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दूसरा विवाह अब बना बड़ा अपराध: असम सरकार का कड़ा कानून, भारी सज़ा और नौकरी पर खतरा

असम  असम विधानसभा में गुरुवार को बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने को लेकर प्रोहिबिशन ऑफ पॉलीगैमी बिल 2025 पारित कर दिया गया है। अब असम में दूसरी शादी करना दंडनीय अपराध बन गया है। इस बिल के तहत यदि कोई व्यक्ति दूसरी शादी रचाता है तो उसके लिए 7 साल की कैद की सजा के साथ पीड़ित महिला को मुआवजा देने का भी प्रावधान है। अगर सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति दूसरी शादी करता है तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बिल के बारे में जानकारी दी। विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए सरमा ने दोहराया कि राज्य में महिलाओं के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अगले साल बीजेपी की सरकार बनी तो पारित होगा यूसीसी विधेयक सीएम हिमंत ने कहा कि असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के अनुरूप राज्य में नया कानून लाने की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि यदि अगले वर्ष होने वाले असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आती है, तो यूसीसी विधेयक पहले विधानसभा सत्र में ही पूरी तरह पारित कर दिया जाएगा। असम बहुविवाह निषेध विधेयक क्या है? विधेयक के प्रावधानों के तहत पहली शादी के रहते हुए अवैध रूप से दूसरी शादी करने का दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की कैद हो सकती है। हालांकि, इसमें अनुसूचित जनजातियों और संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है, जो पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करता है। पीड़ित महिलाओं को मिलेगा मुआवजा विधेयक में पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने का प्रावधान है, क्योंकि बहुविवाह के कारण उन्हें अत्यधिक पीड़ा और कष्ट सहना पड़ता है। विधेयक में प्रस्तावित किया गया है कि प्रस्तावित अधिनियम के तहत दोबारा अपराध करने वाले को प्रत्येक अपराध के लिए निर्धारित सजा से दोगुनी सजा दी जाएगी। बहुविवाह में शामिल होने पर 2 साल की जेल, एक लाख का जुर्माना यदि कोई ग्राम प्रधान, काजी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक बेईमानी से तथ्यों को छुपाता है या जानबूझकर बहुविवाह में भाग लेता है, तो उसे दो साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। कोई भी व्यक्ति जो प्रस्तावित कानून का उल्लंघन करते हुए जानबूझकर विवाह करता है, उसे दो वर्ष तक की कैद या 1.50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

चुनाव के 3 दिन बाद बड़ा upheaval: राष्ट्रपति भवन पर गोलियां, सेना ने संभाली सत्ता

नई दिल्ली  गिनी-बिसाऊ में राष्ट्रीय चुनावों के तीन दिन बाद सेना ने राष्ट्रपति को सत्ता से हटा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। सैनिकों ने बुधवार को सरकारी टेलीविजन पर तख्तापलट की घोषणा की। बुधवार दोपहर राष्ट्रपति भवन के पास गोलियों की आवाजें भी सुनाई दी थीं। फ्रांस के समाचार आउटलेट 'जून अफ्रीका' ने राष्ट्रपति उमारो सिस्सोको एम्बालो के हवाले से बताया कि सेना प्रमुख ने तख्तापलट किया है और उन्हें (राष्ट्रपति) गिरफ्तार कर लिया गया है।   फ्रांसीसी टेलीविजन नेटवर्क ‘फ्रांस 24' से उन्होंने कहा, "मुझे पद से हटा दिया गया है।" राष्ट्रीय और सार्वजनिक व्यवस्था की बहाली के लिए गठित उच्च सैन्य कमान के प्रवक्ता दिनिस एन'चमा ने एक बयान में कहा, ‘‘ शीर्ष सैन्य कमान ने राष्ट्रीय और सार्वजनिक व्यवस्था की बहाली के लिए तुरंत राष्ट्रपति को पद से हटाने और गिनी-बिसाऊ गणराज्य की सभी संस्थाओं को अगले आदेश तक निलंबित करने का निर्णय लिया है।"   उन्होंने दावा किया कि चुनावी नतीजों में हेरफेर करके देश को अस्थिर करने की जारी गोपनीय योजना के जवाब में यह कदम उठाया गया है। एन'चमा ने आरोप लगाया कि इस "साजिश" में कुछ नेता, एक कुख्यात मादक पदार्थ कारोबारी और घरेलू तथा विदेशी नागरिक शामिल थे। राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव रविवार को हुए थे। मौजूदा राष्ट्रपति एम्बालो और विपक्षी उम्मीदवार फर्नांडो डायस दा कोस्टा, दोनों ने मंगलवार को अपनी-अपनी जीत का दावा किया था जबकि आधिकारिक अनंतिम परिणाम बृहस्पतिवार को आने की उम्मीद है।    

