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तख़्त या ताबूत? इमरान खान के करीबी जनरल फैज़ हमीद को पाक आर्मी कोर्ट से 14 साल की सज़ा

इस्लामाबाद  मुगल साम्राज्य के जमाने से चली आ रही ‘तख्त या ताबूत’ वाली कहावत पाकिस्तान के वर्तमान हालात पर सटीक बैठ रही है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इस समय जेल में हैं और उनके करीबी सैन्य जनरल फैज हमीद को पाकिस्तान आर्मी की कोर्ट ने 14 साल कैद की सजा सुनाई है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के प्रमुख रहे फैज हमीद किसी वक्त पाकिस्तानी सेना के चीफ बनाए जाने के संभावित नामों में शामिल थे, लेकिन फिर हालात बदले और इमरान खान समेत वह जेल में पहुंच गए।   जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरलन (रिटायर) फैज हमीद को 14 साल की कड़ी सजा सुनाई गई है। पाकिस्तानी सेना की सार्वजनिक मामलों की शाखा, आईएसपीआर ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि एक सैन्य अदालत ने फैज हमीद पर कदाचार, सैन्य सेवा नियमों में उल्लंघन राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने, अधिकारों और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग, व्यक्तियों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सजा सुनाई है। आईएसपीआर ने बताया कि लंबी और कठिन सुनवाई के बाद सैन्य अदालत ने फैज हमीद को सभी आरोपों में दोषी पाया गया है। इसी के तहत 11 दिसंबर को आधिकारिक रूप से फैज को 14 साल की कड़ी सजा सुनाई गई है। पाकिस्तानी सेना की गुरिल्ला अदालत की वकालत करते हुए आईएसपीआर ने जोर देकर कहा कि इस मुकदमे के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। हमीद को अपनी पसंद का वकील नियुक्त करने का अधिकार दिया या था और उन्हें इस फैसले के खिलाफ सही मंच पर अपील करने का अधिकार भी प्राप्त है। गौरतलब है कि हमीद उस वक्त वैश्विक हेडलाइन में आए थे, जब आईएसआई चीफ के रूप में वह 2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान से जाने के बाद तालिबान के साथ बैठक करने काबुल जा पहुंचे थे। यहां पर उनकी चाय पीते हुए एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसकी चर्चा बाद में पूरी दुनिया में हुई थी। इमरान खान की सरकार के दौरान उन्हें पाकिस्तानी सेना और सरकार के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता था। इसके अलावा जब तत्कालीन जनरल बाजवा के रिटायर होने की खबरें सामने आई तो सेना प्रमुख के लिए भी फैज हमीद का नाम आगे था।  

