samacharsecretary.com

तेज बारिश का खतरा! IMD ने जारी किया अलर्ट, अगले पांच दिन रहें सतर्क

नई दिल्ली  अगले दो से तीन दिनों के दौरान महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार के बचे हुए भागों, संपूर्ण झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा और तेलंगाना के कुछ हिस्सों से दक्षिण पश्चिम मॉनसून के वापस लौटने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। वहीं, अगले पांच दिनों तक दक्षिण भारत के हिस्सों में मूसलाधार भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई ह। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। मौसम विभाग के अनुसार, 12-17 अक्टूबर के दौरान तमिलनाडु, केरल, 11 और 12 अक्टूबर को लक्षद्वीप, 11 को तटीय कर्नाटक, 11 से 15 के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, 11 से 14 अक्टूबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश और यनम व रायलसीमा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ जगहों पर भारी बारिश और 11 अक्टूबर को उत्तरी तमिलनाडु व केरल में बहुत भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, 11-12 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम व रायलसीमा में तेज सतही हवाएं चलेंगी। पूर्व और मध्य भारत की बात करें तो 11 और 12 अक्टूबर को ओडिशा में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। 11 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के गंगीय क्षेत्रों और 11-13 अक्टूबर को ओडिशा में बिजली व तेज हवा के साथ गरज के साथ छींटे पड़ने का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वोत्तर भारत के लिए मौसम विभाग ने कहा है कि 11 अक्टूबर को असम और मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 11 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में और 11 व 12 अक्टूबर को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बिजली के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।

तीन और दो लोगों ने मिलकर दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा पर किया हमला, मां ने बताया दर्दनाक सच

दुर्गापुर  पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में 23 वर्षीय मेडिकल छात्रा के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। घटना शुक्रवार रात की है, जब सेकंड ईयर की स्टूडेंट अपने कॉलेज कैंपस के बाहर दोस्त के साथ खाना खाने गई थी। पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। आसनसोल-दुर्गापुर शहर पुलिस के अधिकारी ने बताया, 'हमें घटना को लेकर शिकायत मिली थी। जांच शुरू हो चुकी है और हमारी टीमें तैनात हैं। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।' पीड़ित छात्रा मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली है। उसने बताया कि वह अपने दोस्त के साथ कैंपस के बाहर खाना खाने गई थी, तभी कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें रोका। उसने आरोप लगाया कि उसका दोस्त मौके से भाग गया, जिसके बाद उन लोगों ने उसे जबरदस्ती पास के जंगल में ले जाकर रेप किया। छात्रा की मां ने मीडिया को बताया, 'मेरी बेटी अपने दोस्त के कहने पर खाना खाने गई थी। तीन लोग उनका पीछा करने लगे। उसका दोस्त उसे छोड़कर भाग गया। मेरी बेटी भी भागी, लेकिन वह अपने दोस्त को नहीं ढूंढ सकी।' कुछ संदिग्ध हिरासत में छात्रा की मां ने आगे बताया, 'तीन लोगों ने मेरी बेटी को अकेला पाकर पास के जंगल क्षेत्र में ले गए। वहां दो और लोग उनके साथ शामिल हो गए। उनमें से एक ने अपराध को अंजाम दिया और उसका मोबाइल भी छीन लिया। उसे धमकी दी गई कि अगर उसने शोर मचाया तो उसे जान से मार दिया जाएगा।' इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और छात्रा के परिवार ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। अधिकारी ने बताया, 'हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। रास्ते और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।'

