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देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलों पर BJP मंत्री का बड़ा बयान, कहा- अभी महाराष्ट्र में ही जरूरत

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे अब केंद्र की राजनीति में आ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर ना तो फडणवीस और ना ही भाजपा की शीर्ष लीडरशिप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस बीच महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री और BJP नेता पंकजा मुंडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में शामिल होने की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फडणवीस इस समय महाराष्ट्र में जहां हैं, वहीं उनकी जरूरत है। पंकजा मुंडे ने कोल्हापुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसा फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या पीएम मोदी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता। ‘फडणवीस प्रभावशाली और मजबूत नेता’  रिपोर्ट के मुताबिक, पंकजा मुंडे ने फडणवीस की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक प्रभावशाली और अकादमिक रूप से मजबूत नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले करीब ढाई दशक से फडणवीस के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ प्रार्थना कर सकती हूं कि वह वर्तमान पद से आगे बढ़ें। हालांकि, अभी उन्हें वहीं जरूरत है, जहां वह हैं।” पंकजा का यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस हालिया दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी फडणवीस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं। क्या दावा कर बैठे संजय राउत? संजय राउत ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जिसके तहत महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राष्ट्रीय राजधानी बुलाकर उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद सौंपने की कोशिश की जा रही है। राउत ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि 'भगवा परिवार' दिल्ली के बाहर के किसी प्रमुख नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की तैयारी कर रहा है और इस अहम पद के लिए फडणवीस सबसे आगे चल रहे हैं। राउत के मुताबिक आरएसएस और पार्टी से जुड़ी अन्य अहम शख्सियतें फडणवीस को दिल्ली लाने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला करते हुए संजय राउत ने दावा किया कि इतिहास गवाह है कि कोई भी पूर्व गृह मंत्री कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही अमित शाह शीर्ष पद पाने की बड़ी महत्वाकांक्षा रखते हों, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया है। मनोज जरांगे की मांगों पर भी बोलीं पंकजा पंकजा मुंडे ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के जारी अनशन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों को पूरा करने के लिए प्रयास कर रही है। जरांगे की मांग है कि जिन मराठाओं के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उन्हें जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। इसके अलावा, वह कोल्हापुर, सतारा और मुंबई गजेटियर में मौजूद प्रावधानों को लागू कर मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। पंकजा मुंडे ने बताया कि सरकार ने जरांगे से बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। बाद में पंकजा मुंडे ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इसमें पंचगंगा नदी में प्रदूषण से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।

देवेंद्र फडणवीस का भावुक बयान- अजित दादा जैसा कद दोबारा नहीं मिलेगा, अपूरणीय क्षति

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे जो महाराष्ट्र के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राज्य को उनका नेतृत्व उस रूप में कभी नहीं मिल पाया। उनके जाने से एक खालीपन पैदा हो गया है और अब वैक्यूम शब्द का असली मतलब समझ में आ रहा है। विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि “दादा” जैसा नेता फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा। फडणवीस ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार हमेशा सबसे पहले विधान भवन पहुंचते थे और अपनी सीट पर मौजूद रहते थे। सदन की कार्यवाही कितनी भी लंबी क्यों न चले, वह अंत तक अपनी जगह पर डटे रहते थे। यह बहुत पीड़ादायक है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। इस बार बजट पेश करने की जिम्मेदारी खुद संभाल रहे फडणवीस ने कहा कि बजट के मामले में अजित पवार कभी भी कठिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब वित्त विभाग ने ‘लड़की बहिन’ योजना पर भारी आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था, तब भी अजित पवार अपने फैसले पर कायम रहे और यह सुनिश्चित किया कि योजना शुरू की जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “लड़की बहन योजना शुरू होने के बाद अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने हमें भी वह जैकेट पहनाई थी। अब ये बातें सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं। यह शोक प्रस्ताव लाना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है।” महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम की एक पंक्ति का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि अजित पवार का जाना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके लिए गहरा व्यक्तिगत दुख भी है। उन्होंने कहा, “कहते हैं समय हर घाव भर देता है, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी कम नहीं होते, चाहे कितना भी समय बीत जाए। यह वैसा ही दर्द है। किसी नेता के जाने के बाद हम अक्सर कहते हैं कि एक ‘खालीपन’ बन गया है, लेकिन जब अजित दादा जैसे नेता चले जाते हैं, तब सच में उस शब्द का मतलब समझ में आता है। उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता।” मुख्यमंत्री ने एक प्रेरक पंक्ति भी दोहराई, “काम को जिंदगी दो और मौत को आराम।” उन्होंने अजित पवार को ऐसा नेता बताया, जिसने अपने जीवन का हर पल काम के लिए समर्पित किया और हर काम की योजना बनाई। फडणवीस ने कहा, “हम दोनों का जन्म 22 जुलाई को हुआ था। वह मुझसे 11 साल बड़े थे, इसलिए सच मायनों में मेरे ‘दादा’ थे। हमारी दस साल से अधिक समय तक गहरी दोस्ती रही। हम 1999 में मिले थे लेकिन 2014 के बाद हमारे बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया। मैं एनसीपी को राजनीतिक सहयोगी मानता था, लेकिन अजित दादा को हमेशा भावनात्मक रूप से करीब माना।” उन्होंने 2019 में सरकार गठन से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे, जो हर स्थिति में अपनी बात खुलकर रखते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “2019 में सरकार बनाने का फैसला हुआ था, लेकिन बाद में उनके वरिष्ठ नेताओं ने अपना निर्णय बदल दिया, फिर भी क्योंकि उन्होंने मुझसे वादा किया था, उन्होंने उसे निभाने का फैसला किया। कई लोग इसे ‘सुबह-सुबह की शपथ’ कहते थे, लेकिन इस बात से दादा को चिढ़ होती थी। उनका कहना था कि ‘सुबह-सुबह’ का मतलब छह बजे होता है, जबकि हमने नौ बजे शपथ ली थी। उन्हें इस फैसले की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ फैसला दिया, तब हम दोनों ‘वर्षा’ बंगले पर मौजूद थे। मैंने उनसे कहा था कि वे अपना निर्णय खुद लें, क्योंकि उन्हें अपने साथ जुड़े लोगों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।” फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार समय के बेहद पाबंद नेता थे और उनका राजनीतिक सफर भी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “दादा हमेशा समय का पूरा ध्यान रखते थे, लेकिन इस बार वे अपनी ही टाइमिंग से चूक गए। सबने उन्हें लंबी पारी खेलते देखा, लेकिन वे बहुत जल्दी हमें छोड़कर चले गए।” उन्होंने बताया कि अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे अक्सर मजाक में कहते थे, “मैं किसी दिन मुख्यमंत्री बनूंगा लेकिन अभी के लिए उपमुख्यमंत्री ही ठीक है।”

