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ट्रंप का बड़ा बयान: भारत-अमेरिका के बीच खत्म होगी ‘टैरिफ जंग’, नई ट्रेड डील पर बनी सहमति

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका में जारी तनाव जल्द खत्म होने के आसार हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत के साथ ट्रेड डील करने वाले हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि अमेरिका टैरिफ घटाकर 16 प्रतिशत करने का फैसला किया था। हालांकि, इसे लेकर भारत या अमेरिका सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। दक्षिण कोरिया पहुंचे ट्रंप ने बुधवार को कहा, '…अगर आप भारत और पाकिस्तान को देखें, तो मैं भारत के साथ ट्रेड डील करने वाला हूं। मेरे मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत प्यार और सम्मान है…। हमारा रिश्ता बहुत मजबूत है।' ट्रंप के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हो सकता है। अमेरिका रूसी तेल की खरीद के मुद्दे पर भारत पर निशाना साधता रहा है। बीते हफ्ते खबरें आई थीं कि भारत और अमेरिका के बीच तीन में से दो मुद्दों पर सहमति बन गई है। वहीं, खबरें ये भी थीं कि भारत ने अमेरिका को भारतीय कृषि बाजार में एंट्री की अनुमति नहीं दी थी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर थम गया था। कहा जा रहा था कि रूसी तेल की खरीद में कमी पर भारत की सहमति के बाद अमेरिका ने टैरिफ 16 प्रतिशत पर करने के लिए तैयार हुआ था। खास बात है कि ये अटकलें पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद लगाई जा रही थीं। पूरी तरह से कटौती का दावा ट्रंप ने शनिवार को एक बार फिर दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत रूसी तेल खरीद में 'पूरी तरह से' कटौती कर रहा है, जबकि चीन 'काफी हद तक' कटौती करेगा। शनिवार को मलेशिया जाते समय विशेष विमान एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि भारत रूसी तेल खरीद में 'पूरी तरह से कटौती' कर रहा है। ट्रंप और उनकी टीम लगातार आरोप लगाती रही है कि भारत रूसी तेल की खरीद से मुनाफाखोरी कर रहा है। साथ ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तेल की खरीद के जरिए वित्तीय सहयोग कर रहा है। अमेरिका ने भारत पर शुरुआत में 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगाया था। इसके बाद भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया।  

किसानों के लिए राहत, खाद पर 38 हजार करोड़ की सब्सिडी को मिली हरी झंडी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने देशभर के किसानों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत रबी सीजन 2025-26 के लिए फॉस्फोरस और पोटाश उर्वरकों पर सब्सिडी की मांग की गई थी। कैबिनेट बैठक में करीब 38 हजार करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी का ऐलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर किसानों को उर्वरकों पर दी गई राहत के बारे में जानकारी साझा की है। पीएम ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'हम देशभर के अपने किसान भाई-बहनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी दिशा में हमारी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 2025-26 के रबी सीजन के लिए फॉस्फोरस और पोटाश उर्वरकों पर सब्सिडी को मंजूरी दी है। इससे जहां अन्नदाताओं को किफायती दर पर उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे, वहीं उनकी कमाई भी बढ़ेगी।' किसानों को सस्ते दरों पर मिलेगी खाद इस निर्णय के तहत रबी सीजन 2025-26 के लिए लगभग 37,952 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जो कि खरीफ सीजन 2025 की तुलना में करीब 736 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार द्वारा डीएपी और एनपीकेएस जैसे उर्वरकों पर स्वीकृत दरों के अनुसार सब्सिडी दी जाएगी ताकि किसानों को ये उर्वरक सस्ती और सुगम दरों पर उपलब्ध हो सकें। सरकार देशभर में किसानों को 28 प्रकार के फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक, जिनमें डीएपी भी शामिल है, सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराती है। यह सब्सिडी अप्रैल 2010 से लागू एनबीएस योजना के तहत दी जा रही है। किसानों के हित को ध्यान रखते हुए सरकार ने लिया फैसला किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार किसानों किसानों को उर्वरक उचित कीमतों पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर जैसे कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। स्वीकृत और अधिसूचित दरों के अनुसार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी दी जाएगी ताकि देशभर में किसानों को आवश्यक उर्वरक सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकें। शिवराज सिंह चौहान ने पीएम मोदी का व्यक्त किया आभार वहीं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट द्वारा खाद सब्सिडी के लिए 38 हजार करोड़ रुपये की जारी करने के फैसले पर किसानों की ओर से उनका आभार व्यक्त किया।

