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चयनात्मक संवेदना पर सवाल: गाजा के लिए आवाज़, बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की हत्या पर चुप्पी क्यों?

ढाका  बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास (30) की लिंचिंग पर एंटरटेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कई सिलेब्रिटीज ने जमकर गुस्सा निकाला है। जाह्नवी कपूर, काजल अग्रवाल और जया प्रदा जैसी दिग्गज हस्तियों ने इस घटना पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इन सितारों ने न सिर्फ इस हत्या की निंदा की है, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। इस बीच सोशल मीडिया पर भी #JusticeForDipuChandraDas ट्रेंड कर रहा है। जाह्नवी ने इंस्टा पर लंबा पोस्ट लिखा है। उनका कहना है कि यह अकेली घटना नहीं है। जया प्रदा ने हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की है वहीं मनोज जोशी का कहना है कि गाजा के लिए सब आगे आते हैं हिंदू की हत्या पर चुप्पी साधना ठीक नहीं।    दीपू चंद्र दास कपड़ों की फैक्ट्री में काम करता था। बीते हफ्ते भीड़ ने ढाका से करीब 100 किमी दूर मयमनसिंह में पीट-पीटकर मार डाला था। इस घटना का एक दिल दहलाने वाला वीडियो वायरल हुआ जिसमें दीपू की नेकेड बॉडी को पेड़ से बांधकर जला दिया गया और भीड़ खुशी मना रही थी। जाह्नवी कपूर ने इस घटना पर चुप रहने वालों को पाखंडी बताया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर लंबा पोस्ट लिखा है जिसमें घटना को अमानवीय और कसाईनुमा बताया है। गुस्सा नहीं आ रहा तो आप पाखंडी हैं जाह्नवी लिखती हैं, बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह बेहद बर्बर और क्रूर है। यह सरेआम कत्लेआम है और यह कोई अकेली या इकलौती घटना नहीं है। अगर आपको इस अमानवीय लिंचिंग के बारे में नहीं पता है, तो इसके बारे में पढ़ें, वीडियो देखें और सवाल पूछें। और अगर यह सब देखने के बाद भी आपको गुस्सा नहीं आता, तो यकीन मानिए यही वह पाखंड है जो हमें पता चलने से पहले ही खत्म कर देगा। हम दुनिया के दूसरे कोने में हो रही चीजों पर तो आंसू बहाते रहेंगे, जबकि हमारे अपने भाई-बहनों को जिंदा जलाकर मार दिया जा रहा है। जया प्रदा बोलीं- फट रहा है कलेजा आज मैं बहुत दुखी हूं। आज मेरा कलेजा फट रहा है, ये सोचकर कि एक इंसान के साथ इतनी दरिंदगी कैसे हो सकती है। बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास नाम के एक मासूम हिंदू भाई को भीड़ ने मिलकर मार डाला, सिर्फ मारा ही नहीं, उसे पेड़ पर बांधकर उसे आग लगा दी। क्या यही वो नया बांग्लादेश है। यह मामूली हिंसा नहीं है। ये सरासर मॉब लिंचिंग है। सीधा सनातन धर्म और हिंदुत्व पर प्रहार है। हमारे मंदिर तोड़े जा रहे हैं, हमारी बहनों की इज्जत पर प्रहार कर रहे हैं। हम कब तक चुप रहेंगे। हमें न्याय मांगना चाहिए। काजल अग्रवाल बोलीं- जागो हिंदुओं काजल अग्रवाल ने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्टर शेयर किया है। इसमें एक पोस्टर के जरिये इस क्रूर घटना को दिखाने की कोशिश की है। साथ में लिखा है, जागो हिंदुओं। चुप्पी आपको नहीं बचाएगी। साथ में लिखा है, हिंदुओं पर सबकी नजरें हैं। हिंदू की हत्या पर क्यों चुप्पी एक्टर मनोज जोशी ने कहा, 'जब गाजा या फिलिस्तीन में कुछ होता है तो सब आगे आ जाते हैं लेकिन बांग्लादेश में एक हिंदू मारा गया तो बहुत दुख होता है कि कोई आगे नहीं आया। समय इस बात का जवाब देगा। दीपू के बाद हुई एक और हत्या बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद एक और युवक की हत्या की खबर है। बुधवार रात को भीड़ ने 29 साल के अमृत मंडल नाम के शख्स को पीटकर मार डाला। पुलिस का कहना है कि अमृत पर लोगों से उगाही का आरोप था।  

10 साल बाद वतन वापसी: भारत ने किया इलाज, अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम पर उठे सवाल

