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भारतीय नागरिकता छोड़ने का रिकॉर्ड स्तर: 9 लाख लोग हुए विदेश के हमसफ़र

नई दिल्ली  विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को संसद को जानकारी दी कि पिछले पांच वर्षों में करीब 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। विदेशी नागरिकता अपनाने वालों की यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री किर्ती वर्धन सिंह ने बताया कि सरकार भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों का वर्षवार रिकॉर्ड रखती है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में नागरिकता त्यागने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बताया गया कि 2020 में 85,256; 2021 में 1,63,370; 2022 में 2,25,620; 2023 में 2,16,219 और 2024 में 2,06,378 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी। इसके अलावा, 2011 से 2019 के बीच 11,89,194 भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी। इस अवधि में 2011 में 1,22,819; 2012 में 1,20,923; 2013 में 1,31,405; 2014 में 1,29,328; 2015 में 1,31,489; 2016 में 1,41,603; 2017 में 1,33,049; 2018 में 1,34,561 और 2019 में 1,44,017 लोगों ने नागरिकता छोड़ी। इसी बीच, 2024-25 में विदेशों में रहने वाले भारतीयों से प्राप्त शिकायतों के बारे में पूछे गए एक अन्य प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय को कुल 16,127 शिकायतें मिलीं। इनमें से 11,195 शिकायतें ‘मदद’ पोर्टल और 4,932 शिकायतें सीपीग्राम्स के माध्यम से दर्ज हुईं। सबसे अधिक संकट संबंधी मामले सऊदी अरब (3,049) से आए। इसके बाद यूएई (1,587), मलेशिया (662), अमेरिका (620), ओमान (613), कुवैत (549), कनाडा (345), ऑस्ट्रेलिया (318), ब्रिटेन (299) और कतर (289) का स्थान रहा। मंत्री ने बताया कि भारत ने प्रवासी भारतीयों की शिकायतों के समाधान के लिए एक “मजबूत और बहु-स्तरीय तंत्र” तैयार किया है, जिसमें इमरजेंसी हेल्पलाइन, वॉक-इन सुविधा, सोशल मीडिया और 24×7 बहुभाषी सहायता शामिल है। अधिकतर मामलों को सीधे संवाद, नियोक्ताओं से मध्यस्थता और विदेशी अधिकारियों के साथ समन्वय के जरिये शीघ्र सुलझा लिया जाता है। कुछ मामलों में देरी की वजह अधूरी जानकारी, नियोक्ताओं का सहयोग न करना और अदालत में चल रहे मामलों में भारतीय मिशनों की सीमित भूमिका बताई गई। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास पैनल वकीलों के माध्यम से कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराते हैं, जिसके लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड मदद करता है। उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगारों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र एवं कांसुलर कैंप लगातार मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करते हैं।

बांग्लादेश चुनाव का बिगुल बजा, 12 फरवरी को मतदाता चुनेंगे नई सरकार

ढाका बांग्लादेश में आम चुनाव को लेकर तारीख फाइनल हो चुकी है। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने बताया कि अगले साल 12 फरवरी (2026) को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। साथ ही, इसी दिन जुलाई चार्टर पर जनमत-संग्रह आयोजित किए जाएंगे। बांग्लादेश की प्रमुख मीडिया आउटलेट द डेली स्टार ने चुनाव आयोग के हवाले से बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एएमएम नासिरुद्दीन ने यह कार्यक्रम एक रिकॉर्डेड संदेश में घोषित किया। चुनाव कार्यक्रम के बारे में बताया गया कि संसदीय चुनाव के लिए नामांकन 29 दिसंबर 2025 तक दाखिल किए जाएंगे। 30 दिसंबर से 4 जनवरी 2026 तक नामांकन की स्क्रूटनी होगी। 20 जनवरी नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। वहीं, 21 जनवरी को प्रतीक आवंटन और अंतिम उम्मीदवार सूची जारी होगी। इसके साथ ही, 22 जनवरी से 10 फरवरी सुबह 7:30 बजे तक चुनाव प्रचार की अनुमति होगी। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसे "नए बांग्लादेश के निर्माण का ऐतिहासिक अवसर" बताते हुए कहा कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए। निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति मो. शाहाबुद्दीन से मुलाकात कर कार्यक्रम की जानकारी दी। इससे पहले आयोग ने मुख्य न्यायाधीश सैयद रफात अहमद और मुख्य सलाहकार यूनुस से भी संवाद किया। चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर पोस्टर-बैनर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। सलाहकारों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल प्रचार में करने पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल, सरकार किसी भी नई विकास परियोजना को मंजूरी या उद्घाटन नहीं करेगी। चुनाव प्रचार केवल तीन सप्ताह पहले शुरू हो सकेगा। बता दें कि इस बार मतदान समय एक घंटे बढ़ाया गया है। इसके तहत सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक मतदान होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि मतदाताओं को दो बैलेट डालने होंगे, एक चुनाव के लिए और दूसरा जनमत-संग्रह के लिए। बताया गया कि प्रवासी बांग्लादेशियों के लिए ऑनलाइन डाक मतपत्र पंजीकरण की व्यवस्था है। बुधवार शाम तक 2,97,000 प्रवासी मतदाता पंजीकृत हो चुके थे। इन बैलेटों पर केवल दलों और निर्दलीय प्रतीकों का उल्लेख होगा, नाम नहीं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि पूरे देश में 42,761 मतदान केंद्र और 2,44,739 मतदान बूथ हैं। इन बूथों पर लगभग 12.76 करोड़ मतदाता हैं। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, मतपत्र और अन्य सामग्री मतदान से एक दिन पहले केंद्रों पर भेज दी जाएंगी। 

