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सोनिया और प्रियंका गांधी शिमला में, रजनी पाटिल ने केंद्र सरकार को घेरा – जानें पूरा मामला

हिमाचल  रोहतांग दर्रा पर चारों ओर बिछी बर्फ की सफेद चादर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आधुनिक हिमाचल के निर्माता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शिमला पहुंच गई हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सैंटर व किंडर गार्डन, नर्सरी व बालवाड़ी के लिए एडवाइजरी जारी की है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने आराेप लगाया कि केंद्र सरकार ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून काे कमजोर करने का काम किया है। पुलिस जिला नूरपुर द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। इंदौरा के डमटाल में राष्ट्रीय राजमार्ग पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जम्मू से राजस्थान जा रहे एक सीमैंट से भरे टैंकर के कैबिन में अचानक आग लग गई। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियाें में कुछ गैर-जिम्मेदार पर्यटक हुड़दंगबाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। थाना बरोटीवाला के बटेढ़ गांव में 14 वर्षीय बच्चे की अलमारी के नीचे दबने से मौत हो गई।   साेमवार काे हाेगा स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण, सोनिया और प्रियंका गांधी पहुंचीं शिमला आधुनिक हिमाचल के निर्माता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शिमला पहुंच गई हैं। सोमवार को सुबह 10 बजे ऐतिहासिक रिज मैदान के दौलत पार्क में स्थापित वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का सोनिया गांधी द्वारा अनावरण किया जाएगा   क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सैंटर व नर्सरी स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी, इन नियमाें का करना हाेगा पालन महिला एवं बाल विकास विभाग ने क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सैंटर व किंडर गार्डन, नर्सरी व बालवाड़ी के लिए एडवाइजरी जारी की है। ऐसे में इन सैंटर को उक्त नियमों के तहत ही सैंटर संचालित करने होंगे। सैंटर में तीन से छह वर्ष के बच्चों की क्लास में 20 छात्र और तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों की क्लास में 10 से ज्यादा छात्र इनरोल होंगे।  केंद्र सरकार ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून काे कमजोर करने का काम किया है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने रविवार को पार्टी मुख्यालय राजीव भवन शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डाॅ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में 12 अक्तूबर 2005 को देश के नागरिकों को आरटीआई की सौगात दी थी।  पुलिस जिला नूरपुर द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। नूरपुर पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक ऑल्टो कार से 6 किलो से अधिक चरस की खेप बरामद कर मंडी जिले के तीन युवकों को गिरफ्तार किया है।  हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियाें में कुछ गैर-जिम्मेदार पर्यटक हुड़दंगबाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला लाहौल के खंगसर इलाके का है, जहां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंदौरा के डमटाल में राष्ट्रीय राजमार्ग पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जम्मू से राजस्थान जा रहे एक सीमैंट से भरे टैंकर के कैबिन में अचानक आग लग गई। गनीमत यह रही कि ड्राइवर ने समय रहते सूझबूझ दिखाते हुए चलते टैंकर से कूदकर अपनी जान बचा ली।  

फेस्टिवल सीजन में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं, उत्तराखंड की ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट

देहरादून त्योहारी सीजन में ट्रेनों के आरक्षित टिकट को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। देहरादून से पूर्वांचल रूट पर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में सीटें फुल हो गई हैं। आगामी दीपावली और छठ पर्व के दौरान ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। देहरादून से बिहार होते हुए हावड़ा जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस के स्लीपर कोच दीपावली से छठ पर्व तक नो रूम है। यानी इसके वेटिंग भी जारी होना बंद हो गए हैं। हालांकि थर्ड एसी और एसी फर्स्ट व सेकेंड में टिकट मिलने की गुंजाइश है। देहरादून से हावड़ा, गोरखपुर, मजफ्फरपुर, लखनऊ, कोटा, नई दिल्ली, काठगोदाम, अमृतसर और प्रयागराज सहित कई शहरों के लिए रोज करीब 13 ट्रेन रवाना होती हैं। शिक्षा का केंद्र होने के कारण देहरादून में बाहरी छात्र-छात्राएं काफी हैं। साथ ही शहर से सटे सिडकुल में भी बिहार-बंगाल के श्रमिकाें की संख्या अधिक हैं। त्योहारों के दौरान जब यह सब एक साथ अपने-अपने घराें को रवाना होते हैं, तो ट्रेनों के आरक्षित टिकट को लेकर मारामारी शुरू हो जाती है। इससे बचने के लिए बहुत से लोग महीनों से पहले बुकिंग कराना शुरू कर देते हैं। इस साल भी दीपावली और छठ पर्व पर यही हाल है। पूर्वांचल रूट की ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। बिहार-बंगाल रूट की ट्रेन का हाल कुंभ एक्सप्रेस का स्लीपर कोच 17 से 27 अक्टूबर तक नो रूम है। एसी सेकेंड में अलग-अलग तिथियों पर लंबी वेटिंग है। एसी फर्स्ट में 10 और एसी थर्ड में 100 से अधिक वेटिंग है। देहरादून से मुजफ्फरपुर जाने वाली दून-मुजफ्फपुर एक्सप्रेस के थर्ड एसी में 15 से 29 अक्टूबर तक 30 से अधिक वेटिंग चल रही है। एसी फर्स्ट में पांच और एसी सेकेंड में 15 से अधिक वेटिंग है। जबकि स्लीपर नो रूम हो चुका है। गोरखपुर जाने वाली राप्ती-गंगा एक्सप्रेस के एसी सेकेंड में 18 से 20 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है। छठ के दौरान 25 व 27 अक्टूबर को सीट मिलने की गुंजाइश है। स्लीपर में 70 से अधिक वेटिंग है। एसी थर्ड में 10 से अधिक वेटिंग है। एसी फर्स्ट अभी खाली है। वंदेभारत में मिल सकती है सीट लखनऊ जाने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस 18 अक्टूबर के आसपास पैक है। लेकिन 20 से 24 अक्टूबर के बीच आरक्षित टिकट मिल सकता है। कोटा जाने वाली नंदा देवी एक्सप्रेस में 18 से 20 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है। लेकिन 20 से 22 अक्टूबर तक सीट मिल सकती है। इसी तरह दिल्ली जाने वाली मसूरी और जनशताब्दी एक्सप्रेस में 20 अक्टूबर को आरक्षित टिकट मिलने की गुंजाइश है। अन्य तिथियों में यह भी पैक है। – बनारस जाने वाली जनता एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों में 18 से 27 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है। – प्रयागराज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों में 18 से 27 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है और कुछ तिथियों में यह नो रूम भी है।  

फेस्टिव सीजन में ट्रेन टिकट के लाले, उत्तराखंड की अधिकांश ट्रेनों में फुल वेटिंग!

देहरादून. त्योहारी सीजन में ट्रेनों के आरक्षित टिकट को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। देहरादून से पूर्वांचल रूट पर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में सीटें फुल हो गई हैं। आगामी दीपावली और छठ पर्व के दौरान ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। देहरादून से बिहार होते हुए हावड़ा जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस के स्लीपर कोच दीपावली से छठ पर्व तक नो रूम है। यानी इसके वेटिंग भी जारी होना बंद हो गए हैं। हालांकि थर्ड एसी और एसी फर्स्ट व सेकेंड में टिकट मिलने की गुंजाइश है। देहरादून से हावड़ा, गोरखपुर, मजफ्फरपुर, लखनऊ, कोटा, नई दिल्ली, काठगोदाम, अमृतसर और प्रयागराज सहित कई शहरों के लिए रोज करीब 13 ट्रेन रवाना होती हैं। शिक्षा का केंद्र होने के कारण देहरादून में बाहरी छात्र-छात्राएं काफी हैं। साथ ही शहर से सटे सिडकुल में भी बिहार-बंगाल के श्रमिकाें की संख्या अधिक हैं। त्योहारों के दौरान जब यह सब एक साथ अपने-अपने घराें को रवाना होते हैं, तो ट्रेनों के आरक्षित टिकट को लेकर मारामारी शुरू हो जाती है। इससे बचने के लिए बहुत से लोग महीनों से पहले बुकिंग कराना शुरू कर देते हैं। इस साल भी दीपावली और छठ पर्व पर यही हाल है। पूर्वांचल रूट की ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। बिहार-बंगाल रूट की ट्रेन का हाल कुंभ एक्सप्रेस का स्लीपर कोच 17 से 27 अक्टूबर तक नो रूम है। एसी सेकेंड में अलग-अलग तिथियों पर लंबी वेटिंग है। एसी फर्स्ट में 10 और एसी थर्ड में 100 से अधिक वेटिंग है। देहरादून से मुजफ्फरपुर जाने वाली दून-मुजफ्फपुर एक्सप्रेस के थर्ड एसी में 15 से 29 अक्टूबर तक 30 से अधिक वेटिंग चल रही है। एसी फर्स्ट में पांच और एसी सेकेंड में 15 से अधिक वेटिंग है। जबकि स्लीपर नो रूम हो चुका है। गोरखपुर जाने वाली राप्ती-गंगा एक्सप्रेस के एसी सेकेंड में 18 से 20 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है। छठ के दौरान 25 व 27 अक्टूबर को सीट मिलने की गुंजाइश है। स्लीपर में 70 से अधिक वेटिंग है। एसी थर्ड में 10 से अधिक वेटिंग है। एसी फर्स्ट अभी खाली है। वंदेभारत में मिल सकती है सीट लखनऊ जाने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस 18 अक्टूबर के आसपास पैक है। लेकिन 20 से 24 अक्टूबर के बीच आरक्षित टिकट मिल सकता है। कोटा जाने वाली नंदा देवी एक्सप्रेस में 18 से 20 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है। लेकिन 20 से 22 अक्टूबर तक सीट मिल सकती है। इसी तरह दिल्ली जाने वाली मसूरी और जनशताब्दी एक्सप्रेस में 20 अक्टूबर को आरक्षित टिकट मिलने की गुंजाइश है। अन्य तिथियों में यह भी पैक है। बनारस जाने वाली जनता एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों में 18 से 27 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है। प्रयागराज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों में 18 से 27 अक्टूबर तक लंबी वेटिंग है और कुछ तिथियों में यह नो रूम भी है।  

