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सेना की तैयारी में खुलासा: भारत का डिफेंस स्ट्रैटेजी चीन-पाक और तुर्की के लिए चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड और मजबूत करने में जुटा है. दुनिया के तमाम देश अब ऐसे वेपन सिस्‍टम डेवलप करने लगे हैं, जिससे घर बैठे हजारों किलोमीटर दूर स्थित टार्गेट को तबाह किया जा सके. इसके तहत लंबी दूरी की मिसाइल्‍स डेवलप किए जा रहे हैं. इसे आमतौर पर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) भारत भी इसमें पीछे नहीं है. अग्नि सीरीज के तहत कई मिसाइलें विकसित की गई हैं, जिनका रेंज 2000 किलोमीटर से 5500 किलोमीटर तक है. अभी तक अग्नि-5 तक मिसाइल बनाई गई हैं. अग्नि-5 को आईसीबीएम का दर्जा हासिल है. अब इसी सीरीज में एक और महाबली तैयार किया जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के फ्यूचर डिफेंस प्‍लान को डिकोड किया है. उन्‍होंने अग्नि-VI को डेवलप करने की बात कही है. अग्नि-VI की जद में चीन, पाकिस्‍तान के साथ तुर्की जैसे देश भी होंगे. एक्‍सपर्ट का तो यह भी मानना है कि अग्नि-VI की रेंज में अमेरिका भी होगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्नि-VI मिसाइल को लेकर बड़ी बात कही है. उन्‍होंने अग्नि-VI के डेवलपमेंट पर काम चलने की बात कही है. अग्नि-V के रेंज को देखते हुए डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि अग्नि-VI की मारक क्षमता 10000 से 12000 किलोमीटर तक हो सकती है. यदि ऐसा है तो अग्नि-VI की जद में पूरा चीन, पाकिस्‍तान और तुर्की जैसे देश आ जाएंगे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने सीधे तौर पर पाकिस्‍तान का साथ दिया था. यह वही तुर्की है, जिसकी मदद करने में भारत ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी. बता दें कि कुछ साल पहले तुर्की में विनाशकारी भूकंप आया था, जिसमें व्‍यापक पैमाने पर तबाही मची थी. अग्नि-VI के डेवलप होने के बाद पाकिस्‍तान के दोनों जिगरी यार इसकी जद में आ जाएंगे. अग्नि-VI है बहुत खास DRDO के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा था कि अग्नि-VI एक फ़ोर्स मल्टीप्लायर साबित होगी. रिपाोर्ट की मानें तो अग्नि-VI का वजन 65–70 टन हो सकता है. यह अग्नि-V से भारी होगी. अग्नि-V का पहला परीक्षण अप्रैल 2012 में किया गया था. डॉ. सारस्वत ने एयरो इंडिया-2013 में कहा था कि अग्नि-VI की मारक क्षमता (रेंज) बताई नहीं जा सकती है. उन्होंने कहा था कि DRDO ने इसके डिज़ाइन का काम पूरा कर लिया है और अब हार्डवेयर बनाने पर काम चल रहा है. अग्नि-V की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्‍यादा है. उन्होंने यह भी बताया था कि विमान से लॉन्च की जाने वाली एंटी-रेडिएशन मिसाइल (शत्रु के राडार सिस्टम को नष्ट करने वाली) भी एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और हाल ही में प्रदर्शित की गई पानी के नीचे से लॉन्च होने वाली मिसाइल BO5/K-15 भी इसी सीरीज का हिस्सा है. डिफेंस मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह ने S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम और पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट खरीद पर भी भारत की रणनीति का खुलासा किया है.  S-400 और Su-57 की खरीद पर क्‍या बोले राजनाथ दरअसल, केंद्र सरकार ने रक्षा सशक्तीकरण और स्वदेशी उत्पादन को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की जरूरत बनी हुई है. उन्‍होंने कहा कि रूस की तरफ से यदि इसे उपलब्ध कराया गया तो भारत भविष्‍य में इसकी और यूनिट्स खरीद सकता है. इस बीच, रूसी उन्नत लड़ाकू विमान Su-57 के भारत में उत्पादन पर बातचीत अभी भी चल रही है. बता दें कि सुखोई-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. दूसरी तरफ, डीआरडीओ भी एडवांस्‍ड वेपन सिस्‍टम को तेजी से डेवलप करने में जुटा है. अग्नि-VI बैलिस्टिक मिसाइल के साथ ही न्यूक्लियर कैपेबल सैन्य पनडुब्बी का विकास और सेनाओं के थिएटर स्तरीय कमान स्‍ट्रक्‍चर (theaterization) पर काम जारी है. रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो न्यूक्लियर सबमरीन से देश की मैरीटाइम सिक्‍योरिटी को अत्‍यधिक मजबूती मिलेगी. ड्रोन और फाइटर जेट इंजन ड्रोन तकनीक पर भारत ने पिछले कुछ वर्षों में भारी निवेश और विकास देखा है. डिफेंस मिनिस्‍टर कहते हैं कि स्वदेशी ड्रोन प्लेटफ़ॉर्म पर तेज काम चल रहा है जो दोनों भूमिकाओं (निगरानी (surveillance) और स्‍ट्राइक) को अंजाम दे सकेंगे. ये आधुनिक यूएवी (Unmanned Aerial Vehicles) सीमापार खतरों का पता लगाने के लिए आईटीसी (intelligence, targeting, and connectivity) और तात्कालिक कार्रवाई में सहायक होंगे. विशेषज्ञ यह भी जोड़ते हैं कि स्वदेशी विकास से निर्भरता कम होगी और सप्‍लाई चेन पर नियंत्रण बढ़ेगा. राजनाथ सिंह ने फाइटर जेट को देश में ही डेवलप करने को लेकर भी बड़ी बात कही है. उन्‍होंने बताया कि अगले एक साल के भीतर देश में प्रयोग में आने वाले सभी फाइटर जेट इंजनों का उत्पादन भारत में ही होगा. इसके लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को एक्‍वीसीजन कॉन्‍ट्रैक्‍ट को अनिवार्य शर्त बनाया जा रहा है, ताकि विशेषज्ञता और विनिर्माण क्षमताएं घरेलू उद्योग में सुदृढ़ हों. इससे आत्मनिर्भरता के साथ-साथ रोजगार और स्पेयर-पार्ट्स की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी.

