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बाबा वेंगा की 2026 भविष्यवाणियां: आने वाला साल बदल सकता है दुनिया का नक्शा!

नई दिल्ली  बुल्गारिया की प्रसिद्ध भविष्‍यवक्‍ता बाबा वेंगा को “बाल्कन की अंधी भविष्यवक्ता” कहा जाता है। 1911 में जन्मी बाबा वेंगा ने अपने जीवनकाल में सैकड़ों ऐसी भविष्यवाणियां कीं जो बाद में सच साबित हुईं जैसे 9/11 हमला, ब्रेक्जिट, और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं। अब 2026 को लेकर उनकी भविष्यवाणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जिनमें उन्होंने पृथ्वी पर बड़े तकनीकी, प्राकृतिक और आध्यात्मिक बदलावों की भविष्यवाणी की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनेगा मानवता के लिए चुनौती बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के अनुसार, 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इतना विकसित हो जाएगा कि वह मानव नियंत्रण से बाहर चला जाएगा। यह काल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के चरम का प्रतीक होगा लेकिन साथ ही मानवता के लिए बड़ी चेतावनी भी है। ज्योतिष दृष्टि से देखें तो शनि और राहु की युति इस समय तकनीक से जुड़ी उथल-पुथल और मानव मूल्यों की परीक्षा का संकेत देती है। भूकंप और ज्वालामुखियों की सक्रियता बढ़ेगी बाबा वेंगा ने बताया कि 2026 में पृथ्वी का 7-8% भाग प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हो सकता है। भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और समुद्री तूफानों की घटनाएं बढ़ेंगी। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब पृथ्वी तत्व पर ग्रहों का दबाव बढ़ता है, तब ऐसे भू-आकृतिक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। यह समय मानवता को प्रकृति के संतुलन और पर्यावरण संरक्षण की ओर पुनः सोचने पर विवश करेगा। आर्थिक अस्थिरता और महंगाई की संभावना बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के मुताबिक, कुछ देशों की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। महंगाई बढ़ेगी,और सोने की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यह ग्रहों के अनुसार शनि की स्थिति में अस्थिरता और वैश्विक मंदी का संकेत है। भारत जैसे देशों में भी निवेश और व्यापारिक निर्णयों में सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी। 2026 में एलियंस से हो सकता है पहला संपर्क बाबा वेंगा ने एक अनोखी भविष्यवाणी की 2026 में मानव जाति एलियंस से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर सकती है। यह घटना मानव इतिहास में एक नई दिशा दे सकती है। ज्योतिषीय रूप से यह वह समय होगा जब कुंभ युग (Aquarian Age) के प्रभाव से ब्रह्मांडीय ज्ञान और नई ऊर्जा तरंगें पृथ्वी पर उतरेंगी। परिवर्तन का वर्ष होगा 2026 2026 केवल विज्ञान या राजनीति का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और चेतना परिवर्तन का वर्ष होगा। बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां यह याद दिलाती हैं कि मानवता को तकनीक के साथ संतुलन और प्रकृति के प्रति विनम्रता रखनी होगी। यह समय भय का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जागरण का संकेत है।

बांग्लादेश लौटने को तैयार शेख हसीना! वापसी की रखी बड़ी शर्त, नोबेल विजेता यूनुस पर जमकर बरसीं

