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कर्नाटका में 3 दरिंदे आए और लड़की को अगवा कर किया रेप

बेंगलुरु. कर्नाटक पुलिस ने यौन उत्पीड़न के लिए तीन नाबालिग लड़कों के खिलाफ बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़कों ने लड़की के माता-पिता के दिन में बाहर होने के दौरान हफ्ते भर से अधिक समय तक उस पर हमला किया। हुबली-धारवाड़ के पुलिस आयुक्त एन शशिकुमार ने बताया, 'एक शिकायत दर्ज की गई है कि नाबालिग लड़की को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया और तीन आरोपियों की ओर से हमला किया गया। सभी तीन आरोपी 14 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के नाबालिग हैं। हमने उन्हें हिरासत में ले लिया है।' पुलिस आयुक्त ने कहा कि इन लड़कों ने पिछले सात-आठ दिनों से लड़की के खिलाफ यौन अपराध किए हैं। लड़की के माता-पिता काम पर जाते हैं और दिन में घर से बाहर रहते हैं। आरोपियों ने इस दौरान वारदात को अंजाम दिया। एन शशिकुमार ने आगे कहा कि पुलिस बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करेगी। आगे की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अगवा कर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार वहीं, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस ने 16 वर्षीय लड़की को अगवा कर दुष्कर्म करने के आरोपी को शनिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, फेफना थानाक्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 16 वर्षीय लड़की का गांव के ही रहने वाले शुभम खरवार उर्फ निर्मोही ने 13 फरवरी 2024 को अपहरण कर लिया था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में लड़की की मां की शिकायत पर शुभम के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक, लड़की के दादा ने हरियाणा जाकर उसे मुक्त कराया और 30 दिसंबर को पुलिस को सुपुर्द कर दिया। नाबालिग लड़की ने पुलिस को बताया कि शुभम खरवार उसे अगवा कर हरियाणा ले गया और उससे बार-बार दुष्कर्म किया।

AIIMS ने किया शोध- बुध-गुरु को अचानक हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें

नई दिल्ली. नाचते हुए मौत, खेलते हुए दम तोड़ा, बैठे-बैठे अचानक चली गई जान… पिछले कुछ सालों में आपने ऐसी कई खबरें पढ़ी होंगी, सीसीटीवी वीडियो देखे होंगे और कई तरह की चर्चाएं भी सुनी होंगी। कई बार इसे कोविड वैक्सीन से भी जोड़ने की कोशिश हुई। अब इस तरह की मौतों पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्टडी सामने आई है जिसमें अचानक होने वाली मौतों के पैटर्न को समझने की कोशिश की गई है। आयु, लिंग, स्थान, दिन आदि के आधार पर समझने की कोशिश की गई है कि कौन और कब लोग इसकी जद में आ रहे हैं। एक साल तक चली स्टडी को हाल ही में इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। मेडिकल टर्म में 'सडन डेथ' (अचानक मौत) ऐसे मामलों को माना गया है जिसमें लक्षण दिखने के एक घंटे भीतर मौत हो गई या जिन्हें मरते हुए किसी ने नहीं देखा पर 24 घंटे पहले एकदम स्वस्थ दिखे थे। मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच डॉक्टरों ने कुल 2214 पोस्टमॉर्टम में 180 केसों (8.1 फीसदी) को अचानक मौतों की श्रेणी में पाया। इनमें से 103 ( 57.2 फीसदी) की उम्र 18 से 45 के बीच की थी, जबकि 77 की उम्र 46 से 65 के बीच की थी। सडन डेथ वाले अधिकांश पुरुष एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अचानक हुई मौतों के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पुरुष महिला का अनुपात 4.5:1 का है। कम आयु वाले समूह में मरने वाले 77 पुरुष थे तो 17 महिलाएं। वहीं, अधिक उम्र वालों में यह अनुपात 64:4 का है। दिल ने दिया धोखा एक निष्कर्ष यह निकला कि अचानक हुई मौतों के मामले में दिल का धोखा अहम कारण है। 42.6 प्रतिशत मामले हृदय संबंधी कारणों से जुड़े पाए गए। उम्र के तीसरे दशक में प्रवेश करने वाले युवाओं में भी हृदय से जुड़ी समस्याएं पाईं गईं। अधिकांश मौतें कोरोनरी आर्टरी डिजीज से संबंधित थीं- यानी हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में गंभीर संकुचन। 70 प्रतिशत से अधिक ब्लॉकेज को गंभीर माना जाता है। जांच में यह पाया गया कि जिन युवा वयस्कों की मौत हुई, उनमें से कई में धमनियों की रुकावट इस स्तर तक या उससे भी अधिक थी। फेफड़ों या सांस से जुड़ी समस्याएं मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सामने आया। 21.3 फीसदी मृतक इन समस्याओं से ग्रसित थे। ध्रूम्रपान और शराब कितना बड़ा फैक्टर अचानक मृत्यु का शिकार हुए आधेक से अधिक (57.4 फीसदी) युवा धूम्रपान की आदत रखते थे, जबकि 52 फीसदी कभी-कभी या नियमित शराब का सेवन करते थे। हर मौसम में ऐसी मौतें, सप्ताह के बीच ज्यादा कहर अचानक होने वाली मौतें सभी मौसम के दौरान करीब समान रूप से पाईं गईं। 20.9 फीसदी मौतें (मई से जुलाई), 31 फीसदी अगस्त से अक्टूबर के बीच और 27.8 फीसदी सर्दियों में नवंबर से जनवरी के बीच और 19.1 फीसदी फरवरी से अप्रैल के बीच बसंत के दौरान हुईं। 40.1 फीसदी की मौत रात या सुबह जल्दी हुई, जबकि 30.2 फीसदी सुबह और अन्य दोपहर में हुई। दिनों के लिहाज से देखें तो अधिकतर मौतें गुरुवार और बुधवार को हुईं। 55 फीसदी की मौत घर पर, 30.2 की यात्रा के दौरान और 14.8 फीसदी की कार्यस्थल या या बाहर हुईं। अचानक मौतों से पहले कैसे लक्षण दिखे जांच में सामने आया है कि अचानक हुई मौतों के ज्यादातर मामलों में लोगों को पहले अचानक बेहोशी आ गई थी। कुछ लोगों ने मौत से पहले सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, पेट दर्द, उल्टी या बुखार की शिकायत की थी। चिंता की बात यह है कि युवाओं में भी दिल की बीमारी बड़ी वजह बनकर सामने आई है, जबकि उनमें से अधिकतर को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। वहीं बुजुर्गों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियां ज्यादा देखने को मिलीं। यह रिपोर्ट बताती है कि दिल से जुड़ी बीमारियां अब कम उम्र के लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

