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क्या भारत में वर्जिनिटी टेस्ट करवाना है कानूनी? कानून से जानें सच

नई दिल्ली हाल ही में मुरादाबाद के पाकबड़ा इलाके से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. दरअसल चंडीगढ़ की एक छात्रा से कथित तौर पर पाकबड़ा के एक मदरसे में वर्जिनिटी सर्टिफिकेट मांगा गया. जब उसने ऐसी मेडिकल जांच कराने से मना कर दिया तो उसका नाम रजिस्टर से हटा दिया गया और साथ ही कथित तौर पर उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी दे दिया गया. छात्रा के पिता की शिकायत पर जांच शुरू हो चुकी है लेकिन इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में किसी भी लड़की का वर्जिनिटी टेस्ट करवाया जा सकता है? आइए जानते हैं. क्या हैं वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर कानून  भारत में वर्जिनिटी टेस्ट करवाना या फिर उसकी मांग करना गैरकानूनी, असंवैधानिक और अमानवीय है. पिछले कुछ सालों में सर्वोच्च न्यायालय से लेकर अलग-अलग उच्च न्यायालयों तक कई अदालती फैसलों ने इस बात को साफ किया है कि ऐसी प्रथाएं महिलाओं की गरिमा और मौलिक अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन करती हैं. अदालतों ने वर्जिनिटी टेस्ट को गैरकानूनी घोषित किया दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2023 और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2025 में यह स्पष्ट रूप से कहा था कि वर्जिनिटी टेस्ट असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और महिलाओं के लिए अपमानजनक है. इन फैसलों में इस बात पर भी जोर दिया गया था कि सभ्य समाज में इस प्रथा का कोई भी स्थान नहीं है और यह लैंगिक समानता और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के खिलाफ है.  संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन  वर्जिनिटी टेस्ट को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन माना जाता है. यह जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है जिसमें सम्मान और निजता के साथ जीने का पूरा अधिकार भी शामिल है. किसी भी महिला को इस तरह के टेस्ट के अधीन करने से उसके दोनों अधिकार छीन जाते हैं.  सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय  इतना ही नहीं बल्कि 2013 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के मामले में इस्तेमाल किए जाने वाले टू फिंगर टेस्ट पर भी प्रतिबंध लगा दिया था. यह टेस्ट वैज्ञानिक रूप से निराधार है और पीड़िता के निजता और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन करता है. मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रभाव  किसी भी महिला पर वर्जिनिटी टेस्ट के लिए दबाव डालने से गहरा मनोवैज्ञानिक आघात हो सकता है. पीड़ितों को शर्म, अपमान, चिंता और डिप्रेशन का अनुभव होता है और साथ ही लंबे समय तक सदमा भी बना रहता है. चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस बात पर जोर देते हैं की वर्जिनिटी का निर्धारण करने का कोई भी वैज्ञानिक तरीका नहीं है. इसी के साथ कानून के तहत ऐसी प्रथाओं के लिए यौन उत्पीड़न, हमले और निजता के उल्लंघन से संबंधित प्रावधानों के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है.

158,000 लोग घटे पोलैंड की आबादी, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं गंभीर आर्थिक और सामाजिक प्रभावों की

