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3 फीट ऊंचे गणेश बने डॉक्टर: हौसले की मिसाल, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची संघर्ष गाथा

अहमदाबाद कहते हैं ना कि कद नहीं किरदार बड़ा होना चाहिए। गुजरात के गणेश बरैया ने इसे साबित भी किया है। महज 3 फीट की लंबाई और 20 किलो वजन के गणेश अब डॉक्टर बन गए हैं। योग्यता के बावजूद कद कम होने की वजह से गणेश को सुप्रीम कोर्ट तक जंग लड़नी पड़ी। लेकिन ऊंची से ऊंची बाधा को पार करते हुए गणेश अपने मंजिल तक पहुंच गए हैं। अब उन्हें मेडिकल ऑफिसर के रूप में तैनाती मिल गई है। 25 साल के बरैया जन्म से ही बैनेपन के शिकार हैं। जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने से संबंधित 72% विकलांगता है। चुनौती सिर्फ शरीर की कमजोरी नहीं आर्थिक किल्लत भी थी। भावनगर के गोरखी गांव में जन्मे गणेश 8 भाई बहन हैं। शारीरिक रूप से गणेश जितने कमजोर थे, मानसिक रूप से उतने ही मजबूत और तेज। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी गणेश ने 12वीं में 87 फीसदी अंक लाकर सबको चौंका दिया था। लेकिन यह शुरुआत भर थी। इसके बाद उन्होंने नीट की परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन विकलांगताओं की वजह से 2018 में गुजरात सरकार ने उन्हें एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। कद की वजह से आई रुकावट से गणेश ने हार नहीं मानी। स्कूल के प्रिंसिपल की मदद से गणेश ने जिला कलेक्टर और शिक्षा मंत्री तक गुहार लगाई। इसके बाद वह अपनी समस्य लेकर गुजरात हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट से निराशा मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। देश की सर्वोच्च अदालत ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए एमबीबीएस में दाखिले का आदेश दिया। इसके बाद 2019 में उन्हें एमबीबीएस में दाखिला मिला। डॉ. बरैया ने पिछले साल न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ अपनी कहानी साझा करते हुए कहा था, '12वीं पास करने और एमबीबीएस में दाखिले के लिए नीट परीक्षा क्वालिफाई करने के बाद जब मैंने फॉर्म भरा तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की समिति ने मेरी लंबाई के आधार पर मुझे खारिज कर दिया। उनका कहना था कि मेरी कम लंबाई के कारण मैं आपातकालीन मामलों को संभाल नहीं पाऊंगा। फिर मैंने नीलकंठ विद्यापीठ के प्रिंसिपल डॉ. दलपत भाई कटारिया और रेवसीश सर्वैया से इस बारे में बात की और पूछा कि हम इसके लिए क्या कर सकते हैं।' गणेश ने आगे कहा, 'उन्होंने मुझे भावनगर कलेक्टर और गुजरात के शिक्षा मंत्री से मिलने को कहा। भावनगर कलेक्टर के निर्देश पर हमने यह केस गुजरात हाई कोर्ट ले जाने का फैसला किया। हमारे साथ दो अन्य उम्मीदवार भी थे जो दिव्यांग थे… हम हाई कोर्ट में केस हार गए, लेकिन फिर हमने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का निश्चय किया।'

व्हाइट हाउस फायरिंग: रहमानुल्लाह लकनवाल का खतरनाक हमला, ट्रंप ने अमेरिका में अफगानों की एंट्री पर रोक लगाई

