक’ है और वहां रूसी व चीनी जहाज मौजूद हैं. ट्रंप के शब्दों में, ‘हमें ग्रीनलैंड चाहिए, डेनमार्क इसे संभाल नहीं सकता.’ उन्होंने यह तक दावा कर दिया कि यूरोपीय संघ भी चाहता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड अपने नियंत्रण में ले. क्या ग्रीनलैंड पर हमला करेंगे ट्रंप? ट्रंप की इस टिप्पणी ने यूरोप में खतरे की घंटी बजा दी है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को अपने ‘ऐतिहासिक सहयोगी’ को धमकाना बंद करना चाहिए. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने भी इसे अपमानजनक करार देते हुए साफ कहा कि ‘हमारा देश बिक्री के लिए नहीं है.’ एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भी बवाल बढ़ाया है. शनिवार देर रात, ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर ने अपने फेसबुक पेज पर अमेरिकी झंडे के रंगों में रंगे डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र की विवादास्पद तस्वीर पोस्ट की. इसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा, ‘जल्द ही.’ कभी भारत से ट्रेड डील पर बड़ा दावा… कभी टैरिफ बढ़ाने की धमकी बीते पूरे साल 2025 में ट्रंप के टैरिफ से दुनिया के शेयर बाजारों में हलचल जारी रही, तो वहीं तमाम देशों के बीच ट्रेड वॉर के हालात तक बने. US-China Trade Tension ने तो इसे और भी बढ़ाने का काम किया. भारत को लेकर हालांकि ट्रंप बीते कुछ समय से लगातार ये दावा करते नजर आ रहे थे कि India-US Trade Deal को लेकर जल्द ही बहुत सकारात्मक हल निकलने वाला है और दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर जारी है. लेकिन अचानक ही फिर से उन्होंने कुछ वैसा ही कदम उठाने की धमकी दे डाली है, जिसे लेकर भारत-यूएस में डील अटक गई थी.  ट्रंप ने दी Tariff बढ़ाने की वार्निंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद का मुद्दा उठाया और कहा कि अगर नई दिल्ली 'रूसी तेल' पर मदद नहीं करता है, तो फिर अमेरिका भारतीय इंपोर्ट पर मौजूदा टैरिफ बढ़ा सकता है. यानी पहले से ही भारत पर 50% US Tariff और भी बढ़ाया जा सकता है.  गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में जब Donald Trump ने दुनिया के तमाम देशों पर अपना रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) थोपना शुरू किया था, तो भारत पर पहले 25% का टैरिफ लगाया गया था, लेकिन अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने Russian Oil की खरीद को लेकर भारत पर तगड़े आरोप लगाए थे और ये कहते हुए टैरिफ दोगुना यानी 50% कर दिया था कि इस खरीद के जरिए भारत यूक्रेन युद्ध में व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की आर्थिक मदद कर रहा है.  PM Modi की तारीफ, लेकिन… ट्रंप ने नए बयान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है और कहा है कि, 'वे (भारत) असल में मुझे खुश करना चाहते थे. PM Modi बहुत अच्छे इंसान हैं और उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था. मुझे खुश करना जरूरी था. लेकिन अगर वे रूस से व्यापार करते हैं, तो हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.' बता दें कि अमेरिका की ओर से भारत की रूसी तेल की खरीद का लंबे समय से विरोध किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर दबाव डालने के एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है.  न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप, बल्कि उनके प्रशासन के कई अधिकारी और वित्त मंत्री भी रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर निशाना साधते रहे हैं. बता दें कि Russia-Ukraine War के बाद से भारत का रूसी तेल आयात तेजी से बढ़ा था और रूस, भारत को तेल सप्लाई करने वाला बड़ा देश बन गया. यही बात ट्रंप को खटकने लगी.  अब Trade Deal का क्या होगा?  Donald Trump की इन नई टैरिफ धमकी ने एक बार फिर से भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर असमंजस पैदा कर दिया है. क्योंकि इससे पहले भी जब भारत पर टैरिफ दोगुना किया गया था, तो दोनों देशों के बीच बात अटक गई थी. तब तक दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर पांच दौर की बातचीत हो गई थी और छठे दौर की बात अगस्त महीने में प्रस्तावित थी, लेकिन टैरिफ बढ़ाने के बाद ये रुक गई थी.  हालांकि, इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर 2025 के आखिर में फिर से शुरू हुआ और उम्मीद जताई जा रही थी नवंबर तक इसे लेकर बड़ा ऐलान हो सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. India-US Trade Deal को लेकर सिर्फ ट्रंप की ओर से ही इसके जल्द फाइनल होने के दावे किए जा रहे थे, बल्कि भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने भी इसकी अच्छी प्रगति की बात कही थी. इसके अलावा मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा था कि अगर वित्तीय वर्ष के अंत तक समझौता नहीं हो पाता है, तो मुझे आश्चर्य होगा. हालांकि, अब Trump New Warning से मामला फिर अटकता हुआ नजर आ रहा है.  क्या एक्टिव होगा NATO का आर्टिकल 5? सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर ट्रंप वाकई ग्रीनलैंड पर कब्जे की कोशिश करते हैं, तो क्या नाटो का आर्टिकल 5 लागू होगा? NATO का आर्टिकल 5 कहता है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा. चूंकि डेनमार्क NATO का सदस्य है, इसलिए उस पर किसी भी तरह की सैन्य … Read more

