samacharsecretary.com

ईपीएफओ में सुधार की तैयारी, सैलरी कैप बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी

नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अनिवार्य PF और पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाकर अपने पात्रता मानदंडों में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है.  सरल शब्‍दों में कहें तो EPFO वेतन की मौजूदा सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये करने का प्रस्‍ताव है. पहले यह 6,500 रुपये थी.इस कदम के पीछे का मकसद 1 करोड़ से ज्‍यादा कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ की सामाजिक सुरक्षा में लाने का है.  यह तय करती है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कौन स्वतः नामांकित है. मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू ने कहा कि यह बहुत बुरी बात है कि 15,000 रुपये से थोड़ा ज़्यादा कमाने वाले इतने सारे लोगों के पास पेंशन कवर नहीं है और बुढ़ापे में उन्हें अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्‍होंने पुरानी पेंशन सीमाओं को अपडेट करने पर जोर दिया.  अभी क्‍या है नियम?  मौजूदा नियमों के तहत, केवल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को ही ईपीएफ और ईपीएस के दायरे में लाया जाना चाहिए. इससे थोड़ा भी ज्‍यादा कमाने वाले लोग इससे बाहर निकल सकते हैं और नियोक्ताओं को उन्हें रजिस्‍टर्ड करने की कोई बाध्यता नहीं है. इससे शहरी निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा मामूली वेतन पाने के बावजूद, औपचारिक सेवानिवृत्ति बचत के बिना रह जाता है. 25000 रुपये हो सकती है ये लिमिट रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईपीएफओ इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकता है और अगले साल की शुरुआत में केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा इस मामले पर विचार किए जाने की उम्मीद है. श्रम मंत्रालय के एक डाटा से पता चलता है कि सीमा में ₹10,000 की वृद्धि से एक करोड़ से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस कवरेज के अंतर्गत आ सकते हैं. ट्रेड यूनियनें लंबे समय से इस तरह के संशोधन की मांग कर रही हैं, उनका तर्क है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत और वेतन स्तरों के बीच मौजूदा सीमा पुरानी हो चुकी है. ईपीएफओ फंड बढ़ेगा कर्मचारियों के लिए, इस बदलाव से मासिक अंशदान बढ़ेगा, ईपीएफ कोष बढ़ेगा और पेंशन भुगतान में सुधार होगा. वर्तमान में, कर्मचारी मूल वेतन का 12% योगदान करते हैं, जो नियोक्ता द्वारा बराबर किया जाता है, जो अपना हिस्सा ईपीएफ और ईपीएस के बीच विभाजित करते हैं. हाई सैलरी बेस से दोनों पक्षों का योगदान बढ़ेगा. नियोक्ताओं के लिए प्रति कर्मचारी लागत बढ़ेगी.

तूफान की आहट! बंगाल की खाड़ी में सिस्टम एक्टिव, ओडिशा के तटीय क्षेत्रों पर मंडराया संकट

