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सीएम ने रखा 17,440 करोड़ का अनुपूरक बजट, कृषि व ग्रामीण क्षेत्रों पर खास फोकस

भुवनेश्वर ओडिशा विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 17,440 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें किसानों के कल्याण, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, उद्योग, संस्कृति, कृषि, और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है।अतिरिक्त बजट में राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक महत्व दिया है। प्राथमिक और उच्च शिक्षा के विकास के लिए 2,327 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस बजट से राज्य का शिक्षा विभाग और अधिक प्रगति करेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। शिक्षा के बाद कृषि और किसानों को दूसरा सबसे अधिक महत्व दिया गया है। राज्य के किसानों के लिए अतिरिक्त बजट में 1,673 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी तरह महिला और बाल विकास विभाग के लिए 1,558 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अतिरिक्त बजट में उद्योग एवं एमएसएमई के लिए 337 करोड़ रुपये, ममता योजना के लिए 141 करोड़, गोपबन्धु जन आरोग्य के लिए 440 करोड़, आपदा प्रबंधन हेतु 171 करोड़, अनुसूचित जाति और जनजाति विकास के लिए 531 करोड़, प्रशासनिक व्यय के लिए 3,389 करोड़ रुपये, सामाजिक सेवा के लिए 5,948 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य विभाग के लिए 1,164 करोड़ रुपये, पंचायती राज विभाग के लिए 616 करोड़ रुपये, ओड़िया भाषा एवं साहित्य विभाग के लिए 363 करोड़ रुपये, सुभद्रा योजना के लिए 295 करोड़ रुपये, नंदनकानन के विकास के लिए 80 करोड़ रुपये, पर्यावरण और पर्यटन विकास के लिए 80 करोड़ रुपये, वन्यजीव संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए 25 करोड़ तथा शहरी विकास के लिए 303 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट आवंटन का विवरण:     प्रशासनिक व्यय: 3,389 करोड़ रुपये     कार्यक्रम व्यय: 13,716 करोड़ रुपये प्रमुख क्षेत्रों में प्रावधान: किसान कल्याण एवं खाद्य सुरक्षा:     धान खरीद रिवॉल्विंग फंड के लिए 3,000 करोड़ रुपये     पीडीएस सब्सिडी के लिए 1,325 करोड़ रुपये     समृद्ध कृषक योजना के तहत एमएसपी और इनपुट सहायता के लिए 850 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाएं:     राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 994 करोड़ रुपये     एससीबी मेडिकल कॉलेज के उन्नयन के लिए 50 करोड़ रुपये     गोपबन्धु जन आरोग्य योजना के तहत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 40 करोड़ रुपये महिला, बाल एवं आजीविका विकास:     सुभद्रा योजना के लिए 295 करोड़ रुपये     मिशन शक्ति कार्यक्रम के लिए 405 करोड़ रुपये     राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत 426 करोड़ रुपये शिक्षा, कौशल एवं युवा विकास:     पीएम-पोषण योजना के लिए 392 करोड़ रुपये     ओडिशा आदर्श विद्यालयों के लिए 320 करोड़ रुपये     गैर-सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के लिए अनुदान     बुनियादी ढांचा, ग्रामीण एवं शहरी विकास:     सेतु बंधन योजना के लिए 120 करोड़ रुपये     मुख्यमंत्री सहरी विकास योजना के तहत शहरी बुनियादी ढांचे के लिए 100 करोड़ रुपये उद्योग, आईटी एवं कनेक्टिविटी:     एसआइडीबीआइ क्लस्टर डेवलपमेंट फंड के तहत 276 करोड़ रुपये     भारतनेट, ओएसडब्ल्यूएएन कनेक्टिविटी और पुरी में नए सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन के लिए धनराशि संस्कृति एवं पर्यटन:     बारपुत्रा ऐतिहास्य ग्राम योजना के लिए 100 करोड़ रुपये     कलामंडल के लिए 90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट में प्रावधान किया गया है।  

