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Shocking! पुतिन बोले—यूरोप नहीं चाहता युद्ध खत्म हो, यूक्रेन को गुमराह कर रहा है

रूस  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों पर कीव के साथ उसके लगभग चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों को बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भेजे गए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से ठीक पहले यह टिप्पणी की। रूसी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास क्रेमलिन में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर के साथ बातचीत से पहले पुतिन ने यूरोपीय देशों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘उनके पास शांति का एजेंडा नहीं है, वे युद्ध के पक्ष में हैं।'' उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप शांति प्रस्तावों में रूस के लिए "पूरी तरह से अस्वीकार्य मांगों" को जोड़कर समग्र शांति प्रक्रिया को अवरुद्ध कर रहा है। पुतिन ने यह भी दोहराया कि रूस की यूरोप पर हमला करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन चेतावनी दी कि यदि यूरोप ने युद्ध शुरू किया, तो रूस "पूरी तरह तैयार" है। दूसरी ओर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वार्ता के परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   आयरलैंड की राजधानी डबलिन में उन्होंने कहा कि अमेरिकी दूतों की रिपोर्ट पर ही आगे की बातचीत और बैठकें निर्भर करेंगी। जेलेंस्की ने कहा, "बातचीत हो रही है, लेकिन हमें परिणाम चाहिए। हमारे लोग हर दिन मर रहे हैं।" मॉस्को में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच बंद कमरे में यह बैठक लगभग पांच घंटे तक चली। दोनों पक्षों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।    

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 32,000 शिक्षकों की सेवाएं बरकरार, नहीं जाएगी नौकरी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के 32 हजार प्राथमिक विद्यालय के टीचरों को बुधवार को बड़ी खुशखबरी मिली है। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने बुधवार को एकल पीठ के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में 32,000 प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इससे अब इन टीचरों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है। इन शिक्षकों की भर्ती 2014 की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के माध्यम से की गई थी। जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखने के लिए इच्छुक नहीं है, क्योंकि सभी भर्तियों में अनियमितताएं साबित नहीं हुई हैं। न्यायालय ने कहा कि नौ वर्ष के बाद नौकरी समाप्त करने से प्राथमिक शिक्षकों और उनके परिवारों पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसमें कहा गया है कि सीबीआई, जिसे उच्च न्यायालय द्वारा मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था, ने शुरू में 264 नियुक्तियों की पहचान की थी जिनमें अनियमितताएं हुई थीं, जिसके बाद अन्य 96 शिक्षकों के नाम एजेंसी की जांच के दायरे में आए। अदालत ने कहा कि इसे देखते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता। तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने 12 मई, 2023 को इन 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्यु बसु ने प्राथमिक विद्यालयों के 32,000 शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द करने वाले एकल पीठ के फैसले को निरस्त करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ की सराहना करते हुए बुधवार को कहा कि सच्चाई की जीत हुई है क्योंकि शिक्षकों की नौकरियां ‘‘सुरक्षित’’ बनी हुई हैं। बसु ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को भी बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिक विद्यालय के 32,000 शिक्षकों की नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। शिक्षकों को मेरी शुभकामनाएं। सच्चाई की जीत हुई है।’’  

FBI ने जारी किया रेड अलर्ट: भारतीय मूल की मां-बेटे की हत्या का आरोपी नजीर हमीद फरार, अमेरिका ने भारत से किया प्रत्यर्पण अनुरोध