PAK आर्मी का पुराना सहयोगी अब बना संकट! तहरीक-ए-लब्बैक की पूरी कहानी

लाहौर  पाकिस्तान में आज जो हालात हैं, वह एक पुरानी कहावत को सच साबित करते हैं – "जो बोएगा वही काटेगा." लाहौर में हिंसक झड़पें और इस्लामाबाद का किले में तब्दील होना दिखाता है कि पाकिस्तान अपनी ही बनाई समस्या में फंस गया है. इसके पीछे तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) नाम का एक कट्टरपंथी संगठन है, जो कभी पाक फौज का 'प्यारा' था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि TLP को खुद पाकिस्तानी फौज ने बनाया और पाला था. मकसद था नागरिक सरकारों को दबाने के लिए एक 'सड़क की ताकत' तैयार करना. यह वही तरीका है जो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के साथ अपनाया था. लेकिन अब यही 'पालतू कुत्ता' अपने मालिकों को ही काटने लगा है. लंदन स्थित पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजकिया का कहना है, "TLP, लश्कर-ए-तैयबा की तरह ही पाक आर्मी की बनाई हुई संगठन है. फौज ने इसे घरेलू राजनीति में हेरफेर के लिए बनाया था." अब वही संगठन पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गया है. शनिवार को लाहौर में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) का एक विशाल विरोध प्रदर्शन जारी है. इस प्रदर्शन में हजारों समर्थक शामिल हुए हैं और इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे हैं. टीएलपी के संस्थापक खादिम हुसैन रिज़वी का आरोप है कि इस प्रदर्शन के दौरान उनके 11 समर्थकों को मार दिया गया है. फौज का दोहरा खेल 2015 में बना यह संगठन बार-बार पाकिस्तान को तकलीफ़ देता रहा है. 2017 में इन्होंने इस्लामाबाद की 21 दिन की घेराबंदी की. मजेदार बात यह है कि जब भी यह संगठन उत्पात मचाता है, पाक फौज 'बिचौलिए' की भूमिका निभाती है और इनके साथ डील करती है. तहरीक-ए-लब्बैक उर्दू शब्द है. तहरीक का अर्थ – आंदोलन या मूवमेंट है और लब्बैक का अर्थ है – हाजिर हूं. 2017 के प्रदर्शनों के दौरान एक सीनियर फौजी अफसर को TLP प्रदर्शनकारियों को पैसे बांटते हुए देखा गया था – जो साफ दिखाता है कि यह सब कितना नियोजित था. उस समय तत्कालीन कानून मंत्री ज़ाहिद हामिद को इस्तीफा देना पड़ा था. इमरान खान का TLP प्रेम सबसे शर्मनाक बात यह है कि 2021 में इमरान खान की सरकार ने TLP पर से प्रतिबंध हटा दिया था. हुआ यह कि TLP के मुखिया सआद रिज़वी को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जेल में डाल दिया गया था. लेकिन हज़ारों TLP समर्थकों ने लाहौर से इस्लामाबाद तक 'लॉन्ग मार्च' निकाला. इस हिंसा में 20 से ज्यादा लोग मारे गए, जिसमें 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे. पाक फौज की मध्यस्थता से इमरान खान की सरकार ने TLP के साथ गुप्त समझौता किया. परिणाम – सआद रिज़वी और 2000 से ज्यादा TLP कार्यकर्ता रिहा कर दिए गए. यह वही इमरान खान था जो भारत को आतंकवाद के बारे में उपदेश देता रहता था. 2018 चुनावों में TLP का इस्तेमाल इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशंस की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 के चुनावों में TLP का इस्तेमाल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) को कमज़ोर करने के लिए किया गया था, ताकि इमरान खान का रास्ता साफ हो सके. यानी TLP ने ISI के इशारे पर काम किया. धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग TLP की रणनीति बेहद चालाकी भरी है. यह 'खतम-ए-नबुव्वत' (पैगंबर की अंतिमता) जैसे भावनात्मक मुद्दों का सहारा लेता है. पाकिस्तान में धार्मिक भावनाओं को हथियार बनाने की यह परंपरा कोई नई नहीं है – यही तो भारत के खिलाफ भी किया जाता रहा है. पाकिस्तान का आत्मघाती रास्ता अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट में साफ लिखा है, "TLP ने अपनी ताकत का स्वाद चख लिया है और सीख गया है कि इसे कैसे इस्तेमाल करना है – राज्य के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी सेवा में जो पर्दे के पीछे से असली नियंत्रण रखते हैं." पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्ज़ा का कहना है, "आज जो अराजकता दिख रही है, वह धर्म को हथियार बनाने के दशकों का अपरिहार्य परिणाम है. पाकिस्तान अब अपने ही अंतर्विरोधों के बोझ तले दब रहा है." फ्रैंकनस्टाइन का राक्षस यह स्थिति उस फ्रैंकनस्टाइन की कहानी जैसी है जिसका बनाया हुआ राक्षस उसे ही खत्म करने पर आमादा हो गया. पाकिस्तानी फौज ने TLP को नागरिक सरकारों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बनाया था, लेकिन अब यही संगठन पूरे पाकिस्तान को अस्थिर कर रहा है.

