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MBBS एडमिशन विवाद: वैष्णो देवी कॉलेज में 50 में से 41 मुस्लिम छात्रों को सीट, विरोध शुरू

नई दिल्ली  भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। उन्होंने रियासी जिला स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की ओर से जारी पहली एडमिशन लिस्ट रद्द करने की मांग की। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने चयन सूची पर सवाल उठाए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिन छात्रों को दाखिला मिला है उनमें से अधिकांश छात्र एक समुदाय से हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि माता में आस्था रखने वाले छात्रों को दाखिले के लिए विचार किया जाए।   राजभवन की ओर से जारी बयान के अनुसार, बैठक के दौरान शर्मा के साथ विधायक शाम लाल शर्मा, सुरजीत सिंह सलाथिया, देवेंद्र कुमार मन्याल और रणबीर सिंह पठानिया मौजूद थे। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा, 'हमने एसएमवीडीआईएमई में दाखिलों के पहले बैच को लेकर एक असाधारण और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जिसमें अधिकांश सीट एक विशेष समुदाय के छात्रों को मिली हैं।' भाजपा नेताओं की क्या है मांग सुनील शर्मा ने कहा, 'हमारा विरोध इस दलील पर आधारित है कि यह संस्थान श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा है। श्राइन बोर्ड को मिलने वाला दान धार्मिक और सांस्कृतिक कामों के लिए था।' एसएमवीडीआईएमई को इस साल 50 एमबीबीएस सीट की मंजूरी मिली है। कॉलेज के पहले बैच (2025-26) में एक विशेष समुदाय के 41 छात्रों के प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ दक्षिणपंथी समूह प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि इस कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया जाए।  

देशभर में बम धमाकों की साजिश! फडणवीस बोले—पाकिस्तान था मास्टरमाइंड

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लाल किले के पास हुए विस्फोट के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश सीधी जंग में भारत को हरा नहीं सकता, इसलिए वह आतंकी हमले करवा रहा है। फडणवीस ने कहा, 'पाकिस्तान को पता है कि वह खुले युद्ध में भारत को हरा नहीं सकता, इसलिए पहलगाम में आतंकी हमला और दिल्ली में हालिया विस्फोट करवाया गया।' उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें 3000 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ था। इसका इस्तेमाल मुंबई और देश के अन्य शहरों में आतंकी हमलों के लिए किया जाना था।   मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'मुझे खुशी है कि आज हमारे पास एक बदला हुआ भारत है। भारत ने इन चीजों को पहले ही भांप लिया और ऑपरेशन किए। उनकी मंशा देश के हर कोने में बम धमाके करने की थी। हमारे देश के कई शहरों सहित मुंबई भी उनके निशाने पर था। जब हमारी भारतीय एजेंसियों ने इसकी भनक लगी और उन पर सीधा हमला किया, तो उन्होंने दिल्ली में विस्फोट करके अपनी मौजूदगी दिखाई।' उन्होंने कहा कि इस विस्फोट में कम से कम 10 लोगों की जान गई है। ऑपरेशन सिंदूर की बताई जरूरत देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि अगर भारत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई की होती, तो देश को निशाना बनाने का कोई भी दोबारा दुस्साहस नहीं कर पाता। मुंबई हमले की 17वीं बरसी पर गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित कार्यक्रम में वह बोल रहे थे। फडणवीस ने कहा कि यह सिर्फ ताज और ट्राइडेंट होटलों पर हमला नहीं था। उन्होंने कहा कि मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और इस शहर पर हमला देश की संप्रभुता पर हमला है। पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को बनाया निशाना सीएम फडणवीस ने कहा, ‘अगर हमने यह बात समझ ली होती और उस समय ऑपरेशन सिंदूर चलाने का साहस किया होता, तो कोई भी हम पर दोबारा हमला करने का दुस्साहस नहीं करता।’ भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी। मुंबई आतंकी हमले में कम से कम 166 लोग मारे गए थे। फडणवीस ने कहा, '17 साल बीत चुके हैं, लेकिन हमारे दिलों में अभी भी दर्द है। हम यहां शहीदों और वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं। याद रखें कि आतंक का खतरा अभी भी बना हुआ है और हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हमें अपने देश की आंख और कान बनना होगा। अगर हम एकजुट हैं तो हम सुरक्षित हैं।’  

