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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ओमान दौरा शुरू, एयरपोर्ट पर मिला शाही स्वागत

अम्मान  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंच गए हैं। जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी यह यात्रा जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन के आमंत्रण पर कर रहे हैं। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय मुद्दों और आपसी हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। अम्मान पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह जॉर्डन पहुंचकर प्रसन्न हैं और हवाई अड्डे पर मिले आत्मीय स्वागत के लिए प्रधानमंत्री जाफर हसन के आभारी हैं। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि यह यात्रा भारत और जॉर्डन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-जॉर्डन संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। बता दें कि जॉर्डन में रहने वाले भारतीय, प्रधानमंत्री से मिलने और उनका स्वागत करने के लिए अति उत्साहित हैं। लोग पलके बिछाए पीएम मोदी के इंतजार में नजर आए। भारतीय प्रवासी समिति के सदस्य सनल कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से जॉर्डन में रहकर कपड़ा व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि जॉर्डन के टेक्सटाइल उद्योग में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, “हम एक बिलियन डॉलर की कंपनी हैं और यहां 35,000 लोगों को रोजगार दे रहे हैं, जिनमें 7,000 जॉर्डनवासी और 6,000 भारतीय शामिल हैं। यह देश हमें शानदार व्यवसाय करने का अवसर दे रहा है।” प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए सनल कुमार ने कहा, “वे एक अद्वितीय व्यक्तित्व हैं। शब्दों में उनका वर्णन करना मुश्किल है। दुनिया के किसी भी कोने में जाइए, जैसे ही आप कहते हैं कि आप भारत से हैं, लोग तुरंत प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेते हैं। वे एक अद्भुत और निस्वार्थ नेता हैं, जो देश के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को तीन देशों जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरान वे रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री की यह जॉर्डन यात्रा किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन के निमंत्रण पर हो रही है और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे खास माना जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर में बारिश–बर्फबारी का अलर्ट, जानिए कब से होगी Snowfall

श्रीनगर  लंबे समय तक चले सूखे के बाद, जम्मू-कश्मीर के मौसम में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। जम्मू-कश्मीर में मौसम बदलने की संभावना है, 20 से 22 दिसंबर के बीच बारिश और बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाला वेदर सिस्टम केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में बहुत जरूरी बारिश ला सकता है, जिससे सूखे से राहत मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में इसकी तीव्रता और इलाके के हिसाब से असर का डिटेल्ड अनुमान आने की उम्मीद है। इस बीच, कश्मीर घाटी में आज तापमान में कुछ सुधार देखा गया। इस बीच, कश्मीर घाटी के निवासियों को आज तापमान में हल्की बढ़ोतरी से कुछ राहत मिली है।

यहूदियों की दीवाली ‘हनुक्का’ क्या है, जिसके जश्न के दौरान बोंडी बीच पर चली गोलियां