ट्रंप ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा को भी दी धमकी

वाशिंगटन. वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के बाद अब अमेरिका की ट्रंप सरकार के हौसलें बुलंद हैं और अब वे दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों को भी धमकाने पर उतर आए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के नेता को चेतावनी देते हुए कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अगर मैं क्यूबा की सरकार में होता तो यकीनन मुझे चिंता होती। मार्को रुबियो ने क्यूबा को दी चेतावनी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, 'क्यूबा पूरी तरह से तबाह है। इसे पूरी तरह से अयोग्य सरकार और इसे एक वृद्ध व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है। इसकी कोई अर्थव्यवस्था नहीं बची है। यह पूरी तरह से तबाह देश हैं। मादुरो की सुरक्षा में लगे सभी गार्ड भी क्यूबा के थे। क्यूबा ने कुछ मामलों में वेनेजुएला पर कब्जा किया हुआ है। क्यूबा ने वेनेजुएला को अपनी कालोनी बनाने की कोशिश की। अगर हम सुरक्षा के लिहाज से देखें तो अगर मैं हवाना में रह रहा होता और मैं सरकार में होता तो में घटनाक्रम से थोड़ा चिंतित तो जरूर होता।' अमेरिका और क्यूबा के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के संबंधों में तनाव 1960 के दशक से है, जब फिदेल कास्त्रों की सरकार के साथ अमेरिका के संबंध बिगड़े और अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। बराक ओबामा के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध सुधारने की कोशिश हुई, लेकिन ट्रंप और बाइडन सरकार में फिर से संबंध तनावपूर्ण हो गए। ट्रंप ने भी दिए संकेत गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्यूबा की आलोचना की और इसे एक असफल राष्ट्र बताया। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा के नागरिकों और क्यूबा छोड़ चुके लोगों की मदद करना अमेरिका का लक्ष्य है। ट्रंप ने कहा, 'क्यूबा एक रोचक मामला है। क्यूबा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। क्यूबा के लोग वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं। मुझे लगता है कि क्यूबा एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर हम आगे चर्चा करेंगे क्योंकि क्यूबा एक असफल राष्ट्र है। हम क्यूबा के लोगों की मदद करना चाहते हैं।' अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर शनिवार को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया है। अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बोन्डी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, नशीली दवाओं की तस्करी और नार्को आतंकवाद की साजिश रचने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की धमकी- ‘दंगाईयों को उनकी जगह दिखाओ’

तेहरान. ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का बयान सामने आया है। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को धमकी दी है और सुरक्षाबलों को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। खामेनेई ने कहा कि जो दंगाई हैं, उन्हें उनकी जगह दिखाई जाए। खामेनेई का बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में आर्थिक संकट को लेकर बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। खामेनेई के इस बयान को ईरान के सुरक्षा बलों के लिए खुली छूट माना जा रहा है और अब वे प्रदर्शनकारियों पर और सख्ती बढ़ा सकते हैं।  खामेनेई ने विदेशी ताकतों पर लगाए साजिश रचने के आरोप ईरान के राष्ट्रीय टीवी पर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का बयान जारी किया गया। इस बयान में खामेनेई ने कहा, 'हम प्रदर्शनकारियों से बात कर रहे हैं, अधिकारियों को भी प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए, लेकिन बात करने से कोई फायदा नहीं होगा। दंगाइयों को उनकी जगह पर पहुंचा देना चाहिए।' खामेनेई ने विरोध प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों के हाथ होने का दावा किया। उन्होंने कहा, 'दुश्मनों द्वारा खरीदे गए कुछ लोग इस विरोध प्रदर्शन के पीछे हैं, जो दुकानदारों और प्रदर्शनकारी लोगों के पीछे से ईरान, ईरानी गणतंत्र और इस्लाम के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।' अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों का किया समर्थन ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के अभी थमने के आसार नहीं लग रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि अगर ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करती है तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा। ट्रंप के इस बयान पर ईरान की सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर हमले की धमकी दी। ईरान में साल 2022 में भी एक 22 वर्षीय युवती महसा अमीनी की मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। महसा अमीनी को बुर्का न पहनने के लिए प्रताड़ित किया गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। 2022 के बाद ईरान में अब इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरान के कट्टरपंथी नेता प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के पक्ष में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में साल 2019 में ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में 300 लोगों की मौत हुई थी। वहीं महसा अमीनी की मौत के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 22 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था।  