भुवनेश्वर बंगाल की खाड़ी में 22 नवंबर को एक नया लो-प्रेशर क्षेत्र बना है। यह सिस्टम केंद्रीय बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन का रूप लेगा और 26 तारीख तक चक्रवात में बदल सकता है। इसके तेजी से मजबूत होकर उत्तर या उत्तर–पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 28 नवंबर को भीषण चक्रवात बनने की आशंका है।दक्षिण अंडमान सागर में भी एक लो-प्रेशर एरिया बना है, जो आगे पश्चिम–उत्तर–पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 24 नवंबर को और अधिक मजबूत होकर दक्षिण–पूर्वी बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन में तब्दील होगा। अगले 48 घंटों में यह सिस्टम और तीव्र होकर दक्षिण–पश्चिम बंगाल की खाड़ी में पहुंच सकता है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में इसके डिप्रेशन का रूप लेने और बाद में चक्रवात में बदलने की संभावना है। इसके ओडिशा तट पर असर डालने की भी आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों का अनुमान मौसम विशेषज्ञ प्रोफेसर सुरेन्द्रनाथ पशुपालक के मुताबिक, मलक्का में आज एक कमजोर लो-प्रेशर सिस्टम बना है। यह 24 नवंबर तक दक्षिण अंडमान सागर में डिप्रेशन बनेगा और पश्चिम–उत्तर–पश्चिम दिशा में बढ़ेगा। उसी दिन दक्षिण–केंद्रीय बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन और 26 तारीख तक चक्रवात बनने के संकेत हैं। यह सिस्टम तेजी से मजबूत होकर 28 नवंबर को भीषण चक्रवात का रूप ले सकता है। विभिन्न मौसम मॉडल बताते हैं कि 29 और 30 नवंबर को यह अत्यंत भीषण चक्रवात बनकर दक्षिण–पश्चिम और पश्चिम–केंद्रीय बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ सकता है। इसके आंध्र प्रदेश और ओडिशा तट की ओर बढ़ने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, अभी लैंडफॉल की सही जगह और समय का अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि यह सिस्टम अभी शुरुआती अवस्था में है और लैंडफॉल में अभी लगभग एक सप्ताह का समय है। अगले 48 घंटे में और मजबूत होने की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, 24 नवंबर तक यह लो-प्रेशर क्षेत्र डिप्रेशन में बदलेगा और अगले 48 घंटों में और अधिक तीव्र होकर मजबूत सिस्टम बन सकता है। ओडिशा में चार दिन भारी बारिश की संभावना इसके प्रभाव से ओडिशा में चार दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है। खासकर तटीय और दक्षिण ओडिशा में सबसे अधिक बारिश होने की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल किसानों के लिए कृषि विभाग की ओर से कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।  

बीएलओ की आत्महत्या पर ममता का हमला: ‘एसआईआर से और कितनी जानें जाएंगी?’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच एक और बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीएलओ के सुसाइड पर चुनाव आयोग की आलोचना की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कृष्णानगर में एक और बीएलओ, एक महिला शिक्षक की मौत की खबर सुनकर बहुत सदमा लगा। विधानसभा क्षेत्र छपरा (82) में बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपने घर पर आत्महत्या करने से पहले अपने सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है।" इसके बाद, मुख्यमंत्री ने पूछा कि एसआईआर की वजह से पश्चिम बंगाल में और कितनी जानें जाएंगी।  ममता बनर्जी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "और कितनी जानें जाएंगी? एसआईआर के लिए और कितने लोगों को मरना होगा? इस प्रोसेस के लिए हमें और कितनी लाशें देखनी पड़ेंगी? यह अब सच में बहुत चिंता की बात हो गई है।" दावा है कि नादिया जिले की बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर राज्य में एसआईआर से जुड़े काम के दबाव के कारण आत्महत्या की। अपने सुसाइड नोट में रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर अपनी चिंता जताई थी कि अगर उन्होंने बीएलओ का काम पूरा नहीं किया तो उन पर प्रशासनिक दबाव आएगा। पुलिस के मुताबिक, महिला बीएलओ ने सुसाइड नोट में कथित तौर पर लिखा था, "मैं प्रेशर नहीं झेल सकती।" इस हफ्ते पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी आत्महत्या की यह दूसरी घटना है। इससे पहले जलपाईगुड़ी में शांति मुनि एक्का नाम की एक और महिला बीएलओ ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी। यह घटना जलपाईगुड़ी के माल बाजार इलाके में हुई। एक्का की मौत के बाद भी मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की आलोचना की थी। वहीं, परिवार ने आरोप लगाया कि उसने अपनी जान देने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि वह एसआईआर के काम का दबाव नहीं झेल पा रही थी।

ग्रीन हाइड्रोजन पर भारत का वैश्विक भरोसा मजबूत: हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान

