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टेरिटोरियल आर्मी में 93 साल बाद पहली महिला लेफ्टिनेंट बनीं साई जाधव, पिता हैं मेजर

नई दिल्ली   इस साल देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में एक नया और गौरवशाली अध्याय लिखा गया. अपने 93 साल के लंबे इतिहास में पहली बार इस प्रतिष्ठित संस्थान से किसी महिला अधिकारी कैडेट ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया है. यह सम्मान महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली साई जाधव को मिला है. उन्होंने प्रादेशिक सेना (Territorial Army) के विशेष कोर्स के तहत सख्त ट्रेनिंग पूरी की और अब वह लेफ्टिनेंट बन चुकी हैं. साई जाधव की उपलब्धि भारतीय सेना में Gender Inclusion और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है. साई जाधव का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा और SSB इंटरव्यू पास करने के बाद हुआ था. उन्होंने IMA में 6 महीने का गहन और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया. यह ट्रेनिंग न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत डिमांडिंग थी. उनकी सफलता उस अटूट दृढ़ संकल्प, अनुशासन और साहस का प्रमाण है, जो उन्होंने बाधाओं को पार करने के लिए दिखाया. उनकी यह उपलब्धि देश की उन हजारों युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं. 93 साल के इतिहास में पहला कदम भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) वर्षों से देश को उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी दे रही है. इस अकादमी के लिए यह पासिंग आउट परेड (POP) ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं थी. IMA से ट्रेनिंग पूरी करके पहली महिला अधिकारी कैडेट बनकर लेफ्टिनेंट साई जाधव ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है. उन्होंने प्रादेशिक सेना (Territorial Army) के लिए निर्धारित 6 महीने का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया और लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया. ट्रेनिंग और कमीशनिंग की खास बातें साई जाधव ने IMA के रेगुलर कोर्स में नहीं, बल्कि प्रादेशिक सेना के विशेष प्रशिक्षण कोर्स के तहत ट्रेनिंग पूरी की. वह इस कोर्स में शामिल 16 ऑफिसर कैडेट्स में अकेली महिला थीं. साई ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण शारीरिक और मानसिक, दोनों रूप से बहुत चैलेंजिंग था. लेकिन इसने उनके नेतृत्व कौशल, सहनशक्ति और भारतीय सेना के प्रति कर्तव्य की गहरी भावना को मजबूत किया. पासिंग आउट सेरेमनी में उनके माता-पिता ने उनके कंधे पर लेफ्टिनेंट के स्टार लगाए. सेना में थे दादा और पिता साई जाधव की उपलब्धि उनके परिवार के मजबूत सैन्य इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है. साई जाधव के पिता संदीप जाधव भारतीय सेना में मेजर हैं. उनके दादा ने ब्रिटिश सेना में देश की सेवा की थी. परिवार की यह समृद्ध सैन्य परंपरा ही साई के सशस्त्र बलों में करियर बनाने के फैसले को प्रभावित करने का मुख्य कारण बनी. लेफ्टिनेंट साई जाधव की सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं के लिए समान अवसरों का रास्ता भी खोलती है. इस कार्यक्रम के दौरान घोषणा की गई कि जून 2026 से महिला अधिकारी कैडेट्स नियमित रूप से पुरुष कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर IMA में ट्रेनिंग लेंगी और पासिंग आउट परेड में भी हिस्सा लेंगी.  

CJI सूर्यकांत की दिल्ली की जहरीली हवा पर टिप्पणी: ‘अमीर प्रदूषण फैलाते हैं, गरीब झेलते हैं

