samacharsecretary.com

यासीन मलिक का बड़ा खुलासा: मनमोहन सिंह ने हाफिज सईद से मिलने पर जताया आभार!

नई दिल्ली जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादी यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिए हलफनामे में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत मनमोहन सिंह का जिक्र किया है। उसका दावा है कि पाकिस्तान में आतंकवादियों से मुलाकात के बाद तत्कालीन पीएम सिंह ने उन्हें शुक्रिया अदा किया था। साथ ही उसने कई और बड़े नेताओं के नाम लिए हैं। मलिक टेरर फंडिंग मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा है।  रिपोर्ट के अनुसार, 25 अप्रैल को दिए हलफनामे में मलिक ने 2006 में पाकिस्तान में हुई लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से मुलाकात के बारे में बताया गया है। उसने कहा है कि पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बैकचैनल वार्ता का हिस्सा थी और भारत के वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों के कहने पर की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मलिक का कहना है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के तत्कालीन विशेष निदेशक वीके जोशी ने उससे दिल्ली में मुलाकात की थी। यह मुलाकात उस समय हुई थी, जब मलिक 2005 में कश्मीर में आए भूकंप के बाद पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था। कथित तौर पर जोशी ने अुरोध किया था कि वह इस मौके का इस्तेमाल पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और आतंकवादियों के संपर्क साधने में करे, ताकि पीएम के शांति प्रयासों को समर्थन मिले। मलिक का दावा है कि उसे साफतौर पर बताया गया था कि जब तक आतंकियों को बातचीत में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक पाकिस्तान के साथ बातचीत से कुछ नहीं मिलेगा। आतंकी ने कहा कि इस अनुरोध पर वह सईद समेत अन्य लोगों से मिलने के लिए तैयार हुआ। हलफनामे में मलिक ने बताया है कि किस तरह सईद ने जिहादी समूहों की बैठक बुलाई थी। पीएम की प्रतिक्रिया रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक का कहना है कि आईबी से बातचीत के बाद उसे कहा गया कि प्रधानमंत्री को सीधे ब्रीफ करे। उसने कहा कि वह उसी शाम तत्कालीन पीएम सिंह से मिला और उस समय तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन भी थे। मलिक का दावा है कि सिंह ने उसके प्रयासों के लिए व्यक्तिगतरूप से धन्यवाद दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, मलिक ने कहा, 'जब मैं पाकिस्तान से दिल्ली लौटा, तो आईबी के विशेष निदेशक वीके जोशी डिब्रीफिंग का हिस्सा बने। वह मुझसे होटल में मिले और तत्काल प्रधानमंत्री को ब्रीफ करने का अनुरोध किया।' उसने कहा, 'मैं उस शाम प्रधानमंत्री से मिला, जहां एनके नारायणन मौजूद थे। मैंने उन्हें मेरी मीटिंग के बारे में बताया और संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मेरे प्रयासों, समय, धैर्य और समर्पण के लिए मेरा धन्यवाद दिया।' हलफनामे में मलिक ने अटल बिहारी वाजपेयी, सोनिया गांधी, पी चिदंबरम, आईके गुजराल और राजेश पायलट से हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया है।

नीरव मोदी की नई रणनीति से प्रत्यर्पण पर लग सकता है बड़ा झटका

नई दिल्ली ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी की उस अपील को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उसने अपनी प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को फिर से खोलने की मांग रखी। इससे उसे जल्द भारत लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है। इस फैसले के बाद भारत सरकार और जांच एजेंसियां लंदन को जवाब भेजने की तैयारी में हैं, ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके। सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'नीरव मोदी ने अपनी कानूनी टीम के जरिए पिछले महीने यूके की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिसमें उसने भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को फिर से खोलने की मांग की। अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया है और भारत सरकार को नोटिस भेजा गया है।' नीरव मोदी ने अपनी अर्जी में दावा किया कि अगर उसे भारत भेजा गया तो कई एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगी और इस दौरान उसे यातना का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने अभी इस अर्जी पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम विस्तार से जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं, जो राजनयिक चैनलों के जरिए भेजा जाएगा। हम नीरव के दावों का खंडन करेंगे। अदालत से इस अर्जी को खारिज करने की अपील करेंगे, क्योंकि प्रत्यर्पण का आदेश 2022 में ही अंतिम हो चुका था।' पंजाब नेशनल बैंक घोटाला क्या है? भारत सरकार यह बताने की योजना बना रही है कि अगर नीरव को प्रत्यर्पित किया गया, तो उसका मुकदमा पूरी तरह भारतीय कानून के अनुसार होगा। साथ ही, किसी भी एजेंसी की ओर से उससे पूछताछ नहीं की जाएगी। बता दें कि नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात, भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और करार उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं। 2011 से 2017 तक उन्होंने अपनी कंपनियों (जैसे फायरस्टार डायमंड, सोलर एक्सपोर्ट्स) के लिए पीएनबी के मुंबई ब्रांच से 1,200 से अधिक फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) हासिल किए, जो विदेशी बैंकों से कर्ज लेने के लिए इस्तेमाल हुए। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ये एलओयू बिना गारंटी या रिकॉर्ड जारी किए गए, जिससे बैंक को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