न्यू यॉर्क  अमेरिका में 2017 में एक भारतीय महिला शशिकला नर्रा (38) और उनके 6 वर्षीय बेटे अनीश नर्रा की नृशंस हत्या के मामले में फरार आरोपी भारतीय नागरिक नजीर हमीद की तलाश तेज हो गई है।  FBI ने नजीर को मोस्ट वांटेड लिस्ट में डालते हुए उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 50,000 डॉलर (लगभग 42 लाख रुपये) पुरस्कार देने का ऐलान किया है। 23 मार्च 2017 को अमेरिका के न्यू जर्सी में स्थित उनके अपार्टमेंट से मां-बेटे के शव बरामद हुए थे।  दोनों की हत्या चाकू से की गई ।अनीश का सिर धड़ से अलग मिला और शरीर पर कई घावों के निशान थे। यह अमेरिका की सबसे क्रूर हत्याओं में से एक मानी गई। जांच में पता चला कि आरोपी नजीर हमीद उसी अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहता था और वह मृतकों के पति/पिता का पीछा करता था । घटनास्थल पर मिला खून का धब्बा नजीर के DNA से मैच हुआ। हत्या के छह महीने बाद वह भारत भाग आया और तब से यहीं छिपा है।    न्यू जर्सी के गवर्नर फिल मर्फी ने भारत के राजदूत विनय क्वात्रा को फोन कर कहा कि हमीद को तुरंत अमेरिका भेजने में सहयोग किया जाए।बर्लिंगटन काउंटी की अभियोजक लाचिया ब्रैडशॉ ने भी कहा कि “न्याय की कोई सीमा नहीं होती  यह अपराधी सजा से बचना नहीं चाहिए।” FBI और अमेरिकी अधिकारी लगातार भारत से संपर्क में हैं ताकि नजीर को जल्द से जल्द अमेरिका लाया जा सके। फरवरी 2025 में उस पर आधिकारिक तौर पर हत्या सहित छह गंभीर आरोप दर्ज किए गए।  

पूर्व एएसआई केके मोहम्मद का बयान: मथुरा और ज्ञानवापी में पहले मंदिर थे, मुस्लिम पक्ष का दावा मुश्किल

नई दिल्ली  बाबरी मस्जिद का सर्वे करने वाले एएसआई के पूर्व अफसर के.के मोहम्मद ने काशी और मथुरा को लेकर बड़ा खुलासा किया है. केके मोहम्मद ने कहा कि काशी और मथुरा में पहले से ही मंदिर थे. उन्होंने मुसलमानों को नसीहत दी कि गुड जेस्चर दिखाते हुए मुस्लिमों को काशी और ज्ञानवापी की जमीन को हिंदुओं को दे देना चाहिए, ताकि वहां मंदिर बन सके.  सवाल के जवाब में कि क्या मथुरा और काशी पर मुस्लिम पक्ष का दावा कोर्ट में टिक पाएगा? इस पर केके मोहम्मद ने कहा कि मैं इन दोनों जगहों (मथुरा और काशी) को बहुत करीब से जानता हूं. मैंने दोनों जगहों पर काम कर चुका हूं. इन दोनों जगहों पर पहले मंदिर थे. इस पर कोई शक नहीं है. मथुरा में भी मंदिर था और ज्ञानवापी में भी पहले मंदिर ही था. मुस्लिम पक्ष का दावा कोर्ट में नहीं टिक पाएगा. केके मुहम्मद ने मक्का-मदीना का क्यों किया जिक्र उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए जितना मक्का और मदीना इंपॉर्टेंट है, उतना ही एक आम हिंदू के लिए ज्ञानवापी (शिवजी का मंदिर) और मथुरा (कृष्ण जन्मभूमि) इंपॉर्टेंट है. अयोध्या (राम मंदिर) तो ऑलरेडी हो गया है. तीन जगहों को मुसलमानों को हिंदुओं को मंदिर बनाने के लिए छोड़ देना चाहिए. उन्होंने हिंदुओं को भी नसीहत दी और कहा कि हर मस्जिद के नीचे उन्हें मंदिर देखना छोड़ देना चाहिए. जो मस्जिदों पर दावे के लिए केस फाइल कर रहे हैं, उन्हें भी छोड़ देना चाहिए. एएसआई के पूर्व सर्वे अफसर के.के मोहम्मद ने क्या-क्या कहा?     अयोध्या, मथुरा और काशी ये तीनों जगह मुसलमानों को हिंदुओं के लिए छोड़ देना चाहिए. अयोध्या हो चुका है.     हिंदुओं को भी हर मस्जिद के पीछे, मस्जिद के नीचे मंदिर का मुद्दे पर आत्मनियंत्रण होना चाहिए.     मुसलमानों को ये तीनों जगह छोड़ने के लिए तैयार होना चाहिए.     लीगल मुद्दे पर मैं कुछ नहीं कह सकता लेकिन सामाजिक तौर पर एक साथ बैठकर सॉल्व करना चाहिए.     मथुरा और ज्ञानवापी… मैं दोनों जगह पर काम कर चुका हूं और अच्छे से जानता हूं. ये दोनों जगह मंदिर थे. इस पर कोई शक नहीं. मुसलमानों को चाहिए कि खुद से छोड़ दें. बहुत सारी चीजें मानने के लिए तैयार हो जाते हैं. कौन हैं केके मुहम्मद? के.के. मुहम्मद एएसआई के पूर्व सर्वेअर रहे हैं. उनका पूरा नाम: करिंगमनु कुजियिल मुहम्मद है. वह एक प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् रहे हैं. उननका जन्म 1 जुलाई 1952 को हुआ.  वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) रह चुके हैं. अयोध्या खुदाई में बी.बी. लाल की टीम में शामिल रहे, जहां उन्होंने राम मंदिर के प्रमाण दिए.  चंबल घाटी में बटेश्वर मंदिरों की बहाली में योगदान दिया, जिसे ‘टेम्पल मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है. वह मथुरा और ज्ञानवापी मामले में भी काम कर चुके हैं.