नई दिल्ली  अमेरिका में करीब एक दशक गुजारने वाले प्रवासी भारतीय (NRI)का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने अमेरिका के हेल्थ सिस्टम का एक ऐसा सच उजागर कर दिया है, जिस पर लोगों की काफी टिप्पणियां आ रही हैं। उन्होंने रेडिट पर इस शीर्षक से एक डिटेल पोस्ट लिखी है कि 'भारत ने मुझे ठीक कर दिया।' उन्होंने अपनी बीमारी का जिक्र करते हुए कहा कि मैं आभारी हूं कि भारत में आकर ठीक हो गया। अमेरिका में तो किसी भी व्यक्ति की हेल्थ से ज्यादा तवज्जो कमाई पर दी जाती है। वहां पर मरीजों को सिर्फ मनी मेकिंग मशीन के तौर पर देखा जाता है। NRI शख्स ने लिखा, 'भारत ने मुझे बचा लिया। यह बात सच है। मैंने अमेरिका में 10 साल गुजारे। वे लोग मेरी शिक्षा और करियर को लेकर हैरान होते थे, लेकिन मैं अपने घर और परिवार को मिस कर रहा था।' उन्होंने लिखा कि मैं डेटा साइंटिस्ट के तौर पर काम कर रहा था और 2017 में वह बीमार हो गए थे। इस दौरान जब उन्हें अमेरिकी अस्पतालों का रुख करना पड़ा तो परेशानी का सामना करना पड़ा। NRI शख्स ने लिखा, 'अमेरिका का हेल्थकेयर सिस्टम ऐसा है कि लोगों में डर पैदा कर देता है। एक सामान्य एंजाइटी की समस्या को लो इतना जटिल और डरावना बना देते हैं कि पूछिए मत।' उन्होंने लिखा कि 2018 की शुरुआत में मुझे पता चला था कि सिज़ोअफेक्टिव डिसऑर्डर की समस्या मुझे हो गई है। यह बढ़ता ही रहा, जबकि मैंने अमेरिका में कई डॉक्टरों को दिखाया था। यूज़र ने लिखा, 'अगर मुझे अब भी सिज़ोफ्रेनिया होता तो नौकरी नहीं कर पाता। सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोग मतिभ्रम और भ्रम के शिकार होते हैं।' इसके बाद वह लिखते हैं कि मैंने सेकेंड ओपिनियन के लिए भारत का रुख किया। मैं बेंगलुरु NIMHANS अस्पताल के एक डॉक्टर से मिला। इसके बाद मेरा सिज़ोअफेक्टिव डिसऑर्डर कुछ समय से ठीक हो गया। अब मुझे मूड डिसऑर्डर और कभी-कभी एंग्जायटी है।' उनकी इस पोस्ट पर कई लोगों ने सहमति जताई और कहा कि भारत लौटने का आपका फैसला ठीक था। इसके अलावा कई लोगों ने अमेरिका में हेल्थकेयर की महंगी कीमतों पर भी सवाल उठाया। एक यूजर ने लिखा कि यह बात सही है कि भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है, जहां हेल्थकेयर की सुविधा अच्छी है और दाम भी कम है। मैं इस बात की हर जगह सराहना करता हूं।

नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बड़ी जीत: ओडिशा में टॉप इनामी गणेश उइके सहित 6 नक्सली मारे गए

भुवनेश्वर ओडिशा के कंधमाल जिले में गुरुवार को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता गणेश उइके समेत छह नक्सली मारे गए। राज्य में नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि, यह मुठभेड़ चकापाद पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घने जंगलों में हुई। नक्सली पर था 1.1 करोड़ इनाम मारा गया गणेश उइके (69 वर्ष) सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और ओडिशा में इस प्रतिबंधित संगठन का प्रमुख था, जिस पर प्रशासन ने 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। मूल रूप से तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला उइके, पक्का हनुमंतु और राजेश तिवारी जैसे कई नामों से भी जाना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि पुलिस ने बताया कि इस सफल ऑपरेशन में गणेश उइके के अलावा पांच अन्य नक्सली भी मारे गए हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। फिलहाल अन्य नक्सलियों की पहचान नहीं हो पाई है। सुरक्षा बलों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि उइके लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था और क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों मे शामिल था। फिलहाल इलाके में अभी भी तलाश अभियान जारी है। गृह मंत्री ने क्या कहा? सुरक्षा बलों की सफलता पर गृह मंत्री अमित शाह की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा गया 'नक्सल मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि। ओडिशा के कंढमाल में चलाए गए एक बड़े अभियान में केंद्रीय समिति के सदस्य गणेश उइके समेत छह नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस बड़ी सफलता के साथ, ओडिशा नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त होने के कगार पर है। हम 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।'

‘परमाणु हथियारों से लैस सैन्य शासन है पाकिस्तान’—पुतिन की बुश से बातचीत का खुलासा