टैरिफ गतिरोध पर उम्मीद: भारत और अमेरिका 2 महीने में कर सकते हैं समाधान

कोलकाता भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भारतीय निर्यातकों के लिए एक आशा की किरण जगाते हुए गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका टैरिफ मुद्दों का समाधान अगले 8-10 हफ्तों में निकल सकता है। भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए, नागेश्वरन ने कहा कि गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों सरकारों के बीच बातचीत का दौर पहले से ही चल रहा है। उन्होंने कहा, "मेरा अनुमान है कि अगले आठ से 10 हफ्तों में, हम भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का समाधान देख पाएंगे।" नागेश्वरन ने संकेत दिया कि भारत-अमेरिका के बीच रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर लगभग 15 प्रतिशत करने के लिए भी बातचीत चल रही है। अमेरिका की ओर से भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ लागू है। इस प्रकार अमेरिका में आने वाली भारतीय वस्तुओं पर कुल 50 प्रतिशत लागू हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन पर हुई बातचीत के बारे में पूछे गए एक सवाल पर, नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि व्यापार गतिरोध जल्द ही सुलझ जाएगा। उन्होंने कार्यक्रम के साइडलाइन में न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि बातचीत चल रही है और जैसा कि मैंने पहले कहा था, मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही सुलझ जाएगा।" इस बीच, भारत और अमेरिका ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द से जल्द संपन्न करने के प्रयासों को तेज करने का फैसला किया है। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अधिकारियों का एक दल इस सप्ताह भारत पहुंचा। उन्होंने वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव और मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों की एक टीम के साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते सहित भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर चर्चा की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, "भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार के स्थायी महत्व को स्वीकार करते हुए, व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा सकारात्मक और दूरदर्शी रही।" वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, व्यापार संबंधी चर्चाएं कई स्तरों पर चल रही हैं। व्यापार संबंधी मुद्दों पर दोनों पक्षों की मानसिकता सकारात्मक है।

राष्ट्रपति मुइज्जु ने साइन किया नया कानून, मालदीव में मीडिया गतिविधियों पर पाबंदी की तैयारी

मालदीव  मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु ने बृहस्पतिवार को एक विवादास्पद नए मीडिया विधेयक पर हस्ताक्षर कर उसे मंजूरी दी, जिसके तहत उल्लंघन की स्थिति में भारी जुर्माने और मीडिया संस्थानों को अस्थायी या स्थायी रूप से बंद करने का प्रावधान है। इस कानून के तहत उल्लंघन की स्थिति में पत्रकारों पर 1,620 अमेरिकी डॉलर तक और मीडिया कंपनियों पर 6,485 अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून में जांच पूरी होने तक मीडिया लाइसेंस निलंबित करने, मीडिया लाइसेंस रद्द करने के लिए मुकदमा दायर करने या नए कानून का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर पुलिस को बीच में ही प्रसारण रोकने के लिए भेजने का प्रावधान है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि मुइज्जु ने ‘मालदीव मीडिया और प्रसारण विनियमन अधिनियम' को मंजूरी दे दी है, जिसे पिछले मंगलवार को संसद में भारी बहुमत से पारित किया गया था। संसद के 93 सदस्यों में 60 सत्तारूढ़ सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि विपक्षी सदस्यों को विरोध प्रदर्शन के बीच सदन से बाहर कर दिया गया। नए कानून के अनुसार, पत्रकारों को देश के संविधान, इस्लाम, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक मूल्यों का सम्मान करना होगा और व्यक्तिगत सम्मान व मानवाधिकारों की रक्षा करनी होगी। इस कानून के तहत अनुपालन सुनिश्चित करने और कथित अपराधों की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति नियुक्त की जाएगी।    