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास वाइट हाउस के सामने बुधवार को हुई गोलीबारी ने पूरे अमेरिका में सनसनी फैला दी है। शूटर ने वहां पर तैनात दो नेशनल गार्ड के सदस्यों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। वाइट हाउस के मुताबिक दोनों सदस्यों को जानलेवा चोटें आई हैं, दोनों ही अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। वहीं,तैनात दूसरे नेशनल गार्ड्स की तरफ से की गई फायरिंग में आरोपी को भी गोली लगी है, हालांकि वह खतरे से बाहर है। उसे कस्टडी में रखा गया है। घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस पर अपना गुस्सा निकालते हुए आरोपी को जानवर कहा। वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर बुधवार दोपहर नेशनल गार्ड के दो जवानों को गोली मार दी गई. यह हमला दोपहर फरागट मेट्रो स्टेशन के पास 17वीं और आई स्ट्रीट के कोने पर हुआ. दोनों जवानों की हालत गंभीर बनी हुई है. हमलावर भी मुठभेड़ में घायल हुआ और उसे भारी सुरक्षा के बीच स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. रहमानुल्लाह लाकनवाल ने चलाई गोली कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार संदिग्ध की पहचान रहमानुल्लाह लाकनवाल के रूप में हुई है, जो 29 वर्षीय अफगान नागरिक है. वह साल 2021 में अमेरिका में दाखिल हुआ था. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि उसने अकेले ही इस हमले को अंजाम दिया. हालांकि उसके पहचान संबंधी कुछ पहलुओं की अभी भी पुष्टि की जा रही है. दो नेशनल गार्ड्स सदस्यों के साथ वाइट हाउस के बाहर हुई इस घटना ने पूरे अमेरिका में रोष है। सीबीएस न्यूज के अनुसार शूटर की पहचान अफगान मूल के 29 बर्षीय रहमानुल्लाह लकनवाल के रूप में हुई है। आरोपी 2021 में बाइडन प्रशासन की नीति के तहत अमेरिका आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफबीआई इस मामले की जांच आतंकी हमले के रूप में कर रही है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर की वायरल हो रही है, जिसे कथित तौर पर वाइट हाउस शूटिंग के आरोपी की बताई जा रही है। 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' के तहत ली अमेरिका में एंट्री इस मामले को अब FBI संभावित आतंकी हमले के रूप में जांच रही है. वहीं Department of Homeland Security का कहना है कि संदिग्ध 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका आया था और उसने 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' के तहत एंट्री ली थी, जिसके जरिए अफगान नागरिकों को शरण दी गई थी. ट्रंप ने बताया 'आतंकी हमला' घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'आतंकी हमला' करार दिया है. उन्होंने वॉशिंगटन डीसी की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त 500 सैनिकों को तैनात करने का निर्देश दिया है. साथ ही ट्रंप ने कहा है कि 2021 में अफगानिस्तान से जिन लोगों को अमेरिका में प्रवेश दिया गया था, उनकी दोबारा गहन जांच की जानी चाहिए. White House ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर नेशनल गार्ड और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रति समर्थन जताया और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है. फिलहाल हमले के पीछे की साजिश, मकसद और आतंकी संबंधों की जांच जारी है. 'अफगानिस्तान धरती पर बना एक नरक' देर रात दिए गए अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडेन पर जमकर हमला बोला. ट्रंप ने दावा किया कि संदिग्ध को सितंबर 2021 में बाइडेन सरकार 'नरक जैसे अफगानिस्तान' से अमेरिका लेकर आई थी. ट्रंप ने कहा, 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को पूरा भरोसा है कि हिरासत में लिया गया संदिग्ध एक विदेशी नागरिक है, जो अफगानिस्तान से अमेरिका आया था. अफगानिस्तान धरती पर बना एक नरक है.' इससे पहले दिन में अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने संदिग्ध हमलावर को 'जानवर' बताया और कहा कि उसे इसकी 'बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी'. उन्होंने हमलावर को काबू में करने वाले नेशनल गार्ड के जवानों की सराहना भी की. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि बाइडेन सरकार के कार्यकाल में अमेरिका में आए सभी अफगान नागरिकों की दोबारा जांच होनी चाहिए. उन्होंने शरणार्थियों को 'हमारे अस्तित्व के लिए जोखिम' बताया. 'अकेले और अचानक किया हमला' मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट में कार्यकारी सहायक प्रमुख जेफरी कैरोल ने कहा कि यह हमला 'अचानक और पूरी तरह से जानबूझकर किया गया' प्रतीत होता है. उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि यह एक अकेला हमलावर था, जिसने अचानक हथियार उठाकर नेशनल गार्ड के जवानों पर घात लगाकर हमला किया.' कैरोल ने बताया कि हमलावर ने पहले गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस और गार्ड के जवान हरकत में आए. हमलावर को नेशनल गार्ड, मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट, सीक्रेट सर्विस और मेट्रो ट्रांजिट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जल्दी ही हिरासत में ले लिया गया. इन एजेंसियों के कई जवान घटना के समय पहले से ही मौके के आसपास मौजूद थे, जब गोलियों की आवाज सुनाई दी. अफगान नागरिकों से जुड़े सभी इमिग्रेशन आवेदन सस्पेंड U.S. Citizenship and Immigration Services (USCIS) ने घोषणा की है कि वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के जवानों पर अफगान नागरिक की ओर से किए गए हमले के बाद, अफगान नागरिकों से जुड़े सभी इमिग्रेशन आवेदनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है. यह फैसला वॉशिंगटन डीसी में हुई आज की घटना के बाद लिया गया है. क्या था मकसद? राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के सामने हुई इस गोलीबारी को लेकर डीसी के मेयर म्यूरिल बाउजर ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी ने यह टार्गेटेड अटैक किया था। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक आरोपी वहां ऐसे ही टहलते हुए आकर एक मोड़ पर रुका और उसने हैंडगन निकालर फायरिंग करनी शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फायरिंग का शिकार दोनों नेशनल गार्ड्स सदस्यों के सिर में गोली लगी है, जिससे उनकी हालत गंभीर है। इस गोलीबारी के बाद आसपास मौजूद अन्य सदस्यों ने तुरंत ही वहां आकर हालात को काबू में किया। एफबीआई प्रमुख काश पटेल ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी ली। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आरोपी को हिरासत में लिया गया है। मामले की जांच जारी है। उसका क्या मकसद था इसके बारे में फिलहाल जांच के बाद ही पता चलेगा। अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों संग किया काम एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने … Read more