DRDO का बड़ा बयान: F-35 और Su-57 की 5th जेनरेशन जेट्स कबाड़ बनेंगे, राफेल और S-400 की भी होगी मात

बेंगलुरु  21वीं सदी में युद्ध के तौर-तरीके भी बदल चुके हैं. पैदल सेना का महत्‍व काफी सीमित हो चुका है. एयरफोर्स और नेवी की भूमिका बेहद अहम हो चुका है. सन् 1971 में इंडियन नेवी का ‘ऑपरेशन टा्रइडेंट’ हो या फिर मई 2025 का इंडियन एयरफोर्स का ऑपरेशन सिंदूर, वायुसेना और नौसेना ने दुश्‍मनों को ऐसा सबक सिखाया कि वे ताउम्र याद रखेंगे. बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बाद ऑपरेशन सिंदूर में एयरफोर्स ने अपने जौहर से पूरी दुनिया को चकित कर दिया. सफल ऑपरेशन के बाद तीन बड़े डेवलपमेंट हुए हैं. पहला, हाइपरसोनिक मिसाइल पर फोकस बढ़ गया है. दूसरा, ताकतवर और अत्‍याधुनिक एयर डिफेंस सिस्‍टम को विकसित करने पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया जाने लगा है. तीसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न फाइटर जेट (5th और 6th जेनरेशन फाइटर जेट) के डेवलपमेंट से जुड़े प्रोजेक्‍ट में काफी तेजी लाई गई है. भारत एक तरफ पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट इंपोर्ट करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है तो दूसरी तरफ AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च कर फिफ्थ जेन कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट देसी तकनीक से डेवलप करने में भी जुटा है. इन सब डेवलपमेंट के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 6th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने वाली तकनीक डेवलप करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. यदि यह प्रोजेक्‍ट सफल रहता है तो वो दिन दूर नहीं जब भारत के पास देसी टेक्‍नोलॉजी से डेवलप 6th जेनरेशन फाइटर जेट होगा, जिसके सामने F-35 और Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान भी पानी भरेंगे. दरअसल, DRDO के अंतर्गत आने वाले रिसर्च सेंटर इमरात (RCI) ने 6th जेनरेशन वॉरफेयर के लिए जरूरी क्‍वांटम एव‍ियोनिक्‍स सेंसर डेवलप करने के लिए प्राइवेट सेक्‍टर को औपचारिक रूप से इन्‍वाइट किया है. इस टेक्‍नोलॉजी के डेवलप होने पर भारत के लिए 6th जेनरेशन फाइटर जेट बनाना बेहद आसान हो जाएगा. बता दें कि 6th जेनरेशन फाइटर जेट किसी भी अल्‍ट्रा मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा देने में सक्षम है. साथ ही एयर डिफेंस सिस्‍टम के चक्रव्‍यू को तोड़ना भी इसके लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी. रडार क्रॉस सेक्‍शन यानी RCS काफी कम होने की वजह से 6th जेनरेशन फाइटर जेट का रडार की पकड़ में आना फिलहाल असंभव जैसा है. ‘इंडिया डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, RCI ने भारतीय निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को क्वांटम आधारित एवियोनिक सेंसर विकसित करने के लिए औपचारिक तौर पर आमंत्रित किया है. यह तकनीक भविष्य के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की “कोर टेक्नोलॉजी” मानी जाती है. अब सवाल उठता है कि क्वांटम एवियोनिक्स क्या है? दरअसल, क्वांटम तकनीक वह क्षमता देती है, जिससे विमान GPS बंद होने, कम्युनिकेशन जाम होने या दुश्मन के उन्नत रडार सक्रिय होने जैसी स्थिति में भी सटीक दिशा, दूरी और दुश्मन की लोकेशन के बारे में जानकारी हासिल की जा सके. फिलहाल अभी तक किसी भी जेट में यह तकनीक नहीं है. RCI किन तकनीकों पर काम कर रहा है? RCI तीन प्रमुख क्वांटम क्षेत्रों पर तेजी से काम कर रहा है -:     क्वांटम इनर्शियल नेविगेशन: बिना GPS के भी सेंटीमीटर स्तर की सटीक दिशा व लोकेशन.     क्वांटम मैग्नेटोमीटर: बेहद हल्के चुंबकीय बदलाव पकड़कर स्टील्थ विमान, पनडुब्बियां या जमीन में छिपे विस्फोटक खोजने की क्षमता.     क्वांटम रडार/लिडार: एंटैंगल्ड फोटॉन तकनीक से ऐसे स्टील्थ विमान भी दिखा सकता है जिन्हें सामान्य रडार नहीं पकड़ पाते. DRDO के कदम से भारत ग्‍लोबल एविएशन सेक्‍टर में एक बड़ा प्‍लेयर बन सकता है. एफ-35 जैसे फिफ्थ जेनरेशन के फाइटर जेट से ज्‍यादा ताकतवर विमान डेवलप करने की प्रक्रिया का यह पहला कदम है. क्या होगा फायदा?     जैम या स्पूफ न होने वाला नेविगेशन     स्टील्थ विमानों की दूर से पहचान     विमान से ही पनडुब्बियों और भूमिगत खतरों का पता     कम्युनिकेशन बंद होने पर भी फॉर्मेशन में उड़ान प्राइवेट सेक्‍टर को क्‍यों किया इन्‍वाइट? इन क्वांटम सेंसरों को लड़ाकू विमान में लगाने के लिए उन्हें बेहद मजबूत, तापमान सहने योग्य और छोटे आकार में बनाना होगा. यह बड़ा तकनीकी चुनौती है, इसलिए RCI ने पहली बार निजी कंपनियों को TDF और iDEX जैसे प्रोग्रामों के तहत साथ जुड़ने के लिए बुलाया है. क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्षेत्रों जैसे अल्ट्रा हाई वैक्यूम सिस्टम, फोटॉनिक चिप्स, सिंगल-फोटॉन डिटेक्टर और क्रायोजेनिक कूलिंग के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप पहले से ही अच्छा काम कर रहे हैं. RCI इन्हीं कंपनियों के साथ साझेदारी कर तकनीक को आगे बढ़ाना चाहता है. RCI का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में ऐसे क्वांटम सेंसर तैयार करना है, जिन्हें भारत के भावी लड़ाकू विमानों और शुरुआती चरण में बन रहे छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म में इस्‍तेमाल किया जा सके.

