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भारत की टेक्नोलॉजी छलांग: पीएम मोदी ने अनवील की विक्रम 32-bit प्रो चिप

नई दिल्ली  भारतीय पीएम मोदी ने मंगलवार को पहले Made in India विक्रम 32-bit प्रो चिप को अनवील किया है। इसे Semicon India कॉन्फ्रेंस के दौरान राजधानी दिल्ली में शोकेस किया गया। इस दौरान पीएम के साथ सीएम रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद थे। यह कदम भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस मौके पर उन्होंने यह भी बताया कि देश में सेमीकंडक्टर चिपसेट का कमर्शियल प्रोडक्शन इसी साल से शुरू हो जाएगा।   आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम भारत का यह पहला चिपसेट देश की तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसका उद्देश्य विदेशी चिप्स पर भारत की निर्भरता को कम करना है। यह चिपसेट स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वदेशी चिपसेट के विकास से भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सेमिकॉन इंडिया कॉन्फ्रेंस का महत्व चौथा सेमिकॉन इंडिया कॉन्फ्रेंस, जो कि तीन दिवसीय कार्यक्रम है, भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस दौरान देश-विदेश के उद्योग जगत के विशेषज्ञ नीति निर्माता और निवेशक एक साथ मिलकर सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों के साथ यह सम्मेलन भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

बेसेन्ट बोले: रूस मुद्दे पर भारतीयों का व्यवहार ठीक नहीं, लेकिन ट्रेड डिस्प्यूट सुलझेगा

न्यू यार्क  भारत और अमेरिका के बीच शुल्क को लेकर जारी तनातनी के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने कहा है कि अंततः ‘ये दो महान देश इस मुद्दे को सुलझा लेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मूल्य रूस के बजाय ‘हमारे और चीन के अधिक करीब हैं।' फॉक्स न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में बेसेन्ट ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) को ‘‘व्यापक तौर पर प्रदर्शनात्मक'' करार दिया। यह बयान तब आया जब चीन के तियानजिन शहर में रविवार और सोमवार को एससीओ का वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। बेसेन्ट ने सोमवार को कहा, ‘‘यह एक पुराना आयोजन है, जिसे शंघाई सहयोग संगठन कहा जाता है, और मुझे लगता है कि यह व्यापक रूप से एक प्रदर्शनात्मक आयोजन है।'' उन्होंने कहा, ‘‘आख़िरकार, भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला लोकतंत्र है। उनके मूल्य रूस के बजाय हमारे और चीन के अधिक करीब हैं।'' बेसेन्ट ने आगे कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अंतत: ये दो महान देश (भारत और अमेरिका) इस मुद्दे को सुलझा लेंगे। लेकिन रूस से तेल खरीदने और फिर उसे पुनः बेचने के मामले में भारतीयों ने अच्छा व्यवहार नहीं किया है। इससे यूक्रेन में रूस के युद्ध प्रयास को वित्तीय समर्थन मिला है।'' भारत ने रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद का बचाव करते हुए कहा है कि उसकी ऊर्जा आवश्यकताएं राष्ट्रीय हितों और बाज़ार की स्थिति पर आधारित हैं। फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, अमेरिका-भारत व्यापार वार्ताओं में धीमी प्रगति को भी व्हाइट हाउस द्वारा भारत पर शुल्क बढ़ाने के एक कारण के रूप में देखा जा रहा है।   बेसेन्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीद के चलते भारत पर 50 प्रतिशत तक के शुल्क लगाए हैं। भारत ने इन शुल्कों को “अनुचित और अकारण” बताया है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठकों से जुड़े सवालों पर दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर माने जा रहे हैं, जिसे ट्रंप प्रशासन की शुल्क नीति और नयी दिल्ली के प्रति उसके लगातार आलोचनात्मक रुख ने और गहरा किया है। बेसेन्ट ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस पर प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है और ‘‘सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा ‘‘मुझे लगता है कि सब कुछ सामने है। राष्ट्रपति पुतिन ने एंकोरेज में ऐतिहासिक बैठक के बाद, फोन कॉल के बाद, जब सोमवार को यूरोपीय नेता और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की व्हाइट हाउस में थे—जो संकेत दिए थे, उसके विपरीत कार्य किया है। वास्तव में, उन्होंने अत्यंत निंदनीय तरीके से बमबारी अभियान को और तेज कर दिया है।'' उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुझे लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ, सभी विकल्प खुले हैं, और हम इस सप्ताह उनका बहुत गंभीरता से अध्ययन करेंगे।''    