वाशिंगटन पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र को लेकर पश्चिमी देशों और रूस की चिंता नई नहीं है। अब इस पर मुहर लगाती हुई अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव की गोपनीय जानकारी साझा की गई हैं। आर्काइव की तरफ से 2001 से लेकर 2008 के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच हुई निजी जानकारी को सार्वजनिक किया गया है। इन दस्तावेजों में पुतिन और बुश दोनों ही पाकिस्तानी परमाणु अस्थिरता को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते नजर आते हैं। दस्तावेजों के मुताबिक जून 2001 में स्लोवेनिया में हुई अपनी पहली व्यक्तिगत मुलाकात में पुतिन पाकिस्तान की आलोचना करते उसे एक परमाणु हथियार से संपन्न जुंटा (सैन्य शासन) बताया था। जारी किए गए दस्तावेजों के मुताबिक बाहर से भले ही अमेरिका 9/11 के बाद पाकिस्तान से अपनी साझेदारी बढ़ा रहा था, लेकिन वह पाकिस्तान की परमाणु शक्ति से चिंतित भी था। इसी बातचीत में पुतिन ने खास तौर पर पश्चिमी देशों की यह कहते हुए आलोचना की थी कि वह पाकिस्तान के ऊपर लोकतंत्र का दबाव बनाने में नाकामयाब रहे। पुतिन और बुश के बीच यह बातचीत जिस समय में हो रही थी, उस समय दुनिया को इस बात की जानकारी नहीं थी कि क्या पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले ए.क्यू.खान इसकी डिजाइन को किसी को बेच रहे हैं। हालांकि दोनों ही परमाणु ताकत के प्रसार के खिलाफ दिखाई देते हैं। बुश और पुतिन की बातचीत इन दस्तावेजों में सबसे अहम रूप से दोनों ही देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते हैं। पुतिन कहते हैं कि अभी तक यह साफ नहीं है कि ईरान के पास प्रयोगशालाओं में क्या है और वह कहां है लेकिन उनका पाकिस्तान के साथ सहयोग मौजूद है। इस पर बुश कहते हैं, 'मैंने इस बारे में मुशर्रफ से बात की है। मैंने उनसे कहा कि हमें ईरान और उत्तर कोरिया को ट्रांसफर को लेकर चिंता है। उन्होंने ए. क्यू. खान और उसके कुछ साथियों को जेल में डाला, फिर हाउस अरेस्ट में रखा। हम जानना चाहते हैं कि उन्हें क्या बताया गया है। मैं मुशर्रफ को लगातार याद दिलाता रहता हूं। या तो उन्हें कुछ पता नहीं है या फिर वे पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं।" इसका जवाब देते हुए पुतिन कहते हैं, 'मेरी समझ के मुताबिक सेंट्रीफ्यूज में पाकिस्तानी मूल का यूरेनियम मिला है।' इस पर बुश ने कहा,' हां, वही चीज जिसके बारे में ईरान ने आईएईए को नहीं बताया था। यह नियमों का उल्लंघन है। पुतिन-वह पाकिस्तानी मूल का था, यह मुझे परेशान करता है। बुश-हमें भी यह बात परेशान करती है। पुतिन- हमारे बारे में भी सोचिए बुश-हमें परमाणु हथियारों लिए ढेर सारे धार्मिक उन्मादी नहीं चाहिए, ईरान में तो वही सरकार चला रहे हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान को लेकर भारत यह बात शुरुआत से ही कहता आ रहा है। लेकिन वैश्विक राजनीति की वजह से अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन करते नजर आता है। अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान के हजारों गुनाह माफ किए, क्योंकि उस वक्त उसे पाकिस्तान की जरूरत थी। बाइडन प्रशासन के दौर में जैसे ही अमेरिकी सैनिक पाकिस्तान से बाहर निकले, वाशिंगटन में इस्लामाबाद की पहुंच कमजोर हो गई। शुरुआत में खबरें यह तक आईं कि बाइडन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का फोन उठाना बंद कर दिया है। हालांकि, राजनीति ने फिर करवट ली और पाकिस्तान आज के समय में एक बार फिर से अमेरिका की गोद में जाकर बैठ गया है।

देशभर में फूड डिलीवरी पर संकट, Zomato–Swiggy–Zepto हड़ताल की तैयारी; 10 मिनट डिलीवरी नियम बना मुद्दा

नईदिल्ली  Amazon, Zomato, Zepto, Blinkit, Swiggy और Flipkart जैसे बड़े फूड डिलीवरी और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स ने  31 दिसंबर 2025 को देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। इन कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला कंपनियों पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया गया है क्योंकि यूनियनों के मुताबिक गिग इकोनॉमी में काम करने की परिस्थितियां लगातार खराब होती जा रही हैं। इस हड़ताल का ऐलान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (Telangana Gig and Platform Workers Union) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (Indian Federation of App-Based Transport Workers) ने किया है। इसमें मेट्रो शहरों और प्रमुख टियर-2 शहरों के डिलीवरी वर्कर्स के शामिल होने की संभावना है। स्विगी-जोमैटो की हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ एप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने एक बयान में कहा कि "खासकर व्यस्त समय में और त्योहारों के दौरान डिलीवरी वर्करों को लंबे समय तक काम करना होता है। देशभर में हड़ताल- क्या चाहते हैं गिग वर्कर्स? गिग वर्कर्स की यूनियनों का मानना है कि प्लेटफॉर्म कंपनियों का एल्गोरिदम पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण है जो काम के टारगेट और भुगतान तय करता है। उनका कहना है कि रिस्क कर्मचारियों पर डाले जा रहे हैं जबकि डिलीवरी की समय-सीमा लगातार सख्त होती जा रही है और इंसेंटिव के नियम बार-बार बदले जा रहे हैं। यूनियनों ने अपने बयान में कहा है कि डिलीवरी वर्कर्स- जो खासकर त्योहारों और व्यस्त समय में लोगों तक खाना और पार्सल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें घटती आमदनी, लंबे और अनिश्चित काम के घंटे, असुरक्षित डिलीवरी डेडलाइन, बिना चेतावनी के वर्क आईडी ब्लॉक होना और किसी भी तरह की बुनियादी सामाजिक सुरक्षा या वेलफेयर सपोर्ट का अभाव शामिल है। यूनियनों ने ऐप्स में शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने की मांग भी की है। खासकर रूट से जुड़ी समस्याओं और पेमेंट फेल होने जैसे मामलों के लिए। ये वर्कर्स जॉब सिक्योरिटी से जुड़े उपाय चाहते हैं- जैसे तय रेस्ट ब्रेक, हेल्थ इंश्योरेंस, दुर्घटना की स्थिति में कवर और पेंशन लाभ। इसके अलावा फे पेयर सिस्टम उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्कर्स 10 मिनट में अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी मॉडल को खत्म करने की भी मांग कर रहे हैं। सरकार से क्या मांग कर रही हैं यूनियनें? वर्कर्स यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकारों से उनकी मांग पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। वे प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए सख्त नियम, लेबल लॉ का सही तरीके से पालन, गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और यूनियन बनाने व सामूहिक रूप से बातचीत करने के अधिकार की आधिकारिक मान्यता की मांग कर रहे हैं। यूनियन नेता शेख सल्लाउद्दीन ने कहा कि असुरक्षित कार्य प्रणालियों, घटती कमाई और किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा के अभाव के कारण डिलीवरी वर्कर्स को उनकी सीमाओं से परे धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल न्याय, गरिमा और जिम्मेदारी की मांग के लिए है और सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती। जबकि कंपनियां वर्कर्स की जान की कीमत पर मुनाफा कमा रही हैं। अब तक सरकार ने गिग वर्कर्स की क्या मदद की है? यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है, जब सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक मान्यता देने के लिए नए श्रम सुधार लागू किए हैं। 21 नवंबर 2025 से लागू हुए संशोधित सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) के तहत अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1–2% एक सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा करना होगा। हालांकि, यह योगदान गिग वर्कर्स को किए गए कुल भुगतान के अधिकतम 5% तक सीमित रहेगा। इस फंड का उद्देश्य हेल्थ इंश्योरेंस, दुर्घटना बीमा और मातृत्व लाभ जैसी कल्याणकारी योजनाओं को सपोर्ट देना है। नए नियमों में आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर को भी अनिवार्य किया गया है ताकि वर्कर्स अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर काम करते समय अपने लाभों को साथ ले जा सकें। इसके साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्क की कानूनी परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। हालांकि कई कंपनियों ने इन बदलावों का स्वागत किया है और कहा है कि इससे स्पष्टता आएगी और वर्कर्स को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। लेकिन यूनियनों का कहना है कि यह सिर्फ पहला कदम है। उनके मुताबिक न्यूनतम वेतन, वर्कर्स की सुरक्षा और एल्गोरिदम आधारित नियंत्रण जैसी गहरी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।  

