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ममता का संदेश: नफरत की राजनीति पर वार, बोलीं—‘लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई’

कोलकाता  विवादित ढांचा गिराए जाने के दिन को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) हर साल 'सद्भाव दिवस' ​​के रूप में मनाती है। शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना परोक्ष रूप से चेतावनी दी कि कुछ निहित स्वार्थों की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को जारी एक सोशल मीडिया बयान में कहा, "जो लोग देश को बर्बाद करने के लिए सांप्रदायिकता की आग भड़काने का खेल खेल रहे हैं, उनके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।" इसके साथ ही, उन्होंने लोगों से इस मौके पर राज्य में शांति और सद्भाव की विरासत को बहाल करने की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "एकता ही शक्ति है। सबसे पहले, मैं 'एकता दिवस', 'सद्भाव दिवस' के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देती हूं। बंगाल की धरती एकता की धरती है। यह धरती रवींद्रनाथ की धरती है, नजरुल की धरती है, रामकृष्ण-विवेकानंद की धरती है। इस धरती ने कभी भी बंटवारे के आगे सिर नहीं झुकाया है और न ही आने वाले दिनों में झुकाएगी।" उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में हिंदू धर्म, इस्लाम, सिख धर्म, ईसाई धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म सहित सभी धर्मों के लोग कंधे से कंधा मिलाकर चलना जानते हैं। हम अपनी खुशियां बांटते हैं। हमारा मानना ​​है कि धर्म किसी का होता है, लेकिन त्योहार सभी के होते हैं। शनिवार दोपहर को, तृणमूल कांग्रेस ने सेंट्रल कोलकाता के एस्प्लेनेड में सालाना 'सद्भाव दिवस' कार्यक्रम आयोजित किया। तृणमूल कांग्रेस के युवा और छात्र विंग के इस कार्यक्रम में पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हुए। दूसरी ओर, उसी जिले में भरतपुर निर्वाचन क्षेत्र से अब निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में एक बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया।बेलडांगा में प्रस्तावित मस्जिद उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मूल निर्माण के अनुरूप होगी।

बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों पर चला मोदी का जीवन पथ, महापरिनिर्वाण दिवस पर भावुक श्रद्धांजलि

