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तुर्की में भूकंप का कहर: दहशत में लोग घरों से भागे, कई इमारतों में दरारें

इस्तांबुल देर रात तुर्की के पश्चिमी प्रांत बालिकेसिर में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। अधिकारियों के मुताबिक इसकी दहशत से ही 19 लोग घायल हो गए। स्वास्थ्य मंत्री केमल मेमिसोग्लू ने एक्स पर कहा कि मुख्य रूप से घबराहट और ऊंची जगहों से कूदने के कारण लोग जख्मी हुए। उन्होंने कहा कि 15 घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। गृह मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि इमरजेंसी कॉल सेंटर्स को कुल 504 रिपोर्ट मिलीं, जिनमें से 25 इमारतों के नुकसान से जुड़ी थीं। उन्होंने कहा, "हर रिपोर्ट का अलग-अलग आकलन किया जा रहा है।" एजेंसी ने येरलिकाया के हवाले से बताया कि तीन इमारतें (प्रयोग में नहीं थीं) और एक दुकान ढह गए, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। फिलहाल क्षेत्रवार निरीक्षण जारी है। अधिकारी लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे क्षतिग्रस्त बिल्डिंग में न जाएं। दहशत के कारण कई निवासियों ने रात खुले में बिताई, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने लोगों के इस्तेमाल के लिए स्कूल और मस्जिदें खोल दीं। तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन प्रेसीडेंसी ने एक्स पर बताया कि भूकंप स्थानीय समय रात 10:48 बजे (1948 जीएमटी) बालिकेसिर प्रांत के सिंदिरगी जिले में आया। इसकी गहराई जमीन से 5.99 किलोमीटर नीचे थी। भूकंप के झटके इस्तांबुल, बर्सा और इजमिर में भी महसूस किए गए। रनवे निरीक्षण के लिए इस्तांबुल एयरपोर्ट और सबिहा गोकसेन एयरपोर्ट पर उड़ानों को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। एनटीवी ने कुछ फुटेज में दिखाया कि भूकंप के झटके लगते ही लोग सड़कों पर भागने लगे थे। अगस्त में, इसी जिले में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 29 अन्य घायल हो गए थे। अप्रैल में, इस्तांबुल गवर्नर के कार्यालय ने बताया कि 6.2 तीव्रता के भूकंप के दौरान घबराहट और ऊंचाई से कूदने की घटनाओं के कारण 151 लोग घायल हो गए थे। 23 अप्रैल को कई निवासी बिल्डिंग गिरने या बाद में आने वाले भूकंपों से बचने के लिए पार्क, स्कूल के मैदान और अन्य खुली जगहों पर चले गए थे। कुछ लोगों ने पार्कों में टेंट भी लगा लिए थे। गृह मंत्री अली येरलिकाया ने कहा कि भूकंप लगभग 7 किमी (4.3 मील) की गहराई पर आया था और 13 सेकंड तक रहा। तुर्की में भूकंप अक्सर आते रहते हैं, क्योंकि यह दो प्रमुख फॉल्ट लाइनों पर स्थित है। फरवरी 2023 में, 7.8 तीव्रता के भूकंप और दूसरे शक्तिशाली झटके से दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी तुर्की में 53,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और लाखों बिल्डिंग नष्ट हो गईं या क्षतिग्रस्त हो गई थीं। पड़ोसी सीरिया के उत्तरी हिस्सों में भी 6,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

