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बदलेंगे ट्रेड के नियम! ट्रंप टैरिफ से भारतीय ऑटो उद्योग पर बड़ा संकट, 27 अगस्त से लागू होंगी नई दरें

वाशिंगटन  अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर तनाव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति और मौजूदा रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित सामानों पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो पहले से लागू 25% शुल्क के अतिरिक्त होगा। इस फैसले के साथ भारत पर अमेरिका की कुल आयात शुल्क दर 50% तक पहुंच जाएगी, जो सीधे तौर पर ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री को झटका देने वाली है।  ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा निशाने पर इस नीति का सबसे बड़ा असर भारत के ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट पर देखने को मिलेगा। अमेरिका भारतीय ऑटो कंपोनेंट्स का एक बड़ा बाजार है और सालाना करीब 7 अरब डॉलर (लगभग ₹61,000 करोड़) का सामान वहां भेजा जाता है। लेकिन टैरिफ में इस अचानक बढ़ोतरी से यह कारोबार लगभग आधा हो सकता है।   रूस से तेल खरीद को लेकर ट्रंप की नाराज़गी ट्रंप ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब भारत रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। ट्रंप ने इस कदम को “अमेरिकी हितों के खिलाफ” करार दिया है और उसी के जवाब में टैरिफ की दरें दोगुनी कर दी हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि अगर भारत ने अपनी रणनीति नहीं बदली, तो भविष्य में और भी कठोर व्यापारिक कदम उठाए जा सकते हैं।  27 अगस्त से लागू होंगी नई दरें नए शुल्क का असर 27 अगस्त 2025 से दिखने लगेगा। इस दिन से भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाले ऑटो पार्ट्स और अन्य प्रभावित उत्पादों पर 50% आयात शुल्क लागू हो जाएगा। यह नीति चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है, लेकिन भारत के कारोबार पर तत्काल प्रभाव डालने वाली है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि यह स्थिति बनी रहती है तो भारत का अमेरिका के साथ ऑटो सेक्टर में व्यापारिक घाटा काफी बढ़ सकता है। इससे न केवल कंपनियों की कमाई पर असर पड़ेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं, खासकर उन यूनिट्स में जो अमेरिका को निर्यात के लिए डिपेंड हैं।  

AIMIM प्रमुख ओवैसी बोले – ट्रंप को नहीं समझ वैश्विक व्यापार की बारीकियां

हैदराबाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला भारत के निर्यातकों, छोटे-मझोले उद्योगों (एमएसएमई), निर्माताओं को भारी नुकसान पहुंचाएगा। इससे आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बाधित होगी, विदेशी निवेश (एफडीआई) रुकेगा और नौकरियों पर भी असर पड़ेगा। एक दिन पहले ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर जुर्माने के रूप में 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया। ओवैसी ने कहा कि ट्रंप ने सिर्फ इसलिए अब 25 फीसदी टैरिफ और जोड़ दिया है कि भारत ने रूस से तेल खरीदा, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया है। हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने ‘एक्स’पर लिखा, यह कूटनीति नहीं, बदमाशी है। ट्रंप जैसा जोकर यह नहीं समझता कि वैश्विक व्यापार कैसे काम करता है। ओवैसी ने कहा कि यह नया टैरिफ भारत के निर्यातकों, एमएसएमई और निर्माताओं को नुकसान पहुंचाएगा। इससे सप्लाई चेन टूटेगी, विदेशी निवेश घटेगा और नौकरियों पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने पूछा, लेकिन नरेंद्र मोदी को क्या फर्क पड़ता है? वे भाजपा के 'शक्ति प्रदर्शन' करने वाले नेता अब कहां हैं? ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा, पिछली बार मैंने पूछा था कि जब ट्रंप ने 56 फीसदी टैरिफ लगाएगा, तब क्या मोदी जी अपनी 56 इंच की छाती दिखाएंगे? ट्रंप अब 50 फीसदी पर रुक गया है। शायद वह हमारे ‘नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री’ से डर गया है? उन्होंने आगे कहा, क्या हमारी रणनीतिक स्वतंत्रता को बेचकर अपने अरबपति दोस्तों की तिजोरी भरना सही था? ट्रंप ने बुधवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसका नाम है- 'रूसी सरकार से अमेरिका को होने वाले खतरों से निपटना'। इस आदेश के तहत भारत से आने वाले सामान पर पहले से लगे 25 फीसदी टैरिफ के अलावा अब और 25 फीसदी टैरिफ जोड़ा गया है, जो 7 अगस्त से लागू हो गया है। इस फैसले के बाद कुछ गिने-चुने उत्पादों को छोड़कर भारत से अमेरिका को भेजे जाने वाले अधिकांश सामानों पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से खासकर कपड़ा, समुद्री उत्पाद और चमड़ा जैसे क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ेगा।

