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PoK के भारत में शामिल होने का ऐतिहासिक मौका, ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पर राजनाथ की चेतावनी

नई दिल्ली भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर का दूसरा या तीसरा चरण कभी भी शुरू हो सकता है। यदि पाकिस्तान ने आतंकी हमले कराने या फिर घुसपैठिये भेजने की हिमाकत की तो भारत दोबारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने से हिचकेगा नहीं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोरक्को में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK को लेकर भी बड़ी बात कही। राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर एक दिन भारत का हिस्सा बनेगा और इसके लिए जंग की भी जरूरत नहीं है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तानी आतंकियों ने फिर कोई हमला किया तो हम ऑपरेशन सिंदूर तत्काल शुरू करेंगे। राजनाथ सिंह ने यह बताने से इनकार कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर में कितने पाकिस्तानी आतंकी ढेर किए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि हमने आंकड़ा बताया तो लोग खुशी से नाचने लगेंगे। उन्होंने कहा कि एक दिन पीओके भारत का हिस्सा होगा और उसके लिए जंग की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी तैयारी का स्तर यह है कि पहलगाम आतंकी हमले के अगले ही दिन एक मीटिंग बुलाई गई थी। इस मीटिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा सचिव, तीनों सेनाओं के प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मौजूद थे। इस दौरान मैंने पूछा कि क्या अभी जंग छिड़ जाए तो हम उसके लिए तैयार हैं। इस पर सभी सेना प्रमुखों ने कहा कि हम एकदम तैयार हैं। किसी भी वक्त जंग शुरू की जा सकती है। डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि इसके बाद मैं अगले दिन पीएम नरेंद्र मोदी से मिला। उन्होंने मीटिंग के दौरान तीन सेनाओं को अधिकृत किया कि वे जैसा चाहें ऐक्शन ले सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि इसके बाद क्या हुआ, यह हम जानते ही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के अंदर 100 किलोमीटर तक घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया। इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद के ही एक आतंकी सरगना ने माना कि इन हमलों में मसूद अजहर का परिवार ही मारा गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर यह है कि वे धर्म देखकर हमले करते हैं, लेकिन हमारी तरफ से ऐसा नहीं किया जाता। हम आतंकियों को टारगेट करते हैं।

समुद्री सुरक्षा पर जोर: एडमिरल दिनेश त्रिपाठी श्रीलंका की 4 दिन की यात्रा पर

नई दिल्ली नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी श्रीलंका की 4 दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। ये यात्रा 22 सितंबर से 25 सितंबर 2025 तक चलेगी। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य नौसेना सहयोग को बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोगात्मक पहलों को बढ़ावा देना है। इस यात्रा के दौरान दिनेश के त्रिपाठी श्रीलंका के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे और 12वें गॉल संवाद 2025 में भी भाग लेंगे। श्रीलंका के प्रधानमंत्री से करेंगे मुलाकात इस यात्रा के दौरान नौसेना प्रमुख श्रीलंका के प्रधानमंत्री डॉ हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात करेंगे और रक्षा सहयोग के व्यापक मामलों पर तीनों सेना प्रमुखों और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे, जिसमें समुद्री सुरक्षा, क्षमता संवर्धन, प्रशिक्षण और सहयोग को मजबूत करने के अवसरों की पहचान पर जोर दिया जाएगा। वह कोलंबो में ‘बदलती गतिशीलता के तहत हिंद महासागर का समुद्री परिदृश्य’ विषय पर आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सम्मेलन गॉल संवाद 2025 के 12वें संस्करण में भी भाग लेंगे। दोनों देशों के बीच मजबूत होंगे रिश्ते एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की ये यात्रा दोनों देशों के बीच के संबंधों को मजबूत करेगी और समुद्री हितों के प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर समझ का मार्ग प्रशस्त करेगी। भारतीय नौसेना रक्षा वार्ता, स्टाफ वार्ता और अन्य परिचालनात्मक वार्ताओं के माध्यम से श्रीलंकाई नौसेना के साथ नियमित रूप से बातचीत करती है। इसमें श्रीलंका-भारत नौसेना अभ्यास, जलमार्ग अभ्यास, प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफी आदान-प्रदान शामिल है। कितनी मजबूत है भारतीय नौसेना? भारतीय नौसेना विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक है और हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी है। इसकी ताकत को विभिन्न पहलुओं जैसे जहाजों की संख्या, तकनीकी क्षमता, प्रशिक्षण, और रणनीतिक स्थिति के आधार पर मापा जा सकता है। INS अरिहंत के साथ, भारत ने समुद्र से परमाणु हमले की क्षमता हासिल की है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (जमीन, समुद्र, और हवा से प्रक्षेपित) और अन्य मिसाइलें जैसे बराक-8 (हवाई रक्षा) नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ाती हैं। इसके अलावा भारत ने स्वदेशी जहाज निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है। INS विक्रांत, कोलकाता-क्लास विध्वंसक, और कलवरी-क्लास पनडुब्बियां इसका उदाहरण हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का स्वदेशी मंत्र: अब पैसों से नहीं, पसीने से होगी असली पहचान!