CJI गवई ने न्यायपालिका में बढ़ाई सामाजिक हिस्सेदारी, जानिए कितने OBC–SC जजों की हुई नियुक्ति

नई दिल्ली  प्रधान न्यायाधीश (CJI) के रूप में न्यायमूर्ति बीआर गवई के लगभग छह महीने के कार्यकाल के दौरान देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के 10 न्यायाधीशों, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और पिछड़ा वर्ग के 11 जजों की नियुक्ति की गई। न्यायमूर्ति गवई देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित प्रधान न्यायाधीश हैं। उन्होंने उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम का नेतृत्व किया, जिसने विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए सरकार को 129 नामों की सिफारिश की, जिनमें से 93 नामों को मंजूरी दी गई।   न्यायमूर्ति गवई के कार्यकाल के दौरान पांच न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया, न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई, न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली की भी शीर्ष अदालत में नियुक्ति हुई। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर 14 मई से लेकर अब तक अपलोड किए गए न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी विवरण के मुताबिक, जब न्यायमूर्ति गवई भारत के प्रधान न्यायाधीश बने, उसके बाद सरकार की ओर से उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए मंजूर किए गए 93 नामों में अल्पसंख्यक समुदायों के 13 न्यायाधीशों और 15 महिला न्यायाधीशों के नाम शामिल थे। विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति गवई के कार्यकाल में जिन न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई, उनमें से पांच पूर्व या सेवारत न्यायाधीशों से संबंधित हैं, जबकि 49 न्यायाधीश बार से नियुक्त किए गए और बाकी सेवा संवर्ग से हैं। न्यायमूर्ति गवई रविवार (23 नवंबर) को पदमुक्त हो जाएंगे। उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश गवई ने अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जिनमें वक्फ कानून के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाना, न्यायाधिकरण सुधार कानून को रद्द करना और केंद्र को परियोजनाओं को बाद में हरित मंजूरी देने की अनुमति देना शामिल है। शुक्रवार का दिन प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गवई का अंतिम कार्य दिवस था। वह न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले दूसरे दलित न्यायाधीश थे। अपने अंतिम कार्य दिवस पर मिले सम्मान से अभिभूत न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि वह एक वकील और न्यायाधीश के रूप में चार दशकों की यात्रा पूरी करने के बाद “पूर्ण संतुष्टि की भावना के साथ” तथा “न्याय के छात्र” के रूप में संस्थान छोड़ रहे हैं।

रेलवे की बड़ी घोषणा: घना कोहरा बढ़ाएगा परेशानी, इन 24 ट्रेनों की 3 महीने तक रद्दीकरण लिस्ट जारी

नई दिल्ली  सर्दियों की दस्तक के साथ ही उत्तर भारत में कोहरे का संकट गहराने लगा है। खासकर उत्तर बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब से लेकर पूर्वी भारत तक हर सुबह रेलवे ट्रैकों पर घनी धुंध छाई रहती है। विजिबिलिटी कम होने से ट्रेनें घंटों लेट हो रही हैं। इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने पटना, प्रयागराज, हावड़ा, अमृतसर, कामाख्या, कोलकाता, अजमेर, अंबाला सहित कई रूटों पर चलने वाली कुल 24 लंबी दूरी की ट्रेनों को तीन महीने के लिए रद्द कर दिया है। यह रोक 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। इस फैसले से लाखों यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।   क्यों लिया गया यह फैसला? सर्दियों में कोहरे के कारण सिग्नल स्पष्ट दिखाई नहीं देते और ट्रैक की विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है। इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। विशाल रेलवे नेटवर्क के चलते ऐसे हालात में ट्रेन संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रेलवे का कहना है कि कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रोकने से नेटवर्म पर दबाव कम होगा, जिससे बाकी ट्रेनों को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से चलाया जा सकेगा।  

ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव: एक साल की सर्विस पर भी मिलेगा लाभ, ऐसे करें हिसाब

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लेबर लॉ में बड़े बदलाव करते हुए 29 श्रम कानूनों को महज चार तक सीमित कर दिया है। श्रम कानून में लागू किए गए सुधारों में एक अहम बदलाव ग्रेच्युटी से जुड़ा भी है। इसके तहत अब ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल नौकरी करना जरूरी नहीं रहेगा। अब सिर्फ सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ही कर्मचारी ग्रेच्युटी लाभ के योग्य हो जाएगा। सरकार ने बताया कि इस फैसले की वजह रिटायरमेंट बेनिफिट्स को बढ़ाना और ग्रेच्युटी कैलकुलेट करने के तरीके में ज्यादा ट्रांसपेरेंसी लाना है। ये बदलाव फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए खास तौर पर जरूरी हैं, जिन्हें अब नौकरी छोड़ने पर बेहतर फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिलेगी। आइए एक नजर डालते हैं ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन कैसे किया जाता है। ग्रेच्युटी = (आखिरी वेतन × 15 × कुल सेवा के साल) / 26 यह गणना हर पूरे साल की सेवा के बदले 15 दिन की सैलरी पर आधारित होती है। आखिरी वेतन में बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होता है। यदि कर्मचारी ने आखिरी साल में 6 महीने से ज्यादा काम किया है, तो उस साल को अगला पूरा साल मान लिया जाता है। 1 साल की नौकरी पर कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी? मान लीजिए आपकी आखिरी सैलरी ₹30,000 थी, तो ग्रेच्युटी इतनी होगी। ग्रेच्युटी = (30000 × 15 × 1) / 26 ग्रेच्युटी = ₹17,307 इस तरह 30,000 रुपये सैलरी पर 1 साल की नौकरी के लिए आपको ₹17,307 रुपये ग्रेच्युटी मिलेगी। 3 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी का उदाहरण यदि तीन साल की नौकरी के बाद आपकी आखिरी सैलरी 40,000 रुपये हो जाती है, तो ग्रेच्युटी इतनी हो जाएगी। ग्रेच्युटी = (40000 × 15 × 3) / 26 ग्रेच्युटी = ₹69,230 यानी 40,000 रुपये की सैलरी पर 3 साल की सेवा के लिए आपको लगभग ₹69,230 ग्रेच्युटी मिलेगी।