वारसा कल्पना कीजिए, एक ऐसा देश जहां हर साल लाखों लोग कम हो रहे हों। जहां बच्चे पैदा होने की संख्या मौतों से कहीं कम हो। जहां युवा नौकरी और बेहतर जिंदगी की तलाश में दूसरे देश चले जाते हों। यही हकीकत है यूरोपीय देश पोलैंड की। हाल ही में पोलैंड के सरकारी सांख्यिकी कार्यालय (GUS) ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है। इसके मुताबिक, पिछले एक साल में देश की आबादी 1,58,000 लोगों से घटकर अब लगभग 37.38 मिलियन रह गई है। यह गिरावट न सिर्फ आंकड़ों की बात है, बल्कि एक पूरे समाज की चिंता का विषय है। घटती आबादी का मतलब क्या है? सबसे पहले, आबादी घटने का मतलब समझिए। जनसंख्या को मापने का सीधा फॉर्मूला है। आबादी = जन्म + अप्रवासन (नए लोग आना) – मौतें – प्रवासन (लोगों का जाना)। पोलैंड में जन्म कम हो रहे हैं, मौतें ज्यादा, युवा बाहर जा रहे हैं, और नए लोग उतने नहीं आ रहे जितने चाहिए। GUS की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश की जनसंख्या में पिछले एक साल में 1,58,000 की कमी आई है, जो एक गहराते डेमोग्राफिक संकट की ओर इशारा करती है। सितंबर 2025 के अंत तक पोलैंड की जनसंख्या 37.38 मिलियन थी, जो पिछले साल की तुलना में 1,58,000 और 2024 के अंत की तुलना में लगभग 1,13,000 कम है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 की पहली तीन तिमाहियों में जनसंख्या में 0.30% की कमी आई, यानी हर 10,000 निवासियों पर देश ने 30 लोगों को खोया, जो पिछले साल के 27 प्रति 10,000 की तुलना में अधिक है। यह गिरावट कम जन्म दर और अन्य कारकों के कारण लंबे समय से चली आ रही जनसंख्या घटने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। जन्म दर में कमी, ऐतिहासिक निचले स्तर पर रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच लगभग 1,81,000 बच्चों के जन्म दर्ज किए गए, जो 2024 की समान अवधि की तुलना में लगभग 11,000 कम है। इस दौरान जन्म दर 6.5% तक गिर गई, जो पिछले साल की तुलना में 0.3 प्रतिशत अंक कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा पोलैंड के इतिहास में जन्म दर के सबसे निचले स्तरों में से एक है। कम प्रजनन दर, यूरोप में सबसे निचला स्तर पिछले साल पोलैंड की कुल प्रजनन दर (TFR), यानी एक महिला द्वारा अपने जीवनकाल में औसतन जन्म दिए गए बच्चों की संख्या, 1.11 तक गिर गई, जो यूरोपीय संघ में सबसे कम और विकसित देशों में भी सबसे निचले स्तरों में से एक है। पोलैंड में महिलाएं औसतन 1.11 बच्चे पैदा कर रही हैं। जबकि जनसंख्या स्थिर रखने के लिए कम से कम 2.1 बच्चे चाहिए। क्यों? क्योंकि युवा लोग शादी टाल रहे हैं, बच्चे पैदा करने से डर रहे हैं। महंगाई, नौकरी की असुरक्षा, और महामारी ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। 2024 में पहली बार मां बनने की औसत उम्र 29.1 साल हो गई जो 1990 में यह 22.7 थी। बच्चे पैदा करने लायक उम्र की महिलाएं खुद कम हो रही हैं, क्योंकि 30 साल पहले जन्म कम हुए थे। यह आंकड़ा पोलैंड के सामने खड़े जनसांख्यिकीय संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जनसंख्या 1989 में पोलैंड की जनसंख्या 4 करोड़ थी, लेकिन तब से यह लगातार कम हो रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कम जन्म दर, बढ़ती उम्र की आबादी और प्रवास जैसे कारक इस गिरावट को और तेज कर रहे हैं। GUS की रिपोर्ट ने इन आंकड़ों को "चिंताजनक" करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो देश को सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक और सामाजिक प्रभाव अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जनसंख्या में यह गिरावट श्रम बाजार, पेंशन प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा सकती है। कम जन्म दर और उम्रदराज आबादी के कारण कार्यबल में कमी आ रही है, जो भविष्य में आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतियां लागू की हैं, लेकिन इनका प्रभाव अभी तक सीमित रहा है।

कुरनूल के बाद तेलंगाना में भी बस पलटी, 20 लोग हुए घायल — यात्रियों में मचा हड़कंप