ताई पो जिले में बड़ा हादसा: आवासीय इमारतों में आग, कई अपार्टमेंट जलकर खाक—44 मृत, 300 के करीब लापता

हांगकांग  हॉन्ग कॉन्ग के ताई पो जिले में दोपहर गगनचुंबी इमारतों में अचानक भीषण आग लग गई. आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. खबर है कि आग पर काबू पा लिया गया. हालांकि आग पूरी तरह से बुझी नहीं है. इस हादसे में 44 लोगों की मौत होने की खबर है. वहीं बताया जा रहा है कि सैकड़ों लोग अभी भी लापता है. बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया गया है. इस बीच पुलिस प्रशासन ने तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है. हांगकांग के एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के कई ऊंचे अपार्टमेंट ब्लॉक में भयानक आग लग गई. इस हादसे में कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग लापता हैं. आग भड़कने की वजह से दमकलकर्मियों को ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों तक पहुंचने में मुश्किलें हुई. अधिकारियों ने गुरुवार सुबह बताया कि इस घटना के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो डायरेक्टर और एक कंसल्टेंट शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक जांच करने वालों को अपार्टमेंट में कुछ खिड़कियों को जाम करने वाले ज्वलनशील बोर्ड लगे मिले जिसपर कंपनी का नाम लिखा था. पुलिस ने उन पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया. अधिकारियों को यह भी शक है कि साइट पर मौजूद दूसरा कंस्ट्रक्शन मटीरियल जैसे सुरक्षात्मक जाल, कैनवस शीट और प्लास्टिक कवरिंग जरूरी सेफ्टी स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करते थे. कॉम्प्लेक्स के आठ टावरों में से सात जहाँ कई बुजुर्ग लोग रहते थे. आग लगने के कई घंटों बाद भी जल रहे थे. माना जा रहा है कि यह आग हांगकांग में लगभग 30 सालों में सबसे खतरनाक आग है. इसने 1996 की बदनाम गार्ले बिल्डिंग आग को भी पीछे छोड़ दिया जिसमें 41 लोग मारे गए थे. 700 से ज्यादा फायरफाइटर्स मौके पर मौजूद घटना स्थल पर 700 से अधिक फायरफाइटर्स लगातार आग बुझाने और लोगों को बाहर निकालने में जुटे हैं. कई जगहों पर हाइड्रॉलिक सीढ़ियों के ज़रिये ऊंची मंजिलों पर पानी की बौछारें डाली जा रही हैं. लाइव फुटेज में दिखाई दिया कि तेज आग और घने धुएं के बावजूद राहतकर्मी जान जोखिम में डालकर अंदर प्रवेश कर रहे हैं. ताइ पो जिले में लगी आग लगभग 16 घंटे तक रही. आग पर काबू पाने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित तीन टावरों पर फोकस रखा. उनका कहना था कि चार दूसरी इमारतों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, हालांकि आग पूरी तरह बुझी नहीं हैं. इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि आग इतनी तेजी से कैसे फैली. रिपोर्ट के मुताबिक, फायर सर्विसेज के डायरेक्टर एंडी येउंग ने कहा कि क्रू ने देखा कि कई यूनिट्स में पॉलीस्टाइनिन बोर्ड खिड़कियों को ब्लॉक कर रहे थे. इस देखकर वे अचंभे में रहे. उन्होंने कहा, 'ये पॉलीस्टाइनिन बोर्ड बहुत ज्यादा आग पकड़ने वाले होते हैं और आग बहुत तेजी से फैली.' येउंग ने कहा, 'उनकी मौजूदगी अजीब थी, इसलिए हमने आगे की जांच के लिए घटना को पुलिस को भेज दिया है.' हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने कहा कि शहर की हाउसिंग अथॉरिटी यह भी जांच करेगी कि रिनोवेशन के दौरान इमारतों पर लगी प्रोटेक्टिव लेयर आग से बचाने के लिए काफी थीं या नहीं. उन्होंने कहा, 'हम कानून और नियमों के हिसाब से उन्हें जिम्मेदार ठहराएंगे.' अधिकारी बांस के मचान की भूमिका पर भी गौर कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर हांगकांग की इमारतों को कंस्ट्रक्शन या मरम्मत के काम के दौरान इस्तेमाल किया जाता है, इसे पहले भी आग फैलने का एक कारण बताया गया है.