रेलवे ने जारी की बड़ी अपडेट: कोहरे के कारण 24 ट्रेनें 3 महीने तक रद्द, देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली  सर्दियों की दस्तक के साथ ही उत्तर भारत में कोहरे का संकट गहराने लगा है। खासकर उत्तर बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब से लेकर पूर्वी भारत तक हर सुबह रेलवे ट्रैकों पर घनी धुंध छाई रहती है। विजिबिलिटी कम होने से ट्रेनें घंटों लेट हो रही हैं। इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने पटना, प्रयागराज, हावड़ा, अमृतसर, कामाख्या, कोलकाता, अजमेर, अंबाला सहित कई रूटों पर चलने वाली कुल 24 लंबी दूरी की ट्रेनों को तीन महीने के लिए रद्द कर दिया है। यह रोक 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। इस फैसले से लाखों यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। क्यों लिया गया यह फैसला? सर्दियों में कोहरे के कारण सिग्नल स्पष्ट दिखाई नहीं देते और ट्रैक की विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है। इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। विशाल रेलवे नेटवर्क के चलते ऐसे हालात में ट्रेन संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रेलवे का कहना है कि कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रोकने से नेटवर्म पर दबाव कम होगा, जिससे बाकी ट्रेनों को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से चलाया जा सकेगा। तीन महीने तक रद्द रहने वाली ट्रेनों की सूची प्रयागराज – मुजफ्फरपुर रूट 14112 प्रयागराज जं.–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–25 फरवरी 2026) 14111 मुजफ्फरपुर–प्रयागराज जं. एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–25 फरवरी 2026) झांसी – कोलकाता रूट 22198 वीरांगना लक्ष्मीबाई–कोलकाता एक्सप्रेस (5 दिसम्बर 2025–27 फरवरी 2026) 22197 कोलकाता–वीरांगना लक्ष्मीबाई एक्सप्रेस (7 दिसम्बर 2025–1 मार्च 2026) हावड़ा – देहरादून रूट 12327 हावड़ा–देहरादून उपासना एक्सप्रेस (2 दिसम्बर 2025–27 फरवरी 2026) 12328 देहरादून–हावड़ा उपासना एक्सप्रेस (3 दिसम्बर 2025–28 फरवरी 2026) मालदा – दिल्ली रूट 14003 मालदा टाउन–नई दिल्ली एक्सप्रेस (6 दिसम्बर 2025–28 फरवरी 2026) 14004 नई दिल्ली–मालदा टाउन एक्सप्रेस (4 दिसम्बर 2025–26 फरवरी 2026) बरौनी – अंबाला रूट 14523 बरौनी–अंबाला हरिहर एक्सप्रेस (4 दिसम्बर 2025–26 फरवरी 2026) 14524 अंबाला–बरौनी हरिहर एक्सप्रेस (2 दिसम्बर 2025–24 फरवरी 2026) पूर्णिया – अमृतसर रूट 14617 पूर्णिया कोर्ट–अमृतसर जनसेवा एक्सप्रेस (3 दिसम्बर 2025–2 मार्च 2026) 14618 अमृतसर–पूर्णिया कोर्ट जनसेवा एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–28 फरवरी 2026) डिब्रूगढ़ – चंडीगढ़ रूट 15903 डिब्रूगढ़–चंडीगढ़ एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–27 फरवरी 2026) 15904 चंडीगढ़–डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस (3 दिसम्बर 2025–1 मार्च 2026) गया – कामाख्या रूट 15620 कामाख्या–गया एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–23 फरवरी 2026) 15619 गया–कामाख्या एक्सप्रेस (2 दिसम्बर 2025–24 फरवरी 2026) कामाख्या – आनंद विहार रूट 15621 कामाख्या–आनंद विहार एक्सप्रेस (4 दिसम्बर 2025–26 फरवरी 2026) 15622 आनंद विहार–कामाख्या एक्सप्रेस (5 दिसम्बर 2025–27 फरवरी 2026) हटिया – आनंद विहार रूट 12873 हटिया–आनंद विहार एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–26 फरवरी 2026) 12874 आनंद विहार–हटिया एक्सप्रेस (2 दिसम्बर 2025–27 फरवरी 2026) यह भी पढ़ें- 'मैं इसकी हत्या कर दूंगी…', हापुड़ में प्रिंसिपल ने छात्रा से की मारपीट और गाली गलौज, Video वायरल संतरागाछी – आनंद विहार रूट 22857 संतरागाछी–आनंद विहार एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–2 मार्च 2026) 22858 आनंद विहार–संतरागाछी एक्सप्रेस (2 दिसम्बर 2025–3 मार्च 2026) टाटा – अमृतसर रूट 18103 टाटा–अमृतसर एक्सप्रेस (1 दिसम्बर 2025–25 फरवरी 2026) 18104 अमृतसर–टाटा एक्सप्रेस (3 दिसम्बर 2025–27 फरवरी 2026) रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपने रूट और ट्रेन की स्थिति की जांच अवश्य कर लें, ताकि किसी असुविधा से बचा जा सके।  

जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण होगा ऐतिहासिक, अंतरराष्ट्रीय जज करेंगे समारोह में भाग