भारतीय सीमा के पास हाफिज सईद और सहयोगियों की सक्रियता, बांग्लादेश में डेरा डाला

ढाका  लश्कर-ए-तैयबा (LeT) संस्थापक और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद का करीबी सहयोगी इब्तिसाम इलाही जहीर इन दिनों बांग्लादेश में बेहद सक्रिय है। सूत्रों के अनुसार, वह देश के कई संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में जाकर भड़काऊ भाषण दे रहा है और कट्टरपंथी तत्वों से संपर्क स्थापित कर रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जहीर पाकिस्तान की मरकजी जमीयत अहले हदीस का महासचिव है। वह 25 अक्टूबर को ढाका पहुंचा। उसके बाद उसने राजशाही और चपाइनवाबगंज जैसे भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। इस सप्ताह वह रंगपुर जाने वाला है। यह जहीर की इस साल की दूसरी बांग्लादेश यात्रा है। फरवरी 2025 में भी वह एक हफ्ते से अधिक समय तक वहीं रहा था। सीमा पर गतिविधियों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क भारत की सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जहीर की इस बार की यात्रा का एजेंडा बेहद चिंताजनक है। उसकी यात्रा में कई सीमावर्ती जिले शामिल हैं- रंगपुर, लालमोनिरहाट, नीलफामारी, जॉयपुरहाट और नागांव जहां वह स्थानीय धार्मिक समूहों से मिल रहा है। वह 6-7 नवंबर को राजशाही के पाबा उपजिला के डांगीपारा में होने वाले बड़े सलफी सम्मेलन में हिस्सा लेने वाला है। जहीर 8 नवंबर को पाकिस्तान लौटेगा। भड़काऊ भाषण और भारत-विरोधी बयान एक वीडियो में, जहीर को चपाइनवाबगंज में एक धार्मिक सभा के दौरान यह कहते सुना गया, “इस्लाम के लिए खुद को और अपने बच्चों को कुर्बान करने के लिए तैयार रहो… पाकिस्तान से बांग्लादेश तक सभी मुसलमान सेक्युलर ताकतों के खिलाफ एकजुट होंगे।” उसने आगे कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा, “कश्मीरियों को उनकी आजादी से वंचित किया जा रहा है। पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह कश्मीर में हो रहे अन्याय के खिलाफ मजबूत आवाज उठाए। अल्लाह की कृपा से वह दिन आएगा जब कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।” बांग्लादेश की स्थिति: हसीना के जाने के बाद बढ़ा कट्टरपंथ अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में अंतरिम शासन चल रहा है, जिसकी अगुवाई अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अंतरिम शासन के दौरान चरमपंथी नेटवर्क को नई जगह और खुली गतिविधि का मौका मिला है, जिन्हें पहले हसीना सरकार ने कड़े नियंत्रण में रखा था। जहीर की यात्राओं और उसके भाषणों को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हाफिज सईद और जाकिर नाइक से गहरे रिश्ते इब्तिसाम इलाही जहीर न केवल हाफिज सईद का भरोसेमंद सहयोगी है, बल्कि वह भारतीय भगोड़े और कट्टरपंथी प्रचारक जाकिर नाइक के भी संपर्क में है। दोनों की मुलाकात अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान में हुई थी। जहीर पिछले 24 वर्षों से हाफिज सईद, उसके साले अब्दुल रहमान मक्की (जो अब मारा जा चुका है), और लश्कर के सह-संस्थापक आमिर हमजा से जुड़ा हुआ है। उसकी अहले हदीस की विचारधारा पूरे दक्षिण एशिया में सलाफी नेटवर्क को वैचारिक आधार और धार्मिक वैधता देने का काम कर रही है। स्थानीय नेटवर्क से संपर्क ढाका में जहीर ने निब्रास इंटरनेशनल स्कूल के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अहले हदीस मूवमेंट बांग्लादेश के प्रमुख असदुल्लाह अल गालिब से मिलने की योजना भी बनाई है। यह वही संगठन है जिसे पहले चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े आरोपों का सामना करना पड़ा था। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह गतिविधि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में अस्थिरता फैलाने की बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है। बांग्लादेश की सीमा से लगे इलाकों में सलफ़ी नेटवर्क की बढ़ती मौजूदगी, भारत के लिए सुरक्षा चुनौती बन सकती है। अब तक सरकार की चुप्पी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अब तक जहीर की यात्रा पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जबकि उसके भाषणों और सीमावर्ती गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं।

पश्चिम बंगाल में अधिकारी तबादलों के 24 घंटे बाद चुनाव आयोग हुआ सक्रिय, SIR पर बड़ी मीटिंग