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ते वायु प्रदूषण के स्तर से संबंधित याचिका पर 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पामचोली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह की दलीलों पर ध्यान दिया, जो एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के रूप में उनकी सहायता कर रही हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट के अपराजिता सिंह ने कहा कि जब तक अदालतें स्पष्ट निर्देश नहीं देतीं, तब तक राज्य सरकारें प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं करतीं.  उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रोटोकॉल मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है. दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के संकट पर अदालत का ध्यान दिलाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर–जनवरी के दौरान खेल गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था, इसके बावजूद विभिन्न जगहों पर खेल आयोजन कराए जा रहे हैं. अदालत के आदेशों को दरकिनार करने के लिए राज्य सरकारों की तरफ से 'तरीके और साधन' अपनाए जा रहे हैं. कुछ निर्देशों को जबरन लागू करना पड़ता है: CJI उन्होंने यह भी कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दे रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है. इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस समस्या से पूरी तरह अवगत है और केवल ऐसे आदेश पारित किए जाएंगे, जो प्रभावी हों और जिनका अनुपालन कराया जा सके. CJI ने कहा कि कुछ निर्देश ऐसे होते हैं, जिन्हें जबरन लागू करना पड़ता है, लेकिन महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है, जिसे बदलना आसान नहीं है. दिल्ली पॉल्यूशन  पर 17 दिसंबर को SC में सुनवाई मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ती है, जबकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों में अक्सर संपन्न वर्ग की भूमिका होती है. एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि गरीब मजदूर इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे पर एक अलग आवेदन दायर किया गया है. इस पर CJI ने दो टूक कहा, 'हम समस्या को जानते हैं. दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण से जुड़ा यह मामला 17 दिसंबर को पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, जहां इस पर विस्तार से विचार किया जाएगा.'

शाम ढलते ही दरिंदगी, महिलाओं पर हमले करने वाला आरोपी बेंगलुरु से दबोचा गया

बेंगलुरु  बेंगलुरु पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। खबर है कि शहर में महिलाओं को निशाना बनाने वाले दरिंदे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। युवक की पहचान विनोद के रूप में हुई है, जो शाम के समय महिलाओं को हवस का शिकार बनाता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की हरकतों में शामिल। इससे पहले भी बेंगलुरु में खुलेआम छेड़छाड़ की खबर सामने आ चुकी है।   मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विनोद महिलाओं पर नजर रखता था और शाम को 6 बजे के बाद उनपर हमला करता था। वह खासतौर पर उन महिलाओं को निशाना बनाता था, जो अकेली चल रही होती थीं या दो पहिया वाहन पर होती थीं। पुलिस का कहना है कि आरोपी गड्ढों के पास महिला की गाड़ी धीमी होने का इंतजार करता और अचानक उनपर हमला कर देता था। रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि आरोपी महिलाओं की तरफ भागता, उन्हें जबरदस्ती पकड़ता था और अश्लील हरकतें करता था। पुलिस ने कहा कि आरोपी एक महीने से ज्यादा समय से इन हरकतों में शामिल था और उसके खिलाफ इससे पहले किसी भी महिला की तरफ से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2 दिसंबर को एक महिला ने सुंकड़कट्टे में श्रीनिवास सर्कल पर हमले की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला के पीछे कार में आ रहे पति ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह भागने में सफल रहा था। इसके बाद उन्होंने 112 से संपर्क साधा और होयसाला पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल, आरोपी हिरासत में है और पुलिस जांच कर रही है। हालांकि, इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। जुलाई में बेंगलुरु के गोविंदपुरा इलाके में एक युवक को सार्वजनिक स्थान पर महिला के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी ने महिला के तंग किया और होंठ पर काट लिया था। हालांकि, बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।  

यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: NATO में शामिल होने से इनकार, जेलेंस्की की दो अहम डिमांड सामने आईं

मॉस्को बीते तीन सालों से रूस से चले आ रहे संघर्ष के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की फिलहाल समझौते के मूड में नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि वह नाटो में शामिल होने की अपनी मांग को वापस लेने के लिए तैयार हैं। इसी को लेकर रूस हमलावर रहा है कि आखिर यूक्रेन नाटो में क्यों शामिल होना चाहता है और यदि वह अमेरिका के नेतृत्व वाले इस सैन्य संगठन का हिस्सा बनता है तो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होगा। इस बीच यूक्रेनी नेता ने यदि नाटो में जाने की डिमांड को ही वापस लेने की बात कर दी है तो फिर उनके झुकाव का संकेत है, लेकिन उन्होंने दो मांगें भी रख दी हैं। वोलोदिमीर जेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर से कहा है कि वह दो बातें कहना चाहते हैं। पहली बात यह कि वह रूस की ओर से कब्जाए गए इलाकों पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा वह चाहते हैं कि अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी दी जाए। दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों शांति प्रस्ताव को लेकर यह शर्त भी रखी थी कि रूस की ओर से कब्जाए इलाकों का उसी में विलय हो जाए और यूक्रेन की ओर से उस पर सहमति जताते हुए युद्ध को समाप्त कर दिया जाए। अब वोलोदिमीर जेलेंस्की ने नाटो वाली शर्त को तो स्वीकार कर लिया है, लेकिन यूक्रेन के इलाके रूस को सौंपने को लेकर वह सहमत नहीं हैं। इस वार्ता के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी उनके साथ बैठे थे। पत्रकारों से बातचीत में जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की ओर से नाटो में शामिल होने की कोशिश से इनकार कर दिया है। लेकिन हम चाहते हैं कि नाटो और उसके सहयोगी देशों की ओर से हमें सुरक्षा को लेकर भरोसा दिया जाए। इस भरोसे से हमें मदद मिलेगी कि रूस हम पर दोबारा इस तरह का हमला ना करे। उन्होंने कहा कि ऐसा करना भी हमारी तरफ से एक समझौता ही है।  

