samacharsecretary.com

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पतंजलि विवि के दीक्षांत समारोह में बांटी 1424 डिग्रियां, किया आह्वान ‘ज्ञान को कर्म से जोड़ें’

देहरादून उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की रजत जयंती के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में रजतोत्सव समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में प्रदेशभर में 01 नवंबर को इगास पर्व से 11 नवम्बर 2025 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण कर उन्हें नमन किया और कहा कि उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही हमें नया राज्य प्राप्त हुआ। यह हम सबके लिए गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पूर्ण कर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है। वर्ष 2050 उत्तराखण्ड राज्य स्थापना का स्वर्ण जयंती वर्ष होगा। आने वाले इन 25 वर्षों के लिए राज्य सरकार एक नया रोडमैप बनाकर आगे बढ़ेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश की सीमाओं पर बलिदान देने वाले जवानों और राज्य आंदोलन के बलिदानियों को भी नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के रजतोत्सव समारोह के अंतर्गत 03 और 04 नवम्बर को देहरादून में विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 03 नवम्बर को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विशेष सत्र को संबोधित करेंगी, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। इस विशेष सत्र में राज्य को आगे ले जाने की दिशा में विचार-विमर्श होगा तथा बीते 25 वर्षों के अनुभवों पर चर्चा की जाएगी। 09 नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस पर मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। रजतोत्सव समारोह का केंद्रबिंदु संस्कृति, पर्यटन, युवाशक्ति, प्रवासी उत्तराखण्डी तथा राज्य आंदोलनकारी रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि जनभागीदारी का उत्सव है। प्रत्येक नागरिक और जनपद को इस उत्सव से जोड़ने का उन्होंने आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है। इसी क्रम में अगले 25 वर्षों के लिए खाका भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका लक्ष्य समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखण्ड का निर्माण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में राज्य सरकार द्वारा अनेक उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता लागू की है। साथ ही भूमि कानून, धर्मांतरण विरोधी, नकल विरोधी और दंगारोधी कानून लागू कर सुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। राज्य का बजट पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तुत किया गया है। स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में 58 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं, मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी आई है, लखपति दीदी योजना से 1 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और वृद्धावस्था पेंशन को बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना बढ़ा है और प्रति व्यक्ति आय में 17 गुना वृद्धि हुई है। धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के पुनरोद्धार के लिए केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान और मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत कार्य प्रगति पर हैं। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसी परियोजनाएं राज्य के विकास को नई दिशा देंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पलायन रोकथाम और सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप और मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना जैसी पहलें संचालित कर रही है।  