4.2 करोड़ लोगों के राशन पर संकट टला? एसएनएपी कटौती मामले में ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

नई दिल्ली अमेरिका में अब तक का सबसे लंबा सरकारी शटडाउन जारी है। शटडाउन की वजह से कर्मचारियों के वेतन, हवाई सेवा समेत अन्य चीजों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सप्लीमेंट न्यूट्रिशन असिस्टेंट प्रोग्राम (एसएनएपी) में कटौती के फैसले को अस्थायी तौर से मंजूरी दी है। ट्रंप सरकार ने अमेरिका में रहने वाले गरीबों को मिलने वाले भोजन की आधी राशि रोक दी। हालांकि, निचली अदालत ने इस रोक को हटाकर तुरंत फंड जारी करने का आदेश दिया था, जिसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया। निचली अदालत ने प्रशासन को शुक्रवार तक पूरा एसएनएपी भुगतान जारी करने का आदेश दिया था। इस मामले में फैसला सुनाते हुए एससी की जज के. ब्राउन ने कहा कि यह आदेश केवल तब तक ही लागू रहेगा, जब तक निचली अदालत इस मामले में अपना फैसला नहीं सुना देती है। तब तक सरकार के पास स्थिति को संभालने का वक्त है। इस मामले में आखिरी फैसला फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स की तरफ से दिया जाएगा। सर्किट कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसे ट्रंप सरकार को स्वीकार करना पड़ेगा। विस्कॉन्सिन, ओरेगन, हवाई, कैलिफोर्निया, कंसास, न्यू जर्सी, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन सहित कई राज्यों के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रभावी होने से पहले ही पूर्ण लाभ जारी करना शुरू कर दिया था। एसएनएपी अमेरिका में गरीब लोगों के लिए चलाया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत लगभग आठ में से एक अमेरिकी, जो कि निम्न-आय वाले परिवार हैं, को मदद मिलती है। एसएनएपी अमेरिका का सबसे बड़ा खाद्य सहायता कार्यक्रम है, जो करीब 42 मिलियन लोगों को भोजन खरीदने में मदद करता है। इन लाभार्थियों में अधिकतर लोग गरीबी रेखा पर या उससे नीचे जीवन यापन करते हैं। विस्कॉन्सिन में अदालत के आदेश के तुरंत बाद 337,000 परिवारों को 104 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि उपलब्ध करा दी गई। ओरेगन के गवर्नर ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए रात भर काम किया कि परिवारों को शुक्रवार तक खाना मिल सके।