CJI का गुस्सा: पब्लिसिटी के लिए याचिकाएं दायर करने पर की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच आज (गुरुवार, 11 दिसंबर को) भी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में लगातार दायर हो रही याचिकाओं पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ये सब पब्लिसिटी पाने के लिए किया जा रहा है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हमें सिर्फ SIR जैसे बड़े मामलों पर फोकस न रहकर बल्कि आम आदमी से जुड़े मुकदमों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “रेलवे एक्सीडेंट का मामला देख लीजिए… एक व्यक्ति की ट्रैक पर मौत हो गई… हमने कुछ मुआवजा दिया फिर भी वारिसों को कुछ नहीं मिला। मुआवजा न मिलने पर वे कहीं गायब हो गए। अब हमने उन्हें ढूँढ़ निकाला और फिर पक्का किया कि उन्हें पैसे मिलें.. सोचिए उस विधवा के चेहरे पर मुस्कान कैसी होगी?” सभी मामलों के लिए समय का बराबर बंटवारा चाहता हूँ इसी बीच, CJI सूर्यकांत ने कहा, "अब हर मामले में बार के सदस्यों को एक टाइमलाइन देनी होगी क्योंकि कुछ मामले जो ज़रूरी लगते हैं, वे कोर्ट का सारा समय ले लेते हैं और कई जरूरी खासकर MACT मामले में याचिकाकर्ताओं को समय नहीं मिल पाता है।" उन्होंने कहा, “मैं इस कोर्ट में सभी मामलों के लिए समय का बराबर बंटवारा चाहता हूँ, SIR जैसे जरूरी मामलों में पूरा दिन लग जाता है, जो पिटीशनर मुआवज़े के मामलों वगैरह के लिए आते हैं, वे आखिरी लाइन में बैठे रहते हैं और शाम 4 बजे बिना सुनवाई के घर वापस चले जाते हैं, वे नहीं जानते कि उनका नंबर कब आएगा?” लोग अब सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए आ रहे इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा, "मैं रजिस्ट्री को इस मामले में (SIR केस में) कोई और नई याचिका स्वीकार न करने का निर्देश दे रहा हूँ। कई लोग अब सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए आ रहे हैं। अब किसी नए मामले की ज़रूरत नहीं है। मुझे ऐसा कहते अफसोस हो रहा है।" इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत ने SIR के मुद्दे पर दायर अलग-अलग राज्यों के मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने का फैसला करते हुए सभी राज्यों के लिए अलग-अलग तारीखें भी तय कर दीं। UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे CJI ने कहा कि तमिलनाडू का मामला 16 तारीख को सुना जाएगा। इस बीच सिब्बल बोले, पश्चिम बंगाल का मामला 17 तारीख तक के लिए टाल दिया गया है। CJI ने बिना उस पर ध्यान देते हुए आगे कहा कि बिहार के सभी मामले आज सुने जाएंगे, जबकि असम के मामले 16 को, WB के मामले भी 16 को और UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे।

भारत ने 17-20 दिसंबर के लिए जारी किया NOTAM, बंगाल की खाड़ी में 2520 किमी तक नो-फ्लाई जोन