नई दिल्ली संविधान निर्माता डॉ भीम राव अंबेडकर की पुण्यतिथि शनिवार को देशभर में महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाई जा रही है। समाज के हर वर्ग के लोग राष्ट्र निर्माण की दिशा में बाबा साहेब अंबेडकर के अमूल्य योगदान को याद कर रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया एक्स हैंडल ‘मोदी स्टोरी’ पर पोस्ट और वीडियो साझा किए गए हैं, जिनमें यह बताया गया है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति में आने के बाद डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को अपने राजनीतिक जीवन में अमल में लाने का काम किया। उन्होंने हमेशा से ही अंबेडकर की राहों पर चलते हुए समाज के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया। ‘मोदी स्टोरी’ एक्स हैंडल पर एक वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें बताया गया है कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा दलितों के उत्थान को अपनी प्राथमिकता की सूची में शीर्ष पर रखा और कैसे उन्होंने बाबा साहेब से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने की दिशा में अपना अमूल्य योगदान दिया। ‘मोदी स्टोरी’ एक्स हैंडल में साझा किए गए वीडियो में बताया गया है कि संगठन की तरफ से प्रचार की कमान मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने बाबासाहेब अंबेडकर के सिद्धांतों और विचारों को अपने जीवन में उतारा। प्रचार की कमान मिलने के बाद वे हरिजन बस्ती में जाते और उनसे मुलाकात करते। उनके विकास पर जोर देते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके हितों पर किसी भी प्रकार की कुठाराघात नहीं पहुंचे। नरेंद्र मोदी का हमेशा से ही मानना रहा है कि जब तक हम समाज के अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति का विकास सुनिश्चित नहीं करेंगे, तब तक समाज के समग्र विकास की परिकल्पना करना व्यर्थ है। नरेंद्र मोदी का हमेशा से ही मानना रहा है कि गरीबों की सेवा ही मूल रूप से राष्ट्रसेवा है। अहमदाबाद के पूर्व डिप्टी मेयर बताते हैं कि नरेंद्र मोदी का हमेशा से ही यही मानना रहा कि हम राजनीति में सिर्फ सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं हैं, बल्कि गरीबों और वंचितों के विकास के लिए हैं। वहीं, गुजरात का पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी ने पास की दलित बस्ती से एक कन्या को बुलाया और उससे गृह प्रवेश कराया। उन्होंने कहा कि पहले ये बच्ची गृह प्रवेश करेगी, इसके बाद मैं करूंगा। नरेंद्र मोदी ने संविधान को सजे हुए हाथी पर स्थापित करके सम्मान यात्रा निकाली। यही नहीं, उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर से जुड़े पांच तीर्थ स्थलों को विकसित करके पंच तीर्थ की स्थापना की नींव रखी, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनके अमूल्य योगदान के बारे में जान सकें। ‘मोदी स्टोरी’ एक्स हैंडल पर साझा पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें वे कहते हैं कि पिछले दशक में 25 करोड़ गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं और यह उपलब्धि बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों से मेल खाती है। उन्हीं के विचारों से प्रेरित होकर 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांतों का जन्म भाजपा के शासनकाल में हुआ। पोस्ट के मुताबिक, नरेंद्र मोदी ने 2007 में अंबेडकर जयंती पर स्वच्छ गुजरात महाअभियान शुरू किया था, जो सांकेतिक रूप से सफाई और नागरिक जिम्मेदारी को बाबासाहेब अंबेडकर के मूल्यों से जोड़ता है। लंदन में अंबेडकर मेमोरियल, दिल्ली में मेमोरियल और जनपथ में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर फॉर सोशियो-इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन की स्थापना ने यह पक्का किया कि बाबासाहेब अंबेडकर के योगदान को दुनिया भर में पहचान मिले। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार बाबासाहेब अंबेडकर को भारत के सबसे बड़े अर्थशास्त्रियों में से एक के तौर पर भी हाईलाइट किया है। 2015 में दलित एंटरप्रेन्योर्स कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर की इकोनॉमिक राइटिंग को आज की चुनौतियों के लिए गाइडिंग टूल बताया था।

शेख हसीना के भारत प्रवास पर सस्पेंस खत्म! जयशंकर का तंज और बांग्लादेश को कड़ा संदेश