सहारा इंडिया मुश्किल में: EPFO ने थमाया कुर्की नोटिस

लखनऊ  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सहारा इंडिया ग्रुप पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है. कंपनी द्वारा लाखों कर्मचारियों के लिए जमा न किए गए 1180 करोड़ रुपये के भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन बकाया के खिलाफ ईपीएफओ ने सहारा की संपत्तियों पर कुर्की का नोटिस जारी कर दिया है. यह कदम सहारा की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय अनियमितताओं के बीच आया है, जहां कंपनी के एजेंटों को कर्मचारी मानते हुए उनके पीएफ योगदान को अनिवार्य ठहराया गया है. यदि बकाया समय पर जमा नहीं किया गया, तो ईपीएफओ कानून के तहत संपत्ति जब्ती और ब्याज सहित दंड की प्रक्रिया तेज कर देगा. ईपीएफओ की लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने सहारा इंडिया को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि 15 दिनों के अंदर 1180 करोड़ रुपये जमा किए जाएं. यह राशि मुख्य रूप से 2010-2012 के दौरान सहारा के ‘कमीशन एजेंटों’ के पीएफ और पेंशन दावों से जुड़ी है. ईपीएफओ का तर्क है कि ये एजेंट वास्तव में कंपनी के कर्मचारी थे, जिनके लिए पीएफ योगदान अनिवार्य था. यदि देरी हुई, तो धारा 8बी से 8जी के तहत बिना अतिरिक्त नोटिस के वसूली की कार्रवाई शुरू हो जाएगी, जिसमें ब्याज और जुर्माना भी जोड़ा जाएगा. अनुमान है कि कुल बकाया ब्याज सहित 3500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ये है मामला सहारा इंडिया पर यह कार्रवाई 2013 से चल रही जांच का नतीजा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पिछले साल चार महीने का समयसीमा तय की थी, जिसके बाद ईपीएफओ ने 15 फरवरी को आदेश जारी किया. कंपनी ने लंबे समय तक एजेंटों को ‘सदस्य’ बताकर पीएफ दायित्व से बचने की कोशिश की, लेकिन अदालती फैसले ने इसे कर्मचारी ही माना. ईपीएफओ के अधिकारियों के अनुसार, सहारा के पास 10 लाख से अधिक ऐसे ‘कर्मचारी’ थे, जिनके दावे अब लंबित हैं. सहारा का संकट गहराया सहारा इंडिया ग्रुप पहले से ही सेबी के बॉन्ड घोटाले, जमीन घोटालों और निवेशकों के 9000 करोड़ के रिफंड के मामले में उलझा हुआ है. हाल ही में झारखंड सीआईडी ने 400 करोड़ के लैंड स्कैम में सब्राटा रॉय के बेटों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. अब ईपीएफओ का यह नोटिस कंपनी की संपत्तियों—जैसे रियल एस्टेट और वित्तीय परिसंपत्तियों—पर सीधा खतरा पैदा कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कुर्की हुई, तो सहारा की लिक्विडिटी और बिक्री योग्य संपत्तियों पर असर पड़ेगा.  