नई दिल्ली भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अभूतपूर्व और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिलेगा। दरअसल सोमवार, 24 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में होने वाले मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में दुनिया के कई देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल होंगे। बार एंड बेंच से बातचीत में तैयारियों से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर विदेशी न्यायिक प्रतिनिधि भारत के किसी मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित होंगे। 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे न्यायमूर्ति सूर्यकांत न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपने लंबे और महत्वपूर्ण न्यायिक करियर के बाद भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल कई अहम संवैधानिक फैसलों, न्यायिक संस्थानों में सुधार और कानूनी सहायता व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहलों के लिए जाना जाता है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट जज बनने से पहले वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। कूटनीतिक महत्व वाला आयोजन भारत सरकार ने विदेशी न्यायिक गणमान्य व्यक्तियों की पूरी सूची जारी की है। इनमें भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका और ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और उनके परिवारजन शामिल हैं। यह उपस्थिति न केवल भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को दिखाती है बल्कि भारत के न्यायिक और कूटनीतिक संबंधों में बढ़ती निकटता का संकेत भी देती ह विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की सूची भूटान     जस्टिस ल्योनपो नोरबू शेरिंग, भूटान के चीफ जस्टिस;     ल्हादेन लोटे, भूटान के चीफ जस्टिस की पत्नी केन्या     जस्टिस मार्था कूमे, केन्या के सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस और प्रेसिडेंट     जस्टिस सुसान न्जोकी न्दुंगु, केन्या की सुप्रीम कोर्ट जज। मलेशिया     जस्टिस तन श्री दातुक नलिनी पथमनाथन, फेडरल कोर्ट ऑफ मलेशिया की जज     पशुपति शिवप्रगसम, फेडरल कोर्ट ऑफ मलेशिया के जज के पति मॉरीशस     जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल, मॉरिशस की चीफ जस्टिस     रेबेका हन्ना बीबी गुलबुल, मॉरिशस के चीफ जस्टिस की बेटी नेपाल     जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेपाल के चीफ जस्टिस     जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, जज, नेपाल सुप्रीम कोर्ट     अशोक बहादुर मल्ला, जस्टिस सपना प्रधान मल्ला के पति     अनिल कुमार सिन्हा, नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और अभी नेपाल सरकार में कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री     उर्सिला सिन्हा, अनिल कुमार सिन्हा की पत्नी। श्रीलंका     जस्टिस पी पद्मन सुरसेना, श्रीलंका के चीफ जस्टिस     सेपालिका सुरसेना, श्रीलंका के चीफ जस्टिस की पत्नी     जस्टिस एस. थुरैराजा, PC, जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ श्रीलंका     शशिकला थुरैराजा, जस्टिस एस. थुरैराजा की पत्नी     जस्टिस अहमद नवाज, जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ श्रीलंका     रिजान मोहम्मद धलिप नवाजा, जस्टिस अहमद नवाजा की पत्नी ब्राजील     एंटोनियो हरमन बेंजामिन, नेशनल हाई कोर्ट ऑफ ब्राजील- सुपीरियर ट्रिब्यूनल डे जस्टिसा के मिनिस्टर न्यायपालिका के वैश्विक सहयोग का संकेत विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भारतीय न्यायपालिका में बढ़ते विश्वास और न्यायिक आदान–प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोजन भविष्य में न्यायिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और आपसी व्यवहारिक समझ को भी मजबूत कर सकता है। सोमवार का यह आयोजन भारतीय न्यायपालिका के लिए न केवल ऐतिहासिक बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

महाशक्तिमान हथियारों की तैयारी: ब्रह्मोस के बाप की 7400 KMPH रफ्तार, Su-30MKI जैसे जेटों से ताकत बढ़ेगी