टिकट खरीदने में बदलाव, रेलवे ने तय किया—विंडो टिकट पर OTP जरूरी

नई दिल्ली रेलवे ने दलालों पर लगाम लगाने के लिए विंडो तत्‍काल टिकट बुकिंग पर बड़ा फैसला किया है.अब बुकिंग के दौरान यात्री के पास ओटीपी आएगा, जिसके बाद टिकट बुकिंग होगी. अगले दिन कुछ दिनों में देशभर में चलने वाली सभी ट्रेनों में यह व्‍यवस्‍था लागू होगी. रेलवे के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में सभी ट्रेनों के तत्काल काउंटर टिकटों के लिए ओटीपी आधारित सिस्टम लागू होगा. इसका उद्देश्‍य तत्काल सुविधा का दुरुपयोग और दलालों पर लगाम लगाकर यात्रियों को आसानी से टिकट उपलब्‍ध कराना है. दरअसल, रेलवे ने आम यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए ओटीपी आधारित तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम का प्रस्ताव रखा. सबसे पहले जुलाई 2025 में ऑनलाइन तत्काल टिकटों के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण शुरू किया गया. इसके बाद अक्टूबर 2025 में  सभी जनरल रिजर्वेशन की फर्स्ट-डे बुकिंग के लिए OTP आधारित ऑनलाइन सिस्टम लागू हुआ. दोनों सिस्टम आम यात्रियों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाए गए और इससे रिजर्वेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है. पायलट प्रोजेक्‍ट पूरा भारतीय रेलवे ने 17 नवंबर 2025 से इसका पायलट प्रोजेक्‍ट शुरू किया था. अभी केवल 52 ट्रेनों में ओटीपी अनिवार्य किया गया था, जो काफी सफल रहा है. इसी वजह से सभी ट्रेनों में यह व्‍यवस्‍था लागू की जा रही है. जल्‍द ही इसकी डेट का ऐलान किया जाएगा. यह तरह होगी बुकिंग विंडो जाकर रिवर्जेशन कराते समय यात्री रिजर्वेशन फॉर्म में अपना मोबाइल नंबर भरना होगा. अगर वो तत्‍काल टिकट बुक करता है तो उसके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा. विंडो पर बैठा कर्मी आपसे ओटीपी पूछेगा, ओटीपी डालने के बाद ही टिकट कन्फर्म होगा. इस तरह दलालों से मिलेगा छुटकारा इससे दलालों का खेल पूरी तरह बंद हो जाएगा, क्योंकि बिना असली यात्री के मोबाइल के टिकट नहीं बन सकेगा. अगले कुछ दिनों में यह ओटीपी सिस्टम सभी बची हुई ट्रेनों के तत्काल काउंटर टिकटों पर भी लागू हो रहा है. भारतीय रेलवे का मानना है कि यह कदम तत्काल कोटे की टिकटों को वाकई जरूरतमंद यात्रियों तक पहुंचाने में बड़ी मदद करेगा. ऐसे होगा सत्यापन रेलवे ने 17 नवंबर 2025 को रिजर्वेशन काउंटरों से बुक होने वाले तत्काल टिकटों के लिए ओटीपी आधारित प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया. फिलहाल यह व्यवस्था 52 ट्रेनों तक विस्तारित की जा चुकी है. इस सिस्टम के तहत जब यात्री रिजर्वेशन फॉर्म भरकर तत्काल टिकट बुक करते हैं तो उनके द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है. इसमें यात्रियों का टिकट तभी सुनिश्चित हो पाता है जब ओटीपी का सफल सत्यापन हो जाता है. यात्रियों को मिलगी बेहतर सुविधा आने वाले दिनों में यह ओटीपी आधारित तत्काल रिजर्वेशन सिस्टम सभी शेष ट्रेनों पर लागू कर दिया जाएगा. यह कदम रेलवे टिकटिंग में पारदर्शिता, यात्री सुविधा और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है. अब सभी ट्रेनों में OTP आने वाले कुछ दिनों में, यह OTP आधारित Tatkal टिकट सिस्टम सभी बाकी ट्रेनों के लिए भी लागू कर दिया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य Tatkal सुविधा के दुरुपयोग को रोकना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जरूरतमंद यात्रियों को आसानी से हाई-डिमांड टिकट मिल सकें। रेलवे का कहना है कि टिकट बुकिंग में पारदर्शिता, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। तत्काल टिकट टाइमिंग क्या है भारतीय रेल के ट्रेनों में तत्काल टिकट की बुकिंग यात्रा की तारीख से एक दिन पहले शुरू होती है। ट्रेन के एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 बजे और नॉन-एसी क्लास के लिए सुबह 11:00 बजे बुकिंग शुरू होती है। उदाहरण के लिए, यदि आप 12 दिसंबर को यात्रा करना चाहते हैं, तो एसी क्लास के लिए तत्काल बुकिंग 11 दिसंबर को सुबह 10 बजे से और नॉन-एसी क्लास के लिए 11 दिसंबर को सुबह 11 बजे से शुरू होगी।

राजीव गांधी एयरपोर्ट पर हंगामा! तकनीकी खराबी से IndiGo की फ्लाइट रद्द, यात्री घंटों रहे परेशान

हैदराबाद  हैदराबाद के राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (RGIA) पर यात्रियों को बुधवार को उस समय मुश्किलों का सामना करना पड़ा जब IndiGo एयरलाइन की कुछ उड़ानें तकनीकी ख़राबी के कारण अचानक रद्द कर दी गईं। एयरलाइन के सूत्रों के अनुसार कुछ विमानों में अप्रत्याशित तकनीकी दिक्कतों का पता चलने के बाद यह फैसला लिया गया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इंडिगो प्रबंधन ने तुरंत प्रभावित उड़ानों को रद्द करने का फैसला लिया है।