अमेरिकी दबाव बेअसर: गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने कहा — निवेश तो भारत में ही करेंगे!

नई दिल्ली.  भारत और अमेरिका के बीच शुल्क विवाद को शुरू हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है। विवाद सुलझाने को लेकर दोनों सरकारों के बीच विमर्श का दौर जारी है, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है। खास बात यह है कि अमेरिकी कंपनियों पर इस अनिश्चितता का कोई असर नहीं है और वह भारत में निवेश योजना को परवान चढ़ाने में जुटी हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजोन, एपल जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों से लेकर ऑर्डिनरी थ्योरी जैसी इंटेलीजेंस हार्डवेयर कंपनी या भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले अमेरिकी वित्तीय फंड्स की भावी योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। इस बारे में दैनिक जागरण ने कुछ अमेरिकी कंपनियों के साथ दिग्गज उद्योग संगठनों फिक्की, सीआईआई से बात की और इन सभी का कहना है कि अभी तक अमेरिकी कॉरपोरेट सेक्टर से इस तरह का कोई संकेत नहीं मिला है कि टैरिफ विवाद से उनकी भारत में भावी गतिविधियों पर असर होगा। गूगल ने किया 10 अरब डॉलर निवेश करने का फैसला भारतीय इकोनमी के प्रति अमेरिकी कंपनियों के मजबूत भरोसे का ही प्रतीक है कि गूगल ने 10 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश विशाखापत्तनम में डाटा सेंटर हब बनाने के लिए करने का फैसला किया है। वर्ष 2024 में भी कंपनी ने बताया था कि वह छह अरब डालर का निवेश करने जा रही है, लेकिन अब कंपनी की योजना तैयार है और इसके लिए इसी महीने नई दिल्ली में समझौता होने जा रहा है। कंपनी ने अब कुल निवेश सीमा की राशि बढ़ाकर 10 अरब डालर (88,730 करोड़ रुपये) कर दी है। माइक्रोसॉफ्ट भी कतार में इसी तरह से माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्य नडेला ने जनवरी, 2025 में अपने भारत दौरे में यहां तीन अरब डालर की राशि दो वर्षों में निवेश करने की घोषणा की थी। सूत्रों का कहना है कि जुलाई महीने में जब शुल्क विवाद चरम पर था तब माइक्रोसॉफ्ट की भारतीय टीम ने इस निवेश योजना को अंतिम रूप दिया। इस निवेश से माइक्रोसॉफ्ट भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित करेगी। कंपनी का इस उद्देश्य से भारत में किया गया यह प्राथमिक निवेश होगा। भारत सरकार भी माइक्रोसॉफ्ट की इस योजना से काफी उत्साहित है क्योंकि इससे भारत को ग्लोबल एआई लीडर बनाने में मदद मिलेगा। भारतीय फर्मों के साथ संयुक्त उद्यम भी स्थापित कर रहीं अमेरिकी कंपनियां अमेरिका से नए निवेश का भारत आने का सिलसिला भी जारी है। पिछले दिनों अमेरिकी कंपनी ऑर्डिनरी थ्योरी ने भारतीय कंपनी ऑप्टीमस इन्फ्राकॉम के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया है, जिसे भारत के इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के बढ़ते भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। यह संयुक्त उद्यम भारत में दूरसंचार क्षेत्र में स्मार्ट हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग के साथ ही इस क्षेत्र की कंपनियों को कई तरह की दूसरी समस्याओं को दूर करने का समाधान बताएगा। ऑप्टीमस के चेयरमैन अशोक कुमार गुप्ता का कहना है, 'मेड इन इंडिया हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग का दौर अब शुरु हो रहा है। हमारी कोशिश मेक इन इंडिया के साथ ही आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना है।' दूसरी अमेरिकी कंपनियां भी निवेश को रफ्तार देने में जुटीं भारत में बने आइफोन के निर्यात का आंकड़ा 10 अरब डालर को पार कर गया है। पहले दस महीनों में एपल निर्मित आईफोन का निर्यात 75 प्रतिशत बढ़ा है। ऐसे में कंपनी की मंशा है कि वर्ष 2027 तक उसके वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत हो जाए। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप टैरिफ के बावजूद एपल की भारत को लेकर योजनाएं अपरिवर्तित हैं। बोइंग, अमेजन जैसी दूसरे क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के बारे में भी यहीं सूचना है कि वह अपनी निवेश को और रफ्तार देंगी। ट्रंप टैरिफ के बावजूद जिस तरह से एसएंडपी और जापानी रेटिंग कंपनी आरएंडआई ने भारत की साख में सुधार किया है, उससे भी अमेरिकी कंपनियों का भरोसा मजबूत हुआ है।