विशाखापत्तनम भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी में एक संभावित मिसाइल परीक्षण के लिए खतरे का क्षेत्र (डेंजर जोन) बढ़ाने की अधिसूचना जारी की है. यानी  नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी किया है. यह नो-फ्लाई जोन लगभग 2520 किलोमीटर तक फैला हुआ है, जो हवाई जहाजों और समुद्री यातायात के लिए अस्थाई प्रतिबंध लगाता है. परीक्षण की तारीखें 17 से 20 दिसंबर 2025 तय हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा आयोजित यह परीक्षण भारत की रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने का हिस्सा है. संभावित रूप से K-4 सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का परीक्षण हो सकता है, जो परमाणु-सक्षम है और 3500 KM तक मार कर सकती है. यह क्षेत्र विशाखापत्तनम तट के पास बंगाल की खाड़ी में है, जहां भारत के परमाणु-सबमरीन INS अरिहंत और उसके बाद की सबमरीन तैनात हैं. पिछले परीक्षणों की तरह, यह जोन पहले से ज्यादा बड़ा है, जो मिसाइल की उन्नत रेंज और सटीकता का संकेत देता है. परीक्षण का समय और दायरा: क्यों इतना बड़ा क्षेत्र?     तारीखें: 17 से 20 दिसंबर 2025 तक, सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगा.     क्षेत्र: बंगाल की खाड़ी में 2520 किमी का दायरा, जिसमें हिंद महासागर की ओर फैलाव है. यह अक्टूबर के परीक्षण (1480 किमी) से दोगुना है.     प्रभाव: इस दौरान नागरिक उड़ानें और जहाज इस क्षेत्र से बचेंगे. भारतीय नौसेना और वायुसेना निगरानी करेंगे. वैज्ञानिक रूप से, इतना बड़ा जोन इसलिए जरूरी है क्योंकि मिसाइल परीक्षण में डेब्री (मलबा) और प्रभाव क्षेत्र बहुत दूर तक फैल सकता है. K-4 मिसाइल की रेंज 3000-3500 किमी है, जो इसे चीनी नौसेना के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनाती है. यह मिसाइल ठोस ईंधन से चलती है. सबमरीन से लॉन्च होने पर 20-30 मीटर गहराई से फायर की जा सकती है. K-4 SLBM – भारत की 'सीकिंग थ्रेट रिड्यूसर' DRDO के अधिकारियों ने नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन सैटेलाइट विशेषज्ञ डेमियन साइमन और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह K-4 SLBM का परीक्षण लगता है.      क्या है K-4? यह भारत की दूसरी पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है, जो अग्नि मिसाइल सीरीज पर आधारित है. इसका वजन 17 टन, लंबाई 12 मीटर और यह MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल)  तकनीक से लैस हो सकती है, यानी एक मिसाइल से कई लक्ष्य हिट कर सकती है.     क्षमता: 3500 किमी रेंज, परमाणु हथियार ले जाने की ताकत. यह INS अरिहंत जैसी सबमरीन से लॉन्च होती है.     महत्व: यह परीक्षण भारत को 'नो फर्स्ट यूज' नीति के तहत  सेकंड स्ट्राइक करने की क्षमता देगा. हाल के चीनी अनुसंधान जहाजों की गतिविधियों के बीच यह समय पर है.     