अमेरिकी हमले से वेनेजुएला दहला: सैनिकों के साथ निर्दोष नागरिक भी मारे गए

न्यूयॉर्क वेनेजुएला में अमेरिका की ओर से शनिवार की सुबह किए गए घातक हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में वेनेजुएला के कई नागरिक और सैनिक भी मारे गए। इसकी जानकारी न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने अमेरिकी मीडिया के हवाले से दी है। सिन्हुआ ने अमेरिकी मीडिया के हवाले से बताया कि वेनेजुएला के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शनिवार सुबह वेनेजुएला पर अमेरिकी सैनिकों के बड़े हमले में आम लोगों और सैनिकों समेत कम से कम 40 लोग मारे गए। वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने शनिवार को कहा कि निकोलस मादुरो दक्षिणी अमेरिकी देश के एकमात्र राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज ने शनिवार दोपहर को वहां के एक सरकारी टेलीविजन स्टेशन पर लाइव स्पीच के दौरान कहा कि वेनेजुएला कभी भी किसी देश की कॉलोनी नहीं बनेगा। गृह, विदेश मामलों के मंत्रियों और दूसरे अधिकारियों के साथ, रोड्रिगेज ने मांग की है कि अमेरिका मादुरो और उनकी पत्नी को रिहा करे। इसके साथ ही उन्होंने वेनेजुएला के लोगों से शांत रहने, मिलकर चुनौतियों का सामना करने और देश की आजादी की रक्षा करने की अपील की। रोड्रिगेज ने कहा कि वेनेजुएला अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए तैयार है और कभी किसी देश की कॉलोनी या किसी एम्पायर का गुलाम नहीं बनेगा। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि रोड्रिगेज ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले ली है, और विदेश सचिव मार्को रुबियो ने उनसे अभी बात की है। ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला को फिर से महान बनाने के लिए हमें जो जरूरी लगता है, वे उसे करने के लिए तैयार हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति के साथ जिस तरह की कार्रवाई की गई है, उससे पूरी दुनिया बहुत हैरान है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने संप्रभु देश के खिलाफ जबरदस्ती और उसके राष्ट्रपति के खिलाफ एक्शन की कड़ी निंदा की है।