सरकार को नीति आयोग की चेतावनी—अधिकारियों का लाइसेंस मांगना और इंस्पेक्शन राज रोकें

नई दिल्ली देश में व्यापार शुरू करना और चलाना अक्सर कागज़ी झंझट, परमिट, लाइसेंस और अचानक आने वाले निरीक्षणों (Inspection) की वजह से लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है. इसी परेशानी को खत्म करने के लिए नीति आयोग (NITI Aayog) की एक उच्च स्तरीय कमिटी ने बड़ा कदम सुझाया है, जो इंस्पेक्शन राज का खात्मा कर देगा. नीति आयोग की प्लानिंग कहती है कि लोगों और कारोबारियों पर भरोसा दिखाते हुए नियमों को आसान बनाया जाए, ताकि व्यापार बढ़े, सरकारी दखल कम हो और देश की अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत बन सके. अब जानते हैं कि असल में इस प्रस्ताव में क्या है और लोगों को इससे क्या फायदा होगा? नीति आयोग की एक उच्च स्तरीय समिति ने देश के नियम-कानूनों में बड़ा सुधार लाने की सलाह दी है. इस कमेटी का नेतृत्व सदस्य और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा (Rajiv Gauba) कर रहे हैं. समिति का मानना है कि देश में वर्षों से चली आ रही लाइसेंस, परमिट और NOC की भारी-भरकम व्यवस्था अब लोगों के लिए बोझ बन चुकी है. इसलिए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इन अनावश्यक मंज़ूरियों को काफी हद तक खत्म किया जाए और इंस्पेक्टर राज का अंत हो. उनका कहना है कि जहां कानून स्पष्ट रूप से मना नहीं करता, वहां अनुमति की ज़रूरत भी नहीं होनी चाहिए. छोटे-मोटे काम बिना अनुमति लिए हों हमारी सहयोगी वेबसाइट मनीकंट्रोल ने इस पर एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने यह भी साफ किया कि लाइसेंस तभी मांगा जाए जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, जन स्वास्थ्य, पर्यावरण या बहुत बड़े सार्वजनिक हित से जुड़ा हो. छोटे-मोटे कामों के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. इससे आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ने वाला समय और पैसों का बोझ काफी कम होगा. रिपोर्ट में बताया गया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी बिल्कुल आसान होनी चाहिए. यह केवल रिकॉर्ड रखने या डेटा मैनेजमेंट के लिए हो, न कि लोगों को रोके रखने के लिए. खुद से रजिस्ट्रेशन (Self-registration) करने का विकल्प सामान्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए, और लाइसेंस की वैधता सामान्य तौर पर हमेशा के लिए (perpetual) हो. केवल खास परिस्थितियों, जैसे सुरक्षा या पर्यावरण, में ही 5 से 10 साल की वैधता रखी जा सकती है. अधिकारी अचानक फैक्ट्री में पहुंचकर जांच न करें इंस्पेक्शन को लेकर समिति का सुझाव सबसे अलग और आधुनिक है. उनका कहना है कि अब अधिकारी अचानक दुकान या फैक्ट्री में पहुंचकर जांच नहीं करें. इसके बजाय कंप्यूटर आधारित सिस्टम से रैंडम सिलेक्शन की मदद ली जाए, और जांच का काम एक्रेडिटेड थर्ड पार्टी को दिया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. रिपोर्ट ने यह भी आग्रह किया कि सरकार साल में एक तय तारीख रखे, जिस दिन नियमों में बदलाव लागू हों. इससे कारोबारियों को अचानक नियम बदलने से बचाया जा सके. नई नीतियों को लागू करने से पहले सभी हितधारकों से बातचीत करना और उन्हें तैयारी का समय देना भी जरूरी बताया गया है. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अब सरकार सभी नियमों का रेगुलेटरी इम्पैक्ट असेसमेंट करेगी. इसका सीधा मतलब है कि किसी नए नियम को लागू करने से पहले यह देखा जाएगा कि उसे मानने में कारोबारियों पर कितना खर्च आएगा और सरकार को उसे लागू कराने में कितनी मेहनत और लागत लगेगी. इससे अनावश्यक और महंगे नियम बनने से बचा जा सकेगा. सजा को लेकर भी बदलावों का सुझाव सजा को लेकर भी बड़े बदलाव सुझाए गए हैं. समिति का स्पष्ट कहना है कि “छोटी तकनीकी गलतियों पर जेल या आपराधिक सजा नहीं होनी चाहिए.” जेल या भारी जुर्माना केवल उन्हीं मामलों में हो जहां मानव स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा या पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है. इसके अलावा सभी पुराने कानूनों में मौजूद सजा संबंधी धाराओं की आधुनिक जरूरतों के अनुसार समीक्षा की जानी चाहिए. सबसे अहम बदलाव है कि पूरी व्यवस्था का डिजिटल रूप से सक्षम होना. यानी सभी दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा हों, विभागों के बीच डेटा साझा किया जा सके, और एक बार दिया गया डेटा दोबारा न मांगा जाए. इसके लिए मंत्रालयों को API जारी करनी होंगी, ताकि सरकारी डेटाबेस आसानी से एक-दूसरे से जुड़ सकें. रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी सुझावों का मकसद सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाना है. समिति का दावा है कि अगर इन सुधारों को अपनाया गया तो देश में कारोबार करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और आधुनिक नियामक ढांचा तैयार होगा जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार देगा.