भूकंप ने अफगानिस्तान को झकझोरा, अब तक 1400 से अधिक लोगों की मौत

कुनार पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का कुनार प्रांत रविवार आधी रात के बाद एक भयानक भूकंप से दहल उठा। भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई और इसका केंद्र कुनार की राजधानी असदाबाद के पास लगभग 27 किलोमीटर गहराई में था। इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने अब तक 1,411 लोगों की जान ले ली है और 3,124 लोग घायल हुए हैं। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस दुखद घटना की पुष्टि की और बताया कि अब तक कुनार में 5,412 घर पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। सरकार की ओर से लगातार राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। विशेष रूप से प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर के ज़रिए घायलों को निकाला जा रहा है ताकि उन्हें तुरंत इलाज मिल सके। इससे पहले अफ़ग़ान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने मरने वालों की संख्या 1,124 बताई थी और कहा था कि करीब 3,251 लोग घायल हुए हैं। संस्था ने यह भी कहा था कि 8,000 से ज़्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है और बहुत से लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। यही कारण है कि राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं और मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। सबसे ज़्यादा नुक़सान कुनार में नार प्रांत इस भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है। यहां के अस्पतालों में इतनी भीड़ है कि घायलों को ज़मीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। कई लोगों को सामूहिक रूप से दफनाया गया है क्योंकि परिवारों के पास न तो संसाधन हैं और न ही समय। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बच्चे जो अपने घरों से बेघर हो गए हैं वे खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं।नंगरहार, लघमन और नूरिस्तान जैसे पड़ोसी प्रांतों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए और वहां भी कुछ मौतें व घायल होने की सूचना मिली है। वहीं पंजशीर प्रांत में इस भूकंप से आर्थिक नुकसान हुआ है लेकिन किसी के मारे जाने की सूचना नहीं है। सीमा पार पाकिस्तान तक महसूस हुए झटके भूकंप के झटके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल तक महसूस किए गए। इसके साथ ही पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में भी कंपन दर्ज की गई। इसने साबित कर दिया कि भूकंप की तीव्रता कितनी अधिक थी और इसका प्रभाव कितना व्यापक रहा। राहत कार्यों में चुनौतियाँ दूरदराज़ के इलाकों में पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। तालिबान सरकार के पास संसाधनों की कमी है और जिन इलाकों में सड़कें नष्ट हो चुकी हैं वहां हेलीकॉप्टरों के माध्यम से घायलों को निकाला जा रहा है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने तुरंत सहायता पहुंचाने की बात कही है। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं लेकिन अब भी हज़ारों लोग भोजन, पानी और दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं।   भूकंप के बाद की ज़िंदगी भूकंप के बाद जो लोग बचे हैं उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। अपने प्रियजनों को खोने का दुख, घर उजड़ने की पीड़ा और भविष्य की अनिश्चितता ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बच्चों की पढ़ाई छूट गई है और महिलाएं व बुज़ुर्ग खुले में जीवन बिता रहे हैं।