‘ईज ऑफ डूइंग’ से पहले जरूरी ‘ईज ऑफ जस्टिस’ : प्रधानमंत्री का बड़ा बयान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी सहायता वितरण तंत्र को मजबूत करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कानूनी सहायता वितरण तंत्र की मजबूती और कानूनी प्रक्रिया देश से जुड़ा ये कार्यक्रम हमारी न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती देगा। मैं 20वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस की आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि अब न्याय सबके लिए पहुंच योग्य हो गया है। अब समय से न्याय होता है और किसी भी तरह की सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि देखे बिना हर व्यक्ति तक पहुंचता है। तभी वह सामाजिक न्याय की नींव बनता है। कानूनी सहायता इस बात में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है कि न्याय सभी के लिए पहुंच योग्य हो। पीएम मोदी ने कहा कि 'ईज ऑफ डूइंग' और 'ईज ऑफ लिविंग' तभी संभव है जब 'ईज ऑफ जस्टिस' भी सुनिश्चित हो। पिछले कुछ सालों में 'ईज ऑफ जस्टिस' को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और आगे भी हम इस दिशा में तेजी लाएंगे। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता (मीडिएशन) हमेशा हमारी सभ्यता का हिस्सा रही है। नया मीडिएशन एक्ट इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, उसे आधुनिक स्वरूप दे रहा है। मुझे विश्वास है कि इस प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता के लिए ऐसे रिसोर्स तैयार होंगे, जो विवादों को सुलझाने, सद्भाव बनाए रखने और मुकदमेबाजी को कम करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आज समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। न्याय वितरण में ई-कोर्ट परियोजना भी इसका एक शानदार उदाहरण है। जब लोग कानून को अपनी भाषा में समझते हैं तो इससे बेहतर अनुपालन होता है और मुकदमेबाजी कम होती है। इसके साथ ही ये भी आवश्यक है कि निर्णय और कानूनी दस्तावेज को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि यह वाकई बहुत सराहनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 80 हजार से अधिक जजमेंट्स को 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की पहल की है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह प्रयास आगे हाईकोर्ट और जिला स्तर पर भी जारी रहेगा।

चांद की ओर आगे बढ़ता भारत: ऑर्बिटर से मिले डेटा ने खोले ग्लोबल एक्सप्लोरेशन के नए रास्ते