नई दिल्ली आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में एक लग्जरी बस में आग लगने से 20 लोगों की मौत के एक दिन बाद, शनिवार को हैदराबाद से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जाते समय एक प्राइवेट बस पलट गई। बस में सवार सभी 20 लोग घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया। एक वीडियो में तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में पेड्डा अंबरपेट म्युनिसिपैलिटी के पास आउटर रिंग रोड (ओआरआर) पर बस को दाहिनी ओर पलटा हुआ देखा जा सकता है और बचाव दल उसे घेरे हुए हैं। जिस रेलिंग पर बस टकराई थी वह गिर गई, जिससे पता चलता है कि हादसा कितना भयानक था।   तुरंत शुरू हुआ बचाव अभियान पुलिस, ओआरआर रखरखाव कर्मचारी और स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर बचाव अभियान शुरू किया। इससे पहले शुक्रवार को हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक बस में आग लग गई थी, जिसमें 43 लोग सवार थे। कुरनूल बस हादसे को लेकर पुलिस ने क्या कहा? कुरनूल के पुलिस अधीक्षक विक्रांत पाटिल ने कहा, "सुबह करीब 3 बजे हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक बस ने एक टू-व्हीलर को टक्कर मार दी, जो बस के नीचे फंस गया। शायद इसी वजह से चिंगारी निकली जिससे आग लग गई।"  

दुनिया के सबसे बड़े ड्रग रैकेट के पीछे थीं महारानी विक्टोरिया की शराब की आदत

नई दिल्ली अगर आप 150 साल पहले जाएंगे तो पाएंगे कि दुनिया के सबसे बड़े ड्रग साम्राज्यों में से एक के केंद्र में कोई कार्टेल या दक्षिण अमेरिका का कोई गली-मोहल्ला नहीं में बैठा युवक नहीं बल्कि एक रानी थी। लेखक सैम केली के अनुसार, महारानी विक्टोरिया इतने विशाल ड्रग साम्राज्य की मालकिन थीं कि "एस्कोबार और एल चापो निचले दर्जे के गली-मोहल्ले के डीलर लगते थे।" अपनी पुस्तक, 'ह्यूमन हिस्ट्री ऑन ड्रग्स: एन अटरली स्कैंडलस बट एंटायरली ट्रुथफुल लुक एट हिस्ट्री अंडर द इन्फ्लुएंस' में, केली कहते हैं कि 19वीं सदी की ब्रिटिश महारानी ने इतिहास के सबसे बड़े नशीले पदार्थों के कारोबार में से एक को प्रभावी ढंग से चलाया, जिसे ब्रिटिश साम्राज्य की पूरी शक्ति का समर्थन प्राप्त था। साम्राज्य के ड्रग व्यापार से होने वाली आय इतनी अधिक थी कि वह "पूरे देश को फंड कर रही थी।" महारानी विक्टोरिया नशे की बहुत बड़ी शौकीन थीं- केली केली कहते हैं कि महारानी विक्टोरिया खुद "नशे की बहुत बड़ी शौकीन" थीं। महारानी नियमित रूप से कई तरह की दवाइयां लेती थीं, जिनमें उनकी पसंदीदा अफीम भी शामिल थी, जिसे वह अफीम और शराब के मिश्रण, लॉडेनम के रूप में पीती थीं। केली लिखती हैं, "महारानी विक्टोरिया हर सुबह लॉडेनम का एक बड़ा घूंट पीती थीं।" उन्हें कोकीन का भी शौक था, जो उस समय वैध था। इससे उन्हें जबरदस्त आत्मविश्वास मिलता था। उनके डॉक्टर मासिक धर्म की तकलीफों को कम करने के लिए भांग लेने की सलाह देते थे, जबकि प्रसव के दौरान क्लोरोफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था। महारानी विक्टोरिया ने दुनियाभर में चलाया अफीम का व्यापार लेकिन विक्टोरिया का नशा केवल व्यक्तिगत भोग-विलास तक ही सीमित नहीं था; यह महाद्वीपों तक फैला हुआ था। 1837 में राजगद्दी पर बैठने के बाद, उन्हें केली के अनुसार बड़ी समस्याएं विरासत में मिली, जो ब्रिटेन की चीनी चाय पर निर्भरता थी। चाय के आयात से ब्रिटिश चांदी का भंडार खत्म हो रहा था, इसलिए साम्राज्य ने व्यापार प्रवाह को उलटने के लिए एक वस्तु की तलाश की। इसका जवाब अफीम था, जिसकी खेती ब्रिटिश-नियंत्रित भारत में की जाती थी और जिसे चीन को भारी मात्रा में बेचा जाता था। अफीम के व्यापार ने ब्रिटेन को मालामाल किया इस नशे की लत वाली दवा की मांग ने रातोंरात व्यापार का रुख बदल दिया। केली लिखते हैं, "चीन को चाय पर खर्च की गई सारी चांदी, और उससे भी कहीं ज्यादा लौटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब ब्रिटेन नहीं, बल्कि चीन, विनाशकारी व्यापार घाटे में डूब रहा था।" जल्द ही, अफीम की बिक्री ब्रिटिश साम्राज्य के वार्षिक राजस्व का 15% से 20% हो गई। चीन के साथ हुआ पहला अफीम युद्ध चीन के शीर्ष अधिकारी, लिन जेक्सू ने अफीम के व्यापार को रोकने की कोशिश की और महारानी विक्टोरिया से चाय और रेशम के बदले ब्रिटेन द्वारा "जहरीली दवाओं" के निर्यात को बंद करने का आग्रह किया। महारानी ने उनकी बात अनसुनी कर दी। 1839 में, लिन ने दक्षिण चीन सागर में 25 लाख पाउंड ब्रिटिश अफीम जब्त करके नष्ट कर दी, जिससे विक्टोरिया को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बाद पहला अफीम युद्ध हुआ, जो चीन की हार और एक संधि के साथ समाप्त हुआ जिसके तहत हांगकांग को सौंप दिया गया, नए बंदरगाह खोले गए और ब्रिटिश नागरिकों को चीनी कानून से छूट दी गई। केली कहते हैं, महारानी ने दुनिया को दिखा दिया था कि "चीन को हराया जा सकता है और वह भी काफी आसानी से।" महारानी विक्टोरिया के लिए, यह साम्राज्य और मुनाफे की जीत थी। विक्टोरिया ने कोकीन निर्यात से किया इनकार और फिर भी, उनके व्यापार की एक सीमा थी। कोकीन को एक सुरक्षित, स्वास्थ्यवर्धक ऊर्जावर्धक मानते हुए, विक्टोरिया ने इसे चीन को निर्यात करने से इनकार कर दिया। केली लिखती हैं, "वह उन्हें दुनिया भर की अफीम बेचने के लिए तैयार थी, लेकिन बेहतर होगा कि वे उसकी कोकीन को हाथ भी न लगाएं।"  