परिवार में खौफनाक कांड: 15 साल के लड़के ने की भाई की हत्या, भाभी की भी ली जान

राजकोट  गुजरात में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। 15 साल के एक लड़के ने पुलिस पूछताछ में जो कुछ कबूल किया उसे सुनकर सभी हैरान रह गए। आरोपी ने पहले अपने बड़े भाई को पीट-पीटकर मार डाला और फिर डरी-सहमी गर्भवती भाभी का रेप किया। इसके बाद उसने भाभी को भी बेहद क्रूर तरीके से मार डाला। जूनागढ़ शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक गांव में इस वारदात को अंजाम दिया गया। परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है।   झकझोर देने वाली इस आपराधिक घटना को 16 अक्टूबर को अंजाम दिया गया और शुक्रवार लाशों की बरामदगी के बाद पूरी घटना से पर्दा उठा। हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब बिहार में रहने वाले मृतक महिला के मायकेवालों ने विसावदर पुलिस से संपर्क किया। अभी तक की जांच में सामने आया है कि आरोपी लड़का एक डेयरी में काम करता था। वह बड़े भाई से बेहद क्रोधित था, क्योंकि कथित तौर पर वह उसे पीटता था और उसके पैसे छीन लेता था। आरोपी ने पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने लोहे के एक रॉड से भाई के सिर पर तब तक वार किया जब तक उसकी जान नहीं चली गई। जब उसकी भाभी ने पति की हत्या करने वाले देवर का यह रूप देखा तो वह बेहद डर गई। उसने अपनी जान बख्श देने की गुहार लगाई। तब लड़के ने कहा कि यदि वह उसके साथ संबंध बनाएगी तो छोड़ देगा। लड़के ने 6 महीने की प्रेग्नेंट भाभी के साथ रेप किया। हालांकि, इसके बाद उसे लगा कि वह उसका भेद खोल सकती है। उसने घुटने से भाभी के पेट पर घुटने से वार करके और गला घोंटकर हत्या कर दी। उसने भाभी के पेट पर इतनी क्रूरता से वार किए कि भ्रूण गर्भाश्य से बाहर आ गया। पुलिस ने लड़के की मां को भी गिरफ्तार किया है जिसने लाशों को गड्ढे में दबाने में छोटे बेटे की मदद की। पुलिस ने जब लाशों को खोदकर निकाला तो नग्न अवस्था में थे। पुरुष मृतक का सिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त था तो महिला के शरीर पर भी कपड़े नहीं थे। भ्रूण भी गर्भाश्य से बाहर आ चुका था। लाशों को पांच फीट के एक गड्ढे में दबा दिया गया था और कपड़ों को जला दिया गया था। पुलिस का कहना है कि जिस समय वारदात को अंजाम दिया गया आरोपी की मां भी वहीं मौजूद थी। आरोपी ने भाभी के साथ रेप की बात कबूल की है। हालांकि, पुलिस मेडिकल रिपोर्ट से इसकी पुष्टि का इंतजार कर रही है। मृतक महिला के मायकेवालों ने जब उसकी सास से संपर्क नहीं होने की बात कही तो उसने कहा कि दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। जब उन लोगों ने हादसे की तस्वीरों की मांग की तो वह अलग-अलग बहाने बनाने लगे। शक बढ़ने पर परिवार के कुछ सदस्य बिहार के खगड़िया से विसावदर पहुंचे और पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने बताया कि हिम्मतनगर थाना क्षेत्र में ऐसी कोई दुर्घटना नहीं हुई है। इसके बाद पुलिस ने जब लड़के और उसकी मां से पूछताछ की तो सारा सच सामने आ गया।  

एयर इंडिया में हड़कंप! दो पायलट बिना लाइसेंस उड़ा रहे थे विमान, DGCA ने मचाई खलबली

नई दिल्ली  एयर इंडिया में शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग की समस्या अब भी जारी है। रेगुलेटर ने इस मुद्दे पर 5 महीने पहले ही फटकार लगाई थी। ताजा मामले में, एक को-पायलट और एक सीनियर कैप्टन को फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया है, क्योंकि एयरलाइन को पता चला कि पिछले महीने उन्होंने एक-एक फ्लाइट ऑपरेट की थी। एक केस में इंग्लिश लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी (ELP) लाइसेंस एक्सपायर हो चुका था। दूसरे में को-पायलट ने बाय-एनुअल पायलट प्रोफिशिएंसी चेक (PPC) – इंस्ट्रूमेंट रेटिंग टेस्ट क्लियर नहीं किया था। DGCA इन खामियों की जांच कर रहा है और एयरलाइन से रिपोर्ट मांगी है।   रिपोर्ट के मुताबिक, को-पायलट अपना लेटेस्ट IR-PPC चेक क्लियर नहीं कर पाया था। ये कोई बड़ी अनोखी बात नहीं है, लेकिन पायलट्स को फिर से उड़ान भरने से पहले मैंडेटरी करेक्टिव ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। इस केस में एयरबस A320 को-पायलट ने बिना ट्रेनिंग के फ्लाइट ऑपरेट कर दी और इस गलती को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'फर्स्ट ऑफिसर का ट्रेनिंग चेक में अनसैटिस्फैक्टरी परफॉर्मेंस के बाद फ्लाइट ऑपरेट करने का केस पकड़ा गया। जैसे ही यह गलती नोटिस हुई, क्रू शेड्यूलर और पायलट को ऑफ-रोस्टर कर दिया गया। आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और DGCA को रिपोर्ट कर दिया गया है।' लाइसेंस एक्सपायर होने के बावजूद भरी उड़ान दूसरे केस में, सीनियर कमांडर ने ELP लाइसेंस एक्सपायर होने के बावजूद A320 फ्लाइट का पायलट-इन-कमांड रहते हुए ऑपरेट किया। ELP लाइसेंस पायलट्स के लिए उड़ान भरने की बेसिक रिक्वायरमेंट है। एयर इंडिया की ओर से कहा गया, 'सीनियर पायलट का एक्सपायर्ड ELP के साथ फ्लाइट ऑपरेट करने का केस सामने आया। इसके बाद पायलट को ऑफ-रोस्टर कर दिया गया और जांच चल रही है। DGCA को रिपोर्ट कर दिया गया है।' सीनियर पायलट्स का कहना है कि ये खामियां एआई में ओवरसाइट पर सवाल उठाती हैं कि सिर्फ सही पायलट्स ही रोस्टर पर आएं।  