SC के हस्तक्षेप का असर: बांग्लादेश से भारत लाई जाएगी सोनाली खातून, केंद्र ने दी मंजूरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि वह गर्भवती सोनाली खातून और उसके 8 वर्षीय बेटे सबीर को मानवीय आधार पर बांग्लादेश से भारत वापस ले आएगी। यह घोषणा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सुर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोनाली खातून और उसके आठ साल के बच्चे को मानवीय आधार पर भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने बीरभूम के सीएमओ को महिला को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया है।   मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- मानवीय आधार पर सोनाली खातून और उनके पुत्र सबीर को प्रक्रिया का पालन करते हुए भारत लाया जाएगा। यह कदम बिना मेरिट पर हमारे किसी भी तर्क को प्रभावित किए और उन्हें निगरानी में रखने के हमारे अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उठाया जाएगा। यानी केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि इस मामले से अन्य मामले प्रभावित नहीं होंगे और यह महज एक मानवीय आधार पर उठाया गया कदम है। कोर्ट की पूछताछ पर केंद्र का रुख बदला बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या सोनाली और उनके बेटे को मानवीय आधार पर वापस लाया जा सकता है। आज, सरकार से निर्देश लेने के बाद एसजी ने इसकी सहमति दे दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि सोनाली को दिल्ली से हिरासत में लिया गया था, इसलिए उन्हें पहले दिल्ली ही लाया जाएगा। हालांकि, प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुझाव दिया कि सोनाली को बीरभूम (पश्चिम बंगाल) स्थित उनके पिता के घर वाले क्षेत्र में भेजना ज्यादा उचित होगा। चिकित्सा सुविधाएं और देखभाल की जिम्मेदारी गर्भावस्था को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह सोनाली को पूरी तरह मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए। साथ ही, राज्य सरकार को उनके बेटे सबीर की देखभाल का भी निर्देश दिया गया। मामला क्या है? यह मामला केंद्र की ओर से दायर उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) से जुड़ा है, जिसमें 27 सितंबर को दिए गए कलकत्ता हाई कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती दी गई है जिसमें कुछ लोगों को वापस भारत लाने का आदेश दिया गया था। यह निर्णय भोदू शेख द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी, दामाद और पोते को कोर्ट में पेश करने की मांग की थी। इन लोगों को दिल्ली से उठाकर बांग्लादेश भेज दिया गया था। अन्य चार लोगों की वापसी पर विवाद सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र से अन्य चार लोगों को भी वापस लाने पर विचार करने का अनुरोध किया। इसके जवाब में एसजी मेहता ने कहा कि वे बांग्लादेशी हैं और केंद्र का इस पर गंभीर मतभेद है। उन्होंने यह भी आश्चर्य जताया कि राज्य सरकार इस मामले में केवियट डालकर क्यों पेश हो रही है और इन व्यक्तियों की ओर से संरक्षण क्यों मांग रही है। नागरिकता संबंधी टिप्पणी जस्टिस बागची ने कहा कि यदि सोनाली खातून, भोदू शेख (एक भारतीय नागरिक) से जैविक संबंध सिद्ध कर देती हैं, तो वह अपनी भारतीय नागरिकता भी सिद्ध कर सकती हैं। एसजी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट कर देंगे कि ये लोग विदेशी नागरिक हैं। उन्होंने यह अनुरोध भी किया कि हाई कोर्ट में दायर अवमानना याचिका की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने केवल इतना कहा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है, तो हाई कोर्ट आगे नहीं बढ़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित है।

ममता ने माना वक्फ कानून, अपने ही मंत्री नाराज़; मुस्लिम समाज बोला—अब चुप नहीं बैठेंगे