बदलते वैश्विक संकटों के बीच भारतीय सेना का संकल्प—2047 तक बनेगी शक्तिशाली बहु-क्षेत्रीय सेना

नई दिल्ली  नई दिल्ली में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना की भावी रणनीति, सैन्य परिवर्तनों और राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण का व्यापक खाका पेश किया। सेना प्रमुख ने कहा कि विश्व अत्यधिक अस्थिर, बहुध्रुवीय और संघर्षग्रस्त होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल दुनिया के 50 से अधिक क्षेत्रों में संघर्ष जारी हैं। इससे वैश्विक असुरक्षा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह मूल प्रश्न उठता है कि तेजी से बदलती इन वैश्विक परिस्थितियों में भारतीय सेना को किस दिशा में रूपांतरित होना चाहिए। सेनाध्यक्ष ने यहां प्रधानमंत्री के 5-एस दृष्टिकोण का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के 5-एस दृष्टिकोण यानी सम्मान, संवाद, सहयोग, समृद्धि और सुरक्षा के आधार पर भारत अमृतकाल से विजन 2047 की ओर बढ़ रहा है। इसी विजन से इस वर्ष का विषय रखा गया है जिसका शीर्षक ‘रिफार्म टू ट्रांसफॉर्म – सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत’ है।  सेना प्रमुख ने बताया कि सेना ने आने वाले वर्षों के लिए तीन-चरणीय योजना तैयार की है। चरण-1 के अंतर्गत वर्ष 2032 तक परिवर्तन के दशक के अंतर्गत तीव्र बदलाव की रूपरेखा तय है। चरण-2 में 2037 तक पहले चरण में हासिल उपलब्धियों का विस्तार एवं स्थिरीकरण निश्चित किया गया है। चरण-3 में जंप यानी भविष्य के लिए 2047 तक पूर्णत एकीकृत, बहु-क्षेत्रीय, आधुनिक और तैयार सेना का निर्माण तय किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 को रक्षा मंत्रालय ने सुधार वर्ष घोषित किया है, जिसका प्रभाव ऑपरेशन ‘सिंदूर’ जैसी उपलब्धियों में दिखा है। भारतीय सेना के परिवर्तन के चार प्रमुख आधार बताए गए। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चार प्रमुख स्प्रिंगबोर्ड या प्रेरक आधार बताए। इनमें आत्मनिर्भरता यानी स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण शामिल है। वहीं रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष तकनीक और आधुनिक सैन्य प्रणालियों में भारत तेजी से आगे बढ़ा है। हालांकि अभी भी व्यापक क्षमता निर्माण की आवश्यकता है ताकि भारत स्वयं की जरूरतें स्वयं पूरी कर सके। वहीं अनुसंधान यानी त्वरित नवोन्मेष को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सेना प्रमुख ने बताया कि आइडेक्स और ‘अदिति’ जैसे कार्यक्रम विचार से प्रोटोटाइप तक तेजी ला रहे हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष और अत्याधुनिक सामग्री के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत है। तीसरा अनुकूलन और रक्षा ढांचे में सुधार है। राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता लक्ष्यों के अनुरूप सैन्य ढांचे को तेजी से पुनर्गठित किया जा रहा है। इस संवाद से सेना को ठोस सुझाव मिलने की अपेक्षा है। चौथा आधार एकीकरण को बताया गया। इसमें सैन्य नागरिक समन्वय शामिल है। युद्धक क्षमता का विकास बहु-एजेंसी और बहु-क्षेत्रीय प्रयास भी इसका हिस्सा है। आर्मी चीफ ने बताया कि सेना अपने परीक्षण क्षेत्र खोल रही है, स्टार्ट-अप को सहयोग दे रही है और राष्ट्रीय तकनीकी मिशनों से जुड़ रही है। साथ ही वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ वैश्विक सहयोग को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। सेना प्रमुख ने संबोधन के अंत में कहा कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग में उपस्थित सैन्य विशेषज्ञ, विद्वान और नीति निर्माता भारतीय सेना के परिवर्तन को नई दिशा देंगे। इससे पहले सत्र की शुरुआत में सेना प्रमुख ने राष्ट्रपति, राजनयिक समुदाय, सेनाध्यक्षों, विशेषज्ञों, मीडिया प्रतिनिधियों और उपस्थित विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग की स्थापना वर्ष 2023 में हुई थी, तब तत्कालीन सेना प्रमुख ने भारतीय सेना के लिए ‘परिवर्तन का दशक’ घोषित किया था। इसके बाद यह मंच लगातार विस्तृत, प्रभावी और वैश्विक रणनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