भारत ने तोड़ी परंपरा: इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूरोपीय कमीशन व परिषद के अध्यक्ष

नई दिल्ली अगले साल गणतंत्र दिवस परेड में भारत दुनिया की एक सबसे ताकतवर हस्ती को आमंत्रित करने वाला है. इसमें न तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम है और न ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का. इसमें फ्रांस, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे सुपरपावर के हेड का भी नाम नहीं है. ये भी स्वाभाविक है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति का भी नाम नहीं ही है. ऐसे में ये ताकतवर हस्तिंयां कौन हैं. तो उनके नाम हैं- उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा. भारत पहली बार परंपरा से हटकर इन्हें आमंत्रित कर रहा है. लेयेन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष हैं जबकि कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं. रिपोर्ट के मुताबिक औपचारिक निमंत्रण और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, जिसके पूरा होने पर नई दिल्ली और ब्रुसेल्स द्वारा जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी. भारत के नजरिये में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि आमंत्रण अत्यंत प्रतीकात्मक महत्व रखता है. नई दिल्ली रणनीति और आतिथ्य का संतुलन बनाते हुए मुख्य अतिथि का चयन करती है, जिसमें सामरिक-कूटनीतिक कारण, व्यापारिक हित और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस बार ईयू नेतृत्व को आमंत्रित करना भारत-ईयू संबंधों में तेजी से आए उभार का स्पष्ट संकेत है, विशेषकर फरवरी 2025 से जब ईयू के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स ने भारत का दौरा किया था. 27 सदस्यीय ईयू के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली प्रशासन की अनिश्चित नीतियों के बीच ईयू ने 20 अक्टूबर को एक नया सामरिक एजेंडा अपनाया, जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाने का संकल्प है. व्यापार समझौते पर वार्ता इसमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की चल रही वार्ताओं को अंतिम रूप देना, प्रौद्योगिकी, रक्षा-सुरक्षा और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करना शामिल है. जनवरी में ईयू नेताओं के भारत आने पर दिल्ली में ही भारत-ईयू लीडर्स समिट आयोजित होगा, जो मूल रूप से 2026 की शुरुआत में निर्धारित था. इससे दोनों पक्षों के वार्ताकारों पर दिसंबर तक एफटीए को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है – यह प्रतिबद्धता फरवरी में हुई आर्थिक साझेदारी बैठकों में ली गई थी. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में ईयू नेतृत्व की उपस्थिति न केवल कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करेगी. यह आमंत्रण भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है. ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता के बीच ईयू के साथ गठजोड़ भारत को व्यापार, निवेश और रक्षा प्रौद्योगिकी में नई संभावनाएं देगा. एफटीए पूरा होने पर भारत को ईयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके निर्यात को बढ़ावा देगी. साथ ही, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग से भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बल मिलेगा. जनवरी समिट में दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी चर्चा करेंगे. यह ऐतिहासिक आमंत्रण भारत-ईयू साझेदारी के नए युग की शुरुआत है. जब 26 जनवरी 2026 को राजपथ पर ईयू झंडा लहराएगा, तो यह न केवल राजनयिक सफलता होगी, बल्कि वैश्विक सहयोग की नई मिसाल भी कायम करेगा. दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग की यह यात्रा अब निर्णायक मोड़ पर है.  

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध, Meta, Snap और TikTok बोले- नकारात्मक असर होगा