पाकिस्तान का अरब नाटो प्लान धड़ाम, भारत ने हासिल की बड़ी कूटनीतिक सफलता

कतर  कतर पर इजरायल के हमले के बाद मुस्लिम दुनिया में गुस्से का माहौल बना। अरब लीग और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) ने तुरंत आपात बैठकें बुलाईं और इजरायल की निंदा करते हुए कतर के साथ एकजुटता जताई। लेकिन  कार्रवाई के नाम पर केवल बयानबाजी देखने को मिली। अरब देशों की "नाटो" योजना  धड़ाम  बैठक में कुछ देशों ने इज़रायल के खिलाफ सैन्य मोर्चा खोलने और "अरब नाटो" गठित करने का सुझाव दिया।  पाकिस्तान ने इस विचार को जमकर हवा दी, लेकिन कतर और अन्य खाड़ी देशों की अनिच्छा से योजना ठंडे बस्ते में चली गई।अंत में 50 देशों का संयुक्त बयान केवल औपचारिक निंदा  तक सिमट गया। विशेषज्ञों का तंज- कहां गया दम? विशेषज्ञों ने कहा कि 1973 के युद्ध में अरब देशों ने  तेल निर्यात रोककर अमेरिका-इज़रायल पर दबाव बनाया था, जिससे युद्धविराम जल्दी संभव हुआ।आज जबकि ग़ाज़ा में मौतों का आंकड़ा  65,000  से ऊपर जा चुका है और संयुक्त राष्ट्र तक नरसंहार की चेतावनी दे रहा है, मुस्लिम देशों की चुप्पी उनकी  कमजोरी  उजागर करती है। पाकिस्तान की चाल फेल पाकिस्तान ने इस संकट को अवसर बनाने की कोशिश की। पीएम शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार कतर पहुंचे और इजरायल विरोधी माहौल बनाने की कोशिश की। "अरब नाटो" के जरिए पाकिस्तान भारत के खिलाफ एक सुरक्षा कवच  चाहता था। मगर मुस्लिम देशों की बेरुख़ी ने पाकिस्तान की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। भारत की कूटनीतिक जीत अरब नाटो का न बनना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। अगर यह सैन्य गठबंधन बनता तो भारत अरब देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते और इज़रायल के साथ रक्षा साझेदारी के बीच फँस जाता। पाकिस्तान को भी भारत पर दबाव बनाने का मौका मिल जाता। मगर फिलहाल हालात ऐसे हैं कि भारत बिना कोई कदम उठाए ही मज़बूत स्थिति में है और पाकिस्तान की चाल नाकाम हो गई है।

धर्म के नाम पर घोटाला: चीन के भिक्षु ने किया ऐसा काम, जिसने हिला दी पूरी दुनिया

चीन  चीन ने बौद्ध भिक्षुओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है जिन पर मंदिरों के धन का निजी संपत्ति के लिए दुरुपयोग करने का संदेह है। यह कदम धार्मिक संस्थानों को विनियमित करने और मंदिर अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। शाओलिन मठ के प्रमुख मठाधीश शी योंगक्सिन पर धन का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई देश की मंदिर अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इस वर्ष के अंत तक इस क्षेत्र के 100 बिलियन युआन तक पहुंचने की उम्मीद है। चीन में मंदिरों का इतिहास चीन में मंदिरों का इतिहास उथल-पुथल भरा रहा है। 1950 के दशक में कई मठों ने अपनी संपत्ति खो दी, और 1960 और 1970 के दशक में कई मंदिरों को नुकसान पहुंचा। 1980 के दशक में आर्थिक सुधारों के साथ, मंदिरों ने पुनः लोकप्रियता हासिल की और अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए वे सरकार द्वारा समर्थित पर्यटन पर निर्भर हो गये।  