द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द मुहर लग सकती है

नई दिल्ली  वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण इस साल के अंत तक पूरा हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों आपस के ज्यादातर मुद्दों को सुलझा लिया है। अग्रवाल के मुताबिक, भारत इस कैलेंडर ईयर में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते को लेकर देश आशावादी है। हालांकि, अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर भारत कोई समझौता नहीं कर सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में फिक्की की 98वीं वार्षिक आम बैठक और वार्षिक सम्मेलन में वाणिज्य सचिव ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि उनकी प्रतिबद्धता है कि 2025 तक भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते का पहला चरण पूरा हो जाए और अब चीजें काफी आगे बढ़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय बीटीए के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है और रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर भी लंबी बातचीत हुई है। भारत अमेरिका के साथ दो फ्रंट पर बातचीत कर रहा है। पहला -द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए और दूसरा- रेसिप्रोकल टैरिफ हटाने को लेकर। अग्रवाल ने कहा कि जब अमेरिका की ओर से रेसिप्रोकल टैरिफ हटा दिए जाएंगे, तो यह व्यापार समझौता भारतीय निर्यात के लिए लाभदायक होगा। अग्रवाल ने गुरुवार को संसदीय स्थायी समिति को बताया कि अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश बीटीए पर नियमित रूप से वर्चुअल वार्ता कर रहे हैं और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का पहला चरण तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही अमेरिका-भारत संबंधों को मजबूत करने के सकारात्मक संकेत दे चुके हैं, जिससे यह उम्मीद जगी है कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच जल्द ही एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह भारत पर लगाए गए "टैरिफ" को "कम" करने की योजना बना रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि व्यापार वार्ता में जल्द ही कोई सफलता मिल सकती है।

न्यूमरेशन फॉर्म वितरण में रिकॉर्ड— 99.43% कवर हुए, चुनाव आयोग का दावा

नई दिल्ली  देश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है। भारतीय चुनाव आयोग ने दैनिक बुलेटिन में बताया कि अब तक 37,77,15,220 न्यूमेरेशन फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं, जो कुल फॉर्म का 74.10 प्रतिशत है। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50,68,42,224 फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल पात्र मतदाताओं की संख्या का 99.43 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि लगभग हर मतदाता को एसआईआर के दूसरे चरण के तहत न्यूमरेशन फॉर्म मिल चुका है। यह अभियान 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक चल रहा है और अभी करीब एक सप्ताह शेष है यानी मतदाता अपने फॉर्म आसानी से जमा कर सकते हैं ताकि उनकी जानकारी सही तरीके से मतदाता सूची में अपडेट हो सके। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विवरण के अनुसार अंडमान-निकोबार में 99.99 प्रतिशत से अधिक वितरण के साथ लगभग 76.28 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ में 99.51 प्रतिशत फॉर्म वितरण के साथ 77.80 प्रतिशत फॉर्म को डिजिटाइज किया जा चुका है। गुजरात ने 99.80 प्रतिशत फॉर्म वितरण और 81.58 प्रतिशत डिजिटाइजेशन हासिल किया है। मध्य प्रदेश में डिजिटाइजेशन 86.47 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गोवा में 92.69 प्रतिशत, लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत और राजस्थान में प्रतिशत फर्म डिजिटाइज हो चुका है। देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 99.72 प्रतिशत फॉर्म वितरित हो चुके हैं, साथ ही 54.97 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल ने भी 87.91 प्रतिशत डिजिटाइजेशन के साथ अच्छा प्रदर्शन किया है। यह अभियान 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल) में समान रूप से आगे बढ़ रहा है। इस अभियान में 5,32,828 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और 11,40,598 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। आयोग ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से अधिक से अधिक बीएलए नियुक्त करने की अपील भी की है ताकि प्रक्रिया और पारदर्शी बने। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपने फॉर्म जमा कर दें ताकि आगामी मतदाता सूची में उनकी सभी जानकारियां सही-सही दर्ज हो सकें। विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण का यह चरण अब अपने निर्णायक दौर में है और आयोग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में डिजिटाइजेशन का आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।

ये सिर्फ कागज़ नहीं!– गवर्नर के फैसले पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, क्यों सुनाई खरी-खरी?