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश वापसी की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने इसके लिए शर्तें भी रखी हैं। उनका कहना है कि वे तभी स्वदेश लौटेंगी जब देश में भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र बहाल हो और उनकी पार्टी आवामी लीग पर लगी पाबंदी हटाई जाए। हसीना स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा समावेशी चुनावों की मांग कर रही हैं। यह बयान उस समय आया है जब आवामी लीग ने 13 नवंबर को बड़े पैमाने पर हड़ताल का एलान किया है। भारत के किसी गुप्त स्थान पर रह रही शेख हसीना ने इंटरव्यू में वर्तमान अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर भारत के साथ संबंधों को खराब करने तथा चरमपंथी तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। अपनी विदेश नीति की तुलना अंतरिम सरकार से करते हुए उन्होंने कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच के 'व्यापक एवं गहन' रिश्तों को यूनुस की मूर्खतापूर्ण कार्रवाइयों का डटकर मुकाबला करना चाहिए। हसीना ने भारत सरकार को शरण प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वे भारत सरकार तथा उसके लोगों के उदार स्वागत के लिए बेहद कृतज्ञ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश लौटने की उनकी प्रमुख शर्त वही है जो बांग्लादेशी जनता की इच्छा है, भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की बहाली। अंतरिम प्रशासन को आवामी लीग पर प्रतिबंध हटाना होगा तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव आयोजित करने होंगे। बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक शासित प्रधानमंत्री रह चुकी हसीना ने 5 अगस्त 2024 को हिंसक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के कई हफ्तों के बाद देश छोड़ दिया था। इस विशाल आंदोलन के दबाव में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और अंत में भारत पहुंचना पड़ा, जिससे यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का गठन संभव हुआ। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी सरकार ने प्रदर्शनों को सही ढंग से नियंत्रित नहीं किया, तो 78 वर्षीय नेता ने कहा कि निश्चित रूप से स्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं थी और यह दुखद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन भयावह घटनाओं से कई सबक मिले हैं, लेकिन कुछ जिम्मेदारी उन तथाकथित छात्र नेताओं की भी है जिन्होंने भीड़ को भड़काया। हसीना ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया कि उन्होंने अगले साल फरवरी के चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आवामी लीग के बिना कोई भी चुनाव वैध नहीं होगा। उनका मानना है कि लाखों लोग उनका समर्थन करते हैं…यह हमारे देश के लिए एक सुनहरा अवसर गंवाना होगा, जहां जनता की सच्ची सहमति से शासन करने वाली सरकार की सख्त जरूरत है। मुझे भरोसा है कि यह मूर्खतापूर्ण प्रतिबंध हटा लिया जाएगा, चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में, आवामी लीग को बांग्लादेश की राजनीतिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनना चाहिए। हसीना ने कहा कि भारत हमेशा से बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदार रहा है। उन्होंने यूनुस सरकार पर 'मूर्खतापूर्ण एवं आत्मघाती' कूटनीतिक चूक करके नई दिल्ली के साथ संबंधों को जोखिम में डालने का इल्जाम लगाया। उनका कहना था कि यूनुस की भारत विरोधी नीति मूर्खतापूर्ण और स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाली है, जो उन्हें एक कमजोर शासक के रूप में चित्रित करती है, जो अनिर्वाचित, अव्यवस्थित और चरमपंथियों के भरोसे पर टिका है।  

हिन्दुत्व की रक्षा के लिए बना ‘सनातन धर्म परीक्षण बोर्ड’, तिरुपति लड्डू विवाद से उठे सवाल