क्या हैं ग्रीन पटाखे और कैसे करते हैं ये प्रदूषण में कमी? जानिए नॉर्मल पटाखों से अंतर

नई दिल्ली  दिवाली रोशनी का त्योहार है. इस दिन सभी लोग अपने घरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं, मिठाई बांटते हैं और साथ ही पटाखे भी फोड़ते हैं. लेकिन वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी चिताओं की वजह से अब लोग हरित पटाखे चुनने लगे हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ग्रीन पटाखे फोड़ने पर सचमुच धुआं नहीं होता? आइए जानते हैं. नॉर्मल पटाखों में अक्सर भारी धातु और ऑक्सिडाइजर जैसे बेरियम नाइट्रेट, लीड कंपाउंड्स, लिथियम साल्ट्स और बाकी पदार्थ होते हैं जो चटकीले रंग और तीव्र प्रभाव को पैदा करते हैं. लेकिन जलने पर यह सभी पदार्थ विषैले अवशेष भी छोड़ते हैं. लेकिन ग्रीन पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट जैसे कम प्रदूषणकारी ऑक्सिडाइजर और एल्यूमीनियम की नियंत्रित मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है. ग्रीन पटाखें नॉर्मल पटाखें की तुलना में हानिकारक गैस और कणिकीय पदार्थ को लगभग 30 से 35% तक कम करते हैं. ग्रीन पटाखें में कम पीएम 2.5, पीएम 10 और कम धातु प्रदूषण होते हैं. लेकिन यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त नहीं होते. ग्रीन पटाखें नॉर्मल पटाखें की तुलना में हानिकारक गैस और कणिकीय पदार्थ को लगभग 30 से 35% तक कम करते हैं. ग्रीन पटाखें में कम पीएम 2.5, पीएम 10 और कम धातु प्रदूषण होते हैं. लेकिन यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त नहीं होते. ऐसा माना जाता है कि ग्रीन पटाखें धुआं नहीं छोड़ते, लेकिन ऐसा नहीं है. यह भी धुआं छोड़ते हैं लेकिन फर्क कितना है कि ग्रीन पटाखें को धूल निरोधक और पानी छोड़ने वाले घटकों से बनाया जाता है जो दिखाई देने वाले धुएं और हवा में मौजूद धूल को कम करते हैं. नॉर्मल पटाखें काफी तेज आवाज करते हैं. लेकिन ग्रीन पटाखों को शांत रहने के लिए डिजाइन किया गया है और ये नॉर्मल पटाखें की तुलना में कम आवाज करते हैं. असली ग्रीन पटाखों पर पहचान चिह्न लगे होते हैं. खास तौर पर CSIR-NEERI लोगों और क्यूआर कोड. आप उस कोड को स्कैन करके प्रमाणिकता को सत्यापित कर सकते हैं.ग्रीन पटाखें तीन तरह के होते हैं. सेफ वाटर रिलीजर, सेफ थर्माइट क्रैकर और सेफ मिनिमल अल्युमिनियम. हर प्रकार पर्यावरण को दूषित होने से बचाने में मदद करता है.  