आसमान से गायब हुआ इंडोनेशियाई हेलीकॉप्टर, भारतीय नागरिक समेत 8 लोग थे सवार

इंडोनेशिया  इंडोनेशिया के बोर्नेओ द्वीप से एक भारतीय नागरिक समेत आठ यात्रियों को लेकर रवाना हुए लापता हेलीकॉप्टर की तलाश मंगलवार को भी जारी रही। इंडोनेशियाई  अंतरा के अनुसार सोमवार को एक पायलट, एक इंजीनियर और छह यात्रियों को लेकर रवाना हुआ एस्टिंडो एयर बीके 117 डी3 हेलीकॉप्टर का दक्षिण कालीमंतन प्रांत के मेन्टेवे में मंडिन दमार जलप्रपात के पास संपर्क टूट गया। खबर में कहा गया है कि हेलीकॉप्टर में भारतीय नागरिक संथा कुमार भी सवार थे। हेलीकॉप्टर में सवार अन्य लोगों की पहचान कैप्टन हरियांटो, इंग हेंड्रा, मार्क वेरेन, युडी फेब्रियन, एंडिस रिसा पासुलु, क्लाउडिन क्विटो और इबॉय इरफान रोसा के रूप में हुई है। खोज एवं बचाव एजेंसी के प्रमुख आई पुतु सुदयाना ने कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खोज अभियान में दो हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं, क्योंकि एक ही क्षेत्र में एक साथ तैनाती से संयुक्त खोज एवं बचाव दल को खतरा हो सकता है।  

200% दवा टैरिफ की योजना, भारत और अमेरिकियों को होंगे बड़े असर

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाहर से आने वाली दवाओं पर भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने के तैयारी में हैं. इसका असर भारत जैसे तमाम उन देशों पर पड़ेगा जो अमेरिका को दवा सप्लाई करते हैं. हालांकि, अभी भारत को इससे अलग रखा गया है लेकिन आने वाले समय में इसका असर भारत पर भी देखने को मिलेगा. लेकिन अगर भारत पर भी यह टैरिफ लागू हुआ तो उसके फार्मास्युटिकल, ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेडिकल उपकरण एक्सपोर्ट पर पड़ेगा. वहीं, टैरिफ से अमेरिका को भी नुकसान होगा वहां पर दवाओं की कीमत बढ़ जाएगी. स्टाक की कमी हो सकती है. एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने आयातित दवाओं पर भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है. अधिकारियों ने कुछ दवाओं पर 200 प्रतिशत तक के शुल्क सार्वजनिक रूप से लगाए हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि इस नीति से कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है. भारत पर क्या होगा असर हालांकि, अभी भारत को फार्मा टैरिफ से दूर रखने की बात कही गई है. लेकिन अगर यह लागू होता है तो कभी न कभी इसका असर भारत के एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है. ट्रेड इकोनॉमिक्स के डेटा के मुताबिक, इंडिया ने साल 2024 में अमेरिका को कुल 8.72 बिलियन अमेरिकी डॉलर के फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया था. इस पर भी असर पड़ सकता है. जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख निर्यातक है, विशेष रूप से असुरक्षित है। अगर अमेरिका में टैरिफ लगता है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को नुकसान हो सकता है और उनके निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ट्रंप प्रशासन चीन से आयातित दवाओं और उनके कच्चे माल (APIs) पर बहुत फोकस कर रहा है। ट्रंप का मुख्य टार्गेट फार्मा कंपनियों को दबाव डालकर अपना