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) की घोषणा के ठीक पहले ममता बनर्जी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा ‘खेला’ खेला है. राज्य सरकार ने 527 अधिकारियों का एक साथ स्थानांतरण कर दिया, जिसमें 67 आईएएस और 460 राज्य सिविल सेवा अधिकारी शामिल हैं. यह कदम चुनाव आयोग के SIR अभियान से ठीक पहले उठाया गया, जिसे विपक्ष ने चुनावी हेरफेर का प्रयास करार दिया. अब आयोग ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी जिलाधिकारियों (DM) के साथ बैठक बुलाई है, जबकि सभी राजनीतिक दलों के साथ भी चर्चा मंगलवार से ही होनी है. ये बैठकें मंगलवार सुबह 10 बजे ही शुरू हो गई . सीनियर उप चुनाव आयुक्त सभी जिलाधिकारियों के साथ सुबह 10 बजे से मीटिंग शुरू करेंगे. यह मीटिंग वर्चुअल होगी और इसमें राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी और सभी जिलों के डीएम शामिल होंगे. इसके बाद आज ही सभी राजनीतिक दलों के साथ मीटिंग होगी. इस कवायद ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर तनाव को बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग ने सोमवार को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं. SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना, मृत वोटरों को डिलीट करना, दोहरी एंट्री को दूर करना और प्रवासी वोटरों को अपडेट करना है. प्रक्रिया 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक ट्रेनिंग और प्रिंटिंग के साथ शुरू होगी, जबकि घर-घर सर्वे चार नवंबर से चार दिसंबर तक चलेगा. ड्राफ्ट लिस्ट नौ दिसंबर को जारी होगी, दावा-आपत्ति आठ जनवरी 2026 तक और अंतिम लिस्ट सात फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह एक्सरसाइज हर योग्य वोटर को शामिल करने और अयोग्य को हटाने के लिए है. बंगाल में कोई विवाद नहीं है, राज्य सरकार अपना सहयोग देगी. ममता बनर्जी ने किया विरोध हालांकि, ममता बनर्जी ने SIR को ‘NRC जैसा अभ्यास’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि आयोग के अधिकारी हमारे अधिकारियों को धमकियां दे रहे हैं. यह ‘लॉलीपॉप सरकार’ का खेल है. बंगाल में दंगे भड़क सकते हैं. जुलाई से ही ममता का रुख आक्रामक रहा है. उन्होंने बीएलओ की मीटिंग पर नाराजगी जताई कि यह राज्य सरकार को सूचित किए बिना हुई. अक्टूबर में उन्होंने कहा कि आयोग आग के साथ खेल रहा है. उत्तर बंगाल में बाढ़ प्रभावित परिवार दस्तावेज कैसे देंगे. टीएमसी का दावा है कि SIR से 1.2 करोड़ वोटरों को हटाने की साजिश है, जो उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएगी. इन आरोपों के बीच राज्य सरकार ने 14 जिलाधिकारियों समेत प्रमुख अधिकारियों का तबादला कर दिया. प्रभावित जिलों में उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मिदनापुर शामिल हैं. कई अधिकारी ढाई से चार साल से पद पर थे, जो ECI के तीन साल के नियम का उल्लंघन कर रहे थे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह रूटीन तबादला है, लेकिन SIR शुरू होने के बाद जटिल हो जाता. भाजपा ने इसे ‘अवैध हेरफेर’ बताते हुए आयोग से शिकायत की है. प्रदेश बीजेपी नेता सिसिर बाजोरिया ने कहा कि आयोग की अनुमति के बिना 235 अधिकारियों का तबादला SIR का उल्लंघन है. 17 डीएम, 22 एडीएम, 45 एसडीओ और 151 बीडीओ का तबादला किया गया है. इसे रद्द किया जाए.

‘युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहें’, सीमाओं पर सतर्कता बरतने की दी सलाह – राजनाथ सिंह

नईदिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को 'युद्ध जैसी स्थिति' के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि मई में पाकिस्तान के साथ चार दिनों के सैन्य संघर्ष ने दिखा दिया कि सीमाओं पर कभी भी कुछ भी हो सकता है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को 'कड़ा जवाब' दिया था, लेकिन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भविष्य की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने और सीखने के लिए एक केस स्टडी के रूप में काम करना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि 7-10 मई के अभियान के दौरान स्वदेशी निर्मित सैन्य उपकरणों के प्रभावी उपयोग से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। सिंह ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जहां युद्ध भी 'हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा' था। उन्होंने कहा, 'हालांकि हमने दृढ़ संकल्प के साथ जवाब दिया और हमारी सेनाएं देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी हमें आत्मचिंतन करते रहना होगा।' मंत्री ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर एक केस स्टडी के रूप में काम करेगा जिससे हम सीख सकें और अपना भविष्य तय कर सकें। इस घटना ने हमें एक बार फिर दिखाया है कि हमारी सीमाओं पर, कहीं भी, कभी भी कुछ भी हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'हमें युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और हमारी तैयारी हमारी अपनी बुनियाद पर आधारित होनी चाहिए।' रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताएं प्रत्येक क्षेत्र का गहन मूल्यांकन करने की मांग करती हैं, तथा चुनौतियों से निपटने के लिए 'स्वदेशीकरण' ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा, 'स्थापित विश्व व्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में संघर्ष क्षेत्र बढ़ रहे हैं। इसलिए, भारत के लिए अपनी सुरक्षा और रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करना आवश्यक हो गया है।' सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस, आकाशतीर वायु रक्षा नियंत्रण प्रणाली और अन्य स्वदेशी उपकरणों और प्लेटफार्मों की शक्ति देखी। इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय बहादुर सशस्त्र बलों के साथ-साथ 'उद्योग योद्धाओं' को भी जाता है, जिन्होंने नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में काम किया। उन्होंने भारतीय उद्योग को थलसेना, नौसेना और वायुसेना के साथ रक्षा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बताया। सिंह ने बताया कि सरकार रक्षा विनिर्माण को बढ़ाने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसर उपलब्ध करा रही है और उद्योग को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि रक्षा उपकरण न केवल देश में तैयार किए जाएं, बल्कि ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ की भावना को मूर्त रूप देने वाले उपकरण बनाने के लिए एक वास्तविक विनिर्माण आधार स्थापित किया जाए।' उन्होंने कहा, 'नवाचार और अनुसंधान एवं विकास की संस्कृति विकसित करने के लिए क्वांटम मिशन, अटल नवाचार मिशन और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी अनेक पहल की गई हैं। हमारे उद्योग को वह हासिल करना होगा जो देश में अभी तक हासिल नहीं हुआ है।' रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, लेकिन आज वह अपनी धरती पर ही रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारा रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें से 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र का है।' उन्होंने कहा, 'हमारा रक्षा निर्यात, जो 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब लगभग 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मुझे विश्वास है कि मार्च 2026 तक रक्षा निर्यात 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।' स्वदेशीकरण को और बढ़ाने के लिए, सिंह ने उद्योग से आग्रह किया कि वे आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास करें, तथा केवल सम्पूर्ण प्लेटफॉर्म पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत उप-प्रणालियों और घटकों के स्वदेशी विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। रक्षा मंत्री ने कहा कि विदेशों से प्रमुख उपकरणों की खरीद से रखरखाव और जीवन-चक्र लागत के मामले में भारत के संसाधनों पर दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा, 'चूंकि किसी भी प्रणाली में बड़ी संख्या में घटक और इनपुट होते हैं, इसलिए इन उप-प्रणालियों का स्वदेशी निर्माण हमारी स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘हमारी मिट्टी, हमारा कवच’ हमारी पहली पसंद बने।' रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्देश्य केवल भारत में संयोजन करना नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के भीतर प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रभावी हो और हमारे स्वदेशी उद्योगों को सशक्त बनाने का साधन भी बने।'

गाजा के लिए चंदा जुटाने के बाद पाकिस्तान की अगली योजना: फिलिस्तीन में सैनिक तैनात