मैथिली ठाकुर की सभा में पाग विवाद, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक रूप से मांगी माफी

दरभंगा केंद्रीय मंत्री एवं बिहार भाजपा के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने अलीनगर के पाग विवाद को पार्टी की ओर से दरभंगा एवं मिथिलांचल के समाज से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि उनकी नादानी और नासमझी के लिए माफी मांगता हूं, मिथिला के पाग का सबको सम्मान करना है। बता दें कि अलीनगर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी मैथिली ठाकुर के चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश की विधायक और स्टार प्रचारक केतकी सिंह ने मिथिलांचल के गौरव के प्रतीक 'पाग' को फेंक कर कहा था, " मिथिला का गौरव पाग नहीं, मैथिली ठाकुर है"। केतकी सिंह पाग को हाथ में लिए कहते नजर आ रही हैं कि यह क्या है? मौके पर मौजूद भीड़ से आवाज आती है कि "पाग मिथिला का सम्मान है।" इतने में ही वह बोलतीं हैं, "नहीं मिथिला का सम्मान पाग नहीं है, मैथिली ठाकुर ही मिथिला का सम्मान है।" उनके इस व्यवहार पर विद्यापति सेवा संस्थान ने भी आपत्ति जताई थी और विधायक के खिलाफ कठोर अनुशासनिक कार्रवाई करने एवं सार्वजनिक रूप से मिथिलावासियों से क्षमा याचना की मांग की थी। विधायक ने मानी थी गलती इंटरनेट मीडिया पर जोरदार विरोध होने के बाद केतकी सिंह ने खेद प्रकट किया। सिंह ने कहा कि पाग को विश्व भर में लोग सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। इसके अपमान की बात सपने में भी नहीं सोच सकती हूं। उन्होंने कहा कि इस देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसको सबसे ऊपर रखा है, मेरी क्या औकात है जो इसका अपमान करे। मेरी धारणा बत इतनी थी घर की बेटी को भी पगड़ी ही कहा जाता है। बेटी समाज की पग है। मैंने मां सीता से पाग को जोड़ा और कहा कि इस पाग का जितना सम्मान होता है, उतना ही सम्मान मैथिली का होना चाहिए। मैथिली ठाकुर का भी वीडियो हुआ था वायरल भाजपा प्रत्याशी व लोक गायिका मैथिली ठाकुर का एक वीडियो प्रसारित हो रहा है, जिसे मिथिला के मान सम्मान के साथ खिलवाड़ से जोड़कर पेश किया गया। इस वीडियो में मैथिली ठाकुर पाग में मखाना रख उसे खा रहीं हैं। हालांकि स्वयं मैथिली ठाकुर ने ऐसी प्रसारित वीडियो का खंडन करते हुए कहा कि जहां भी जाती हैं, वहां लोग पाग पहनाकर सम्मान करते हैं। प्रेम जताते हैं। इसी क्रम में बुधवार की रात्रि 12 बजे घनश्यामपुर गांव में महिलाओं ने उन्हें मखाना भेंट दिया था। उन्हीं लोगों ने प्यार से उन्हें मखाना भी खिलाया था। जिसे गलत ढंग से प्रचारित किया जा रहा है। राजद नेताओं ने थामा भाजपा का दामन  वे शनिवार को दिल्ली मोड स्थित एक होटल में मीडिया से मुखातिब थे। मौके पर वीआइपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बद्री कुमार पूर्वे और राजद के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कुमार गौरव समेत कई नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रधान ने कहा कि इनके आने से एनडीए भारी बहुमत से जीत हासिल करेगी। इसके अलावा उन्होंने कहा, "बिहार के एक ही जननायक हैं भारत रत्न कर्पुरी ठाकुर जी हैं। उनको कोई कॉपी करने की नाकाम कोशिश करेगा तो जनता उसको स्वीकार नहीं करेगी।" बता दें कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी को 'जननायक'' कहा गया था।  