‘न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी बोले- मादुरो पर युद्ध की कार्रवाई से कानून का उल्लंघन हुआ है’

वाशिंगटन. अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान मामदानी ने युद्ध की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। मामदानी ने कहा कि यह कदम संघीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे न्यूयॉर्क में हजारों वेनेजुएलाइयों पर असर पड़ सकता है। एक्स पर एक पोस्ट में मामदानी ने लिखा, 'अमेरिकी सेना की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी मिली। साथ ही, उन्हें न्यूयॉर्क शहर में संघीय हिरासत में रखने का प्लान है। एक संप्रभु राष्ट्र पर एकतरफा हमला युद्ध की कार्रवाई है और संघीय व अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।' जोहरान मामदानी ने कहा कि यह शासन परिवर्तन की कोशिश न केवल विदेशों में प्रभाव डालती है, बल्कि न्यूयॉर्क में रहने वाले हजारों वेनेजुएलाइयों सहित सभी न्यूयॉर्कवासियों की सुरक्षा पर सीधा असर डालती है। उनका प्रशासन स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरी दिशानिर्देश जारी करेगा।' वेनेजुएला की राजधानी काराकास में खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी सेना की संयुक्त कार्रवाई में मादुरो व फ्लोर्स को गिरफ्तार किया गया और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मादुरो और उनकी पत्नी पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्को-टेररिज्म षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। वे मुकदमे का सामना करेंगे। अमेरिकी सेना का वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया। ट्रंप के अनुसार, यह ऑपरेशन रात में किया गया, जिसमें वेनेजुएला की सैन्य क्षमताओं को निष्क्रिय कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं कर सकता जो अमेरिका ने हासिल किया। मादुरो दंपति को अमेरिका ले जाया जा रहा है, जहां वे ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोपों में मुकदमा का सामना करेंगे। मुकदमा न्यूयॉर्क या फ्लोरिडा में हो सकता है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी सेना की बहादुरी का नतीजा बताया है।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के हाथों में हथकड़ी और डिटेंशन सेंटर नया ठिकाना

वाशिंगटन. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। लैटिन अमेरिकी देश के इस कद्दावर नेता को न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के मुख्यालय में कड़ी सुरक्षा के बीच देखा गया। जारी किए गए वीडियो में मादुरो को हथकड़ियों में और सैनिकों के घेरे में मुख्यालय के गलियारे से ले जाते हुए दिखाया गया है। आपको बता दें कि शनिवार को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद मादुरो और उनकी पत्नी, सीलिया फ्लोर्स को वेनेजुएला से न्यूयॉर्क लाया गया। मादुरो अब फेडरल कस्टडी में रहेंगे। अमेरिकी न्याय विभाग ने उन पर 'नार्को-टेररिज्म' की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है, जिसके तहत उन पर मुकदमा चलाया जाएगा। अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल खजाने पर इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका कम से कम अस्थायी रूप से वेनेजुएला का शासन संभालेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों का उपयोग करेगा और अन्य देशों को बड़ी मात्रा में तेल बेचेगा। ट्रंप ने कहा, "हम देश को तब तक चलाएंगे जब तक कि हम एक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं कर लेते।" डेलसी रोड्रिगेज बनीं कार्यवाहक राष्ट्रपति इधर वेनेजुएला में मचे सियासी घमासान के बीच देश की सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक चैंबर ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेलसी रोड्रिगेज को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, रोड्रिगेज प्रशासनिक निरंतरता और राष्ट्र की व्यापक रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। कोर्ट अब इस बात पर बहस करेगा कि राष्ट्रपति की जबरन अनुपस्थिति की स्थिति में राज्य की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए कानूनी ढांचा क्या होना चाहिए। आपको यह भी बता दें कि ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व की प्लानिंग महीनों से चल रही थी। रिहर्सल के बाद यह मिशन मात्र 30 मिनट में पूरा हुआ। वर्तमान में राजधानी काराकास में स्थिति तनावपूर्ण है। रूस और चीन जैसे देशों ने इस कार्रवाई पर कड़ी नजर रखी हुई है, जबकि अमेरिकी तेल कंपनियां बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए निवेश की तैयारी कर रही हैं।