‘हमारी भूमिका नहीं’ कहने के बाद भी महिला पत्रकारों को क्यों रोका गया? सरकार ने दी सफाई

नई दिल्ली अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की दिल्ली यात्रा के दौरान हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर उठे विवाद पर भारत सरकार ने अपनी स्थिति साफ कर दी है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ किया है कि दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और यह कार्यक्रम पूरी तरह अफगानिस्तान के दूतावास की तरफ से आयोजित किया गया था. दरअसल, गुरुवार को अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी ने दिल्ली स्थित अफगानिस्तान दूतावास में मीडिया से बातचीत की थी. इस दौरान महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवेश से रोके जाने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कड़ी नाराजगी और सवाल उठे थे. कई पत्रकारों और नेताओं ने इसे भारत की गरिमा और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया था. क्या कह रहा विदेश मंत्रालय? विदेश मंत्रालय ने अब कहा, ‘दिल्ली में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री द्वारा की गई प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं थी. यह आयोजन अफगानिस्तान के दूतावास का आंतरिक कार्यक्रम था.’ इस बयान के साथ सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार या उसके किसी विभाग का इस प्रेस इंटरैक्शन से कोई संबंध नहीं था. तालिबान ने क्या बताया? वहीं इस मामले पर तालिबान सरकार के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता ने भी स्पष्टीकरण दिया है. प्रवक्ता ने कहा कि यह जानबूझकर किया गया कदम नहीं था और इस बात को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है. तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा, ‘मुत्तकी काबुल में अपने कार्यालय में नियमित रूप से महिलाओं से मिलते हैं. मैं खुद महिला पत्रकारों को इंटरव्यू देता हूं. यह कहना गलत है कि महिला पत्रकारों को जानबूझकर ब्रीफिंग से बाहर रखा गया.’ उन्होंने आगे कहा कि केवल महिला ही नहीं, कुछ पुरुष पत्रकारों को भी पास न मिलने की वजह से ब्रीफिंग में शामिल नहीं किया जा सका. दरअसल मुत्तकी की इस प्रेस वार्ता में महिलाओं के प्रवेश पर रोक की खबरों से भारत में कूटनीतिक मर्यादा और समान अधिकारों पर बहस छिड़ गई थी. वहीं, विपक्षी नेताओं, खासकर तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि ‘भारतीय धरती पर तालिबान मंत्री को महिला पत्रकारों को बाहर करने की अनुमति कैसे दी गई?’ महुआ ने जयशंकर को घेरा टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस मामले को लेकर सीधा भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर निशाना साधा था. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘हमारी सरकार ने तालिबान के विदेश मंत्री आमिर मुत्तकी को भारत में महिला पत्रकारों को बाहर रखकर पुरुषों के लिए अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की कैसे अनुमति दी? जयशंकर जी को इस पर सहमति देने की हिम्मत कैसे हुई? और हमारे तथाकथित साहसी पुरुष पत्रकार कमरे में बैठे क्यों रहे?’ अब विदेश मंत्रालय की सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस आयोजन की आयोजक नहीं थी, बल्कि यह अफगानिस्तान के दूतावास का स्वतंत्र कार्यक्रम था, जिसमें प्रवेश नीति का निर्धारण भी दूतावास ने ही किया था.  