कोलकाता  राज्य सरकार द्वारा केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने की स्वीकृति देने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मंगलवार को टीएमसी सरकार में मंत्री और जामिया उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल शाखा) के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वक्फ की संपत्तियां छीनी गईं, तो मुसलमान चुप नहीं बैठेंगे। सिद्दीकुल्लाह पश्चिम बंगाल के जन शिक्षा विस्तार और पुस्तकालय सेवा मंत्री हैं।   कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौधरी ने केंद्र पर तीखा हमला बोलते हुए कहा- एसी कमरे में बैठकर बहुत बातें की जा सकती हैं। लेकिन क्या कोई गांव में जाकर लोगों से कह सकता है कि वक्फ संपत्ति अब उनकी नहीं रही? यह फैसला मुसलमानों पर जबरदस्ती थोपा गया है। हम इसे नेक नीयत से उठाया गया कदम नहीं मानते। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महीनों तक इस कानून को लागू करने से इनकार किया था, लेकिन पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के निर्देश मानते हुए राज्य की 82,000 वक्फ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर तक केंद्र के पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश जारी कर दिया।  चौधरी ने कहा- राज्य सरकार पहले कुछ और सोच रही थी। अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कुछ और सोच रही होंगी। वक्फ संपत्तियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। आगे क्या होगा, हम नहीं जानते, लेकिन लड़ाई लंबी और कठिन होगी। हमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण वाले बयान से टीएमसी ने बनाई दूरी इसी बीच टीएमसी ने अपने बागी विधायक हमायूं कबीर से खुद को अलग कर लिया है। कबीर ने 6 दिसंबर- यानी 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की बरसी पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद की आधारशिला रखने की घोषणा की थी। चौधरी ने कहा कि यह कदम बेहद संवेदनशील है और इससे अवांछित तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा- एक राजनीतिक नेता ने ऐसी बातें कही हैं, जिससे लोगों के मन में कई सवाल उठे हैं। हम कोई भी काम बिना सोचे-समझे नहीं करते। मस्जिद एक पवित्र स्थान है, राजनीति का माध्यम नहीं। उन्होंने इस घोषणा के पीछे षड्यंत्र की आशंका भी जताई- सोशल मीडिया पर जिस तरह इसे प्रस्तुत किया जा रहा है, उससे लगता है कि 6 दिसंबर को बंगाल में कोई बड़ा विस्फोटक माहौल तैयार करने की कोशिश हो रही है। यह मुस्लिम समुदाय के हित में नहीं है। मस्जिद राजनीति के लिए नहीं होती। राजनीतिक तापमान बढ़ा वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच महीनों चली खींचतान के बाद टीएमसी के भीतर भी असहमति और सियासी तनाव बढ़ता दिख रहा है। 6 दिसंबर के संवेदनशील दिन के मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियां भी हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