NATO की भूल या धोखा? ‘Not One Inch’ पर अड़ा रूस, यूक्रेन बना रणभूमि

यूक्रेन  यूक्रेन युद्ध का असली कारण NATO की "बेवफाई" को बताया जा रहा है।  रूस की आक्रामक नीतियों और यूक्रेन पर उसके हमले को लेकर जब भी वैश्विक आलोचना होती है, तो पुतिन समर्थकों या रूस के पक्षधर विश्लेषकों द्वारा एक ही तर्क बार-बार दोहराया जाता है  "Not one inch" (एक इंच भी नहीं) । इस कथन का हवाला देकर वे दावा करते हैं कि अमेरिका और नाटो (NATO) ने शीत युद्ध के अंत में रूस से वादा किया था कि वे पूर्व की ओर विस्तार नहीं करेंगे, लेकिन उस वादे को तोड़ा गया। पर क्या यह सच है?    "Not one inch"-आखिर ये कथन क्या है?  यह वाक्यांश पहली बार सामने आया था 1990 में, जब तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री जेम्स बेकर ने सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाचेव से जर्मनीकरण के संबंध में बातचीत की थी।  उस समय बेकर ने कथित तौर पर कहा था कि नाटो "पूर्व की ओर एक इंच भी नहीं बढ़ेगा" अगर रूस जर्मनीकरण को मंजूरी दे देता है। रूस समर्थकों का कहना है  कि यह कथन एक औपचारिक वादा था कि नाटो पूर्वी यूरोप में कभी विस्तार नहीं करेगा। और जब बाद में नाटो ने पूर्वी यूरोपीय देशों को सदस्य बनाया, तो यह कथित वादा तोड़ दिया गया।     सच्चाई क्या है? अमेरिका और यूरोपीय इतिहासकारों का कहना है कि: "Not one inch" कभी कोई औपचारिक समझौता या लिखित वादा नहीं था।  यह एक राजनीतिक बातचीत का हिस्सा था, जो विशेष रूप से जर्मनी के करण से जुड़ा था, न कि पूरे पूर्वी यूरोप के लिए।  नाटो की नीति यह रही है कि कोई भी संप्रभु देश अपने सुरक्षा गठबंधन खुद तय कर सकता है। इसलिए पोलैंड, हंगरी, बाल्टिक देश आदि जब नाटो में शामिल हुए, तो वह उनकी स्वतंत्र इच्छा से हुआ, न कि किसी दबाव में। रूसी आक्रामकता  का हथियार बना "नॉट वन इंच"  पुतिन और उनके समर्थक पश्चिम की आलोचना करते हुए यह कहते हैं कि नाटो का विस्तार रूस के लिए सुरक्षा खतरा बन गया और यही यूक्रेन युद्ध का कारण है। लेकिन यह तर्क: यूक्रेन पर हमले को वैध नहीं ठहरा सकता, और न ही यह रूस की सैन्य कार्रवाइयों का न्यायिक आधार बन सकता है। इसके विपरीत, नाटो विस्तार को देखने का एक और नजरिया यह भी है कि पूर्वी यूरोपीय देश रूसी प्रभाव और अधिपत्य से बचने के लिए खुद नाटो में शामिल होना चाहते थे।    विशेषज्ञों की राय  पूर्व अमेरिकी राजनयिक और नाटो विश्लेषक मानते हैं कि: “'Not one inch' एक ऐतिहासिक बातचीत का वाक्य था, न कि कोई आधिकारिक नीति। पुतिन इसका इस्तेमाल सिर्फ अपनी नीतियों को सही ठहराने के लिए करते हैं।”     "Not one inch" कोई लिखित या कानूनी वादा नहीं था।      यह सिर्फ एक  राजनयिक बातचीत का हिस्सा था जो  1990 के सीमित संदर्भ  (जर्मनी करण) में हुआ।      रूस की सैन्य आक्रामकता और यूक्रेन पर उसका हमला, किसी पुराने कथन से उचित नहीं ठहराया जा सकता।      नाटो विस्तार सदस्य देशों की स्वतंत्र इच्छा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का परिणाम है।  