चीन को ट्रंप की चेतावनी! ‘उस चीज’ पर भड़के और ठोक दिया 100% टैरिफ

वाशिंगटन अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन पर बड़ा टैरिफ अटैक किया है. 1 नवंबर 2025 से चीन से आने वाले सभी आयतित उत्‍पादों पर अतिरिक्‍त 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इसका मतलब है कि जो टैक्‍स पहले से लागू हैं, उसके ऊपर 100 फीसदी और टैक्‍स लगाया जाएगा.  ट्रंप ने टैरिफ धमकी देने के साथ ही यह भी ऐलान किया कि अमेरिका 1 नवंबर से ही 'क्रिटिकल सॉफ्टवेयर' पर एक्सपोर्ट कंट्रोल (Critical Software Export Control) भी लागू करेगा. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर डोनाल्‍ड ट्रंप ने अचानक चीन पर क्‍यों टैरिफ का ऐलान किया है, जब चीजें धीरे-धीरे सही हो रही थीं? दरअसल, इसके पीछे की वजह चीन का एक फैसला है.  चीन ने क्‍या कि अमेरिका ने लगाया 100% टैरिफ चीन ने 1 दिसंबर से रेयर अर्थ मिनरल्‍स (Rare Earth Minarals) पर सख्‍त कंट्रोल का ऐलान किया है. चीन रेयर अर्थ मिनिरल्स का राजा है, वह इसके निर्यात का करीब 90 फीसदी हिस्‍सा कंट्रोल करता है. इसी कारण चीन आए दिन रेयर अर्थ मिनरल्‍स को लेकर नया नियम लेकर आता रहता है. अब चीन ने कहा है कि ह इन खनिजों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाएगा, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत बनी रहे.  चीन ने भारत से भी गारंटी मांगी है कि वह आश्‍वस्‍त करे कि अमेरिका को हैवी रेयर अर्थ मिनरल्‍स की सप्‍लाई नहीं करेगा, तभी वह भारत को भी रेयर अर्थ मिनरल्‍स देगा. अब इसी फैसले के बाद ट्रंप का गुस्‍सा चीन पर फुटा है, जिस कारण अमेरिका ने चीन पर अतिर‍िक्‍त 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है.  कितना जरूरी है रेयर अर्थ मिनरल्‍स?  रेयर अर्थ मिनरल्‍स 17 तरह के चुम्‍बकीय तत्‍व हैं जैसे लैंथेनम, नियोडिमियम और यूरोपियम आदि , जिनका उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कारों, कंप्यूटर चिप्स, सैन्य उपकरणों और ग्रीन एनर्जी के लिए किया जाता है. इन चीजों के ना होने से ऑटो समेत कई इंडस्‍ट्रीज प्रभावित होंगी. इलेक्‍ट्रॉनिक इंडस्‍ट्री तो ठप भी हो सकती है. दुनिया का 70 प्रतिशत से ज्यादा रेयर अर्थ चीन से आता है. ट्रंप ने चीन पर क्‍या कहा?  ट्रंप ने कहा कि चीन के रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर फैसले से सभी देश प्रभावित होंगे. उन्‍होंने चीन के कदम को नैतिक अपमान बताया है और कहा कि यह वर्ल्‍ड ट्रेड पर हावी होने की उसकी लॉन्‍गटर्म रणनीति का हिस्‍सा है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा कि अमेकिरा एकतरफा कार्रवाई करेगा, चाहे अन्‍य देश क्‍या करना चाहें. उन्‍होंने कहा कि 1 नवंबर, 2025 से संयुक्त राज्य अमेरिका चीन पर 100% टैरिफ लगाएगा, जो वर्तमान में उनके द्वारा चुकाए जा रहे किसी भी टैरिफ के अतिरिक्त होगा.  चीन ने आखिर क्‍या किया है?  चीन ने होल्मियम, एर्बियम और यटरबियम समेत कई रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर प्रतिबंध बढ़ाते हुए उसे एक्‍सपोर्ट करने से रोकने का फैसला लिया है. इससे प्रतिबंधित दुर्लभ पृथ्वी की कुल संख्या 12 हो गई है. बीजिंग ने अर्धचालक और रक्षा क्षेत्रों से जुड़ी उत्पादन प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली लिथियम बैटरी और ग्रेफाइट एनोड पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. चीन ने इसके पीछे की वजह राष्‍ट्रीय सुरक्षा बताई है.  ट्रंप ने कहा जिनपिंग से नहीं मिलेंगे इस महीने के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन से पहले तनाव बढ़ रहा है, जहाँ ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों के शामिल होने की उम्मीद है। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि चीन की हालिया कार्रवाइयों के बाद शी जिनपिंग से 'मुलाकात करने का कोई कारण नहीं है'.