नई दिल्ली  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से एडवांस डेटा प्रोडक्ट्स प्राप्त करने की जानकारी दी। इसमें चंद्रमा के पोलर रीजन के फिजिकल और डाइइलेक्ट्रिक प्रॉपर्टीज पर नए पैरामीटर्स भी शामिल हैं। इसरो का कहना है कि यह भविष्य में ग्लोबल एक्सप्लोरेशन की दिशा में एक बड़ा डेवलपमेंट है। संगठन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "इसरो को चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से एडवांस डेटा प्रोडक्ट्स प्राप्त हुए हैं, जो कि लूनर पोलर रीजन को लेकर गहरी समझ के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।" इसरो ने आगे बताया कि इसमें चंद्रमा के सतह की फिजिकल और डाइइलेक्ट्रिक प्रॉपर्टीज को लेकर जानकारी देने वाले महत्वपूर्ण पैरामीटर्स शामिल हैं। संगठन ने कहा, "यह चंद्रमा को लेकर भविष्य के ग्लोबल एक्सप्लोरेशन की दिशा में भारत का एक बहुत बड़ा योगदान होगा।" लूनर ऑर्बिट में चंद्रयान-2 ऑर्बिटर अपने डुअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (डीएफएसएआर) से 2019 से लगभग 1400 रडार डेटासेट और हाई-क्वालिटी डेटा उपलब्ध करवा चुका है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह पहला ऐसा इंस्ट्रूमेंट है, जो 25 मीटर/ पिक्सल के रेजोल्यूशन पर चंद्रमा को एल बैंड फुल-पोलरिमेट्रिक मोड में मैप करता है। यह एडवांस्ड रडार मोड वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों दिशाओं में सिग्नल को भेजने के साथ-साथ रिसीव भी करता है। यह चंद्रमा की सतह से जुड़ी प्रॉपर्टीज को स्टडी करने के लिए एक अच्छा तरीका बनता है। अहमदाबाद में स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के साइंटिस्ट ने इन डेटा सेट्स का इस्तेमाल कर वॉटर-आईस की संभावित मौजूदगी, सतह का खुरदरापन और डाईइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट पर एडवांस डेटा प्रोडक्ट्स डेवलप किए हैं। डाईइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट चंद्रमा की सतह की डेंसिटी और पोरसिटी जैसे फीचर्स को बताता है। इसरो ने जानकारी देते हुए बताया कि फुल-पोलरिमेट्रिक डेटा को एनालाइज करने के लिए एल्गोरिदम डेवलप कर लिए गए हैं। इसके अलावा, इसरो ने स्वदेशी रूप से डेटा प्रोडक्ट्स भी जेनरेट किए हैं। ये एडवांस्ड डेटा प्रोडक्ट्स चंद्रमा के पोलर रीजन को लेकर पहली और खास तरह की जानकारियों को लेकर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

एविएशन सिस्टम में दिक्कत: नेपाल के त्रिभुवन एयरपोर्ट पर कई फ्लाइट्स लेट

नई दिल्ली  दिल्ली में टेक्निकल ग्लिच के चलते उड़ानों में आई परेशानी के बाद आज नेपाल में भी यही समस्या देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को स्थानीय समयानुसार शाम 5.30 पर तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ गया है, जिसकी वजह से यहां से 5 उड़ानों को फिलहाल रोक दिया गया है। बाकी आगामी फ्लाइट्स पर भी संशय बरकरार है।   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट के रनवे की एयरफील्ड लाइटिंग में समस्या सामने आई थी। अभी कम से कम पांच उड़ानों को रोक दिया गया है और आगे की उड़ानों के निर्धारित कार्यक्रम पर भी दिक्कत बनी हुई है। गौरतलब है कि इस एयरपोर्ट से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। गौरतलब है कि नेपाल के अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर यह ग्लिच दिल्ली में आई परेशानी के एक दिन बाद सामने आया है। राजधानी दिल्ली के एयरपोर्ट पर आई समस्या की वजह से करीब 800 उड़ानों में समस्या आई थी। यहां पर ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम में समस्या आई थी। अधिकारियों के मुताबिक सुबह करीब 5.45 पर इसकी जानकारी मिली थी। इसके बाद उसे सुधारने की कोशिश की गई लेकिन अगले पंद्रह घंटों तक यह समस्या बनी रही। इसके बाद एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रात 9 बजे इस समस्या को सुलझाए जाने की घोषणा की थी। हालांकि, तब तक सैंकड़ों उड़ानों की आवाजाही प्रभावित रही। आपको बता दें दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशल एयरपोर्ट हर दिन करीब 1500 से ज्यादा फ्लाइट्स का संचालन करता है।

हेल्थ इश्यू वाले भारतीयों के लिए अमेरिका के दरवाज़े बंद? ट्रंप की नई वीज़ा गाइडलाइन से मचा हंगामा