टोरंटो यूनिवर्सिटी के नजदीक गोलीबारी से दहशत, भारतीय छात्र की हत्या

टोरंटो कनाडा के टोरंटो शहर में यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो स्कारबोरो (UTSC) परिसर के पास गोलीबारी में 20 साल के एक भारतीय छात्र शिवांक अवस्थी की मौत हो गई। यह घटना टोरंटो में भारतीय नागरिकों से जुड़ी दूसरी गंभीर हिंसक वारदात के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। इससे पहले हाल ही में 30 वर्षीय भारतीय मूल की महिला हिमांशी खुराना की भी हत्या कर दी गई थी। पुलिस इस मामले में टोरंटो निवासी अब्दुल गफूरी की तलाश कर रही है। उनकी मौत पर टोरंटो स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने गहरा शोक व्यक्त किया है। शिवांक भारत से जाकर वहां पीएचडी कर रहे थे। भारतीय दूतावास ने एक्स पर बयान जारी कर इस घटना पर शोक जताया है। दूतावास ने कहा, “यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो स्कारबोरो परिसर के पास हुई गोलीबारी की घटना में युवा भारतीय डॉक्टोरल छात्र श्री शिवांक अवस्थी की दुखद मृत्यु से हमें गहरा आघात पहुंचा है। इस कठिन समय में वाणिज्य दूतावास शोकाकुल परिवार के संपर्क में है और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।” पुलिस के अनुसार, शिवांक अवस्थी को मंगलवार को हाइलैंड क्रीक ट्रेल और ओल्ड किंग्स्टन रोड इलाके में गोली मारी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें गंभीर हालत में पाया और घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया। पुलिस का कहना है कि हमलावर पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए थे। घटना के बाद सुरक्षा कारणों से विश्वविद्यालय परिसर को कुछ समय के लिए लॉकडाउन किया गया। यह हत्या इस वर्ष टोरंटो में दर्ज की गई 41वीं हत्या है। छात्रों में भय और आक्रोश इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो स्कारबोरो के छात्रों में भय और गुस्से का माहौल है। सोशल मीडिया मंच रेडिट पर एक छात्र ने लिखा कि शिवांक को दिनदहाड़े परिसर के भीतर स्थित घाटी क्षेत्र में गोली मारी गई, जो छात्रों द्वारा अक्सर इस्तेमाल किया जाता है और जिसे विश्वविद्यालय प्रमुख क्षेत्र के रूप में प्रचारित करता रहा है। छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि वे पहले भी सुरक्षा की कमी को लेकर शिकायतें कर चुके हैं। कई छात्रों ने आशंका जताई कि सीमित जानकारी और संदिग्धों के बारे में स्पष्ट विवरण न होने के कारण अब वे देर शाम की कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल होने से डर रहे हैं। कौन थे शिवांक? शिवांक अवस्थी यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो स्कारबोरो की चीयरलीडिंग टीम के भी सक्रिय सदस्य थे। टीम ने इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “हम अपने प्रिय साथी शिवांक अवस्थी के अचानक चले जाने से स्तब्ध और बेहद दुखी हैं। वह अभ्यास के दौरान हमेशा सबका हौसला बढ़ाते थे और सभी के चेहरे पर मुस्कान ले आते थे। वह हमेशा हमारे UTSC चीयर परिवार का हिस्सा रहेंगे।”

