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अंतरिक्ष संघर्ष: भारत की खोज पर विराम, चंद्रमा पर टकराव और पृथ्वी का जिम्मा

  चंद्रमा, जो हमेशा से शांत और निर्जीव ग्रह के रूप में जाना जाता रहा है, वहां जंग लगने की घटना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। चांद पर हवा का अभाव होने के बावजूद हेमेटाइट नामक लौह-समृद्ध खनिज की मौजूदगी ने इस रहस्य को और बढ़ा दिया है। हेमेटाइट आमतौर पर ऑक्सीजन और पानी के संपर्क में आने से बनता है, लेकिन चंद्रमा पर दोनों तत्व सीमित मात्रा में हैं। भारत के चंद्रयान-1 मिशन की रिसर्च ने भी इसी दिशा में संकेत दिए थे, जिससे अब इस खोज को और पुष्टिप्राप्ति मिली है।  नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक, जंग तब बनती है जब लोहा ऑक्सीजन और पानी के संपर्क में आता है। हाल ही में हुए अध्ययनों में चंद्रमा की सतह, विशेषकर ध्रुवीय क्षेत्रों में, हेमेटाइट पाए गए हैं। यह खोज चंद्रमा पर जंग लगने की प्रक्रिया को समझने में नए आयाम खोलती है।साल 2020 में भारतीय चंद्रयान-1 मिशन ने चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में हेमेटाइट की उपस्थिति की पुष्टि की थी। इस मिशन ने चंद्रमा की सतह से डेटा इकट्ठा किया, जिसमें पानी के अणुओं के प्रमाण भी शामिल हैं। नासा और हवाई इंस्टीट्यूट ऑफ जियोफिजिक्स एंड प्लैनेटोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इस डेटा का विश्लेषण किया और हेमेटाइट के संकेत पाए। वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा पर जंग लगने में पृथ्वी का योगदान हो सकता है। चंद्रमा पृथ्वी की चुंबकीय पूंछ के संपर्क में आता है, जो ऑक्सीजन अणुओं को चंद्रमा तक ले जाने में मदद करती है। चंद्रमा के 28 दिन के चक्र में लगभग छह दिनों तक पूर्णिमा के समय यह प्रक्रिया सबसे प्रभावी होती है। यह ऑक्सीजन के स्रोत को समझाने में मदद करती है, हालांकि पानी की भूमिका अभी भी रहस्यमय बनी हुई है। जिलियांग और उनकी टीम ने प्रयोगशाला में पृथ्वी की हवा की नकल कर यह देखा कि कैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन आयनों से चंद्रमा के लौह-समृद्ध खनिज क्रिस्टल हेमेटाइट में बदल सकते हैं। कुछ क्रिस्टलों में यह प्रक्रिया उलटकर भी होती है, जिससे लोहे में परिवर्तन होता है। यह प्रयोग चंद्रमा पर जंग लगने की संभावित प्रक्रियाओं को समझने में मददगार साबित हुआ है।  

एसएमएस-ओटीपी पर निर्भरता खत्म: अप्रैल 2026 से आरबीआई के नए भुगतान प्रमाणीकरण नियम