वाशिंगटन  डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वीजा से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे हड़कंप मच गया है और खास कर भारतीयों में। इस नई नीति के तहत अब डायबिटीज, मोटापा जैसी आम हेल्थ इश्यू के अलावा हृदय रोग या कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अमेरिका का वीजा मिलने में मुश्किल हो सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनियाभर के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिए हैं कि वे वीजा आवेदकों की हेल्थ, उम्र और आर्थिक स्थिति की सख्ती से जांच करें। यदि किसी व्यक्ति के भविष्य में महंगे इलाज या सरकारी सहायता पर निर्भर होने की संभावना दिखे, तो उसका वीजा रद्द कर दिया जाए। रिपोर्ट में क्या कहा गया? नई नीति का मकसद यह है कि सरकार पर स्वास्थ्य खर्च का बोझ न बढ़े। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका आने वाले ऐसे विदेशी नागरिक जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, वे आगे चलकर “पब्लिक बेनिफिट” यानी सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकते हैं। KFF हेल्थ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में रहने के लिए आवेदन करने वाले विदेशी नागरिकों को कुछ विशेष चिकित्सीय स्थितियों के कारण अब वीजा अस्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में विदेश विभाग द्वारा दूतावासों को भेजे गए आधिकारिक पत्र का हवाला दिया गया है, जिसमें इन दिशानिर्देशों को विस्तार से बताया गया है। बढ़ती बीमारियों पर चिंता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की करीब 10% आबादी मधुमेह से पीड़ित है, जबकि हृदय रोग आज भी वैश्विक स्तर पर मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। ऐसे में इस नई नीति से लाखों लोगों के अमेरिका जाने के सपनों पर असर पड़ सकता है। भारत की करीब 35–40% वयस्क आबादी किसी न किसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारी (डायबिटीज, मोटापा या हृदय रोग) से प्रभावित है।   भारत में डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ताज़ा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार स्थिति इस प्रकार हैः- डायबिटीज (मधुमेह) ICMR–INDIAB रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 11.4% वयस्क आबादी (करीब 10.1 करोड़ लोग) डायबिटीज से पीड़ित है। विश्व स्तर पर भारत दूसरे स्थान पर है  जबकि पहले नंबर पर  चीन है ।   मोटापा (Obesity/Overweight) National Family Health Survey  (NFHS-5)की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वयस्कों में लगभग 23% लोग अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। शहरी क्षेत्रों में यह दर 30% से भी अधिक है, जबकि ग्रामीण इलाकों में लगभग 15-18%।    हृदय रोग (Cardiovascular Diseases) Indian Heart Association, WHO  के मुताबिक भारत में हर साल 2.8 करोड़ से ज्यादा लोग हृदय संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। देश में कुल मृत्यु का लगभग 28% कारण हृदय रोग हैं।    भारत पर असर     अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की यह नई वीजा नीति लागू होती है, तो भारत पर इसका सीधा असर पड़ेगा।     भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज और मोटापा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।     ऐसे में हजारों भारतीय छात्र, प्रोफेशनल्स और इमिग्रेंट्स जो अमेरिका में पढ़ाई या नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, उन्हें वीजा मिलने में कठिनाई हो सकती है।     भारतीय मेडिकल विजिटर्स या बुजुर्ग यात्रियों के लिए भी अमेरिका की यात्रा मुश्किल हो जाएगी।     स्वास्थ्य कारणों से वीजा अस्वीकृति बढ़ने से इंडिया-अमेरिका शैक्षणिक और व्यावसायिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।     ट्रंप प्रशासन के इस कदम को कई विशेषज्ञ “ह्यूमन राइट्स और डिस्क्रिमिनेशन” के नजरिए से भी देख रहे हैं।   