नई दिल्ली केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को कहा कि भारत हाइड्रोजन के हर मॉलिक्यूल में विश्वास पैदा कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम को लेकर जानकारी देते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी देते हुए लिखा, "ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम (जीएचसीआई) को इस वर्ष अप्रैल में लॉन्च किया गया था। यह स्कीम सुनिश्चित करता है कि हाइड्रोजन वास्तव में ग्रीन हो, जिसका उत्पादन रिन्यूएबल पावर का इस्तेमाल कर किया जाता है।" केंद्रीय मंत्री पुरी ने बताया कि आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, ओएनजीसी, एनआरएल और सीपीसीएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां 2030 तक 900 केटीपीए क्षमता विकसित कर रही हैं, जिससे ग्रे हाइड्रोजन को रिप्लेस करने और आयात में 1 लाख करोड़ रुपए की बचत करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। वीडियो में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत क्लीन एनर्जी के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। देश की जीएचसीआई बताती है कि हाइड्रोजन को किस प्रकार मापा जाता है, मॉनिटर किया जाता है और वेरिफाई किया जाता है। यह स्कीम प्रोडक्शन से लेकर इस्तेमाल तक की इसकी यात्रा को ट्रैक करती है। इस फ्रेमवर्क के तहत, केवल वही हाइड्रोजन ग्रीन माना जाता है जो रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल कर बनाया गया हो। इसी तरह, हर किलोग्राम हाइड्रोजन से 2 किलोग्राम से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड न निकलना इसे ग्रीन मानता है। भारत की हाइड्रोजन इकोनॉमी में ट्रांसपेरेंसी और ग्लोबल क्रेडिबिलिटी आए इसके लिए हर प्रोड्यूसर का ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफ्शिएंसी से मान्यता प्राप्त वेरिफिकेशन एजेंसियों से ऑडिट होना जरूरी है। जीएचसीआई एक सर्टिफिकेशन से बढ़कर ओरिजिन की गारंटी है, इंटीग्रिटी, सस्टेनेबिलिटी और सेल्फ-सफिशिएंसी की मुहर है, जो पीएम मोदी के विजनरी लीडरशिप में भारत को एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहा है जो ग्रीन, फेयर और भरोसेमंद है। वीडियो के अनुसार, पानीपत, विजाग, बीना, नुमालिगा और ऑफशोर क्लस्टर्स के प्रोजेक्ट्स रिफाइनरियों और इंडस्ट्रीज में ग्रे हाइड्रोजन की जगह लेंगे, जिससे जल्द ही देश को जीवाश्म ईंधन आयात में 1 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी। 

‘बॉलीवुड पर लव जिहाद का आरोप’ — हरिद्वार में अनिरुद्धाचार्य का बड़ा वक्तव्य

हरिद्वार  मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने उन्होंने एक फिल्म का नाम लेते हुए कहा कि भारत में बॉलीवुड लव जिहाद फैला रहा है. इस पर रोक लगाने की आवश्यकता है.संतों ने हमेशा से सनातन की रक्षा की है और आगे भी करेंगे. अनिरुद्धाचार्य ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर भी अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम सही दिशा में है, लेकिन अब ज़रूरी है कि बच्चों को राम और भरत जैसे आदर्श चरित्रों के जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जाए. भारत में ऐसी शिक्षा का भी होना जरूरी है, जिसमें साइंस के अलावा वैदिक गणित भी पढ़ाया जाता हो. ‘सनातन बोर्ड का गठन जरूरी’ भूपतवाला क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जैसे अन्य धर्म अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा देते हैं, वैसे ही सनातन धर्म को सुरक्षित रखने के लिए एक सनातन बोर्ड का गठन आवश्यक है. उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों को पूर्ण रूप से मांस और मदिरा मुक्त बनाना चाहिए और इसके लिए सरकारों से सामूहिक रूप से निवेदन किया जाना चाहिए. कार्यक्रम में ये संत भी रहे शामिल अनिरुद्धाचार्य और देवकीनंदन ठाकुरहरिद्वार के अमेरिकन आश्रम में आयोजित विश्व सनातन महापीठ के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. इसी दौरान उन्होंने उक्त बातें कहीं. इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि महाराज सहित कई संत और धर्माचार्य भी उपस्थित रहे. संतों ने देश की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए सनातन बोर्ड की मांग को दोहराया. इसके साथ ही हरिद्वार को मांस और मदिरा मुक्त किए जाने की भी जोरदार मांग उठाई गई. बाबा हठयोगी और रामविशाल दास महाराज देशभर के धर्माचार्यों और समाजसेवियों के सहयोग से हरिद्वार में विश्व सनातन महापीठ का निर्माण कर रहे हैं. इसके लिए करीब 100 एकड़ भूमि तय की गई है, जहां विश्व सनातन संसद, विभिन्न प्रमुख मंदिरों के प्रतिरूप, विश्वविद्यालय, चिकित्सालय और गौशाला जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इनका उद्देश्य सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना और सनातनियों को एक मंच पर एकजुट करना है.  