भारत के कदम से घबराया पाकिस्तान, आर्मी चीफ मुनीर ने छेड़ा NOTAM का खेल

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक अपनी तीनों सेनाओं भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास “एक्स त्रिशूल” के लिए नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी किया है। जियो-इंटेलिजेंस विशेषज्ञों के अनुसार, सर क्रीक और पश्चिमी सीमा के पास यह अभ्यास असामान्य पैमाने और क्षेत्र में किया जाएगा। भारत की योजना में हवाई क्षेत्र का आरक्षण 28,000 फीट तक रहेगा। इस अभ्यास के दौरान दक्षिणी कमान की सेनाएं आक्रामक अभियानों, सौराष्ट्र तट पर उभयचर अभ्यास, इंटेलिजेंस, सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और साइबर ऑपरेशंस जैसी मल्टी-डोमेन युद्धक गतिविधियों में भाग लेंगी।   भारत द्वारा NOTAM जारी करने के तुरंत बाद पाकिस्तान ने भी अपने मध्य और दक्षिणी हवाई क्षेत्र में कई एयर रूट्स को प्रतिबंधित कर दिया। जियो-इंटेलिजेंस विश्लेषक डेमियन साइमन के अनुसार, यह पाकिस्तान की प्रतिक्रिया है और वह संभावित सैन्य अभ्यास या हथियार परीक्षण की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत सीमा पार किसी भी आतंकवादी गतिविधि का जवाब "सटीक और निर्णायक कार्रवाई" के साथ देगा।   मई में हुए इस अभियान में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे पर सटीक हवाई हमले किए, जिनमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों द्वारा लगभग एक ही समय में सैन्य अभ्यास की घोषणा क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती है। एक्स त्रिशूल अभ्यास भारत की बढ़ती संयुक्त युद्धक क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

सांस लेना हुआ मुश्किल: प्रदूषण से मौतों का आंकड़ा चौंकाने वाला, नई रिपोर्ट में बड़े खुलासे