RSS का अलर्ट! जनसंख्या असंतुलन पर जताई चिंता, कहा- जल्द लागू हो ठोस जनसंख्या नीति

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने केंद्र सरकार से जनसंख्या नीति जल्द तैयार करने की अपील की है, ताकि जनसांख्यिकीय असंतुलन को सुधारा जा सके। होसाबले ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक के अंतिम दिन यह बयान दिया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'सरकार ने इसे खुले मंच पर और संसद में भी उल्लेख किया है। वो जनसंख्या नीति जितनी जल्दी होगी, उतना ही उसका लाभ है।'   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का जिक्र किया था। उन्होंने इससे निपटने के लिए एक उच्चस्तरीय मिशन की भी घोषणा की थी। इसी तरह, फरवरी 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे का उल्लेख किया। उन्होंने तीव्र जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की चुनौतियों पर विचार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति की घोषणा की थी। प्रस्तावित मिशन या सीतारमण की घोषणा के अब दत्तात्रेय होसबाले का बयान आया है। ऐसा कानून क्यों जरूरी, होसबाले ने बताया दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि घुसपैठ, धार्मिक धर्मांतरण और एक ही समुदाय का दबदबा… ये तीन मुख्य कारण हैं जो लोकतंत्र को अस्थिर कर सकते हैं। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत पर जोर दिया। होसबाले ने कहा, 'सेवा के नाम पर धर्मांतरण चिंता का विषय है। वनवासी कल्याण आश्रम और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन इसे रोकने के लिए काम कर रहे हैं। पंजाब में सिखों के बीच भी धर्मांतरण बढ़ रहा है, जिसे जागरूकता और तालमेल के ज़रिए रोका जा सकता है जिससे 'घर वापसी’ (दूसरे धर्म अपनाने वालों की हिंदू धर्म में वापसी) सुनिश्चित हो सके।’  

आधार कार्ड वालों के लिए जरूरी खबर! UIDAI ने बदले नियम, समय रहते कर लें ये काम

नई दिल्ली  UIDAI ने आधार कार्ड अपडेट करने की प्रक्रिया को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। आज यानि 1 नवंबर 2025 से नागरिकों के लिए नाम, पता, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर जैसे सभी ज़रूरी अपडेट पूरी तरह से ऑनलाइन और घर बैठे करना संभव हो गया है। अब लोगों को लंबी लाइनों में लगने या आधार केंद्र जाने की कोई ज़रूरत नहीं होगी। अब आप घर बैठे ही डिजिटली इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि क्या- क्या बदलाव हुए हैं।   क्या-क्या हुए हैं बड़े बदलाव? UIDAI की इस 'डिजिटल-फर्स्ट' रणनीति से नागरिकों को अपनी आधार जानकारियों को स्वयं प्रबंधित करने की स्वतंत्रता मिलेगी और सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। पैन-आधार लिंक करवाने की डेडलाइन UIDAI ने अलर्ट देते हुए कहा कि 31 दिसंबर 2025 तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर 1 जनवरी 2026 से आपका पैन कार्ड बंद हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप आपके टैक्स और बैंक लेनदेन सहित सभी बड़े वित्तीय कार्य रुक सकते हैं। वहीं नए पैन कार्ड बनवाने वालों के लिए भी अब आधार वेरिफिकेशन ज़रूरी कर दिया गया है।

भारतीय मूल के CEO पर धोखाधड़ी का आरोप, अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला उजागर

अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला! भारतीय मूल के CEO पर लगे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप भारतीय मूल के CEO पर धोखाधड़ी का आरोप, अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला उजागर अमेरिका में हड़कंप: भारतीय मूल के CEO पर 4000 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप वाशिगटन  अमेरिका में भारतीय मूल के टेलीकॉम कंपनी के CEO बैंकिम ब्रह्मभट्ट पर 500 मिलियन डॉलर (4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) के बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मभट्ट ने फर्जी ग्राहक खातों और राजस्व के दस्तावेज तैयार कर अमेरिकी बैंकों से भारी कर्ज हासिल किया. ब्रह्मभट्ट ब्रॉडबैंड टेलीकॉम और ब्रिजवॉइस नामक कंपनियों के मालिक हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कई निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि उनके व्यवसायों की आय और ग्राहक आधार बहुत मजबूत है, जबकि असल में वह कई गैर-मौजूद ग्राहकों और फर्जी लेन-देन पर आधारित थी. इस घोटाले में प्रमुख निवेश फर्म HPS इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स और वैश्विक एसेट मैनेजमेंट दिग्गज BlackRock के समर्थित फंड भी शामिल हैं. WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2024 में लेनदारों ने मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि ब्रह्मभट्ट ने गैर-मौजूद राजस्व स्रोतों को कर्ज की गारंटी के रूप में गिरवी रखा. 2020 से कंपनी को मिल रहे थे लोन HPS ने सितंबर 2020 में ब्रह्मभट्ट की एक कंपनी को कर्ज देना शुरू किया और यह राशि धीरे-धीरे बढ़कर 2021 की शुरुआत तक 385 मिलियन डॉलर और अगस्त 2024 तक 430 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई. इन कर्जों का लगभग आधा हिस्सा BNP Paribas बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया था. कंपनी ने दिवालियापन के लिए दायर की याचिका अब उनकी कंपनियों ने Chapter 11 दिवालियापन संरक्षण के तहत अदालत में आवेदन किया है, जो अमेरिकी कानून के तहत कंपनियों को पुनर्गठन का मौका देता है. इसी दिन ब्रह्मभट्ट ने निजी दिवालियापन की याचिका भी दाखिल की थी. रिपोर्ट के अनुसार, जब पत्रकार न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी स्थित उनके कार्यालय पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला और पड़ोसियों ने बताया कि कई हफ्तों से कोई वहां नहीं दिखा. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संभावना है कि ब्रह्मभट्ट अमेरिका छोड़कर भारत लौट आए हों. उनके वकील ने हालांकि सभी आरोपों को निराधार बताया है.

कर्नाटक के CM का केंद्र पर निशाना: कहा, कन्नड़ को दबाया जा रहा है, हिंदी थोपी जा रही है

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार को केंद्र सरकार पर कन्नड़ भाषा की उपेक्षा करने और हिंदी थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने राज्य के लोगों से ‘कन्नड़-विरोधी’ ताकतों का विरोध करने का भी आह्वान किया। ⁠ मुख्यमंत्री ने राज्य स्थापना दिवस (राज्योत्सव दिवस) के अवसर पर राजधानी में आयोजित कार्यक्रम में कहा, “केंद्र सरकार कर्नाटक के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य केंद्र को 4.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व देता है, लेकिन उसे उसका उचित हिस्सा नहीं मिलता और बदले में बहुत ही मामूली राशि दी जाती है। कन्नड़ भाषा के साथ “अन्याय” होने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हिंदी थोपने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हिंदी और संस्कृत के विकास के लिए अनुदान दिए जाते हैं, जबकि देश की अन्य भाषाओं की उपेक्षा की जा रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक को राज्य के विकास के लिए आवश्यक धन से वंचित किया जा रहा है। सिद्धरमैया ने कहा, “कन्नड़ जैसी शास्त्रीय भाषा के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं दी जा रही, जिससे उसके साथ अन्याय हो रहा है। हमें उन सभी का विरोध करना चाहिए जो कन्नड़-विरोधी हैं।” कन्नड़ भाषा और उसकी संस्कृति को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में कन्नड़ भाषा की उपेक्षा के कारण कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने कहा, “विकसित देशों के बच्चे अपनी मातृभाषा में सोचते, पढ़ते-लिखते और सपने देखते हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत है। अंग्रेज़ी और हिंदी हमारे बच्चों की प्रतिभा को कमजोर कर रही हैं।” सिद्धरमैया ने कहा, “इसलिए मातृभाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में लागू करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता है। मैं इस दिशा में केंद्र से गंभीरता से विचार करने का आग्रह करता हूं।”  