सिडनी  ऑस्ट्रेलिया सरकार ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लिया है- अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. यह नया कानून 10 दिसंबर से लागू होगा, और इसके तहत Meta (Facebook और Instagram), TikTok और Snap जैसी कंपनियों को नाबालिग यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाना होगा. अगर कोई कंपनी ऐसा करने में असफल रहती है तो उसे 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर (करीब ₹270 करोड़) तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. नए नियमों के तहत क्या करना होगा कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया के इस नए कानून के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे उनके प्लेटफॉर्म पर अकाउंट न बना सकें. इसके लिए उन्हें “reasonable steps” यानी तकनीकी और व्यवहारिक उपाय अपनाने होंगे ताकि बच्चों की ऑनलाइन मौजूदगी को रोका जा सके. इस कानून का मकसद बच्चों को हानिकारक कंटेंट, साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से बचाना है. कंपनियां मान गईं, लेकिन बोलीं – यह समाधान नहीं Meta, TikTok और Snap ने कहा कि वे इस कानून का पालन तो करेंगी, लेकिन यह बच्चों की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका नहीं है. कंपनियों का कहना है कि अगर बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह हटा दिया गया, तो वे अनसेफ या अनरेगुलेटेड वेबसाइट्स पर चले जाएंगे, जहां निगरानी और भी मुश्किल है. Snap की ग्लोबल पॉलिसी हेड Jennifer Stout ने कहा- “हम सहमत नहीं हैं, लेकिन कानून का पालन करेंगे.” वहीं TikTok की ऑस्ट्रेलिया की पब्लिक पॉलिसी हेड Ella Woods-Joyce ने कहा कि वे “कंप्लायंस के लिए तैयार हैं.” Meta और TikTok के पास कितने नाबालिग यूजर्स Meta (जो Facebook और Instagram की पेरेंट कंपनी है) ने बताया कि वह लगभग 4.5 लाख नाबालिग यूजर्स से संपर्क करेगी और उन्हें दो विकल्प देगी- या तो वे अपना डेटा डिलीट करें, या फिर उसे तब तक स्टोर रखें जब तक वे 16 साल के नहीं हो जाते. TikTok का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर करीब 2 लाख नाबालिग यूजर्स हैं, जबकि Snap (Snapchat की कंपनी) ने कहा कि उनके पास करीब 4.4 लाख यूजर्स इस उम्र समूह में आते हैं. AI से पकड़े जाएंगे फर्जी उम्र वाले अकाउंट कंपनियां अब AI और एडवांस्ड डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल करेंगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से अकाउंट्स वयस्क होने का झूठा दावा कर रहे हैं लेकिन असल में बच्चे चला रहे हैं. Snap ने बताया कि वे एक अपील सिस्टम भी तैयार कर रहे हैं, जिसमें अगर किसी यूजर का अकाउंट गलती से फ्लैग हो जाए, तो वह अपनी उम्र साबित कर सके. सरकार का तर्क– बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि यह कानून बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट और साइबरबुलिंग से बचाने के लिए लाया गया है. सरकार का दावा है कि आजकल सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह चिंता जताई है कि यह कानून उन बच्चों को अलग-थलग कर सकता है जो बीमारी या आइसोलेशन में हैं और सोशल मीडिया के जरिए ही बाहरी दुनिया से जुड़े रहते हैं. दुनिया देख रही है ऑस्ट्रेलिया का फैसला ऑस्ट्रेलिया का यह कदम अब दुनियाभर के देशों के लिए एक उदाहरण बन सकता है. कई सरकारें पहले से ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नए कानूनों पर काम कर रही हैं. Meta, TikTok और Snap ने कहा कि वे इस कानून का पालन तो करेंगे, लेकिन सरकारों को चाहिए कि वे बच्चों के लिए संतुलित और शिक्षाप्रद डिजिटल माहौल बनाएं- न कि सिर्फ़ बैन लगाएं. 