नई दिल्ली  भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में ठहरने को उनकी निजी पसंद बताया। उन्होंने कहा कि इसका निर्णय उन परिस्थितियों से प्रभावित है जिनके चलते वे भारत आईं। 78 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल अगस्त में भारत आई थीं, जब बांग्लादेश में उनकी 15 साल की सत्ता का अंत हिंसा के बीच हुआ था। इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों घायल हुए थे। पिछले महीने ढाका की एक विशेष अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। शनिवार को समिट 2025 के आखिरी दिन चर्चा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शेख हसीना के भारत में लंबे समय तक रहने और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेख हसीना का भारत में रहना मूलतः उनका व्यक्तिगत फैसला है, लेकिन जिन परिस्थितियों में वे सत्ता छोड़कर भारत आईं वे इस फैसले के पीछे महत्वपूर्ण कारक हैं। जयशंकर ने कहा- वह एक खास परिस्थिति में यहां आई थीं और मुझे लगता है कि वह परिस्थिति स्पष्ट रूप से इस बात में भूमिका निभाती है कि उनके साथ आगे क्या होगा। लेकिन फिर भी, अंतिम फैसला उन्हें ही करना है। “जितनी देर चाहें, भारत में रह सकती हैं हसीना” विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत ने शेख हसीना को आश्वासन दिया है कि वह जब तक चाहें, भारत में रह सकती हैं। भारत सरकार ने पहले भी कई बार कहा है कि मानवीय आधार पर हसीना को शरण दी गई है और उनकी सुरक्षा तथा सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बांग्लादेश में विश्वसनीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जरूरत पर जोर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में जयशंकर ने पड़ोसी देश में लोकतंत्र की मजबूती पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरिम सरकार के नेताओं ने खुद माना था कि उनका मुख्य विरोध पिछले चुनावों (जनवरी 2024) के तरीके से था। जयशंकर ने तंज कसते हुए कहा- हमने सुना था कि बांग्लादेश के लोगों, खासकर जो अब सत्ता में हैं, उनको पहले हुए चुनाव कराने के तरीके से समस्या थी। अगर समस्या चुनाव था, तो सबसे पहला काम तो एक निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराना होना चाहिए। संबंधों के भविष्य को लेकर आशावादी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर आशा जताई है। उन्होंने कहा- भारत की शुभकामना है कि बांग्लादेश तरक्की करे। एक लोकतांत्रिक देश के रूप में हम चाहते हैं कि पड़ोसी देश में भी जनता की इच्छा का सम्मान लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो। उन्होंने आगे कहा- मुझे पूरा विश्वास है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जो भी परिणाम आएगा, उसमें भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर संतुलित और परिपक्व दृष्टिकोण होगा और उम्मीद है कि रिश्ते और बेहतर होंगे। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कई बार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने अब तक इस पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत हसीना को प्रत्यर्पित करने के बजाय बांग्लादेश में स्थिर और भारत-अनुकूल सरकार की वापसी की प्रतीक्षा कर रहा है। फिलहाल, शेख हसीना का भारत में रहना और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध अगले कुछ महीनों में होने वाले संभावित चुनावों पर काफी हद तक निर्भर करेंगे।

विश्व उथल-पुथल में था, भारत बना अलग पहचान—PM मोदी का बड़ा बयान जारी

नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मिट में कई अहम बातें कहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत आत्मविश्वास के पथ पर अग्रसर है, जिससे देश विश्वास का स्तंभ बनकर उभर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि जब पूरी दुनिया मंदी झेल रही थी तब भारत आगे बढ़ रहा था। भारत विकास पर पथ पर अग्रसर रहा। दुनिया ने कई चुनौती झेली लेकिन हमारा भारत आगे ही बढ़ता रहा पीएम मोदी ने कहा कि हम एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां 21वीं सदी का एक हिस्सा बीत चुका है और दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं – वित्तीय संकट, वैश्विक महामारी आदि इन परिस्थितियों ने किसी न किसी रूप में दुनिया को चुनौती दी है। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, लेकिन इन सबके बीच हमारा भारत एक अलग ही स्तर पर दिखाई दे रहा है। भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। भारत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। दुनिया में स्लोडाउन की बात होती है, तब भारत ग्रोथ की कहानी लिखता है पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया में स्लोडाउन की बात होती है, तब भारत ग्रोथ की कहानी लिखता है। जब दुनिया में ट्रस्ट का क्राइसिस दिखता है, तब भारत ट्रस्ट का पिलर बन रहा है। जब दुनिया फ्रेगमेंटेशन की तरफ जा रही है, तब भारत ब्रिज बिल्डर बन रहा है। भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है। ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। आज जब हम यहां ट्रांसफॉर्मिंग टूमारो की बात रहे हैं, तो हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के रिफॉर्म्स और आज की परफॉर्मेंस हमारे कल के ट्रांसफॉर्मेशन का रास्ता बना रहे हैं। लंबी गुलामी ने भारत के आत्मविश्वास को हिला दिया था पीएम मोदी ने कहा कि आप भी जानते हैं कि कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में बहुत बड़ी रुकावट है। इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है। आज हर सेक्टर में कुछ न कुछ बेहतर हो रहा: पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज देश के हर सेक्टर में कुछ न कुछ बेहतर हो रहा है। हमारी गति कॉन्स्टेंट है, हमारी डायरेक्शन कंसिस्टेंट है और हमारा इंटेंट नेशन फर्स्ट का है। शिप बिल्डिंग हो या डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का क्षेत्र हो। आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