सिडनी  ऑस्ट्रेलिया के शहर सिडनी के बोंडी बीच पर दो आतंकी बाप-बेटे ने जश्न मना रहे लोगों पर गोलीबारी करनी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में अभी तक 16 लोगों के मारे जाने की और करीब तीन दर्जन से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। प्रकाश के त्योहार हनुक्का का जश्न मना रहे यहूदी समुदाय के इन लोगों के ऊपर गोलीबारी करने वाले आतंकी पाकिस्तानी मूल के थे। इनमें से एक ही मौत हो गई है, जबकि एक को गिरफ्तार करके अस्पताल पहुंचा दिया गया है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बानीज ने इसे यहूदी विरोधी आतंकवाद करार दिया है।   गौरतलब है कि मरने वाले लगभग सभी लोग यहूदी समुदाय से थे। यह बोंडी बीच पर यहूदियों के सबसे पवित्र त्योहार हनुक्का का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे। यह त्योहार लगभग आठ दिनों तक चलता है, इसकी शुरुआत के दिन में चानुक्का बाय द सी कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। रविवार को यही कार्यक्रम था, जिसमें आतंकी बाप-बेटे ने अपनी कट्टरवादी सोच का परिणाम दिखाया। क्या होता है हनुक्का? यहूदी धर्म में हनुक्का को बहुत ही पवित्र त्योहार माना जाता है। आठ दिनों तक चलने वाला यह रोशनी का त्योहार हिंदुओं के त्योहार दीवाली की तरह होता है। यह त्योहार करीब 2200 साल पुरानी एक घटना के आधार पर मनाया जाता है। हिब्रु भाषा में हनुक्का का मतलब समपर्ण होता है। इस त्योहार की शुरुआत की कहानी ग्रीक-सीरियाई शासकों के दौर से शुरू होती है। ऐसा माना जाता है कि इन शासकों ने यरुशलम पर कब्जा करके यहूदी धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ मैकाबी नामक एक छोटे से विद्रोही कबीले ने लड़ाई लड़ी, तमाम संघर्ष के बाद भी वह अपनी से बड़ी सेना को हराने में कामयाब रहे। इस जीत के बाद मैकाबियों ने यहूदी मंदिर को फिर से अपने कब्जे में ले लिया। मंदिर के पवित्रता को बढ़ाने के लिए उन्होंने मेनोरा (दीप स्तंभ) पर दिया जलाने की कोशिश की, लेकिन वहां पर केवल एक दिन का ही तेल उपलब्ध था। ऐसा माना जाता है कि मैकाबियों ने जब यह दिया जलाया तो यह लगभग आठ दिनों तक जलता रहा। इसके बाद यहूदियों ने इस समय को हनुक्का त्योहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया। दीपावली की तरह हनुक्का भी परिवार केंद्रित त्योहार है, जिसमें परिवार के सभी लोग एक जगह पर एकत्र होकर प्रार्थना करते हैं। यूरोप के कई देशों में इस त्योहार को यहूदी क्रिसमस भी कहा जाता है, क्योंकि कई बार यह त्योहार क्रिसमस के आसपास भी पड़ता है। हनुक्का की तारीखें हर साल बदलती रहती हैं, क्योंकि यहूदी चंद्र कैलेंडर के हिसाब से अपने त्योहारों की तारीख को तय करते हैं। ठीक उसी तरह जैसे दीपावली की तारीख भी हर साल बदलती रहती है।  

NIA ने दायर किया आरोपपत्र, पहलगाम आतंकी हमले की परत-दर-परत कहानी आई सामने

जम्मू-कश्मीर  पहलगाम हमले के लगभग 8 महीने बाद जम्मू की विशेष अदालत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। एनआईए की जांच में पाया गया कि इस हमले में सीधे तौर पर शामिल तीन आतंकवादी सेना के ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे। इन आतंकवादियों के नाम सुलेमान शाह (उर्फ फैजल जट्ट या हाशिम मूसा), हमजा (उर्फ हमजा अफगानी) और जिब्रान (उर्फ जिब्रान भाई) थे। इसके अलावा, हमले से एक दिन पहले आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, पनाह और भोजन उपलब्ध कराने वाले बशीर अहमद जोठर, परवेज अहमद जोठर और मोहम्मद यूसुफ कटारी के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं। चार्जशीट में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके प्रॉक्सी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) का भी नाम लिया गया है। एनआईए की जांच में पता चला कि बशीर और परवेज स्थानीय निवासी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों ने आतंकियों को 21 अप्रैल की रात हिल पार्क इलाके के एक ढोक (झोपड़ी) में ठहराया था। इन दोनों भाइयों को हमले के लगभग दो महीने बाद 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, जोठर भाइयों के फोन से कुछ पाकिस्तानी नंबर मिले थे। एनआईए के अनुसार, इन व्यक्तियों पर उन तीन आतंकवादियों को शरण देने का आरोप है जिन्हें जुलाई में भारतीय सेना ने मार गिराया था। गिरफ्तार किए गए दो व्यक्तियों (परवेज अहमद जोठर और बशीर अहमद जोठर) ने इन तीन हमलावरों की पहचान पाकिस्तान के नागरिकों के रूप में की थी जो प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। गौरतलब है कि पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था। इस अभियान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालयों तथा प्रशिक्षण केंद्रों सहित नौ स्थानों को निशाना बनाया गया था, जहां से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई जाती थी।