 नई दिल्ली डिजिटल भुगतान पर नए नियम, जो एसएमएस-आधारित वन-टाइम पासवर्ड से परे दो-कारक प्रमाणीकरण (2एफए) का अनुपालन करने के अधिक तरीकों की अनुमति देते हैं, 1 अप्रैल से लागू होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को यह एलान किया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्रमाणीकरण का आधार "यूजर्स के पास कुछ है", "यूजर जो जानता है" या "यूजर जो है" हो सकते हैं। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ पासवर्ड, एसएमएस-आधारित ओटीपी, पासफ्रेज, पिन, कार्ड हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर टोकन, फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक्स का कोई अन्य रूप (डिवाइस-नेटिव या आधार-आधारित) शामिल हो सकते हैं। भारत दुनिया के उन बाजारों में से एक है जो 2FA पर जोर देते हैं। इसके तहत वित्तीय क्षेत्र के खिलाड़ी लेनदेन को निष्पादित करने के लिए एसएमएस-आधारित अलर्ट पर भरोसा करते रहे हैं। आरबीआई ने (डिजिटल भुगतान लेनदेन के लिए प्रमाणीकरण तंत्र) निर्देश, 2025 लॉन्च किया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि 2FA अनिवार्य बना रहेगा और एसएमएस ओटीपी का भी उपयोग किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने पहली बार फरवरी 2024 में इस कदम की घोषणा की थी ताकि भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को वैकल्पिक प्रमाणीकरण तंत्र को लागू करने के लिए तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने में सक्षम बनाया जा सके। आरबीआई ने कहा कि जोखिम प्रबंधन के नजरिए से वित्तीय प्रणाली के हितधारक लेनदेन के स्थान, उपयोगकर्ता के व्यवहार पैटर्न, डिवाइस विशेषताओं, ऐतिहासिक लेनदेन प्रोफाइल आदि के आधार पर मूल्यांकन के लिए लेनदेन की पहचान कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यदि इन निर्देशों का पालन किए बिना किए गए लेनदेन से कोई नुकसान होता है, तो जारीकर्ता को बिना किसी आपत्ति के ग्राहक को नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी। इसमें कार्ड जारीकर्ताओं से गैर-आवर्ती, सीमा-पार कार्ड नॉट प्रेजेंट (सीएनपी) लेनदेन को मान्य करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने को भी कहा गया है। इसके तहत 1 अक्टूबर, 2026 से विदेशी व्यापारी या विदेशी अधिग्रहणकर्ता की आरे से प्रमाणीकरण के लिए अनुरोध किया जा सकेगा।

कर्मचारियों को बड़ी राहत: जनवरी से ATM के ज़रिए मिलेगी PF की सुविधा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के मेंबर्स के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है. ईपीएफओ जनवरी 2026 से एटीएम से पैसा निकालने की सर्विस शुरू कर सकता है. खबरों के मुताबिक, ईपीएफओ की सर्वोच निर्णय लेने वाली संस्‍था CBT अक्‍टूबर के दूसरे सप्‍ताह में होने वाली अपनी आगामी बोर्ड बैठक में ATM से पैसे निकालने की सुविधा को मंजूरी दे सकती है.  ATM से पैसा निकालने की सुविधा से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी. उन्‍हें पैसा निकालने के लिए किसी तरह के ऑनलाइन क्‍लेम की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी. साथ ही लंबे इंतजार की भी जरूरत खत्‍म हो जाएगी. कर्मचारी सीधे एटीएम ब्रांच जाकर ATM से पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं.   सीबीटी के एक सदस्य ने मनीकंट्रोल को बताया कि हमें पता चला है कि ईपीएफओ का आईटी ढांचा ATM जैसे ट्रांजेक्‍शन की अनुमति देने के लिए तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि एटीएम से पैसे निकालने की एक सीमा होगी, लेकिन इस पर चर्चा होनी बाकी है.  मंत्रालय ने आरबीआई से की बात  लेबर मिनिस्‍ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने ईपीएफओ एटीएम की सुविधा शुरू करने के लिए बैंकों के साथ-साथ, RBI से भी बात की है. अधिकारी ने कहा कि एटीएम सुविधा को एक जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है, क्‍योंकि सरकार लोगों को उनके पीएफ अकाउंट तक ज्‍यादा पहुंच देना चाहती है.  ईपीएफओ के पास कुल 28 लाख करोड़ ईपीएफओ के तहत अभी 7.8 करोड़ लोग रजिस्‍टर्ड हैं, जिन्‍होंने मिलकर EPFO के पास 28 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा डिपॉजिट किया है. 2014 में यह आंकड़ा- 7.4 लाख करोड़ रुपये और 3.3 करोड़ था.  PF विड्रॉल के लिए जारी होगा कार्ड  सूत्रों ने बताया कि संभावना है कि EPFO अपने सदस्यों को एक विशेष कार्ड जारी करेगा, जिससे वे ATM से अपनी राशि का एक हिस्सा निकाल सकेंगे. इस साल की शुरुआत में EPFO ने कस्‍टमर्स के लिए पैसे की उपलब्‍धता को आसान बनाने के लिए ऑटोमैटिव क्‍लेम सेटलमेंट अमाउंट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया था. इस प्रॉसेस के तहत ऑटोमैटिक सिस्‍टम क्‍लेम की पात्रता की पुष्टि के लिए डिजिटल जांच और एल्‍गोरिदम के एक सेट का उपयोग करती है. पूरी प्रक्रिया सिस्टम-संचालित है और सदस्य के केवाईसी विवरण पर आधारित है.  विशेषज्ञों का कहना है कि ATM के माध्यम से ईपीएफओ फंड विड्रॉल की अनुमति देने से सदस्यों के लिए धन तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो जाएगी. खासतौर से इमरजेंसी के समय में, क्योंकि वर्तमान में विड्रॉल में अक्सर प्रक्रियागत देरी और कागजी कार्रवाई शामिल होती है. 