प्रोडक्शनअमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करना है। उनका तर्क है कि अमेरिका में बनी दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। पहले से ही, कुछ बड़ी कंपनियों जैसे जॉनसन एंड जॉनसन और रोश ने अमेरिका में निवेश बढ़ाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों और उद्योग समूहों का मानना है कि इतने ऊंचे टैरिफ का उल्टा असर हो सकता है। इससे दवाओं की कीमतों में वृद्धि होने और दवाओं की कमी पैदा होने का खतरा है। खासकर जेनेरिक (सामान्य) दवाएं, जो पहले से ही कम मुनाफे पर बिकती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि 25% टैरिफ भी अमेरिकी दवा की लागत को लगभग 51 अरब डॉलर बढ़ा सकता है। कई दवा कंपनियों और उद्योग समूहों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि टैरिफ से R&D और इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि कुछ निवेशकों और विश्लेषकों को संदेह है कि ट्रंप वास्तव में 200% जैसी ऊंची दर लागू करेंगे। उनका मानना है कि यह केवल निगोशिएशन की एक रणनीति हो सकती है। क्यों चिंता में अमेरिकी लोग? जानकारों का मानना है कि दवाओं पर भारी-भरकम टैरिफ से एक तरफ सप्लाई चेन प्रभावित होगी तो दूसरी तरफ दवाओं की कमी का खतरा बढ़ जाएगा. ट्रंप प्रशासन अपने इस कदम को सही ठहराने के लिए ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट 1962 की सेक्शन 232 का इस्तेमाल कर रहा है. दलील दी जा रही है कि दवाओं की कमी से बचने के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, ताकि कोविड-19 जैसी स्थिति दोबारा न हो. हाल ही में अमेरिका-यूरोप व्यापारिक फैसले में कुछ यूरोपीय सामानों पर 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था, जिनमें दवाएं भी शामिल हैं. इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन और ज्यादा टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. क्या होगा तत्काल असर? व्हाइट हाउस की तरफ से सुझाव दिया गया है कि हायर टैरिफ लागू करने में करीब डेढ़ साल का समय दिया जाना चाहिए. कई कंपनियां पहले ही आयात बढ़ा चुकी हैं और दवाओं के दाम बढ़ा चुकी हैं. जेफरीज के विश्लेषक डेविड विंडले ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह फैसला 2026 के आखिर या 2027 से पहले लागू नहीं हो सकता है. अल्पकालिक प्रभाव यह होगा कि दवाओं की कमी बढ़ेगी. जबकि लंबे समय में इसका सीधा असर लागत और आपूर्ति पर पड़ेगा. ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेडिकल उपकरण ऑर्गेनिक केमिकल्स भारत से अमेरिका को निर्यात 2.56 बिलियन USD की तुलना में अमेरिका से भारत को आयात 3.54 बिलियन USD से अधिक रहा है. भारत वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक केमिकल्स का एक प्रमुख निर्यातक है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा बाजार है. वहीं, मेडिकल उपकरण की बात करें तो भारत अमेरिका को मेडिकल उपकरण का भी काफी मात्रा में निर्यात करता है. इस पर टैरिफ का असर पड़ेगा. क्योंकि ज्यादा टैरिफ होने से सामान महंगे होंगे. हालांकि, भारत अमेरिका से करीब 5.7 बिलियन USD का आयात करता है. क्योंकि भारत अपनी हाई-एंड मेडिकल उपकरण जरूरतों के लिए अमेरिका पर निर्भर है.  