ऑफिस में आत्महत्या का प्रयास: महिला अफसर की दर्दनाक कहानी से क्यों दहल उठा सिद्धारमैया का क्षेत्र?

बेंगलुरु कर्नाटक में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के विधानसभा क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत सचिव ने आत्महत्या का प्रयास किया है। बताया जाता है कि वह अपना ट्रांसफर होने की रिपोर्ट से परेशान थी। इस पंचायत अफसर का नाम दिव्या है और वह ग्रेड-1 पंचायत अफसर है। बताया जाता है कि दिव्या ने अपने ऑफिस में पैरासिटामॉल, दर्द निवारक और बुखार के कुल 15 टैबलेट खा लिए। इसके बाद वह अपने ऑफिस में ही गिर गईं। अधिकारियों और पंचायत सदस्यों के मुताबिक पिछले दो साल से वरुणा पंचायत सचिव के तौर पर तैनात थीं। जानकारी के मुताबिक दिव्या उस वक्त परेशान हो गईं, जब एक अन्य ग्राम पंचायत के ग्रेड-1 सचिव के उनकी जगह लेने की खबरें आईं। पंचायत सदस्यों का दावा है कि वह सचिव सीनियर अधिकारियों के साथ मिलकर दिव्या की जगह लेने के लिए लॉबिंग कर रहा था। जानकारी के मुताबिक 20 नवंबर को एग्जीक्यूटिव अफसर ने वरुणा पंचायत ऑफिस में अचानक विजिट की थी। आरोप है कि इस दौरान उसने दिव्या के खिलाफ छह महीने पुरानी शिकायत फिर से खोलने की बात कही थी, जिसमें उनके खिलाफ ठीक से काम न करने की बात कही गई थी। यह जांच पंचायत सदस्यों की मौजूदगी में की गई, जिन्होंने एकजुट होकर दिव्या का बचाव किया था। इन लोगों ने कहा कि दिव्या का काम काफी अच्छा है। साथ ही इतनी पुरानी शिकायत के लंबे अंतराल के बाद फिर से खोलने की मंशा पर भी सवाल उठाया था। वरुणा पंचायत ऑफिस के एक वीडियो में नजर आ रहा है कि दिव्या अपनी कुर्सी पर बेहोशी की हालत में पड़ी हुई है। वहीं, दो महिला कर्मचारी उन्हें होश में लाने और उठाने की कोशिश करती नजर आ रही हैं। इसके बाद अन्य कर्मचारियों ने मिलकर दिव्या को मैसूर के कावेरी अस्पताल पहुंचाया। मामले में वरुणा पुलिस पंचायत अधिकारियों के साथ मिलकर जांच कर रही है। दिव्या ने अभी कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। अनुमान है कि पुलिस दिव्या से अस्पताल में मिलेगी और जानना चाहेगी कि वह शिकायत दर्ज कराना चाहती है या नहीं। फिलहाल इस मामले के चलते मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का विधानसभा क्षेत्र अचानक से काफी चर्चा में आ गया है।  