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के गवर्नर की इस बात के लिए आलोचना की कि वह सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सुधांशु धुलिया की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में देरी कर रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि राज्य में APJ अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर की नियुक्ति में देरी क्यों की जा रही है, जबकि जस्टिस धूलिया ने इस पर अपनी रिपोर्ट बहुत पहले जमा कर दी थी। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केरल के राज्यपाल से जस्टिस धूलिया कमेटी की सिफारिशों पर जल्द ही फैसला लेने की उम्मीद है।   दरअसल, शीर्ष अदालत ने अगस्त में, राज्य सरकार और चांसलर (गवर्नर) के बीच चल रहे गतिरोध को देखते हुए कुलपति नियुक्ति के लिए नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए जस्टिस धूलिया की अगुवाई में एक सर्च कमेटी बनाई थी। जस्टिस धूलिया ने अपनी रिपोर्ट पहले ही जमा कर दी है लेकिन उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चांसलर यानी गवर्नर को यह भी निर्देश दिया था कि वे मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार ही कुलपतियों की नियुक्ति करें। मामला क्या? कोर्ट का यह आदेश गवर्नर द्वारा टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के चांसलर के तौर पर दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन पर आया था, जिसमें केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य सरकार की सिफारिश के बिना यूनिवर्सिटी के टेम्पररी वाइस चांसलर की गवर्नर द्वारा नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद, केरल सरकार ने जस्टिस पारदीवाला की बेंच के सामने यह मामला उठाया। राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता ने बेंच को बताया कि जस्टिस धूलिया आयोग ने रिपोर्ट सौंप दी है, बावजूद इसके कुलाधिपाति यानी चांसलर (गवर्नर) ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। क्या चांसलर ने जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है? इस पर जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, "क्या चांसलर ने माननीय जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है?" जब गवर्नर के वकील ने 'नहीं' में जवाब दिया, तो जस्टिस पारदीवाला नाराज हो गए। उन्होंने पूछा, "उन्होंने अभी तक इसे क्यों नहीं देखा?" लाइव लॉ के मुताबिक, इसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने चांसलर के वकील से कहा कि वे निर्देश लेने के बाद बताएं कि फैसला कब तक लिया जा सकता है। जब वकील ने आगे दलीलें देनी चाहीं, तो जस्टिस पारदीवाला ने उन्हें रोक दिया और कहा, "यह सिर्फ एक साधारण कागज का टुकड़ा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज ने इसकी जांच की है। इसलिए आपको रिपोर्ट देखनी है और समय पर सही फैसला लेना है।" जस्टिस पारदीवाला ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आप जल्द फैसला लेंगे। जब फैसला हमारे सामने रखा जाएगा, तो हम तय करेंगे कि फैसला सही है या गलत।" इसके बाद उन्होंने मामले को अगले शुक्रवार के लिए टाल दिया।  

चक्रवात ‘दित्वा’ से जूझ रहे श्रीलंका की मदद को आगे आया भारत, राहत सामग्री भेजी, PM का बड़ा बयान

नई दिल्ली  चक्रवाती तूफान 'दित्वा' का कहर झेल रहे पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत तुरंत राहत सामग्री और ज़रूरी मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) मदद भेजी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे स्थिति बदलेगी, भारत और मदद देने के लिए तैयार है। उन्होंने शुक्रवार को 'चक्रवात दित्वा' से हुई भारी तबाही और कई लोगों की जान जाने के बाद श्रीलंका के लोगों के प्रति गहरी संवेदना जताई।   सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “चक्रवात दित्वा के कारण श्रीलंका के जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। मैं सभी प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, आराम और जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। अपने सबसे करीबी समुद्री पड़ोसी के साथ एकजुटता दिखाते हुए, भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत तुरंत राहत सामग्री और ज़रूरी HADR सपोर्ट भेजा है। जैसे-जैसे हालात बदलेंगे, हम और मदद देने के लिए तैयार हैं। भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी और विज़न MAHASAGAR के हिसाब से, भारत ज़रूरत के समय में श्रीलंका के साथ मज़बूती से खड़ा है।" बता दें कि श्रीलंका में इस तूफानी चक्रवात की वजह से हुई मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में आई बाढ़ और लैंडस्लाइड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है और 21 लोग अभी भी लापता हैं। श्रीलंका ने शुक्रवार को ज़रूरी सेवाओं में शामिल लोगों को छोड़कर बाकी सभी के लिए पब्लिक हॉलिडे की घोषणा की है।  

आरक्षण पर सुप्रीम मोड़: क्या महाराष्ट्र में विजेता उम्मीदवार भी हो जाएंगे बेदख़ल?