बेंगलुरु  ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्‍ट्रैटजिक पॉलिसी में काफी बदलाव आया है. देसी टेक्‍नोलॉजी की मदद से फाइटर जेट और मिसाइल बनाने की रफ्तार को और तेज कर दिया गया है. भारत अभी भी फाइटर जेट का इंजन घरेलू स्‍तर पर नहीं बना पाता है, लेकिन अब इससे जुड़े प्रोजेक्‍ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी की मदद से पांचवीं पीढ़ी का देसी फाइटर जेट डेवलप करने के डिफेंस प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. भारत स्‍वदेशी एयर डिफेंस सिस्‍टम बनाने में जुटा है, जिसे ‘मिशन सुदर्शन’ का नाम दिया गया है. इसके साथ ही एक और अहम प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. भारत अल्‍ट्रा मॉडर्न हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप करने में जुटा है. यह मिसाइल मैक-5 या फिर 6 की रफ्तार से टारगेट की ओर मूव करने में सक्षम होगी. इसका मतलब यह हुआ कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल 7400 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी ज्‍यादा की रफ्तार से दुश्‍मनों पर धावा बोल सकती है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)  ET-LDHCM (Enabling Technologies for Long Duration Hypersonic Cruise Missile) हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल डेवलप करने में जुटा है. इस दिशा में डीआरडीओ को एक बड़ी सफलता मिली है. बता दें कि पाकिस्‍तान में तबाही मचाने वाली ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की स्‍पीड 2300 से 3700 किलोमीटर प्रति घंटे है. भारत ने 2024 में हाइपरसोनिक हथियार तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई. DRDO ने ET-LDHCM कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण प्रगति की पुष्टि की है. यह प्रोजेक्‍ट लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाली हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के लिए मूल तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, DRDO ने एक्टिव-कूल्ड स्क्रैमजेट इंजन का डिजाइन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह इंजन वह मुख्य तकनीक है, जो मिसाइल को लंबी दूरी तक हाइपरसोनिक गति (मैक 5 से अधिक) बनाए रखने में सक्षम बनाएगी. हाइपरसोनिक उड़ान के दौरान मिसाइल की बाहरी सतह और इंजन पर अत्यधिक तापमान पैदा होता है. ऐसे में एक्टिव कूलिंग सिस्टम बेहद जरूरी होता है, ताकि मिसाइल क्षतिग्रस्त न हो और अपनी गति बनाए रख सके. इसी कारण स्क्रैमजेट इंजन के एक्टिव-कूल्ड डिजाइन को पूरा होना भारत के लिए एक बड़े तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. दुनिया के बहुत कम देशों ने ऐसी तकनीक पर प्रभुत्व हासिल किया है. फाइटर जेट बनेंगे महाशक्तिमान प्रोजेक्‍ट के तहत सिर्फ डिजाइन ही नहीं बल्कि एक सब-स्केल कम्बस्टर प्रोटोटाइप भी तैयार किया गया और उसका रीक्षण किया गया. यह परीक्षण हाई-एनथैल्पी टेस्ट फेसेलिटी में किया गया, जिसमें वास्तविक उड़ान जैसी परिस्थितियां तैयार की गई थीं. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल में 60 सेकंड तक स्थिर दहन (स्टेबल कम्बशन) हासिल किया गया, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. DRDO के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, इस परीक्षण ने स्क्रैमजेट इंजन की पूरी क्षमता की पुष्टि की है और इससे भविष्य के पूर्ण-स्केल मॉडलों के विकास में मदद मिलेगी. ये उपलब्धियां भारत के पहले हाइपरसोनिक परीक्षण वाहन HSTDV की सफलता के बाद हासिल की गई हैं, जिसने 2020 में मैक 6 की गति प्राप्त की थी. हालांकि, ET-LDHCM प्रोजेक्‍ट उससे अलग है, क्योंकि यह सिर्फ गति पर नहीं बल्कि लंबे समय तक हाइपरसोनिक उड़ान पर केंद्रित है. यह तकनीक सामरिक हमलों से लेकर बड़े सैन्य अभियानों तक कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है. भविष्य में इसे लड़ाकू विमानों जैसे Su-30 MKI और आने वाले AMCA के साथ भी जोड़ा जा सकता है. एयर डिफेंस सिस्‍टम का तोड़ चीन और रूस की हाइपरसोनिक क्षमताओं के बीच यह प्रगति भारत की सामरिक क्षमता को काफी मजबूत करेगी. लंबी दूरी तक उड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें किसी भी दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदने में सक्षम होती हैं और जरूरत पड़ने पर पारंपरिक या परमाणु वारहेड भी ले जा सकती हैं. वायुसेना के लिए इसका एयर-लॉन्च वर्ज़न भारत की गहरी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. इस परियोजना को करीब 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे यह साफ है कि रक्षा मंत्रालय भविष्य की ऐसी तकनीक पर ध्यान दे रहा है जिसके सैन्य और नागरिकदोनों तरह के उपयोग हो सकते हैं. इससे हाई-स्पीड एविएशन के क्षेत्र में भी बड़े फायदे देखने को मिल सकते हैं. भारत की यह प्रगति आने वाले वर्षों में देश की रक्षा क्षमता में एक नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है.