नई दिल्ली अगर आपको भी लग रहा है कि एयर क्वालिटी खराब हो रही है और प्रदूषण से होने वाली मौंते ज्यादा हो रही हैं, तो ऐसा महसूस करने वाले आप अकेले नहीं हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों की कुल संख्या, जो मुख्य रूप से जनसंख्या वृद्धि, वृद्धावस्था और लगातार प्रदूषण के कारण बहुत ज्यादा बनी हुई है। और कुछ विश्लेषणों में तो और भी बढ़ गई है। नई "स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025" रिपोर्ट ताजा वैश्विक आंकड़ों को दिखाती है बताती है कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में लाखों अकाल मौतों का कारण बन रहा है। जानलेवा साबित हो रहा वायु प्रदूषण स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 ताजा PM2.5 और ओजोन एक्सपोजर आंकड़ों और डिजीज बर्डन मॉडल का इस्तेमाल करके एयर क्वालिटी और स्वास्थ्य परिणामों की जांच करता है। इसका शीर्षक है: वायु प्रदूषण दुनिया भर में सबसे बड़े जानलेवा कारकों में से एक बना हुआ है, और इनमें से लगभग दस में से नौ मौतें गैर-संचारी रोगों जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक, पुरानी फेफड़ों की बीमारी और फेफड़ों के कैंसर से होती हैं। संक्षेप में, वायु प्रदूषण अब केवल "फेफड़ों की समस्या" नहीं रह गया है; यह अब मुख्य रूप से दिल के दौरे, स्ट्रोक और पुरानी हृदय रोगों को बढ़ावा देता है। वायु प्रदूषण कैसे बनता है मौत का कारण? वायु प्रदूषण PM2.5, ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि नामक सूक्ष्म कणों का एक जटिल मिश्रण है, लेकिन सबसे घातक घटक सूक्ष्म कणिकीय पदार्थ (PM2.5) है।      सूक्ष्म कण फेफड़ों में प्रवेश करते हैं- PM2.5 इतना सूक्ष्म होता है कि यह फेफड़ों की गहरी वायुकोशियों तक पहुंच जाता है। इससे फेफड़ों के ऊतकों में जलन होती है और सूजन हो जाती है।     सूजन बढ़ती जाती है- सूजे हुए फेफड़ों से संकेत रक्तप्रवाह में पहुंचते हैं, जिससे पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जिससे धमनी पट्टिकाएं अस्थिर हो जाती हैं। इससे दिल का दौरा और स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।     रक्त और वाहिकाओं पर सीधा प्रभाव- प्रदूषक खून के थक्के जमने के तरीके को बदल सकते हैं और रक्त वाहिकाओं के कार्य को कम कर सकते हैं, जिससे घातक हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।     दीर्घकालिक क्षति- लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोग जैसी दीर्घकालिक बीमारियां बढ़ जाती हैं, जो समय से पहले मृत्यु का कारण बनती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और लॉन्गटर्म स्टडी के अनुसार, प्रदूषण से संबंधित अधिकांश मौतें इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण होती हैं, इसके बाद COPD, निचले श्वसन संक्रमण और फेफड़ों का कैंसर होता है। वायु प्रदूषण से मृत्यु के जोखिम को कम करने के प्रोटोकॉल इसमें बड़ी कमी लाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा, यातायात नियंत्रण और औद्योगिक नियमों जैसी नीतिगत कार्रवाई की आवश्यकता है। लेकिन व्यक्ति और परिवार, जोखिम को कम करने के लिए अभी से व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं।     स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन या कुशल चूल्हे का उपयोग करें; रसोई को हवादार रखें; घर के अंदर कचरा जलाने से बचें। घरेलू प्रदूषण अभी भी कई अकाल मौतों का कारण बनता है, खासकर बच्चों में।     दोबारा इस्तेमाल होने वाला मास्क या प्यूरीफायर का उपयोग करने वाले परिवार प्रमाणित उपकरण चुनें और उनका उचित रखरखाव करें।     जब AQI अधिक हो, तो बाहर काम कम करें, खासकर यदि आप वृद्ध हैं या आपको हृदय/फेफड़ों की बीमारी है। व्यायाम स्वास्थ्यवर्धक है, लेकिन बहुत प्रदूषित हवा में नहीं।     बहुत प्रदूषित स्थानों में N95/FFP2 जैसे उपयुक्त मास्क का उपयोग करें क्योंकि सही तरीके से लगाए जाने पर ये साँस के द्वारा अंदर जाने वाले PM2.5 को कम करते हैं।     यदि आप उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्र में रहते हैं, तो HEPA फिल्टर वाले इनडोर एयर क्लीनर पर विचार करें क्योंकि ये इनडोर PM2.5 को कम करते हैं और संवेदनशील लोगों की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।     बुजुर्गों और हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करना चाहिए और अपनी दवाइयां नियमित रखनी चाहिए और सीने में दर्द, अचानक सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर की सहायता लेनी चाहिए। 2025 की ग्लोबल एयर कंडीशन और अन्य ग्लेबल एनालिसिस एक बात स्पष्ट करते हैं कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में सबसे बड़े जानलेवा कारकों में से एक बना हुआ है, और हालांकि दुनिया के कुछ हिस्सों में प्रगति हो रही है, फिर भी कुल बोझ बहुत बड़ा है क्योंकि इसका प्रभाव अभी भी व्यापक है और आबादी बूढ़ी हो रही है। घरेलू और व्यक्तिगत उपायों के साथ नीतिगत कार्रवाई ही कम मौतों का रास्ता है।  