सिडनी हमलावरों का पाकिस्तान कनेक्शन सामने, बाप-बेटे ने किया 15 लोगों का हत्याकांड

सिडनी  ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर एक यहूदी त्योहार की तैयारी के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाईं गईं। इस हमले में कम से कम 15 लोगों की जान गई है। मामले में जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद बताया कि लोगों पर गोलियां बरसाने वाले दो बंदूकधारी पिता-पुत्र थे। बता दें कि सख्त बंदूक नियंत्रण कानूनों वाले देश ऑस्ट्रेलिया में लगभग तीन दशकों में यह सबसे घातक गोलीबारी की घटना थी। वहीं, हमलावर की मां ने कहा कि मेरा बेटा ऐसा कर ही नहीं सकता है।  उस समय मीडिया से बात करते हुए नवीन अकरम की मां ने कहा था कि उसका बेटा बेरोजगार है और रविवार सुबह वो अपने पिता के सा जर्विस बे गया था। पुलिस कमिश्नर लैन्योन ने भी इस हमले को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि आतंकी साजिद के पास दस सालों से लाइसेंसी बंदूक थी। वहीं इन्हीं आतंकियों की एक गाड़ी में आईडी और ISIS का झंडा भी मिला है। लैन्योन के मुताबिक अभी तक इस आतंकी हमले के पीछे कारण सामने नहीं आया है, आगे की जांच उसी पहलू पर आगे बढ़ने वाली है। वीकेंड पर मछली मारने जा रहा हूं आतंकी हमले में शामिल आंतकी साजिद अकरम और नवीद अकरम ने अपने घर में कहा था कि वे दक्षिणी समुद्री तट पर मछली मारने के लिए जा रहे हैं. इसके बाद उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया.  आतंकी नवीद के बैकग्राउंड का पता चलते ही पुलिस ने सिडनी के पश्चिम में बोनीरिग में पुलिस ने उसके घर को घेर लिया, इस दौरान मीडिया से बात करते हुए नवीद की मां वेरेना (Verena) ने बताया कि उसका बेटा,  जो एक बेरोजगार राजमिस्त्री था, उसने रविवार सुबह परिवार से आखिरी बार बात की थी.  उसने बताया कि वह वीकेंड पर अपने पिता के साथ जर्विस बे गया था.  साजिद के पास 6 लाइसेंसी हथियार बरामद लैन्योन ने बताया कि जांचकर्ताओं ने घटनास्थल से संदिग्ध के छह लाइसेंसी हथियार बरामद किए हैं. उन्होंने आगे कहा कि साजिद के पास करीब दस साल से बंदूक का लाइसेंस था. पुलिस ने बताया कि संदिग्धों में से एक की गाड़ी में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) और ISIS का झंडा भी मिला है.  पुलिस का कहना है कि पिछले रात बॉन्डी बीच पर हुए जानलेवा हमले के बाद पुलिस द्वारा मारे गए 50 वर्षीय शूटर के पास मनोरंजन के लिए शिकार करने का गन लाइसेंस था. NSW पुलिस कमिश्नर मैल लैन्योन ने कहा कि साजिद अकरम एक गन क्लब का सदस्य था, और राज्य के कानून के तहत उसे फायर आर्म्स लाइसेंस रखने का अधिकार था. लैन्योन ने कहा, "हम इस हमले के पीछे के मकसद की जांच करेंगे और मुझे लगता है कि यह जांच का एक अहम हिस्सा है." रविवार को सिडनी के बॉन्डी बीच पर 1,000 से ज़्यादा लोग जमा हुए थे. प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि बंदूकधारी "हनुक्का के पहले दिन जानबूझकर यहूदी समुदाय को निशाना बना रहे थे." राजमिस्त्री का काम करता था नाविद, दो महीने पहले गई थी नौकरी ऑस्ट्रेलिया