वेनेजुएला की नई राष्ट्रपति बनीं डेल्सी रोड्रिग्ज

न्यूयार्क. अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में मचे भारी राजनीतिक घमासान के बीच देश के सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने का आदेश दिया है। अदालत का कहना है कि यह निर्णय देश की संप्रभुता और प्रशासनिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए जरूरी है। कौन हैं डेल्सी रोड्रिग्ज? 56 साल की डेल्सी रोड्रिग्ज वेनेजुएला की राजनीति का एक कद्दावर और अनुभवी चेहरा हैं। वे एक क्रांतिकारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता, जॉर्ज एंटोनियो रोड्रिग्ज एक वामपंथी गुरिल्ला नेता थे। कानून की पढ़ाई करने वाली डेल्सी पिछले एक दशक में मादुरो सरकार की सबसे भरोसेमंद सहयोगी बनकर उभरी हैं। वह मादुरो सरकार की सशक्त समर्थक रही हैं। मादुरो ने अपनी सरकार का समर्थन करने के लिए डेल्सी को 'शेरनी' तक कहा था। डेल्सी रोड्रिग्ज का राजनीतिक सफर उन्होंने 2013 से 2017 के बीच सूचना और विदेश मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। जून 2018 में मादुरो ने उन्हें देश का उपराष्ट्रपति नियुक्त किया। मादुरो अक्सर उन्हें 'हजारों लड़ाइयों में परखी हुई एक बहादुर क्रांतिकारी' कहते रहे हैं। अगस्त 2024 में उन्हें तेल मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ देश की अर्थव्यवस्था को संभाल सकें। मादुरो को बताया देश का इकलौता राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक ऑडियो संदेश में डेल्सी रोड्रिग्ज ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने अमेरिकी हिरासत में मौजूद निकोलस मादुरो को ही देश का एकमात्र वैध राष्ट्रपति बताया और अमेरिका से उनके जिंदा होने के सबूत मांगे। उन्होंने कहा, "इस देश का केवल एक ही राष्ट्रपति है और उनका नाम निकोलस मादुरो मोरोस है।" ट्रंप के दावे और विरोधाभास डेल्सी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के ठीक उलट है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि रोड्रिग्ज ने राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है और वे वाशिंगटन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला का शासन चलाने की तैयारी में है। हालांकि, डेल्सी रोड्रिग्ज ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे संप्रभुता पर हमला करार दिया है। फिलहाल कराकस से आ रही तस्वीरों में डेल्सी रोड्रिग्ज को देश के भीतर ही सक्रिय देखा गया है, जिसने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया है जिनमें उनके रूस जाने की बात कही जा रही थी।

2300 लोगों का क्रूज, जहां नहीं पहन सकते कपड़े! 1.5 लाख रुपये में 11 दिन की ट्रिप, जानिए बाकी अजीब शर्तें