2011 से 2026 तक देश की जनसंख्या में बड़ा बदलाव, छोटे बच्चों का प्रतिशत गिरा

नई दिल्ली देश में जनसांख्यिकी ढांचा में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट सामने आई है। इसके अनुसार, 2011-2026 के बीच देश में बच्चों और किशोरों (0-19 साल) की आबादी में 9 फीसदी का गिरावट आने का अनुमान है। देश में वर्ष 2011 में 0-19 साल की आबादी करीब 41%, थी, जो 2026 में महज 32 फीसदी पर सिमट जाएगी। मंत्रालय की रिपोर्ट भारत में बच्चों की आबादी में यह दावा किया गया है। एक अनुमान के अनुसार, इस आयु वर्ग में करीब 125 करोड़ लोग कम होने का अनुमान है रिपोर्ट में 0-19 साल की आबादी को चार वर्गों में बांटा ने गया है। यदि 2011 की बात करें तो 0-4 साल के औयु वर्ग की आबादी 9.9 फीसदी थी जो 2026 में 7.6 फीसदी रह जाएगी। 5-9 साल आयुवर्ग की आबादी 10.4 से घटकर7.9% रह जाएगी। तीसरे समूह 10-14 आयु वर्ग में आबादी का प्रतिशत 10.6 से घटकर 8.2 रह जाएगी।15-19 साल के आयु वर्ग की आबादी 10.1 से घटकर 8.2 फीसदी रह जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में परिवार नियोजन की सुविधाओं में सुधार होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रजनन दर घट रही है, जिसका असर आबादी के ढांचे पर दिखना शुरू हो गया है। 0-4 साल के आयु वर्ग की आबादी 9.9 फीसदी रही साल की आबादी को चार वर्गों में बांट गया है। यदि 2011 की बात करें तो 0-4 साल के आयु वर्ग की आबादी 9.9 फीसदी थी जो 2026 में 7.6 फीसदी रह जाएगी। 5-9 साल आयु वर्ग की आबादी 10.4 से घटकर 7.9% रह जाएगी। तीसरे समूह 10-14 आयु वर्ग में आबादी का प्रतिशत 10.6 से घटकर 8.2 रह जाएगी। 15-19 साल के आयु वर्ग की आबादी 10.1 से घटकर 8.2 फीसदी रह जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में परिवार नियोजन की सुविधाओं में सुधार होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रजनन दर घट रही है, जिसका असर आबादी के ढांचे पर अब दिखना शुरू हो गया है।

भारत की नई उड़ान: देसी सुखोई सुपरजेट एयरलाइन इंडस्ट्री में बढ़ाएगा रफ्तार

नई दिल्ली भारत ने विमानन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रूस के साथ बड़ी डील की है. सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने  रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत HAL भारत में रूसी डिजाइन वाले पैसेंजर जेट ‘सुखोई सुपरजेट 100 (SJ-100)’ का निर्माण करेगी. यह समझौता भारत के लिए दशकों बाद पूरी तरह से नागरिक विमानों के निर्माण में उतरने की दिशा में पहला बड़ा कदम है. यह समझौता मॉस्को में हुआ, जिससे भारत को इस विमान को देश के अंदर ही असेंबल करने का अधिकार मिल गया है. यह कदम भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की नागरिक विमान निर्माण क्षमता को दोबारा जिंदा की दिशा में पहला बड़ा प्रयास है. SJ-100 एक ट्विन-इंजन रीजनल जेट है, जो छोटी दूरी की उड़ानों के लिए उपयुक्त है. यह पहले से ही दुनिया की एक दर्जन से अधिक एयरलाइनों में चलाई जा रही है और इसके 200 से अधिक यूनिट बनाए जा चुके हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल बोइंग और एयरबस जैसे अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों के दबदबे वाले बाज़ार में प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकती है. इसके अलावा, इस विमान को भारत सरकार की उड़ान (UDAN) योजना के तहत देश के कम जुड़ाव वाले क्षेत्रों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाने की संभावना है. यह सौदा भारत की आखिरी बड़ी नागरिक विमान परियोजना, यानी HAL AVRO HS-748 (1961 से 1988 तक निर्मित) की याद भी ताज़ा करता है. तब से अब तक भारत अपने व्यावसायिक बेड़े के लिए विदेशी आयात पर ही निर्भर रहा है. वर्तमान में भारत में संचालित ज्यादातर विमान Boeing 737 और Airbus A320 परिवार के हैं, जो वैश्विक बाजार का लगभग 90% हिस्सा नियंत्रित करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि HAL–UAC साझेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और नए रोजगार पैदा करना है. अनुमान है कि अगले एक दशक में भारत को 200 से अधिक रीजनल जेट विमानों की आवश्यकता होगी.  