रूस-जापान विवाद पर चीन की सीख: बीजिंग ने कहा— बात का बतंगड़ मत बनाओ

जापान  चीन और रूस द्वारा की गई पेट्रोलिंग पर जापान के रिएक्शन पर अब ड्रैगन ने नई नसीहत दी है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि टोक्यो को चीन और रूस की सेनाओं द्वारा की गई इस पेट्रोलिंग से परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह उनके वार्षिक साझा कार्यक्रम का हिस्सा है। गौरतलब है कि चीन और रूस की साझा पेट्रोलिंग के बाद जापान ने भी गुरुवार को इस बात की घोषणा की थी कि उसने अमेरिका के साथ मिलकर एक संयुक्त हवाई अभ्यास किया है। जापानी प्रधानमंत्री के ताइवान पर दिए बयान के बाद चीन और जापान के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है।   रूस और चीन द्वारा की गई इस पेट्रोलिंग पर चिंता जाहिर करते हुए जापान के संयुक्त चीफ्स ऑफ डिफेंस स्टाफ ने बुधवार को कहा कि इससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बढ़ता है। जापान ने आरोप लगाया कि एक दिन पहले दो रूसी Tu-95 परमाणु क्षमता वाले बॉम्बर जापान सागर से उड़कर दो चीनी H-6 बॉम्बर्स से पूर्वी चीन सागर में मिले और फिर दोनों देशों ने जापान के चारों ओर संयुक्त उड़ान भरी। जापान की तरफ से कहा गया कि इसी तनाव को कम करने के लिए जापानी सेना ने भी अमेरिकी सेना के साथ एक संयुक्त अभ्यास किया है। चीन के विमानों ने जापानी फाइटर जेट को किया रडार लॉक इससे पहले भी जापान द्वारा चीन के ऊपर आरोप लगाया गया था कि बीजिंग ने इंटरनेशनल वॉटर्स में दो बार जापानी फाइटर जेट्स को रडॉर लॉक कर दिया था। इसके बाद उसे अपने जहाजों को स्क्रैंबल (तेजी से उड़ान भरकर खतरे की जांच करने) का आदेश देना पड़ा। इसके बाद जापान ने चीनी राजदूत को तलब किया। हालांकि, इस घटना के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने तरीकों से बयान जारी किया। चीन की तरफ से कहा गया कि जापानी जहाजों ने बिना अनुमति के चीनी क्षेत्र में प्रवेश करके जासूसी करने की कोशिश की थी, इसके बाद तनाव पैदा हुआ। क्या है हालिया विवाद? जापान और चीन के बीच में वैसे तो विवाद काफी पुराना है लेकिन हाल ही में जापान की नई नवेली प्रधानमंत्री तकाइची के एक बयान के बाद विवाद बढ़ गया है। दरअसल, उन्होंने खुले तौर पर ताइवान की तरफदारी करते हुए कहा कि अगर चीन ताइवान की और सैन्य खतरा पैदा करता है या सैन्य कार्रवाई करने की कोशिश करता है तो जापान इसमें हस्तक्षेप करेगा। ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानने वाले बीजिंग ने इस बयान के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया जताई। कूटनीतिक ही नहीं सैन्य तरीके से भी जापान को परेशान करने के लिए चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समंदर में दादागिरी दिखानी शुरू कर दी। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच में लगातार तनाव बढ़ा हुआ है।  

CJI सूर्यकांत की कड़ी टिप्पणी: ‘ऐसी याचिकाएं लेना बंद कीजिए’, आखिर क्या था मामला?

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच आज भी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में लगातार दायर हो रही याचिकाओं पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ये सब पब्लिसिटी पाने के लिए किया जा रहा है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हमें सिर्फ SIR जैसे बड़े मामलों पर फोकस न रहकर बल्कि आम आदमी से जुड़े मुकदमों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “रेलवे एक्सीडेंट का मामला देख लीजिए… एक व्यक्ति की ट्रैक पर मौत हो गई… हमने कुछ मुआवजा दिया फिर भी वारिसों को कुछ नहीं मिला। मुआवजा न मिलने पर वे कहीं गायब हो गए। अब हमने उन्हें ढूँढ़ निकाला और फिर पक्का किया कि उन्हें पैसे मिलें.. सोचिए उस विधवा के चेहरे पर मुस्कान कैसी होगी?”   इसी बीच, CJI सूर्यकांत ने कहा, "अब हर मामले में बार के सदस्यों को एक टाइमलाइन देनी होगी क्योंकि कुछ मामले जो ज़रूरी लगते हैं, वे कोर्ट का सारा समय ले लेते हैं और कई जरूरी खासकर MACT मामले में याचिकाकर्ताओं को समय नहीं मिल पाता है।" उन्होंने कहा, “मैं इस कोर्ट में सभी मामलों के लिए समय का बराबर बंटवारा चाहता हूँ, SIR जैसे जरूरी मामलों में पूरा दिन लग जाता है, जो पिटीशनर मुआवज़े के मामलों वगैरह के लिए आते हैं, वे आखिरी लाइन में बैठे रहते हैं और शाम 4 बजे बिना सुनवाई के घर वापस चले जाते हैं, वे नहीं जानते कि उनका नंबर कब आएगा?”   इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा, "मैं रजिस्ट्री को इस मामले में (SIR केस में) कोई और नई याचिका स्वीकार न करने का निर्देश दे रहा हूँ। कई लोग अब सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए आ रहे हैं। अब किसी नए मामले की ज़रूरत नहीं है। मुझे ऐसा कहते अफसोस हो रहा है।" इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत ने SIR के मुद्दे पर दायर अलग-अलग राज्यों के मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने का फैसला करते हुए सभी राज्यों के लिए अलग-अलग तारीखें भी तय कर दीं। UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे CJI ने कहा कि तमिलनाडू का मामला 16 तारीख को सुना जाएगा। इस बीच सिब्बल बोले, पश्चिम बंगाल का मामला 17 तारीख तक के लिए टाल दिया गया है। CJI ने बिना उस पर ध्यान देते हुए आगे कहा कि बिहार के सभी मामले आज सुने जाएंगे, जबकि असम के मामले 16 को, WB के मामले भी 16 को और UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे।  