मियामी ये दुनिया अजीब लोगों और रंगों से भरी पड़ी है. अब सोशल मीडिया पर जो मामला वायरल है उसे जानने के बाद मुमकिन है कि आप अपना सिर पीट लें. जी हां, इन दिनों एक नेक्ड शिप की चर्चा सोशल मीडिया पर जोरों से है जहां आपको एंट्री कपड़े पहनकर नहीं बल्कि कपड़े उतारकर मिलेगी. जी हां, इस क्रूज पर Gender Equality को इतनी जबरदस्त तरीके से तरजीह दी गई है कि आप भी हैरान रह जाएंगे. इतना ही नहीं, यहां आपको अपने कपड़ों के साथ साथ मोटा किराया भी देना होगा.  मियामी से एक खास क्रूज लाइनर 11 दिनों की यात्रा पर रवाना होगा, लेकिन इसमें एक पेंच है. क्रूज जहाज पर सवार सभी 2300 मेहमान पूरी तरह से नग्न होंगे! जी हां, आपने ब‍िल्‍कुल सही पढ़ा है. इसके साथ ही इस ट्र‍िप को लेकर एक शर्त भी है. आइए इस विचित्र, मगर अनोखे क्रूज के बारे में आपको बताते हैं, जिसे ‘द बिग न्यूड बोट’ नाम दिया गया है. कपड़े उतार कर ही मिलेगी एंट्री…चाहे मर्द हो या औरत आपको बता दें कि न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को बगैर कपड़ों के पार्टी करना पसंद है वो इस क्रूज पर आकर अपना सपना पूरा कर सकते हैं.बेअर नेसेसिटीज नाम की एक पर्यटन कंपनी है जो बगैर कपड़ों के यात्रा करने और क्वालिटी टाइम बिताने की व्यवस्था लोगों के लिए करती है.आपको बता दें कि इस जहाज का नाम "द बिग न्यूड बोट" है. ये 968 फुट लंबा है जिस पर लोग पार्टी, लंच और डिनर तक कर सकते हैं. कपल को यहां खास तरजीह दी जाती है. सोशल मीडिया पर इस क्रूज की कई तस्वीरें वायरल हैं जिन पर लोग क्वालिटी टाइम स्पेंड करते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि यहां कुछ नियम कायदे भी होते हैं. गेमिंग और स्विमिंग के वक्त आप कपड़े पहन सकते हैं. इसके अलावा लंच और डिनर के वक्त आपको प्राइवेट पार्ट कवर करने होंगे. क्या है ‘बिग न्यूड बोट’ ट्रिप? मियामी की एक न्यूडिस्ट ट्रैवल कंपनी, बेयर नेसेसिटीज द्वारा आयोजित ‘बिग न्यूड बोट’ ट्रिप नॉर्वेजियन पर्ल क्रूज शिप पर होती है, जिसमें लगभग 2300 मेहमानों के शामिल होने की उम्मीद है. इस क्रूज पर चढ़ने के लिए यात्रियों के पास वैध टिकट के अलावा एक अनिवार्य शर्त यह है कि उन्हें यात्रा के अधिकांश समय पूरी तरह न्‍यूड रहना होगा. बेयर नेसेसिटीज के अनुसार, इस क्रूज ट्रिप का उद्देश्य लोगों को सामाजिक नग्नता के डर से मुक्त करना और उन्हें धूप और समुद्र का आनंद लेते हुए एक आरामदायक और सुखद यात्रा का अनुभव कराना है. यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट सोशल मीडिया पर इस क्रूज की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसका समर्थन किया तो कई ने इसे गलत ठहराया. एक यूजर ने लिखा…अरे बाप रे पैसों के साथ साथ ये लोग तो इज्जत भी मांग रहे हैं. एक और यूजर ने लिखा…ये क्या फूहड़पन है. कोई सैर करने के लिए कपड़े क्यों उतरवाएगा. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…बाहरी लोगों के लिए अस तरह का रहन सहन आम है. किसी को अगर दिक्कत है तो ना जाए. क्रूज यात्रा कब शुरू होगी? जानकारी के अनुसार, ‘बिग न्यूड बोट’ क्रूज 3 फरवरी 2026 को मियामी से रवाना होगी और 11 दिनों की “बेयर-डाइस” यात्रा पर कैरिबियन के कई द्वीपों जैसे बहामास के ग्रेट स्टिरप के, सेंट लूसिया और सेंट मार्टेन की यात्रा करेगी. इस अनोखे न्यूडिस्ट अनुभव के अलावा, यात्रियों को क्रूज पर कई मजेदार गतिविधियों का आनंद मिलेगा, जैसे एलईडी पार्टियां, टैलेंट शो और फ्रेंडली स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं. नॉर्वेजियन पर्ल में एक बॉलिंग एली, रॉक क्लाइम्बिंग वॉल, 16 प्रकार के डाइनिंग ऑप्‍शन 14 बार हैं, जिनमें एक व्हिस्की लाउंज भी शामिल है, जिनका यात्री आनंद ले सकते हैं. क्या अभद्र व्यवहार को रोकने के लिए कोई नियम हैं? क्रूज ने अपने यात्रियों के अभद्र व्यवहार और सार्वजनिक अश्लीलता को रोकने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं. यात्री समुद्र में या बंदरगाह पर होने पर डेक या बुफे जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में नग्न हो सकते हैं. हालांकि, जब क्रूज बंदरगाह पर रुका होता है, तो यात्रियों को कपड़े पहनना अनिवार्य है. जैसे ही जहाज बंदरगाह से रवाना होता है, यात्री फिर से कपड़े उतार सकते हैं. यात्रियों को भोजन कक्ष में भोजन करते समय भी कपड़े पहनना आवश्यक है. इसके अलावा, पूल और डांस क्षेत्र में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है, जबकि अनुचित स्पर्श और अश्लील काम सख्त वर्जित हैं और इसके परिणामस्वरूप जहाज से उतारा जा सकता है. किसी को अनुचित तरीके से टच करना मना है बेयर नेसेसिटिज़ ने स्पष्ट किया है कि उसके अनड्रेस्ड क्रूज का अनैतिक संबंध जैसी चीज से कोई लेना-देना नहीं है. यदि कोई स्विंगर अनुभव की तलाश में हैं, तो हम आपके लिए उपयुक्त क्रूज नहीं हैं. यहां किसी अन्य व्यक्ति के शरीर को टच करना या अनुचित तरीके से छूने पर प्रतिबंध है.    इस जहाज पर खुले तौर पर यौन गतिविधि में शामिल होना या किसी से ऐसी आग्रह करने पर पूर्णत: प्रतिबंध है. इसके अलावा जहाजों के पूल और डांस हॉल के आसपास कई "नो फोटो जोन" भी हैं. यहां बिना कपड़ों के समुद्री यात्रा का लुत्फ उठाने वाले लोगों को तस्वीरें लेने से प्रतिबंधित किया गया है.   जहाज पर इन मौकों पर कपड़ा पहनना है जरूरी जहाज के भोजनालयों के सामने साफ-साफ लिखा है. इन सभी जगहों पर कैज़ुअल कपड़े पहनना जरूरी है. डाइनिंग रूम में बाथरोब पहनने की अनुमति नहीं है. हालांकि, सेल्फ सर्विस बुफे के दौरान कपड़ा पहनना जरूरी नहीं है.  क्रूज लाइन इस बात पर भी जोर होता है कि जब जहाज किसी बंदरगाह पर खड़ा हो तब यात्री पूरे कपड़े पहनकर रखे. या फिर जब किसी तट पर जहाज रुका हो और स्थानीय लोग जहाज देखने के लिए आएं, तो यात्री अपने कपड़े पहने रखे.  ट्र‍िप की कीमत कितनी है? विवरण के अनुसार, 11-दिन की राउंड ट्रिप, जिसमें अरूबा, बोनेयर, कुराकाओ, जमैका और ग्रेट स्टिरप के द्वीपों की यात्रा शामिल है और इसकी कीमत $2,000 (लगभग ₹1.6 लाख) प्रति व्यक्ति से शुरू होती है.