रूस का आक्रमण जारी: ताबड़तोड़ मिसाइल हमले, यूक्रेन में भयावह नुकसान

यूक्रेन  यूक्रेन में बीती रात रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 17 अन्य लोग घायल हो गए। कीव के नगर सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको ने बताया कि राजधानी कीव में शनिवार तड़के बैलिस्टिक मिसाइल हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दस अन्य घायल हो गए। यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा के अनुसार तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आपातकालीन सेवा ने ‘टेलीग्राम’ पर लिखा कि एक स्थान पर एक गैर-आवासीय इमारत में आग लग गई, जबकि दूसरे स्थान पर मिसाइलों का मलबा खुले क्षेत्र में गिर गया, जिससे आस-पास की इमारतों की खिड़कियों को नुकसान पहुंचा। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने हमले के दौरान टेलीग्राम पर लिखा, "राजधानी में विस्फोट। शहर बैलिस्टिक हमले की चपेट में है।" द्निप्रोपेट्रोव्स्क क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर व्लादिस्लाव हैवानेंको ने बताया कि क्षेत्र में रूसी हमलों में दो लोग मारे गए और सात घायल हो गए। इससे पहले रूस ने दावा किया था कि उसने शुक्रवार रात में 121 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। मंत्रालय ने कहा, "पिछली रात, ड्यूटी पर तैनात वायु रक्षा प्रणालियों ने 121 यूक्रेनी मनावरहित विमानों को आसमान में रोका और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया।" मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन कई क्षेत्रों में मार गिराए गए। जिसमें रोस्तोव में 20, वोल्गोग्राड में 19, ब्रांस्क में 17, कलुगा में 12, स्मोलेंस्क में 11, बेलगोरोड और मॉस्को में नौ-नौ, वोरोनिश और लेनिनग्राद में आठ-आठ, नोवगोरोड, रियाज़ान और तांबोव में दो-दो, और त्वेर और तुला में एक-एक ड्रोन को हवा में मार गिरया। इस बीच, विदेशी देशों के साथ आर्थिक सहयोग के लिए रूसी राष्ट्रपति के विशेष दूत और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के प्रमुख किरिल दिमित्रिव ने कहा कि रूसी और अमेरिकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच शिखर सम्मेलन होगा, लेकिन अभी नहीं वह बाद में होगा।