एक महीने में दो कड़े फैसले: पहले फांसी, अब 21 साल कैद… हसीना की वापसी पर लगा ब्रेक?

ढाका  बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर न्यायिक शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। एक महीने में दूसरा बड़ा फैसला आते ही राजनीतिक हलकों में भूचाल मच गया है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल से मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा मिलने के बाद, अब ढाका की स्पेशल जज कोर्ट ने भूमि घोटाले के तीन मामलों में कुल 21 साल की कैद सुनाई है। फैसला हसीना और उनके परिवार की अनुपस्थिति में सुनाया गया, क्योंकि वे पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद भारत में रह रही हैं। अदालत ने पाया कि RAJUK पुर्बांचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में हसीना और उनके रिश्तेदारों को बिना आवेदन और गैरकानूनी तरीके से प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन मामलों में उनका बेटा सजीब वाजेद जॉय, बेटी साइमा पुतुल, बहन शेख रेहाना, और ब्रिटिश सांसद ट्यूलिप सिद्दीक सहित पूरा परिवार आरोपी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, हसीना की राजनीतिक जड़ों को पूरी तरह उखाड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसके संकेत लगातार आते फैसले दे रहे हैं।इस तरह फांसी + 21 साल की सजा ने हसीना की राजनीति पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बांग्लादेश की राजनीति अब नए मोड़ पर है, और आने वाले हफ्तों में घटनाएँ और भी नाटकीय हो सकती हैं। मौत की सजा का फैसला 17 नवंबर को बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए शेख हसीना को मौत की सजा दी। ट्रिब्यूनल का आरोप है कि पिछले साल जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान  सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हुई हिंसा में कई छात्रों की मौत  “मानवता के खिलाफ अपराध”  है। इस मामले में हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी फांसी की सजा सुनाई गई। इन प्रदर्शनों के बाद हसीना देश से भागकर भारत में रह रही हैं, इसलिए यह फैसला भी उनकी अनुपस्थिति में दिया गया।   21 साल की कैद  ढाका की स्पेशल जज कोर्ट-5 ने RAJUK के पुर्बांचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन घोटाले के तीन मामलों में शेख हसीना को 7-7 साल (कुल 21 साल) की सजा सुनाई। कोर्ट के मुताबिक हसीना को बिना किसी आवेदन और गैरकानूनी तरीके से सरकारी भूमि आवंटित की गई।  इसलिए तीनों मामलों में अलग-अलग सजाएँ दी गईं । सजा क्रमशः भुगतनी होगी।  यह फैसला गुरुवार सुबह 11:45 बजे जज मोहम्मद अब्दुल्ला अल-मामून ने सुनाया। ट्रायल कैसे हुआ?     प्रॉसिक्यूशन और डिफेंस की दलीलें 23 नवंबर को पूरी हुईं     31 जुलाई को आरोप तय हुए     17 नवंबर को गवाही पूरी     आज फैसला सुनाया गया     हसीना कोर्ट में मौजूद नहीं थीं पूरा परिवार कानून के शिकंजे में  एंटी-करप्शन कमीशन (ACC) ने प्लॉट घोटाले में 6 अलग केस दर्ज किए थे। तीन मामलों में आज फैसला आया, बाकी तीन अभी लंबित हैं। आरोपी सूची में शेख हसीना, उनका बेटा सजीब वाजेद जॉय, उनकी बेटी साइमा वाजेद पुतुल,  बहन शेख रेहाना, रेहाना की बेटी और ब्रिटिश MP ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक, रेहाना का बेटा रादवान मुजीब सिद्दीक, रेहाना की पोती अज़मीना सिद्दीक शामिल हैं। कुल मिलाकर, घोटाले में पूरे वाजेद-सिद्दीक परिवार को आरोपी बनाया गया है।मामलों में कुल 20 आरोपी हैं, लेकिन केवल एक  मोहम्मद खुर्शीद आलम  गिरफ्तार है। विशेषज्ञों के अनुसार,इंटरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और हसीना के बीच पुराने राजनीतिक मतभेद हैं। हसीना की सत्ता वापसी की किसी भी संभावना को खत्म करने के लिए  पहले ट्रिब्यूनल से मौत की सजा फिर ढाका कोर्ट से भ्रष्टाचार में 21 साल और बाकी मामलों की सुनवाई तेज की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई यूनुस बनाम हसीना की जंग का हिस्सा है।  हसीना  भारत में हैं। बांग्लादेश अरेस्ट वॉरंट जारी करने की तैयारी में है।  