 इस्लामाबाद गाजा में इजरायली हमलों को लेकर चिंतित रहने वाला पाकिस्तान अब वहां अपने सैनिक भेजेगा। पाकिस्तान की सरकार ने गाजा में बड़े पैमाने पर मदद भेजी थी। इसके अलावा इस्लामिक संगठनों ने गली-गली से चंदा और सहायता सामग्री जुटाई थी। अब पाकिस्तान की ओर से वहां सेना भेजने की भी तैयारी है, जो इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा होगी। फिलहाल सरकार इसे लेकर विचार कर रही है। फिलहाल पाकिस्तान की सेना और सरकार के बीच इसे लेकर चर्चा चल रही है। फिलहाल खबर यही है कि पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि हमारी सेना गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा बने। गाजा जाने वाली फोर्स में ज्यादातर सैनिक मुस्लिम बहुल देशों के ही रहेंगे। इस फोर्स की जिम्मेदारी होगी कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखे। इसके अलावा यह भी तय किया जाए कि हमास निरस्त्रीकरण हो। वहीं बॉर्डर क्रॉसिंग की सुरक्षा और मानवीय सहायता को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा गाजा में तमाम इमारतों को दोबारा से बनाने करने की तैयारी है। इनकी निगरानी भी स्टेबिलाइजेशन फोर्स करेगी। अहम बात यह है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने सैनिकों को गाजा भेजने से इनकार किया है। फिलहाल अमेरिका की सलाह पर इंडोनेशिया, यूएई, मिस्र, कतर, तुर्की और अजरबैजान की ओर से सेनाएं भेजी जा रही हैं। हालांकि इजरायल ने तुर्की के इस फोर्स में शामिल होने पर ऐतराज जताया है। इजरायल का कहना है कि यह सीधे तौर पर हमारे खिलाफ खड़े होना और चैलेंज करना है। रविवार को तो बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा ही था कि हम तय करेंगे कि किन देशों को गाजा में जाने की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने तुर्की के सुरक्षा बलों की भूमिका का विरोध करने की बात भी कही थी। ऐसे में देखना होगा कि तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर से गाजा में सेना भेजे जाने पर इजरायल का क्या रिएक्शन रहता है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस बहाने इस्लामिक दुनिया में खुद को एक मजबूत मुल्क के तौर पर स्थापित करना चाहता है। सालों से पाकिस्तान इस्लामिक मुद्दों पर आक्रामक रहा है और गाजा एवं कश्मीर के मसले को यही रंग देने की उसकी कोशिश रही है।

रिक्टर स्केल 6.1: सिंदिर्गी भूकंप ने हिला दिया तुर्की, अभी तक कोई हताहत नहीं, नुकसान की आशंका

सिंदिर्गी तुर्की में भोरे-भोरे जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्कैल पर इसकी तीव्रता करीब 6.1 थी. इससे भारी नुकसान की आशंका है. यह भूकंप पूर्वी तुर्की के इलाके में आई है. स्थानीय समय के अनुसार सोमवार देर पूर्वी तुर्की के सिंदिर्गी शहर में यह भूंकप आया. बीते तीन महीनों में इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा भूकंप है. तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) के अनुसार भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 10:48 बजे (1948 GMT) आया. इसका असर देश की आर्थिक राजधानी इस्तांबुल और पर्यटक स्थल इजमिर तक महसूस किया गया. अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. आंतरिक मामलों के मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि अगस्त में आए पिछले भूकंप के बाद खाली किए गए तीन भवनों और एक दुकान के ढहने की सूचना है, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई. सिंदिर्गी, इजमिर से लगभग 138 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ी क्षेत्र में बसा एक छोटा शहर है, जो भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील है. अगस्त में भी आया था भूकंप इससे पहले 10 अगस्त को सिंदिर्गी में 6.1 तीव्रता के भूकंप ने एक व्यक्ति की जान ले ली थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे. तुर्की भौगोलिक रूप से कई फॉल्ट लाइनों से होकर गुजरता है, जिसके कारण यह क्षेत्र भूकंपों के लिए अत्यधिक संवेदनशील है. फरवरी 2023 में दक्षिण-पश्चिम तुर्की में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने अंताक्या (प्राचीन शहर एंटिओक) को तबाह कर दिया था, जिसमें कम से कम 53,000 लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावा जुलाई की शुरुआत में इसी क्षेत्र में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और 69 लोग घायल हुए थे. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं. भूकंप के बाद लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है.