पुतिन और मेलानिया के बीच सीधी बातचीत? US राष्ट्रपति की पत्नी ने किया चौंकाने वाला खुलासा

वाशिंगटन  अमेरिकी फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने सनसनीखेज खुलासा किया है. मेलानिया ने बताया कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ‘open channel of communication’ रखा हुआ है. इस डायरेक्ट बातचीत का मकसद है, यूक्रेन युद्ध में बिछड़े बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाना. शुक्रवार को मेलानिया ने कहा कि पुतिन ने उनके लेटर का जवाब दिया है और बताया कि रूस ने कुछ यूक्रेनी बच्चों को उनके परिवारों के पास वापस भेज दिया है. मेलानिया के मुताबिक, ‘पिछले 24 घंटों में आठ बच्चों को उनके परिवारों से फिर मिलाया गया है.’ उन्होंने कहा, ‘हर बच्चा उसी प्यार और सुरक्षा का सपना देखता है जो किसी भी इंसान का हक होता है. इन बच्चों ने जंग की वजह से वो सब खो दिया जो उनके बचपन का हिस्सा था.’ 19,000 से ज्यादा बच्चे अब भी लापता यूक्रेनी सरकार के मुताबिक, फरवरी 2022 में जंग शुरू होने के बाद से अब तक करीब 19,500 बच्चे रूस या उसके कब्जे वाले इलाकों में जबरन ले जाए गए हैं. ये बच्चे अपने परिवारों से बिछड़ चुके हैं. मेलानिया ने बताया कि हाल ही में लौटे आठ बच्चों में तीन ऐसे थे जो फ्रंटलाइन लड़ाई के बीच अपने परिवार से अलग हो गए थे. उन्होंने कहा, ‘हर बच्चे की कहानी दर्द से भरी है, लेकिन अब उन्हें उनके परिवारों की गोद मिली है.’ मेलानिया की चिट्ठी पर पुतिन का जवाब खबर के मुताबिक, अगस्त में अलास्का में हुई ट्रंप-पुतिन मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने मेलानिया की चिट्ठी पुतिन को खुद सौंप दी थी. उस वक्त मेलानिया अलास्का ट्रिप पर मौजूद नहीं थीं. मेलानिया ने अपनी चिट्ठी में लिखा था, ‘हर बच्चा अपने दिल में एक शांत सपना रखता है – प्यार, उम्मीद और डर से आजादी का सपना.’ उन्होंने पुतिन से अपील की थी कि रूस के कब्जे में आए यूक्रेनी बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया जाए. पुतिन ने इस चिट्ठी का जवाब दिया और मेलानिया को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी जिसमें बच्चों की पहचान, स्थिति और पुनर्मिलन की पूरी जानकारी थी. मेलानिया ने कहा, ‘अमेरिकी सरकार ने इन तथ्यों की पुष्टि की है. अमेरिका-रूस रिश्तों के बीच ‘मेलानिया चैनल’ रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह ‘मेलानिया चैनल’ एक अनोखा और अप्रत्याशित पुल साबित हो सकता है. व्हाइट हाउस सूत्रों के मुताबिक, मेलानिया की पहल को मानवीय और गैर-राजनीतिक माना गया है, लेकिन यह कदम कूटनीतिक लिहाज से बहुत मायने रखता है. कई विश्लेषक इसे ‘soft diplomacy’ का उदाहरण बता रहे हैं.  

भारतीय-रूसी साझेदारी में बनी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, अगले सप्ताह होगा लॉन्च