मंदिर व्यवस्था में सुधार की कवायद तेज, हिमाचल में प्रदेश मंदिर प्रबंधन बोर्ड गठन की मांग ने पकड़ा जोर

ज्वालामुखी हिमाचल प्रदेश में मंदिरों के प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन लाने को लेकर बहस छिडी है। हिमाचल प्रदेश में भी हिमाचल प्रदेश मंदिर प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग जोर पकड़ने लगी है। हिमाचल प्रदेश में हिन्दू सार्वजनिक संस्थान एवं पूर्व विन्यास अधिनियम के तहत मंदिरों का सरकार ने अधिग्रहण किया था। जिसका मकसद मंदिरों में व्यवस्था को पारदर्शी बनाना, व्यवस्था में सुधार लाकर श्रद्धालुओं के लिये बेहतर माहौल तैयार करने के अलावा पूजा पाठ में सुधार लाने की बात थी। लेकिन मंदिरों के लिये मौजूदा व्यवस्था दोषपूर्ण बताया जा रहा है। चूंकि मंदिरों में सरकारी दखल बढ़ता जा रहा है। हिमाचल में मंदिर आज पूजा पाठ नहीं,बल्कि राजनीति के अखाड़ा बनते जा रहे हैं। मंदिरों में विधायकों की मर्जी के प्रबंधन ट्रस्ट बन रहे हैं, ऐसे लोग मनोनीत किये जा रहे हैं। जिनका सार्वजनिक जीवन में दूर तक कोई नाम नहीं है। मंदिरों में विधायकों की मर्जी के बिना कोई पत्ता तक नहीं हिला सकता। मंदिरों के प्रबंधन के लिये बनाये गये ट्रस्ट में शामिल होने वाले लोगों के लिये भी कोई ठोस नीति नहीं है। कि किस आधार पर उनका चयन हो। हिमाचल प्रदेश के करीब 52 हिन्दू मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं। जिनका प्रबंधन सरकार देखती है। लेकिन अब इसी व्यवस्था का विरोध होने लगा है। सरकार से मंदिर प्रबंधन में सुधार करने की मांग करने लगे हैं। दलील दी जा रही है कि तिरुपति से लेकर वैष्णो देवी तक मंदिरों में बेहतरीन व्यवस्था है। व अब उत्तराखंड के बाद अयोध्या का नया उदाहरण सबके सामने है। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों का जिम्मा प्रदेश भाषा विभाग के पास है। लेकिन जिलाधीश के पास इनका नियंत्रण है। जिलाधीश को मंदिर कमीशनर की जिम्मेवारी अतिरिक्त तौर पर दी गई है। व स्थानीय स्तर पर एसडीएम मंदिर न्यास के चेयरमैन हैं। वहीं मंदिर अधिकारी राजस्व महकमे से डेपुटेशन पर आये तहसीलदार हैं। किसी भी विभाग के पास मंदिरों का नियंत्रण नहीं है। इस त्रिकोणीय व्यवस्था से सुधार नहीं बिगाड़ हो रहा है। किसी भी अधिकारी की सीधे तौर पर कोई जवाबदेही स्पष्ट तौर पर तय नहीं हे। कुछ साल पहले प्रेम कुमार धूमल सरकार ने प्रदेश के मंदिरों में व्यवस्था में सुधार लाने के लिये राणा कश्मीर सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार समिति गठित की गई। समिति ने कई सुझाव सरकार को दिये। लेकिन उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव न्यायपालिका पर दबाव? मद्रास HC जज मामले में पूर्व जज का बड़ा बयान