के अखबार सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने आतंकी नवीद की मां वेरेना से बात की है. उन्होंने कहा, "उसने रविवार को मुझे फोन किया और कहा, मां मैं अभी तैरने गया था, मैंने स्कूबा डाइविंग भी की, हम अभी खाना खाने जा रहे हैं, और फिर आज सुबह हम घर पर ही रहेंगे क्योंकि बहुत गर्मी है." वेरेना ने कहा कि उसके बेटे के पास कोई हथियार नहीं है. और वो न तो बाहर जाता है, न ही दोस्तों से मिलता है. वह न तो शराब पीता है और न ही सिगरेट. वेरेना के अनुसार उसका बेटा ऐसी-वैसी जगहों पर भी नहीं जाता है. उसे बस अपने काम से मतलब है.  अकरम को करीब दो महीने पहले ईंट लगाने की नौकरी से निकाल दिया गया था, क्योंकि जिस कंपनी में वह काम करता था, वह दिवालिया हो गई थी.  सोशल नहीं था नवीद वेरेना ने बताया कि कैब्रामेटा हाई स्कूल में हाई स्कूल के दिनों में उसके कई दोस्त थे, लेकिन वह ज़्यादा सोशल नहीं था. अकरम को 2022 की एक सोशल मीडिया पोस्ट में टैग किया गया था, जिसमें दिखाया गया था कि उसने अल-मुराद इंस्टीट्यूट में कुरान की पढ़ाई पूरी कर ली है. यह इंस्टीट्यूट हेकेनबर्ग पश्चिमी सिडनी में अरबी और कुरान की पढ़ाई कराता है. इस पोस्ट को अब डिलीट कर दिया गया है.  इस हमले में मरने वालों की उम्र 10 साल से 87 साल के बीच है. NSW के स्वास्थ्य मंत्री रयान पार्क ने पुष्टि की कि सबसे कम उम्र के बच्चे की मृत्यु सिडनी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में हुई. आतंकी अकरम की मां हाउसवाइफ हैं. अकरम अपने आतंकी बाप, 22 साल की छोटी बहन और 20 साल के भाई के साथ रहता था. यह तीन बेडरूम वाली प्रॉपर्टी 2024 में खरीदी गई थी. ये परिवार पहले कैब्रामेटा में रहता था. इस आतंकी हमले में का एक हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि आतंकी साजिद के पास उस ऑस्ट्रेलिया में रेजिस्टर्ड गन थी जहां हथियारों को लेकर सबसे सख्त नियम है। पूरी चेकिंग और सभी दस्तावेज देखने को मिला किसी शख्स को ऑस्ट्रेलिया में बंदूक मिलती है। लेकिन यहां पर साजिद लंबे समय से एक गन क्लब के साथ जुड़ा हुआ था, उसी वजह से उसके पास लाइसेंसी बंदूक मौजूद थी। अभी के लिए इस आतंकी हमले के बाद पहली प्राथमिकता घायलों को बचाना है, ऐसे में Australian Red Cross Lifeblood की वेबसाइट ने लोगों से बड़ी तादाद में ब्लड डोनेट करने की अपील की है। सबसे ज्यादा ओ नेगिटेव ब्लड की जरूरत पड़ रही है। अब ऑस्ट्रेलिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं तो वहीं पूरी दुनिया भी इस हमले के बाद एकजुट दिखाई दे रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को लेकर नाराजगी जताई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को लेकर कहा है कि उन्होंने लगभग 4 महीने पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार की नीति ऐसी है कि वह यहूदी विरोध की भावना को बढ़ावा दे रही है। नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने … Read more

कर्नाटक के मंगलुरु से आरोपी गिरफ्तार, विदेश में हिंदू धर्म पर अपमानजनक पोस्ट डालने का था आरोप