अमेरिका को जवाब देने की तैयारी: भारत का टैरिफ टूल बना ₹20,000 करोड़ का ब्रांड इंडिया मिशन

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप  द्वारा भारतीय सामानों पर 25% टैक्स (टैरिफ)  लगाने  के बीच भारत सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है। यह योजना करीब  ₹20,000 करोड़ की होगी और इसे सितंबर 2025 से शुरू किया जाएगा। इस नई योजना का मुख्य मकसद  भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजारों में पहचान दिलाना,  निर्यात करने वाले छोटे कारोबारियों को बिना ज़मानत के लोन देना, गैर-टैरिफ नियमों (जैसे तकनीकी अड़चनें) को आसान बनाना, ‘ब्रांड इंडिया’ को दुनिया में मजबूत बनाना और  हर जिले को एक निर्यात केंद्र  (Export Hub) बनाना है।  छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी मदद सरकार चाहती है कि MSME (छोटे और मझोले उद्यम) अपने सामान को दुनिया में बेच सकें। इसके लिए उन्हें बिना किसी बड़ी जमानत के लोन मिल सकेगा, ताकि वे व्यापार बढ़ा सकें।यह योजना तीन मंत्रालयों वाणिज्य मंत्रालय,  MSME मंत्रालय और  वित्त मंत्रालय की साझेदारी में बनाई जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक “यह योजना अमेरिका ही नहीं, बल्कि सभी देशों में भारतीय निर्यात को बढ़ाएगी। अगस्त में इसकी तैयारी पूरी कर ली जाएगी और सितंबर से यह लागू होगी।”   ‘ब्रांड इंडिया’ को मिलेगा इंटरनेशनल स्टेटस जैसे जापान, कोरिया और स्विट्जरलैंड  की पहचान उनके हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट्स के लिए होती है, भारत भी चाहता है कि  'ब्रांड इंडिया' को वैसी ही पहचान मिले।FIEO के महानिदेशक  अजय सहाय ने कहा कि “अगर इतनी बड़ी राशि सही तरीके से इस्तेमाल होती है, तो यह देश के निर्यातकों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।”अमेरिका ने ऐलान किया है कि  7 अगस्त से  भारत से जाने वाले सभी सामानों पर  25% टैरिफ  लगेगा। इससे भारत के करीब  $85 अरब डॉलर के सालाना निर्यात का आधा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ट्रंप की धमकी और भारत का पलटवार  ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर लिखा: “भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है और मुनाफा कमा रहा है, जबकि रूस यूक्रेन में लोगों को मार रहा है। इसलिए अब भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगेगा।” भारत ने साफ कहा कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा और यह भी बताया कि अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस से तेल खरीद रहे हैं। भारत ने ट्रंप के आरोपों को दोगलापन (hypocrisy) करार दिया है।

बदरीनाथ धाम के लिए ऑफलाइन पंजीकरण पर प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक लगाई रोक

ऋषिकेश बदरीनाथ धाम के लिए ऑफलाइन पंजीकरण पर प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। खराब मौसम को इसकी वजह बताया गया है। पिछले कुछ दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। चारों धामों में ऑफलाइन पंजीकरण पहले से कम हो रहा था। हालांकि, पंजीकरण के लिए काउंटर खुले हुए थे। गुरुवार को दोपहर तक ट्रांजिट कैंप में पंजीकरण हुए। इसके बाद पंजीकरण पर रोक लगा दी गई।