नई दिल्ली  आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में लड्डू (प्रसादम) में इस्तेमाल होने वाले कथित नकली घी विवाद के बीच राज्य के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हिन्दुत्व और सनातन धर्म की रक्षा के लिए 'सनातन धर्म परीक्षण बोर्ड' की स्थापना का आह्वान किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मंगलवार को साझा की गई एक पोस्ट में पवन कल्याण ने कहा कि सनातनियों की भावनाओं और प्रथाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है और उन्हें कमतर आंका जा रहा है, इससे भक्तों का विश्वास कम हो रहा है। उप-मुख्यमंत्री ने लिखा, "वैश्विक हिंदू समुदाय के लिए, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम एक तीर्थस्थल से कहीं बढ़कर है; यह एक पवित्र आध्यात्मिक प्रवास है। तिरुपति लड्डू सिर्फ एक मिठाई नहीं है; यह एक साझा भावना है। हम इसे दोस्तों, परिवार और अजनबियों के बीच समान रूप से बाँटते हैं, क्योंकि यह हमारी सामूहिक आस्था और गहन विश्वास का प्रतीक है।" सालाना लगभग 2.5 करोड़ भक्त तिरुमाला आते हैं उन्होंने आगे लिखा, “औसतन, हर साल लगभग 2.5 करोड़ भक्त तिरुमाला आते हैं और जब सनातनियों की भावनाओं और प्रथाओं का मजाक उड़ाया जाता है या उन्हें कमतर आंका जाता है, तो यह न केवल आहत करने वाला होता है; बल्कि यह दुनिया भर के लाखों लोगों के विश्वास और श्रद्धा को भी चकनाचूर कर देता है। धर्मनिरपेक्षता दोतरफा होनी चाहिए।” सभी हितधारकों की सहमति से बने बोर्ड सनातन धर्म के लिए एक संरक्षण निकाय की स्थापना का आह्वान करते हुए, उन्होंने कहा कि बोर्ड का गठन सभी हितधारकों की सहमति से किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा, "हमारी आस्था की सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। हमारा सनातन धर्म सबसे प्राचीन और निरंतर विकसित होती सभ्यताओं में से एक है, और अब समय आ गया है कि हम सभी हितधारकों की सहमति से सनातन धर्म परीक्षण बोर्ड की स्थापना करें।" 5 साल में 250 करोड़ के नकली घी का इस्तेमाल एक अन्य एक्स पोस्ट में उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 2019 से 2024 के बीच तिरुपति लड्डुओं में 250 करोड़ रुपये के मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया है। यह मामला तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व कार्यकारी अधिकारी धर्म रेड्डी के मिलावटी घी मामले में विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेश होने के बाद आया है। उनसे मिलावटी घी की खरीद के संबंध में पूछताछ की गई है। चंद्रबाबू पिछली सरकार पर रहे हमलावर इस बीच, SIT ने TTD के पूर्व अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी को ऑनलाइन नोटिस जारी कर 13 नवंबर को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक हफ्ते का समय मांगा है और कहा है कि वह 15 नवंबर के बाद पेश होंगे। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली टीडीपी ने कथित मिलावट के लिए पिछली वाईएसआरसीपी सरकार की आलोचना की है। टीडीपी ने एक्स पर लिखा, "घी बनाने के लिए दूध की जरूरत होती है। खासकर तिरुमला के लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले शुद्ध घी के लिए, यह गाय के दूध से बनाया जाता है। लेकिन YSRCP सरकार के दौरान, लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाला मिलावटी घी कथित तौर पर असली दूध का इस्तेमाल किए बिना, रसायनों और जानवरों की चर्बी से और नकली तेलों से बनाया गया था।"

दिल्ली HC ने DU से पूछा—PM मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने में दिक्कत क्या है?

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री का मामला फिर सुर्खियों में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को निर्देश दिया कि अपील में देरी माफ करने की अर्जी पर अपना ऑब्जेक्शन तीन हफ्ते में दाखिल करें। यह अपीलें CIC के 2016 के उस फैसले को चुनौती देती हैं, जिसमें मोदी की डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया था। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने मामले की सुनवाई की। अपीलकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने दो मुख्य मुद्दे उठाए। पहला, क्या RTI एक्ट की धारा 8 के तहत डिग्री की जानकारी छिपाई जा सकती है। दूसरा, क्या इसे सार्वजनिक करना बड़े जनहित में है। कोर्ट ने नोट किया कि अपीलें देरी से दाखिल हुई हैं। DU की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे देरी और मामले की योग्यता दोनों पर विस्तृत जवाब देंगे। बेंच ने कहा, "ऑब्जेक्शन दाखिल करें।" अपीलकर्ताओं को जवाब के लिए दो हफ्ते का समय मिलेगा। अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होगी। सिंगल जज ने क्यों पलटा CIC का आदेश? 25 अगस्त 2024 को जस्टिस सचिन दत्ता ने CIC के दिसंबर 2016 के फैसले को रद्द कर दिया। CIC ने DU को 1978 के सभी BA पास छात्रों के रिकॉर्ड दिखाने का आदेश दिया था, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल थे। जज ने कहा कि डिग्री और मार्कशीट पर्सनल जानकारी हैं। इन्हें RTI की धारा 8(1)(j) के तहत संरक्षित रखा जाएगा। बिना बड़े जनहित के खुलासा नहीं हो सकता। यूनिवर्सिटी और छात्र का रिश्ता विश्वास पर आधारित है। थर्ड पार्टी को रिकॉर्ड दिखाना गोपनीयता का उल्लंघन होगा। कौन है अपीलकर्ता? इस मामले में AAP नेता संजय सिंह, RTI कार्यकर्ता नीरज शर्मा और एडवोकेट मोहम्मद इरशाद अपीलकर्ता हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या CBSE इस मामले में पक्षकार है, क्योंकि एक जुड़े केस में स्मृति ईरानी की 10वीं-12वीं मार्कशीट मांगी गई थी। अपीलकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि CBSE इस अपील में शामिल नहीं है।  