नई दिल्ली भारतीय रेल यात्रियों के लिए एक और अच्छी खबर आने वाली है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। इंडो-रशियन जॉइंट वेंचर काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस अगले सप्ताह अपने पहले एसी कोच के डिजाइन का अनावरण करेगी। यह डिजाइन इंटरनेशनल रेलवे इक्विपमेंट एग्जीबिशन (IREE) 2025 में प्रदर्शित किया जाएगा, जो अगले सप्ताह दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला है। भारत-रूस की साझेदारी से बनेंगे 120 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस एक संयुक्त उद्यम है, जिसे भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूस की प्रमुख रोलिंग स्टॉक कंपनियों द्वारा स्थापित किया गया है। इस साझेदारी के तहत कंपनी को 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों (यानी 1,920 कोच) के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी जून 2026 तक पहले प्रोटोटाइप ट्रेन को तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। तीन कंपनियों को मिला वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का ठेका भारतीय रेल ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण का ठेका तीन कंपनियों को दिया है। इनमें बीईएमएल (BEML), काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस (रूस की TMH और भारतीय RVNL का संयुक्त उपक्रम) और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड और बीएचईएल (BHEL) का कंसोर्टियम शामिल है। इन कंपनियों को आधुनिक तकनीक के साथ ऊर्जा-कुशल और यात्रियों की आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने वाले कोच तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर वंदे भारत वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लंबी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए डिजाइन किया जा रहा है। अब तक वंदे भारत एक्सप्रेस केवल चेयर कार के रूप में संचालित होती है, लेकिन स्लीपर वर्जन आने से रात की यात्रा करने वाले यात्रियों को वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड, आरामदायक और प्रीमियम सुविधा मिलेगी। एक साथ दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की लॉन्चिंग रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को एक साथ दो रेक के रूप में लॉन्च किया जाएगा। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि लॉन्चिंग तभी की जाएगी जब दूसरी ट्रेन पूरी तरह तैयार हो जाएगी ताकि सेवा की निरंतरता बनी रहे। उन्होंने कहा, “दूसरी ट्रेन का निर्माण कार्य चल रहा है और यह संभवतः 15 अक्टूबर 2025 तक तैयार हो जाएगी। दोनों ट्रेनें साथ में लॉन्च की जाएंगी। दूसरी ट्रेन नियमित सेवा की निरंतरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे ही दूसरा रेक मिल जाएगा, किसी भी उपयुक्त रूट पर संचालन शुरू किया जाएगा।” यह दोनों ट्रेनें बीईएमएल द्वारा इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) तकनीक का उपयोग करते हुए बनाई जा रही हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से रेल यात्रा में नया अध्याय वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होने वाली है। यह ट्रेनें न केवल तेज और ऊर्जा-कुशल होंगी, बल्कि यात्रियों को बेहतर साउंड इंसुलेशन, आरामदायक बर्थ, अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स और लग्ज़री स्तर की सुविधाएं भी प्रदान करेंगी। रेल मंत्रालय का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारतीय रेल को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगा।