मुंबई  मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ विपक्षी सांसदों द्वारा लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव पर पूर्व जजों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स के 56 रिटायर्ड न्यायाधीशों ने एक बयान जारी कर जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग की निंदा की और इसे न्यायाधीशों को डराने-धमकाने का 'बेशर्म प्रयास' करार दिया।   इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले 56 जजों में शामिल मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के.के. त्रिवेदी ने पीटीआई से बात करते हुए महाभियोग को पूरी तरह से गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का यह प्रयास राजनीतिक रूप से प्रेरित है या फिर दबाव बनाकर अपने पक्ष में फैसला हासिल करने का प्रयास है। पूर्व जज त्रिवेदी ने कहा, "हम सभी इस बात पर सहमत हैं कि विपक्षी दलों द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह गलत है, खासकर तब जब यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। यह कार्रवाई या तो पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य की वजह से की गई है, या फिर किसी एक पक्ष के हिसाब से फैसला दिलाने के लिए न्यायाधीश पर दबाव बनाने का प्रयास है।" पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि दोनों ही परिस्थितियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे न्यायपालिका और भारतीय न्याय व्यवस्था की साख को खतरा है। इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार किसी भी जज को पद से हटाने का प्रस्ताव केवल कदाचार या अक्षमता के आधार पर होता है, जो आरोप विपक्षी सांसद लगा रहे हैं वह कानूनी रूप से ही मान्य नहीं है।   क्या है मामला? यह पूरा मामला तमिलनाडु के मदुरै जिले में स्थित अरुलमिघु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर के दीपथून मामले से जुड़ा हुआ है। 1 दिसंबर को जस्टिस स्वामीनाथन ने एक याचिका के संदर्भ में मंदिर प्रशासन को यह जिम्मेदारी दी कि वह उची पिल्लेयार मंडपम के पास परंपरागत रूप से जलाए जाने वाले दीप के अलावा पहाड़ी के पत्थर स्तंभ पर भी दीप जलाएं। वहां पर मौजूद दरगाह का जिक्र करते हुए एकल पीठ ने कहा कि दीप जलाने से पास स्थित दरगाह या मुस्लिम संगठन के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है। हाई कोर्ट की तरफ से मिले इस आदेश के बाद स्थानीय समुदाय के लोगों ने दीप जलाने की कोशिश की लेकिन उन्हें पुलिस ने ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद 3 दिसंबर को न्यायाधीश ने एक और आदेश पारित करते हुए श्रद्धालुओं को दीप जलाने की अनुमति दी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया। हाई कोर्ट के जज के आदेश का पालन न होने पर राज्य में विपक्षी पार्टियों और हिंदू समुदाय ने इसका विरोध किया। इसके बाद सत्ताधारी डीएमके के सांसदों ने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ मिलकर लोकसभा अध्यक्ष को जज स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंप दिया। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी सांसदों के इस प्रस्ताव को केवल वोट की राजनीति नहीं बल्कि भारत की मूल पहचान पर किया गया हमला करार दिया।  

भारतीय रेलवे ने किया नया रिकॉर्ड, एलएचबी कोचों के उत्पादन में 18% की बढ़ोतरी

नई दिल्ली   भारतीय रेलवे ने उच्च तकनीक वाले लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोचों के उत्पादन में लगातार बेहतरी दिखाई है, जो यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा, सुविधाजनक यात्रा और रेलवे के बेहतर कार्य प्रदर्शन को दर्शाते हैं।    चालू वित्त वर्ष 2025-26 (नवंबर 2025 तक) के दौरान कुल 4,224 एलएचबी कोच बनाए गए हैं। यह पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है, जब केवल 3,590 कोच बनाए गए थे। रविवार को रेल मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, उत्पादन में यह वृद्धि रेलवे के विभिन्न कारखानों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और बेहतर उत्पादन योजना का परिणाम है। इस अवधि में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) ने 1,659 एलएचबी कोच बनाए, जबकि रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) ने 1,234 कोच और कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) ने 1,331 कोच बनाए, जिससे कुल मिलाकर एलएचबी कोचों के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। दीर्घकालिक तुलना में पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति हुई है। 2014 से 2025 तक भारतीय रेलवे ने 42,600 एलएचबी कोच बनाए, जो 2004 से 2014 के बीच बने 2,300 कोच से 18 गुना ज्यादा है। यह विस्तार सुरक्षा मानकों और कम रख-रखाव की विशेषताओं के कारण एलएचबी कोचों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। एलएचबी कोच आधुनिक, सुरक्षित और आरामदायक यात्री कोच हैं, जो जर्मन डिजाइन से विकसित हैं और आधुनिक सुविधाएं जैसे स्टेनलेस स्टील बॉडी, एडवांस्ड डिस्क ब्रेक्स और 160 किमी/घंटा तक की उच्च गति प्रदान करते हैं। इन कोचों में एंटी-क्लाइम्बिंग डिवाइस जैसे सुरक्षा फीचर्स होते हैं, जो पुराने आईसीएफ कोचों की जगह लेते हैं और राजधानी और शताबदी एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों में इस्तेमाल होते हैं। भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि हो रही है और आयात पर निर्भरता कम हो रही है। भारतीय रेलवे का लक्ष्य उत्पादन क्षमता को और बढ़ाना है, ताकि देश की बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।