नई दिल्ली ‘मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत सिंपल है. पैसा किसका लगता है, उससे लेना-देना नहीं है.  डॉलर है, पाउंड है… वह करेंसी काली है या गोरी है, मुझे लेना-देना नहीं है. लेकिन जो प्रोडक्शन है उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा. जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी.’ मोदी ने पिछले दिनों गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन करते हुए जब स्वदेशी की इस तरह व्याख्या की तो कई बातें स्पष्ट हो गईं. पीएम के बयान से यह साफ हो गया कि सरकार के स्वदेशी का दायरा इसके परंपरागत परिभाषा से कहीं व्यापक और वृहद है. रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में PM  नरेंद्र मोदी ने फिर से स्वदेशी मंत्र का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता को जैसे स्वदेशी के मंत्र से ताकत मिली, वैसे ही देश की समृद्धि को भी स्वदेशी के मंत्र से ही शक्ति मिलेगी.  हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा किआज जाने-अनजाने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत सी विदेशी चीजें जुड़ गई हैं, हमें पता तक नहीं है. हमारे जेब में कंघी विदेशी है कि देसी है, पता ही नहीं है. हमें इनसे भी मुक्ति पानी होगी.   उन्होंने 'मेक इन इंडिया' पर जोर देते हुए कहा कि हम वो सामान खरीदें, जो मेड इन इंडिया हो, जिसमें हमारे देश के नौजवानों की मेहनत लगी हो, हमारे देश के बेटे बेटियों का पसीना हो. उन्होंने कहा कि ये हर भारतीय का मिजाज़ बनना चाहिए. स्वदेशी का विचार सहज भाषा में कहें तो स्वदेशी का अर्थ है "अपने देश का" या अपने देश में निर्मित वस्तुएं, सेवाएं और देश में पैदा हुए और फले-फूले विचार. स्वदेशी का कॉन्सेप्ट भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था. इसका उद्देश्य विदेशी (विशेषकर ब्रिटिश) वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना था. तब महात्मा गांधी स्वदेशी के ब्रैंड एम्बेसडर थे.    आधुनिक संदर्भ में स्वदेशी का मतलब स्थानीय उत्पादों, प्रौद्योगिकी और संसाधनों को प्राथमिकता देना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और विदेशी निर्भरता कम हो.    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन परंपरागत रूप से स्वदेशी को राष्ट्रीय गौरव और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक मानते हैं. इनका तर्क है कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा.    कुछ साल पहले तक तो संघ और स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी को विदेशी कंपनियों की "आर्थिक गुलामी" से बचने का उत्तर मानते थे. ये संगठन  विदेशी निर्भरता कम करने और संरक्षणवादी नीतियों को अपनाने की वकालत करते हैं.    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 की कोरोना संकट के दौरान स्वदेशी के पुश पर जोर दिया था.    PM मोदी ने 12 मई को "आत्मनिर्भर भारत अभियान" की घोषणा की थी. जिसमें स्वदेशी को आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बताया गया था.    इसका फोकस स्थानीय विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और विदेशी आयात से निर्भरता कम करना था. इसी दौरान पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल का नारा दिया. इसका मतलब था कि भारतीयों को स्थानीय उत्पाद, लोकल सामान के बारे में खुलकर बात करना चाहिए और इसका प्रचार करना चाहिए.   यह पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी को जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता था.    इसी दौरान पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की. इसके साथ ही उन्होंने MSME, कृषि, और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शुरू किए. रक्षा में 101 आयात वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया. स्वदेशी को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ा   आगे के वर्षों में पीएम मोदी ने स्वदेशी को केवल स्थानीय उत्पादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका से जोड़ा. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जो नारा दिया गया उसी का नाम है, "मेक इन इंडिया, और मेक फॉर द वर्ल्ड" का नारा.    पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया का नारा दिया तो निश्चित रूप से ये विदेशी पूंजी के स्वागत का न्योता था. दरअसल मेक इन इंडिया स्वदेशी और वैश्वीकरण का मिश्रण है, जो विदेशी पूंजी को आकर्षित कर भारत को मैन्युफैक्चरिंग और नवाचार का हब बनाता है. यह भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को मजबूत करने की घोषणा है. पैसा किसका लगता है, कौन सा देश लगाता है, बड़ी बात नहीं    यही वजह है कि पीएम मोदी ने अहमदाबाद में साफ कह दिया है कि स्वदेशी प्रोडक्शन में पैसा किसका लगता है, कौन सा देश लगाता है, ये बड़ी बात नहीं है. जो बड़ी बात है वो यह है कि प्रोडक्शन भारत भूमि में हो और इसका लेबर भी भारत से आए.    लेकिन सवाल है कि स्वदेशी को लेकर उस संगठन का क्या कहना है जो भारत में इसके पक्ष में सबसे बड़ा आंदोलन चलाता है. स्वदेशी जागरण मंच भारत में स्वदेशी आंदोलन की बड़ी ताकत है.    स्वदेशी को समझाते हुए स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन कहते हैं कि इस टर्म को बहुत हद तक बदनाम किया गया और स्वदेशी की जो परिभाषा को जिस तरह से महात्मा गांधी ने समझाया उसके अनुसार स्वदेशी का अर्थ है अपने आस-पास के परिवेश के साजो-सामान का इस्तेमाल करना. उससे सामान बनाना और श्रेष्ठता लाना और अगर उसमें कुछ कमी हो तो उसको ठीक करना.    स्वदेशी आंदोलन में विदेशी सहयोग को स्वीकार करने की बात करते हुए अश्विनी महाजन ने आजतक डॉट इन से कहा, "स्वदेशी का मतलब कोई विदेशों से कटना नहीं है. विदेशों से संबंध नहीं रखना इसका मतलब स्वदेशी नहीं है. विदेशों से सामान नहीं खरीदना-बेचना स्वदेशी नहीं है, ये तो ऑटर्की (Autarky) है. स्वदेशी एक सकारात्मक विचार है." आजादी के समय स्वदेशी में बहिष्कार के कॉन्सेपट को समझाते हुए उन्होंने कहा कि ये उस काल की एक खासियत थी.    आधुनिक अर्थ में स्वदेशी को समझाते हुए उन्होंने कहा कि, "पीएम मोदी ने पहले मेक इन इंडिया कहा, फिर आत्मनिर्भर भारत कहा, फिर अब स्वदेशी की बात की. ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और परिस्थितियों के हिसाब से हम स्वदेशी को चुनते हैं." स्वदेशी को बदनाम किया गया   स्वदेशी जागरण मंच … Read more

फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में जबरन घुसने की कोशिश, यात्रियों में फैली सनसनी

बेंगलुरु एअर इंडिया एक्सप्रेस की बेंगलुरु-वाराणसी फ्लाइट से एक सुरक्षा संबंधी घटना का मामला सामने आया है. सोमवार को फ्लाइट संख्या IX1086 सुबह 8 बजे बेंगलुरु से वाराणसी के लिए उड़ान भरती है. फ्लाइट जब मिड-एयर थी तो एक यात्री जिसे टॉयलेट जाना था वह कथित तौर पर जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश की. जिससे हड़कंप मच गया. यात्री से लेकर केबिन क्रू तक पहले घबरा गए. हालांकि, मामले को फिर समय रहते सुलझा लिया गया.  अधिकारियों ने इस मामले की पुष्टि करते हुए जानकारी दी है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ कोई समझौता नहीं किया गया, मामले को संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है.  मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, एअर इंडिया एक्सप्रेस ने बयान जारी करते हुए कहा, 'हमें मालूम है कि मीडिया में खबरें चल रही हैं कि हमारी बेंगलुरु से वाराणसी आने वाली एक फ्लाइट में यात्री ने कॉकपिट में घुसने की कोशिश की, वह टॉयलेट जाना चाहता था.' एअर इंडिया एक्सप्रेस ने आगे कहा, 'हम लोगों को आश्वासन देने चाहते हैं कि हमारी सुरक्षा प्रणाली मज़बूत और इसमें कोई कमी नहीं की गई. वर्तमान में इस मामले की जांच की जा रही है.' फ्लाइट अपने तम समय सुबह 10 बजे अपने टाइम पर वाराणसी पहुंची. इस घटना की वजह से फ्लाइट में कोई विलंब नहीं हुआ.  यह ताजा मामला पिछले महीने जून 2024 में हुई एक समान घटना की याद दिलाती है, जब एक 25 साल के शख्स को कोझिकोड से बहरैन जा रही एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट के दरवाजे को खोलने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उस घटना के दौरान विमान को मुंबई में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी और आरोपी ने केबिन क्रू पर भी हमला किया था. इंडियन एविएशन के नियम क्या कहते हैं? इंडियन एविएशन के नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश करता है तो उसे सबसे गंभीर 'प्रोटोकॉल के विरुद्ध' माना जाता है. इस मामले में सजा दो साल से तक हो सकती है, साथ ही पूरे जीवन आपको नो-फ्लाई लिस्ट में भी डाला जा सकता है.

अरुणाचल को 5100 करोड़ की सौगात, पीएम मोदी ने नॉर्थईस्ट को अष्टलक्ष्मी करार दिया

ईटानगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में 5,125 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत की है। इनमें शि-योमी जिले में दो प्रमुख पनबिजली परियोजनाओं और तवांग में एक सम्मेलन केंद्र शामिल हैं। उद्घाटन के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब अरुणाचल देश का पावर सेंटर बनने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि जिन परियोजनाओं की शुरुआत की गई वे डबल इंजन सरकार के दोहरे लाभ का उदाहरण हैं। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जिन इलाकों को वह पिछड़ा कहकर छोड़ देती थी, आज उनका ही विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्य हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है। तवांग मठ से नामसाई पैगोडा तक अरुणाचल प्रदेश शांति और सद्भाव की भूमि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद 70 से अधिक बार पूर्वोत्तर का दौरा किया है, केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान इस क्षेत्र की अनदेखी की गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश को पिछले 10 साल में केंद्र से एक लाख करोड़ रुपये मिले, जो कांग्रेस शासन के दौरान मिले धन से 16 गुना ज़्यादा हैं। मुझे पता था कि दिल्ली में बैठकर पूर्वोत्तर का विकास नहीं हो सकता, इसलिए मंत्रियों और अधिकारियों को कई बार इस क्षेत्र में भेजा। पीएम मोदी ने कहा, जहां काम करना मुश्किल होता था, उन्हें कांग्रेस पिछड़ा कहकर भूल जाती थी। ऐसा करके कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपा ले जाती थी। यही कारण है कि लोगों का निरंतर पलायन हुआ। हमारी सरकार ने इस अप्रोच को बदल दिया। जिनको कांग्रेस पिछड़ा जिला कहती थी, हमने उन्हें ऐस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट बनाया और विकास को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा, बॉर्डर के जिन गांवों को कांग्रेस लास्ट विलेज कहती थी, उन्हें हमने फर्स्ट विलेज मांगा। उन गांवों में विकास की नई रफ्तार है। बाइब्रेंट विलेज की सफलता ने लोगों का जीवन आसान बनाया है। अरुणाचल प्रदेश के गांवों में भी बिजली और इंटरनेट की सुविधाएं पहुंची हैं। पहले बॉर्डर से शहरों की ओर पलायन होता था लेकिन अब बॉर्डर के गांव टूरिजम के नए केंद्र बन गए हैं। जैसे-जैसे नए इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ रही है, वैसे-वैसे यहां टूरिजम बढ़ रहा है। बीते दशक में यहां टूरिस्ट की संख्या में दो गुनी वृद्धि हुई है। अरुणाचल का सामर्थ्य कल्चर से जुड़े टूरिजम से भी ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने कहा, दुनिया में कनसर्ट टूरिजम की भी बाढ़ आ रही है। तवांग में बनने जा रहा आधुनिक कन्वेंशन सेंटर अरुणाचल के टूरिजम में एक नया आयाम जोड़ेगा। इसे वाइब्रेंट विलेज अभियान से भी बहुत मदद मिलेगी। यह अभियान मील का पत्थर शाबित हो रहा है। आज दिल्ली और ईटानगर दोनों जगह बीजेपी सरकार है। केंद्र और राज्य दोनों की ऊर्जा विकास में लग रही है। कांग्रेस पर करारा हमला बोलेते हुए पीएम मोदी ने कहा, महंगाई बढ़ रही थी, चारों ओर घोटाले हो रहे थे और तब भी कांग्रेस सरकार टैक्स का बोझ बढ़ाती जा रही थी। उस समय दो लाख की कमाई पर भी इनकम टैक्स चुकाना पड़ता था। उस समय की सरकार बच्चों की टॉफी पर भी 20 पर्सेंट से ज्यादा टैक्स लेती थी। तब मैंने कहा था कि मैं आपकी कमाई और बचत दोनों को बढ़ाने का काम करूंगा। बीते सालों हमने 12 लाख तक की आय पर इनकम टैक्स जीरो कर दिया और आज से जीएसटी को भी हमने सिर्फ दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। 5 फीसदी और 18 फीसदी। बहुत सारी चीजें टैक्स फ्री हो गई हैं। आप आराम से अब अपना नया घर बना सकते हैं। मोटरबाइक खरीदना है, बाहर खाने-पीने जाना है, घूमने जाना है, यह सब पहले से सस्ता हो गया। यह जीएसटी बचत उत्सव बहुत यादगार बनने वाला है। हमें संकल्प लेना है कि हम स्वदेशी अपनाएं। खरीदें वही जो देश में बना हो, बेचें वही जो देश में बना हो। गर्व से कहें कि यह स्वदेशी है।