देशभर में बम धमाकों की साजिश! फडणवीस बोले—पाकिस्तान था मास्टरमाइंड

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लाल किले के पास हुए विस्फोट के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश सीधी जंग में भारत को हरा नहीं सकता, इसलिए वह आतंकी हमले करवा रहा है। फडणवीस ने कहा, 'पाकिस्तान को पता है कि वह खुले युद्ध में भारत को हरा नहीं सकता, इसलिए पहलगाम में आतंकी हमला और दिल्ली में हालिया विस्फोट करवाया गया।' उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें 3000 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ था। इसका इस्तेमाल मुंबई और देश के अन्य शहरों में आतंकी हमलों के लिए किया जाना था।   मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'मुझे खुशी है कि आज हमारे पास एक बदला हुआ भारत है। भारत ने इन चीजों को पहले ही भांप लिया और ऑपरेशन किए। उनकी मंशा देश के हर कोने में बम धमाके करने की थी। हमारे देश के कई शहरों सहित मुंबई भी उनके निशाने पर था। जब हमारी भारतीय एजेंसियों ने इसकी भनक लगी और उन पर सीधा हमला किया, तो उन्होंने दिल्ली में विस्फोट करके अपनी मौजूदगी दिखाई।' उन्होंने कहा कि इस विस्फोट में कम से कम 10 लोगों की जान गई है। ऑपरेशन सिंदूर की बताई जरूरत देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि अगर भारत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई की होती, तो देश को निशाना बनाने का कोई भी दोबारा दुस्साहस नहीं कर पाता। मुंबई हमले की 17वीं बरसी पर गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित कार्यक्रम में वह बोल रहे थे। फडणवीस ने कहा कि यह सिर्फ ताज और ट्राइडेंट होटलों पर हमला नहीं था। उन्होंने कहा कि मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और इस शहर पर हमला देश की संप्रभुता पर हमला है। पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को बनाया निशाना सीएम फडणवीस ने कहा, ‘अगर हमने यह बात समझ ली होती और उस समय ऑपरेशन सिंदूर चलाने का साहस किया होता, तो कोई भी हम पर दोबारा हमला करने का दुस्साहस नहीं करता।’ भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी। मुंबई आतंकी हमले में कम से कम 166 लोग मारे गए थे। फडणवीस ने कहा, '17 साल बीत चुके हैं, लेकिन हमारे दिलों में अभी भी दर्द है। हम यहां शहीदों और वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं। याद रखें कि आतंक का खतरा अभी भी बना हुआ है और हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हमें अपने देश की आंख और कान बनना होगा। अगर हम एकजुट हैं तो हम सुरक्षित हैं।’  

देवेंद्र फडणवीस पर टिक सकती है बीजेपी की नजर, चुनाव के बाद तय होगा नया चीफ

नईदिल्ली  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के बाद भारतीय जनता पार्टी की कमान कौन संभालेगा, इसे लेकर फैसला अब तक नहीं हो सका है। भाजपा में अब तक उम्मीदवारों के नाम पर मंथन जारी है। अब कहा जा रहा है कि संभावित उम्मीदवारों की रेस में एक मुख्यमंत्री और एक और केंद्रीय मंत्री की भी एंट्री हो गई है। हालांकि, भाजपा ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। लंबे समय से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई नेताओं के नामों की भी चर्चा है।  रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के नाम पर विचार कर सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फडणवीस को संकेत दे दिए गए हैं कि उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सीएम पद छोड़ने के लिए कहा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया, 'संदेश दे दिया गया है, लेकिन अब तक उनकी भविष्य की भूमिका पर चर्चा नहीं हुई है। संभावनाएं हैं कि भाजपा अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम पर विचार किया जा सकता है। वह युवा हैं और उनके पास आरएसएस का समर्थन है। साथ ही उन्हें पार्टी नेतृत्व का विश्वास भी हासिल है।' इसे लेकर फडणवीस ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इधर, कहा जाता है कि रूपाला को भी संघ का समर्थन हासिल है। साथ ही उन्हें पीएम मोदी का भी करीबी माना जाता है। इनके अलावा राजनीतिक गलियारों में प्रधान के नाम पर भी अटकलें तेज हैं। कब होंगे चुनाव भाजपा अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्टी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन कयास लगाए जा रहे थे कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा इसपर फैसला ले सकती है। इसके अलावा खबरें थीं कि बीजेपी ने संभावित उम्मीदवारों की सूची भी तैयार कर ली है, जिसपर उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के बाद विचार किया जाएगा। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होना है।