वेनेजुएला के हालात पर भारत ने जताई फिक्र, शांतिपूर्ण बातचीत पर दिया जोर

नई दिल्ली वेनेजुएला में अमेरिका के हमले के बाद से देश में अस्थिरता का माहौल है। इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से वेनेजुएला में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। विदेश मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए लिखा, "वेनेजुएला में हाल की घटनाएं गहरी चिंता का विषय हैं। हम बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध। हम सभी संबंधित लोगों से अपील करते हैं कि वे बातचीत के जरिए शांति से मुद्दों को सुलझाएं, ताकि इलाके में शांति और स्थिरता बनी रहे।" मंत्रालय ने आगे लिखा कि काराकास में भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के लोगों के संपर्क में है और हर मुमकिन मदद देता रहेगा। बता दें, एमईए का यह बयान शनिवार को वेनेजुएला में अमेरिकी डेल्टा फोर्स के एक सैन्य बेस पर हमला करने के बाद आया है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में अलग-अलग जगहों पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ पकड़ लिया। अमेरिकी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को एक वॉरशिप पर बिठाकर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां फेडरल कोर्ट में “नार्को-टेररिज्म” के चार्ज फाइल किए गए हैं। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी ने वेनेजुएला के नेता के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र को सार्वजनिक किया। ये आरोप पत्र न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के जिला कोर्ट में फाइल किया गया था। अभियोजक ने आरोप लगाया है कि मादुरो ने दो दशक से ज्यादा समय तक पावर का इस्तेमाल करके भारी मात्रा में कोकीन अमेरिका की ओर भेजी। उन पर नार्को-टेररिज्म की साजिश, कोकीन इम्पोर्ट करने की साजिश, फायरआर्म्स अपराध आदि में शामिल होने का आरोप है। दूसरी ओर, वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को वहां की अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया है। अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पकड़े जाने के बाद, वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ऑफ जस्टिस ने शनिवार देर रात वहां की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति की जिम्मेदारी सौंपने का आदेश दिया।

थाने में 4 घंटे इंतज़ार के बाद भी नहीं दर्ज हुआ बयान, नेहा राठौर ने कहा– अपने शब्दों पर कायम हूं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर तीखा तंज कसने वाली लोकगायिका नेहा सिंह राठौर अब भी अपनी बातों पर कायम हैं। उनके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में इसे लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की नोटिस के बाद शनिवार की शाम नेहा सिंह राठौर बयान दर्ज कराने थाने पहुंची। यहां चार घंटे तक रहने के बाद भी बयान दर्ज नहीं हो सका और वापस चली गईं। बयान दर्ज नहीं होने का नेहा ने दो कारण बताया है। पहला कि थाने के प्रभारी निरीक्षक मीटिंग में होने के कारण नहीं थे। दूसरा सूर्यास्त के बाद किसी महिला का बयान दर्ज नहीं होता है। नेहा ने इसके साथ ही कहा कि जिस बात को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उस बात पर अब भी कायम हैं। नेहा ने पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री पर इशारों में तंज कसा था। अब यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की आलोचना होनी चाहिए।   थाने से निकलते समय नेहा ने कहा कि पहलगांव में जो आतंकवादी हमला हुआ था, उसी सिलसिले में मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। 8-9 महीने पहले लगभग दर्ज मामले में हजरतगंज थाने की तरफ से मुझे दो नोटिस अब तक दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि मुझे आना है और जांच में सहयोग करना है, तो मैं आई हुई थी। इतनी रात में आने का कारण पूछने पर नेहा ने कहा कि मैं तीन-चार घंटे से यहां पे बैठी हुई थी। इतनी रात को मैं नहीं आई थी। कहा कि प्रभारी निरीक्षक किसी मीटिंग में व्यस्त थे, इसलिए इतना इंतजार करना पड़ा है। अभी हमारी बातचीत हो पाई है। जिस बयान को लेकर एफआईआर हुई है नेहा ने उस पर कायम रहने की बात भी कही। नेहा ने कहा कि मैं समझती हूं कि बिल्कुल प्रधानमंत्री जी की आलोचना होनी चाहिए और आज मैं अपने बात पर कायम हूं। नेहा के साथ उनके पति हिमांशु भी थाने पहुंचे थे। हिमांशु ने कहा कि 15 दिन पहले नोटिस मिला था। उस समय नेहा का स्वास्थ्य ठीक नहीं था तो बता दिया गया था कि स्वास्थ्य ठीक होते ही आएंगे। अब दूसरा नोटिस मिला जिसमें तीन दिन के अंदर आने को बोला गया। आज तबीयत भी ठीक थी और हमें जैसे ही नोटिस मिला हम तुरंत चले आए। एफआईआर को लेकर हिमांशु ने कहा कि नेहा ने कुछ ट्वीट्स किए थे। प्रधानमंत्री जी से कुछ सवाल पूछे थे। उसके बाद कुछ लोगों को नाराजगी हुई और उन्होंने एफआईआर दर्ज करा दी। देश में एफआईआर दर्ज कराना कितना आसान है, इससे पता ही चल जा रहा है।