सीमा से समाज तक: भारत ही नहीं, विदेशों में भी सक्रिय है आरएसएस – मोहन भागवत

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दो दिवसीय व्याख्यानमाला के पहले दिन शनिवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संघ को पूरे विश्व का सबसे अनोखा संगठन बताया है। उन्होंने कहा कि आज संघ भारत समेत कई देशों में समाजसेवी कार्य कर रहा है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बेंगलुरु में 'संघ की यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने पर नए क्षितिज व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन किया।  विश्व संवाद केंद्र कर्नाटक द्वारा आयोजित इस सत्र में संघ के विकास और अपनी शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते भविष्य की दिशा के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा, "आरएसएस के समर्थन या विरोध में आपकी जो भी राय हो, वह तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, धारणा पर नहीं, इसलिए जब हमने अपने सौ वर्ष पूरे किए तो सोचा गया कि देश में चार जगहों (दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, कलकत्ता) पर ऐसी व्याख्यान श्रृंखला आयोजित की जाए।" उन्होंने कहा, "इसी जरूरत को देखते हुए संघ की कल्पना की गई और संघ को लागू किया गया। हमारे पास आक्रमणों का एक लंबा इतिहास रहा है और युद्ध के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करने का अंतिम प्रयास 1857 में हुआ था। यह एक अखिल भारतीय प्रयास था।" डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "कुछ लोगों ने कहा कि यह समय की बात है, इस लड़ाई में हम असफल रहे, हमें फिर से लड़ना होगा। हमें युद्ध जारी रखना होगा। हम इस लड़ाई में असफल रहे, हमें तैयारी करनी होगी और फिर से लड़ना होगा। यह सिलसिला 1945 तक चलता रहा और सुभाष बाबू कथित तौर पर विमान में लगी आग की दुर्घटना में मारे गए। दो साल में हमें आजादी मिल गई।" उन्होंने कहा, "सबसे पहले हमें संघ के बारे में जानना चाहिए। संघ के कई शुभचिंतक भी संघ को किसी विशेष परिस्थिति की प्रतिक्रिया बताते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। संघ का जन्म प्रतिक्रिया या विरोध से नहीं हुआ है। संघ हर समाज की एक अनिवार्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए है।" डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "भारत तभी विश्व गुरु बनेगा जब वह दुनिया को यही अपनेपन का सिद्धांत सिखाएगा। हमारी परंपरा ‘ब्रह्म’ या ‘ईश्वर’ कहती है, उसे आज विज्ञान ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ कहता है।"

परंपरा और सम्मान: आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी की विशेष मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आडवाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी पूर्व उप प्रधानमंत्री के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे थे। इससे पहले दिन में नरेंद्र मोदी ने एक्स पर आडवाणी को एक महान दृष्टिकोण वाला राजनेता बताया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा को एक मजबूत ताकत के रूप में उभारने में अहम भूमिका निभाने वाले आडवाणी शनिवार को 98 साल के हो गए। उन्हें इस वर्ष भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। मोदी ने एक्स पर लिखा कि लालकृष्ण आडवाणी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। महान दृष्टिकोण वाले और तीक्ष्ण बुद्धिमत्ता से संपन्न राजनेता आडवाणी जी का जीवन भारत की प्रगति को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने निस्वार्थ कर्तव्य और दृढ़ सिद्धांतों की भावना को सदैव अपनाया। उनके योगदान ने भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें। देश के अनुभवी राजनीतिज्ञों में शुमार लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म आठ नवंबर 1927 को हुआ था। सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) के कराची शहर में एक सिंधी हिंदू परिवार में पैदा हुए लाल कृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में देश के गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री रहे।  