‘भारत से दिक्कत है…’ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस का विवादित बयान फिर चर्चा में

ढाका  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक बार फिर भारत पर तीखी टिप्पणी की है. न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में यूनुस ने आरोप लगाते हुए कहा कि फिलहाल भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण हैं क्योंकि भारत को उनके देश के छात्रों द्वारा किए गए हालिया आंदोलन पसंद नहीं आए. यूनुस ने कहा, "हमें अभी भारत के साथ कुछ दिक्कते हैं. उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि बांग्लादेश में छात्र क्या कर रहे हैं. और वे शेख हसीना की मेजबानी कर रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ये सारी समस्याएं पैदा कीं और अपने कार्यकाल में कई युवा लोगों को मारने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया. यही चीज भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव पैदा कर रही है. उन्होंने आगे दावा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से लगातार भारत की ओर से फर्जी खबरें और प्रचार फैला रहे हैं, जिसमें इस आंदोलन को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. वे इसे इस्लामी आंदोलन और छात्रों को तालिबानी बता रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्हें ट्रेनिंग दी गई है. वे तो यहां तक कहते हैं कि मैं भी तालिबानी हूं. हालांकि मेरे पास दाढ़ी नहीं है और मैं घर पर ही रहा. फिर भी, मेरा प्रचार लगातार जारी है. यूनुस ने जोर देते हुए कहा कि इसलिए मुझे सामने आकर अपनी पहचान दिखानी पड़ी. उन्होंने कहा, "देखिए, यह मुख्य तालिबान है. यही स्थिति वास्तविकता में है." बता दें कि यह टिप्पणी तब आई है जब बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार न्यूयॉर्क में हैं और संयुक्त राष्ट्र की सत्र में भाग लेने आए हैं. यूनुस का कहना है कि भारत के साथ यह तनाव केवल छात्रों के आंदोलनों और मीडिया प्रचार के कारण उत्पन्न हुआ है और इसे राजनीतिक रूप से बढ़ाया जा रहा है.

तेजस Mk1A से दोगुनी होगी वायुसेना की ताकत, HAL को मिला अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर

नई दिल्ली भारत ने अपनी हवाई ताकत को नया आयाम देते हुए 62,370 करोड़ रुपये की मेगा डील पर मुहर लगा दी है. रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 97 तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk-1A) खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया है. यह सौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से मंजूरी मिलने के एक महीने बाद हुआ. इससे पहले फरवरी 2021 में सरकार ने 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 48,000 करोड़ रुपये की डील की थी. तेजस Mk-1A की खासियतें तेजस पूरी तरह स्वदेशी मल्टी-रोल फाइटर है, जो दुश्मन के सबसे खतरनाक वातावरण में भी उड़ान भर सकता है. इसमें आधुनिक Swayam Raksha Kavach सिस्टम और अत्याधुनिक कंट्रोल एक्ट्यूएटर्स होंगे. इस वर्जन में 64% से ज्यादा इंडिजिनस कॉन्टेंट और 67 नई देसी टेक्नॉलॉजीज शामिल की जा रही हैं. तेजस के ऑपरेशन सिर्फ एयर डिफेंस तक सीमित नहीं, बल्कि यह मैरिटाइम रिकॉनिसेंस और सटीक स्ट्राइक रोल्स भी अंजाम देने में सक्षम है. 2027 से शुरू होंगी डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक तेजस Mk-1A की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी. यह सिंगल-इंजन जेट भारतीय वायुसेना के पुराने हो चुके MiG-21 बेड़े की जगह लेगा. स्क्वॉड्रन गैप भरेगा तेजस IAF की मंजूर ताकत 42 स्क्वॉड्रन की है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 31 स्क्वॉड्रन ही सक्रिय हैं. नए तेजस फाइटर्स इस खालीपन को भरेंगे और दुश्मनों को जवाब देने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. ‘मेक इन इंडिया’ का सशक्त प्रतीक तेजस प्रोजेक्ट न सिर्फ भारतीय वायुसेना को मजबूती देगा, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा प्रतीक भी बनेगा. HAL की यह डील घरेलू उद्योग को नई तकनीक, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा धक्का देगी. तेजस एमके-1ए डिलीवरी में आएगी तेजी इसी महीने HAL को तेजस LCA MK-1ए के लिए तीसरा जीई-404 इंजन मिल गया. सितंबर 2025 के अंत तक चौथा इंजन भी मिलने की उम्मीद है. यह इंजन अमेरिकी कंपनी से भारत को सप्लाई हो रहे हैं. इंजन की उपलब्धता से तेजस उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ेगी. एचएएल का कहना है कि तय योजना के मुताबिक भारतीय वायुसेना को विमान सौंपने में अब आसानी होगी. सूत्रों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के अंत तक एचएएल को कुल 12 इंजन मिल सकते हैं. तेजस का सफर: 1983 से शुरू हुई कहानी LCA तेजस कार्यक्रम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई. 1983 में भारत सरकार ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को प्रोजेक्ट सौंपा. इसका मकसद था रूस के पुराने मिग-21 को बदलना. 2001 में पहली उड़ान भरी गई. 2003 में नाम पड़ा 'तेजस' – जो संस्कृत में 'चमकदार' या 'रेडिएंट' होता है.  2015 में IAF को पहला उत्पादन मॉडल मिला. 2016 में पहला ऑपरेशनल तेजस सौंपा गया. लेकिन देरी हुई – टेक्नोलॉजी चैलेंजेस और फंडिंग की वजह से. फिर भी, भारतीय वैज्ञानिकों ने एवियोनिक्स और रडार खुद बनाए. आज तेजस 4.5 जेनरेशन का मल्टीरोल फाइटर है, जो हवा-हवा, हवा-जमीन और रेकॉन मिशन कर सकता है. पहले सौदे: 2006 में 20 तेजस का ऑर्डर मिला. 2021 में 83 और तेजस Mk1A के लिए 48,000 करोड़ का सौदा हुआ. अब यह 97 का तीसरा बड़ा ऑर्डर है. कुल 220 विमान IAF को मिलेंगे. IAF 324 विमान (18 स्क्वाड्रन) खरीदने की योजना बना रहा है. Mk1A में क्या खास? एडवांस फीचर्स की पूरी लिस्ट तेजस Mk1A तेजस का सबसे एडवांस वर्जन है. यह सिंगल-इंजन, डेल्टा विंग वाला विमान है. इसमें हॉरिजॉन्टल टेल नहीं है, लेकिन फिन लगा है. खाली वजन करीब 5,450 किलोग्राम, अधिकतम टेकऑफ वजन 13,500 किलोग्राम. इंजन GE F404-IN20 है, जो 85 KN थ्रस्ट देता है. अधिकतम स्पीड 1.6 मैक (लगभग 1,900 किमी/घंटा).  मुख्य फीचर्स     उत्तम AESA रडार: एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे. दुश्मन को 200 किमी दूर पकड़ता है. मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग.     स्वयं रक्षा कवच: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम. दुश्मन रडार से बचाता है.     कंट्रोल सरफेस एक्ट्यूएटर्स: बेहतर मैन्यूवरिंग.     स्वदेशी कंटेंट: 64% से ज्यादा. पहले सौदे से 67 नई चीजें जोड़ी गईं.     अन्य: डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले, मिड-एयर रिफ्यूलिंग. हल्का वजन (6,560 किग्रा), एडवांस एवियोनिक्स, स्टेल्थ फीचर्स.  यह विमान IAF की ऑपरेशनल जरूरतें पूरी करेगा. बालाकोट जैसे मिशनों में उपयोगी. IAF के लिए क्यों जरूरी? रणनीतिक महत्व पुराने मिग-21 रिटायर हो रहे हैं. तेजस Mk1A से नई स्क्वाड्रन बनेंगी. यह स्वदेशी फाइटर दुश्मन (पाकिस्तान, चीन) के खिलाफ मजबूत होगा. सरकार का फोकस इंडिजेनाइजेशन पर है. डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत यह सौदा 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगा. अर्थव्यवस्था और नौकरियों को बूस्ट यह प्रोजेक्ट 105 भारतीय कंपनियों को जोड़ेगा. वे डिटेल्ड पार्ट्स बनाएंगी. 6 साल में हर साल 11,750 डायरेक्ट और इंडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी. HAL के शेयर 2% ऊपर चढ़ गए. एयरोस्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा. MSME और एकेडेमिया को फायदा. भविष्य की योजनाएं: Mk2 और AMCA तेजस Mk1A के बाद Mk2 आएगा, जो बड़ा और ज्यादा ताकतवर होगा. AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 5th जेन स्टेल्थ फाइटर पर काम चल रहा है. HAL और प्राइवेट कंपनियां मिलकर भारत को एयरोस्पेस पावर बनाएंगी.  IAF दुनिया की टॉप एयरफोर्स बनेगी.