तलाक में पत्नी ने छोड़ी हर मांग, सुप्रीम कोर्ट बोला— अनोखा समझौता, जीवन में खुशियां मिलें

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक आपसी सहमति से तलाक के मामले में महिला की जमकर तारीफ की। दअसल महिला ने तलाक लेते समय किसी तरह का गुजारा भत्ता यानी एलिमनी नहीं मांगी। इतना ही नहीं, विवाह के समय पति की मां द्वारा उपहार में दिए गए सोने के कंगन भी वापस कर दिए। अदालत ने इसे अत्यंत दुर्लभ समझौता बताते हुए अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत विवाह को भंग कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हेतु सूचीबद्ध था। सुनवाई की शुरुआत में ही महिला की ओर से पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनकी मुवक्किल किसी प्रकार का भरण-पोषण या अन्य आर्थिक प्रतिपूर्ति की मांग नहीं कर रही हैं। अदालत को बताया गया कि केवल सोने के कंगन लौटाना शेष है। पीठ ने पहले गलतफहमी में यह समझा कि पत्नी अपना स्त्री-धन वापस मांग रही है, लेकिन जैसे ही वकील ने स्पष्ट किया कि ये कंगन तो महिला खुद लौटा रही है, जो शादी के समय पति की मां ने उन्हें भेंट किए थे, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला मुस्कुरा उठे। उन्होंने कहा- यह बहुत ही दुर्लभ समझौता है जो हमने देखा है। आजकल ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं। अदालत ने अपने आदेश में लिखा- यह उन विरले मामलों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की मांग नहीं की गई। उलटे पत्नी ने विवाह के समय मिले सोने के कंगन लौटा दिए। हमें बताया गया कि ये कंगन पति की मां के हैं। हम इस कदम की सराहना करते हैं, क्योंकि ऐसा आजकल कम ही देखने को मिलता है। सुनवाई के दौरान जैसे ही पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ीं, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने उनसे कहा- हमने इस बात का उल्लेख किया है कि यह उन दुर्लभ मामलों में से है जहां किसी प्रकार का लेन-देन नहीं हुआ। हम आपकी सराहना करते हैं। अतीत को भूलकर खुशहाल जीवन बिताइए। इसके बाद अदालत ने अंतिम आदेश पारित करते हुए कहा- उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए दोनों पक्षों के बीच विवाह संबंध को समाप्त करते हैं। यदि पक्षकारों के बीच कोई अन्य कार्यवाही लंबित है, तो वह भी यहीं समाप्त की जाती है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अक्सर तलाक मामलों में संपत्ति, भरण-पोषण और अन्य आर्थिक दावों को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया देखने को मिलती है। इस मामले में महिला द्वारा किसी भी दावे से परहेज करना और उपहार वापस करना अदालत के अनुसार असाधारण और सराहनीय कदम है।

न्यू ईयर से पहले बुरी खबर: केंद्रीय कर्मचारियों का DA बढ़ना अब अधर में?