ट्रंप के दबाव के बावजूद अमेरिकी दिग्गजों का भारत पर दांव कायम

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच शुल्क विवाद को शुरू हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है। विवाद सुलझाने को लेकर दोनों सरकारों के बीच विमर्श का दौर जारी है, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है। खास बात यह है कि अमेरिकी कंपनियों पर इस अनिश्चितता का कोई असर नहीं है और वह भारत में निवेश योजना को परवान चढ़ाने में जुटी हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजोन, एपल जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों से लेकर ऑर्डिनरी थ्योरी जैसी इंटेलीजेंस हार्डवेयर कंपनी या भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले अमेरिकी वित्तीय फंड्स की भावी योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। इस बारे में दैनिक जागरण ने कुछ अमेरिकी कंपनियों के साथ दिग्गज उद्योग संगठनों फिक्की, सीआईआई से बात की और इन सभी का कहना है कि अभी तक अमेरिकी कॉरपोरेट सेक्टर से इस तरह का कोई संकेत नहीं मिला है कि टैरिफ विवाद से उनकी भारत में भावी गतिविधियों पर असर होगा। गूगल ने किया 10 अरब डॉलर निवेश करने का फैसला भारतीय इकोनमी के प्रति अमेरिकी कंपनियों के मजबूत भरोसे का ही प्रतीक है कि गूगल ने 10 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश विशाखापत्तनम में डाटा सेंटर हब बनाने के लिए करने का फैसला किया है। वर्ष 2024 में भी कंपनी ने बताया था कि वह छह अरब डालर का निवेश करने जा रही है, लेकिन अब कंपनी की योजना तैयार है और इसके लिए इसी महीने नई दिल्ली में समझौता होने जा रहा है। कंपनी ने अब कुल निवेश सीमा की राशि बढ़ाकर 10 अरब डालर (88,730 करोड़ रुपये) कर दी है। माइक्रोसॉफ्ट भी कतार में इसी तरह से माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्य नडेला ने जनवरी, 2025 में अपने भारत दौरे में यहां तीन अरब डालर की राशि दो वर्षों में निवेश करने की घोषणा की थी। सूत्रों का कहना है कि जुलाई महीने में जब शुल्क विवाद चरम पर था तब माइक्रोसॉफ्ट की भारतीय टीम ने इस निवेश योजना को अंतिम रूप दिया। इस निवेश से माइक्रोसॉफ्ट भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित करेगी। कंपनी का इस उद्देश्य से भारत में किया गया यह प्राथमिक निवेश होगा। भारत सरकार भी माइक्रोसॉफ्ट की इस योजना से काफी उत्साहित है क्योंकि इससे भारत को ग्लोबल एआई लीडर बनाने में मदद मिलेगा। भारतीय फर्मों के साथ संयुक्त उद्यम भी स्थापित कर रहीं अमेरिकी कंपनियां अमेरिका से नए निवेश का भारत आने का सिलसिला भी जारी है। पिछले दिनों अमेरिकी कंपनी ऑर्डिनरी थ्योरी ने भारतीय कंपनी ऑप्टीमस इन्फ्राकॉम के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया है, जिसे भारत के इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के बढ़ते भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। यह संयुक्त उद्यम भारत में दूरसंचार क्षेत्र में स्मार्ट हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग के साथ ही इस क्षेत्र की कंपनियों को कई तरह की दूसरी समस्याओं को दूर करने का समाधान बताएगा। ऑप्टीमस के चेयरमैन अशोक कुमार गुप्ता का कहना है, 'मेड इन इंडिया हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग का दौर अब शुरु हो रहा है। हमारी कोशिश मेक इन इंडिया के साथ ही आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना है।' दूसरी अमेरिकी कंपनियां भी निवेश को रफ्तार देने में जुटीं भारत में बने आइफोन के निर्यात का आंकड़ा 10 अरब डालर को पार कर गया है। पहले दस महीनों में एपल निर्मित आईफोन का निर्यात 75 प्रतिशत बढ़ा है। ऐसे में कंपनी की मंशा है कि वर्ष 2027 तक उसके वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत हो जाए। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप टैरिफ के बावजूद एपल की भारत को लेकर योजनाएं अपरिवर्तित हैं। बोइंग, अमेजन जैसी दूसरे क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के बारे में भी यहीं सूचना है कि वह अपनी निवेश को और रफ्तार देंगी। ट्रंप टैरिफ के बावजूद जिस तरह से एसएंडपी और जापानी रेटिंग कंपनी आरएंडआई ने भारत की साख में सुधार किया है, उससे भी अमेरिकी कंपनियों का भरोसा मजबूत हुआ है।  

इजरायली पीएम पर ओवैसी का हमला, बोले- नेतन्याहू इंसानियत के नाम पर कलंक

हैदराबाद  हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर शनिवार को जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने इजरायली पीएम को दुनिया का सबसे बड़ा गुंडा करार देते हुए कहा कि उन्हें अल्लाह देख लेगा। ओवैसी ने पीएम मोदी द्वारा इजरायल-गाजा शांति समझौते पर किए गए पोस्ट का जिक्र करते हुए नेतन्याहू पर निशाना साधा। ओवैसी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ''आज पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी और नेतन्याहू की लीडरशिप की तारीफ की। नेतन्याहू दुनिया का सबसे बड़ा गुंडा है, जिसने 65 हजार लोगों को मार दिया, 20 हजार बच्चे हैं। 12 लाख लोग बेघर हो गए और पीएम उसकी लीडरशिप की तारीफ कर रहे हैं। आखिर क्यों उसकी तारीफ कर रहे हैं? आप तो भारत के प्रधानमंत्री हैं। हम इस बात की निंदा करते हैं जो पीएम मोदी ने नेतन्याहू की लीडरशिप की तारीफ की। अल्लाह देख लेगा नेतन्याहू को इंशाअल्लाह।'' एआईएमआईएम प्रमुख ने आगे कहा, ''पीएम उसकी तारीफ कर रहे हैं, कहीं न कहीं ऊपर जाकर कोई तार मिलता है। ऐसे आदमी (नेतन्याहू) के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ने वॉरेंट जारी किया। हिंदुत्व के लोग बोलेंगे ओवैसी क्या बोल रहा। अरे सुनो, कुलभूषण जो पाकिस्तान की जेल गए, उसे सजा-ए-मौत देना चाहते थे तो भारत इंटरनेशनल कोर्ट गया और उसकी सजा रुकवाई।'' ओवैसी ने पीएम मोदी के जिस पोस्ट का जिक्र किया, उसमें प्रधानमंत्री ने लिखा था कि राष्ट्रपति ट्रंप की गाजा शांति योजना के तहत हुई प्रगति पर बधाई देने के लिए अपने मित्र, प्रधानमंत्री नेतन्याहू को फोन किया। हम बंधकों की रिहाई और गाजा के लोगों को मानवीय सहायता बढ़ाने पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं। इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में कहीं भी किसी भी रूप या स्वरूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है। इसके अलावा, पीएम मोदी ने ट्रंप को लेकर भी एक्स पर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, ''मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात की और ऐतिहासिक गाजा शांति योजना की सफलता पर उन्हें बधाई दी। साथ ही व्यापार वार्ता में हुई अच्छी प्रगति की भी समीक्षा की। आने वाले हफ्तों में निकट संपर्क में रहने पर सहमति बनी।"  