भारत की सराहना करते हुए नोबेल विजेता मारिया मचाडो ने PM मोदी से की बड़ी मांग

नई दिल्ली 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए 20 साल से संघर्ष कर रहीं मारिया कोरिना मचाडो ने भारत को महान लोकतंत्र और दुनिया के लिए आदर्श बताया है. एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में मचाडो ने कहा कि भारत वेनेजुएला का महत्वपूर्ण साथी बन सकता है और दोनों देश लोकतंत्र के बहाली के बाद कई क्षेत्रों में साथ काम कर सकते हैं. मचाडो ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी से बात करना चाहती हूं और उन्हें स्वतंत्र वेनेजुएला में जल्दी आमंत्रित करना चाहती हूं.” उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक भूमिका की भी तारीफ की और कहा कि लोकतंत्र को मजबूत रखना बहुत जरूरी है. मचाडो ने महात्मा गांधी की अहिंसात्मक लड़ाई से प्रेरणा लेने की बात कही. उन्होंने कहा, “शांति रखना कमजोरी नहीं है, गांधी ने पूरी दुनिया को यह दिखाया.” वेनेजुएला के 2024 राष्ट्रपति चुनाव पर क्या कहा? उन्होंने वेनेजुएला के 2024 राष्ट्रपति चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, लेकिन निकोलस मादुरो सरकार ने चुनाव रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने मादुरो को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता छोड़ने का प्रस्ताव दिया, लेकिन मादुरो ने इनकार कर दिया और देश में सख्त दमन शुरू कर दिया. मचाडो ने जताई ये उम्मीद मचाडो ने कहा कि यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लोकतंत्र बहाली में उनके मुख्य सहयोगियों में से हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समर्थन के चलते मादुरो समझेंगे कि अब उनका समय खत्म हो गया है और उन्हें शांति से सत्ता छोड़नी होगी. मचाडो ने भारत से कहा कि वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल होने के बाद भारत की कंपनियां ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार में निवेश कर सकती हैं. भारत और वेनेजुएला के संबंधों के लिए अवसर मचाडो ने भारत को भी लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए अपनी आवाज उठाने वाले देशों में शामिल होने का आमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बहाल होने के बाद भारत की कंपनियां ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार के क्षेत्रों में निवेश कर सकती हैं. मचाडो ने यह भी कहा कि भारत की लोकतांत्रिक ताकत और अनुभव वेनेजुएला के लोकतंत्र के पुनर्निर्माण में मार्गदर्शन कर सकता है.  मचाडो ने अंत में यह संदेश दिया कि लोकतंत्र को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए और भारत जैसे बड़े लोकतंत्र की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है, क्योंकि पूरी दुनिया ऐसे उदाहरण से सीखती है.

भीड़ से डर नहीं, सरकार से सवाल है! 12 हजार स्पेशल ट्रेनें गायब, छत और दरवाजों पर लोग

नई दिल्ली  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने त्योहारों के मौसम में कई रेलगाड़ियों में यात्रियों की भीड़ होने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। शनिवार को उन्होंने आरोप लगाया कि फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले साबित हुए हैं। यह सवाल भी किया कि 12,000 स्पेशल ट्रेनें कहां हैं? रेल मंत्रालय ने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2025 तक निर्धारित 12,011 रेल यात्राओं की सूची पिछले दिनों जारी की थी। इसमें बताया गया कि त्योहारों के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए देश के विभिन्न स्थानों से प्रतिदिन औसतन 196 विशेष रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं। अब तक एक दिन में संचालित विशेष रेलगाड़ियों की सबसे अधिक संख्या 18 अक्टूबर को लगभग 280 थी, जबकि सबसे कम 8 अक्टूबर को लगभग 166 थी। राहुल गांधी ने कुछ रेलगाड़ियों में यात्रियों की भीड़ से जुड़े वीडियो साझा करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, 'त्योहारों का महीना है – दिवाली, भाईदूज, छठ। बिहार में इन त्यौहारों का मतलब सिर्फ आस्था नहीं, घर लौटने की लालसा है – मिट्टी की खुशबू, परिवार का स्नेह, गांव का अपनापन। लेकिन यह लालसा अब एक संघर्ष बन चुकी है।' राहुल गांधी ने कहा कि बिहार जाने वाली ट्रेनें ठसाठस भरी हैं। टिकट मिलना असंभव है और सफर अमानवीय हो गया है। कई ट्रेनों में क्षमता से 200 प्रतिशत तक यात्री सवार हैं। लोग दरवाजों और छतों तक लटके हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले हैं। राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस नेता गांधी ने सवाल किया, 'कहां हैं 12,000 स्पेशल ट्रेनें? क्यों हालात हर साल और बदतर ही होते जाते हैं। क्यों बिहार के लोग हर साल ऐसे अपमानजनक हालात में घर लौटने को मजबूर हैं?' राहुल गांधी ने कहा कि अगर राज्य में रोजगार और सम्मानजनक जीवन मिलता, तो उन्हें हजारों किलोमीटर दूर भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि ये सिर्फ मजबूर यात्री नहीं, राजग की धोखेबाज नीतियों और नियत का जीता-जागता सबूत हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा सुरक्षित और सम्मानजनक हो यह अधिकार है, कोई एहसान नहीं।