SC ने खारिज की जावेद की बेल रद्द करने की याचिका, जानें कन्हैया लाल केस में क्या हुआ

नई दिल्ली उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या के मामले एनआईए और कन्हैया के बेटे को सुप्रीम कोर्ट से मायूसी हाथ लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के कन्हैया लाल मर्डर केस के एक आरोपी की जमानत के खिलाफ एनआईए और कन्हैया के बेटे की याचिकाओं को मंगलवार को खारिज कर दिया। याचिकाओं में जमानत रद्द किए जाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश में दखल से इनकार जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मोहम्मद जावेद को जमानत देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से जावेद को जमानत देने के आदेश के खिलाफ एनआईए और कन्हैया लाल के बेटे यश तेली की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन तथ्यों पर किया गौर रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए इस तथ्य पर विचार किया कि अभियोजन पक्ष ने 170 से अधिक गवाहों में से केवल 8 से ही पूछताछ की है। अदालत ने यह भी देखा कि घटना के समय आरोपी जावेद किशोर था। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए जावेद की जमानत बरकरार रखी। यश तेली की क्या दलील? यश तेली के वकील की दलील थी कि जावेद की भूमिका गंभीर है। उसने हमलावरों को बताया था कि कन्हैया उस समय कहां था। राजस्थान हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता पर गहराई से विचार किए बिना ही फैसला दिया जो उचित नहीं था। हत्या देश भर में सांप्रदायिक रूप से उत्तेजित माहौल में की गई थी। सुनियोजित हत्या इस याचिका में दावा किया गया कि मुख्य अभियुक्त ने हत्या की साजिश रची, हथियार जुटाए, जगह की रेकी की और ठिकाने की जानकारी के लिए जावेद को लगाया। आरोपी ग्राहक बनकर कन्हैया लाल दर्जी की दुकान में घुसे। जब वह उनका नाप ले रहा था तो आरोपियों ने एक कैमरा लगा दिया साथ ही सांप्रदायिक नारे लगाए, मृतक पर हमला किया और उसकी हत्या कर दी। वीडियो बना जारी किया वहीं एनआईए ने अपनी दलील में कहा कि आरोपी जावेद, कन्हैया लाल की दुकान के पास एक दुकान में काम करता था। जावेद ने ही हमलावरों को जानकारी दी थी कि कन्हैया लाल कहां मिलेगा। इस घटना की जांच एनआईए कर रही है। आरोपी मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस ने इस खौफनाक हत्याकांड का वीडियो बनाया और उसे ऑनलाइन साझा किया था। वीडियो पोस्ट कर ली थी जिम्मेदारी इस्लाम के खिलाफ नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट पर कन्हैया लाल की आरोपियों ने 28 जून, 2022 को उदयपुर के हाथीपोल इलाके में उसकी दुकान पर हत्या कर दी थी। 2022 की पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य अभियुक्त मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद कपड़े सिलवाने के बहाने लाल की दुकान में घुसे और चाकू से हमला कर उसका गला रेत दिया। आरोपियों ने वीडियो में जघन्य कृत्य की जिम्मेदारी भी ली थी। इसलिए की हत्या कन्हैया लाल दर्जी की दिनदहाड़े की गई हत्या, नारेबाजी और सोशल मीडिया में आरोपियों की ओर से वीडियो पोस्ट किए जाने की घटना से पूरा देश स्तब्ध था। आरोपियों ने निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में कथित पोस्ट करने पर कन्हैया लाल दर्जी की हत्या करने की बात कही थी। उदयपुर के इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस जघन्य कृत्य के खिलाफ पूरे देश में जन आक्रोश देखा गया था।  

रक्षा मंत्री का ज्ञान: बाढ़ का पानी बाल्टी में भरकर रखें, अल्लाह का तोहफा बताया

लाहौर पाकिस्तान इस समय बाढ़ और बारिश की भारी मार झेल रहा है। देश के कई हिस्सों में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण कई लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। इस संकट के बीच पाकिस्तानियों को ऐसी अजीब सलाह दी जा रही है, जिसे सुनकर लोग हैरान और परेशान हैं। दरअसल, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक अटपटा बयान दिया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में ख्वाजा आसिफ कहते दिख रहे हैं कि पाकिस्तानियों को बाढ़ का पानी जमा कर लेना चाहिए। बाढ़ अल्लाह का आशीर्वाद ख्वाजा आसिफ से बाढ़ राहत के बारे में सवाल किया था। जवाब में उन्होंने कहा कि लोग इसे अल्लाह का आशीर्वाद मानें और पानी को अपने घरों में जमा करें। ख्वाजा ने कहा कि पूरी दुनिया में पानी की कमी से हाहाकार मचा है। ऐसे में पाकिस्तान में बाढ़ का आना एक सुखद संयोग है। इसे आपदा नहीं, बल्कि अल्लाह की कृपा समझना चाहिए। पानी जमा करें: ख्वाजा बाढ़ और बारिश से त्रस्त लोग सड़कों पर उतरकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सड़कें जाम कर सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। इस पर ख्वाजा ने कहा कि लोगों को पहले पानी जमा करने पर ध्यान देना चाहिए। पानी को अपने घरों में ले जाएं, इससे सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि पानी जमा करने के लिए बड़े बांधों की जरूरत है, जो अभी संभव नहीं है। इसलिए लोग अपने घरों में ही पानी जमा करें। ख्वाजा ने यह भी कहा कि बाढ़ रोकने का कोई सिस्टम सरकार के पास नहीं है। लोग बेवजह सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के लिए स्थानीय सरकार जिम्मेदार है, जो शक्तिहीन है। लोग अतिक्रमण कर रहे हैं और पानी का रास्ता बदल रहे हैं, जिससे बाढ़ आना निश्चित है। पाकिस्तान में अब तक 854 लोगों की मौत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जून से 31 अगस्त तक पाकिस्तान में मरने वालों की संख्या 854 हो गई है और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बाढ़ से पंजाब प्रांत के लगभग 20 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने कहा कि ऐसी बाढ़ पंजाब ने पहली बार देखी है। इस बार झेलम, चिनाब और रावी तीनों नदियां उफान पर हैं। पंजाब सरकार के अनुसार, बाढ़ से अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि पंजाब प्रांत से 10 लाख से अधिक लोगों को उनके घरों से सुरक्षित निकाला गया है। देश चार दशकों की सबसे भयावह बाढ़ का सामना कर रहा है, जिसने सैकड़ों गांवों को तबाह कर दिया और अनाज की फसलों को डुबो दिया। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी ने कहा कि इस भीषण बाढ़ से 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार ने बाढ़ में फंसे 7,60,000 लोगों और 5,00,000 से अधिक पशुओं को बचाया है।  