स्वच्छ शिमला मिशन: जानें नगर निगम की नई व्यवस्था कैसे बदलेगी शहर का चेहरा

शिमला हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत 'पहाड़ों की रानी' शिमला को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब शिमला आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अपने वाहनों का कचरा सड़क पर फेंकने के बजाय नगर निगम को देना होगा। यह नई व्यवस्था जल्द ही लागू होने वाली है, जिसका उद्देश्य शिमला के पर्यावरण को बेहतर बनाना है। कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था? इस योजना के तहत, शिमला के प्रवेश द्वार पर ही नगर निगम के कर्मचारी पर्यटक वाहनों से कचरा इकट्ठा करेंगे। यह कचरा विशेष रूप से भरयाल कूड़ा संयंत्र में भेजा जाएगा। इस सेवा के लिए वाहन चालकों से एक न्यूनतम कूड़ा शुल्क भी लिया जाएगा। नगर निगम ने इस शुल्क की राशि पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया है कि यह राशि कम होगी और इसे लागू करने से पहले सदन की मंजूरी ली जाएगी। क्यों उठाया गया यह कदम? शिमला में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, और खासकर गर्मी और सर्दियों के मौसम में पर्यटकों की संख्या बहुत बढ़ जाती है। नगर निगम के अनुसार, भले ही हर घर से कूड़ा उठाया जाता है, फिर भी शहर की सड़कों, हाईवे और पार्किंग में कचरे के ढेर लगे रहते हैं। इसका मुख्य कारण पर्यटक वाहनों से फेंका जाने वाला कचरा है। पर्यटक बसें, टैक्सी और ट्रैवलर जैसी गाड़ियां अक्सर पार्किंग में या सड़क किनारे कचरा फेंक देती हैं, जिससे शिमला की सुंदरता और स्वच्छता पर बुरा असर पड़ता है। टैक्सी चालकों के लिए भी नियम नगर निगम ने टैक्सी चालकों के लिए भी खास नियम बनाए हैं। उन्हें अपनी गाड़ियों में डस्टबीन रखना होगा और उस कचरे को शहर के निर्धारित कूड़ा एकत्रीकरण केंद्रों पर खाली करना होगा। फिलहाल टूटीकंडी पार्किंग के पास एक नया कूड़ा एकत्रीकरण केंद्र बनाने की तैयारी है, जबकि आईएसबीटी टूटीकंडी में भी कचरा इकट्ठा किया जा रहा है। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने बताया कि यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और पर्यटक वाहनों का ब्योरा भी इकट्ठा किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने सभी व्यावसायिक वाहनों में कूड़ेदान लगाना अनिवार्य किया था, लेकिन अभी तक इस कचरे को सही जगह पर डालने की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी, जिसे नगर निगम अब ठीक करने की कोशिश कर रहा है। इस नई पहल से न केवल शिमला की स्वच्छता बढ़ेगी, बल्कि यह पर्यटकों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में मदद करेगी।  

एयर इंडिया का ड्रामा: 103 यात्रियों के बीच अचानक इमरजेंसी लैंडिंग, यात्रा तनावपूर्ण

विशाखापत्तनम  विशाखापत्तनम से हैदराबाद जा रही एअर इंडिया की एक उड़ान को पक्षी के टकराने के कारण इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। विमान में 103 यात्री सवार थे। इंजन में खराबी आने के बाद पायलट ने विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर वापस लौटने का फैसला किया। सभी यात्री सुरक्षित हैं और एयरलाइन वैकल्पिक व्यवस्था कर रही है। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद यह घटना हुई।   विशाखापत्तनम हवाई अड्डे के निदेशक एस राजा रेड्डी ने बताया कि एयर इंडिया एक्सप्रेस के फ्लाइट नंबर IX 2658 के पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग का अनुरोध किया और हैदराबाद की यात्रा रद्द करके विशाखापत्तनम लौट आया। विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित रेड्डी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि विशाखापत्तनम से उड़ान भरने के बाद, पायलट ने इंजन में कुछ समस्या की सूचना दी। इसलिए, उसने आपातकालीन लैंडिंग का अनुरोध किया और विशाखापत्तनम लौट आया। विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और यात्रियों को उतार लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि एयरलाइन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।  