वक्फ संपत्तियों पर टिप्पणी करते हुए भड़का केरल हाईकोर्ट, उठाए गंभीर सवाल

तिरुवनंतपुरम केरल हाईकोर्ट ने मुनंबम वक्फ भूमि विवाद पर एक सख्त टिप्पणी करते हुए राज्य वक्फ बोर्ड को जमकर फटकार लगाई है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी संपत्ति को बिना उचित प्रक्रिया के वक्फ घोषित करने की अनुमति दी गई तो कल को ताजमहल, लालकिला, विधानसभा भवन या यहां तक कि हाईकोर्ट की इमारत को भी वक्फ संपत्ति बताया जा सकता है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधीकारी और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने ‘स्टेट ऑफ केरल बनाम केरल वक्फ संरक्षण वेधी’ मामले में सुनाया। न्यायालय ने कहा, “यदि न्यायपालिका ऐसे मनमाने वक्फ घोषणाओं को वैधता दे दे तो कल को कोई भी इमारतो,चाहे वह ताजमहल, लालकिला, विधान भवन या स्वयं यह अदालत हो, वक्फ घोषित की जा सकती है। यह प्रवृत्ति संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत नागरिकों के संपत्ति अधिकार, अनुच्छेद 19 के तहत व्यापार की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजीविका के अधिकार के लिए खतरा है।” पीठ ने कहा कि संविधानिक दायित्वों के तहत कोई भी अदालत ऐसी काल्पनिक और विलंबित शक्ति के प्रयोग को मंजूरी नहीं दे सकती। मुनंबम की यह जमीन 1950 में सिद्दीक सैद नामक व्यक्ति द्वारा फारूक कॉलेज को दान में दी गई थी। उस समय भूमि का कुल क्षेत्रफल 404.76 एकड़ था, जो समुद्री कटाव के कारण घटकर 135.11 एकड़ रह गया है। इस भूमि पर पहले से ही कई लोग बसे हुए थे और कॉलेज प्रबंधन ने बाद में इन निवासियों को जमीन बेच भी दी। इन बिक्री दस्तावेजों में कहीं भी भूमि के वक्फ होने का उल्लेख नहीं था। लेकिन लगभग 69 साल बाद 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने अचानक इस जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया और पुराने बिक्री सौदों को अवैध ठहरा दिया। लगभग 600 परिवारों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने नवंबर 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया था। इसे वक्फ संरक्षण समिति ने अदालत में चुनौती दी। कहा गया कि सरकार को वक्फ संपत्ति की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। मार्च 2025 में एकल पीठ ने आयोग को रद्द कर दिया, जिसके बाद राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। खंडपीठ ने कहा कि फारूक कॉलेज को दी गई भूमि ‘गिफ्ट डीड’ (दानपत्र) थी, वक्फ डीड नहीं। पिछली सभी कानूनी कार्यवाहियों में इसे दानपत्र ही माना गया था और कॉलेज प्रबंधन ने भी इसे वक्फ नहीं बताया था। वक्फ बोर्ड ने सिर्फ इसलिए इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया क्योंकि दस्तावेज का शीर्षक “वक्फ घोषणा” लिखा था, जबकि उसमें वक्फ बनने की आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी नहीं थीं। अदालत ने कहा कि वक्फ बोर्ड की यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और स्वार्थपूर्ण प्रतीत होती है, क्योंकि यह कदम भूमि के व्यावसायिक मूल्य बढ़ने के बाद उठाया गया। कोर्ट ने कहा, “केडब्ल्यूबी (वक्फ बोर्ड) की यह कार्रवाई साफ तौर पर बेईमानी से प्रेरित लगती है, जिसका उद्देश्य भूमि पर नियंत्रण हासिल करना है।” याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह मामला वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि अदालत के। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि वह यह जांचने के लिए सक्षम है कि वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया सर्वेक्षण, सुनवाई और जांच न्यायोचित तरीके से की गई या नहीं। कोर्ट ने कहा, “किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया नागरिकों के मूल अधिकारों को प्रभावित करती है। इसलिए अदालत इस पर निगरानी रख सकती है।”

6G का भविष्य भारत में: IMC मंच पर दुनियाभर ने जताई रुचि

नई दिल्ली भारत अब तेजी से 6G तकनीक की ओर बढ़ रहा है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का 6G खोज और विकास आने वाले वर्षों में दुनिया की नेटवर्क टेकनोलोजी को आकार देगा। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के मुख्य 5G रणनीतिकार आशुतोष दत्ता ने कहा कि भविष्य में सर्वव्यापी कनेक्टिविटी एक प्रमुख आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि हर किसी के पास टावर या वाई-फ़ाई की सुविधा नहीं होती, इसलिए सैटेलाइट नेटवर्क भविष्य में एक बड़ी भूमिका निभाएंगे। सैटेलाइट और ग्राउंड नेटवर्क का विलय आशुतोष दत्ता ने बताया कि आगामी नेटवर्क में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए स्थलीय और गैर-स्थलीय नेटवर्क को एकीकृत करना होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेटरों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों को 6G के नए उपयोगों की खोज के लिए टेस्टबैड और सिमुलेशन मॉडल विकसित करने हेतु सहयोग करना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताओं के प्रति भी चेतावनी दी और कहा कि वाई-फाई, सैटेलाइट या अन्य नेटवर्क के बीच स्विच करते समय डेटा सुरक्षा प्रमुख हो जाती है। भारत के पास तकनीकी क्षमता और मजबूत इरादे हैं दत्ता ने कहा कि भारत के पास तकनीकी विशेषज्ञता और सरकारी समर्थन दोनों हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब हमें आगामी 6G युग के लिए नए कौशल विकसित करने हेतु उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। लाई-फ़ाई तकनीक क्रांतिकारी साबित हो सकती है " फादर ऑफ लाई-फ़ाई " के रूप में विख्यात प्रोफेसर हेराल्ड हास ने कहा कि लाई-फाई तकनीक भारत की कनेक्टिविटी क्रांति में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि जहां फाइबर बिछाना मुश्किल है, वहां लाई-फ़ाई बिना केबल के तेज इंटरनेट प्रदान कर सकता है।