क्वाड सम्मेलन 2026 की शुरुआत में भारत में, ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने जताई उम्मीद

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने उम्मीद जताई है कि क्वाड देशों की अगली बैठक अगले साल की पहली तिमाही में हो सकती है। उन्होंने चार देशों- भारत, अमेरिका, जापान के साथ ऑस्ट्रेलिया के गठजोड़ वाले इस समूह को एक अहम मंच करार दिया। गौरतलब है कि भारत में इसी साल क्वाड सम्मेलन होना था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये और जापान में जारी सियासी उठापटक के चलते अब इस बैठक की उम्मीद कम ही है। अल्बनीज  आसियान सम्मेलन के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्वाड एक अहम फोरम है, जो ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और भारत को जोड़ता है। मुझे उम्मीद है कि इसकी बैठक अगले साल की पहली तिमाही में होगी।” उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक की मेजबानी करेंगे। क्वाड सम्मेलन में देरी को लेकर पर पूछे गए सवाल पर अल्बनीज ने कहा कि यह व्यस्त शिखर सम्मेलन सत्र है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी व्यस्त कार्यक्रम में बंधें हैं। आसियान देशों के दौरे पर हैं ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एशिया के तीन देशों के दौरे पर हैं। वे मलयेशिया में आसियान सम्मेलन में शामिल होने के बाद जापान रवाना हुए और वहां से दक्षिण कोरिया जाएंगे, जहां वे एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं। इससे पहले अगस्त में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ट्रंप ने इस वर्ष भारत यात्रा की योजना रद्द कर दी है, क्योंकि उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते तब से तनाव में हैं जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क और रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर लगा दिया। भारत ने इस कदम को अनुचित, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य करार दिया था।

ऊंची लहरों और तटीय खाली कराए जाने के बीच मोंथा साइक्लोन बढ़ा रहा डर

नई दिल्ली दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती तूफान 'मोंथा' आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की तरफ आगे बढ़ रहा है. जो आज, 28 अक्टूबर को रात तक एक प्रचंड चक्रवाती तूफान के रूप में आंध्र प्रदेश तट को पार कर सकता है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, आंध्र प्रदेश तट पर मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के पास Cyclone Montha के टकराने का पूर्वानुमान है. आंध्र तट पर ऊंची लहरों की चेतावनी भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि चक्रवात 'मोंथा' के गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने के साथ आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से श्रीकाकुलम तक तटीय इलाकों में 2 से 4.7 मीटर ऊंची समुद्री लहरें उठ सकती हैं. दोनों एजेंसियों के संयुक्त बुलेटिन के मुताबिक, शाम 5:30 बजे से रात 11:30 बजे तक छह घंटे तक ये ऊंची लहरें रहेंगी. आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से श्रीकाकुलम तक तट से सटे इलाकों में 2 से 4.7 मीटर ऊंची लहरें आने का अनुमान है. आंध्र तट पर बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला जा रहा चक्रवाती तूफान मोंथा के अलर्ट के बीच आंध्र तट पर बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला जा रहा है. इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने संभावित प्रभावित होने वाले सभी राज्यों में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फॉर्स (NDRF) की 22 टीमें तैनात की हैं.  अलर्ट मोड में प्रशासन, हेल्पलाइन नंबर जारी प्रशासन ने पहले ही कमर कस ली है. जरूरी सामान, तेल-गैस के भंडार भर लिए हैं. साफ पेयजल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की गई है. साथ ही SDRF और NDRF की टीमें तैनात हैं. 24×7 कंट्रोल रूम और 74 राहत केंद्र तैयार किए गए हैं. मोबाइल टावरों पर जनरेटर लगाकर कम्युनिकेशन एक्टिव रखा गया है. जनता से सतर्क रहने की अपील की जा रही है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. – कलेक्टर ऑफिस, अनाकापल्ली: 08924222888, 08924226599, 08924225999 – राजस्व मंडल अधिकारी कार्यालय, अनाकापल्ली: 08924-223316 – राजस्व मंडल अधिकारी कार्यालय, नरसीपट्टनम: 08932-224420 Cyclone Montha: 110 की स्पीड से चलेंगी हवाएं IMD के मुताबिक, उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए यह 28 अक्टूबर की शाम/रात में मछलीपट्टनम और कालिंगपट्टनम के बीच काकिनाडा के आसपास आंध्र तट को पार करेगा. तब यह गंभीर चक्रवाती तूफान होगा, जिसमें हवा की रफ्तार 90-100 किमी प्रति घंटा रहेगी, जो झोंकों में 110 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. तेज बारिश की संभावना, लोगों से सतर्क रहने की अपील लैंडफॉल के समय तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के निचले इलाकों में ज्वारीय स्तर से करीब एक मीटर ऊपर तूफानी लहरें उठने से जलभराव हो सकता है. मौसम विभाग ने 29 अक्टूबर तक आंध्र प्रदेश के प्रभावित इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जबकि कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. प्रशासन ने संवेदनशील और निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की अपील की है. Montha के असर से विदर्भ में भी 30 अक्टूबर तक बारिश की संभावना चक्रवाती तूफान 'मोंथा' के प्रभाव से महाराष्ट्र के विदर्भ में 30 अक्टूबर तक मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 'येलो' अलर्ट जारी करते हुए चंद्रपुर, गडचिरोली, वर्धा, वाशिम, यवतमाल, भंडारा, गोंदिया और नागपुर के कुछ स्थानों पर भारी बारिश, गरज के साथ बिजली, तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार) की चेतावनी दी है. मोंथा के अलर्ट के बीच कई रेलवे ने रद्द की कई ट्रेनें चक्रवात 'मोंथा' के मद्देनजर भारतीय रेलवे ने दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी हैं, जबकि कई ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं. रेलवे ने कैंसिल ट्रेनों की लिस्ट जारी की है. पूर्वी तट रेलवे (ईसीओआर) ने जानकारी दी कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा के हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. तमिलनाडु के कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद तमिलनाडु के कई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते जिला प्रशासन ने मंगलवार, 28 अक्टूबर को कुछ क्षेत्रों में स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश की घोषणा की है. चेंगलपट्टू और कडलूर जिलों में लगातार बारिश और निचले इलाकों में जलभराव को देखते हुए सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया गया है. वहीं, चेन्नई प्रशासन ने भी मंगलवार को स्कूलों की छुट्टी घोषित की है, क्योंकि भारी बारिश से शहर में सामान्य जीवन बाधित हुआ है.