पिछले परीक्षण: अक्टूबर 2025 में 2520 किमी जोन अग्नि-प्राइम का था, लेकिन नवंबर में 3485 किमी जोन K-4 का था (जो रद्द हो गया). दिसंबर 11 को 1190 किमी का छोटा परीक्षण हुआ, लेकिन अब यह बड़ा जोन SLBM पर फोकस दिखाता है. चीन की गतिविधियों के बीच मजबूत संदेश हिंद महासागर में चीनी 'रिसर्च वेसल्स' (जैसे शेन हाई यी हाओ) की मौजूदगी बढ़ी है. ये जहाज जासूसी का काम कर सकते हैं.भारत का यह परीक्षण क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का संकेत है. अमेरिका और फ्रांस जैसे सहयोगी देशों को सूचित किया गया है. कोई खतरा नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी     सुरक्षा: NOTAM से सभी को पहले से पता चल जाता है, इसलिए दुर्घटना का जोखिम कम है.      पर्यावरण: मिसाइल परीक्षण में रासायनिक ईंधन से थोड़ा प्रदूषण होता है, लेकिन DRDO के नियम सख्त हैं.     लाभ: सफल परीक्षण से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, निर्यात के अवसर भी. यह परीक्षण भारत को वैश्विक मिसाइल क्लब में मजबूत बनाएगा. अगले साल K-5 (5,000 किमी रेंज) का इंतजार है.   

संसद में जवाब: शिमला रेलवे स्टेशन का होगा मेगा डेवलपमेंट, बढ़ेगा पर्यटन

धर्मशाला रेलवे मन्त्री अश्वनी वैष्णव ने काँगड़ा लोकसभा सांसद डॉक्टर राजीव भारद्वाज को लोकसभा में बताया कि हिमाचल प्रदेश को उत्तरी रेलवे जोन में कवर किया गया है। र इस जोन के लिए वर्ष 2025-26, के लिए ₹2,216 करोड़ रूपये का बजट आबंटित किया गया है जिसमें से अब तक ₹ 919 करोड़ रूपये खर्च किये जा चुके हैं। उन्होंने प्रश्न के उतर में बताया कि अमृत भारत योजना के अन्तर्गत देश में 1337 रेलवे स्टेशन विकसित किये जा रहे हैं जिसमें से हिमाचल प्रदेश के पालमपुर, शिमला, बैजनाथ पपरोला और अम्ब अम्बोटा स्टेशन शामिल हैं।  उन्होंने बताया कि इसमें से पालमपुर, बैजनाथ पपरोला और अम्ब अम्बोटा रेलवे स्टेशनों को विकसित कर दिया गया है जबकि शिमला को मास्टर प्लानिंग के अन्तर्गत कवर किया जा रहा है। रेलवे मन्त्री अश्वनी वैष्णव ने काँगड़ा लोकसभा सांसद डॉक्टर राजीव भरद्वाज को लोकसभा में बताया कि पंचरुखी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म, शेल्टर, वेटिंग हॉल, पेयजल, शौचालय और यात्रियों के बैठने की उचित सुविधा प्रदान की गई है जो कि तय मापदण्डों से ज्यादा हैं। उन्होंने बताया कि रेल सुविधाओं के बिस्तार के लिए राज्य सरकारों, सांसदों, केन्द्रीय मन्त्रियों और अन्य जन प्रतिनिधियों से सुझाव नियमित रूप से प्राप्त होते हैं जिन्हे पर्याप्त जाँच पड़ताल के बाद कार्यन्वित किया जाता है। उन्होंने बताया कि अमृत भारत योजना के अन्तर्गत रेलवे स्टेशनों पर वेटिंग हॉल, टॉयलेट, वाटर बूथ, बैठने की उचित ब्यबस्था, लिफ्ट, एस्कलेटर/रैंप आदि की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रहीं हैं। उन्होंने कहाकि इस योजना के अन्तर्गत रेलवे स्टेशन पर स्थानीय उत्पादों की विक्री को वन स्टेशन वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा दिव्यांगों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाएँगी।