यात्रीगण ध्यान दें! रेलवे किराए में बढ़ोतरी लागू, स्लीपर–एसी सफर अब पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली  भारतीय रेल ने हाल में रेल किराया बढ़ाने की घोषणा की थी, जो आज (26 दिसंबर) से प्रभावी हो गया। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पहले से की गई बुकिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, 26 दिसंबर या उसके बाद की गई नई बुकिंग पर नए किराए लागू होंगे। रेलवे के अनुसार, उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों के किरायों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अन्य श्रेणियों की ट्रेनों और सेवाओं पर यह संशोधन लागू होगा। आपको बता दें कि यह एक साल में दूसरी बार है जब मंत्रालय ने यात्री रेल किरायों में संशोधन किया है। इससे पहले जुलाई में किराया में वृद्धि की गयी थी। रेल मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए साधारण श्रेणी के टिकट की कीमत में एक पैसा प्रति किलोमीटर तथा मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की गैर वातानुकूलित और सभी ट्रेनों की वातानुकूलित श्रेणियों के टिकट की कीमत में दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की अधिसूचना जारी की।अगर आप से आप टिकट बुक कर रहे हैं तो महंगा किराया चुकाना होगा. यह बढ़ोत्‍तरी एक और दो पैसे प्रति किमी. की गयी है. हालांकि इससे कम दूरी तक जनरल क्‍लास से और लोकल ट्रेनों में सफर वालों को राहत दी गयी है, यानी उनके किराए में कोई बढ़ोत्‍तरी नहीं हुई है. आइए जानते हैं कि इस बढ़ोत्‍तरी पर आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा. हालांकि साल में यह दूसरी बार बढ़ोत्‍तरी हुई है. इससे पहले जुलाई में भी बढ़ोत्‍तरी हुई थी. रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक सूचना और प्रसार दिलीप कुमार बताते हैं कि आज से ट्रेनों का किराया महंगा हो गया है. इस बढ़ोत्‍तरी से 215 किमी. से कम की जनरल क्‍लास और सबअर्बन ट्रेनों में कोई असर नहीं पड़ेगा. यात्रियों को ट्रेनों और स्‍टेशनों में और बेहतर सुविधाएं देने के लिए यह बढ़ोत्‍तरी की गयी है. साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को 1 पैसा प्रति किलोमीटर अतिरिक्त देना है. वहीं, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी और एसी श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 2 पैसे प्रति किलोमीटर है. इससे पहले कब बढ़ा किराया भारतीय रेलवे द्वारा 21 दिसंबर को जारी आदेश के अनुसार 26 दिसंबर से ट्रेन के किराए में बढ़ोतरी का फैसला किया था. किराया बढ़ोत्‍तरी वित्‍तीय साल 2025-26 में दूसरी बार किया गया है. इससे पहले जुलाई में किराया बढ़ाया गया था. इसमें नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस में आधा पैसा (0.5 पैसे) प्रति किमी और एसी क्लासेस में 2 पैसे प्रति किमी की बढ़ोतरी की गई थी. 500 किमी तक नॉन-एसी जनरल में कोई बदलाव नहीं था. इससे रेलवे को करीब 700 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान था.     कम दूरी पर कोई असर नहीं     अगर आप जनरल क्लास में सफर करते हैं, तो रेलवे ने यहां एक ‘किलोमीटर वाला फॉर्मूला’ लगाया है.     अगर आपकी यात्रा 215 किलोमीटर के दायरे में है, तो पुराना किराया ही लगेगा. यानी छोटे शहरों के बीच आने-जाने वालों पर कोई बोझ नहीं है.     216 से 750 किमी के सफर के लिए सिर्फ 5 रुपये बढ़ेंगे. वहीं, 751 से 1250 किमी के लिए 10 रुपये, 1251 से 1750 किमी के लिए 15 रुपये और इससे अधिक दूरी के लिए अधिकतम 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.     स्लीपर और फर्स्ट क्लास (साधारण): यहां प्रति किलोमीटर के हिसाब से मात्र 1 पैसे का इजाफा किया गया है.     आज से पहले बुक टिकट पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा.     215 किमी तक जनरल/सेकंड क्लास और लोकल ट्रेनों में कोई बढ़ोतरी नहीं.यानी रोजाना ऑफिस/स्कूल जाने वाले यात्रियों को कोई फर्क नहीं.     इस साल दूसरी बार बढ़ोतरी. पहली बार 1 जुलाई 2025 में हुई बदलाव किया गया था.     इससे आने वाले राज्‍सव से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी.     रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज, में कोई वृद्धि नहीं. पुराने नियम ही लागू. वे को कितने राजस्‍व का फायदा इस बढ़ोत्‍तरी के साथ एक साल में रेलवे को 1300 करोड़ के अतिरिक्‍त राजस्‍व होने की संभावना है. पहले बढ़ोत्‍तरी के आदेश से 700 और इस बार के आदेश से 600 करोड़ रुपये सालाना आया की बढ़ोत्‍तरी होगी. इस तरह पूरे साल में 1300 रुपये अतिरिक्‍त आय रेलवे को होने का अनुमान है. दिल्‍ली से मुंबई पर कितना पड़ेगा असार दिल्ली से मुंबई के बीच ट्रेन दूरी करीब 1384 किमी. है. अगर जनरल क्लास (अनरिजर्व) की बात करें तो पहले किराया करीब 350 के आसपास होता था, एक पैसे प्रति किमी. के हिसाब से करीब 14 रुपए पहले की तुलना में अधिक चुकान होंगे. यानी 364 के आसपास जनरल क्‍लास वालों को किराया चुकाना होगा. नॉन-एसी यानी  (स्लीपर क्लास) का पुराना किराया 585 रुपये के आसपास है, दो फसे प्रति किमी. बढ़ोत्‍तरी के हिसाब से करीब 32 रुपये ज्‍यादा चुकाने होंगे. वहीं, थर्ड एसी का पुराना किराया करीब 1600 रुपये था, जो बढ़कर 1643 रुपये के आसपास हो गया. दिल्‍ली से पटना के किराए में कितना फर्क पड़ेगा दिल्‍ली से पटना की दूरी करीब 998 किलोमीटर है. जनरल क्लास (अनरिवर्ज) का मौजूदा किराया पुराना किराया 250 के आसपास है, बढ़ोत्‍तरी होने के बाद किराए में 10 रुपये की बढ़ोत्‍तरी होगी, कुल किराया 260 रुपये के आसपास . वहीं नॉन-एसी में किराए में 24 रुपये तक की बढ़ोत्‍तरी . इसी रूट पर थर्ड एसी का पुराना किराया करीब 1370 रुपये है. स्‍लीपर जितना इस क्‍लास में बढ़ाने के बाद किराया 1395 रुपए के आसपास .