 मंगलुरु विदेश में रहकर हिंदू धर्म के बारे में अपमानजनक और भड़काऊ कंटेंट पोस्ट करने के आरोप में एक आदमी को भारत आने पर गिरफ्तार किया गया. पूरा मामला मंगलुरु का है. एक एजेंसी के मुताबिक आरोपी अब्दुल खादर नेहाद (27) मंगलुरु के उलाईबेट्टू का रहने वाला है और सऊदी अरब में काम करता था. पुलिस के मुताबिक इंस्टाग्राम अकाउंट 'team_sdpi_2025' पर हिंदू धर्म से जुड़ा एक कथित अपमानजनक और भड़काऊ पोस्ट अपलोड होने के बाद 11 अक्टूबर को बाजपे पुलिस स्टेशन में खुद से केस दर्ज किया गया था. एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान टेक्निकल एनालिसिस से पता चला कि पोस्ट नेहाद ने अपलोड किया था, जो उस समय सऊदी अरब में रह रहा था. इसके आधार पर उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था. 14 दिसंबर को नेहाद विदेश से केरल के कालीकट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा. जहां पहुंचते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. पुलिस ने बताया कि आगे की जांच चल रही है और कार्रवाई की जा रही है.

चार पीढ़ियों की शहादत और सेवा की कहानी, अब सरताज सिंह ने थामा लेफ्टिनेंट का पद

नई दिल्ली  सेना में अफसर बनना हर युवा का सपना होता है। हालांकि यह सपना पूरा करने के लिए कठिन एसएसबी इंटरव्यू से गुजरना पड़ता है। शिवशनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकैडमी (IMA) की पासिंग आउट परेड थी। इसमें 525 नए अधिकारियों को कमीशन कर दिया गया है। इसमें एक ऐसे सिख कैडेट भी शामिल हैं जिनके परिवार में चार पीढ़ियों से सैन्य अधिकारी की वर्दी बनी ही रही है।   लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पूर्वज 1897 से ही सेना में रहे हैं। शनिवार को वह 20 जाट रेजिमेंट में कमीशन हो गए हैं। वहीं उनके पिता ब्रिगेडियर उपिंदर पाल सिंह भी इसी रेजिमेंट में अधिकारी थे। आईएमए से मिली जानकारी के मुताबिक उनके ही पूर्वज सिपाई किरपाल सिंह 1897 में 36 सिख रेजमेंट का हिस्सा थे और वह अफगान अभियान में शामिल हुए थे। इसके बाद लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पर दादा सुबेदार अजमेर सिंह सेना का हिस्सा थे। उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध में ब्रिटेन की तरफ से युद्ध लड़ा और उन्हें ब्रिटिश इंडिया गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनके दादा ब्रिगेडियर हरवंत सिंह ने 1965 और 1971 के भारत-पाकि्तान युद्ध में हिस्सा लिया। इसके अलावा उनके चाचा कर्नल हरविंदर पाल सिंह भी 1999 में कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं। मामा के परिवार में भी सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट सरताज सिंह के पिता की तरफ ही नहीं बल्कि ननिहाल में भी कई सैन्य अधिकारी रह चुके हैं। इनमें कैप्टन हरभगत सिंह, कैप्टन गुरमेल सिंह, कर्नटल गुरसेवक सिंह और कर्नल इंदरजीत सिंह के नाम हैं। पहला विश्वयुद्ध हो या फिर दूसरा, उनके ननिहाल से कोई ना कोई इसमें शामिल जरूर हुआ। वहीं 1071 की लड़ाई में भी लेफ्टिनेंट के ननिहाल से सैन्य अधिकारी शामिल हुए थे। आईएमए से पासआउट लेफ्टिनेंट हरमनप्रीत सिंह रीन का भी परिवार भारतीय सेना की सेवा करता रहा है। उनके पर दादा ने सिख रेजिमेंट जॉइ किया था। इसके बाद उनके दादा और दो भाइयों ने 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में हिस्ला लिया। इनमें से कैप्टन उजागर सिंह को सेना मेडल मिला था। हरमनप्रीत के पिता हरमीत सिंह मराठा लाइट इन्फ्रैंट्री में कार्यरत हैं।  