राज्यसभा में चुनाव सुधारों की चर्चा अधूरी, सोमवार को फिर होगा घमासान

नई दिल्ली राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर चल रही बहस गुरुवार को स्थगित कर दी गई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि बाकी चर्चा सोमवार को दोपहर 1 बजे होगी। यह फैसला संसद में होने वाली प्रार्थना सभा को देखते हुए लिया गया, जिसके कारण सदस्यों को अपनी बात बीच में ही रोकनी पड़ी। किरेन रिजिजू ने सदन को बताया कि कई सदस्यों ने इस विषय पर पहले ही बात कर ली थी, लेकिन तय समय में बहस पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि सांसदों को प्रार्थना सभा में हिस्सा लेना है, इसलिए चुनाव सुधारों पर बाकी चर्चा सोमवार को दोपहर 1 बजे होगी और सदस्यों से सोमवार को फिर से इकट्ठा होने का अनुरोध किया। चुनाव सुधारों पर चर्चा शुक्रवार को नहीं होगी, क्योंकि यह दिन प्राइवेट मेंबर्स बिल के लिए तय है। इसके बाद उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने शाम 4 बजे सदन को शुक्रवार तक के लिए संसद को स्थगित कर दिया। चुनाव सुधारों पर बहस मौजूदा सत्र की सबसे गरमागरम चर्चाओं में से एक रही है, जिसमें विपक्षी सांसदों ने मतदाताओं के नाम हटाने, चुनावी सूचियों में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर चिंता जताई है। आप सांसद संजय सिंह, कांग्रेस नेता अजय माकन और जयराम रमेश, और भाजपा सांसदों में सुधांशु त्रिवेदी और जेपी नड्डा ने अपनी राय रखी है और भारत के लोकतंत्र की स्थिति पर बिल्कुल अलग-अलग विचार पेश किए। जहां विपक्षी सदस्यों ने मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाने, मतदान के आंकड़ों में विसंगतियों और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, वहीं सत्ताधारी पार्टी के सांसदों ने भारत की चुनावी प्रणाली की मजबूती का बचाव किया है और ईवीएम, वोटर आईडी और सीसीटीवी निगरानी जैसे तकनीकी सुरक्षा उपायों का हवाला दिया है। बहस को फिर से शेड्यूल करके, किरेन रिजिजू यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि जिन सदस्यों ने नोटिस दिए थे और अपनी बात रखने की तैयारी की थी, उन्हें अपने विचार पेश करने के लिए पर्याप्त समय मिले। सोमवार के सत्र में और भी गरमागरम बहस होने की उम्मीद है, जिसमें दोनों पक्ष चुनावी निष्पक्षता, सुधारों और संवैधानिक अधिकारियों की भूमिका पर अपने-अपने तर्कों को और मजबूत करेंगे।

भारत तैयार लंबी उड़ान के लिए: 2047 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देगा जीडीपी को 25% की ताकत