RSS को सरकारी परिसरों में कार्यक्रम की इजाजत पर रोक, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई लगाम

बेंगलुरु  कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार को हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें प्राइवेट संगठनों को सरकारी परिसरों में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था। इस आदेश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को निशाना बनाने वाला कदम माना जा रहा था। जस्टिस नागप्रसन्ना की सिंगल-जज बेंच ने सरकार के निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को तय की। सरकार के निर्देश को किसने दी थी चुनौती? सरकार के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका पुनश्चैतन्य सेवा संस्था ने दायर की थी, जिसने यह तर्क दिया कि इस कदम से प्राइवेट संगठनों के कानूनी काम करने के अधिकारों का उल्लंघन होता है। कर्नाटक के मंत्री ने क्या कहा? इससे पहले, कर्नाटक के संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने साफ किया था कि सरकार का यह कदम किसी खास संगठन को टारगेट करके नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा, “इस संगठन या उस संगठन के बारे में कुछ भी खास नहीं है। सरकारी या संस्थागत प्रॉपर्टी का इस्तेमाल सिर्फ सही इजाज़त और सही मकसद के लिए किया जाएगा। किसी भी उल्लंघन पर मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।”

समुद्री शक्ति पर मोदी का फोकस: 29 अक्टूबर को मुंबई में ‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ में देंगे संबोधन

मुंबई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुंबई के नेस्को प्रदर्शनी केंद्र में इंडिया मैरीटाइम वीक-2025 (आईएमडब्ल्यू 2025) के मैरीटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करेंगे और ग्लोबल मैरीटाइम सीईओ फोरम की अध्यक्षता करेंगे। यह आयोजन भारत को वैश्विक समुद्री केंद्र और ब्लू इकोनॉमी में अग्रणी बनाने की रणनीति को प्रदर्शित करेगा। 27 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन का विषय 'महासागरों का एकीकरण, एक समुद्री दृष्टिकोण' है, जो भारत के मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  आईएमडब्ल्यू 2025 में 85 से अधिक देशों के 1,00,000 से ज्यादा प्रतिनिधि, 500 से अधिक प्रदर्शक और 350 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय वक्ता हिस्सा लेंगे। ग्लोबल मैरीटाइम सीईओ फोरम में वैश्विक समुद्री कंपनियों के सीईओ, निवेशक, नीति-निर्माता और नवप्रवर्तक एक मंच पर जुटेंगे। यह फोरम सतत समुद्री विकास, हरित नौवहन, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और समावेशी ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित रहेगा। प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर और मजबूती प्रदान करेगी, जो भारत को विश्व की अग्रणी समुद्री शक्तियों में स्थापित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 चार रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है: बंदरगाह-आधारित विकास, नौवहन और जहाज निर्माण, निर्बाध रसद और समुद्री कौशल निर्माण। यह विजन भारत को 2047 तक वैश्विक समुद्री व्यापार का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखता है। आईएमडब्ल्यू 2025 इस दृष्टिकोण को लागू करने का प्रमुख मंच है, जो नौवहन, बंदरगाहों, जहाज निर्माण, क्रूज पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी के वित्तपोषण से जुड़े हितधारकों को जोड़ता है। आयोजन में भारत की समुद्री क्षमताओं, जैसे विश्वस्तरीय बंदरगाह, पर्यावरण-अनुकूल जहाज निर्माण और डिजिटल रसद समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की समुद्री नीति को वैश्विक मंच पर रेखांकित करेगा। हाल ही में मुंबई में 55,969 करोड़ रुपए के 15 समझौता एएमयू पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें अदाणी पोर्ट्स, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर और गोवा शिपयार्ड जैसी कंपनियां शामिल थीं। ये समझौते बंदरगाह विकास, जहाज निर्माण और हरित नौवहन में निवेश को बढ़ावा देंगे।