विदेशी धरती पर भारतीय ताकत का प्रदर्शन: फ्रांस में गरुड़ की ऐतिहासिक उड़ान

फ्रांस  फ्रांस के Mont-de-Marsan एयरबेस पर चल रहा Exercise Garuda 2025 तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय वायुसेना (IAF) और फ्रेंच एयर एंड स्पेस फोर्स (FASF) लगातार संयुक्त मिशन उड़ानें भर रही हैं। दोनों एयरफोर्सेज़ अपनी सटीकता, तालमेल और संयुक्त ऑपरेशन क्षमता का शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।IAF ने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि “दोनों टीमें उच्च operational tempo बनाए रखते हुए जटिल मिशन प्रोफाइल्स को पूरा कर रही हैं।” पोस्ट के साथ शेयर की गई हवाई तस्वीरों में उड़ते फाइटर जेट्स, refuelling और formation flying की अद्भुत झलक दिखाई दी।     Su-30MKI फाइटर जेट्स (IAF)     French Multirole Fighter Jets     C-17 Globemaster III – एयरलिफ्ट और लॉजिस्टिक सपोर्ट     IL-78 Tankers- mid-air refuelling के लिए इन विमानों ने मिलकर air-to-air combat, air defence, और coordinated strike missions जैसे वास्तविक युद्ध जैसी सिचुएशन में उड़ानें भरीं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह अभ्यास पायलटों को वास्तविक ऑपरेशनल माहौल में रणनीति, सामरिक प्रशिक्षण और teamwork को निखारने का मौका देता है। यह अभ्यास भारत–फ्रांस की 1998 में शुरू हुई Strategic Partnership को और मजबूत बनाता है। रक्षा, सुरक्षा, स्पेस और Indo-Pacific क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। Exercise Garuda 2025 पेशेवर अनुभव साझा करने और बेहतरीन tactical practices को सीखने का एक बड़ा मंच बन गया है।

CJI सूर्यकांत ने दिया सुझाव: 18+ कंटेंट देखने से पहले आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य हो