आतंकी घटना के बाद थमे कदम फिर बढ़े आगे, सोनमर्ग में तेजी से लौट रहा पर्यटन

गंदरबल  महीनों की अनिश्चितता के बाद, कश्मीर घाटी में मुख्य जगहों पर टूरिस्ट एक्टिविटी धीरे-धीरे वापस आने लगी है, जिससे टूरिज्म सेक्टर पर अपनी रोजी-रोटी के लिए निर्भर हजारों लोगों में नई उम्मीद जगी है। अधिकारियों और स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि पिछले दो महीनों में आने वालों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी ने सर्दियों की बर्फबारी शुरू होने के बाद और ज़्यादा लोगों के आने की उम्मीद जगाई है। सोनमर्ग में टूरिज्म डिपार्टमेंट द्वारा जारी किए गए डेटा से पता चलता है कि अलग-अलग महीनों में विजिटर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। 23 अप्रैल से 31 अप्रैल तक, 7,209 घरेलू, 341 विदेशी और 832 लोकल टूरिस्ट सोनमर्ग आए और इसके नेचुरल नज़ारों को देखा। मई में यह संख्या बढ़कर 17,083 घरेलू, 486 विदेशी और 4,004 लोकल टूरिस्ट हो गई।  जून में काफी बढ़ोतरी हुई, जब 33,692 घरेलू, 281 विदेशी और 14,165 लोकल टूरिस्ट इलाके में आए। जुलाई में, सोनमर्ग में 25,281 घरेलू, 159 विदेशी और 14,165 लोकल विजिटर आए। सितंबर में 6,945 घरेलू, 422 विदेशी और 17,897 लोकल टूरिस्ट आए, जबकि अक्टूबर में 8,389 घरेलू, 391 विदेशी और 5,756 लोकल टूरिस्ट आए। नवंबर में, 13,527 घरेलू, 459 विदेशी और 4,084 लोकल टूरिस्ट सोनमर्ग आए और इसकी खूबसूरती का मजा लिया। टूरिज्म से जुड़े लोगों ने कहा कि कश्मीर घाटी में टूरिस्ट की संख्या में रोजाना बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, पहलगाम की घटना के बाद, टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह से रुक गया, जिससे होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइडिंग सर्विस और इससे जुड़े बिजनेस से जुड़े लाखों लोगों की कमाई पर बुरा असर पड़ा। उन्होंने कहा कि कई ऑपरेटरों को नुकसान मैनेज करने के लिए बैंक लोन से खरीदी गई गाड़ियां बेचने पर मजबूर होना पड़ा।    इस रुकावट के बावजूद, इस सेक्टर से जुड़े लोग उम्मीद बनाए हुए हैं। उनका मानना ​​है कि बर्फबारी शुरू होने से एक बार फिर टूरिस्ट कश्मीर की सर्दियों की खूबसूरती का अनुभव करने के लिए उत्सुक होंगे।

30 पार करते ही दिखें ये चेतावनी भरे लक्षण? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, वरना हो सकता है बड़ा खतरा