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को नए साल में अपनी सैलरी में मामूली बढ़ोतरी से ही संतोष करना पड़ सकता है। जनवरी 2026 से लागू होने वाला महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) संशोधन इस बार सिर्फ 2 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। अगर ऐसा हुआ तो केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58% से बढ़कर 60% हो जाएगा। यह पिछले सात वर्षों में सबसे कम बढ़ोतरी होगी। बता दें कि महंगाई भत्ते की गणना औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधार पर होती है। जुलाई 2025 से अक्टूबर 2025 तक सूचकांक लगातार बढ़ा है। यह मुद्रास्फीति के बढ़ने का संकेत है। इसके बावजूद बढ़ोतरी इतनी तेज नहीं है कि भत्ते को 61% तक कर दिया जाए। यह 7वें वेतन आयोग के 10-वर्षीय चक्र से बाहर होने वाला पहला संशोधन होगा। 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है जबकि 8वें वेतन आयोग ने अभी अपना काम शुरू किया है। इसके संदर्भ-शर्तों (ToR) में लागू करने की तारीख का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। आयोग के पास रिपोर्ट देने के लिए 18 माह हैं और आमतौर पर नई वेतन संरचना लागू होने में रिपोर्ट के बाद 1–2 साल लग जाते हैं। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग के लाभ 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में मिल सकते हैं। टेंशन में केंद्रीय कर्मचारी कर्मचारियों की बड़ी चिंता यह है कि जनवरी 2026 से नई वेतन संरचना लागू होगी या नहीं क्योंकि सरकार ने संसद में इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इस वजह से यह लगभग तय माना जा रहा है कि महंगाई भत्ता मौजूदा संरचना के अनुसार ही अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा, जब तक 8वां वेतन आयोग पूरी तरह लागू नहीं हो जाता। भत्ते में यह मामूली बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर उस समय का DA बेसिक पे में जोड़ा जाता है और DA फिर शून्य से शुरू होता है। यानी जनवरी 2026 से लेकर जुलाई 2027 तक होने वाले चार भत्ता संशोधन सीधे तौर पर नई वेतन संरचना में आपकी बेसिक सैलरी तय करेंगे।  

इटली के डिप्टी पीएम तजानी ने पीएम मोदी से मुलाकात को बताया सकारात्मक, जॉर्जिया मेलोनी ने दिया 2026 का निमंत्रण

नई दिल्ली इटली के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी इस समय भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. बुधवार शाम उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई, जिसे तजानी ने बहुत पॉजिटिव और उपयोगी बताया.  इस मुलाकात के दौरान तजानी ने पीएम मोदी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर से 2026 में इटली आने का निमंत्रण भी दिया. तजानी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के इटली के दौरे को लेकर 'हां' में तो जवाब मिला है. लेकिन, अभी समय तय नहीं किया गया है. विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि भारत–इटली रिश्ते नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं और आने वाले सालों में दोनों देशों के सहयोग में और तेजी आएगी. भारत और इटली एक दूसरे के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार हैं और आने वाला समय दोनों देशों के लिए बेहतर संभावनाएं लेकर आएगा.  इटली की पीएम मेलोनी के भारत दौरे पर क्या बोले तजानी? जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भारत कब आएंगी? इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि हम लोगों ने यह अभी तया नहीं किया है कि वह 2026 में कब भारत आएंगी. इटली के प्रतिनिधित्व और प्रधानमंत्री मोदी के बीच क्या बातचीत हुई? मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन, सांस्कृतिक जुड़ाव, व्यापार, तकनीक और कूटनीतिक साझेदारी पर विस्तार से बात की. तजानी ने खास तौर पर कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभा सकता है. उनके अनुसार भारत का वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव इस दिशा में मदद कर सकता है. कब-कब हुई जॉर्जिया मेलोनी और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाक़ात? नवंबर 2022 – बाली, इंडोनेशिया (G20 शिखर सम्मेलन): प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद मेलोनी की मोदी से पहली मुलाकात बाली में हुई. यह भारत–इटली संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत मानी गई. 2–3 मार्च 2023 – नई दिल्ली: मेलोनी की पहली आधिकारिक भारत यात्रा में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जो द्विपक्षीय संबंधों में सबसे बड़ा कदम माना जाता है. सितंबर 2023 – नई दिल्ली (G20 शिखर सम्मेलन): इस मुलाकात में नेताओं की सहजता और तालमेल ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं.  14 जून 2024 – पुगलिया, इटली (G7 शिखर सम्मेलन): मेजबान के तौर पर मेलोनी ने मोदी का स्वागत किया और उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई दी. बैठक में व्यापक वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई. 18 नवंबर 2024 – रियो डी जनेरियो, ब्राजील (G20 शिखर सम्मेलन): दोनों नेताओं ने इस दौरान “इंडिया–इटली ज्वाइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025–2029” की घोषणा की. जून 2025 – कनानास्किस, कनाडा (G7 शिखर सम्मेलन): यहां हुई अनौपचारिक बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi हैशटैग ट्रेंड करता रहा. 23 नवंबर 2025 – जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका (G20 शिखर सम्मेलन): मुलाकात में आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ “इंडिया–इटली ज्वाइंट इनिशिएटिव” की घोषणा की गई.