विश्व आदिवासी दिवस के चलते हेरिटेज ट्रेन की बुकिंग रद्द, रेलवे ने लिया निर्णय

इंदौर   प्रदेश के एकमात्र पातालपानी से कालाकुंड हेरिटेज ट्रैक पर हर शनिवार को चलने वाली हेरिटेज ट्रेन इस बार 9 अगस्त को नहीं चलेगी। रेलवे ने बुधवार को आदेश जारी कर हेरिटेज ट्रेन के संचालन को निरस्त कर दिया है। यह निर्णय विश्व आदिवासी दिवस पर पातालपानी स्थित शहीद टंट्या मामा भील के मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लिया गया है। शहीद टंट्या मामा की कर्मस्थली है पातालपानी पातालपानी टंट्या मामा की कर्मस्थली रही है, जहां हर साल जनजातीय समाज बड़ी संया में दर्शन के लिए पहुंचता है। आमतौर पर हेरिटेज ट्रेन शनिवार और रविवार को चलती है और पातालपानी स्टेशन पर रुकती है, जिससे सैलानी झरने और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हैं, लेकिन दर्शनार्थियों को असुविधा न हो, इसके लिए ट्रेन स्थगित की है।  पहले भी हो चुका है संचालन निरस्त यह कोई पहला मौका नहीं है, जब वर्षा सीजन के दौरान हेरिटेज ट्रेन का संचालन रोका गया हो। साल 2020 में भी 9 अगस्त को प्रशासन ने ट्रेन का संचालन निरस्त किया था। इस सीजन के लिए रेलवे पोर्टल पर हेरिटेज ट्रेन के लिए टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग चालू है। अगस्त और सितंबर माह के सभी शनिवार-रविवार के लिए ट्रेन की बुकिंग पहले ही हाउसफुल है। पातालपानी स्टेशन का नाम टंट्या मामा के नाम पर गौरतलब है कि पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम शहीद टंट्या मामा के नाम पर किया जा चुका है। राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी की थी। नवंबर 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका ऐलान किया था। टिकट निरस्त, आगामी ट्रेनों में होगा एडजस्टमेंट 9 अगस्त के लिए बुक की गई सभी टिकटें निरस्त कर दी गई हैं। रेलवे के अनुसार, यात्रियों के टिकट आगामी सफर की रिक्त सीटों में एडजस्ट किए जाएंगे। हालांकि समूह में सफर की योजना बनाने वाले पर्यटकों को अलग-अलग टिकट मिलने की स्थिति में असुविधा हो सकती है। एएसपी ने लिखा पत्र, रद्द करने की सिफारिश इंदौर ग्रामीण एएसपी रुपेश ‌द्विवेदी ने रेलवे को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि विश्व आदिवासी दिवस पर बड़ी संया में श्रद्धालु टंट्या मामा मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में हेरिटेज ट्रेन के रुकने से सुरक्षा और व्यवस्थाओं में बाधा आ सकती है। पत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रेन रद्द करने का आग्रह किया गया था, जिस पर रेलवे ने सहमति जताते हुए ट्रेन संचालन निरस्त कर दिया।