इजरायल को लेकर ट्रंप की चिंता, बोले- गाजा में जीत तो मिल रही है पर नुकसान भारी

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इजरायल गाजा का युद्ध जीत रहा है। लेकिन उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ट्रंप ने कहा कि पब्लिक रिलेशंस की दुनिया में इजरायल की लॉबी को काफी नुकसान पहुंचा है। डेली कॉलर के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस में भी कांग्रेस का नियंत्रण कम होता जा रहा है। अगर आप 20 साल पहले जाएं तो कांग्रेस में इजरायल की लॉबी काफी मजबूत थी। गौरतलब है कि इजरायली राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू को अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन हासिल है। हाल ही में नेतन्याहू ने कहा था कि वह हमास के साथ समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। माना जा रहा है कि नेतन्याहू के इस फैसले को ट्रंप का समर्थन हासिल है। सात अक्टूबर पर क्या बोले ट्रंप ने कहा कि एक समय था कि अगर किसी को पॉलिटिशियन बनना है तो उसे इजरायल के बारे में बोलने से बचना होता था। इसके साथ ही उन्होंने सात अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह एक विध्वंसक दिन था। उन्होंने जोर दिया कि इजरायल को इस युद्ध से उबरना होगा। यह जेरुसलम को नुकसान पहुंचा रहा है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल से उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है, यह देश बेहद शानदार है। मैंने इजरायल के लिए सबकुछ किया इस इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी दावा किया उन्होंने जितना कुछ इजरायल के लिए किया है, उतना किसी अन्य ने नहीं किया। उन्होंने ईरान के ऊपर हालिया बम गिराए जाने का भी जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि जिस तरह से हमने ईरान के ऊपर से वह जहाज उड़ाए, कोई और नहीं कर सकता। गौरतलब है कि ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायली परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। ब्रिटेन ने जताई थी नाराजगी इससे पहले ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी ने सोमवार को गाजा में पर्याप्त सहायता सामग्री नहीं पहुंचने देने पर इजराइल के प्रति आक्रोश जताया था। उन्होंने गाजा के लिए चिकित्सा सहायता हेतु 1.5 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त राशि की घोषणा की। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन के अधिकारी गंभीर रूप से बीमार और घायल बच्चों को गाजा से बाहर निकालकर ब्रिटेन के अस्पतालों में विशेष उपचार दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है, यह 21वीं सदी में एक मानव-निर्मित आपदा है।  

मिलिशिया भर्ती से लेकर 15 हजार सैनिकों की तैनाती तक, पड़ोसी देश की US से जंग की तैयारी?