लश्कर के पहलगाम अटैक के बाद अमेरिका का सख्त संदेश: भारत से गठबंधन ही सुरक्षित रास्ता

वाशिंगटन  अमेरिकी सांसद जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा को बता रहे हैं। खास बात है कि अमेरिकी पक्ष यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बीच रिश्ते मजबूत होते नजर आ रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर वाइट हाउस गए थे। हाउस फॉरेन अफेयर्स साउथ एंड सेंट्रल एशिया सबकमेटी के अध्यक्ष बिल हुइजेंगा ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता अब सिर्फ जरूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसी दुनिया चाहता है, जहां लोकतंत्र से नियम बनें, तो भारत के साथ हमारी साझेदारी बेहद अहम है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा, 'पहलगाम में भयानक हमले के लिए जिम्मेदार LeT और TRF को ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो आतंकवादी के खिलाफ जंग में हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। फिर हमला कहीं भी क्यों न हुआ हो…।' चीन का भी लिया नाम हुइजेंगा ने कहा, 'चीन और रूस जैसी ताकतें बलपूर्वक सीमाएं बदल रही हैं और पड़ोसियों पर दबाव डाल रही हैं। यह इंडो-पैसेफिक से ज्यादा साफ कहीं नहीं देखा जा रहा है, जहां लगातार आक्रामक होता चीन क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक समृद्धि और व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। …हम ऐसा नहीं होने दे सकते। भारत इन जोखिमों को पहले से जानता है।' उन्होंने कहा, '2020 से भारत के साथ साझा सीमा में चीनी बलों ने भारतीय सैनिकों को मारा है। भारत ने भी मजबूती से जवाब दिया है, चीन के सैन्य दबाव को कमजोर किया है और भारत और पड़ोसी भूटान में चीनी प्रभाव को कम किया है। आज भारत और अमेरिका के बीच सहयोग में में रक्षा, तकनीक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और व्यापार शामिल हैं।' ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को आतंकवादी ने पहलगाम में 26 सैलनियों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल समझौता रोकने समेत कई फैसले लिए। इसके अलावा भारतीय सेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर का आगाज किया था, जिसके तहत पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष हुआ। पाकिस्तानी पक्ष के अनुरोध को बाद सीजफायर किया गया था।  

तेज बुखार में भी अमित शाह का जवाब तीखा, ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच राहुल गांधी सदन छोड़ गए

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार पलटवार किया। सूत्रों के अनुसार जब गृह मंत्री लोकसभा में बोल रहे थे उस समय वह बुखार से ग्रस्त थे। उनके शरीर का तापमान 102 डिग्री था। सदन की कार्यवाही से ठीक पहले डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और बुखार कम करने की दवाइयां दीं। बुखार के बावजूद अमित शाह ने करीब डेढ़ घंटे का भाषण दिया और विपक्ष के हर आरोप वोट चोरी, स्पेशल रिविजन इंस्पेक्शन (SIR) और चुनाव आयोग में नियुक्तियों पर विस्तृत और आक्रामक तरीके से जवाब दिया।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उनका भाषण उत्कृष्ट, तथ्यपूर्ण और विपक्ष के झूठों को उजागर करने वाला था। आपको बता दें कि राहुल गांधी हाल के दिनों में कई मंचों पर “वोट चोरी” का मुद्दा उठा चुके हैं और इसे “हाइड्रोजन बम” तक कह चुके हैं। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे पर रैली भी की थी और सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से इसे उठाया। सदन में चर्चा के दौरान गृह मंत्री शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि कोई उन्हें यह नहीं बता सकता कि उन्हें किस क्रम में क्या बोलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा, “जब आप जीतते हैं, नई पोशाक पहनकर शपथ लेते हैं और सूची बिल्कुल ठीक लगती है। लेकिन जब बिहार की तरह जमीन खिसक जाती है तब अचानक मतदाता सूची में गड़बड़ी दिखने लगती है। यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा।” आपको बता दें कि अमित शाह जब जवाब देने लगे तो कुछ ही देर में राहुल गांधी संसद की अगुवाई में विपक्ष संसद छोड़कर बाहर चला गया। SIR पर भी दिया विस्तार से जवाब अमित शाह ने कहा कि SIR पर संसद में चर्चा होना आवश्यक नहीं था, लेकिन उन्होंने विपक्ष की मांग मानकर बहस में हिस्सा लिया ताकि यह दिखाया जा सके कि सरकार किसी भी मुद्दे से भाग नहीं रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप चुनाव आयोग को आधिकारिक रूप से सौंपे ही नहीं गए थे।  

US में आया ट्रंप का ‘गोल्ड कार्ड’ मॉडल: कौन ले सकेगा फायदा, ग्रीन कार्ड से कैसे अलग?