उधमपुर में गूँजा आईटीबीपी का जज़्बा, 64वें स्थापना दिवस पर शानदार समारोह

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) ने अपना 64वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया। इस मौके पर 15वीं बटालियन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार उपस्थित रहे, साथ ही जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, नॉर्दर्न कमांडर प्रतीक शर्मा, डीजी जम्मू-कश्मीर नलिन प्रभात और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिरकत की। इस दौरान बंदी संजय कुमार ने आईटीबीपी के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी, परेड का निरीक्षण किया और स्थापना दिवस परेड की भव्य झलक देखी। मुख्य अतिथि बंदी संजय कुमार ने अपने संबोधन में आईटीबीपी के सभी जवानों को बधाई दी और उनकी कठिन हिमालयी परिस्थितियों में सेवा की सराहना की। उन्होंने उनकी निष्ठा, समर्पण और देश की सुरक्षा में पेशेवराना योगदान को भी हाईलाइट किया। आईटीबीपी के डीजी प्रवीण कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और बल की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आईटीबीपी की सीमा सुरक्षा, आपदा राहत, आंतरिक सुरक्षा, नक्सल ऑपरेशन और पर्वतारोहण व रेस्क्यू ऑपरेशन में योगदान पर जोर दिया। स्थापना दिवस परेड में बल की प्रमुख यूनिटों ने भाग लिया। इसमें महिला कंटिंजेंट, स्की टीम, माउंटेड कॉलम, कमांडो पैराट्रूपर्स, डॉग स्क्वाड और ब्रास बैंड शामिल थे। इसके साथ ही महिला हिम्मवीरों द्वारा सी-एसएसी ड्रिल, ड्रोन डिस्प्ले और मार्शल आर्ट परफॉरमेंस ने कार्यक्रम को और भी रोमांचक बना दिया। इस मौके पर पांच कर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया, जबकि 24 अधिकारियों और जवानों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से नवाजा गया। साल के बेहतरीन यूनिट पुरस्कार भी इसी मौके पर दिए गए। 43 बटालियन को बेस्ट बॉर्डर बटालियन, 52 बटालियन को बेस्ट नॉन-बॉर्डर बटालियन, 27 बटालियन को बेस्ट एएनओ यूनिट, 18 बटालियन को बेस्ट क्लीन बटालियन, 25 बटालियन को बेस्ट ग्रीन बटालियन और 13 बटालियन को राजभाषा चालशील्ड ट्रॉफी (2024) से सम्मानित किया गया। अतिरिक्त महानिदेशक जनरल मुकेश सिंह ने धन्यवाद देते हुए मुख्य अतिथि और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और बल की देश सेवा में अटूट समर्पण की प्रतिबद्धता को दोहराया। गौरतलब है कि आईटीबीपी की स्थापना 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद हुई थी। यह बल 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करता है और दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन जगहों पर काम करता है। आईटीबीपी नक्सल विरोधी अभियान, वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और देशभर में आंतरिक सुरक्षा कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है।

PM मोदी ने G20 मंच से कहा—पुराने विकास मॉडल ने दुनिया को नुकसान पहुंचाया, अब सबके लिए विकास जरूरी

जोहान्सबर्ग  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग पहुंचे, जहां वे 21 से 23 नवंबर तक होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है. शनिवार को उन्होंने सम्मेलन को संबोधित किया.  अफ्रीका की धरती पर पहली बार आयोजित हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन ने एक ऐतिहासिक शुरुआत देखी, और उसके उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास की दिशा बदलने वाले तीन बड़े प्रस्ताव रखे. G20 शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या-क्या कहा? पीएम मोदी ने कहा कि कई दशकों से जी20 दुनिया की अर्थव्यवस्था को आकार देता रहा है, लेकिन वर्तमान विकास मॉडल ने बड़े समुदायों को संसाधनों से वंचित किया है. उन्होंने साफ कहा कि इन मॉडलों ने प्रकृति का अंधाधुंध दोहन बढ़ाया है और सबसे अधिक असर अफ्रीका और ग्लोबल साउथ पर पड़ा है. उन्होंने तीन बड़े प्रस्ताव रखे.  1. ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपोजिटरी प्रधानमंत्री ने ऐसी ज्ञान-परंपराओं की बात उठाई जो सदियों से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्रकृति-संतुलन, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता को बनाए रखती हैं. उन्होंने कहा कि भारत के “भारतीय ज्ञान प्रणालियां” मॉडल के आधार पर एक वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार बननी चाहिए, ताकि टिकाऊ जीवन के इन अनुभवों को संरक्षित कर अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके. 2. जी20 अफ्रीका कौशल गुणक पहल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अफ्रीका का विकास पूरी दुनिया के हित में है. इसी सोच के साथ उन्होंने “जी20–अफ्रीका कौशल गुणक” का ऐलान किया. यह पहल ट्रेन-द-ट्रेनर्स मॉडल पर आधारित होगी, जिसे सभी G20 देश मिलकर फंड और सपोर्ट करेंगे. लक्ष्य है अगले 10 साल में एक मिलियन प्रमाणित ट्रेनर तैयार करना, जो फिर लाखों युवाओं को कौशल दे सकेंगे. 3. ड्रग-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने पर G20 पहल प्रधानमंत्री ने ड्रग–टेरर नेटवर्क पर भी गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि फेंटानाइल जैसे सिंथेटिक ड्रग पूरी दुनिया में स्वास्थ्य, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं. इसलिए जी20 को एक संयुक्त अभियान – ड्रग-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने पर G20 पहल शुरू करना चाहिए. यह तस्करी, अवैध वित्तीय नेटवर्क और आतंकी फंडिंग को रोकने में मदद करेगा. पीएम मोदी ने अफ्रीका और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को जी20 की मुख्यधारा में लाने की जरूरत दोहराई और कहा कि भारत “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की सोच को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है. G20 बैठक में बोले पीएम मोदी – अब समय है विकास के नए मानक तय करने का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, G20 शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में भाषण दिया. यह सत्र समावेशी और टिकाऊ विकास पर केंद्रित था.  उन्होंने कहा कि अफ्रीका पहली बार G20 समिट की मेजबानी कर रहा है, इसलिए अब सही समय है कि हम अपने विकास के पैमानों को फिर से देखें और ऐसा विकास मॉडल अपनाएं जो सबको साथ ले और लंबे समय तक टिक सके. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के प्राचीन मूल्यों, खासकर समग्र मानववाद का सिद्धांत, दुनिया को आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता दिखाता है. G20 समिट में पीएम मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की. यह बातचीत जोहान्सबर्ग में चल रही बहुपक्षीय बैठकों के बीच हुई, जहां दोनों नेताओं ने आपसी मुद्दों पर चर्चा की. पीएम मोदी की कई विश्व नेताओं से मुलाकात G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विश्व नेताओं से मुलाकात और बातचीत की. G20 में कौन-कौन से देश शामिल हैं? अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, तुर्किये, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका देश शामिल हैं. इसके अलावा दो क्षेत्रीय संगठन भी इस समूह में शामिल हैं – यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ. 