नितिन नबीन ने बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, जेपी नड्डा और अमित शाह थे उपस्थित

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार (15 दिसंबर, 2025) को दिल्ली हेडक्वार्टर में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है. इस दौरान उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद थे. वह थोड़ी देर पहले ही पटना से दिल्ली पहुंचे हैं. भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के दिल्ली आगमन पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया.  बीजेपी मुख्यालय पहुंचे नितिन नबीन का बड़ी संख्या में पार्टी के सांसद, नेता और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया. नए कार्यकारी अध्यक्ष के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में नेता बीजेपी मुख्यालय के बाहर खड़े नजर आए. बीजेपी मुख्यालय पहुंचे नितिन नबीन आज पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे.  इससे पहले, दिल्ली एयरपोर्ट पर दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े ने नितिन नबीन का स्वागत किया. बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, गिरिराज सिंह, रविशंकर प्रसाद समेत तमाम बड़े नेताओं ने नितिन नबीन का गुलदस्ता देकर स्वागत किया. जेपी नड्डा ने नितिन नबीन को पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया. इसके बाद पार्टी के कद्दावर नेताओं ने उन्हें इस मौके पर बधाई दी, शुभकामनाएं दीं. गौरतलब है कि बीजेपी ने एक दिन पहले ही कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नितिन नबीन के नाम का ऐलान किया था. नितिन नबीन बिहार सरकार के दो बार के मंत्री हैं. वह पांच के विधायक हैं. नितिन नबीन सोमवार की सुबह दिल्ली रवाना होने से पहले पटना के महावीर मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की. महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद नितिन नबीन पटना से दिल्ली रवाना हुए. दिल्ली एयरपोर्ट पर नितिन नबीन का स्वागत करने पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और विनोद तावड़े समेत बड़ी संख्या में बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे. बीजेपी मुख्यालय पहुंचने पर नितिन नबीन का बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फूल की पंखुड़ियों से स्वागत किया. नितिन नबीन के कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभालने के कुछ ही देर बाद पार्टी ने बिहार प्रदेश अध्यक्ष के नाम का भी ऐलान कर दिया है. संजय सरावगी को बिहार बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.  नड्डा की राह पर नवीन  जून 2019 में अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद जेपी नड्डा को बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। वह लगभग छह महीने तक इस पद पर रहे. इसके बाद जनवरी 2020 में उन्हें औपचारिक रूप से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गये। नड्डा अब लगभग छह साल से पार्टी प्रमुख के रूप में काम कर रहे हैं। बीजेपी के संविधान के अनुसार, कोई भी नेता तीन-तीन साल के दो कार्यकाल के लिए अध्यक्ष के रूप में काम कर सकता है। कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्ति का पूरा प्लान बीजेपी नेताओं के अनुसार, कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति एक अंतरिम व्यवस्था है। एक और कारण है खरमास, जिसे हिंदू अशुभ मानते हैं। मंगलवार से खरमास शुरू हो रहा है। इसी वजह से नवीन को  कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। 14 जनवरी, मकर संक्रांति को खरमास खत्म होने के बाद, नए पार्टी प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।  37 में से 30 राज्यों में चुनाव पूरे  बीजेपी ने पहले ही 37 में से 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठनात्मक चुनाव पूरे कर लिए हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए देश के कम से कम आधे राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे करना जरूरी है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, अध्यक्ष पद के चुनाव में कम से कम चार दिन लगेंगे और यह 14 जनवरी के तुरंत बाद पूरा हो सकता है। हालांकि चुनाव औपचारिक मात्र होगा, लेकिन नवीन का पद पक्का माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी और उसकी वैचारिक संस्था RSS ऐसे मामलों में सर्वसम्मति पर जोर देते हैं। ऐसे में, नवीन बीजेपी प्रमुख बनने से पहले नड्डा की मदद करेंगे और काम सीखेंगे, ठीक वैसे ही जैसे नड्डा ने छह साल पहले शाह से सीखा था। कौन हैं नितिन नवीन 45 साल के नितिन नवीन बिहार में सड़क निर्माण मंत्री हैं। इसके साथ ही पटना के बांकीपुर से पांच बार के विधायक रहे हैं। वह पहली बार 26 साल की उम्र में विधायक बने थे, जब उनके पिता और बीजेपी के दिग्गज नेता नवीन किशोर सिन्हा की मौत के बाद पटना पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी। नवीन बिहार और पूर्वी भारत से पहले बीजेपी प्रमुख बनने वाले हैं। अगर वह अगले साल पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख बनते हैं, तो वह इतिहास में सबसे कम उम्र के बीजेपी अध्यक्ष होंगे, जो नितिन गडकरी का रिकॉर्ड तोड़ देंगे, जिन्होंने 52 साल की उम्र में पद संभाला था।