नई दिल्ली  ओबीसी आरक्षण विवाद में फंसे महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है और चुनाव का रास्ता सशर्त साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार (28 नवंबर) को महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को उन स्थानीय निकायों में 50% से ज़्यादा आरक्षण को नोटिफाई करने से रोक दिया है, जहाँ अभी चुनाव की अधिसूचना होनी बाकी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन नगर परिषदों और नगर पंचायतों में पहले से 50 फीसदी से अधिक आरक्षण अधिसूचित हो चुका है, वहां चुनाव तो तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे, लेकिन उनके नतीजे रिट याचिकाओं के अंतिम फैसले से प्रभावित होंगे। CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने महाराष्ट्र लोकल बॉडीज में OBC रिजर्वेशन को चुनौती देने वाली रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है। यानी इन सीटों पर हो सकता है कि कुछ उम्मीदवारों को जीतकर भी हारना पड़ सकता है या उन्हें जीत का स्वाद चखने से वंचित रहना पड़ सकता है क्योंकि जिन सीटों पर आरक्षण रद्द होगा, वहां जीते उम्मीदवार को विजेता होने के सुख से वंचित होना पड़ सकता है। 2 दिसंबर को मतदान होने हैं राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह ने बेंच को बताया कि 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायत हैं, जहां चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और वहां 2 दिसंबर को मतदान होने हैं। इनमें से 40 नगर परिषद और 17 नगर पंचायत ऐसी हैं, जहां आरक्षण 50% से ज़्यादा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने पीठ को बताया कि राज्य में 29 नगर परिषदों, 32 ज़िला पंचायतों और 346 पंचायत समितियों के चुनाव अभी भी नोटिफाई होने बाकी हैं। रिट पिटीशन के नतीजे से प्रभावित होंगे चुनाव परिणाम इसके बाद CJI सूर्यकांत ने इस मामले को तीन जजों की बेंच को भेज दिया और 21 जनवरी को सुनवाई की तारीख तय करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि जहां भी चुनाव अधिसूचित हो चुके हैं, वहां तय समय पर चुनाव कराए जाएं। बेंच ने आदेश दिया, "इस बीच, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव नोटिफाइड शेड्यूल के हिसाब से बिना देरी के हो सकते हैं। हालांकि, जिन नगर परिषदों, नगर पंचायतों और में आरक्षण 50% से ज़्यादा है, उनके नतीजे रिट पिटीशन के नतीजे पर निर्भर करेंगे।" समाज को जाति की रेखाओं में नहीं बांटना चाहिए सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि राज्य में केवल दो महानगरपालिकाएं ऐसी हैं, जहां आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर जाने की संभावना है। इस पर अदालत ने कहा कि इनके चुनाव भी अधिसूचित किए जा सकते हैं, लेकिन इनके परिणाम भी रिट याचिकाओं के नतीजों से प्रभावित होंगे। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि हम जो भी करें, समाज को जाति की रेखाओं में नहीं बांटना चाहिए। स्थानीय निकाय चुनाव दिसंबर 2021 से अटके हुए बता दें कि महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण की वजह से स्थानीय निकाय चुनाव दिसंबर 2021 से अटके हुए हैं। दिसंबर 2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि इसे 'ट्रिपल-टेस्ट' को पूरा करने के बाद ही लागू किया जा सकता है। बाद में, राज्य सरकार ने लोकल बॉडी चुनावों में OBC रिज़र्वेशन के मुद्दे की जांच के लिए मार्च 2022 में जयंत कुमार बंठिया कमीशन का गठन किया था। बंठिया आयोग ने जुलाई 2022 में अपनी रिपोर्ट दी थी। मई 2025 में, कोर्ट ने बंठिया कमीशन की रिपोर्ट से पहले के कानून के हिसाब से OBC रिज़र्वेशन देकर चार महीने के अंदर चुनाव कराने का निर्देश दिया था। पिछले हफ़्ते, कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों ने इस आदेश का गलत मतलब निकाला है कि रिज़र्वेशन 50% से ज़्यादा हो सकता है। यह साफ़ करते हुए कि बंठिया से पहले की स्थिति के हिसाब से चुनाव कराने का निर्देश 50% की लिमिट पार करने की इजाज़त नहीं है, बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि रिज़र्वेशन तय लिमिट यानी 50 फीसदी की सीमा के अंदर ही होना चाहिए।  