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेटफ्लिक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद ‘अश्लील’ कंटेंट को लेकर सख्ती दिखाई. जजों ने सुझाव दिया है कि अश्लील सामग्री देखने के लिए आधार कार्ड जरूरी होना चाहिए. कोर्ट का मानना है कि इससे बच्चों को गलत कंटेंट से बचाया जा सकेगा. यह सुझाव चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की बेंच ने दिया है. सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि सिर्फ चेतावनी देना काफी नहीं है. जब तक दर्शक चेतावनी पढ़ते हैं तब तक शो शुरू हो जाता है. इसलिए उम्र की पुष्टि के लिए आधार का इस्तेमाल एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह सुनवाई कॉमेडियन और पॉडकास्टर के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हो रही थी. इसमें समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया जैसे नाम शामिल हैं. कोर्ट ने दिव्यांगों के अपमान पर भी गहरी नाराजगी जताई है. जजों ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब मनमानी नहीं है. इसके लिए एक स्वायत्त रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत है. अश्लीलता रोकने के लिए आधार वेरिफिकेशन का सुझाव सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लीलता पर चिंता जताई है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस मुद्दे पर अहम बात कही. उन्होंने कहा कि किताबों या पेंटिंग में अश्लीलता अलग बात है. वहां नीलामी होती है और प्रतिबंध भी लग सकते हैं. लेकिन फोन पर स्थिति अलग है. जैसे ही आप फोन ऑन करते हैं तो कंटेंट सामने आ जाता है. कई बार न चाहते हुए भी गलत चीजें दिख जाती हैं. ऐसे में क्या किया जाए. इसी पर सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि चेतावनी देने के बावजूद शो शुरू हो जाता है. चेतावनी सिर्फ कुछ सेकंड के लिए आती है. इसके बाद शो चल पड़ता है. इसलिए आधार कार्ड मांगना सही हो सकता है. इससे दर्शक की उम्र का पता चल जाएगा. यह सब एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है. बार एंड बेंच की लाइव रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह सिर्फ सुझाव है.     कंटेंट को कंट्रोल करने के लिए स्वायत्त संस्था की जरूरत कोर्ट ने रेगुलेशन के लिए एक स्वतंत्र संस्था की वकालत की है. सीजेआई ने कहा कि सेल्फ स्टाइल संस्थाएं काफी नहीं हैं. स्थिति को संभालने के लिए बाहरी प्रभाव से मुक्त संस्था चाहिए. कोर्ट ने सवाल किया कि अगर सब कुछ की अनुमति दे दी जाए तो क्या होगा. समाज में संतुलन बनाना बहुत जरूरी है. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह किसी का मुंह बंद नहीं करना चाहता. मौलिक अधिकारों का संतुलन बना रहना चाहिए. जजों ने कहा कि हम रेगुलेशन का सुझाव देने वाले आखिरी लोग होंगे. लेकिन जब इंडस्ट्री खुद कुछ नहीं कर रही तो दिक्कतें आ रही हैं. कोर्ट ने पूछा कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं.   दिव्यांगों का मजाक उड़ाने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी     सुनवाई के दौरान समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया का मामला भी उठा. रणवीर ने एक शो में कथित तौर पर अश्लील टिप्पणी की थी. वहीं समय रैना पर दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप है. क्योंर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने रैना के खिलाफ याचिका दी है. आरोप है कि उन्होंने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज पर असंवेदनशील बात कही. कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की.     सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि दिव्यांगों के अपमान पर सख्त कानून क्यों नहीं है. यह कानून एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर होना चाहिए. मेहता ने भी माना कि मजाक गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता.     जस्टिस बागची ने देश विरोधी कंटेंट का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने पूछा कि क्या सेल्फ रेगुलेशन ऐसे कंटेंट को रोक पाएगा. कई बार कंटेंट समाज के ढांचे को बिगाड़ने वाला होता है. जब तक सरकार जवाब देती है तब तक देर हो जाती है. वीडियो वायरल हो जाते हैं और करोड़ों लोग देख लेते हैं. वकील प्रशांत भूषण ने इस पर तर्क दिया. उन्होंने कहा कि ‘एंटी नेशनल’ शब्द बहुत अस्पष्ट है. क्या सीमा विवाद के इतिहास पर लिखना भी देश विरोधी होगा.     इस पर जस्टिस बागची ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि हम रेगुलेटेड अधिकार की बात कर रहे हैं. कोई सरकारी अधिकारी यह तय नहीं कर सकता. लेकिन अगर कंटेंट देश की एकता और अखंडता को चोट पहुंचाता है तो सोचना होगा. यूजर जेनरेटेड कंटेंट पर सरकार की चिंता सॉलिसिटर जनरल मेहता ने यूजर जेनरेटेड कंटेंट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि फ्री स्पीच की आड़ में कोई कुछ भी नहीं कर सकता. सीजेआई ने इस बात पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि कोई अपना चैनल बना ले. और फिर बिना किसी जवाबदेही के कुछ भी करता रहे. फ्री स्पीच की सुरक्षा जरूरी है लेकिन सीमाएं भी हैं. अगर किसी शो में एडल्ट कंटेंट है तो एडवांस चेतावनी होनी चाहिए. साथ ही पेरेंटल कंट्रोल भी जरूरी है. अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि मंत्रालय इस पर मीटिंग करने वाला है. अगर किसी कानून में बदलाव की जरूरत होगी तो किया जाएगा.     सरकार और स्टेकहोल्डर्स के बीच होगी चर्चा कोर्ट ने सुझाव दिया कि जल्दबाजी में कुछ नहीं होना चाहिए. एक विचार-विमर्श की प्रक्रिया होनी चाहिए. प्रस्ताव को पब्लिक डोमेन में रखा जाना चाहिए. वेंकटरमणी ने कहा कि हम सबसे बात करेंगे. किसी को भी ऐसे ही चर्चा में नहीं आने दिया जाएगा. मेहता ने कहा कि सरकार इस पर विचार कर रही है. वे एक हफ्ते बाद जानकारी देंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रभाव कभी-कभी फायदों से ज्यादा हो जाते हैं. इसलिए एक जिम्मेदार समाज का निर्माण जरूरी है. जब समाज जिम्मेदार होगा तो समस्याएं खुद सुलझ जाएंगी.     कॉमेडियन को दी फंड जुटाने की सलाह दिव्यांगों के मामले में कोर्ट ने कॉमेडियन को एक सलाह दी है. कोर्ट ने कहा कि वे दिव्यांगों के इलाज के लिए फंड जुटाएं. इसके लिए उन्हें कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए. समय रैना के वकील ने कहा कि उन्होंने पैसे दान किए हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए. हमें उनके आत्मसम्मान का आदर करना चाहिए. कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक डेडिकेटेड फंड बनाया जाए. कॉमेडियन … Read more