रॉब रेनर और पत्नी मिशेल सिंगर का शव उनके घर में मिला, पुलिस ने शुरू की जांच

लॉस एंजेलिस  मशहूर अमेरिकी डायरेक्टर और एक्टर रॉब रेनर और उनकी पत्नी मिशेल को लॉस एंजेलिस स्थित उनके घर में मृत पाया गया। अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी देते हुए बताया कि दोनों के शरीर पर चाकू के घाव हैं। इस मामले में पुलिस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। लॉस एंजेलिस फायर डिपार्टमेंट के मुताबिक, उनके पास दोपहर करीब 3:30 बजे मेडिकल इमरजेंसी के लिए कॉल आई। जब टीम मौके पर पहुंची, तो 78 वर्षीय रॉब और 68 वर्षीय मिशेल को मृत पाया गया। पुलिस ने इस घटना को हत्या करार दिया। लॉस एंजेलिस पुलिस विभाग के रॉबरी हौमिसाइड डिविजन की टीम मामले की जांच कर रही है। मामले में अभी किसी पर भी आधिकारिक तौर पर आरोप नहीं लगाया गया है। इस खबर ने हॉलीवुड में सनसनी मचा दी है, और फिल्मी दुनिया के लोग इस घटना पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। लॉस एंजेलिस की मेयर करेन बास ने भी इसे शहर के लिए एक बड़ा नुकसान बताया। रॉब रेनर सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि हॉलीवुड के सबसे चर्चित डायरेक्टर्स में से एक भी थे। उनका जन्म 6 मार्च 1947 को न्यूयॉर्क में एक यहूदी परिवार में हुआ। उनके पिता, कार्ल रेनर, खुद एक प्रसिद्ध अभिनेता और कमीडियन थे। फिल्म और एक्टिंग की दुनिया से जुड़ाव उनके बचपन से ही रहा। रॉब ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की और टीवी सीरियल 'ऑल इन द फैमिली' के लिए उन्हें पॉपुलैरिटी मिली। इस शो में उन्होंने मीटहेड का किरदार निभाया, जिसने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया और इसके लिए उन्हें दो एमी अवॉर्ड भी मिले। इसके बाद रॉब ने डायरेक्शन में कदम रखा और हॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाई, जिनमें 'दिस इज स्पाइनल टैप', 'स्टैंड बाय मी', 'द प्रिंसेस ब्राइड', 'व्हेन हैरी मेट सैली', 'मिजरी' और 'ए फ्यू गुड मैन' शामिल हैं। 'ए फ्यू गुड मैन' को साल 1992 में बेस्ट पिक्चर कैटेगरी में ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। इस फिल्म में जैक निकोलसन और टॉम क्रूज जैसे बड़े अभिनेता नजर आए थे। रॉब को फिल्मों के लिए कई अवॉर्ड मिले, जिनमें चार गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड और कई डायरेक्टर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन शामिल हैं। रॉब की निजी जिंदगी भी फिल्मी कहानी जैसी रही। उन्होंने 1971 में डायरेक्टर और एक्ट्रेस पेनी मार्शल से शादी की, लेकिन उनकी शादी ज्यादा समय तक नहीं चली और 1981 में तलाक हो गया। इस शादी से रॉब ने पेनी की बेटी ट्रेसी को गोद लिया। इसके बाद 1989 में उन्होंने मिशेल सिंगर से शादी की। मिशेल खुद एक एक्ट्रेस और फोटोग्राफर थीं। दोनों की मुलाकात फिल्म 'व्हेन हैरी मेट सैली' के सेट पर हुई थी। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए। फिल्मी दुनिया में सक्रिय रहने के अलावा, रॉब रेनर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में भी आगे रहे। वे अमेरिकी राजनीति में एक मुखर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट थे और अपने विचारों के लिए जाने जाते थे। साल 2024 में रॉब ने अपनी कल्ट फिल्म 'स्पाइनल टैप' के सीक्वल पर काम शुरू किया था। इसके अलावा, वे टीवी शोज और फिल्मों में कैमियो रोल करते रहे, जिनमें 'द लैरी सैंडर्स शो', 'द सिम्पसंस' और 'न्यू गर्ल' शामिल हैं।