‘न्यूड न्यू ईयर’ ईव पार्टी: नया साल मनाने का अनोखा अंदाज

बर्मिंघम दुनिया भर में नए साल के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। कहीं आतिशबाजी होगी, तो कहीं म्यूजिक कंसर्ट लेकिन ब्रिटेन के बर्मिंघम में एक ऐसा होटल है जो अपनी अनोखी 'न्यूड न्यू ईयर ईव पार्टी' के लिए चर्चा में है। यहां आने वाले मेहमान कपड़ों का त्याग कर पूरी तरह प्राकृतिक रूप में नए साल का स्वागत करते हैं। क्लोवर स्पा एंड होटल: प्रकृतिवादियों का पसंदीदा ठिकाना बर्मिंघम स्थित 'द क्लोवर स्पा एंड होटल' एक छोटा लेकिन मशहूर सात कमरों वाला बुटीक होटल है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो प्रकृतिवाद (Naturism) में विश्वास रखते हैं और बिना कपड़ों के स्वच्छंद रहना पसंद करते हैं। होटल ने दिसंबर की शुरुआत से ही कई 'क्रिसमस इवेंट्स' आयोजित किए। मेहमानों को मसाज, टर्की डिनर और मिन्स पाई जैसे पारंपरिक पकवान परोसे गए। कपल्स के लिए विशेष वीकेंड पार्टियों का आयोजन किया गया जिसकी सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है।   कैसी होगी 'न्यू इयर्स ईव' पार्टी? 31 दिसंबर की शाम को होने वाले इस मुख्य आयोजन के लिए होटल ने खास तैयारियां की हैं। जश्न की शुरुआत शाम 6 बजे से होगी और देर रात 1 बजे तक चलेगा। डीजे लियाम के डिस्को म्यूजिक पर मेहमान बिना कपड़ों के डांस और मस्ती करेंगे। मेहमानों के लिए ड्रिंक्स, स्पा सुविधाएं और लजीज खान-पान की व्यवस्था रहेगी। नियम और माहौल: यौन गतिविधियों पर सख्त पाबंदी अक्सर ऐसी पार्टियों को लेकर गलतफहमी हो जाती है लेकिन होटल के मालिक टिम हिग्स ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की है:     सिर्फ एडल्ट्स: यहां केवल 18 साल से ऊपर के लोगों को ही प्रवेश मिलता है।     नो सेक्सुअल एक्टिविटी: होटल में किसी भी तरह की यौन गतिविधियों की सख्त मनाही है। यह पूरी तरह से एक सामाजिक और फ्रैंडली माहौल होता है।     मकसद: इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी बॉडी के प्रति सहज महसूस कराना और प्रकृति के करीब रहकर नए दोस्त बनाना है। क्यों लोकप्रिय हो रहा है यह ट्रेंड? होटल प्रबंधन के अनुसार यहां आने वाले लोग इसे 'मानसिक आजादी' के रूप में देखते हैं। बुकिंग्स पहले से ही फुल हो चुकी हैं और मेहमानों को अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए पार्टी सरचार्ज भी देना पड़ता है।  