नए लेबर कोड्स के तहत 5 नहीं, 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी, समझें राशि कैसे तय होगी

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक बदलाव किया है. 29 श्रम कानूनों को सिमित करके अब सिर्फ 4 नए श्रम कानून (New Labour Codes) लागू किए गए हैं. यह कानून सभी तरह के वर्कर्स (संगठित, असंगठित, गिग वर्कर्स, माइग्रेंट वर्कर्स, प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स और महिलाएं) पर लागू होंगे. 4 नए श्रम कानूनों के तहत सैलरी, ग्रेच्‍युटी, सोशल सिक्‍योरिटी, महिलाओं को अधिकार और जॉब गारंटी समेत कई प्रमुख फायदे दिए गए हैं.  सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्‍युटी को लेकर किया गया है. पहले ग्रेच्‍युटी 5 साल की नौकरी पर मिलती थी, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव करते हुए सिर्फ 1 साल कर दिया गया है. अब कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की नौकरी पर ही ग्रेच्‍युटी का लाभ दिया जाएगा.  किन कर्मचारियों को मिलेगी ग्रेच्‍युटी?  पहले ग्रेच्‍युटी का लाभ 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को ही दिया जाता था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है. इसके तहत फिक्‍स्‍ड टर्म कर्मचारियों और कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी लाभ दिया जाएगा. अगर वे 1 साल तक ही नौकरी करके छोड़ देते हैं तो भी इसका लाभ मिलेगा.   है. Gratuity निकालने के लिए- अंतिम सैलरी  x (15/26) x कंपनी में काम किए गए साल, वाला फॉर्मूला अप्‍लाई करना होता है.  फॉर्मूला- ग्रेच्‍युटी = अंतिम सैलरी  x (15/26) x काम किए गए वर्ष 5 साल की नौकरी पर कितनी मिलती है ग्रेच्‍युटी?  मान लीजिए किसी व्‍यक्ति ने एक ही कंपनी में लगातार 5 सालों तक काम किया और उसकी अंतिम सैलरी (Basic Pay+DA) 60 हजार रुपये था. इस  हिसाब से कैलकुलेट करें तो उसकी ग्रेच्‍युटी 1,73,077 रुपये बनेगी.  60,000 x (15/26) x 5  = 1,73,077 रुपये 1 साल की सर्विस पर कितनी बनेगी ग्रेयुटी?  अब मान लीजिए सरकार नए श्रम कानून के तहत ग्रेच्‍युटी कैलकुलेट करने के फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं करती है और 1 साल की नौकरी में अंतिम बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये हो तो ग्रेच्‍युटी कुल इतना होगा.  50,000 x (15/26) x 1  = 28,847 रुपये  क्या होती है ग्रेच्युटी?  Gratuity किसी भी कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को एक तरह से उनके काम के बदले दिया जाने वाला तोहफा होता है. यह अभी तक एक संस्‍थान में ही 5 सालों तक लगातार नौकरी करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को दिया जाता रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव करने 1 साल तक सर्विस करने वाले कर्मचारियों को भी जोड़ दिया गया है. साथ ही ग्रेच्‍युटी का लाभ फिक्‍स्‍ड टर्म कर्मचारियों और कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले कर्मचारियों को भी दिया जाएगा. 