SIR प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल के 14 लाख नाम कटने के अंदेशा, फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख एक हफ्ते में

 कोलकाता चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब तक करीब 14 लाख SIR गिनती के फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' के तौर पर पहचाने गए हैं. एक अधिकारी ने कहा कि ये फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' हैं क्योंकि वोटर या तो गैर-हाज़िर थे, डुप्लीकेट थे, मर चुके थे या हमेशा के लिए कहीं और चले गए थे. सोमवार को यह आंकड़ा 10.33 लाख था. उन्होंने कहा, " दोपहर तक, यह संख्या 13.92 लाख थी. हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे और अपडेट आएंगे, यह आंकड़ा रोज़ बढ़ता रहेगा." पूरे राज्य में बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) को घरों से डेटा इकट्ठा करने का काम सौंपा गया है. वे फॉर्म बांटने और ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करने में एक्टिव रूप से लगे हुए हैं. अब तक 3 बीएलओ की मौत अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में रिवीजन के काम के लिए 80,600 से ज़्यादा BLOs, करीब 8,000 सुपरवाइज़र, 3,000 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और 294 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को लगाया गया है. अभी तक, चल रहे SIR के बीच राज्य में तीन BLOs की मौत हो चुकी है. बीजेपी को ममता बनर्जी की चेतावनी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को BJP पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी सेंट्रल पोल बॉडी को अपनी शर्तें थोप रही है और आने वाले SIR प्रोसेस में लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम हटाने के खिलाफ चेतावनी दी. बीजेपी के बिहार कैंपेन की ओर इशारा करते हुए, ममता ने आरोप लगाया कि वहां कोई भी पड़ोसी राज्य में पार्टी के 'गेम' को नहीं देख सकता और कहा कि बंगाल में ऐसा नहीं होगा. उन्होंने BJP को यह भी चेतावनी दी कि अगर बंगाल में उन्हें या उनके लोगों को टारगेट किया गया तो वह पूरे देश में सड़कों पर उतरेंगी और पूरे देश को हिला देंगी. उन्होंने कहा, "अगर आप मुझे बंगाल में टारगेट करते हैं और मैं अपने लोगों पर किसी भी हमले को पर्सनल अटैक मानती हूं, तो मैं पूरे देश को हिला दूंगी. मैं चुनाव के बाद पूरे देश का दौरा करूंगी."

सरकार ने 29 श्रम कानूनों को घटाकर 4 नए कोड किए लागू, कर्मचारियों को मिलेगा अतिरिक्त मुनाफा

 नई दिल्‍ली भारत में नए कानूनों को लागू कर दिया गया है, जिसके बाद सबसे बड़ी चर्चा सैलरी को लेकर शुरू हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी घट जाएगी, लेकिन सोशल सिक्‍योरिटी जैसे- पीएफ, ग्रेच्‍युटी और पेंशन आदि में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ जाएगा.  इसी को लेकर टैक्सबडी डॉट कॉम के संस्थापक सुजीत बांगर ने बताया है कि कैसे आपकी सैलरी प्रभावित हो सकती है और PF में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ने से आपका रिटायरमेंट फंड करोड़ों रुपये में बदल जाएगा. लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बांगर ने बताया कि किस प्रकार नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों के वेतन संरचना को बदल रहे हैं, जिससे भविष्य निधि (PF) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) योगदान के माध्यम से कर्मचारियों को बढ़ावा मिल रहा है. अपनी पोस्‍ट में एक्‍सपर्ट ने कहा कि पहले बेसिक सैलरी कंपनी की कुल कॉस्‍ट (CTC) का करीब 35 फीसदी होता था, जिससे एक बड़ा हिस्‍स टैक्‍स अनुकूल अलाउंस में जाता था, जबकि पीएफ और एनपीएस कटौती कम रहती थी. बांगर ने कहा कि पुराने इंफ्रा में जानबूझकर पीएफ कम रखा जाता था.  लेकिन संशोधित नियमों के बाद अब बेसिक सैलरी सीटीसी का कम से कम 50% होना चाहिए, जिससे पीएफ और एनपीएस दोनों का योगदान बढ़ जाएगा, क्योंकि दोनों की गणना बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में की जाती है.  कैसे बन जाएंगे करोड़ों रुपये?  ₹12 लाख सीटीसी वाले 30 वर्षीय कर्मचारी के लिए, मंथली पीएफ कंट्रीब्‍यूशन (नियोक्ता और कर्मचारी दोनों की ओर से) करीब ₹7,200 से बढ़कर ₹12,000 हो जाएगा. यह ₹4,800 मंथली ग्रोथ, 30 साल में चक्रवृद्धि होने पर, ₹1.24 करोड़ की अतिरिक्त पीएफ बचत में बदल जाती है. रिटायरमेंट में कुल पीएफ अमाउंट 3.11 करोड़ रुपये हो जाएगा.  इसी तरह, एनीपीएस में कंट्रीब्‍यूशन बढ़ेगा यानी 30 साल में ₹1.07 करोड़ और जुड़ेगा . कुल मिलाकर, कुल रिटारमेंट फंड 30 सालों में अनुमानित ₹3.46 करोड़ से बढ़कर ₹5.77 करोड़ हो जाता है. लॉन्‍गटर्म सेफ्टी देती है ये योजना  बांगर ने जोर देकर कहा कि रिटायरमेंट फंड का यह चक्रवृद्धि ब्याज ज्‍यादातर बचत योजनाओं से बेहतर है. उन्होंने लिखा कि म्यूचुअल फंड एसआईपी आमतौर पर 3-5 साल में टूट जाते हैं. एफडी का भुगतान हो जाता है, लेकिन पीएफ और एनपीएस, अनिवार्य, कटौती-आधारित हैं और इसीलिए वे जीवन भर की संपत्ति बनाते हैं. हालांकि शॉट टर्म में घर ले जाने वाले वेतन में कमी आ सकती है, लेकिन बांगर का तर्क है कि नई व्यवस्था लागू बचत अनुशासन के माध्यम से दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है.