‘रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद नहीं रहूंगा राष्ट्रपति’ – जेलेंस्की का चौंकाने वाला ऐलान

कीव रूस के साथ करीब चार साल से चल रही जंग के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने साफ कहा कि रूस के खिलाफ युद्ध खत्म होने के बाद वह राष्ट्रपति पद छोड़ने को तैयार हैं. जेलेंस्की ने कहा कि मेरा मकसद जंग खत्म करना है और उसके बाद इस पद पर नहीं रहना चाहता. 'सीजफायर हुआ तो कराएंगे चुनाव'  जेलेंस्की ने कहा कि उनका इरादा शांतिकाल में अपने देश का नेतृत्व करने का नहीं है. जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अगर रूस के साथ सीजफायर हो जाता है, तो वह यूक्रेन की संसद से चुनाव कराने के लिए कहेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या जंग खत्म समाप्त होने पर वह अपना काम खत्म मानेंगे, जेलेंस्की ने कहा कि वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा मकसद जगं खत्म करना है, न कि पद के लिए भाग-दौड़ को जारी रखना.' यूक्रेन में जंग की वजह से चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर तमाम आलोचकों ने इस मुद्दे को उठाया है. जेलेंस्की ने कहा कि सुरक्षा स्थिति और यूक्रेन का संविधान, दोनों ही चुनाव कराने में चुनौतियां पेश करते हैं. लेकिन उनका मानना है कि चुनाव मुमकिन हैं. ट्रंप को बताई अपने दिल की बात संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से कीव लौटने से ठीक पहले जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में यह इंटरव्यू दिया है. जब उनसे पूछा गया कि अगर कई महीनों के सीजफायर पर सहमति बन जाती है, तो क्या वह चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध होंगे, तो उन्होंने 'हां' में जवाब दिया. जेलेंस्की ने कहा कि मंगलवार को जब वह राष्ट्रपति ट्रंप से मिले थे तो उन्होंने उनसे कहा था कि अगर सीजफायर होता है तो हम इस टाइम पीरियड का इस्तेमाल कर सकते हैं और मैं संसद को यह संकेत दे सकता हूं.' जेलेंस्की ने कहा कि वह समझते हैं कि लोग एक नए जनादेश वाले नेता की चाहत रखते हैं, जो हमेशा के लिए शांति कायम करने के लिए जरूरी फैसले ले सके. उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण फिलहाल चुनाव आयोजित करना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन उनका मानना है कि ऐसा किया जा सकता है. मई 2024 में ही खत्म हो चुका है कार्यकाल यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की 2019 में भारी वोटों से निर्वाचित हुए थे. अगर रूस के खिलाफ जंग नहीं छिड़ती तो उनका पांच साल का कार्यकाल मई 2024 में ही खत्म हो जाता. युद्ध के शुरुआती महीनों में उनकी लोकप्रियता करीब 90% तक बढ़ गई थी. फरवरी में ट्रंप ने दावा किया था कि यह घटकर 4% रह गई है, लेकिन हाल के ज़्यादातर सर्वे में यह 60% से कहीं ज़्यादा बताई गई है. जुलाई में जब उनके संसदीय सहयोगियों ने यूक्रेन की स्वतंत्र भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसियों को कमज़ोर करने का कदम उठाया, तो ज़ेलेंस्की को घरेलू विरोध का सामना करना पड़ा. हालांकि इस कदम को तुरंत पलट दिया गया, लेकिन इसने जेलेंस्की के नेतृत्व में यूक्रेन की लोकतांत्रिक प्रगति को लेकर चिंताएं जरूर पैदा कर दीं. जंग के बीच चुनाव कराने पर पाबंदी अगर जेलेंस्की चुनाव आयोजित करने के लिए किसी विधेयक का समर्थन करते हैं, तो संसद में उनकी पार्टी के बड़े बहुमत को देखते हुए यह आसानी से पारित हो जाएगा. असल बात यह है कि यूक्रेन के संविधान के तहत मार्शल लॉ के दौरान चुनावों पर साफ तौर पर प्रतिबंध है. अगर उस पर काबू पा भी लिया जाए, तो सुरक्षा स्थिति के कारण रसद व्यवस्था बेहद मुश्किल हो जाएगी. यूक्रेन का लगभग 20% हिस्सा रूस के कब्ज़े में है और लाखों यूक्रेनी विस्थापित हैं. अगर मॉस्को इस प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो पूरा देश रूसी हमलों की जद में होगा. ज़ेलेंस्की ने कहा, 'मुझे लगता है कि सीजफायर के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चुनाव कराने की संभावना दे सकती है, ऐसा हो सकता है.'