जानें किस देश ने सबसे पहले किया था EVM का इस्तेमाल और अब वहां कैसी है स्थिति

नई दिल्ली  भारत में अक्सर चुनावी हार के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाए जाते हैं। विपक्ष का आरोप होता है कि ईवीएम में हेराफेरी की गई, जिससे उन्हें कम वोट मिले। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बहुत से लोग मानते हैं कि भारत EVM का इस्तेमाल करने वाला पहला देश था, लेकिन सच्चाई कुछ और है। दुनिया में सबसे पहले EVM का प्रयोग अमेरिका में हुआ था। अमेरिका में हुई थी शुरुआत यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल अमेरिका में हुआ था। 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अमेरिका के कुछ राज्यों ने मतदान प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर प्रयोग शुरू किए। इन प्रयोगों ने ही आधुनिक EVM की नींव रखी। अमेरिका में EVM का विकास अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का पहला प्रयोग 1964 में ऑटोमैटिक वोटिंग मशीन (AVM) के रूप में हुआ। इसके बाद, 1970 के दशक में डायरेक्ट रिकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक (DRE) मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ, जिसमें मतदाता बटन दबाकर या टचस्क्रीन के जरिए अपना वोट दर्ज करते थे। 1980 के दशक तक, अमेरिका के कई राज्यों ने इन मशीनों को अपना लिया था। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य मतदान की गति और सुविधा बढ़ाना था। वर्तमान स्थिति: पारदर्शिता पर जोर आज अमेरिका पूरी तरह से EVM पर निर्भर नहीं है। साल 2000 के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लोरिडा के बैलेट विवाद के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर सवाल उठने लगे। इसके बाद से सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस जारी है। परिणामस्वरूप, कई राज्यों ने अब पेपर बैलेट और EVM का हाइब्रिड सिस्टम अपनाया है। इस प्रणाली में वोट इलेक्ट्रॉनिक मशीन से दर्ज होते हैं, लेकिन साथ ही एक पेपर रिकॉर्ड भी तैयार होता है, जिसे पेपर ट्रेल कहा जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर वोटों की दोबारा गिनती की जा सके।   वर्तमान में, अमेरिका में लगभग 70% वोटिंग मशीनें इलेक्ट्रॉनिक और पेपर बैकअप सिस्टम पर आधारित हैं, जबकि कुछ राज्य अब भी केवल पेपर बैलेट का उपयोग करते हैं। चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जहां EVM ने सुविधा दी है, वहीं साइबर सुरक्षा और हैकिंग के खतरों ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। यही कारण है कि अमेरिका में अब EVM और पेपर ट्रेल (जैसे VVPAT सिस्टम) का मिश्रित मॉडल सबसे ज्यादा प्रचलित है। अमेरिका, जिसने सबसे पहले EVM का इस्तेमाल शुरू किया, आज भी इस तकनीक पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता है। वहां के चुनावों में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के साथ पेपर बैकअप को अनिवार्य बना दिया गया है।  

भारत-अमेरिका ट्रेड वार: क्या ट्रंप नवंबर में 25% टैरिफ कम करेंगे?

रूस  रूस से तेल आयात करने की वजह से भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घुटने टेकने के लिए मजबूर हो सकते हैं। नवंबर के बाद अमेरिका भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटा सकता है। रेसिप्रोकल टैरिफ के नाम पर पहले अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया था। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने उम्मीद जताई है कि 30 नवंबर के बाद कुछ आयातों पर लगाया गया दंडात्मक शुल्क (25 फीसदी) वापस ले लिया जाएगा। कोलकाता में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, सीईए नागेश्वरन ने कहा, "हम सभी पहले से ही इस पर काम कर रहे हैं, और मैं यहां टैरिफ के बारे में बात करने के लिए कुछ समय लूंगा। हां, 25 फीसदी का मूल पारस्परिक टैरिफ और 25 फीसदी का दंडात्मक टैरिफ, दोनों की उम्मीद नहीं थी। मेरा अब भी मानना ​​है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दूसरा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया होगा, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों के हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए, मेरा मानना ​​है कि 30 नवंबर के बाद दंडात्मक टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।'' भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में दंडात्मक शुल्क और उम्मीद है कि पारस्परिक शुल्कों पर कोई समाधान निकल आएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की निर्यात वृद्धि दर, जो वर्तमान में 850 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है, एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की राह पर है, जो जीडीपी का 25 फीसदी है, जो एक स्वस्थ और खुली इकॉनमी का संकेत है। ट्रंप ने दर्जनों देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) लागू किया था। यह 1977 का एक कानून है जिसे विदेशी आपात स्थितियों के समय प्रतिबंधों और वित्तीय नियंत्रण के लिए बनाया गया था। भारत पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया, लेकिन बाद में रूस से तेल खरीदने को लेकर एक्स्ट्रा 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया गया। इससे भारत से एक्सपोर्ट होने वाले सामानों पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि, भारत ने साफ किया है कि भारत राष्ट्र हित की वजह से रूस से तेल आयात कर रहा है। अमेरिकी सीमा शुल्क नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया है कि भारत से आने वाले अधिकांश प्रोडक्ट्स पर उच्च शुल्क के साथ-साथ एंटी-डंपिंग या प्रतिपूरक शुल्क जैसे अन्य लागू शुल्क भी लागू होंगे, लेकिन कुछ वस्तुओं को इससे बाहर रखा गया है। इसमें अमेरिकी टैरिफ अनुसूची में अलग से सूचीबद्ध कुछ उत्पाद शामिल हैं। लोहे और इस्पात से बनी वस्तुओं, जिनमें उनके कुछ अन्य उत्पाद भी शामिल हैं, पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। यही बात एल्युमीनियम उत्पादों पर भी लागू होती है। सेडान, एसयूवी, क्रॉसओवर, मिनीवैन, कार्गो वैन और हल्के ट्रक जैसे यात्री वाहनों को भी उनके स्पेयर पार्ट्स सहित छूट दी गई है।