समझौते पर भी नहीं लगी मरहम: महाराष्ट्र में BJP ने तोड़े शिंदे के तीन नेताओं से रिश्ते

मुंबई महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के दो घटक दलों यानी भाजपा और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के बीच कलह थमना मुश्किल नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं और नेताओं की खरीद-फरोख्त को लेकर दोनों दलों के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव टकराव की चल रहा था, जिसे अमित शाह के दखल के बाद माना जा रहा था कि तनाव का दौर खत्म हो जाएगा लेकिन भाजपा ने फिर से शिवसेना के तीन नेताओं को तोड़कर मिला लिया है। इससे दोनों साथी दलों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। दरअसल, दोनों दलों के बीच पिछले ही दिनों यह समझौता हुआ था कि कोई भी दल एक-दूसरे के नेताओं के अपनी पार्टी में सामिल नहीं कराएगा। बावजूद इसके BJP ने सोमवार को शिवसेना के तीन नेताओं को अपने साथ मिला लिया। इनमें से एक शिवसेना नेता अंबरनाथ से और दो संभाजीनगर से हैं। अंबरनाथ में जो नेता शिवसेना छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं, वह एक बिजनेसमैन हैं और पुराने शिव सैनिक रहे हैं। रूपसिंह धाल की पहचान ज्वैलर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट के तौर पर भी रही है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष की मौजूदगी में हुए शामिल अब वह BJP में शामिल हो चुके हैं। उन्हें महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की मौजूदगी में पार्टी में शामिल कराया गया। दूसरी तरफ संभाजीनगर जिले में, फुलंबरी नगर पंचायत के लिए शिवसेना चीफ और शिवेसना के उम्मीदवार रहे आनंदा ढोके भी भाजपा में शामिल हो गए। संभाजीनगर में ही शिवसेना की महिला विंग की हेड शिल्पारानी वाडकर भी BJP में शामिल हो गईं हैं। इससे शिवसेना की भौहें तन गई हैं। शिवसेना बोली- नतीजे भुगतने होंगे BJP के इस नए कदम पर शिवसेना के कैबिनेट मिनिस्टर और संभाजीनगर जिले के गार्जियन मिनिस्टर संजय शिरसाट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। शिरसाट ने कहा, "अगर BJP ने हमारे नेताओं को अपनी तरफ खींचना बंद नहीं किया तो उसे नतीजे भुगतने होंगे। हम बदला लेने के लिए सही कदम उठाएंगे।" BJP मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान महायुति के अंदर सभी मतभेद 3 दिसंबर को चुनाव नतीजों के बाद सुलझा लिए जाएंगे। महायुति संग चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं शिवसेना के टकराव बढ़ाने के लिए तैयार होने का संकेत देते हुए शिरसाट ने कहा कि यदि शिवसेना कार्यकर्ताओं को (भाजपा में) अपनी बढ़त साबित करने के लिए शामिल किया जा रहा है तो उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी भी उचित कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, “इससे शिवसेना कार्यकर्ताओं में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। यह (शिवसेना उम्मीदवारों को भाजपा में शामिल करना) बंद होना चाहिए, अन्यथा महायुति के रूप में चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं है।” शिरसाट ने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति आगामी नगर निगमों और जिला परिषदों के चुनावों को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वरिष्ठ नेताओं को इस पर विचार करना चाहिए।" उन्होंने भाजपा नेता और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक कार्यकर्ता विकल्प तलाशते रहते हैं।  