गुरपतवंत पन्नू के प्रमुख सहयोगी की गिरफ्तारी, निज्जर के बाद बढ़ाई थी सक्रियता

ओटावा  भारत विरोधी खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू का खास पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। खबर है कि कनाडा पुलिस ने उसके सबसे बड़े सहयोगियों में से एक इंदरजीत सिंह गोसाल को गिरफ्तार किया है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह गिरफ्तारी किस मामले में हुई है। इससे पहले नवंबर 2024 में भी हिंदू मंदिर में हुई हिंसा से जुड़े केस में गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोसाल को SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के फाउंडर गुरपतवंत सिंह पन्नू का राइट हैंड माना जाता है। खबर है कि हरदीप सिंह निज्जर के बाद गोसाल ही कनाडा में एसएफजे के बड़े मोहरे के रूप में काम कर रहा था। निज्जर की जून 2023 में कनाडा के सरी में हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अगुवाई वाली सरकार ने इस कांड के तार भारत से जोड़ने की कोशिश की थी। कनाडा में रिपोर्ट ने मचाई थी खलबली सितंबर की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कम से कम दो खालिस्तानी चरमपंथी समूहों को देश के भीतर से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। ‘2025 असेस्मेंट ऑफ मनी लॉन्डरिंग एंड टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क इन कनाडा’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कनाडा के अंदर से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले खालिस्तानी चरमपंथी समूहों की पहचान बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के रूप में की गई। ओटावा की खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 1980 के दशक के मध्य से कनाडा में राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक चरमपंथ का खतरा खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा भारत के पंजाब में खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश के माध्यम से उत्पन्न हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में आपराधिक संहिता के तहत सूचीबद्ध और राजनीति से प्रेरित हिंसक चरमपंथ में शामिल कई आतंकवादी संगठन जैसे हमास, हिज्बुल्ला और खालिस्तानी हिंसक चरमपंथी समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल तथा इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन कनाडा के अंदर से ही वित्तीय सहायता प्राप्त करते पाए गए हैं।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तिरुनेलवेली में 1100 एकड़ जमीन अब वक्फ प्रॉपर्टी नहीं