बोंडी बीच हमले में नया खुलासा: आरोपी नवीद की कार से ISIS का झंडा बरामद, पहले भी था संदिग्ध

सिडनी  ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बोंडी बीच पर हुए आतंकी हमले को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। दोनों हमलावर बाप-बेटे की पहचान पाकिस्तान के नागरिकों के रूप में की गई है। यहूदियों के त्योहार के मौके पर हुए हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों हमलावरों का लिंक खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस से पाया गया है। घटनास्थल के पास ही खड़ी हमलावर की कार से आईएसआईएस का झंडा मिला है। इसके अलावा कार से एक विस्फोटक भी बरामद किया गया है।   आतंकी साजिद के पास लाइसेंसी हथियार थे। जानकारी के मुताबिक उसके पास कम से कम 6 बंदूकें थीं। वहीं उसे बेटे नवीद के पास भी कई हथियार थे। साजिद की मौके पर ही मौत हो गई जबकि नवीद को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के मुताबिक साजिद 1998 में स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया आया था। 2001 में उसे परमानेंट वीजा मिल गया। इसके बाद वह तीन बार विदेश यात्रा कर चुका है। पहले भी हो चुकी है ISIS लिंक की जांच एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक नवीद की आतंकी लिंक को लेकर पहले भी जांच हो चुकी है। ऑस्ट्रेलिया की जांच एजेंसी एएसआईओ ने 2019 में उसके आईएसआईएस से जुड़े होने की जांच की थी। अधिकारियों के मुताबिक वह इसाक अल मतारी जैसे आतंकी के संपर्क में था। मतारी सात साल जेल में काट चुका था। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भी बताया कि नवीद अकरम 2019में भी शक के दायरे में आ चुका है। अधिकारियों का कहना है कि इस हमले का ईरान लिंक भी हो सकता है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने ईरान के राजदूत को भी निष्कासित कर दिया है। वहीं ईरान के कट्टरपंथी संगठन इजरायलियों और यहूदियों को निशाना बनाने में कसर नहीं छोड़ते। ऑस्ट्रेलिया ने ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स को भी आतंकी घोषित कर दिया था।