BMC की बड़ी कार्रवाई! प्रदूषण फैलाने वाली 53 निर्माण साइटों को नोटिस जारी

मुंबई  बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने कहा है कि उसने मुंबई में बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मद्देनजर 53 निर्माण स्थलों पर काम रोकने के नोटिस जारी किए हैं। बीएमसी ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि पहले से जारी किए गए वायु प्रदूषण संबंधी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। इन निर्देशों में लगातार काम करने वाले एक्यूआई निगरानी सेंसर लगाना शामिल है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) अश्विनी जोशी ने चेतावनी दी कि यदि एक्यूआई सेंसर चालू नहीं पाए गए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले, बृहस्पतिवार को बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिकारी महानगर में वायु प्रदूषण के लिए इथोपिया में ज्वालामुखी फटने से उठी राख को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते और एक्यूआई उससे बहुत पहले से ही खराब रहा है। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने दिल्ली की स्थिति का जिक्र करते हुए पूछा कि इस समस्या से निपटने के लिए क्या प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं। पीठ ने सवाल किया, ‘‘सबसे प्रभावी उपाय क्या हो सकते हैं? हम सब देख रहे हैं कि दिल्ली में क्या हो रहा है? इसका क्या असर होगा?'' अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी को पत्र लिखकर उनसे तत्काल और असाधारण कार्रवाई करने का आग्रह किया, जिसमें वायु गुणवत्ता में सुधार होने तक सभी खुदाई और निर्माण स्थलों पर अस्थायी रोक लगाना भी शामिल है। देवड़ा ने कहा, ‘‘मुंबई का वायु प्रदूषण संकट अब कोई मौसमी मुद्दा नहीं रह गया है- यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। भारत को वायु प्रदूषण के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी युद्ध और राष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता है।'' शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई का एक्यूआई हर दिन खराब होता जा रहा है और शहर इस मामले में दिल्ली से प्रतिस्पर्धा कर रहा है लेकिन सभी सरकारें लोगों की दुर्दशा को नजरअंदाज कर रही हैं। वहीं, बीएमसी ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें ‘बेकरी' और श्मशान में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को अनिवार्य करना, इलेक्ट्रिक बसें शुरू करना, निर्माण मलबे का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करना और सड़कों पर धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव करने वाली मशीनों का उपयोग शामिल है। बीएमसी ने बताया कि 26 नवंबर तक 53 निर्माण स्थलों को प्रदूषण फैलाने के लिए काम रोकने के नोटिस जारी किए गए हैं। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त जोशी ने बृहस्पतिवार को निर्माण स्थलों पर सेंसर-आधारित एक्यूआई निगरानी प्रणाली की स्थिति की समीक्षा भी की।   

प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा में दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा का किया अनावरण

कनकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा के पर्तगाली (कनकोण) स्थित श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान श्रीराम की 77 फीट ऊंची विश्व की सबसे बड़ी राम प्रतिमा का अनावरण किया. यह भव्य प्रतिमा मशहूर मूर्तिकार राम सुतार ने बनाई है, जिन्होंने 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' भी डिजाइन किया था. यह कांस्य प्रतिमा 77 फीट ऊंची है, जो इसे भगवान राम की अब तक की सबसे ऊंची स्थापित प्रतिमा बनाती है. अनावरण के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ अपनी स्थापना की 550वीं वर्षगाठ मना रहा है. बीते 550 वर्षों में इस संस्था ने समय के कितने ही चक्रवात झेले हैं. युग बदला, दौर बदला, देश और समाज में कई परिवर्तन हुए लेकिन बदलते युगों और चुनौतियों के बीच इस मठ ने अपनी दिशा नहीं खोई, बल्कि मठ लोगों को दिशा देने वाला केंद्र बनकर उभरा और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है.' इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह के दौरान मठ परिसर में स्थित मंदिर के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. यह मठ भारत के सबसे पुराने मठवासी संस्थानों में से एक है, जो अपने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान के लिए जाना जाता है और सारस्वत समुदाय में एक प्रमुख स्थान रखता है. मठ का जीर्णोदार श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ, गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समुदाय का पहला वैष्णव मठ माना जाता है. यह मठ 13वीं शताब्दी में जगद्गुरु माधवाचार्य द्वारा स्थापित द्वैत वेदांत परंपरा का अनुयायी है. इसका मुख्यालय दक्षिण गोवा के पर्तगाली कस्बे में, शांत कुशावती नदी के किनारे स्थित है, जहां यह सदियों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है. गोवा लोक निर्माण विभाग मंत्री दिगंबर कामत ने बताया कि सदियों से आध्यात्मिक केंद्र के रूप में कार्यरत मठ परिसर का पूरी तरह से जीर्णोद्धार किया गया है और इसे आधुनिक रूप दिया गया है. समारोह में गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे.

हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027: चार अमृत स्नान सहित तीन महीने तक धार्मिक उत्सव

 हरिद्वार   उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 2027 के अर्द्धकुंभ मेले के लिए शुक्रवार को तीन शाही स्नान सहित 10 स्नान तिथियां घोषित की।जनवरी से अप्रैल तक आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक मेले में इस बार पहली बार साधु-संतों के साथ चार शाही अमृत स्नान कराए जाएंगे, जिसे संत परंपरा में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। कब होगा पहला शाही स्नान? पहला शाही स्नान छह मार्च को महाशिवरात्रि पर होगा, दूसरा आठ मार्च को सोमवती अमावस्या पर, तीसरा 14 अप्रैल को बैसाखी (मेष संक्रांति) और चौथा 20 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान) होगा। इसके अलावा, मकर संक्रांति पर भी एक महत्वपूर्ण स्नान होगा लेकिन इसे शाही स्नान की श्रेणी में नहीं रखा गया है। वहीं सरकार पहले से ही इसकी तैयारी कर रही है. आइए जानते हैं अर्धकुंभ मेले के शुरू होने की तारीखों से लेकर शाही स्नान कब कब और कितने हैं… पुष्कर सिंह धामी के साथ दमकोठी में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को मुलाकात की. इसमें 2027 में अर्धकुंभ की शुरुआत से लेकर इसके इंतजामों को लेकर चर्चा की गई. बैठक के दौरान, भव्य धार्मिक मेले की तिथियों की घोषणा की गई. बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज भी उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि अखाड़ों का प्राथमिक कार्य कुंभ मेले का आयोजन करना है और पूरा देश हरिद्वार में होने वाले इस भव्य आयोजन की प्रतीक्षा कर रहा है. कुंभ की तारीखों की घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कुंभ के आयोजन में संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है. सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और मेले की व्यवस्थाओं को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा.उन्होंने कहा कि कुंभ मेला भव्य होगा और प्रशासनिक तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं.  मुख्यमंत्री धामी ने पुष्टि की कि मेला 13 जनवरी 2027 मकर संक्रांति से अर्ध कुंभ मेले की शुरुआत होगी.  पहली बार चार अमृत स्नान मुख्यमंत्री के साथ बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार में 2027 के अर्धकुंभ मेले के लिए 10 प्रमुख स्नान समारोहों की तारीखों की घोषणा की है. जनवरी से अप्रैल तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान पहली बार चार अमृत स्नान निर्धारित किए गए हैं. इस ऐतिहासिक निर्णय को सदियों पुरानी परंपराओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. प्रमुख स्नान तिथियां -14 जनवरी, 2027 ( मकर संक्रांति ) – 6 फरवरी 2027 ( मौनी अमावस्या ) – 11 फरवरी 2027 ( बसंत पंचमी ) – 20 फरवरी 2027 ( माघ पूर्णिमा ) चार अमृत स्नान – 6 मार्च, 2027 – महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान ) – 8 मार्च, 2027 – सोमवती /फाल्गुन अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान ) – 14 अप्रैल, 2027 – मेष संक्रांति/वैसाखी (तीसरा अमृत स्नान ) – 20 अप्रैल, 2027 – चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान )

कर्नाटक के उडुपी में पीएम मोदी का आगमन, शामिल होंगे कृष्ण मठ के भक्तिमय आयोजन में

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी ने आज कर्नाटक के उडुपी पहुंचे हैं। वे यहां पर श्री कृष्ण मठ के दौरा करेंगे। वह यहाँ के 'लक्ष कंठ गीता पारायण' कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम भक्ति और आस्था का एक अद्भुत संगम है, जिसमें 1 लाख से अधिक लोग हिस्सा बनेंगे। इन लोगों में छात्र, साधु, विद्वान और आम नागरिक शामिल थे, जिन्होंने एक साथ मिलकर श्रीमद् भगवद गीता का पाठ किया। गोवा में 77 फीट ऊंची राम प्रतिमा का करेंगे अनावरण उडुपी के कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी गोवा पहुँचेंगे। यहाँ वह श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ के 550वें साल के जश्न 'सारधा पंचाष्टमोत्सव' में शामिल होंगे। गोवा में पीएम मोदी ने भगवान श्री राम की कांसे से बनी 77 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने रामायण थीम पार्क गार्डन का भी उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम ने वहाँ मौजूद लोगों को संबोधित  करेंगे और एक खास पोस्टल स्टैम्प और एक यादगार सिक्का भी जारी करेंगे।