ओडिशा में ‘सी लॉकडाउन’: कछुओं की रक्षा हेतु मछली पकड़ने पर 7 माह का बैन, मछुआरों को मिलेगी आर्थिक सहायता

भुवनेश्वर ओडिशा सरकार ने समंदर में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने खतरे में घिरे जैतून रिडले कछुओं (ओलिव रिडले टर्टल) के संरक्षण कार्यक्रम के तहत ये नियम लगाया है. शनिवार को सरकार की ओर से नोटिस जारी किया गया कि धामरा, देवी और रुसीकुल्या नदियों के मुहानों के पास 20 किलोमीटर समुद्री क्षेत्र में 7 महीने का सागरीय मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया. अधिकारियों ने बताया कि यह प्रतिबंध 1 नवंबर से 31 मई तक लागू रहेगा, जो कछुओं के प्रजनन और संभोग मौसम के दौरान समुद्री जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. वहीं, गहिरमठा तट पर तो पूरे साल मछली पकड़ने पर रोक बनी हुई है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा कछुआ कॉरिडोर माना जाता है. यह प्रतिबंध ओडिशा समुद्री मछली रेगुलेशन एक्ट (OMFRA), 1982 की धारा 2, 7 और 4 तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत लगाया गया है. एक अधिकारी ने कहा, ‘हर साल की तरह इस बार भी सख्ती से अमल होगा, क्योंकि ये संकटग्रस्त प्रजातियां मछली पकड़ने के जाल में फंसकर या ट्रॉलर प्रोपेलर से टकराकर बड़ी संख्या में मर जाती हैं.’ मल्टी-लेयर पैट्रोलिंग होंगी प्रभावी निगरानी के लिए भद्रक, राजनगर, पुरी और बेरहामपुर के चार वन्यजीव मंडलों में 61 तटीय और 5 अपतटीय कैंप स्थापित किए गए हैं. वन, मत्स्य, समुद्री पुलिस और कोस्ट गार्ड की संयुक्त टीमें मल्टी-लेयर पैट्रोलिंग करेंगी. राजनगर मैंग्रोव (वन्यजीव) वन मंडल के डीएफओ सुदर्शन गोपीनाथ यादव ने बताया, ‘5 हाई-स्पीड नावें, 13 ट्रॉलर और सपोर्ट बोट्स अवैध मछली पकड़ने को रोकने के लिए तैनात हैं. सशस्त्र पुलिस भी पैट्रोलिंग टीमों के साथ रहेगी.’ एकमुश्त 15,000 रुपये की आजीविका प्रतिबंध से करीब 11,000 मछुआरा परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें आय के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार एकमुश्त 15,000 रुपये की आजीविका सहायता देगी. लेकिन, ओडिशा ट्रेडिशनल फिश वर्कर्स यूनियन (OTFWU) ने मांग की है कि राशि 30,000 रुपये की हो और इसमें छोटे मछली व्यापारियों समेत सभी मछली-निर्भर परिवार शामिल हों. यूनियन के महासचिव के येलय्या ने कहा, ‘प्रतिबंध अवधि 7 से घटाकर 5 महीने, क्षेत्र 20 किलोमीटर से घटाकर 5 किलोमीटर और सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक रोजगार सहायता दी जाए.’ अरिबाडा नामक दुर्लभ घटना जैतून रिडले कछुए रात के अंधेरे में घुसकर ‘अरिबाडा’ नामक दुर्लभ घटना में अंडे देती हैं. अंडे देने के बाद वे समुद्र लौट जाती हैं, और 45-60 दिनों बाद बच्चे निकल आती हैं. बिना मां के ही पलकर. ओडिशा का यह क्षेत्र कछुओं का प्रमुख घोंसला स्थल है, जहां हर साल लाखों कछुए आते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयास वैश्विक स्तर पर संरक्षण का मॉडल है, लेकिन मछुआरों की आजीविका को मजबूत बनाने की जरूरत है. सरकार ने अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए हैं.