नई दिल्ली भारत 2047 तक वैश्विक औद्योगिक महाशक्ति बनने की राह पर है, जहां सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी वर्तमान के करीब 17 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 25 प्रतिशत होने का लक्ष्य है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और जेड47 द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स ऐसे 5 प्रमुख क्षेत्र हैं, जो 2047 तक 25 ट्रिलियन डॉलर के औद्योगिक अवसर का आधार बन सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हो रहा है। भारत की सेमीकंडक्टर मांग 2022 में 33 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 117 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, अब भारत में बिकने वाले 99 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही बनाए जाते हैं, वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा मात्र 26 प्रतिशत पर था। यह प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं के प्रभाव को दर्शाता है। बीसीजी के मैनेजिंग डायरेक्टर और पार्टनर ईशांग जावा ने कहा, "यह सिर्फ आकार की बात नहीं है; बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता की बात है। अब भारत केवल असेंबल नहीं कर रहा है, बल्कि डिजाइन, इनोवेट (नया खोज) और वैश्विक वैल्यू चेन में योगदान कर रहा है।" रिपोर्ट में भारत के नोएडा-चेन्नई-होसुर और धोलेरा जैसे क्षेत्रीय मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स का उदाहरण दिया गया है, जो निर्माण में मदद कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने अपनी नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता को लक्ष्य से 5 साल पहले 50 प्रतिशत तक पहुंचा लिया है। रिपोर्ट में अनुसंधान और विकास (आरएंडडी), डिजाइन को बढ़ाने, प्रतिभा को मजबूत करने, ब्रेन ड्रेन (विदेशों से भारत लौटकर आए विशेषज्ञों) को बढ़ावा देने, वर्ल्ड क्लास क्लस्टर इकोसिस्टम्स और निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स के योगदान को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है, ताकि इस विकास को स्थिर किया जा सके और भारत को वैश्विक नेतृत्व में लाया जा सके। जेड47 के मैनेजिंग डायरेक्टर सुदीप्तो सन्नीग्राही ने कहा, "आधुनिक निर्माण और डीप-टेक (गहरे तकनीकी) में सफलता प्राप्त करना विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए जरूरी है।"

ट्रेड, एनर्जी और डिफेंस पर गहन चर्चा: मोदी–ट्रंप बातचीत से India-US रिश्तों में नई गति

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा के मुद्दे पर बात हुई। पीएम मोदी ने एक्स पर बताया, "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। भारत और अमेरिका वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।" अधिकारियों ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।उन्होंने कहा कि दोनों नेता साझा चुनौतियों से निपटने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील सकारात्मक मोड़ पर अमेरिकी प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील सकारात्मक मोड़ पर है। भारत ने अमेरिका को अब तक का बेस्ट प्रस्ताव दिया है। किन फसलों को मिलेगी भारत में एंट्री? ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी ज्वार और सोयाबीन जैसे उत्पादों के लिए भारत अपना बाजार खोलने के लिए तैयार हो गया है। USTR की एक टीम अभी भारत में ही है और वे कृषि क्षेत्र में आई बाधाओं को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत को एथेनॉल बेचना चाहता है अमेरिका ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी मक्के और सोयाबीन से निकलने वाले एथेनॉल को भी भारत खरीद सकता है। कई अन्य देशों ने भी अमेरिकी एथेनॉल के लिए अपने बाजार खोल दिए हैं।  

तत्काल टिकट बुकिंग आसान होगी! रेलवे ने 3 करोड़ से ज्यादा फर्जी आईडी बंद कीं

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने आरक्षण प्रणाली के प्रदर्शन को मजबूत बनाने और तत्काल टिकटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगभग 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय किया है। यह जानकारी गुरुवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे नियमित/तत्काल टिकटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यूजर्स अकाउंट का कड़ा पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन किया गया है। जनवरी 2025 से अब तक लगभग 3.02 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय कर दिया गया है। साथ ही, अकामाई जैसे एंटी-बॉट समाधानों को फर्जी यूजर्स को हटाने और वैध यात्रियों के लिए सुचारू बुकिंग सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तत्काल बुकिंग में दुरुपयोग को रोकने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। 4 दिसंबर 2025 तक यह सुविधा 322 रेलगाड़ियों में मिल रही है। इन उपायों के परिणामस्वरूप, इन रेलगाड़ियों में से लगभग 65 प्रतिशत में तत्काल टिकट की उपलब्धता का समय बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, आरक्षण काउंटरों पर तत्काल बुकिंग के लिए आधार-आधारित ओटीपी को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है और 4 दिसंबर तक इसे 211 रेलगाड़ियों में लागू किया गया है। इन और अन्य उपायों के परिणामस्वरूप, 96 लोकप्रिय रेलगाड़ियों में से लगभग 95 प्रतिशत रेलगाड़ियों में तत्काल टिकट की उपलब्धता का समय बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए, रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड व्यापक साइबर सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें टेक-डाउन सेवाएं, खतरा निगरानी, ​​डीप और डार्क वेब निगरानी और डिजिटल जोखिम सुरक्षा शामिल हैं। ये सेवाएं उभरते साइबर खतरों के बारे में सक्रिय और कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान करती हैं और बेहतर घटना प्रतिक्रिया को संभव बनाती हैं।