पीड़िता की साड़ी बनी गवाही की सबसे बड़ी ताकत, पूर्व सांसद दोषी करार

बेंगलुरु  कर्नाटक के हासन के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। 47 साल की घरेलू सहायिका से बलात्कार के मामले में उसे सजा सुनाई गई है। खास बात है कि पुलिस जांच में एक साड़ी ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। खबर है कि यह साड़ी पीड़िता की ही थी, जो बाद में मौका-ए-वारदात से बरामद की गई थी। प्रज्वल को शनिवार को शेष जीवन तक कारावास में रहने की सजा सुनाई गई और कुल 11.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि 11.25 लाख रुपये पीड़िता को दिए जाएं। रेवन्ना को एक अदालत ने यौन शोषण और बलात्कार के चार मामलों में से एक में दोषी ठहराया था। कैसे साड़ी ने रेवन्ना को जेल पहुंचाया मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ता बताते हैं कि बलात्कार के बाद प्रज्वल ने जबरदस्ती पीड़िता की साड़ी खींच ली थी। कथित तौर पर प्रज्वल ने इसे फार्महाउस के एटिक या अटारी में छिपा दिया था। जनता दल सेक्युलर नेता के इसी फैसले ने उसे जेल तक पहुंचाने अहम भूमिका निभाई। जांच के दौरान जब अधिकारियों ने पीड़िता से पूछा कि वारदात के समय वह क्या पहनी हुईं थीं, तो उन्होंने बताया कि वह साड़ी पहनी थीं। उन्होंने बताया कि प्रज्वल ने वो साड़ी उन्हें नहीं लौटाई, जो अब तक फार्महाउस में हो सकती है। इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने फार्महाउस पर रेड की और साड़ी बरामद कर ली। रिपोर्ट के अनुसार, साड़ी को बाद में फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया, जिसपर वीर्य की पुष्टि हुई। डीएनए जांच में इसके तार प्रज्वल से जुड़े। जांचकर्ताओं का कहना है कि पीड़िता के बयान के साथ साड़ी केस के लिए काफी अहम साबित हुए। क्या है केस यह मामला उस महिला से जुड़ा है जो हासन जिले के होलेनरसीपुरा में स्थित रेवन्ना परिवार के गन्निकाडा फार्महाउस में सहायिका के रूप में काम करती थी। वर्ष 2021 में उसके साथ दो बार बलात्कार किया गया था और इस कृत्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया गया था। प्रज्वल ने कथित तौर पर कर्मचारियों को सूचित किया है कि उसने अपनी सजा को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सजा सुनने के बाद रो पड़ा सांसदों/विधायकों की विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने शुक्रवार को रेवन्ना को दोषी ठहराने के बाद शनिवार को फैसला सुनाया था। पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद जेल में पहली रात वह रो रहा था और काफी व्यथित दिखाई दे रहा था। इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'चिकित्सीय जांच के दौरान वह रो पड़ा और उसने कर्मचारियों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की।'  

विदेश में डर का साया: आयरलैंड में भारतीय बच्ची पर हमला, मां ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

वाटरफोर्ड भारतीय मूल की 6 साल की एक बच्ची पर आयरलैंड के वाटरफोर्ड शहर में नस्लीय हमला हुआ है. सोमवार शाम (4 अगस्त) को घर के बाहर खेलते समय कुछ लड़कों ने उसे घेरकर "गो बैक टू इंडिया" कहते हुए बुरी तरह पीटा. आरोप है कि उन्होंने उसे प्राइवेट पार्ट में साइकिल से मारा और उसके चेहरे पर कई मुक्के भी मारे. घटना के वक्त बच्ची की मां अपने 10 महीने के बेटे को दूध पिलाने घर के अंदर गई थीं. उन्होंने बताया कि वो बाहर नजर रखे हुए थीं, लेकिन जब छोटा बेटा रोने लगा तो वो एक मिनट के लिए अंदर गईं. तभी बच्ची रोते हुए घर लौटी और कुछ बोल भी नहीं पा रही थी. बाद में उसकी एक दोस्त ने बताया कि करीब 12 से 14 साल के पांच लड़कों ने उसके चेहरे पर मुक्के मारे और एक लड़के ने साइकिल का पहिया उसके प्राइवेट पार्ट पर मारा. एक 8 साल की लड़की भी इस गिरोह का हिस्सा थी. बच्ची की मां ने The Irish Mirror से बातचीत में बताया कि हमलावरों ने गंदी गालियां भी दीं और 'डर्टी इंडियन' कहकर जातीय टिप्पणी की. आठ साल से आयरलैंड में रह रहीं बच्ची की नर्स मां बच्ची की मां, जो पेशे से नर्स हैं और पिछले आठ साल से आयरलैंड में रह रही हैं, हाल ही में आयरिश नागरिक बनी हैं. उन्होंने कहा, "हम अब यहां सुरक्षित महसूस नहीं करते. मेरी बेटी अब घर के बाहर खेलने से डरती है. मैं बहुत दुखी हूं कि मैं उसे सुरक्षित नहीं रख पाई." परिवार इस साल जनवरी में वाटरफोर्ड के किलबैरी इलाके में शिफ्ट हुआ था. मां ने यह भी बताया कि उन्होंने बाद में उन लड़कों को देखा, जो उन्हें घूर रहे थे और हंस रहे थे. वो अब भी आसपास घूम रहे हैं. आयरलैंड में भारतीयों पर अब तक तीन हमले हुए बच्ची की मां ने घटना की शिकायत गर्दा (Irish Police) से की है लेकिन किसी सजा की मांग नहीं की. उनका कहना है, "मैं चाहती हूं कि उन्हें काउंसलिंग और सही दिशा दी जाए. हम यहां प्रोफेशनल्स हैं, हमने आयरलैंड में काम करने के लिए खूब मेहनत की है." इस घटना ने आयरलैंड में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. पिछले महीने डबलिन के एक उपनगर में एक 40 वर्षीय भारतीय व्यक्ति को भी किशोरों के एक गिरोह ने पीटा और सार्वजनिक रूप से नग्न कर दिया था. 19 जुलाई के बाद से डबलिन में भारतीयों पर तीन हमले सामने आ चुके हैं