प्रकाश, श्रद्धा और आस्था का संगम — काशी की देव दीपावली

वाराणसी वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा की रात गंगा के अर्ध चंद्राकार घाटों की छटा देवलोक का अहसास कराती है। देखने वाले को महसूस होता है कि गंगा तट पर देवलोक की छवि उतर आई है। काशी की देव दीपावली का यह नजारा अद्भुत होता है। बजते घंटे-घड़ियाल, शंखों की गूंज व हिलोरे लेती आस्था, जिसे देखने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु काशी आते हैं। काशी में लक्खा मेले की प्राचीन परम्परा है। इसमें एक लाख से अधिक लोग एकत्र होते हैं। नाटी इमली का भरत मिलाप, तुलसी घाट की नाग नथैया, चेतगंज की नक्कटैया और रथयात्रा मेले की शृंखला में यह काशी का पांचवां लक्खा मेला है। इस अवसर पर गंगा के 84 घाटों पर सात किलोमीटर तक शृंखलाबद्ध दीप जलाए जाते हैं। शाम होते ही ये सभी घाट दीपों की रोशनी में नहा उठते हैं और गंगा की धारा में इन दीपों की अलौकिक छटा निखरती है। शंकराचार्य की प्रेरणा से प्रारंभ होने वाला यह दीपोत्सव पहले केवल पंचगंगा घाट की शोभा हुआ करता था लेकिन धीरे-धीरे काशी के सभी घाटों पर दीपों की शृंखला बढ़ती चली गई और दो दशकों से देव दीपावली ने महापर्व का स्वरूप ले लिया है। इस तरह देव दीपावली सांस्कृतिक राजधानी काशी की खास पहचान बन गई है। अहिल्याबाई होल्कर ने स्थापित किया था हजारा दीपस्तंभ काशी की देव दीपावली प्राचीनता और परम्परा का अद्भुत संगम है। इतिहास में इसका जिक्र मिलता है। महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने पंचगंगा घाट पर पत्थरों से बना खूबसूरत हजारा दीपस्तंभ स्थापित किया था। यह दीपस्तंभ देव दीपावली की परम्परा का साक्षी है। काशी में देव दीपावली की शुरूआत भी यहीं से हुई थी। यह दीपस्तंभ देव दीपावली के दिन 1001 से अधिक दीपों की लौ से जगमगाता है। इस दृश्य को यादों में सहेजने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से पर्यटक काशी पहुंचते हैं। मां गंगा की अष्टधातु की प्रतिमा का होता है दर्शन-पूजन देव दीपावली के अवसर पर मां गंगा की अष्टधातु की प्रतिमा को गंगा घाट पर विराजमान किया जाता है। मां गंगा की यह प्रतिमा साल में दो बार गंगा दशहरा और देव दीपावली पर ही लोगों के दर्शन-पूजन के लिए स्थापित की जाती है। इस तरह काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान की यह परम्परा देव आराधना का महापर्व बन जाती है। काशी की गंगा आरती तो देशभर में प्रसिद्ध है ही, देव दीपावली पर आरती का नजारा और भी अद्भुत होता है। देव दीपावली की पृष्ठभूमि में एक पौराणिक कथा भी है। त्रिपुरासुर राक्षस ने ब्रह्माजी की तपस्या कर वरदान पा लिया था और तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य जमा लिया था। इसके बाद देवताओं ने भगवान शिव से उसका अंत करने की प्रार्थना की। उन्होंने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया था। इस खुशी में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे आगे चलकर देव दीपावली के रूप में मान्यता मिली इसलिए देव दीपावली को ‘त्रिपुरी’ के नाम से भी जाना जाता है।