दिल्ली कार ब्लास्ट में पायल घोष की स्कूल फ्रेंड की मौत, एक्ट्रेस बोलीं – अब तक यकीन नहीं हो रहा

नई दिल्ली दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार, 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. इस हादसे में 12 लोगों की जान गई है और कई अन्य लोग घायल हैं. इसी हादसे में एक्ट्रेस पायल घोष ने अपनी करीबी स्कूल फ्रेंड सुनीता मिश्रा को खो दिया है, उनकी भी जान चली गई है. बता दें कि इसस बम धमाके से ठीक एक हफ्ते पहले एक्ट्रेस पायल घोष ने अपनी दोस्त सुनीता मिश्रा से बातचीत किया था. इस बारे में मीडिया से बात करते हुए एक्ट्रेस ने कहा- ‘मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि वो अब नहीं रहीं. हमने एक हफ्ते पहले ही बात की थी. वो जिंदगी से भरी हुई थीं, हमेशा मुस्कुराती थीं, हमेशा सकारात्मकता फैलाती थीं. इतनी दयालु आत्मा का इतने क्रूर तरीके से चले जाना अवास्तविक लगता है.’ अपने रिश्ते पर एक्ट्रेस पायल घोष  ने आगे कहा- ‘वो सिर्फ दोस्त नहीं थीं. वो परिवार थी. हम साथ बड़े हुए. सपने, हंसी और संघर्ष शेयर किए. उन्हें इस तरह खोना. इसके लिए शब्द नहीं हैं.’ एक्ट्रेस ने इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के समर्थन और एकजुटता के लिए जनता से अपील किया है.

एकनाथ शिंदे के खिलाफ BJP का नया दांव? गणेश नायक की एंट्री से बढ़ी चर्चा

मुंबई  महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में सबकुछ ठीक नहीं है। इसके संकेत हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में की चुनाव प्रभारी की नियुक्ति से मिलते हैं। दरअशल, भाजपा ने राज्य सरकार में वन मंत्री गणेश नाइक को 7 जिलों का प्रभारी बनाया है, जिनमें ठाणे भी शामिल है। खास बात है कि नाइक को उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का प्रतिद्वंद्वी भी माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नाइक को बड़े नेताओं को चुनौती देने और मुश्किल राजनीतिक हालात में खड़े रहने वाला माना जाता है। खास बात है कि वह अविभाजित शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से अलग हो गए थे और इसके बाद भी ठाणे में अपनी पार्टी के लिए खड़े रहे। इस सीट पर शिंदे के गुरु माने जाने वाले आनंद दीघे का दबदबा था। कहा जाता है कि उनका मजबूत जनाधार युवाओं और मजदूरों के बीच है। उनके समर्थन से ही नाइक वाशी, नेरुल, एरोली, तुर्भे, घंसोली और TTC बेल्ट यानी ट्रांस ठाणे क्रीक में शिवसेना के चेहरे बन गए थे। 1980 के दशक में वह नवी मुंबई में बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे शिवसेना का विस्तार हो रहा था, तो नाइक का क्षेत्र दीघे से ज्यादा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ठाकरे को हस्तक्षेप करना पड़ा और नवी मुंबई को नाइक का क्षेत्र घोषित किया गया। सरकार और बाल ठाकरे दोनों से असहमति जताई 1990 के विधानसभा चुनाव में नाइक ने बेलापुर से पहली बार बड़ी चुनावी जीत हासिल की थी। इसके 5 साल बाद वह मनोहर जोशी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्री भी बने। हालांकि, यहां भी जोशी और ठाकरे से उनका टकराव जारी रहा। रिपोर्ट के अनुसार, नाइक ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था और बाद में जोशी ने उन्हें सरकार से बाहर कर दिया। एनसीपी से मिलाया हाथ 1990 में नाइक ने अविभाजित NCP यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से हाथ मिलाया, लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में हार गए। साल 2004 में उन्हें फिर सफलता मिली और वह एक्साइज मंत्री बन गए। 2014 में उन्हें भाजपा उम्मीदवार मंदा म्हात्रे के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2019 में उन्हें भाजपा से हाथ मिला लिया और एरोली में जीत हासिल की। रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे के प्रतिद्वंद्वी होने के चलते भाजपा उन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं कर सकी थी। क्यों है भाजपा के लिए खास रिपोर्ट के अनुसार, टीटीसी में लंबे समय से मौजूदगी, कामगारों और ठेकेदारों से संपर्क के चलते माना जाता है कि वह जल्द समर्थन जुटा सकते हैं। वहीं, कई बड़े नेताओं से सीधी टक्कर लेने की उनकी क्षमता भी उन्हें चुनिंदा नेताओं में से एक बनाती है, जो शिंदे को उनके ही गढ़ में चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा नाइक के जरिए भाजपा नवी मुंबई और ठाणे के उन इलाकों में समर्थन मिलता है, जहां शिंदे की पहुंच सीमित है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरातियों, मुस्लिम, उत्तर भारतीयों और अन्य पिछड़ा वर्गों में भी उनका मजबूत जनाधार है। अलग-अलग चुनाव लड़ने के संकेत अक्तूबर में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल भाजपा ने ठाणे और नवी मुंबई में आगामी नगर निकाय चुनाव अकेले लड़ने का संकेत दिया है, जिसका उद्देश्य इन नगर निकायों में अपने महापौर बनाना है। मुंबई के इन दो बड़े नगरों में भाजपा द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के इस संकेत के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी इसका जवाब देने के लिए ऐसी ही रणनीति तैयारी करनी शुरू कर दी है। शिवसेना का ठाणे क्षेत्र में खासा प्रभाव है।  