भारत-रूस सैन्य समझौता: पुतिन के दौरे से पहले रूस का बड़ा फैसला

नई दिल्ली/ मॉस्को  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 4-5 दिसंबर को होने वाली भारत यात्रा से पहले रूस की निचली संसद स्टेट डूमा ने मंगलवार को भारत के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौते को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी। इस समझौते का नाम रिक्रिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS है। यह कदम दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इस समझौते को पिछले सप्ताह डूमा के समक्ष अप्रूवल के लिए भेजा था। इसके पारित होने के बाद अब यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक सहयोग को व्यापक और सुव्यवस्थित बनाएगा। भारत के साथ संबंध रणनीतिक और व्यापक- डूमा स्पीकर स्टेट डूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते समय की कसौटी पर खरे और रणनीतिक हैं। उन्होंने सदन में कहा- हमारे भारत के साथ संबंध रणनीतिक और व्यापक हैं, और हम उन्हें अत्यंत महत्व देते हैं। आज समझौते की यह पुष्टि बराबरी की दिशा में एक और कदम है और यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा। तैनात होंगे सैनिक यह समझौता दोनों पक्षों को एक-दूसरे की जमीन पर कानूनी तौर पर सैनिक और इक्विपमेंट तैनात करने की इजाजत देगा और इसमें जॉइंट एक्सरसाइज, डिजास्टर रिलीफ और ह्यूमैनिटेरियन मिशन भी शामिल हैं। इंटरनेशनल अफेयर्स कमेटी के पहले डिप्टी चेयरमैन व्याचेस्लाव निकोनोव ने डिफेंस ट्रीटी को मंजूरी मिलने के बाद स्टेट ड्यूमा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत एक भू-राजनीतिक दिग्गज देश है और मिलिट्री-टेक्निकल सहयोग में अहम पार्टनर है। उन्होंने कहा कि इस मिलिट्री समझौते के तहत ‘पांच युद्धपोत, दस एयरक्राफ्ट और तीन हजार सैनिक एक साथ पार्टनर देश के इलाके में पांच साल के लिए तैनात रहेंगे और अगर दोनों पक्ष सहमत हों तो इसे और पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। क्या है RELOS समझौता? 18 फरवरी को हस्ताक्षरित यह समझौता यह निर्धारित करता है कि-     रूस और भारत एक-दूसरे की सैन्य टुकड़ियों, युद्धपोतों और सैन्य विमान को अपने क्षेत्रों में भेजने की प्रक्रिया कैसे अपनाएंगे।     दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के बेस, बंदरगाह और एयरफील्ड का किस प्रकार उपयोग कर सकेंगी।     लॉजिस्टिक सपोर्ट- जैसे ईंधन, भोजन, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत, परिवहन का प्रावधान किस प्रक्रिया के तहत होगा। यह व्यवस्था केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता, प्राकृतिक व मानव-जनित आपदाओं के बाद राहत कार्य और विशेष सहमति के अन्य प्रसंगों में भी लागू होगी। RELOS क्या है तथा इसका उपयोग कब और कैसे होगा? RELOS (Reciprocal Exchange of Logistic Support) भारत और रूस के बीच सैन्य लॉजिस्टिक साझेदारी का समझौता है. इसके तहत शामिल हैं: 1. सुविधाओं तक पहुंच- रूसी सैन्य विमान, जहाज और सैन्य कर्मी भारत के सैन्य ठिकानों और आधारभूत ढांचे का उपयोग कर सकेंगे. भारतीय सेनाएं भी रूस में इन्हीं सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी. 2. संचालन के दौरान समर्थन- संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण अभियानों, मानवीय कार्यों और आपदा राहत में लॉजिस्टिक सहायता. 