तिरुनेलवेली तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक मस्‍जि‍द गांव की 1,100 एकड़ जमीन पर दावा ठोक रही थी. कह रही थी क‍ि यह वक्‍फ प्रॉपर्टी है और इसे सिर्फ मुस्‍ल‍िम धर्म के कार्यों में इस्‍तेमाल क‍िया जाना चाह‍िए. मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो मद्रास हाईकोर्ट ने एक झटके में खार‍िज कर द‍िया. साफ कहा क‍ि वक्‍फ प्रॉपर्टी सिर्फ 2.34 एकड़ जमीन है, जो 1712 में मदुराई सामस्थानम के तत्कालीन शासक ने दान की थी. कांस्य पत्रक पर इसके सबूत हैं, लेकिन बाकी जमीन बिल्‍कुल मस्‍ज‍िद की नहीं है. इस मामले में मस्जिद ने दावा किया था कि यह विशाल क्षेत्र वक्फ संपत्ति में आता है और इसका उपयोग धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए. मस्जिद की ओर से यह तर्क दिया गया था कि पूरे 1,100 एकड़ क्षेत्र पर उनके धार्मिक अधिकार हैं. इसके विपरीत, जमीन पर अधिकार रखने वाले अन्य पक्षों ने इसे विवादित बताया और अदालत में चुनौती दी. मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की गहन सुनवाई के बाद इतिहास और दस्तावेजों को आधार मानते हुए निर्णय दिया. अदालत ने कहा कि जब इतिहास कांस्य पत्रों में बोलता है, तो झूठे दावे स्वतः ही पिघल जाते हैं. 1712 का कांस्य पत्रक स्पष्ट रूप से दिखाता है कि केवल 2.34 एकड़ जमीन का ही मस्जिद को अधिकार है और बाकी भूमि किसी अन्य पक्ष की है या सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई थी. मस्‍ज‍िद के ल‍िए झटका अदालत ने इस फैसले में यह भी दिखाया कि वक्फ संपत्ति की वास्तविकता और इसके कानूनी दावे को इतिहास और प्रमाण पत्रों के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए. इस प्रकार, बड़े दावे और आरोपों के बावजूद न्यायालय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों को सर्वोच्च माना. मस्जिद के लिए यह फैसला एक झटका है, क्योंकि उसका दावा जमीन के बड़े हिस्से पर था. अब मस्जिद केवल उसी जमीन का उपयोग कर सकती है, जो 1712 में दिये गए मण्यम के तहत प्रमाणित है. अदालत के फैसले से यह भी संदेश गया कि धार्मिक संस्थाओं द्वारा किए गए वक्फ दावे कानूनी और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर ही मान्य होंगे. प्रमाणों के आगे नहीं ट‍िक पाया विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वक्फ संपत्ति और ऐतिहासिक दस्तावेजों के महत्व को उजागर करता है. यह दिखाता है कि लंबे समय से किए जा रहे दावे भी कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणों के सामने टिक नहीं पाते. इस फैसले के बाद तिरुनेलवेली जिले में भूमि विवादों पर भी प्रभाव पड़ सकता है. अन्य वक्फ संस्थाओं और धार्मिक संगठनों को यह संकेत मिलेगा कि उनके दावे के लिए ऐतिहासिक प्रमाण और कानूनी दस्तावेज अनिवार्य हैं. झूठे दावे सच नहीं हो जाते मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला वक्फ संपत्ति के मामलों में इतिहास और दस्तावेजों की अहमियत को रेखांकित करता है और भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायालय के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन कर सकता है. अदालत ने कहा कि झूठे दावे और अतिशयोक्ति की कोई जगह नहीं है, और प्रमाणों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय धार्मिक संस्थाओं के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपने दावों में ईमानदारी और सटीकता दिखाएं.