वंदे भारत की जगह धरती का पुष्पक विमान, 180 किमी/घंटा की स्पीड में सफल ट्रायल, लग्ज़री का नया अनुभव

नई दिल्ली भारतीय रेल वंदे भारत प्रीमियम सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन का स्‍लीपर वर्जन लॉन्‍च करने की तैयारी कर रहा है. इसका ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है. इसे सबसे पहले गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलाया जाएगा. पीएम मोदी इसी महीने लग्‍जरी ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं. रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने खुद इसकी जानकारी दी है. उन्‍होंने वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन का ट्रायल सफल रहने के बारे में भी बताया है. वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन के अंदर की तस्‍वीरें सामने आई हैं, जिसे देखने पर इस सुपर एक्‍सक्‍लूसिव ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. तस्‍वीरों में वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन की आरामदायक बर्थ को देखा जा सकता है. सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन की सीटें तेजस राजधानी, दुरंतो और अन्‍य सुपरफास्‍ट ट्रेनों के मुकाबले ज्‍यादा कंफर्टेबल होने वाली हैं.  रेल मंत्री ने अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि यह ट्रेन अगले 15 से 20 दिनों में शुरू हो जाएगी. संभावना है कि इसका शुभारंभ 18 या 19 जनवरी के आसपास हो सकता है. उन्होंने कहा, 'हमने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है और सभी तैयारियां पूरी हैं. सटीक तारीख की घोषणा अगले दो-तीन दिनों में कर दी जाएगी.' ऐसे में अनुमान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने गुवाहाटी और कोलकाता के बीच बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा देंगे. रेल मंत्री वैष्णव के अनुसार, 16 डिब्बों वाली इस वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के सोने की व्यवस्था होगी. ट्रेन की डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है, हालांकि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच यह 120-130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. यह ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी. बता दें कि दोनों राज्यों में इस वर्ष विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं. रेल मंत्री ने इसे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया हवाई यात्रा की तुलना में काफी कम होगा. न्‍यूज एजेंसी PTI के अनुसार, उन्होंने बताया कि AC3 कोच का किराया करीब 2300 रुपये, AC2 का किराया करीब 3000 रुपये और फर्स्‍ट AC का फेयर करीब 3600 रुपये होगा. इन किरायों में भोजन भी शामिल रहेगा. उन्होंने बताया कि किराया तय करते समय मध्यम वर्ग को ध्यान में रखा गया है. वर्तमान में गुवाहाटी-कोलकाता हवाई यात्रा का खर्च करीब 6000 से 8000 रुपये तक होता है.  प्रति किलोमीटर किराए की जानकारी देते हुए वैष्णव ने बताया कि फर्स्‍ट AC के लिए 3.8 रुपये प्रति किमी, AC 2 के लिए 3.1 रुपये प्रति किमी और AC 3 के लिए 2.4 रुपये प्रति किमी किराया होगा. रेल मंत्रालय की प्रस्तुति के अनुसार, इस ट्रेन में 11 थर्ड AC, चार सेकेंड AC और एक फर्स्ट AC कोच होगा. कुल 823 बर्थ में से 611 थर्ड AC, 188 सेकेंड AC और 24 फर्स्ट AC में होंगी.  वंदे  भारत स्‍लीप ट्रेन की खासियतों में आरामदायक और बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ, ऑटोमैटिक दरवाजे, बेहतर सस्पेंशन से कम शोर और स्मूथ सफर, ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली, आपातकालीन बातचीत प्रणाली और उच्च स्वच्छता के लिए कीटाणुनाशक तकनीक शामिल है. यह तकनीक 99.9 प्रतिशत कीटाणुओं को खत्म करने में सक्षम है.  180 किमी/घंटा की सफल ट्रायल स्पीड हासिल की भारतीय रेलवे ने देश में स्वदेशी रेल नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Railway Safety) की निगरानी में हुए इस परीक्षण ने भारत में अगली पीढ़ी की स्लीपर ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। कोटा–नागदा सेक्शन पर हाई-स्पीड ट्रायल इस अंतिम ट्रायल को कोटा–नागदा रेल खंड पर अंजाम दिया गया, जहाँ स्वदेशी रूप से निर्मित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की शीर्ष गति प्राप्त की। परीक्षण के दौरान राइड स्थिरता, कंपन परीक्षण, ब्रेकिंग क्षमता, आपातकालीन ब्रेकिंग प्रदर्शन और सुरक्षा प्रणालियों की जांच की गई। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने ट्रायल को पूरी तरह संतोषजनक घोषित किया। उन्नत राइड क्वालिटी का प्रदर्शन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सफल परीक्षण के वीडियो साझा किए, जिसमें वाटर-ग्लास स्थिरता प्रदर्शन विशेष आकर्षण रहा। इस परीक्षण में ग्लास में भरा पानी बिना छलके स्थिर रहा, जो ट्रेन की उन्नत सस्पेंशन प्रणाली और राइड कम्फर्ट को दर्शाता है। यात्री केंद्रित डिज़ाइन और आधुनिक सुविधाएँ 16 कोच वाली यह वंदे भारत स्लीपर रेक विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार की गई है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख सुविधाएँ उपलब्ध हैं:     आरामदायक स्लीपर बर्थ     स्वचालित दरवाजे     आधुनिक टॉयलेट     CCTV आधारित निगरानी प्रणाली     डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली     ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियाँ     फायर डिटेक्शन और सेफ्टी मॉनिटरिंग सिस्टम खबर से जुड़े जीके तथ्य     वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की ट्रायल गति प्राप्त की है।     ट्रायल रेलवे सुरक्षा आयुक्त की देखरेख में हुआ और संतोषजनक पाया गया।     यह ट्रेन स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित की गई है।     यह आत्मनिर्भर भारत पहल का हिस्सा है। प्रमुख सुरक्षा और तकनीकी विशेषताएँ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में निम्नलिखित अत्याधुनिक सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएँ शामिल हैं:     कवच (KAVACH) ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम     क्रैशवर्थी सेमी-पर्मानेंट कपलर्स और एंटी-क्लाइंबर्स     फायर बैरियर डोर्स, एरोसोल आधारित अग्नि शमन प्रणाली     रीजनरेटिव ब्रेकिंग     UV-C लैंप आधारित वातानुकूलन संक्रमण नियंत्रण     केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित दरवाजे     चौड़े सील्ड गैंगवे     आपातकालीन संवाद इकाई (Emergency Talk-back Unit)     दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय     सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम     एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन की गई सीढ़ियाँ भारतीय रेलवे की आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में अगला कदम CRS की स्वीकृति के बाद अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है। यह उपलब्धि सुरक्षा, नवाचार और स्वदेशी निर्माण के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। आने वाले समय में यात्री लंबी दूरी की यात्रा को विश्वस्तरीय सुविधा और उच्च तकनीक के साथ अनुभव कर सकेंगे।  