Eastern Airways आर्थिक संकट में फंसी! दिवालिया घोषित होने से पहले प्रशासन ने शुरू की जांच

लंदन यूरोप की एक और प्रमुख एयरलाइन Eastern Airways अब प्रशासनिक संकट की ओर बढ़ रही है। इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कई शहरों को जोड़ने वाली यह क्षेत्रीय विमान सेवा कंपनी सिर्फ कुछ ही दिनों में दिवालिया घोषित हो सकती है, जिससे हज़ारों यात्रियों की यात्रा योजनाएम प्रभावित होंगी।1997 में स्थापित Eastern Airways हर साल लगभग 8 लाख (800,000) यात्रियों को सेवा देती है और ब्रिटेन के क्षेत्रीय हवाई नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती है।  इसके वर्तमान गंतव्यों में स्कॉटलैंड के विक और एबरडीन, तथा इंग्लैंड के हंबरसाइड, टीसाइड इंटरनेशनल, लंदन गैटविक और न्यूक्वे जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। कभी यह एयरलाइन ब्रिटेन से जिब्राल्टर के लिए भी उड़ानें चलाती थी, लेकिन 2021 में शुरू हुई यह सेवा सिर्फ एक साल बाद बंद कर दी गई। इसी तरह, मार्च 2023 में कार्डिफ़ से पेरिस ऑर्ली (फ्रांस) के बीच चलने वाला मार्ग भी रद्द कर दिया गया था। हाल ही में Eastern Airways ने कॉर्नवाल के न्यूक्वे से लंदन साउथएंड एयरपोर्ट (एसेक्स) के बीच नई उड़ानें शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन यह रूट अब कंपनी की वेबसाइट से हटा दिया गया है, जो गंभीर वित्तीय स्थिति का संकेत देता है।  Eastern Airways केवल एक वाणिज्यिक एयरलाइन ही नहीं, बल्कि यह यूरोप की सबसे बड़ी चार्टर फ़्लाइट प्रदाता कंपनी भी है  जो प्रीमियर लीग और चैंपियनशिप फ़ुटबॉल टीमों, रग्बी यूनियन और सुपर लीग टीमों को विशेष उड़ानें उपलब्ध कराती है। एयरलाइन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें, श्रमिक लागत और कोविड के बाद की आर्थिक चुनौतियों ने इस कंपनी को गहरे वित्तीय संकट में धकेल दिया है।