रंगपुर डिविजन के अलग होने से चिकन नेक की समस्या हल, 23 लाख हिंदुओं के लिए राहत

नई दिल्ली /ढाका   बांग्लादेश से शेख हसीना की सरकार को हटाए जाने के बाद से वहां की सत्ता कट्टरपंथी ताकतों के हाथ में है. खुद मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इन कट्टरपंथी ताकतों के हाथों खिलौना बन गए हैं. ऐसे में इस वक्त वहां भारत विरोधी भावनाएं काफी मुखर हैं. कट्टरपंथी हर बात पर भारत को धमकी दे रहे हैं. हालांकि भारत के सामने बांग्लादेश और वहां की कट्टरपंथी ताकतों की औकात बहुत मामूली है. भौगोलिक रूप से पूरी तरह से भारत की गोद में बैठा इस मुल्क के मौजूदा हुक्मरान इस बात को भूल गए हैं कि उनको भारत ने ही पैदा किया है. वे अब उलटे भारत को ही धमकी दे रहे हैं. वे पूर्वोत्तर इलाके को भारत से अलग करने बात करते हैं. वे भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक कहा जाता है, को काटने की धमकी देते हैं. लेकिन, उनको नहीं पता है कि भारत के शह मात्र से उनका एक बड़ा इलाका आजाद हो सकता है. वह इलाका है रंगपुर डिविजन. इसी डिविजन के बराबर चिकन नेक है और बांग्लादेश के इस डिविजन का करीब-करीब 90 फीसदी बॉर्डर भारत के पश्चिम बंगाल राज्य से जुड़ता है. अब सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब चर्चा चल रही है. तमाम लोग कह रहे हैं कि अब बहुत हो गया. भारत को राष्ट्र हित को महत्व देते हुए बांग्लादेश से इस डिविजन को आजाद कराने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए. इस डिविजन के आजाद होने भर से भारत का सिलिगुड़ी कॉरिडोर करीब 120 से 150 किमी चौड़ा हो जाएगा. इससे भारत की एक बहुत बड़ी समस्या दूर हो जाएगी. क्या ऐसा करना संभव है? देखिए, सैद्धांतिक तौर पर ऐसा करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है. भारत एक जिम्मेदार मुल्क है. वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है. लेकिन, कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि खुद को बचाने के लिए पड़ोसी मुल्क में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करना मजबूरी हो जाती है. ऐसी स्थिति में कोई भी मुल्क हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा रह सकता है. क्योंकि अंततः बांग्लादेश हमारी गोद में बैठा मुल्क है और उसकी किसी भी हरकत से सीधे तौर पर भारत पर असर पड़ना तय है.     रूस-यूक्रेन जंग है उदाहरण     इस बात को समझने के लिए हम मौजूदा रूस-यूक्रेन जंग को उदाहरण बना सकते हैं. ऐतिहासिक रूप से यूक्रेन सोवियत रूस का हिस्सा था. विभाजन के बाद वह अलग मुल्क बना. फिर वह तेजी से पश्चिम के प्रभाव में आने लगा. दूसरी और रूस को यह बात पसंद नहीं थी. फिर भी वह शांत रहा. लेकिन, यूक्रेन ने एक संप्रभु मुल्क होने के नाते रूस विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाते रहा. वह रूस विरोधी सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो का हिस्सा बनने के लिए झटपटाने लगा. इस कारण रूस का धैर्य जवाब दे दिया. रूस किसी भी कीमत पर अपनी सीमा पर नाटो की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं कर सकता था. इसी कारण उसने यूक्रेन पर हमला किया. रूस के पास सैन्य ताकत है और वह ऐसा करने का दम रखता है. आज स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका और तमाम पश्चिमी देश रूस को संघर्ष विराम कराने के लिए जो प्रस्ताव दे रहे हैं उसमें यूक्रेन को नाटो से अलग रखने और रूस द्वारा यूक्रेन के कब्जाए गए हिस्से को मान्यता देने की बात कह रहे हैं. यानी रूस की जो चिंता थी उसे अब पश्चिमी देश भी मानने लगे हैं. इस तरह यह बात तो स्पष्ट है कि अगर किसी देश की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है तो वह मजबूरन इस तर्क को आधार बनाकर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. बांग्लादेश के मौजूदा हुक्मरान ऐसी परिस्थिति बनाने में लगे हैं. वे भारत विरोधी ताकतों को लगातार शह दे रहे हैं. ऐसे में भारत सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन, यह सैन्य हस्तक्षेप भी रूस-यूक्रेन जंग की तरह काफी व्यापक और बड़ा आर्थिक नुकसान वाला हो सकता है. अब आते हैं रंगपुर डिविजन पर वैसे तो 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के वक्त भारत के पास सुनहरा मौका था कि वह अपने सिलिगुड़ी कॉरिडोर को चौड़ा करने के लिए बांग्लादेश के इस डिविजन को भारत में मिला ले या फिर उसको एक आजाद मुल्क बनवा दे. उस वक्त भारत के लिए ऐसा करना बहुत आसान था क्योंकि भारत ने इस मुल्क की आजादी के लिए जंग लड़ी थी. पूरी दुनिया से टकराव मोल लिया था. खुद दुनिया का अंकल सैम अमेरिका भारत के खिलाफ था लेकिन दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शानदार नेतृत्व का परिचय दिया और बांग्लादेश का निर्माण करवाया. करीब 23 लाख हिंदू रंगपुर डिविजन पूरी तरह पश्चिम बंगाल की गोद बैठा इलाका है. यह एक बड़ा डिविजन है और इसका क्षेत्रफल 16,185 वर्ग किमी है. यहां की कुल आबादी करीब 1.9 करोड़ है. यह एक बहुत ही गहन आबादी वाला इलाका है. यहां प्रति किमी 1200 लोग रहते हैं. इस इलाके में करीब 23 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी में करीब 13 फीसदी हैं. मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 86 फीसदी है. बांग्लादेश में डिविजन की बात करें तो प्रतिशत में यह रंगपुर डिविजन दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला इलाका है. इस देश के सिलहट डिविजन में सबसे अधिक 13.51 फीसदी हिंदू हैं. संख्या के आधार पर देखें तो राजधानी ढाका डिविजन में सबसे अधिक करीब 28 लाख हिंदू रहते हैं. हालांकि ढाका डिविजन की कुल आबादी 4.42 करोड़ है और प्रतिशत में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 6.26 फीसदी है. कैसे अलग हो सकता है रंगपुर देखिए, सीधे तर सैन्य कार्रवाई कर इस डिविजन को बांग्लादेश से अलग करना बहुत मुश्किल कार्य है. इसके लिए वहां के लोगों को आगे आना पड़ेगा. सबसे पहले तो बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं को इस इलाके में बसना पड़ेगा. उनको यहां की डेमोग्राफी में बदलाव करना पड़ेगा. जब वह एकजुट और किसी खास इलाके में मजबूत होंगे तो आंतरिक रूप से भी उनके लिए खतरा कम हो जाएगा. फिर अगर उनको कोई बाहरी जरूरत पड़ेगी तो भारत के लिए परोक्ष तौर पर सहायता देना आसान होगा. इसके अलावा उनके खिलाफ अत्याचार या जुर्म होता है, या उनका उत्पीड़न किया जाता है या उनके साथ दोयम दर्जे का … Read more