क्या कंडोम महंगे करने से जनसंख्या बढ़ेगी? तीसरे साल से डरा हुआ चीन, भारत के लिए यह क्या अवसर ला सकता है?

बीजिंग बीते तीन सालों से चीन एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है, जिसमें न तो तोपें चल रही हैं और न ही मिसाइलें। यह लड़ाई है- जनसंख्या बचाने की। एक देश जो कभी दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला था, वह अब अपनी आबादी घटने से परेशान है। चीन लंबे समय तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' से जनसंख्या नियंत्रित करता रहा, अब इसके उलटा हो गया है। चीन से आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में लगातार तीसरे साल उसकी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चीन की सरकार अब बच्चों को बढ़ाने की हर कोशिश कर रही है- यहां तक कि कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियां महंगे कर दिए। सवाल यह है: क्या कंडोम महंगे करने से जनसंख्या बढ़ जाएगी? और यह संकट ग्लोबल सप्लाई चेन, आपके फोन-गैजेट्स की कीमतों और भारत जैसे युवा देशों पर कैसे असर डालेगा? आइए समझते हैं। चीन का डर: बूढ़ा होता ड्रैगन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा कोई विदेशी दुश्मन नहीं, बल्कि उसकी अपनी जनसांख्यिकी है। 2025 के आंकड़े बताते हैं कि मरने वालों की संख्या पैदा होने वाले बच्चों से कहीं ज्यादा है। चीन ने एक बच्चा नीति को सख्ती से लागू किया था। आज वही नीति उसके गले की फांस बन गई है। उस वक्त जो बच्चे पैदा नहीं हुए, आज वो 'युवा वर्कफोर्स' (काम करने वाले लोग) के रूप में मौजूद नहीं हैं। चीन की चुनौती सिर्फ कम जन्मों तक सीमित नहीं है; तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी भी उतनी ही बड़ी समस्या है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग अब कुल आबादी के 20% से अधिक हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान बताते हैं कि 2100 तक यह अनुपात 50% तक पहुंच सकता है। इसके नतीजे दूरगामी हैं- कामकाजी आबादी सिकुड़ेगी, आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ेगा और स्वास्थ्य व पेंशन पर सरकारी खर्च तेजी से ऊपर जाएगा। क्यों घट रही है चीन की जनसंख्या? चीन की यह समस्या नई नहीं। 1980 से 2015 तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' चली, जिसमें ज्यादातर परिवारों को सिर्फ एक बच्चा करने की इजाजत थी। इसका मकसद तेजी से बढ़ती आबादी को काबू करना था। नतीजा? जन्म दर तेजी से घटी। 2016 में दो बच्चे, 2021 में तीन बच्चों की इजाजत दी गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आज युवा कपल बच्चे नहीं चाहते। कारण साफ हैं: बच्चा पालना बहुत महंगा: एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में एक बच्चे को 18 साल तक पालने का खर्च करीब 5.38 लाख युआन (लगभग 76 हजार डॉलर) है। शहरों में तो एक करोड़ युआन से ज्यादा।     नौकरी का दबाव, हाउसिंग महंगी, शिक्षा और हेल्थकेयर का बोझ।     महिलाओं पर घर और करियर दोनों का भार।     शादियां भी कम हो रही हैं- 2025 में रिकॉर्ड कम शादियां हुईं। 2024 में जन्म थोड़े बढ़े क्योंकि 'ड्रैगन ईयर' था (चीनी संस्कृति में शुभ माना जाता है) और कोविड के बाद देरी से शादियां हुईं। लेकिन 2025 में फिर जन्मदर घट गई। संयुक्त राष्ट्र की भविष्यवाणी कहती है कि 2050 तक चीन की आबादी 200 मिलियन कम हो सकती है और बुजुर्गों की तादाद दोगुनी होगी। चीन की जनसांख्यिकीय पहेली: नीति खत्म हुए दस साल, लेकिन आबादी संकट गहराता हुआ 1 जनवरी 2026 को उस फैसले को दस साल पूरे हो गए, जब चीन ने औपचारिक रूप से अपनी कुख्यात एक-बच्चा नीति को खत्म किया था। यह नीति तीन दशकों से भी अधिक समय तक चीन के पारिवारिक जीवन और सामाजिक संरचना को आकार देती रही। वर्ष 2016 में इसे समाप्त करने का निर्णय एक कठोर हकीकत से उपजा था- जन्म दर इतनी तेजी से गिर रही थी कि वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक ऊर्जा और स्थिरता के लिए खतरा बन गई थी। लेकिन एक दशक बाद, तमाम नीतिगत बदलावों और प्रोत्साहनों के बावजूद, बीजिंग जनसंख्या में आ रही ऐतिहासिक गिरावट को रोकने में नाकाम दिख रहा है। चीन की कुल जनसंख्या 2022 में पहली बार 60 से अधिक वर्षों में घटनी शुरू हुई। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2022 में आबादी घटकर 1.411 अरब रह गई- एक साल पहले के मुकाबले करीब 8.5 लाख कम। इसकी घोषणा 2023 में की गई थी। विश्लेषकों ने इसे 1961 के बाद पहली जनसंख्या गिरावट बताया, जब माओ त्से तुंग की ग्रेट लीप फॉरवर्ड नीति से उपजे भीषण अकाल ने देश को झकझोर दिया था। 2023 और 2024 में भी यह संकुचन जारी रहा। 2024 में जन्मों में मामूली बढ़त के बावजूद, मौतों की संख्या अधिक रहने से कुल आबादी घटती रही और विशेषज्ञ इस उछाल को स्थायी मोड़ मानने से इनकार कर रहे हैं। जन्मों में तेज गिरावट आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में चीन में लगभग 95 लाख बच्चों का जन्म हुआ- जो 2019 के 1.47 करोड़ जन्मों से बहुत कम है। यह गिरावट ड्रैगन वर्ष जैसी सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े अस्थायी उछाल के बावजूद दर्ज हुई। वास्तविक तस्वीर यह है कि युवा पीढ़ी बढ़ती महंगाई, आवास लागत, शिक्षा खर्च, असुरक्षित नौकरियों और कार्य-जीवन असंतुलन जैसी चिंताओं से जूझ रही है, जिससे परिवार बढ़ाने का फैसला और कठिन हो गया है। 2025 का अनुमान है कि चीन में लगभग 87 लाख बच्चे पैदा हुए होंगे, जो भारत के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है। हालांकि कुछ एनालिसिस में यह संख्या 73 से 78 लाख के बीच रहने का अनुमान है। यह सरकारी कोशिशों के बावजूद कम फर्टिलिटी रेट, लाइफस्टाइल में बदलाव और डेमोग्राफिक बदलावों के कारण लगातार गिरावट को दिखाता है। यह संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी कम है। 2026 का विवादित कदम सबसे हालिया और विवादित फैसला, 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ है। इसके तहत सरकार ने गर्भनिरोधकों पर 13% वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लगाना शुरू किया है, जबकि चाइल्डकेयर सेवाओं, विवाह-संबंधी सेवाओं और वरिष्ठ नागरिक देखभाल को कर-मुक्त रखा गया है। पहले 1994 से ये टैक्स-फ्री थे, क्योंकि तब जनसंख्या नियंत्रण नीति थी। अब नीति उलटी है- बच्चे पैदा करो! सरकार का तर्क है कि इससे जन्मोत्साहन और पारिवारिक समर्थन सेवाएं मजबूत होंगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि गर्भनिरोधकों पर कर महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और स्वास्थ्य विकल्पों … Read more