विदेश में फंसे झारखंड के मजदूरों की दुर्दशा! ट्यूनिशिया में भूख-प्यास से जूझ रहे लोग, सीएम सोरेन ने दिए जांच के आदेश

नई दिल्ली  अफ्रीका के ट्यूनिशिया में झारखंड राज्य के करीब 48 प्रवासी मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। ये सभी मजदूर झारखंड के हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो जिले के बताए जा रहे हैं। मजदूरों ने एक वीडियो जारी करके मदद की अपील की है। मामले में सीएम हेमंत सोरेन ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। वीडियो में मजदूर कह रहे हैं, "हम यहां बहुत खराब हालत में हैं। कंपनी ने हमारी सैलरी बंद कर दी है। खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। बस किसी तरह से अपने घर लौटना चाहते हैं।" ट्यूनिशिया में फंसे मजदूरों ने दावा किया है कि उन्हें बीते चार महीने से सैलरी नहीं मिली है। मजदूरों ने यह भी कहा है कि उनसे ओवरटाइम करवाया जा रहा है। मामले की जानकारी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मिल गई है। उन्होंने उचित कार्रवाई कर श्रम विभाग के मजदूरों की मदद का निर्देश दिया है। इसके साथ ट्यूनिशिया में भारतीय एंबेसी से भी मदद करने की अपील की है। वहीं, झारखंड में श्रम नियोजन और कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव ने इस मामले में कहा, "मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान के बाद, विभाग के वरीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि अफ्रीका के ट्यूनीशिया में फंसे झारखंड के सभी 48 प्रवासी श्रमिकों की शीघ्र एवं सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।" इस मामले की एक वीडियो सामने आई है, जिसमें मजदूर अपनी आपबीती सुना रहे हैं। एक मजदूर ने कहा, "हम लोगों को भारत से यह बोलकर लाया गया था कि यह एक कंपनी है, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि ये प्रेम पावर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (पीपीसीएल) कॉन्ट्रैक्टर हैं। पीपीसीएल ने यह एलएमपी से कॉन्ट्रैक्ट लिया है। हम लोगों ने भारत में एग्रीमेंट पेपर की मांग की तो हमें बोला गया कि वहां पहुंचने के बाद मिलेगा। यहां पहुंचने के बाद कुछ नहीं मिलेगा।" मजदूरों ने आगे कहा कि भारत से हमें 8 घंटे की ड्यूटी बोलकर लाया गया था, लेकिन यहां 12 घंटे ड्यूटी करवाई जा रही है। 4 महीने से सैलरी नहीं मिली है। सैलरी मांगने पर धमकी दी जा रही है कि सबको जेल करवा देंगे, भारत वापस नहीं जा पाओगे। हमारे पास खाने-पीने के सारे पैसे खत्म हो गए हैं। कोई सामान भी नहीं है। हम 48 मजदूर यहां फंसे हुए हैं। हमलोग वतन वापसी के लिए झारखंड और केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं कि हमारी मदद की जाए।

भारत का बड़ा कदम: कल लगेगा ‘समुद्र की आँख’ का लॉन्च — ऑपरेशन सिंदूर 2.0 और भी खतरनाक