मुफ्त बिजली योजना अपडेट: सूर्य घर के लिए स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, कर्मचारियों ने शुरू किया इंस्टालेशन

अंबेडकरनगर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की समीक्षा कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि योजना के प्रति जन जागरूकता के साथ बढ़ाई जाय, ताकि अधिक से अधिक पात्रों को लाभांवित किया जा सके। कहा कि प्रत्येक अधिकारी योजना की पात्रता एवं प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी रखे तथा प्रचार-प्रसार के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सोलर ऊर्जा के प्रति प्रेरित करें। जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता को मीटर रीडरों का प्रशिक्षण कराए जाने एवं ग्राम प्रधानों को योजना के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिया। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं है। जिलाधिकारी ने ग्राम्य विकास, स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों को अपने-अपने घरों पर सोलर पैनल स्थापित कर उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दिया। इस दौरान जिलाधिकारी ने पंजीकृत वेंडरों से जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली और पावर कारपोरेशन एवं बैंकर्स को वेंडरों तथा उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिया। कहा कि सभी विभाग परस्पर समन्वय स्थापित करते हुए योजना को प्रभावी ढंग से क्रियांवित करें। जागरूकता वाहन को डीएम ने किया रवाना जिलाधिकारी के साथ पुलिस अधीक्षक ने कलेक्ट्रेट परिसर से “प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना” के प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 15 दिनों तक जनपद में जनसामान्य को योजना के लाभ, पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाएगा। योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने पर प्रति किलोवाट पांच यूनिट प्रतिदिन तक की मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। इससे न केवल बिजली बिल में कमी आएगी, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आमदनी भी की जा सकेगी। सीडीओ आनंद कुमार शुक्ल, सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल, डीपीआरओ सर्वेश पांडेय, ईओ अकबरपुर बीना सिंह, एलडीएम कमलेश कुमार, पीओ नेडा आदि उपस्थित रहे।  

31 अक्टूबर तक चलेगा विदेश मंत्रालय का स्पेशल क्लीनिंग कैंपेन 5.0, जानें क्या-क्या होगा शामिल

नई दिल्ली भारतीय विदेश मंत्रालय ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत 'स्पेशल क्लीनिंग कैंपेन 5.0' शुरू किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि यह अभियान 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा। विदेश मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 4 से 31 अक्टूबर 2025 तक 'स्पेशल क्लीनिंग कैंपेन 5.0' शुरू किया गया है, जो स्वच्छता ही सेवा के तहत एक विशेष सफाई अभियान है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कार्यालयों में स्वच्छ और स्वस्थ कार्य वातावरण प्रदान करना है। अभियान के दौरान मंत्रालय कार्यालयों में सफाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, कचरे के सही निपटान और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक शिकायतों के त्वरित निपटान और कार्य पेंडेंसी कम करने पर भी जोर रहेगा। इससे पहले, मंत्रालय ने 'स्वच्छता ही सेवा 2025' अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया, जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मंत्रालय के सभी कार्यालयों, विदेश मिशनों, पोस्टों और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों में चलाया गया। इस दौरान 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और 'स्वच्छ भारत दिवस' भी मनाया गया। विदेश मंत्रालय ने 'स्वच्छता ही सेवा 2025' के पांच मुख्य क्षेत्रों पर फोकस किया, जिसमें स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों का परिवर्तन, स्वच्छ सार्वजनिक स्थान, सफाईमित्र सुरक्षा शिविर, क्लीन ग्रीन उत्सव और जागरूकता अभियान शामिल रहे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस पहल का नेतृत्व किया और 25 सितंबर को सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' श्रमदान कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अभियान के तहत मंत्रालय ने पहले ही स्वास्थ्य शिविर, 25 से अधिक सफाई मित्र सुरक्षा शिविर, 276 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों की सफाई, स्वच्छता रन, साइक्लोथॉन, पेंटिंग व निबंध प्रतियोगिताएं, मानव श्रृंखला, घर-घर जागरूकता अभियान, वेस्ट टू आर्ट इंस्टॉलेशन, सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान और बड़े पैमाने पर सफाई कार्य किए। मंत्रालय ने साफ-सफाई के प्रति समर्पित इस पहल को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया है ताकि हर कार्यालय और सार्वजनिक क्षेत्र में स्वच्छता कायम रहे।