डोनाल्ड ट्रंप को मिला बड़ा समर्थन, जापान की पीएम ने दिया नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन

जापान  जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगले साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया है. उन्होंने यह जानकारी ट्रंप को टोक्यो में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान दी, जहां दोनों नेताओं ने अमेरिका-जापान गठबंधन को 'Golden Age' घोषित करने वाले दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, ताकाइची ने ट्रंप को निजी तौर पर बताया कि उन्होंने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया है और औपचारिक कागजात भी सौंपे. यह कदम ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक और व्यक्तिगत उपलब्धि मानी जा रही है. क्या है जापान- US का ‘Golden Age’ समझौता  ट्रंप और ताकाइची की इस बैठक में दोनों देशों ने नए दौर के सहयोग की घोषणा की है. साथ ही जुलाई में हुई ट्रेड डील की पुष्टि की गई, जिसके तहत जापानी वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ 15% कर दिए गए हैं. साथ ही रेयर-अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया गया. इसे चीन के निर्यात प्रतिबंधों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. गाज़ा संघर्षविराम के लिए सराहना ताकाइची ने अपने सार्वजनिक संबोधन में ट्रंप की इज़राइल-हमास संघर्षविराम में भूमिका की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, 'बहुत कम समय में दुनिया ने जमीन पर अधिक शांति देखी है. मैं आपके शांति और स्थिरता के प्रति समर्पण को अत्यधिक महत्व देती हूं.' जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री ताकाइची ने घोषणा की कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ (2026) पर जापान की ओर से 250 चेरी ब्लॉसम के पेड़ और 4 जुलाई के आतिशबाज़ी समारोह का उपहार दिया जाएगा. ट्रंप ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा कि दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने ताकाइची को हमेशा अपना सबसे विश्वसनीय सहयोगी बताया था. कई देश कर चुके हैं ट्रंप को नॉमिनेट  बताते चलें कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की यह अकेली पहल नहीं है. इससे पहले कंबोडिया के पीएम हुन मानेत ने थाईलैंड के साथ सीमा युद्ध खत्म कराने के लिए उन्हें नामांकित किया. पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ ने गाज़ा और भारत-पाक संघर्ष विराम के लिए नामांकन की घोषणा की थी. वहीं आर्मेनिया और अज़रबैजान के नेताओं ने भी अपने साझा पत्र में ट्रंप को शांति प्रयासों के लिए सिफारिश की. इज़रायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया. इसके अलावा रवांडा और अफ्रीकी देशों के नेताओं ने भी क्षेत्रीय संघर्षों के समाधान में ट्रंप की भूमिका का समर्थन किया. शांति मेरा शौक नहीं, जुनून है- ट्रंप इससे पहले ट्रंप ने सोमवार को कहा, 'मैं नहीं कहूंगा कि यह मेरा शौक है, क्योंकि यह उससे कहीं गंभीर है. लेकिन यह वो काम है जो मुझे अच्छा लगता है और मैं इसमें माहिर हूं.' उन्होंने कहा कि अब उनका ध्यान रूस-यूक्रेन युद्ध और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा विवाद सुलझाने पर है. ट्रंप का दावा है कि उन्होंने इस साल 8 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शांति स्थापित करने में भूमिका निभाई है. कौन देता है नोबेल पुरस्कार गौरतलब है कि नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की संसद द्वारा नियुक्त पांच सदस्यीय समिति देती है. पुरस्कार हर साल अक्टूबर में घोषित होता है और यह पिछले कैलेंडर वर्ष के योगदान पर आधारित होता है. इस साल यह पुरस्कार वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचादो को दिया गया, जिन्होंने अपनी जीत को ट्रंप के शांति प्रयासों को समर्पित बताया.