दिल्ली बम धमाकों के घायलों से मिले पीएम मोदी, भूटान से लौटते ही पहुंचे LNJP अस्पताल

नई दिल्ली दिल्ली में सोमवार को हुए विस्फोट की घटना में कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हैं. भूटान से वापस आते ही पीएम मोदी एलएनजीपी अस्पताल पहुंचे. जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात की. बताते चलें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस घटना की जांच कर रही है. एनआईए के अधिकारी भी एलएनजीपी अस्पताल जाएंगे. सूत्रों के अनुसार, एनआईए ने दिल्ली ब्लास्ट की जांच के लिए 'स्पेशल 10' अधिकारियों की टीम तैयार की है, जिसमें आईजी, दो डीआईजी और 3 एसपी होंगे. बाकी डीएसपी स्तर के अधिकारी इस टीम में शामिल हैं. दिल्ली ब्लास्ट मामले को लेकर बुधवार को एनआईए के डीजी और आईबी चीफ की बैठक भी हुई है.  सूत्रों ने यह भी बताया कि एनआईए की टीम जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हरियाणा पुलिस से 'जैश मॉड्यूल' की तमाम केस डायरी आज अपने कब्जे में लेगी. वहीं, फरीदाबाद में 'आतंकी मॉड्यूल' का पर्दाफाश होने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में है. इस यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन संदिग्ध आतंकियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ. मामले में एजेंसियों ने जांच दायरा बढ़ाते हुए छह और लोगों को हिरासत में लिया.  अल फलाह यूनिवर्सिटी में जांच एजेंसियां 50 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी हैं. इन लोगों में यूनिवर्सिटी में डॉक्टर मुजम्मिल के साथ काम करने वाले संकाय सदस्य, विश्वविद्यालय के छात्र और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य शामिल हैं. इस कार्रवाई के बीच छह लोगों को हिरासत में लिया गया. फिलहाल, फरीदाबाद पुलिस उनसे संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल के बारे में पूछताछ कर रही है. 