पिनाका की 300 किमी रेंज: इस्लामाबाद से कराची तक सीधा निशाना

 नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर – यह नाम भारत की सैन्य इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा. 7 मई की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी कैंपों पर 24 सटीक हमले किए. इसमें स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) ने 120 किमी दूर सप्लाई लाइन, बंकर और स्टेजिंग एरिया को मिनटों में नेस्तनाबूद कर दिया. DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत के मुताबिक यह हमला 'डिटरेंस बाय पनिशमेंट' का बेहतरीन उदाहरण था – पाकिस्तान को सजा देकर अगली बार सोचने पर मजबूर किया. अब कल्पना कीजिए, जब 300 किमी रेंज वाला नया पिनाका-Mk4 साल 2030 तक सेना में शामिल हो जाएगा, तो दुश्मन का क्या हाल होगा? पिनाका का 'फर्स्ट स्ट्राइक' जिसने पाकिस्तान को कंपा दिया  ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से हुई, जिसमें 26 निर्दोष मारे गए. भारत ने पाकिस्तान को दोषी ठहराया, लेकिन पाकिस्तान ने इनकार किया. 7-8 मई की आधी रात को भारत ने 9 आतंकी ठिकानों पर हमला बोला – 5 पाक-अधिकृत कश्मीर में, 4 पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में.  पिनाका की भूमिका: Mk-3 वेरिएंट (120 किमी रेंज) ने ब्रह्मोस मिसाइल, राफेल जेट्स (SPICE-2000 और HAMMER बमों से लैस) और स्मर्च के साथ मिलकर 24 स्ट्राइक्स किए. एक बैटरी (6 लॉन्चर) ने 44 सेकंड में 72 रॉकेट दागे, जो 1,000 x 800 मीटर इलाके को तबाह करने में सक्षम हैं. सैटेलाइट इमेज से साबित हुआ – मुरिदके, सियालकोट और जैकोबाबाद के कैंप ध्वस्त हो गए. 100+ आतंकी मारे गए, जिनमें IC-814 अपहरण और पुलवामा ब्लास्ट के आरोपी शामिल थे. पाकिस्तान का जवाब और भारत की ढाल: पाक ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी हमला किया (श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट पर). लेकिन भारत का S-400, इंटीग्रेटेड काउंटर-ड्रोन ग्रिड और पिनाका ने सब नाकाम कर दिया. आर्मी ने वीडियो जारी कर कहा कि हमारी सेना आग की अटल दीवार है. कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ बल्कि इंडस वॉटर ट्रीटी को भारत ने सस्पेंड कर दिया. यह ऑपरेशन उरी स्ट्राइक (2016) और बालाकोट (2019) से आगे का कदम था – गहराई, सटीकता और जोखिम में वृद्धि हुई. रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) के अनुसार, इससे भारत की 'कैलिब्रेटेड फोर्स' स्ट्रैटेजी मजबूत हुई. पिनाका का सफर: 38 किमी से 300 किमी तक की उड़ान पिनाका (भगवान शिव के धनुष का नाम) DRDO ने 1986 में विकसित किया, रूसी ग्रैड-स्मर्च को रिप्लेस करने के लिए. कारगिल युद्ध (1999) में पहली बार इस्तेमाल हुआ. पाकिस्तानी बंकर उड़ाए. आज 4 रेजिमेंट (72+ लॉन्चर) तैनात, 2030 तक 22 रेजिमेंट होंगी.  क्यों Mk4 दुश्मन के लिए 'गेम-चेंजर' बनेगा? पिनाका रॉकेट सॉलिड फ्यूल पर चलता है, जो बैलिस्टिक मिसाइल जैसी तेजी देता है. Mk4 में…     क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी: ऊंची परबोला उड़ान (100+ किमी ऊंचाई), फिर तेज नीचे की ओर. दुश्मन के एयर डिफेंस (जैसे पाक का HQ-9) को चकमा दे सकता है.      एवेसिव मैन्यूवर्स: थ्रॉटेबल प्रोपल्शन से बीच में दिशा बदलाव. रडार से बचाव, 70% हिट रेट बढ़ाता है.     ट्रिपल गाइडेंस: GPS (सैटेलाइट), INS (इनर्शियल नेविगेशन – कंपास+एक्सेलरोमीटर), एक्टिव रडार (टर्मिनल फेज में लक्ष्य लॉक). GPS जाम होने पर भी CEP 2 मीटर – सटीकता ऐसी कि एक रॉकेट ब्रिज या रडार साइट उड़ा सकता है.     रैपिड फायर: 20 सेकंड में 12 रॉकेट – एक रेजिमेंट (18 लॉन्चर) 216 रॉकेट दागकर 300 किमी दूर पूरे एयरबेस को तबाह कर देगी. पेलोड: क्लस्टर म्यूनिशन या लोइटरिंग ड्रोन भी लॉन्च कर सकते हैं.      लागत-लाभ: एक Mk4 रॉकेट 4-5 करोड़ में, जबकि ब्रह्मोस मिसाइल 15-20 करोड़. 25% कीमत में 4 गुना तबाही.  वैज्ञानिक रूप से, यह आर्टिलरी और टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल के बीच पुल है. RAND सिमुलेशन के अनुसार, Mk4 से भारत की डीप-स्ट्राइक क्षमता 3 गुना बढ़ेगी. Mk4 कहां-कहां तबाही मचाएगा?      चीन सीमा (लद्दाख-अरुणाचल): 300 किमी में तिब्बत के एयरफील्ड या मिसाइल साइट्स को निशाना बना सकता है. हाई-ऑल्टिट्यूड ऑपरेशन में बेहतरीन.      पाकिस्तान LOC: इस्लामाबाद या कराची के लॉजिस्टिक्स को सीधा नुकसान. सिंदूर जैसा हमला लेकिन 5 गुना गहरा.     कोस्टल डिफेंस: अंडमान से दुश्मन नौसेना को 300 किमी दूर डुबो सकेगा. एंटी-शिप वेरिएंट संभव.     ग्लोबल एक्सपोर्ट: फ्रांस सक्रिय बातचीत में – भारत का पहला MBRL एक्सपोर्ट. 22 रेजिमेंट से एक्स्ट्रा प्रोडक्शन एक्सपोर्ट के लिए. कब और कैसे आएगा 'रॉकेट का राजा'?     टाइमलाइन: Mk-3 2028, Mk-4 2030 इंडक्शन. 5-वर्षीय DRDO प्लान – आर्टिलरी मॉडर्नाइजेशन का हिस्सा.     उत्पादन: 10 रेजिमेंट पहले (180 लॉन्चर). निजी कंपनियां (टाटा, L&T) से 50% शेयर.     सेना का कॉन्फिडेंस: सिंदूर में 120 किमी पिनाका वैरिएंट ने पाक को रुलाया. 300 किमी आएगा तो वो हमला करने की हिम्मत नहीं करेंगे. यह भारत का नया हथियार है.  