मोदी–पुतिन वार्ता अहम मोड़ पर: S-400 की अतिरिक्त स्क्वाड्रन और Su-57 डील पर सभी की निगाहें

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 5 दिसंबर बेहद अहम द्विपक्षीय सम्मेलन होने वाला है। इसमें भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पांच अतिरिक्त एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम स्क्वाड्रन की मांग कर सकता है। यह कदम हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सिस्टम के शानदार प्रदर्शन के बाद उठाया जा रहा है, जहां इसने पाकिस्तानी मिसाइलों, ड्रोनों और विमानों को सफलतापूर्वक नष्ट किया था। S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस स्क्वाड्रनों के अलावा, पहले से शामिल स्क्वाड्रनों के लिए बड़ी संख्या में मिसाइलों की खरीद भी इस बातचीत का मुख्य हिस्सा होगी। रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Sukhoi-57 की दो से तीन स्क्वाड्रन बेचने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका F-35 लाइटनिंग-II को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, भारत ने अभी तक किसी भी विमान पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि IAF के लिए दो-तीन स्क्वाड्रन पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण एक उपयोगी अंतरिम समाधान हो सकता है, जब तक कि स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट 2035 के आसपास तैयार नहीं हो जाता। लेकिन Su-57, F-35 या किसी अन्य विकल्प पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। 84 Sukhoi-30MKI विमानों का होगा बड़ा अपग्रेड कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) जल्द ही 63000 करोड़ रुपये की लागत से पहले बैच के 84 Sukhoi-30MKI विमानों के अपग्रेड को मंजूरी देगी। यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले रूसी मूल के विमानों को अगले 30 वर्षों तक एयर कॉम्बैट के लिए सक्षम बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम है। अपग्रेड में शामिल होंगे-     आधुनिक AESA रडार     एडवांस एवियोनिक्स     लंबी दूरी के हथियार     मल्टी-सेंसर फ्यूजन तकनीक सूत्रों के अनुसार, अपग्रेड स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, पर रूस की भी इसमें सीमित भूमिका होगी। अमेरिका के साथ बढ़ते रक्षा सौदे अमेरिका के साथ भारत ने पिछले 15 वर्षों में 26 अरब डॉलर से अधिक के रक्षा सौदे किए हैं। हाल ही में भारत ने 113 GE-F404 इंजन (तेजस MK-1A) के लिए 8,900 करोड़ रुपये का समझौता किया। नौसेना के MH-60R Seahawk हेलिकॉप्टरों के लिए 7,000 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज मंजूर किया। ट्रंप प्रशासन के अधिक लेन-देन आधारित रुख के बावजूद भारत रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। S-400 डिलीवरी में तेजी की उम्मीद रूस ने भरोसा दिलाया है कि 2018 में हुए 5.4 अरब डॉलर के S-400 सौदे के अंतिम दो स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक भारत को सौंप दिए जाएंगे। यूक्रेन युद्ध के चलते इसमें देरी हुई थी। साथ ही, रक्षा मंत्रालय ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से S-400 मिसाइलों की बड़ी खरीद को भी मंजूरी दी है, ताकि पाकिस्तान के साथ हालिया तनाव में उपयोग की गई मिसाइलें पुनः भरी जा सकें और भविष्य के लिए रणनीतिक भंडार तैयार किए जा सकें। IAF ने पांच और S-400 स्क्वाड्रनों की मांग भी रखी है। इसके अलावा, रूस भारत में S-400 के लिए MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा स्थापित करेगा। ऑपरेशन सिंदूर में S-400 का प्रदर्शन रहा ‘गेमचेंजर’ IAF प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने हाल ही में कहा कि S-400 सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 314 किमी की दूरी पर यानी अब तक की सबसे लंबी हवाई मार करते हुए कम से कम पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया था जिनमें F-16 और JF-17 श्रेणी के विमान शामिल थे। उन्होंने S-400 को ऑपरेशन का गेमचेंजर बताया।