CJI के आदेश की अनदेखी?—तुच्छ चूक पर 28 दिन जेल की सजा, SC ने अधिकारियों को लताड़ा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के आदेश में किसी तुच्छ चूक का हवाला देकर उसकी अवहेलना करना पूरी तरह अनुचित है। यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें उत्तर प्रदेश की जेल प्रशासन ने एक अंडरट्रायल कैदी की रिहाई 28 दिनों तक रोके रखी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के जमानत आदेश में एक उपधारा (i) का जिक्र छूट गया था, हालांकि बाकी सभी विवरण पूरी तरह स्पष्ट थे। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आफताब नामक आरोपी को उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम के तहत बुक किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल 2025 को उसे जमानत दी थी। आदेश में धारा 5(i) के स्थान पर केवल धारा 5 लिखा गया था। इस मामूली चूक के आधार पर जेल अधिकारियों ने उसकी रिहाई रोक दी और वह 27 मई तक जेल में बंद रहा। जून 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए यूपी सरकार को आफताब को 5 लाख रुपये की अंतरिम क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया था। साथ ही, कोर्ट ने गाजियाबाद के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज को मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। जांच रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी 17 नवंबर को जब यह मामला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच के सामने आया, तो उन्होंने जांच रिपोर्ट का वह हिस्सा देखकर आश्चर्य व्यक्त किया जिसमें देरी के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) जुनैद मुजफ्फर को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया था। जस्टिस पारदीवाला ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से तीखा सवाल पूछा- जब आदेश सुप्रीम कोर्ट का था, तो देरी के लिए ADJ को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? वह तो केवल हमारे आदेश का अनुपालन कर रहे थे। सिर्फ इसलिए कि धारा 5 की उपधारा (i) नहीं लिखी थी, व्यक्ति को 28 दिन तक जेल में क्यों रखा गया? ASG भाटी ने कहा कि मुद्दा तब सुलझा जब आरोपी ने आदेश संशोधन के लिए आवेदन दिया। इस पर बेंच ने असहमति जताई। ‘कार्यपालिका न्यायालय के आदेशों पर बैठ गई’ : जस्टिस विश्वनाथन जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने कड़े शब्दों में कहा- यह तो कार्यपालिका का न्यायिक आदेशों पर बैठ जाना है। बिल्कुल बेहूदा बहाना- यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है कि यदि CJI जमानत दे दें और कोई उपधारा छूट जाए, तो सरकार उसे लागू न करे? जब अपराध संख्या, आरोपी का नाम, पुलिस स्टेशन और सब कुछ स्पष्ट था, तो ऐसी देरी क्यों? कोर्ट ने ADJ की राय मांगी बेंच ने कहा कि किसी अधिकारी को दोषी ठहराने से पहले उसकी बात सुनना जरूरी है। इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि ADJ जुनैद मुजफ्फर अपनी लिखित टिप्पणियां दाखिल करें, खासकर जांच रिपोर्ट के पैरा 8 पर, जिसमें उन्हें पूरी तरह दोषी बताया गया है। कोर्ट ने कहा- जब सर्वोच्च न्यायालय, वह भी मुख्य न्यायाधीश की पीठ, कोई आदेश पारित करती है, तो अधिकारियों का तुच्छ त्रुटियों के आधार पर आदेश को नजरअंदाज करना बिल्कुल उचित नहीं है। यह अदालत इस चूक को गंभीरता से देख रही है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि अधिकारी से टिप्पणी जल्द से जल्द मंगाई जाए और मामला अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। अब यह मामला 8 दिसंबर को फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा, जहां यह स्पष्ट होगा कि देरी के वास्तविक कारण क्या थे, और दोष किसका है- जेल प्रशासन का, पुलिस का, या किसी अन्य स्तर पर लापरवाही हुई।