3. वायुस्पेस और बंदरगाहों का पारस्परिक उपयोग- दोनों देश एक-दूसरे की हवाई सीमा और बंदरगाहों का उपयोग कर सकेंगे, जिसमें युद्धपोतों के दौरे शामिल हैं. 4. संचालन में लचीलापन- यह किसी भी स्थान पर लागू होगा, जहां भारत और रूस संयुक्त अभियान चलाने पर सहमत हों. 5. समन्वय में दक्षता- संयुक्त गतिविधियों और आपात स्थितियों में बेहतर तालमेल सुनिश्चित होगा, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग गहरा होगा. भारत को RELOS से कैसे होगा फायदा? भारत और रूस दोनों के लिए RELOS समझौता रणनीतिक रूप से अत्यंत फायदेमंद माना जा रहा है. भारत के लिए यह सिर्फ एक लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाने का अवसर भी है. इस समझौते से भारतीय नौसेना को रूस के आर्कटिक क्षेत्र के बंदरगाहों और नॉर्दर्न सी रूट तक पहुंच मिलेगी, जिससे ध्रुवीय इलाकों में उसकी संचालन क्षमता और वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा मिलेगा.  वहीं, भारत के लिए ऐसे समझौते इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की आक्रामक गतिविधियों के बीच नौसैनिक तैनाती के दौरान मित्र देशों के बंदरगाहों में लॉजिस्टिक सपोर्ट अत्यंत आवश्यक है. भारतीय नौसेना कई मोर्चों पर स्वतंत्र रूप से तैनात रहती है, और हर जहाज के साथ सपोर्ट शिप भेजना संभव नहीं होता, इसलिए ऐसे लॉजिस्टिक समझौते संचालन को सुचारू और प्रभावी बनाते हैं. रूस के साथ लॉजिस्टिक नेटवर्क का एकीकरण भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके कई प्रमुख हथियार, जैसे सुखोई लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और S-400 सिस्टम रूस से आते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो RELOS भारत को एक सशक्त वैश्विक नौसैनिक शक्ति बनने की लॉजिस्टिक रीढ़ दे सकता है. रूस के लिए भी है हिंद महासागर में आने का जुगाड़ रूस के लिए भी RELOS समान रूप से लाभदायक है, खासकर उस समय जब यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं. यह समझौता रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में पहुंच देता है, जिससे वह एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रख सकता है और चीन के प्रभाव को संतुलित कर सकता है और वह भी बिना स्थायी ठिकाने बनाए, जो महंगे और समय लेने वाले होते हैं.  पुतिन की भारत यात्रा में Su-57 लड़ाकू विमान और S-400 डील पर होगी चर्चा  व्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वां वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन होने वाला है, जिसमें रक्षा और व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुख रहेंगे. यात्रा से पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुष्टि की कि चर्चाओं में एक अतिरिक्त S-400 प्रणाली और Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर विचार शामिल हो सकता है. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने Su-57 को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विमान बताया और ब्रह्मोस जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से रक्षा-तकनीकी सहयोग को और बढ़ाने की रूस की तैयारियों का उल्लेख किया. रूस इस यात्रा के दौरान नागरिक-नाभिकीय सहयोग को भी मजबूत करना चाहता है. पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को भारत को कॉम्पैक्ट रिएक्टर टेक्नोलॉजी देने के लिए तैयार है और कुडनकुलम जैसे प्रोजेक्ट्स में सहयोग जारी रखेगा. रूसी कैबिनेट का बयान डूमा की वेबसाइट पर जारी नोट के अनुसार, … Read more