CM की दौड़ में उठा नया सवाल: क्या DK को चुनने पर कांग्रेस में छिड़ेगा बवाल? सिद्धारमैया गुट की नब्ज तेज

बेंगलुरु  कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को लेकर संघर्ष और बढ़ने के आसार हैं। खबर है कि अगर पार्टी आलाकमान डीके शिवकुमार को सीएम पद के लिए चुनता है, तो मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का खेमा बड़े ऐक्शन की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इसे लेकर दोनों ही नेताओं और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। संभावनाएं हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद राहुल गांधी और सोनिया गांधी से जल्द इस मुद्दे पर मुलाकात कर सकते हैं। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुत्रों ने बताया है कि सिद्धारमैया विधायक अलर्ट मोड पर है और जरूरत पड़ने पर दिल्ली जाकर दबाव डाल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल सीएम आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर इस बात के थोड़े भी संकेत मिले कि शिवकुमार का प्रमोशन होने वाला है, तो सिद्धारमैया के समर्थक हरकत में आ जाएंगे। हालांकि, आगे की रणनीति क्या होगी, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। शिवकुमार के नाम पर भारी विवाद? रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि अगर पार्टी मुख्यमंत्री बदलने पर जोर देता है, तो उनके सामने नामों की एक लिस्ट पेश की जाएगी। कहा जा रहा है कि एक विकल्प गृहमंत्री जी परमेश्वर हो सकते हैं। वह खुलकर अपनी दावेदारी पेश करते रहे हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार में दरार बरकरार है। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने इससे इनकार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार में मंत्री सतीश जरकिहोली की अगुवाई में एक बैठक हुई थी। जरकिहोली को सिद्धारमैया समर्थक माना जाता है। कहा जा रहा है कि उस बैठक में ही ताजा रणनीति तैयार की गई है। इसके अलावा जरकिहोली डिप्टी सीएम से भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक साफ नहीं हो सका है कि दोनों नेताओं में क्या बात हुई। कांग्रेस आलाकमान पर बढ़ा दबाव बुधवार को जरकिहोली ने कांग्रेस आलाकमान से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि वह जल्द ही खरगे से मुलाकात के लिए समय मांगेंगे। उनके अनुसार, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं और उन्होंने पहले दिन से ही यह बात सबको बता दी थी, लेकिन पार्टी आलाकमान ने सिद्धरमैया को मौका दिया। जारकीहोली ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन पर पार्टी आलाकमान को फैसला लेना है। उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया ने भी कहा है कि आलाकमान को इस पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए। मंत्री ने कहा, 'जब मुख्यमंत्री ऐसा कहते हैं, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए।'  