सरकार ने दुबई में चीनी पर टैक्स की मंजूरी दी, नए साल से लागू

दुबई  यूएई ने 2026 में कई नए नियमों में बदलाव किया है. इसका वहां रह रहे लोगों पर व्यापक असर पड़ सकता है. आने वाला साल भविष्य पर केंद्रित होगा, जिसमें नई तकनीकें और नए नियम केंद्र में हैं. नए साल से हि वहां फ्लाइंग टैक्सी का ऑपरेशन शुरू हो जाएगा.  इसके साथ ही सरकार वहां चीनी पर टैक्स लगाने जा रही है.  खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई में यह घोषणा की गई है कि 1 जनवरी 2026 से देश में शर्करायुक्त (विद शुगर) पेय पदार्थों पर कर लगाने के तरीके में बदलाव होगा. चीन पर लगेगा 50 प्रतिशत उत्पाद शुल्क वित्त मंत्रालय और संघीय कर प्राधिकरण ने कहा है कि अगले साल से मीठे पेय पदार्थों पर लगने वाला टैक्स उनकी उत्पाद श्रेणी के बजाय उनकी चीनी सामग्री पर आधारित होगा – जो कि 50 प्रतिशत उत्पाद शुल्क है. इसका उद्देश्य देश को स्वस्थ बनाना है. टैक्स पेयर्स के स्वास्थ्य को लेकर उठाए गए कदम संयुक्त अरब अमीरात ने 2026 से व्यापक कर सुधारों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स के लिए जीवन को आसान बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है. इसमें स्पष्ट नियम और समय-सीमाएं होंगी, जिनमें रिफंड का दावा करने की समय-सीमा भी शामिल है. यूएई 2026 में लागू किए जाने वाले नए मूल्य वर्धित कर (वैट) नियमों के साथ कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए तैयार है. 2026 के मध्य से, यूएई  चरणबद्ध तरीके से राष्ट्रव्यापी ई-इनवॉयसिंग प्रणाली लागू करेगा. नई प्रणाली के तहत, व्यवसायों को इनवॉइस का आदान-प्रदान एक मानकीकृत इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में करना होगा – न कि केवल पीडीएफ या स्कैन की गई प्रतियों के माध्यम से. बहुप्रतीक्षित राष्ट्रव्यापी एतिहाद रेल 2026 में यात्रियों के लिए परिचालन शुरू करने के लिए तैयार है. एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर, यह नेटवर्क 11 प्रमुख शहरों और क्षेत्रों को जोड़ेगा, जिससे निवासियों को देश के कोने-कोने में आसानी से यात्रा करने में मदद मिलेगी. रेलवे से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने और देश के रियल एस्टेट परिदृश्य में बदलाव आने की उम्मीद है. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि ज़्यादा लोग शहरों से बाहर निकलकर ट्रेन से काम पर जाएंगे.