वाशिंगटन  संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बड़ा और विवादास्पद बदलाव करते हुए एक नया इमिग्रेशन प्रोग्राम शुरू किया है। इसे ‘गोल्ड कार्ड’ नाम दिया गया है। इसके तहत कोई भी विदेशी नागरिक 10 लाख अमेरिकी डॉलर अमेरिकी खजाने में जमा कराकर स्थायी निवासी बन सकता है। यह घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को की है। इसके साथ ही इस ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं। वाइट हाउस इसे उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को तेज-तर्रार प्रक्रिया से अमेरिका में रखने का एक नया साधन बता रहा है। ‘गोल्ड कार्ड’ एक नया वीजा आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम है जो अमेरिका में कानूनी स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड जैसा) प्रदान करता है। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें न तो पारिवारिक स्पॉन्सर की जरूरत है और न ही रोजगार/नियोक्ता स्पॉन्सरशिप की। यह पूरी तरह वित्तीय योगदान पर आधारित है। गोल्ड कार्ड पाने वाले आवेदकों को आगे चलकर अमेरिकी नागरिकता के लिए सामान्य प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने का अधिकार भी मिलेगा। कितना खर्च आएगा? व्यक्तिगत गोल्ड कार्ड के लिए 1,000,000 अमेरिकी डॉलर यानी कि लगभग 8.4 करोड़ रुपये देने होंगे। इनमें 15,000 डॉलर का नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग शुल्क भी शामिल है। जांच के के बाद यह राशि अमेरिकी ट्रेजरी को उपहार के रूप में जमा करानी होती है। किसी कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए कंपनी को 2,000,000 डॉलर की दर से प्रति व्यक्ति की दर से जमा करना होगा। इनमें 15,000 डॉलर की प्रोसेसिंग शुल्क भी शामिल है। कंपनियां चाहें तो यह 20 लाख डॉलर किसी दूसरे कर्मचारी को “ट्रांसफर” भी कर सकती है। इसके लिए 1% वार्षिक मेंटेनेंस शुल्क और 5% ट्रांसफर शुल्क देना होगा। यह पैसा जाता कहां है? संपूर्ण राशि सीधे अमेरिकी ट्रेजरी में जाती है, जिसे वाइट हाउस अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक वित्त को मजबूत करने का तरीका बता रहा है। गोल्ड कार्ड और ग्रीन कार्ड में अंतर ग्रीन कार्ड कई मार्गों से मिलता है। परिवार, रोजगार, असाधारण प्रतिभा, डाइवर्सिटी लॉटरी, शरण/शरणार्थी स्थिति या निवेश आधारित नौकरी-निर्माण मॉडल के जरिए ग्रीन कार्ड का रास्ता खुलता है। लेकिन गोल्ड कार्ड में नियम बेहद सरल है। सरकार को बड़ी रकम दीजिए और स्थायी निवास पाएं। ग्रीन कार्ड में सरकार को सीधे करोड़ों रुपये नहीं देने पड़ते हैं। निवेशक-वीजा में भी पैसा व्यवसाय में निवेश होता है, न कि सरकार को उपहार के रूप में पैसे देने होते हैं। गोल्ड कार्ड इसे पलट देता है। सीधा पैसा दीजिए और स्थायी निवासी बन जाइए। ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में वर्षों लग सकता है। जटिल दस्तावेज, कोटा और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। किसके लिए है यह वीजा? यह कार्यक्रम अत्यंत संपन्न व्यक्तियों और मल्टीनेशनल कंपनियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सामान्य प्रवासियों के लिए यह रास्ता नहीं है। व्यक्तियों और कंपनियों दोनों के लिए गोल्ड कार्ड वीजा आवेदन अब अमेरिकी सरकारी पोर्टल पर लाइव हैं। यह प्रोग्राम अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में शायद सबसे बड़ा वित्त-आधारित बदलाव माना जा रहा है। इससे राजनीतिक और नैतिक बहस तेज होने की संभावना है।  