लेडी टेररिस्ट की दास्तान: टूटी शादी, खतरनाक रिश्ते और शाहीन का रहस्य

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के समीप हुए धमाके से एक दिन पहले एजेंसियों ने एक महिला डॉक्टर को पकड़ा था. यह महिला थी डॉक्टर शाहीन शाहिद. जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में डॉक्टर शाहीन को पकड़ा था. शाहीन का नाम उसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, जिस नेटवर्क का नाम दिल्ली ब्लास्ट में आया है. दिल्ली ब्लास्ट में 10 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे. लेडी टेररिस्ट डॉक्टर शाहीन शाहिद कौन है, जिसे जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनीन का इंडिया हेड बताया जा रहा है? दरअसल, डॉक्टर शाहीन का नाम फरीदाबाद से दो डॉक्टर्स की गिरफ्तारी के बाद आया था. एजेंसियों के मुताबिक डॉक्टर मुजम्मिल अहमद, डॉक्टर उमर नबी और शाहीन शाहिद, तीनों मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क चला रहे थे. शाहीन को मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल मोमिनीन का इंडिया हेड बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि वह जैश आतंकी मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के निर्देश पर काम कर रही थी. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद उसके लखनऊ स्थित घर पर भी जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस ने छापेमारी की. इस संयुक्त कार्रवाई में शाहीन के भाई डॉक्टर परवेज अंसारी को भी पकड़ा गया, जो इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. डॉक्टर शाहीन के लखनऊ वाले घर से कई दस्तावेज, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन भी एजेंसियों ने अपने कब्जे में लिया है. कानपुर में लेक्चरर थी शाहीन डॉक्टर शाहीन कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) में भी लेक्चरर रह चुकी है. शाहीन ने 2006 में बतौर लेक्चरर जीएसवीएम जॉइन किया था. कॉलेज के रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2013 में वह बिना अनुमति अवकाश पर चली गई और कॉलेज की ओर से कई नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने 2021 में शाहीन की सेवा समाप्त कर दी थी. जीएसवीएम कॉलेज के लोग बताते हैं कि शाहीन शांत रहती थी. 2013 के बाद से उसने सभी के साथ संपर्क तोड़ लिए थे. महाराष्ट्र के जफर से हुई थी शादी डॉक्टर शाहीन शाहिद की शादी महाराष्ट्र के जफर हयात के साथ हुई थी. हालांकि, यह रिश्ता बहुत लंबा नहीं चला और 2015 में शाहीन का तलाक हो गया. पति से तलाक के बाद शाहीन हरियाणा के फरीदाबाद शिफ्ट हो गई. यहीं वह डॉक्टर मुजम्मिल के संपर्क में आई थी. बाद में वह मसूद अजहर की बहन सादिया के सीधे संपर्क में आ गई थी. शाहीन की कार से राइफल और जिंदा कारतूस भी मिले थे, जिन्हें आतंकी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है. NIA कर रही विदेशी कॉन्टैक्ट्स की जांच इस केस की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. NIA डॉक्टर शाहीन शाहिद के अकादमिक रिकॉर्ड के साथ ही सोशल मीडिया कनेक्शन और विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि शाहीन शाहिद का पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ सोशल मीडिया के जरिये संपर्क में रही होगी. भारत में कट्टरपंथी महिलाओं का नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल का शक एजेंसियों को है.

PM किसान योजना: किस्त आने से पहले होगी नामों की छंटनी, ये किसान होंगे लिस्ट से बाहर

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त अभी जारी नहीं की गई है। केंद्र सरकार ने किसानों में फैल रही अफवाहों और गलतफहमियों को दूर करने के लिए आधिकारिक बयान जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना में कई ऐसे आवेदन थे जो मानदंडों के अनुसार अपात्र थे। इन आवेदनों को अब संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया गया है और उनकी जांच की जा रही है। क्यों हटाए गए कुछ नाम? सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में ऐसे लोग योजना में पंजीकरण करा चुके हैं, जिनके पास 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन मिली थी। कुछ परिवारों के कई सदस्य पति-पत्नी, वरिष्ठ रिश्तेदार या नाबालिग एक साथ लाभ लेने के प्रयास में थे। ऐसे आवेदकों को अस्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया गया है। राष्ट्रीय सफाई अभियान के तहत अब तक 35.44 लाख से अधिक नाम सूची से हटा दिए गए हैं। सत्यापन के बाद ही मिलेगा भुगतान सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि हटाए गए नाम स्थायी रूप से निष्कासित नहीं हैं। जल्द ही भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद योग्य पाए गए किसानों के नाम सूची में बहाल कर दिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि केवल वास्तविक किसानों को ही भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। किसानों को अपनी पात्रता की जांच करने के लिए पीएम-किसान की आधिकारिक वेबसाइट (pmkisan.gov.in) पर ‘अपनी स्थिति जानें’ या ‘योग्यता स्थिति’ सेक्शन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। यह प्रक्रिया मोबाइल ऐप या किसान मित्र चैटबॉट के जरिए भी पूरी की जा सकती है। 21वीं किस्त पर अपडेट सरकार ने कहा है कि 21वीं किस्त का भुगतान तब तक स्थगित रहेगा जब तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होती। वार्षिक लाभ राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने की अटकलें अभी तक आधिकारिक नहीं हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, सत्यापन के बाद करीब 50 लाख किसानों को अपात्र घोषित किया जा सकता है। किसानों के लिए जरूरी कदम केंद्र ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपनी जानकारी तुरंत सत्यापित करें और यदि गलती से उनका नाम सूची से हटा गया है, तो फिर से आवेदन करें। योग्य किसानों को भुगतान में देरी से बचाने के लिए ऑनलाइन या मी-सेवा केंद्रों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।  