समीर वानखेड़े ने शाहरुख पर किया मानहानि का केस, आर्यन की सीरीज बनी विवाद का कारण

मुंबई  शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान अपनी नेटफ्लिक्स सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' को लेकर विवादों में आ गए हैं. समीर वानखेड़े ने सीरीज में अपने चित्रण के लिए शाहरुख खान, गौरी खान, नेटफ्लिक्स इंडिया और रेड चिलीज के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करवाया है. वानखेड़े के वकील जतिन पाराशर ने कहा कि समीर का आरोप है कि आर्यन खान ने अपनी सीरीज में उनके जैसा हूबहू शख्स दिखाया गया है. शो में उनका कैरेक्टर अससीनेशन किया गया. शो के चलते समीर वानखेड़े और उनके परिवार को गालियां कहानी पड़ रही हैं. उन्हें भ्रष्ट बताया जा रहा है. ऐसे में आर्यन के शो के उस हिस्से को डिलीट किया जाए. समीर वानखेड़े ने दर्ज किया मामला  आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया है. इसमें सुपरस्टार शाहरुख खान और गौरी खान के प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और अन्य के खिलाफ स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा, घोषणा और हर्जाने की मांग की गई है. यह मुकदमा रेड चिलीज की बनाई और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' में दिखाए एक झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक वीडियो के कारण दायर किया गया है. यह सीरीज नशीली दवाओं के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों का भ्रामक और नकारात्मक चित्रण करती है, जिससे कानून प्रवर्तन संस्थानों में जनता का विश्वास कम होता है. इस सीरीज को जानबूझकर समीर वानखेड़े की प्रतिष्ठा को रंगभेदी और पक्षपातपूर्ण तरीके से बदनाम करने के इरादे से तैयार और कार्यान्वित किया गया है. विशेष रूप से तब, जब समीर वानखेड़े और आर्यन खान से संबंधित मामला बॉम्बे उच्च न्यायालय और मुंबई के एनडीपीएस विशेष न्यायालय में लंबित और विचाराधीन है. इसके अलावा, सीरीज में एक सीन में जब एक किरदार 'सत्यमेव जयते' कहता है, तो दूसरा उसे मिडल फिंगर दिखाकर, अश्लील इशारा करता है. 'सत्यमेव जयते', राष्ट्रीय प्रतीक का हिस्सा है. इसलिए इसपर मिडल फिंगर दिखाना राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के प्रावधानों का गंभीर और संवेदनशील उल्लंघन है, जिसके कानून के तहत दंडनीय परिणाम हो सकते हैं. ऐसे में 'सत्यमेव जयते' वाले सीन को भी हटाया जाए. सीरीज की सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करती है, क्योंकि यह अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के उपयोग के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने का प्रयास करती है. समीर वानखेड़े ने ये सभी आरोप अपने मुकदमे में लगाते हुए 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. इस रकम को वो टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल को कैंसर रोगियों के इलाज के लिए दान करेंगे.