PM का दो टूक जवाब: ‘बड़ी कीमत चुकानी होगी, लेकिन देशहित में झुकेंगे नहीं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा है कि भारत किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगा। कृषि मंत्रालय के एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि किसान भारत की प्राथमिकता है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा, '…हमारे लिए अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों के, पशुपालकों के और मछुआरे भाई बहनों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा। और मैं जानता हूं कि व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरे देश के किसानों के लिए, मेरे देश के मछुआरों के लिए, मेरे देश के पशुपालकों के लिए आज भारत तैयार है।' ट्रंप का टैरिफ बम ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। साथ ही अमेरिका की तरफ से रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर जुर्माना भी लगाया गया था। बाद में ट्रंप ने धमकी दी कि वह और टैरिफ बढ़ाने वाले हैं। बुधवार को उन्होंने 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का ऐलान कर दिया। खास बात है कि दोनों ही मौकों पर भारत ने जवाब दिया है कि किसी भी तरह से भारत के आर्थिक हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। भारत ने भारतीय वस्तुओं पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने के अमेरिका के कदम को बुधवार को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण” करार दिया। नई दिल्ली की यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद आई, जिसके तहत पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत के रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने का हवाला देते हुए भारतीय वस्तुओं पर नया शुल्क लगाने की बात कही गई है। ट्रंप द्वारा अतिरिक्त शुल्क लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश जारी करने के कुछ ही देर बाद, भारत ने कहा कि वाशिंगटन ने रूस से उसके तेल आयात को ‘निशाना’ बनाया है और वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ‘‘सभी आवश्यक कार्रवाई’’ करेगा। विदेश मंत्रालय ने रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों का बचाव करते हुए कहा कि आयात बाजार कारकों पर आधारित है और देश के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के समग्र उद्देश्य से किया जाता है।

म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति मिंट स्वे नहीं रहे, 74 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

नाएप्यीडॉ म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति मिंट स्वे का आज गुरुवार 7 अगस्त को अचानक निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने देश के सैन्य अस्पताल नंबर-2 में अंतिम सांस ली। उनके निधन की आधिकारिक जानकारी नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा दी गई है। मिंट स्वे म्यांमार के एक अनुभवी सैन्य अधिकारी और नेता थे। उन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की और हाल के वर्षों में उन्हें कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्हें सत्तारूढ़ सैन्य सरकार का एक भरोसेमंद चेहरा माना जाता था। स्वास्थ्य को लेकर पहले से थे चिंतित मिंट स्वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। हालाँकि उनके स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर सरकार की ओर से अधिक जानकारी साझा नहीं की गई थी लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि उन्होंने आज तड़के अस्पताल में अंतिम सांस ली। म्यांमार में शोक की लहर उनके निधन की खबर सामने आते ही म्यांमार में शोक की लहर फैल गई है। देश के रक्षा और सुरक्षा महकमे समेत सरकार के अन्य विभागों ने इस दुखद समाचार पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों पर भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी काउंसिल की पुष्टि मिंट स्वे के निधन की पुष्टि नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा की गई। यह काउंसिल देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी करती है और शीर्ष नेताओं की नियुक्तियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।