चलती ट्रेन में अनोखा अनुभव, ऑस्ट्रेलियाई महिला ने शेयर किया पिज्जा-फ्रेंच फ्राइज वीडियो

  नई दिल्ली    24 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला बेक मैककॉल भारत की ट्रेन यात्रा के दौरान पिज़्ज़ा और फ्रेंच फ्राइज़ की डिलीवरी पाकर हैरान रह गईं. उन्होंने इस अनोखे अनुभव का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो गया. लोगों ने भारत की तेज और तकनीकी रूप से उन्नत सेवाओं की तारीफ की, वहीं कुछ यूज़र्स ने इस पर सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा की. चलती ट्रेन में खाना डिलीवर होने से महिला हैरान बेक ने बताया कि उन्हें यह देखकर बेहद आश्चर्य हुआ कि भारत में चलती ट्रेन में भी खाना डिलीवर किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “मैंने ट्रेन में पिज्जा और फ्राइज का ऑर्डर दिया और डिलीवरी ड्राइवर मुझसे स्टेशन पर मिला. इस पर उनके दोस्त ने हंसते हुए कहा, “वह तुमसे ट्रेन में ही मिला था,” जिस पर वह भी मुस्कुराईं और बोलीं, “हां, सच में — वह मुझसे ट्रेन में ही मिला था, यह बहुत अच्छा था!” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो बेक मैककॉल द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया यह छोटा वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया. क्लिप में वह ट्रेन की सीट पर बैठी, पिज्जा और फ्राइज खाते हुए कहती हैं. “India is so good!”(“भारत बहुत अच्छा है!”). उनकी इस खुशी और हैरानी ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींच लिया. लोगों को यह देखकर गर्व हुआ कि भारत में तकनीक और सेवा कितनी तेज और सुविधाजनक हो चुकी है. सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल इस वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग थीं. एक यूजर ने लिखा-“भारत सच में शानदार है, विदेशियों को बस इतना करना है कि थोड़ा बजट 20 डॉलर से ऊपर रखें.”दूसरे ने कहा- “स्वागत है! हम उतने बुरे नहीं हैं जितना मीडिया ने दिखाया. थोड़ा खर्च करो — यहां लक्जरी सस्ती है.”हालांकि, कुछ यूजर्स ने सामाजिक पहलुओं पर भी बात की. एक टिप्पणी में कहा गया- “यह देखकर गर्व हुआ, लेकिन ये सेवा सस्ते मानव श्रम और बड़ी आबादी की वजह से संभव हो पाई है.” भारत की रेलवे और डिलीवरी सिस्टम की तारीफ कई लोगों ने इस मौके पर भारतीय रेलवे और फूड डिलीवरी नेटवर्क की प्रशंसा की. उन्होंने बताया कि भारत का डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर अब इतने बड़े स्तर पर काम करता है कि वह यात्रियों तक भी पहुंच चुका है. चाहे ट्रेन चल ही क्यों न रही हो. सोशल मीडिया पर इस वीडियो ने न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि लोगों को यह भी दिखाया कि भारत की तकनीकी और सेवा व्यवस्था किस तरह से लगातार आगे बढ़ रही है और यात्रियों को हर संभव सुविधा दे रही है.