रात में अकेले बुलाता, कमरे में कैमरा छिपाया – स्वामी चैतन्यानंद के खिलाफ महिलाओं का खुलासा

नई दिल्ली खुद को आध्यात्मिक गुरु और शिक्षा के क्षेत्र का मार्गदर्शक बताने वाला स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती अब फरार है. यह वही चेहरा है, जो किताबों के सहारे खुद को 'महान लेखक और दार्शनिक' की पहचान बनाता रहा, मगर असलियत में वह उन मासूम छात्राओं का शिकारी निकला जिन्हें उसने ज्ञान और सुरक्षा का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाया. चौंकाने वाली ये कहानी किसी उपन्यास की तरह लग सकती है, लेकिन एफआईआर की कॉपी और दर्ज बयानों ने साफ कर दिया है कि यह कोई गढ़ी हुई कथा नहीं, बल्कि काली हकीकत है. FIR में दर्ज काली करतूत एफआईआर की पन्नों में दर्ज आरोप पढ़कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की छात्राओं को देर रात स्वामी अपने क्वार्टर में बुलाता था. छात्राओं के हॉस्टल में “सुरक्षा” के नाम पर गुप्त कैमरे लगाए गए. एक छात्रा को उसकी मर्जी के खिलाफ नया नाम अपनाने पर मजबूर किया गया. छात्राओं को विदेश यात्राओं और देर रात प्राइवेट रूम में बुलाने के लिए दबाव बनाया जाता था. डीन सहित कुछ स्टाफ छात्राओं को स्वामी की मांगें मानने पर मजबूर करते और शिकायतों को दबा देते. विरोध करने वाली छात्राओं को निलंबन और निष्कासन की धमकी मिलती. व्हाट्सऐप और एसएमएस के जरिए अश्लील संदेश भेजे जाते थे. एफआईआर में साफ लिखा है कि छात्राओं को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया. विरोध करने पर न सिर्फ पढ़ाई बल्कि करियर दांव पर लगाने की धमकी दी जाती. छात्राओं के बयान ने खोल दी पोल जांच एजेंसियों ने अब तक 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए हैं. इनमें से 17 ने मजिस्ट्रेट के सामने साफ कहा कि बाबा गालियां देता, अश्लील मैसेज भेजता और अनुचित हरकतें करने की कोशिश करता था. कई छात्राओं ने बताया कि तीन महिला वार्डन उन्हें जबरन बाबा के कमरे तक ले जातीं. यानि पूरा सिस्टम एक साजिश की तरह रचा गया था, ताकि कोई बाहर आवाज न उठा सके. पहले भी रहा विवादों में ये पहली बार नहीं है जब चैतन्यानंद विवादों में आया हो. 2009 में डिफेंस कॉलोनी थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ. जबकि 2016 में वसंत कुंज थाने में भी छेड़छाड़ की शिकायत हुई. हर बार उसने रसूख, पैसे और नेटवर्क का इस्तेमाल करके खुद को बचा लिया. लेकिन इस बार छात्राओं की गवाही और डिजिटल सबूतों ने उसके लिए बच निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं. फरारी पर पुलिस की नजर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही चैतन्यानंद फरार है. दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की हैं. सभी एयरपोर्ट्स और बॉर्डर इलाकों पर निगरानी बढ़ा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, उसकी अंतिम लोकेशन आगरा में मिली थी. पुलिस को शक है कि वह लगातार ठिकाने बदल रहा है और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बच रहा है, ताकि ट्रैक न हो सके. संस्थान से मिले सीसीटीवी फुटेज के डीवीआर और हार्ड डिस्क को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है. जांचकर्ताओं को आशंका है कि कई रिकॉर्ड्स से छेड़छाड़ की गई है. किताबों के सहारे बनाई थी पहचान शायद सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यही स्वामी चैतन्यानंद शिक्षा और अध्यात्म की दुनिया में बड़ा नाम बनाने की कोशिश कर रहा था. उसने 28 किताबें लिखी थीं. इन किताबों पर नामी-गिरामी हस्तियों के नाम से प्रस्तावना और समीक्षाएं दर्ज थीं. ‘फॉरगेट क्लासरूम लर्निंग’ नाम की किताब की प्रस्तावना तो एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स के नाम से बताई जाती थी. ई-कॉमर्स साइट्स पर उसे “प्रोफेसर, स्पीकर, लेखक और आध्यात्मिक दार्शनिक” कहा गया. अब पुलिस का कहना है कि यह सब उसकी सोची-समझी रणनीति थी. किताबों और चमकदार छवि के पीछे उसका असली चेहरा छिपा था – एक शातिर शिकारी, जो मासूम छात्राओं को अपना शिकार बना रहा था. समाज में डर और गुस्सा यह खुलासा होते ही संस्थान के भीतर दहशत फैल गई है. कई छात्राएं डर के कारण सामने आने से कतरा रही हैं. वे साफ कह रही हैं कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है. अभिभावकों में गुस्सा है. उनका कहना है कि अगर संस्थान के भीतर ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो वे किस पर भरोसा करें? पुलिस का दावा और अगला कदम दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित षड्यंत्र है. चैतन्यानंद और उसके सहयोगियों ने संस्थान के सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए छात्राओं को शिकार बनाया. एफआईआर में दर्ज धाराओं के तहत यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. जांच एजेंसियां जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का दावा कर रही हैं.