रिपोर्ट का बड़ा धमाका: चीन ने पाक को दिए हथियार, ऑपरेशन सिंदूर में राफेल को निशाना बनाने की कोशिश

नई दिल्ली  दो सदस्यों वाले अमेरिकी आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चीन ने मई में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का अवसरवादी तरीके से उपयोग किया। इस दौरान उसने अपनी रक्षा क्षमताओं का परीक्षण और प्रचार के मकसद से पाकिस्तान को हथियारों की मदद की। मंगलवार को प्रकाशित यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग ने चार दिवसीय संघर्ष का लाभ उठाया ताकि अपने हथियारों का परीक्षण और विज्ञापन कर सके।   रिपोर्ट में कहा गया है, "यह संघर्ष पहली बार था जब चीन की आधुनिक हथियार प्रणालियों का उपयोग किया था। उनमें HQ-9 वायु रक्षा प्रणाली, PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और J-10 लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह एक वास्तविक दुनिया के क्षेत्र प्रयोग के रूप में काम आया।" रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कथित तौर पर संघर्ष के बाद जून में पाकिस्तान को 40 J-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट, KJ-500 विमान और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली बेचने की पेशकश की। संघर्ष के हफ्तों बाद, चीनी दूतावासों ने भी भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अपने सिस्टम की सफलताओं की प्रशंसा की, जिसका उद्देश्य हथियार बिक्री को बढ़ावा देना था। राफेल को बदनाम करने का अभियान रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू जेट को बदनाम करने के लिए एक दुष्प्रचार अभियान भी चलाया। फ्रांसीसी खुफिया जानकारी के अनुसार, चीन ने अपने J-35 के पक्ष में फ्रांसीसी राफेल की बिक्री में बाधा डालने के लिए एक दुष्प्रचार अभियान शुरू किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल करके AI और वीडियो गेम की तस्वीरों को प्रचारित किया, जिसमें चीन के हथियारों द्वारा नष्ट किए गए विमानों के कथित मलबे को दिखाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी दूतावास के अधिकारियों ने इंडोनेशिया को राफेल जेट की पहले से चल रही खरीद को रोकने के लिए मना लिया। चीन ने रिपोर्ट को बताया झूठा चीन ने इस रिपोर्ट को झूठा करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "समिति द्वारा जारी की गई रिपोर्ट स्वयं झूठी है।" माओ ने आगे कहा, "आपने जिस समिति का उल्लेख किया है, उसका चीन के प्रति हमेशा एक वैचारिक पूर्वाग्रह रहा है और उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।" 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत ने इस हमले में सीमा पार के लिंक पाए और 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई आतंकी शिविरों पर हमला किया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया, लेकिन खतरों को विफल कर दिया गया। कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के एयरफील्ड पर हमला किया। 10 मई को हुए संघर्ष विराम के साथ शत्रुता समाप्त हो गई थी।