जिहादी प्लान का पर्दाफाश: डॉ. शाहीन ने बनाई ‘स्लीपर सेल’, शामिल थीं लड़कियां

कानपुर  दिल्ली लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार, दिल्ली विस्फोट के बाद पकड़ी गई जैश-ए-मोहम्मद की लेडी विंग कमांडर डॉ. शाहीन ने कानपुर और आसपास के जिलों में टीनएजर लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपना नेटवर्क तैयार किया था. इनमें ज्यादातर लड़कियां गरीब परिवारों से थीं, जिन्हें बेहतर जिंदगी और धार्मिक शिक्षा का झांसा देकर अपने ग्रुप में शामिल किया गया था. इतना ही नहीं, इस मामले की जांच कर रही जांच एजेंसी एनआईए के इनपुट पर यूपी एटीएस ने भी शुक्रवार को 10 से ज्यादा डॉक्टरों से पूछताछ की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और डॉ. आदिल के संपर्क में रहे थे. हालांकि अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है. अधिकारियों के अनुसार, जिन जिलों में डॉक्टरों से पूछताछ हुई, उनमें बहराइच, अलीगढ़, नोएडा, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और मुजफ्फरनगर शामिल हैं. एटीएस ने एनआईए को सौंप अहम सुबूत मुरादाबाद में तीन डॉक्टरों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उन्हें एटीएस मुख्यालय (लखनऊ) बुलाया गया है. ये तीनों दिल्ली धमाके के बाद अपने मोबाइल बंद कर चुके थे, और पिछले महीने फरीदाबाद में उनकी लोकेशन मिली थी, जिसके बाद शक और गहरा गया. वहीं, एटीएस ने डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज के घर से मिले कई अहम सुबूत एनआईए को सौंप दिए हैं. एनआईए ने अभी इस मामले में औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है, लेकिन केस प्रॉपर्टी उनकी तहकीकात के लिए ट्रांसफर कर दी गई है. शाहीन ने कानपुर में तैयार किया था महिला स्लीपर सेल नेटवर्क रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच-पड़ताल में यह भी पता चला है कि डॉ. शाहीन ने कानपुर में अपनी महिला विंग का मजबूत नेटवर्क तैयार किया था. इसमें 19 से अधिक महिलाएं शामिल थीं और सभी के मोबाइल पिछले दिनों एक साथ बंद मिले. ये नंबर कानपुर और आसपास के जिलों फतेहपुर, उन्नाव, कन्नौज आदि में बंद हुए थे. एजेंसियों का दावा है कि शाहीन ने इन महिलाओं को कट्टरपंथी विचारधारा और ब्रेनवॉश के जरिए अपने संगठन जमात-उल-मोमिनात में शामिल किया था. उसका लक्ष्य भारत में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की ‘आतंकी भर्ती’ करना था. शाहीन की गिरफ्तारी के तुरंत बाद बंद हो गए थे नंबर सूत्रों के मुताबिक, शाहीन की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही उसकी महिला विंग के लगभग सभी नंबर अचानक बंद हो गए. एजेंसियों को शक है कि सभी नेनए मोबाइल या नए सिम ले लिए हैं. खुफिया एजेंसियों ने अब टेलिकॉम कंपनियों से 10 नवंबर के बाद बेचे गए नए सिम की पूरी डिटेल मांगी है ताकि संदिग्ध नंबरों को ट्रैक किया जा सके. दिल्ली धमाके में कानपुर के सिम का इस्तेमाल जांच में यह बात भी सामने आई है कि दिल्ली में हुआ विस्फोट कानपुर से खरीदे गए सिम कार्ड से ऑपरेट किया गया था. आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर ने धमाके से ठीक पहले कई नंबरों पर कॉल की थी और फिर फोन बंद कर दिया था. बीटीएस (मोबाइल टावर) डेटा में जिन नंबरों की लोकेशन मिली, उनमें कई कानपुर के हैं. इनकी खरीदारी बेकनगंज क्षेत्र से हुई बताई जा रही है, जिसकी जांच जारी है.