ट्रेन टिकट बदलना हुआ आसान: ऑनलाइन सुविधा से अब तारीख बदलना होगा सिर्फ कुछ क्लिक में

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक नई सुविधा की घोषणा की है, जिससे कंफर्म ट्रेन टिकट की तारीख बदलना अब आसान और सस्ता हो जाएगा। जनवरी 2026 से IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर यात्री अपने टिकट की तारीख बिना किसी कैंसिलेशन चार्ज के बदल सकेंगे। इससे पुराने समय-consuming प्रक्रिया का अंत होगा, जिसमें टिकट कैंसिल कर दोबारा बुक करना पड़ता था। केंद्रीय रेल मंत्री ने किया ऐलान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह कदम यात्रियों की सुविधा और यात्रा को सस्ता और आसान बनाने के लिए उठाया गया है। नई सुविधा IRCTC के सेंट्रल रिजर्वेशन सिस्टम में जोड़ी जाएगी, जिससे कुछ ही क्लिक में टिकट की तारीख बदली जा सकेगी। नए सिस्टम का तरीका यात्री इस सुविधा का इस्तेमाल IRCTC वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर कर सकेंगे: IRCTC में लॉग इन करें। अपनी बुकिंग चुनें और ‘रिशेड्यूल’ विकल्प पर क्लिक करें। नई यात्रा की तारीख चुनें और सीट उपलब्धता चेक करें। यदि नई तारीख पर किराया बढ़ा है, तो केवल किराए का अंतर चुकाएं। सीट उपलब्ध होने पर टिकट तुरंत कंफर्म हो जाएगा। कैंसिलेशन चार्ज नहीं पहले यात्रियों को टिकट बदलने के लिए कैंसिल कर दोबारा बुक करना पड़ता था और कैंसिलेशन चार्ज देना पड़ता था। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं होगा। बस यदि नई तारीख पर किराया अधिक है, तो उसका अंतर देना होगा। सीट उपलब्धता जरूरी रिशेड्यूलिंग तभी संभव होगी जब नई चुनी गई तारीख पर सीट उपलब्ध हो। यदि सीट खाली नहीं है, तो टिकट वही रहेगा। यह सुविधा यात्रियों को अधिक लचीलापन देगी, लेकिन सीट मिलने पर ही बदलाव कंफर्म होगा। ऑनलाइन और आसान प्रक्रिया नई नीति के लागू होने के बाद यात्रियों को स्टेशन या रिजर्वेशन ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं। सब कुछ IRCTC की वेबसाइट और ऐप पर कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है। इससे समय की बचत होगी और अनावश्यक झंझट से राहत मिलेगी। जनवरी 2026 से पहले के नियम टिकट की तारीख ऑनलाइन नहीं बदली जा सकती। टिकट कैंसिल कर दोबारा बुक करना पड़ता है। रेलवे काउंटर से बुक किए गए टिकट को कुछ शर्तों पर बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए चार्ज देना पड़ता है। Tatkal और Premium Tatkal टिकटों में तारीख बदलने की अनुमति नहीं है। यात्रियों के लिए गेम चेंजर सुविधा इस नई पहल से लाखों यात्रियों को लाभ होगा। अब अगर अचानक यात्रा की योजना बदलती है तो टिकट कैंसिल कराने की जरूरत नहीं होगी। बस कुछ क्लिक में टिकट की तारीख आगे या पीछे की जा सकती है। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। जनवरी 2026 से यह फीचर IRCTC पर उपलब्ध होगा और रेलवे यात्रा को और भी सुविधाजनक और स्मार्ट बना देगा।