वाशिंगटन  अमेरिका भले ही इस समय इमिग्रेशन और ग्लोबल पॉलिटिक्स जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो, लेकिन देश के भीतर एक खामोश स्वास्थ्य संकट तेजी से फैल रहा है। कोलन और रेक्टल कैंसर के मामले इतनी तेज़ी से बढ़ रहे हैं कि आम लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी का कहना है कि यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में तीसरा सबसे आम कैंसर है। साल 2025 के लिए लगभग 1,07,320 नए कोलन कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया था। चिंताजनक बात यह है कि यह बीमारी अब केवल 50+ उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रही। 30–40 साल की उम्र वाले युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसके पीछे का कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ी जरूरत है कोलन कैंसर के शुरुआती संकेतों को समय पर पहचानना। डॉक्टरों का कहना है कि जितनी जल्दी लक्षण पकड़े जाएं, उतना ही इलाज आसान और असरदार होता है। एक वायरल इंस्टाग्राम वीडियो में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ सलहाब ने बताया कि अगर 30 की उम्र के आसपास ये चार लक्षण लगातार दिखें तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें। हमेशा रहने वाली थकान डॉक्टर बताते हैं कि कोलन कैंसर धीरे-धीरे शरीर में रक्त की कमी (एनीमिया) पैदा कर सकता है। इससे— बेहद कमजोरी आलस ज्यादा नींद आने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। रिसर्च में भी यह माना गया है कि कैंसर से जुड़ी थकान का एक बड़ा कारण एनीमिया होता है। रात में तेज पसीना आना कैंसर सेल्स ऐसे इंफ्लेमेटरी प्रोटीन पैदा करते हैं जो शरीर में हल्का बुखार और नाइट स्वेट्स का कारण बनते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैंसर से जुड़े रात के पसीने आम पसीने से अलग होते हैं— वे अचानक, तेज और असामान्य होते हैं। पैटर्न बदलना बॉवेल हैबिट में बदलाव अचानक कब्ज होना, दस्त बढ़ जाना, पेट दर्द या टॉयलेट जाने के पैटर्न में बड़े बदलाव—ये सभी संकेत हो सकते हैं कि आंत में कोई ब्लॉकेज बन रहा है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह बदलाव कोलोरेक्टल कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। स्टूल में खून—सबसे अहम चेतावनी जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के मुताबिक मल में खून आना, कोलन या रेक्टम में ब्लीडिंग का क्लासिक संकेत है। अगर मल में खून बार-बार दिखे या लगातार बना रहे तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

खाता धारकों को राहत: Zero Balance Account पर RBI ने जोड़ीं कई मुफ्त सुविधाएं, बदले नियम

जम्मू-कश्मीर  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आम लोगों की बैंकिंग को और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कई लोग ऐसे होते हैं जो बैंक खाता तो खोलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते या वे मिनिमम बैलेंस जैसी शर्तें पूरी नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए BSBD यानी जीरो बैलेंस खाते बनाए गए थे, लेकिन समय के साथ बैंक इन खातों को सीमित सुविधाओं वाला मानने लगे थे, जिससे ग्राहकों को कई तरह की परेशानियाँ झेलनी पड़ती थीं।  अब इन खातों को साधारण सेविंग्स अकाउंट से कमतर नहीं माना जाएगा। यानी, बैंक को BSBD खाताधारकों को भी वही सुविधाएं देनी होंगी जो वे सामान्य सेविंग्स अकाउंट ग्राहकों को देते हैं। अगर कोई ग्राहक चाहे, तो वह लिखित में या ऑनलाइन रिक्वेस्ट देकर अपने सेविंग्स अकाउंट को BSBD खाते में बदलवा सकता है और बैंक को यह काम 7 दिन के भीतर पूरा करना होगा। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। BSBD खातों में अब क्या-क्या सुविधा मिलेगी?  मुफ्त इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और पासबुक/मासिक स्टेटमेंट साल में कम-से-कम 25 पन्नों की चेकबुक महीने में 4 बार नकद निकासी फ्री UPI, IMPS, NEFT, RTGS या कार्ड से पेमेंट — इन पर कोई चार्ज नहीं और इन्हें 4 फ्री निकासी में नहीं गिना जाएगा RBI का यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने, ग्राहकों को ज्यादा अधिकार देने और बैंकिंग को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

चक्रवात ‘दित्वा’ से जूझ रहे श्रीलंका के साथ भारत खड़ा, मजबूत समर्थन के साथ राहत सहायता रवाना