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, बदला काउंटिंग का क्रम

नई दिल्ली भारतीय चुनाव आयोग (इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया) ने पोस्टल बैलेट और ईवीएम की गिनती के नियमों में बदलाव किया है। अब पोस्टल बैलेट (postal ballot) की काउंटिंग के बाद ही ईवीएम (EVM) के वोट गिने जाएंगे। ईवीएम की गिनती का दूसरा अंतिम दौर पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने के बाद ही शुरू होगा, जिससे मतगणना प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता सुनिश्चित हो सके। बता दें कि पहले, ईवीएम की गिनती पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने से पहले भी खत्म हो सकती थी। यह बदलाव पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। वोटिंग के दिन, पोस्टल बैलेट की गिनती सुबह 8:00 बजे शुरू होती है, और ईवीएम की गिनती 8:30 बजे शुरू होती है। पहले, ईवीएम की गिनती पोस्टल बैलेट की गिनती के किसी भी चरण में जारी रह सकती थी और इसके पहले पूरी होने की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता था। हालांकि, अब आयोग ने फैसला किया है कि ईवीएम/वीवीपैट की गिनती का दूसरा अंतिम दौर केवल तभी शुरू होगा, जब पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी हो जाएगी। ‘एकरूपता और स्पष्टता…’ आयोग ने बताया कि यह कदम मतगणना प्रक्रिया में एकरूपता और अत्यधिक स्पष्टता लाने के लिए उठाया गया है। यह विशेष रूप से उन काउंटिंग सेंटर्स पर लागू होगा, जहां पोस्टल बैलेट की गिनती की जाती है। इस बदलाव से यह तय होगा कि सभी वोटों की गिनती सही तरीके से और बिना कोई फैलाए पूरी हो सके।

डेनमार्क PM का ऐतिहासिक कदम, जबरन नसबंदी केस पर महिलाओं से सार्वजनिक माफी

 कोपेनहेगेन डेनमार्क की प्रधानमंत्री मैटे फ्रेडरिकसन ने  ग्रीनलैंड की राजधानी नुक का दौरा किया. उन्होंने इस दौरान डेनमार्क के उस काले अध्याय और उससे उपजी अथाह पीड़ा को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक तौर पर महिलाओं से माफी मांगी.  डेनमार्क में 1960 से लेकर 1991 तक देश के एक बड़े क्षेत्र की महिलाओं की जबरन नसबंदी की गई. इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के सबसे बड़े मामलों में से एक माना गया. पीएम फ्रेडरिकसन ने इस दौरान भावुक होते हुए कहा कि जो हुआ हम उसे बदल नहीं सकते, लेकिन जिम्मेदारी ले सकते हैं. मैं डेनमार्क की ओर से माफी मांगती हूं. इस घटना पर प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन ने 24 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी.  60 के दशक में बड़े पैमाने पर महिलाओं विशेष रूप से स्कूली बच्चियों के गर्भाशय में IUD डिवाइस लगा दी गई थी. इनमें से कई लड़कियां 12 साल या इससे कम उम्र की थीं. इन किशोरियों में कॉपर टी लगाए गए या हार्मोनल इंजेक्शन दिए गए. इसके लिए ना तो इन बच्चियों की सहमति ली गई और ना ही उनके परिवारजनों की. रूटीन चेकअप के नाम पर यह धांधली की गई.  रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 के दशक से 1992 तक डेनमार्क में लगभग 4,500 इनुइट महिलाओं में गर्भनिरोधक कॉयल (कॉपर टी) लगाया गया, वो भी उनकी सहमति के बिना. इसका उद्देश्य इनुइट समुदाय में जन्म दर को कम करना था. इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना था, जो डेनिश औपनिवेशिक नीतियों का हिस्सा था. इस रिपोर्ट के बाद लगभग 150 महिलाओं ने डेनमार्क की सरकार के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन का मुकदमा दायर किया है, जिसकी सुनवाई अभी जारी है.