7वां वेतन आयोग खत्म, 8वें की तैयारी: नए साल से पहले जानें आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी

नई दिल्ली सातवें वेतन आयोग की समय सीमा 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है यानी 8 दिन बाद आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है। देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। क्योंकि, इसका सीधा असर 1.19 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ने वाला है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उम्मीदें भी तेज हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी और पेंशन में असल बढ़ोतरी कितनी होगी? सैलरी में इजाफा पूरी तरह फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा, क्योंकि यही फैक्टर नई बेसिक सैलरी तय करता है। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर लेवल-1 से लेवल-18 तक यानी चपरासी से लेकर आईएएस तक के कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी? नया वेतन 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है, लेकिन सरकार को रिपोर्ट मंजूर करने में करीब दो साल लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर जरूर मिलेगा, पर बढ़ी हुई सैलरी थोड़ा इंतजार कराने के बाद ही हाथ आएगी। फिटमेंट फैक्टर दरअसल वह गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई सैलरी तय की जाती है। Nexdigm के डायरेक्टर रामचंद्रन कृष्णमूर्ति के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर तय करते समय महंगाई, जीवन-यापन की लागत, CPI इंडेक्स, सरकार की वित्तीय स्थिति और प्राइवेट सेक्टर से तुलना जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है। आमतौर पर बेसिक पे और ग्रेड पे को आधार बनाकर यह तय किया जाता है कि कर्मचारियों को कितना इंक्रीमेंट दिया जा सकता है। महंगाई जितनी ज्यादा होती है, फिटमेंट फैक्टर उतना ही ऊंचा रखने की जरूरत महसूस होती है। दोगुने से ज्यादा का असर दिखेगा अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी में सीधा दोगुने से ज्यादा का असर दिखेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो 2.15 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से नई बेसिक सैलरी ₹38,700 हो सकती है। वहीं, ₹50,000 बेसिक पाने वाले कर्मचारी की सैलरी बढ़कर करीब ₹1,07,500 तक पहुंच सकती है। यही नहीं, चूंकि DA, HRA और पेंशन जैसी सुविधाएं बेसिक सैलरी पर ही निर्भर करती हैं, इसलिए कुल मासिक आय और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में भी बड़ा उछाल आएगा। अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की सैलरी अगर अलग-अलग लेवल की बात करें, तो लेवल-1 में ₹18,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹38,700, लेवल-6 में ₹35,400 से ₹76,110 और लेवल-10 में ₹56,100 से बढ़कर करीब ₹1.20 लाख हो सकती है। वहीं, सीनियर अधिकारियों के लिए यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा होगी। लेवल-15 में ₹1.82 लाख की बेसिक सैलरी ₹3.91 लाख, जबकि लेवल-18 में ₹2.50 लाख से बढ़कर करीब ₹5.37 लाख तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर, अगर 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत और मजबूत बढ़ोतरी लेकर आ सकता है। चपरासी से IAS तक, कितनी कितनी बढ़ेगी सैलरी?  ग्रेड वर्तमान बेसिक पे अनुमानित बेसिक पे Level 1 ₹ 18,000 ₹ 38,700.00 Level 2 ₹ 19,900 ₹ 42,785.00 Level 3 ₹ 21,700 ₹ 46,655.00 Level 4 ₹ 25,500 ₹ 54,825.00 Level 5 ₹ 29,200 ₹ 62,780.00 Level 6 ₹ 35,400 ₹ 76,110.00 Level 7 ₹ 44,900 ₹ 96,535.00 Level 8 ₹ 47,600 ₹ 102,340.00 Level 9 ₹ 53,100 ₹ 114,165.00 Level 10 ₹ 56,100 ₹ 120,615.00 Level 11 ₹ 67,700 ₹ 145,555.00 Level 12 ₹ 78,800 ₹ 169,420.00 Level 13 ₹ 118,500 ₹ 254,775.00 Level 13 ₹ 131,100 ₹ 281,865.00 Level 14 ₹ 144,200 ₹ 310,030.00 Level 15 ₹ 182,200 ₹ 391,730.00 Level 16 ₹ 205,400 ₹ 441,610.00 Level 17 ₹ 225,000 ₹ 483,750.00 Level 18 ₹ 250,000 ₹ 537,500.00  8वां वेतन आयोग कब से लागू होगा? 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है। ऐसे में नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। हालांकि, सरकार को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें मंजूर करने में करीब दो साल लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर मिलने की उम्मीद भी है। फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?  फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर, उतनी ज्यादा सैलरी और पेंशन। फिटमेंट फैक्टर कैसे तय होता है? एक्सपर्ट बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर तय करते समय कई आर्थिक और संस्थागत पहलुओं को देखा जाता है। आमतौर पर इसमें बेसिक पे + ग्रेड पे को आधार बनाकर जरूरी बढ़ोतरी का आकलन किया जाता है।