बेंगलुरु  कल यानी 2 नवंबर 2025 को भारत का प्रसिद्ध लॉन्च व्हीकल LVM3 रॉकेट अपनी पांचवीं उड़ान भरेगा. यह उड़ान LVM3-M5 के नाम से जाना जाएगा. इस उड़ान में भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. यह उपग्रह भारतीय नौसेना के लिए बहुत खास है. यह न केवल समुद्री इलाकों में संचार को मजबूत करेगा, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से सीखे गए सबकों को भी मजबूत करेगा. LVM3: भारत का विश्वसनीय रॉकेट LVM3 भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO का सबसे ताकतवर लॉन्च व्हीकल है. इसका पूरा नाम लॉन्च व्हीकल मार्क-3 है. यह रॉकेट भारी सामान को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए बनाया गया है. अब तक की चार उड़ानों में इसने शानदार काम किया है. सबसे हाल की उड़ान चंद्रयान-3 की थी, जिसमें भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पहली बार सफल लैंडिंग करने वाला देश बना. अब LVM3-M5 की बारी है. यह रॉकेट पूरी तरह तैयार है. 26 अक्टूबर 2025 को इसे उपग्रह के साथ जोड़कर लॉन्च पैड पर ले जाया गया. अब अंतिम जांच चल रही है. लॉन्च शाम 5:26 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा. आप इसे ISRO के यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकते हैं. CMS-03: भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 का पूरा नाम कम्युनिकेशन सैटेलाइट मिशन-03 है. यह एक मल्टी-बैंड संचार उपग्रह है, यानी यह कई तरह की रेडियो तरंगों पर काम करेगा. इसका वजन करीब 4400 किलोग्राम है. यह भारत से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में भेजा जाने वाला सबसे भारी संचार उपग्रह होगा. जीटीओ एक ऐसी कक्षा है जहां से उपग्रह आसानी से जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में पहुंच जाता है. वहां यह पृथ्वी के ऊपर घूमता रहता है. लगातार संपर्क रखेगा. यह उपग्रह सात साल तक काम करेगा. यह भारतीय मुख्यभूमि और बड़े समुद्री इलाकों को कवर करेगा. इसमें इंटरनेट कनेक्टिविटी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन जैसी सुविधाएं होंगी. खास बात यह है कि यह दूरदराज के इलाकों, जहाजों और हवाई जहाजों को मजबूत कनेक्शन देगा. पहले के संचार उपग्रहों से यह ज्यादा क्षमता वाला है, यानी ज्यादा डेटा तेजी से भेज सकेगा. भारतीय नौसेना के लिए क्यों खास है CMS-03? CMS-03 मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया है. इसे GSAT-7R भी कहा जाता है. नौसेना के जहाज, पनडुब्बियां और विमान समुद्र में दूर-दूर तक जाते हैं. वहां सिग्नल कमजोर हो जाते हैं. यह उपग्रह नौसेना को सुरक्षित और तेज संचार देगा.  उदाहरण के लिए…     सुरक्षा बढ़ेगी: नौसेना के अधिकारी रीयल-टाइम में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे.     समन्वय आसान: अलग-अलग जहाजों के बीच बातचीत तेज होगी, जिससे अभियान सफल होंगे.     समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी जैसे इलाकों में निगरानी मजबूत होगी. यह उपग्रह नौसेना को 'समुद्री आंख' देगा. मतलब, समुद्र में हर चाल पर नजर रहेगी. इससे भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा और मजबूत होगी. ऑपरेशन सिंदूर से कैसे जुड़ा है यह उपग्रह? अब बात करते हैं ऑपरेशन सिंदूर की. यह भारत का एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था, जो मई 2025 में हुआ. यह अभियान सिर्फ चार दिनों का था, लेकिन इसने भारत की सैन्य ताकत दिखाई. लेकिन इस ऑपरेशन से एक बड़ा सबक मिला: संचार और निगरानी में कमी न हो. ऑपरेशन के दौरान वायुसेना, सेना और नौसेना को एक-दूसरे से तुरंत संपर्क की जरूरत पड़ी. समुद्री इलाकों में जहाजों को वायुसेना के साथ समन्वय करना पड़ा. लेकिन पुराने उपग्रहों की वजह से कुछ देरी हुई.  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने सैन्य संचार को मजबूत करने का फैसला लिया. इसके तहत 3 अरब डॉलर का स्पाई सैटेलाइट प्रोजेक्ट तेजी से चलाया जा रहा है. CMS-03 इसी का हिस्सा है. यह नौसेना को ऐसे संचार देगा जो दुश्मन जाम न कर सके. अगर भविष्य में 'ऑपरेशन सिंदूर २.०' जैसा कुछ हो, तो नौसेना इस उपग्रह से वायुसेना और सेना के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकेगी.  ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि समुद्री संचार कितना जरूरी है. CMS-03 इसी कमजोरी को दूर करेगा. यह नौसेना को डिजिटल कवच देगा, जो युद्ध में जीत की कुंजी बनेगा. प्री-लॉन्च तैयारियां: सब कुछ तयशुदा 20 अक्टूबर को रॉकेट और उपग्रह का एकीकरण पूरा हुआ. 26 अक्टूबर को इसे लॉन्च पैड पर ले जाया गया. अब मौसम की जांच, ईंधन भरना और अंतिम टेस्ट हो रहे हैं. ISRO के वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं. अगर सब ठीक रहा, तो कल भारत का नया गौरव अंतरिक्ष में चमकेगा.