हिमाचल के मंत्री ने रचाई दूसरी शादी, दुल्हन अमरीन का प्रोफेशन जानकर चौंक जाएंगे

 चंडीगढ़ हिमाचल प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री और छह बार के मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने शादी कर ली है। सोमवार को चंडीगढ़ में वह अमरीन शेखों के साथ परिणय सूत्र में बंधे। विक्रमादित्य की यह दूसरी शादी है। दुल्हन अमरीन शेखों पंजाब यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने अंग्रेजी और मनोविज्ञान में डबल मास्टर डिग्री ली है। साथ ही मनोविज्ञान में पीएचडी भी की है। वह विक्रमादित्य सिंह की पुरानी दोस्त हैं। शेखों भी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करक चुकी हैं। अमरीन सरदार जोतिंदर सिंह शेखों और ओपिंदर कौर की बेटी हैं। चंडीगढ़ में हुई शादी 36 साल के विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे वीरभद्र सिंह की विरासत के मालिक हैं। विक्रमादित्य सिंह इस समय शिमला ग्रामीण सीट से विधायक और सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में ताकतवर मंत्री हैं। पीडब्ल्यूडी के अलावा वह शहरी विकास मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। 2024 में वह मंडी लोकसभा सीट पर कंगना रनौत के खिलाफ चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। विक्रमादित्य सिंह की पहली शादी 2019 में हुई थी। विक्रमादित्य सिंह ने तब राजस्थान के आमेट की राजकुमारी सुदर्शना चुंडावत से शादी की थी। लेकिन दोनों के बीच रिश्ता अधिक लंबा नहीं चला। मतभेद के बाद 2024 में दोनों ने संबंध खत्म कर लिया।

एक क्लिक में पाएं PAN कार्ड की डुप्लीकेट कॉपी, देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

नई दिल्ली कोई भी जरूरी डॉक्यूमेंट अगर खो जाए, तो उसे फिर से बनवाने में बहुत परेशानी होती है। हालांकि Pan Card के साथ ऐसा नहीं है। अगर आपका Pan Card भी खो गया है या घर में कहीं इधर-उधर हो जाने की वजह से ऐन मौके पर मिल नहीं रहा है, तो आप घर बैठे एक क्लिक में अपना पैन कार्ड बनवा सकते हैं। इसका प्रोसेस बेहद सिंपल है और आज हम आपको इसी के बारे में डिटेल में बताने वाले हैं कि आखिर आप किस तरह से अपना डुप्लीकेट पैन कार्ड बनवा सकते हैं। कैसे मिलेगा डुप्लीकेट Pan Card? अगर आप किसी भी वजह से तुरंत अपना डुप्लीकेट पैन कार्ड पाना चाहते हैं, तो बता दें कि इसके तीन तरीके हैं। तीनों के बारे में डिटेल में समझने से पहले बता दें कि इन तरीकों को फॉलो करके आप अपने पैन कार्ड की सॉफ्ट कॉपी मिल जाएगी और यह किसी भी सरकारी काम में इस्तेमाल करने के लिए वैलिड होगी। सॉफ्ट कॉपी होने की वजह से आपको इसे पाने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और अगर Pan Card से जुड़ा आपका कोई काम अटका हुआ है, तो आप उसे तुरंत पूरा करवा पाएंगे। अगर NSDL के जरिए बना है Pan Card अगर आपका पैन कार्ड NSDL के जरिए बना है, तो आपको Google पर NSDL Pan Card Download सर्च करना होगा। पहले लिंक पर क्लिक करने के बाद पैन कार्ड डाउनलोड करने के लिए दिए सिस्टम में Pan को चुन लें। इसका मतलब है कि आप पैन नंबर उपलब्ध करवा कर अपना डुप्लीकेट पैन कार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं। इसके बाद आपको अपना पैन नंबर, आधार नंबर दी गई जगहों में भरना होगा। आपके पैन के साथ लिंक्स फोन नंहर और मेल आईडी आपको अगले स्टेप में दिखाई देंगे। जिस पर भी आप ओटीपी पाना चाहते हैं, उसे चुन कर ओटीपी का अनुरोध कर दें। ओटीपी डालने के बाद आपको 8.26 रुपये भरने होंगे। इसके बाद आपका पैन कार्ड आप आसानी से डाउनलोड कर पाएंगे। अगर UTI के जरिए बना है Pan Card अगर आपका पैन कार्ड UTI के जरिए बना है, तो गूगल पर UTI PAN DOWNLOAD सर्च करके पहले लिंक पर चले जाएं। इसके बाद का प्रोसेस काफी हद तक ऊपर बताए प्रोसेस जैसा ही है। पहले लिंक पर जाने के बाद आपको Download e-Pan पर टैप करना होगा। इसके बाद अपना पैन नंबर आधार नंबर और ओटीपी की डिटेल्स भरकर आप अपना ई-पैन कार्ड पा सकेंगे। अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बना है Pan Card अगर आपका पैन कार्ड इनकम टैक्स की वेबसाइट से बना है, तो इनकम टैक्स की साइट पर जाकर Instant E Pan पर टैप करें। वहां अपने पैन और आधार नंबर की डिटेल्स देकर आप आसानी से अपना पैन कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इस तरह आपको अपने पैन कार्ड की सॉफ्ट कॉपी आसानी से मिल जाएगी लेकिन अगर आप पीवीसी पैन कार्ड बनवाना चाहते हैं, तो इस लिंक पर जाकर पूरा प्रोसेस समझ सकते हैं।  