बंगाल मिशन: अमित शाह बोले—हर जगह ड्यूटी मोड में रहें कार्यकर्ता

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद उत्साहित भाजपा अब मिशन बंगाल पर जुटने वाली है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के दिल्ली स्थित आवास पर हुई डिनर मीटिंग में भाजपा नेताओं का होम मिनिस्टर अमित शाह ने मार्गदर्शन किया। एक तरफ उन्होंने बिहार में मिली जीत से अहंकार में ना आने की सीख दी तो वहीं यह भी कहा कि अब बंगाल के लिए जुटना होगा। उन्होंने कहा कि अब आगे हम लोगों को बंगाल की लड़ाई के लिए तैयार रहना है। उनकी स्पष्ट नसीहत थी कि सभी लोग जहां कम, वहां हम वाले भाव से काम करें और कार्यकर्ता मोड में रहें।   गृह मंत्री ने कहा कि जहां भी संगठन कमजोर पड़े, वहां जाकर ताकत बनना है। अमित शाह ने कहा कि नेताओं की भूमिका सिर्फ चुनाव लड़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि जहां कम, वहां हम के भाव से सक्रिय रहने की है। इसके अलावा बिहार के नेताओं के लिए भी अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि कोई भी यह ना माने की उसके चलते जीत मिली है। ऐसा सोचना अहंकार का भाव पैदा करता है। उन्होंने कहा, 'सभी नेताओं ने परिश्रम की पराकाष्ठा की है। चुनाव में 1 प्रतिशत का योगदान भी बहुत बड़ा होता है, लेकिन कोई नेता यह न सोचे कि जीत उसकी वजह से मिली है।ऐसा सोचना घमंड पैदा करता है।' अगले साल अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। बिहार के बाद बंगाल की ओर भाजपा रुख करना चाहती है। अमित शाह ने कहा कि किसी भी नेता की कहीं भी ड्यूटी लगाई जा सकती है। उनकी इस बात से साफ है कि दूसरे इलाकों के नेताओं को भी बंगाल में भेजा जा सकता है। इसके अलावा विधानसभा से लेकर बूथ लेवल तक कहीं भी तैनाती की जा सकती है। गौरतलब है कि बिहार में यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों से भाजपा नेताओं को बुलाया था। यूपी सरकार के मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तो बिहार की गली-गली में प्रचार करते और लोगों के पैर छूते नजर आए थे। इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।  

CM पद पर बड़ी हलचल: DK शिवकुमार को लेकर सिद्धारमैया खेमे का बड़ा बयान

बेंगलुरु  कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों का दौर जारी है। इसी बीच सीएम सिद्धारमैया कैम्प से उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन के सुर उठने लगे हैं। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सत्ता संघर्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान दोनों नेताओं को आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली तलब कर सकता है। सिद्धारमैया के करीबी माने कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने कहा है कि वह खुद भी सीएम रेस में हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'जब कोई मुझसे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा के बारे में पूछता है, तो मैं बता देता हूं कि मैं भी सीएम की रेस में हूं। लेकिन अगर सत्ता में बदलाव होता है और डीके मुख्यमंत्री बनते हैं, तो हम उसे स्वीकार करेंगे।' परमेश्वर ने खुद को लेकर कहा कि कांग्रेस आलाकमान उनके 'योगदान' के बारे में अच्छे से जानती है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व का ही होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मुख्यमंत्री पद के लिए योग्य उम्मीदवार होते। उन्होंने सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच किसी समझौते की जानकारी से इनकार किया है। 1 दिसंबर से पहले हो सकता है फैसला एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान 1 दिसंबर से पहले कर्नाटक पर बड़ा फैसला ले सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुलाकात आने वाले एक या दो दिनों में हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। 1 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है और पार्टी इससे पहले इस मुद्दे को सुलझाना चाहेगी। सीक्रेट डील कांग्रेस सरकार के 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल के आधे पड़ाव पर पहुंचने के बाद सत्तारूढ़ दल के भीतर सत्ता को लेकर खींचतान तेज हो गई है। राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर शक्ति संघर्ष तेज हो गया है। 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार के अपने पांच वर्षीय कार्यकाल के ढाई साल पूरा होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है, क्योंकि 2023 में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच कथित 'सत्ता साझेदारी' समझौते का दावा किया जा रहा है। सिद्धरमैया ने हाल ही में कहा था कि वह पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे और भविष्य में राज्य का बजट पेश करना जारी रखेंगे। शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह मुख्यमंत्री बदलने के मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर बात नहीं करना चाहते, क्योंकि यह पार्टी में चार-पांच लोगों के बीच एक 'गुप्त समझौता' है, और उन्हें अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है।