वॉशिंगटन/काराकास  दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में स्थित कैरिबियाई देश वेनेजुएला ने अपनी सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी है और देशभर के युवाओं से मिलिशिया में शामिल होने का आह्वान किया है। वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर कैरिबियन सागर में अमेरिकी सेना उनके देश पर हमला करती है, तो वे अपने देश को 'हथियारों से लैस गणराज्य' के रूप में घोषणा कर देंगे। उनकी यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस कदम के बाद आई है, जिसके तहत डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के करीब समंदर में अपने युद्धपोत उतार दिए हैं। वेनेज़ुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने दावा किया है कि अमेरिका ने 1,200 मिसाइलों से लैस आठ अमेरिकी सैन्य युद्धपोत उनकी देश से सटी सीमा के पास उतारे हैं, जो उनके देश के लिए खतरा हैं। उन्होंने इसे एक पूरी तरह से आपराधिक कृत्य बताया है और और इसे क्षेत्र के लिए इस सदी का सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। वेनेजुएला ने बताय खूनी खतरा मादुरो ने इस सैन्य तैनाती के बारे में कहा, "इस अत्यधिक सैन्य दबाव के मद्देनजर हमने अपने देश की रक्षा के लिए अधिकतम तैयारी की घोषणा की है।" उन्होंने अमेरिकी तैनाती को अत्यधिक अनुचित, अनैतिक और पूरी तरह से आपराधिक और खूनी खतरा बताया है। दरअसल, अमेरिका ने ड्रग कारटेल पर काबू पाने के लिए कैरिबाई सागर में न सिर्फ युद्धपोत का बेड़ा उतार रखा है बल्कि हजारों सैनिक भी तैनात कर रखे हैं। अमेरिका का हमले की योजना से इनकार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों के वेनेजुएला की धरती पर आक्रमण करने की कोई योजना नहीं है। बावजूद इसके मादुरो की सरकार ने कोलंबिया तट और सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया है और युवाओं से नागरिक मिलिशिया में शामिल होने का आह्वान किया है। दोनों देशों के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध दरअसल, दोनों देशों के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। वॉशिंगटन 2019 से ही वेनेजुएला के विपक्षी नेता जुआन गुएदो का समर्थन करता रहा है और मौजूदा राष्ट्रपति मादुरो के चुनाव को मान्यता देने से इनकार करता रहा है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि वह ड्रग कारटेल से संभावित खतरों से निपटने के लिए वेनेजुएला के पास अपनी समुद्री उपस्थिति बढ़ा रही है लेकिन मादुरो को लगता है कि अमेरिकी सरकार उसके देश पर हमला करना चाहती है। मादुरो ने अमेरिका पर वेनेजुएला में शसन परिवर्तन का प्रयास करने का आरोप लगाया है और अब उसने कोलंबिया के साथ पश्चिमी सीमा पर 15,000 सैनिक तैनात कर दिए हैं। अमेरिका ने कोलंबिया के पास क्या-क्या उतारा? इस तनातनी के बीच अमेरिकी नौसेना ने गाइडेड मिसाइल क्रूजर यूएसएस लेकएरी, परमाणु ऊर्जा से चलने वाली तेज़-हमलावर पनडुब्बी यूएसएस न्यूपोर्ट न्यूज़, आर्ले बर्क श्रेणी के विध्वंसक यूएसएस ग्रेवली, यूएसएस जेसन डनहम और यूएसएस सैम्पसन, तटीय लड़ाकू जहाज यूएसएस मिनियापोलिस-सेंट पॉल, समेत हमलावर जहाज यूएसएस वोजिमा, यूएसएस सैन एंटोनियो और यूएसएस फोर्ट लॉडरडेल कैरेबियन सागर में तैनात कर दिए हैं। इस बेडे में लगभग 4,500 अमेरिकी सैन्य कर्मी हैं, जिनमें 2,000 से ज़्यादा नेवी के जवान हैं। अमेरिका के मुताबिक, ये सभी कर्मी ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने के प्रयास में वेनेजुएला के निकटवर्ती जलक्षेत्र में तैनात किए गए हैं। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सप्ताह स्थितियां और बिगड़ सकती हैं, जब अमेरिका के तीन उभयचर हमलावर जहाज इस क्षेत्र में प्रवेश करेंगे।  

ट्रंप का बदलता रुख: पाकिस्तान को पुचकारा, भारत से टकराव की नई चाल?