बाढ़ से उबरते ही सूखे की मार! देहरादून के लोग अब हर बूंद पानी के लिए तरस रहे

देहरादून कुछ दिन पहले बाढ़ से त्राहीमाम कर रहे देहरादून में अब पानी का 'सूखा' पड़ गया है। आपदा में नदी व स्रोतों से शहर के लिए आने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होकर बहने के कारण अभी भी करीब एक लाख की आबादी के बीच पेयजल समस्या बरकरार है। छह दिन से लगातार पेयजल आपूर्ति ठप होने से लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हाल यह है कि कई इलाकों में लोगों को नहाने और खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं मिल रहा और वह बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। बीते सोमवार-मंगलवार मध्य रात को देहरादून में आई आपदा से शहर में 2.35 लाख की आबादी के लिए बांदल नदी, बीजापुर कैनाल शिखर फाल, ग्लोगी फाल, कार्लीगार्ड स्रोत, केलाघाट स्रोत और कोल्हूखेत स्रोत से आने वाली विभिन्न पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिससे शहर के 47 हजार से अधिक घरों में पेयजल संकट खड़ा हो गया था। हालांकि बारिश थमने के बाद जल संस्थान ने पाइपलाइनों के पुनर्स्थापन के कार्य शुरू कर दिए हैं। इससे बांदल नदी से दिलाराम चौक और आसपास के इलाकों की आपूर्ति एक समय के लिए बहाल हो गई है। ग्लोगी फाल से पुरकुल और आसपास के इलाकों को जाने वाला पानी भी एक समय के लिए शुरू हो गया है। अन्य स्रोतों से आने वाली आपूर्ति में मरम्मत कार्य चल रहा है। जल्द ही उनकी भी आपूर्ति शुरू होगी। व्यवस्थित रूप से नहीं बंट रहे टैंकर पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने पर जल संस्थान टैंकर से सभी इलाकों में पानी दे रहा है। लेकिन टैंकरों की कमी के चलते वह व्यवस्थित रूप से नहीं बंट पा रहे। जल संस्थान रोजाना प्रभावित इलाकों में टैंकरों के 500 से अधिक चक्कर लगवा रहा है। लेकिन, इसके बावजूद बहुत से लोगों को टैंकर नहीं मिल रहा।मजबूरी में उन्हें फिलिंग स्टेशन पर पहुंचकर खुद टैंकर ले जाना पड़ रहा है। इन इलाकों में समस्या अभी भी बरकरार दून विहार, नयागांव, आर्य नगर, साकेत कालोनी, डीएल रोड, पुरुकुल, चंद्रोटी, हाथी बड़कला, शहंशाही, पुराना राजपुर, डाकपट्टी, जाखन, बाडीगार्ड, अनारवाला, कुठालगेट और आसपास के इलाकों में अभी पेयजल आपूर्ति की भारी किल्लत है। दिलाराम, झंडा बाजार, कालीदास रोड, इंदिरा विहार, पलटन बाजार, चकराता रोड, इसी रोड, ओल्ड डालनवाला, बकरालवाला, मालसी, सिनोला, किरसाली, धोरण, कालागांव, वीर गब्बर सिंह बस्ती, बारीघाट, बामण गांव, खालागांव, भगवंतपुर, सलान गांव, उतड़ी गांव आदि आसपास के इलाकों में एक समय के लिए आपूर्ति शुरू हो गई है।