‘आओ आतंकी बनो’… पाकिस्तान में खुलेआम चल रही नफरत की रैलियां

इस्लामाबाद   पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी संगठनों द्वारा खुली रैलियां करके लोगों, खासकर युवाओं और महिलाओं, को सक्रिय भर्ती के लिए भड़काने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। बहावलपुर में आयोजित एक हालिया रैली में जैश-ए-मोहम्मद का कट्टर कमांडर मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर ने भी हिंदुस्तान के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और जिहाद को महिमामंत्र के रूप में पेश किया जिसका ऑडियो मीडिया संस्थानों के पास मौजूद है। भर्ती और वैचारिक ब्रेनवॉश रैली में वक्ताओं ने खुले तौर पर जिहादी जीवन के फ़ायदों का बखान किया, गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं को “इज्जत” और “मकसद” का वादा देकर भर्ती करने की कोशिश की गई। आयोजकों ने धार्मिक ग्रंथों के कुछ संदर्भों का संदिग्ध व्याख्यात्मक इस्तेमाल कर हिंसा और कट्टरता को धार्मिक आदेश के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जबकि विद्वान और धार्मिक विशेषज्ञ इसे कुरान के सही सन्दर्भ के खिलाफ बताते हैं। धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग और ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव विश्लेषकों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर जैसी सुरक्षा कार्रवाइयों के बाद कुछ आतंकवादी कमानें खुले प्रचार-प्रसार पर ही निर्भर हो गई हैं ताकि नए अनुयायी जुटाए जा सकें। हालांकि जनमानस में बढ़ती नाराज़गी और आतंकवाद के कारण होने वाली मौतों के बाद एक बड़ा वर्ग अब आतंकवाद के प्रति संदेह और विरोध प्रकट कर रहा है। कई नागरिक यह भी मानते हैं कि धर्म के नाम पर किए जा रहे भड़काऊ बयान वास्तविक धार्मिक शिक्षा का विकृत रूप हैं। कौन है मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर? मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर को जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात नेताओं में गिना जाता है; वह मसूद अजहर का भाई बताया जाता है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में भी शामिल रहा है। इतिहास में वह हाई-प्रोफाइल मामलों से जोड़कर देखा जाता रहा है। उसकी सक्रियता और सार्वजनिक रैलियाँ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। महिला ब्रिगेड और सतही ‘समाजिक काम’ का आवरण रैलियों और संगठनों का रिक्रूटमेंट सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है मसलन मसूद अजहर की बहन सईदा अजहर जैसी समर्थक-नेतृत्व महिलाओं को निशाना बनाकर गरीब महिलाओं और लड़कियों को भी भड़काने का काम चल रहा है। ये समूह अक्सर सामाजिक सहायता, शिक्षा या राहत कार्यों का आवरण देकर नई भर्ती करते हैं। स्थानीय समुदायों में भय और असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है। युवाओं का चरित्रहीनकरण और गलत रास्ते पर जाना समाज के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा-चुनौती बन सकता है। धर्म और धार्मिक ग्रंथों के गलत उपयोग से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। कार्रवाई की आवश्यकता विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार-सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय धार्मिक मौलवियों, नागरिक समाज और शिक्षा संस्थानों को मिलकर इस वैचारिक युद्ध का सामना करना होगा। वास्तविक धार्मिक शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार, आर्थिक अवसरों का सृजन और युवाओं के लिए वैकल्पिक रास्तों का निर्माण आवश्यक है।   

गेहूं बैन का साइड इफेक्ट: रावलपिंडी-इस्लामाबाद में आटे की किल्लत, जनता परेशान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी में आटे का भीषण संकट गहराता जा रहा है। पंजाब फूड डिपार्टमेंट द्वारा दोनों शहरों की मिलों को गेहूं सप्लाई पर अचानक प्रतिबंध लगाने के बाद हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे हैं। फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने सोमवार से आटे की सप्लाई बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे देश की दो अहम आबादी वाले इलाकों में खाद्य आपात स्थिति की आशंका बढ़ गई है। बाजारों से गायब हुआ आटा मीडिया के अनुसार, पंजाब सरकार के आदेश के बाद शुक्रवार रात से ही सभी आटा मिलों, तंदूर मालिकों और किराना दुकानों के गेहूं और आटे के ऑर्डर रद्द कर दिए गए हैं। इसके चलते बाजारों में लाल आटा (रेड फ्लोर) और फाइन फ्लोर दोनों की भारी किल्लत हो गई है। रावलपिंडी फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने इस संकट पर आपात बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता पैट्रन-इन-चीफ शेख तारिक सादिक ने की। उन्होंने पंजाब सरकार के निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “रावलपिंडी और इस्लामाबाद पूरी तरह पंजाब की गेहूं सप्लाई पर निर्भर हैं। अगर परमिट तुरंत बहाल नहीं किए गए, तो उत्पादन और वितरण दोनों ठप हो जाएंगे। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह “अविवेकपूर्ण फैसला” वापस नहीं लिया, तो स्थिति मानवीय संकट में बदल सकती है। तंदूर मालिकों का गुस्सा: कीमतें दोगुनी, दुकानें सील पाकिस्तान नानबाई एसोसिएशन के अध्यक्ष शफीक कुरैशी ने बताया कि 79 किलो के लाल आटे की बोरी की कीमत 5,500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 11,000 रुपये हो गई है। वहीं फाइन फ्लोर की कीमत 6,200 से बढ़कर 12,600 रुपये पहुंच गई है।कुरैशी ने सरकार पर “राज्य उत्पीड़न” (State Oppression) का आरोप लगाते हुए कहा कि 1 अक्टूबर से अब तक दर्जनों तंदूर गिराए गए, 79 सील किए गए, और 100 से अधिक मालिकों पर 25,000–50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर गेहूं आपूर्ति की गड़बड़ी दूर नहीं की गई, तो रोटी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी और जनता का सब्र टूट सकता है।”