ह्वासॉन्ग-20 न्यूक्लियर मिसाइल: नॉर्थ कोरिया का सबसे खतरनाक ICBM, अमेरिका पर साया खतरा

फियोंगयांग उत्तर कोरिया ने अपनी सबसे ताकतवर परमाणु मिसाइल ह्वासॉन्ग-20 का अनावरण किया. ये सॉलिड-फ्यूल वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो पूरे अमेरिका को निशाना बना सकती है. किम जोंग उन ने इसे सबसे शक्तिशाली न्यूक सिस्टम बताया, जो पूरे अमेरिका को आसानी से हिट कर सकता है. नॉर्थ कोरिया ने 10 अक्टूबर को वर्कर्स पार्टी के 80वें स्थापना दिवस पर सैन्य परेड में पेश किया. रूस और चीन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. ह्वासॉन्ग-20: तीन चरणों वाली 'मॉन्स्टर' मिसाइल ह्वासॉन्ग-20 उत्तर कोरिया की सबसे एडवांस्ड ICBM है. ये तीन चरणों वाली सॉलिड-फ्यूल मिसाइल है, जो लॉन्च के बाद तेजी से ऊंचाई पकड़ लेती है. इसका मुख्य फीचर नया हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल इंजन है, जो ह्वासॉन्ग-18 से 40% ज्यादा ताकतवर (करीब 1,970 kN थ्रस्ट) है. इससे मिसाइल ज्यादा तेज और लंबी दूरी तय कर सकती है.     रेंज: 15,000 किलोमीटर तक – अमेरिका के किसी भी कोने को कवर.     वॉरहेड: मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (MIRV) ले जा सकती है, यानी एक मिसाइल से कई परमाणु हेड्स अलग-अलग टारगेट हिट करेंगे.     लंबाई: करीब 25 मीटर (अनुमानित), वजन 80 टन से ज्यादा.     लॉन्च: मोबाइल लॉन्चर से, जो छिपाना आसान. किम जोंग उन ने परेड में कहा कि ये हमारा सबसे ताकतवर न्यूक हथियार है. ये मिसाइल अभी टेस्ट नहीं हुई, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ये ह्वासॉन्ग-18 से कहीं बेहतर है. सॉलिड फ्यूल से इसे तुरंत लॉन्च किया जा सकता है, जो चेतावनी के बिना हमला संभव बनाता है. परेड का नजारा: रूस-चीन के साथ 'शो ऑफ स्ट्रेंथ' 10 अक्टूबर को प्योंगयांग में भव्य सैन्य परेड हुई. हजारों सैनिक, टैंक और मिसाइलें दिखाई गईं. ह्वासॉन्ग-20 को पहली बार पर्दा हटाया गया. किम जोंग उन ने इसे अमेरिका के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बताया. रूस के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर और चीन के वाइस चेयरमैन मौजूद थे. ये दिखाता है कि उत्तर कोरिया रूस-चीन से करीब आ रहा. परेड में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी दिखाया गया. अमेरिका और दुनिया पर खतरा: क्यों चिंता? ह्वासॉन्ग-20 अमेरिका के पूरे मुख्यभूमि (अलास्का से फ्लोरिडा तक) को निशाना बना सकती. MIRV से एक मिसाइल कई शहरों को हिट कर सकती. US पेंटागन ने कहा कि ये गंभीर खतरा है. उत्तर कोरिया के पास 50-60 परमाणु हेड्स हैं, जो बढ़ रहे हैं. रूस-चीन की मौजूदगी से ये एशिया में तनाव बढ़ाएगा. दक्षिण कोरिया और जापान भी चिंतित हैं.