पाकिस्तान का एंटी-शिप मिसाइल परीक्षण: जानें इसकी खूबियां और भारत पर संभावित असर

इस्लामाबाद  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हर मोर्चे पर मात खाया पड़ोसी देश पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और लगातार हथियारों की होड़ में शामिल है। दो महीने पहले जमीन से लॉन्च किए जाने वाले फतह-4 क्रूज मिसाइल के परीक्षण के बाद अब पाकिस्तानी नौसेना ने एक स्वदेश विकसित पोत रोधी बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल समुद्र और धरती, दोनों स्थानों पर लक्ष्य भेदने में सक्षम है। पाक सेना ने यह जानकारी दी है लेकिन इस मिसाइल का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।   इसे दुश्मन के युद्धपोत को समंदर में ही डुबोने वाली एंटी शिप मिसाइल कहा जा रहा है। पाकिस्तान की मिलिट्री प्रेस विंग ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह परीक्षण मंगलवार को स्थानीय स्तर पर निर्मित नौसैन्य प्लेटफॉर्म से किया गया, जिससे देश की रक्षा क्षमताएं बढ़ी हैं। ISPR ने कहा है कि यह मिसाइल समुद्र और जमीन, दोनों जगहों पर काफी सटीकता से हमला करने में सक्षम है। साथ ही, यह उन्नत तकनीक से लैस है। पाक पीएम-राष्ट्रपति गदगद पाकिस्तानी नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह सफल परीक्षण देश की बढ़ती प्रौद्योगिकीय विशेषज्ञता को दर्शाता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए नौसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी’ के अध्यक्ष जनरल साहिर शमशाद मिर्जा और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने इस उपलब्धि में शामिल सभी इकाइयों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। परीक्षण में सटीक निशाना साधा भारत के साथ मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से पाकिस्तान अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। बता दें कि दो महीने पहले सितंबर 2025 में पाकिस्तानी सेना ने अपनी नव विकसित फतह-4 का परीक्षण किया था, जो जमीन से जमीन पर 750 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल है। अब पाकिस्तान ने पानी से पानी या सतह पर मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसने सटीक निशाना साधा है। भारत के लिए कितना टेंशन? क्या खूबियां? यह भारत समेत अन्य दुश्मनों के युद्धपोतों को एक मिनट के अंदर डुबोने में सक्षम है। यह मिसाइल पहले हवा में बहुत ऊपर जाती है, फिर सीधे नीचे गोता लगाकर टारगेट पर निशाना साधती है। इसे दुश्मन का रडार आसानी से नहीं पकड़ सकता है। इसीलिए पाकिस्तान कह रहा है कि उसकी नौसेना अब ज्यादा ताकतवर हो गई है। यह पाकिस्तान द्वारा पूरी तरह से स्वदेश निर्मित है। इस मिसाइल को समंदर में नेवी के जहाज से लॉन्च किया जाता है। यानी यह नेवी के जहाज पर लगी होती है। यह बहुत तेज उड़ती है और आसमान में ही दिशा बदल सकती है। दुश्मन के रडार सिस्टम से बचने में सक्षम है। यह तेजी से गोता लगाकर दुश्मन के टारगेट पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

इमरान खान जिंदा या नहीं? अफवाहों के बीच दो बुज़ुर्ग बहनों पर हमला, तनाव बढ़ा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के बारे में अफवाहों का बाजार गर्म है। पाकिस्तान की राजनीति में पूर्व राष्ट्राध्यक्षों की हत्या और फांसी दिए जाने जैसी चीजें आम रही हैं। इस बीच इमरान खान की जेल में ही हत्या कराए जाने की चर्चा है, जिससे पाकिस्तान में उनके समर्थकों के बीच उबाल है। यही नहीं इमरान खान की तीन बहनों ने दावा किया है कि वे तीन सप्ताह से अपने भाई से नहीं मिल सकी हैं। यही नहीं जब उनकी ओर से भाई से मुलाकात कराने की मांग की गई तो पुलिस ने उन पर बर्बरता से लाठियां बरसाईं। इमरान खान की बहनों नूरीन खान, अलीमा खान और उज्मा खान ने दावा किया है कि पुलिस ने उनकी पिटाई की।   रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल के बाहर इमरान खान के समर्थक बड़ी संख्या में जुटे और नारेबाजी की। यही नहीं कुछ और जगहों से ऐसे वीडियोज आए हैं, जिनमें इमरान खान के समर्थन सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी करते दिख रहे हैं। इमरान खान 2023 से ही जेल में बंद हैं। इमरान खान की पार्टी के नेता और उनकी बहनें अकसर मुलाकात करती रही हैं, लेकिन बीते तीन सप्ताह से किसी की उनसे मीटिंग नहीं हुई है। उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि जब इमरान खान के समर्थक और बहनें जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे तो पुलिस ने उनकी बुरी तरह से पिटाई की। पार्टी ने इस मामले की निष्पक्षता से जांच किए जाने की मांग की है। बहनों ने पुलिस चीफ को लिखा- इस उम्र में बाल पकड़कर घसीटा गया इमरान खान की बहनों ने पंजाब पुलिस के चीफ उस्मान अनवर को लिखे लेटर में कहा है कि उनकी और समर्थकों की बिना किसी उकसावे की बुरी तरह से पिटाई की गई। नूरीन नियाजी ने लिखा, 'हम इमरान खान की सेहत को लेकर चिंतित हैं। इसी के लिए प्रदर्शन कर रहे थे, जो शांतिपूर्ण था। हमने ना तो कोई रास्ता बंद किया और ना ही जनता को कोई असुविधा हुई। इसके अलावा कोई गैरकानूनी हरकत भी नहीं हुई। फिर भी पुलिस ने हमारे लोगों को बिना किसी उकसावे के ही पीटना चालू कर दिया। यह बेहद क्रूर हमला था, जो पंजाब की पुलिस ने किया।' उन्होंने कहा कि मुझे 71 साल की उम्र में बाल पकड़ कर घसीटा गया और चोट लगी हैं। वकील बोले- मेरी भी मुलाकात नहीं हो पा रही नूरीन नियाजी ने कहा कि मेरे अलावा भी कुछ और महिलाओं को पीटा गया है। दरअसल अफगानिस्तान की मीडिया में भी इमरान खान की हत्या होने की आशंका वाली खबरें लगी हैं। हालांकि अब तक पाकिस्तान की सरकार, सेना या जेल प्रशासन की ओर से कोई बयान जारी नहीं हुई है। ऐसे में आशंकाएं गहराती जा रही हैं कि आखिर इमरान खान की सेहत कैसी है। वे जीवित भी हैं या नहीं। यही नहीं इमरान खान के वकीलों की भी शिकायत है कि वे अपने मुवक्किल से मिल नहीं पाए हैं। वकील खालिद युसूफ चौधरी का भी कहना है कि उनकी मुलाकात इमरान खान से नहीं हो सकी है। उन तक जरूरी चीजें भी नहीं पहुंचने दी जा रहीं।  