नई दिल्ली  भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने शनिवार को श्रीलंका के कॉर्पोरेट दिग्गजों से मुलाकात कर चक्रवात प्रभावित द्वीप राष्ट्र के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। श्रीलंका में चक्रवात ‘दित्वा' से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है। झा की ‘रीबिल्डिंग श्रीलंका फंड' से जुड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों के साथ यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब श्रीलंका चक्रवात ‘दित्वा' के बाद भीषण बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को हुए गंभीर नुकसान से जूझ रहा है। इस आपदा में अब तक 607 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे कई जिले अलग-थलग पड़ गए हैं और देश की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है। भारतीय उच्चायोग ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि झा ने पुनर्वास और इस संकट से उबरने के लिए रास्ते तलाशने पर चर्चा करने के लिए कॉर्पोरेट दिग्गजों से मुलाकात की। झा ने उन्हें ‘भारत की प्रतिक्रिया और इस संकट से उबरने में श्रीलंका के साथ खड़े रहने की निरंतर प्रतिबद्धता' के बारे में भी जानकारी दी। ‘ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत सहायता के लिए श्रीलंका की अंतररराष्ट्रीय अपील पर प्रतिक्रिया देने वाला भारत पहला देश था। भारतीय मिशन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उसने जमीन एवं हवाई दोनों माध्यमों से श्रीलंका को मानवीय सहायता मुहैया कराई जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया और निरंतर चिकित्सा देखभाल दोनों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ‘ऑपरेशन सागर बंधु' की 28 नवंबर को शुरुआत के बाद से भारत ने 58 टन से ज्यादा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है, जिसमें सूखा राशन, टेंट, तिरपाल, स्वच्छता किट, जल शोधन किट और लगभग 4.5 टन दवाइयां व सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।   जनरेटर, बचाव नौकाओं सहित 50 टन उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं और महत्वपूर्ण संपर्क बहाल करने के लिए 31 इंजीनियरों के साथ 130 टन बेली ब्रिज इकाइयां हवाई मार्ग से पहुंचाई गई हैं। कैंडी के निकट महियांगनया में अब भारत के 78 चिकित्सा कर्मियों वाला एक पूर्ण विकसित फील्ड अस्पताल जीवन रक्षक सेवाएं प्रदान कर रहा है। बुरी तरह प्रभावित जा-एला और नेगोम्बो में भीष्म (भारत स्वास्थ्य सहयोग हित और मैत्री पहल) आरोग्य मैत्री केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस सुकन्या ने श्रीलंका को तत्काल बचाव एवं राहत सहायता प्रदान की है। आईएनएस विक्रांत से तैनात दो चेतक हेलीकॉप्टर के अलावा, भारतीय वायु सेना के दो भारी-भरकम एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इसके अलावा, श्रीलंका में फंसे लगभग 2,500 भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 400 से अधिक भारतीय वायुसेना के विमानों से आये थे।   

हवाई यात्रियों को राहत: इंडिगो विवाद के बाद उड्डयन मंत्रालय ने लागू किया फेयर कैप

नई दिल्ली  इंडिगो की उड़ानों में जारी संकट के बीच उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सभी प्रभावित रूटों पर फेयर कैप (Fare Cap) लागू कर दिया है, ताकि एअरलाइंस अत्यधिक किराया वसूल न कर सकें और संकट में फंसे यात्रियों का शोषण न हो। संकट की वजह इंडिगो की कई उड़ानें हाल ही में परिचालन गड़बड़ियों के कारण रद्द या देर से चल रही हैं। इससे यात्रियों की मांग बढ़ गई है और कुछ एयरलाइंस ने इस अवसर का फायदा उठाकर किरायों में अत्यधिक वृद्धि कर दी। मंत्रालय की कड़ी कार्रवाई उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में यात्रियों से मनमानी या अवसरवादी तरीके से किराया वसूलना सख्त मना है। सभी प्रभावित रूटों पर अधिकतम किराया तय कर दिया गया है, जिसे फेयर कैप कहा जाता है। एयरलाइंस को बिना किसी अपवाद के इस सीमा का पालन करना होगा। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती। उद्देश्य और निगरानी मंत्रालय का उद्देश्य मार्केट में मूल्य अनुशासन बनाए रखना और संकट में फंसे यात्रियों को राहत देना है। खासकर वरिष्ठ नागरिक, छात्र और मरीजों जैसे यात्रियों को अत्यधिक आर्थिक बोझ में नहीं डाला जाएगा। मंत्रालय रियल टाइम डेटा के जरिए किरायों की निगरानी कर रहा है और एयरलाइंस तथा ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।   मंत्रालय की कड़ी चेतावनी  मंत्रालय ने कहा कि तय मानकों का उल्लंघन होने पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी उड़ान से पहले किराया और रूट की स्थिति की जांच करें। यह कदम संकटग्रस्त यात्रियों को तुरंत राहत देने और एयरलाइंस के मनमाने शुल्क वसूलने को रोकने के लिए उठाया गया है।  