सहमति की उम्र नहीं, फिर भी किया शोषण: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास

कोलकाता  कलकत्ता हाईकोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत एक 23 वर्षीय युवक को 12 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाने के आरोप में आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्ची यौन संबंधों के परिणामों को नहीं समझ सकती और वह वैध सहमति देने में असमर्थ होती है, भले ही वह प्यार या शादी के झूठे वादे में विश्वास कर ले। मामला 2015-2017 का है। पीड़िता उस समय सिर्फ 12 साल की थी जब आरोपी ने उसके साथ कथित प्रेम-संबंध शुरू किया। आरोपी की उम्र उस समय 23 साल थी। बाद में उसने शादी का झूठा वादा देकर नाबालिग क साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने अदालत में स्वीकार किया कि वह आरोपी से प्यार करती थी और शादी की उम्मीद में संबंध बनाती रही, लेकिन जैसे ही उसे गर्भ ठहरा तो आरोपी ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। तब 15 साल की उम्र में यानी 2017 में लड़की के परिवार ने POCSO के तहत शिकायत दर्ज कराई। बार एंड बंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने बचाव में तीन मुख्य तर्क दिए। पहला- यौन संबंध कथित तौर पर दो साल पहले हुआ था, फिर शिकायत में इतनी देरी क्यों? दूसरा- डीएनए रिपोर्ट में सिर्फ यह लिखा है कि 'उसके जैविक पिता होने से इनकार नहीं किया जा सकता', यानी रिपोर्ट निष्कर्षात्मक नहीं है। तीसरा- पीड़िता की उम्र भी साबित नहीं हुई है।' हाईकोर्ट ने सभी दलीलें खारिज कर दीं: 1. देरी पर: अदालत ने कहा कि बच्ची आरोपी से प्यार करती थी और शादी की उम्मीद में चुप रही। गर्भ ठहरने के बाद जब आरोपी ने मुंह फेर लिया तब शिकायत हुई। अदालत ने कहा- बच्ची को यौन संबंधों के परिणामों की जानकारी नहीं होती। देरी प्राकृतिक और स्वाभाविक है। 2. सहमति पर: पीठ ने दोहराया- पीड़िता नाबालिग थी और वैध एवं कानूनी रूप से सहमति देने में असमर्थ थी। वह आरोपी के शादी के वादे पर भरोसा करती रही। 3. डीएनए रिपोर्ट पर: अदालत ने कहा- 'नहीं इनकार किया जा सकता’ का मतलब यह नहीं कि आरोपी निर्दोष है। यह रिपोर्ट पीड़िता के बयान की पुष्टि करती है और साक्ष्यों की श्रृंखला को पूरा करती है। 4. उम्र पर: जन्म प्रमाण-पत्र रिकॉर्ड पर था और बचाव पक्ष ने उचित समय पर आपत्ति नहीं की थी, इसलिए पीड़िता की नाबालिग होने में कोई संदेह नहीं। अदालत ने पाया कि आरोपी के कृत्य POCSO की धारा 5(j)(ii) एवं 5(l) के तहत अग्रेवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की श्रेणी में आते हैं, जिसकी सजा धारा 6 के तहत न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक है। सियालदह ट्रायल कोर्ट ने दी गई आजीवन कारावास एवं 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा को हाईकोर्ट ने पूरी तरह बरकरार रखा। पीड़िता को तुरंत मुआवजा दिलाने के लिए खंडपीठ ने अतिरिक्त निर्देश दिए:     राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) 15 दिनों के अंदर जुर्माने की 90% राशि यानी 1.80 लाख रुपये पीड़िता को देगा।     इसके अलावा SLSA अपने कोष से अलग से 2 लाख रुपये और देगा।     यदि भविष्य में आरोपी जुर्माना भरता है तो SLSA को राशि वापस मिल जाएगी। अदालत ने इस मामले में बच्चियों के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप के नाम पर होने वाले यौन शोषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नाबालिग की हां कानूनी रूप से कभी सहमति नहीं मानी जा सकती, चाहे वह कितना भी प्यार क्यों न जताए।