मुंबई हमलों की बरसी पर अमेरिका का संदेश: पीड़ितों को नमन, भारत के साथ खड़े रहने की पुष्टि

नई दिल्ली भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को आज पूरा देश याद कर रहा है। दुनिया के अन्य देश भी इस आतंकी हमले की निंदा कर रहे हैं और मृतकों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने भी 26/11 हमले की आलोचना की। भारत में अमेरिकी दूतावास ने 26/11 की 17वीं बरसी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों की 17वीं बरसी है। हम मारे गए लोगों की याद में सम्मान दिखाते हैं और बचे हुए लोगों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।  अमेरिका ने लंबे समय से भारत की उन कोशिशों का समर्थन किया है ताकि इन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके। एक बड़ा कदम उठाते हुए, अमेरिका ने इस साल तहव्वुर हुसैन राणा को भारत को सौंप दिया।" अमेरिकी दूतावास ने आगे लिखा कि राणा पर 2008 के भयानक मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में उसकी भूमिका का आरोप है। इस हमले में छह अमेरिकियों समेत 166 लोगों की दुखद मौत हो गई थी। राणा का प्रत्यर्पण उन पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक जरूरी कदम है जो इन भयानक हमलों में मारे गए थे। अमेरिकी दूतावास ने लिखा, "जब हम 26/11 के पीड़ितों को याद करते हैं, तो हम अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर आतंकी हमलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का अपना पक्का इरादा दोहराते हैं।" इससे पहले भारत में इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने भी दुख जाहिर किया। इजरायल ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए एक वीडियो मैसेज में, अजार ने कहा कि इस हमले में हर समुदाय, देश और धर्म के लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इजरायल आतंकवाद में मासूम लोगों की जान जाने का दर्द समझता है और हिम्मत और पक्के इरादे से इसका जवाब दे रहा है। अजार ने कहा, "आज, जब भारत 26/11 के भयानक मुंबई आतंकी हमलों की बरसी मना रहा है, मैं और इजरायल के लोग, भारत के लोगों के साथ खड़े हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम उस काले दिन और उसके बाद हर साल खड़े थे। 26/11 सिर्फ मुंबई पर हमला नहीं था, यह इंसानियत पर हमला था।" उन्होंने कहा कि इसने हर समुदाय, हर देश, हर धर्म, भारतीयों और इजरायलियों को एक ही तरह से टारगेट किया। बदकिस्मती से, इजरायल इस दर्द को जानता है। हम जानते हैं कि आतंकी घटनाओं में मासूम लोगों की जान जाने का क्या मतलब होता है। भारत और इजरायल के मिले-जुले अनुभव ही 'गहरी और हमेशा रहने वाली साझेदारी' की नींव हैं। आज, हम 26/11 के पीड़ितों को याद करते हैं। हम उन बहादुर अधिकारियों, सुरक्षा बलों और फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स का सम्मान करते हैं, जिन्होंने बहुत बड़ी कुर्बानी देकर शहर की रक्षा की, और हम उन परिवारों के साथ खड़े हैं, जिनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।