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में बिजनेस की खातिर भारत के साथ संबंधों की बली चढ़ा दी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने सोमवार को ऐसा दावा किया है। हालांकि, मौजूदा हालात इन दावों को मजबूती भी दे रहे हैं, क्योंकि ट्रंप लगातार पाकिस्तान के साथ संबंध बढ़ाते नजर आ रहे हैं। जबकि, अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने पाकिस्तान पर झूठ और धोखे के आरोप लगाए थे। पाकिस्तान के बारे में क्या सोचते थे ट्रंप साल 2018 में ट्रंप ने कहा था, 'अमेरिका ने बेवकूफों की तरह पाकिस्तान को बीते 15 सालों में 33 बिलियन डॉलर से ज्यादा की सहायता दे दी, लेकिन उन लोगों ने हमें झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया। हमारे नेताओं को बेवकूफ समझा। जिन आतंकवादियों की हम अफगानिस्तान में तलाश कर रहे थे, उन्हें पाकिस्तान में पनाह दी गई।' अब बदल गए विचार जून में पहली बार पाकिस्तानी सेना के प्रमुख को अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्योता दिया। इतना ही नहीं ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात कर खुशी जाहिर की। साथ ही कहा कि दोनों ने ईरान मुद्दे पर चर्चा की, जिसे पाकिस्तान अन्य लोगों से ज्यादा बेहतर ढंग से जानता है। ट्रंप ने तब पत्रकारों से कहा था कि उन्होंने भारत के साथ युद्ध खत्म करने के लिए मुनीर का धन्यवाद किया था। पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ लाभकारी व्यापारिक रिश्ते बनाने में दिलचस्पी दिखाई है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल माइकल कुरिया ने पाकिस्तान को बड़ा साझेदार करार दिया था। कुरिया ने साल 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले के मास्टरमाइंड मोहम्मद शरीफुल्लाह को पकड़ने और प्रत्यर्पित करने की पेशकश के लिए मुनीर की तारीफ की थी। पाकिस्तान में कौन से बिजनेस जुलाई में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिका पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेगा।' उन्होंने कहा, 'हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं जो इस साझेदारी का नेतृत्व करेगी। कौन जानता है, शायद वे किसी दिन भारत को तेल बेचेंगे!' पाकिस्तान लंबे समय से अपने अपतटीय क्षेत्र पर बड़े तेल भंडार होने का दावा करता रहा है, लेकिन इन भंडारों का दोहन करने में कोई प्रगति नहीं हुई है। वह इन भंडारों का दोहन करने के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। देश फिलहाल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पश्चिम एशिया से तेल आयात करता है। क्रिप्टो फैक्टर अप्रैल में पाकिस्तान ने वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल कंपनी के साथ ब्लॉकचेन तकनीक से जुड़ी शुरुआती डील की थी। खास बात है कि इस कंपनी में 60 फीसदी हिस्सेदारी ट्रंप परिवार की है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा कि अमेरिकी अधिकारियों की नजर पाकिस्तान के दुर्लभ खनिजों पर है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस के लिए बेहद अहम हैं। चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के लिए इस्लामाबाद बेहतर विकल्प हो सकता है। अप्रैल में पाकिस्तान मिनरल इन्वेस्टमेंट फोरम में अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हुए थे। सुलिवन क्या बोले सुलिवन ने कहा, पर अब ट्रंप के परिवार के साथ व्यापार करने की पाकिस्तान की इच्छा के लिए ट्रंप ने भारत के साथ अपने संबंधों को नजरअंदाज कर दिया है। यह बहुत ही बड़ा रणनीतिक झटका है, क्योंकि भारत और अमेरिका के रिश्ते हमारे हित में हैं।' उन्होंने कहा, 'सोचिए कि जर्मनी, जापान या कनाडा ये सब होते हुए देख रहे हैं। और वे सोचेंगे कि ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'अगर हमारे सहयोगी इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि वे किसी भी तरह से हमारे ऊपर निर्भर नहीं हो सकते, तो यह अमेरिकी लोगों के हित में नहीं है।' उन्होंने कहा, 'भारत के साथ जो हो रहा है, उसका हमारे दुनियाभर के संबंधों और रिश्तों पर सीधा असर पड़ेगा।'