अवैध संबंध के सबूतों की जांच में हाईकोर्ट ने पति का दावा किया सही

 तिरुअनंतपुरम केरल हाई कोर्ट ने मेंटनेंस के एक केस की सुनवाई के दौरान अहम फैसला दिया। अदालत ने कहा कि वैवाहिक संबंधों में व्यभिचार की बात परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से ही साबित की जा सकती है। जस्टिस कौसर ईदप्पागथ ने कहा कि सीआरपीसी के सेक्शन 125 के तहत मेंटनेंस का केस सिविल नेचर का है। यदि पति यह कह रहा है कि उसकी पत्नी के विवाहेतर संबंध हैं और वह व्यभिचार में शामिल हैं तो उसकी ओर से दिए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ही कुछ तय करना होगा। ऐसे मामलों में पक्के सबूत कहां मिलते हैं। ऐसा होना तो दुर्लभ ही होता है। अदालत ने कहा, 'पति जब यह आरोप लगाता है कि उसकी पत्नी व्यभिचार में शामिल है और इसलिए वह मेंटनेंस की हकदार नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में यदि वह परिस्थितिजन्य सबूत देता है तो वही पर्याप्त होगा। आमतौर पर ऐसी चीजें तो पूरी गोपनीयता और सीक्रेसी के साथ होती हैं। ऐसे मामलों में पक्के सबूत मिल पाना तो दुर्लभ ही होता है। ऐसी स्थिति में व्यभिचार को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के माध्यम से ही साबित किया जा सकता है। इसलिए यदि ऐसे कोई सबूत मुहैया कराए जाएं तो उसके आधार पर ही किसी निर्णय तक पहुंचना होता है।' अदालत ने यह फैसला एक शख्स की याचिका पर दिया, जिसने फैमिली कोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था। फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह अपनी तलाकशुदा पत्नी को मासिक गुजारा भत्ता दे। इसी को चैलेंज देते हुए शख्स ने हाई कोर्ट का रुख किया। पति का कहना था कि यदि मेरी मेरी पत्नी किसी और के साथ है और व्यभिचार में शामिल है तो फिर वह गुजारा भत्ता की हकदार नहीं है। क्या था फैमिली कोर्ट का आदेश, जिसे HC में मिली चुनौती हालांकि फैमिली कोर्ट ने शख्स की अपील को खारिज कर दिया था और उसे आदेश दिया था कि वह पत्नी को हर महीने 7,500 रुपये का गुजारा भत्ता दे। इस फैसले को हाई कोर्ट में पति ने चुनौती दी। उसके वकील ने कहा कि यदि महिला किसी और के साथ है तो वह गुजारा भत्ता की हकदार नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मेरे मुवक्किल ने इस बात के पर्याप्त सबूत मुहैया कराए हैं कि वह किसी और के साथ है और व्यभिचार में शामिल है।