EVM विवाद पर पिता–पुत्र की अलग राय: उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विपक्ष के सबसे बड़े मुद्दे ईवीएम हैक को लेकर अपनी बात रखी है। नई दिल्ली में आयोजित हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में अब्दुल्ला ने कहा कि वह उन लोगों में से नहीं हैं, जो यह मानते हैं कि ईवीएम हैक होती है या कुछ और होता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी पिता (फारुख अब्दुल्ला) से भी नहीं बनती है, क्योंकि उनका मानना है कि मशीन में गड़बड़ होती है लेकिन वह ऐसा नहीं मानते।   लीडरशिप समिट में उमर ने कहा, "मैं ऐसा नहीं मानता कि मशीन (ईवीएम) में चोरी होती है। यह बात मुझे घर में भी परेशानी में डालती है क्योंकि मेरे पिता को ऐसा लगता है कि चोरी होती है। अगर वह इसे देख रहे हैं तो मैं उनसे माफी मांगता हूं, लेकिन वह उस पीढ़ी से हैं, जो उनके फोन पर आता है वह उस बात को मान लेते हैं। लेकिन मैं इस बात को नहीं मानता हूं।" उन्होंने कहा, “हां, चुनाव के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। यहाँ वोटर लिस्ट के साथ करके या फिर विधानसभा क्षेत्र में बदलाव करके भी की जा सकती है। जम्मू कश्मीर में पहले जो डिमिलिटेशन हुआ वह छेड़छाड़ थी। आपने नई विधानसभा बनाई वह सब एक ही पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए हुई। अगर सही से की जाती है, तो हम साथ है, लेकिन अगर ऐसे गलत इरादे के साथ, एक ही पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए की जाती है, तो यह सही नहीं है।” इससे पहले उमर अब्दुल्ला ने इंडिया ब्लॉक को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि हमें या तो एक साथ रहना होगा या फिर हम राज्यों के हिसाब से चुनाव लड़ सकते हैं कि हर राज्य में अलग-अलग गठबंधन के साथ चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय पार्टियां कितना भी जोर लगा लें लेकिन एक केंद्र स्तर के गठबंधन के लिए हमें कांग्रेस को साथ लेना ही पड़ेगा। एक गठबंधन कांग्रेस के आसपास ही बनेगा क्योंकि भाजपा के अलावा कांग्रेस ही है जिसका पूरे देश में प्रभाव है। भाजपा की चुनावी नीति की तारीफ करते हुए उमर ने कहा कि उनके नेता हर चुनाव को पूरी ताकत के साथ लड़ते हैं। वह ऐसे लड़ते हैं जैसे उनका जीवन इसी पर टिका हुआ है। बिहार चुनाव के बाद वह वहां से निकलकर अगले चुनाव वाले राज्यों में पहुंच गए हैं, लेकिन हम वहां चुनाव के दो महीने पहले पहुंचते हैं। ऐसे फिर चुनाव के नतीजों पर भी अंतर पड़ता है।