पंकज चौधरी ने लोकसभा में किया 8वें वेतन आयोग पर स्पष्टीकरण, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि पर अहम जानकारी

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचार‍ियों और पेंशनरों के बीच काफी उत्‍सुकता है. सोशल मीड‍िया पर भी 8वें वेतन आयोग के लागू होने को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं. मसलन 1 जनवरी 2026 से इसे लागू कर द‍िया जाएगा और डीए को बेस‍िक सैलरी में मर्ज कर द‍िया जाएगा. लेक‍िन इन सभी अटकलों को साफ करते हुए  लोकसभा में फाइनेंस स्‍टेट म‍िन‍िस्‍टर पंकज चौधरी ने यह स्‍पष्‍ट कर द‍िया क‍ि फ‍िलहाल 8वें वेतन आयोग को लागू करने की कोई तारीख पक्‍की नहीं हुई है. और ना ही डीए और बेस‍िक सैलरी को मर्ज करने का कोई फैसला ल‍िया गया है. 8वें वेतन आयोग की स‍िफार‍िशों पर जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की हेडिंग वाला कमीशन अभी काम कर रहा है. बजट में हो सकता है अहम ऐलान हालांक‍ि अपने जवाब में पंकज चौधरी ने एक बात स्‍पष्‍ट कही क‍ि 8वें वेतन आयोग के तहत लगभग 50.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर के वेतन में वृद्ध‍ि के ल‍िए फंड का भी इंतजाम करना होगा. ल‍िहाजा समझने वाली बात ये है क‍ि अगर बात बजट की है तो उसका ऐलान भी बजट में हो सकता है. उम्‍मीद है क‍ि इस बार 8वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचार‍ियों और पेंशनरों की सैलरी के ल‍िए फंड पर बजट के दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है. 8वें वेतन आयोग पर अब तक का अपडेट क्‍या है? भारत सरकार ने यह कन्फर्म किया है कि 8वां सेंट्रल पे कमीशन (CPC) फॉर्मल तौर पर बन गया है और इसका काम चल रहा है. हालांक‍ि 1 जनवरी 2026 इसके लागू होने की तारीख के लिए कोई वादा नहीं किया. सोमवार को लोकसभा में फाइनेंस स्टेट मिनिस्टर पंकज चौधरी के एक लिखित जवाब में कहा है क‍ि 8वें CPC के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को ऑफिशियली 3 नवंबर 2025 को नोटिफाई किया गया था. इससे ये पता चलता है क‍ि पे पैनल अपना काम शुरू कर चुका है. लेक‍िन साथ ही यह भी कहा क‍ि 8वां वेतन आयोग लागू करने से पहले कमीशन को देश के मौजूदा आर्थिक हालात, फिस्कल समझदारी की जरूरत और राज्य सरकारों पर पड़ने वाले फाइनेंशियल असर को भी ध्‍यान रखना होगा. सरकार ने संसद को यह भी भरोसा दिलाया है कि मानी गई सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड का इंतजाम किया जाएगा. मंत्री ने कन्फर्म है किया कि 8th CPC में लगभग 50.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर शाम‍िल होंगे. बता दें क‍ि सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सैलरी, अलाउंस और पेंशन स्ट्रक्चर में बदलाव की सिफारिश करने का काम जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की हेडिंग वाले कमीशन को सौंपा गया है.