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ट्रंप तक पहुंचा एपस्टीन फाइल विवाद, काश पटेल के इस्तीफे की चर्चा तेज, रिपोर्ट में गंभीर आरोप

नई दिल्ली अमेरिका में कुख्यात जेफरी एपस्टीन के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच कहा जा रहा है कि इस मामले की आंच ट्रंप प्रशासन तक पहुंचनी शुरू हो गई है। हाल में एक खबर आई थी कि एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंगिनो इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इन सब के बीच एक एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एफबीआई निदेशक काश पटेल अपने पद से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं। माना जा रहा है कि का पटेल ऐसा कथित तौर पर उप निदेशक डैन बोंगिनो के साथ एकजुटता दिखाते हुए कर सकते हैं। एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंगिनो का अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के साथ मतभेद चल रहा है। जानिए क्या है पूरा मामला? न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, असहमति न्याय विभाग (डीओजे) द्वारा जेफरी एपस्टीन की मौत की जांच और उनकी कथित ग्राहक सूची के बारे में विवादास्पद चर्चा में निहित है। दरअसल, कथित तौर इसी हफ्ते की शुरुआत में बोंगिनो और बॉन्डी के बीच में किसी बात को लेकर मतभेद देखने को मिला। इसके बाद दोनों के बीच का तनाव काफी आगे बढ़ गया। बता दें कि यह टकराव अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा एपस्टीन मामले से निपटने के तरीके को लेकर था। ये प्रकरण एक रिव्यू से जुड़ा हुआ है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि ये रिव्यू अस्तित्व में ही नहीं है। ठीक इसी विवाद के बाद बोंगिनो के बारे में कहा जाने लगा कि वह अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 'अधिकारियों के बीच बिगड़ गए हैं संबंध' वहीं, एक सूत्र ने द न्यू यॉर्क पोस्ट से बात करते हुए कहा कि मुझे नहीं लगता कि अगर पाम रुकी रहीं तो डैन वापस आएंगे। सूत्र ने आगे बताया कि दोनों अधिकारियों के बीच संबंध इतने खराब हो चुके हैं कि उन्हें सुधारा नहीं जा सकता। हालांकि दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि एपस्टीन फ़ाइल में कोई भी विस्फोटक खुलासा नहीं हुआ है, न तो उसकी मौत के बारे में और न ही उसके नेटवर्क के बारे में, लेकिन आंतरिक मतभेद अभी सुलझने से कोसों दूर है। काश पटेल भी जा सकते दे सकते हैं इस्तीफा: सूत्र इसके साथ ही न्याय विभाग के एक अधिकारी ने द न्यू यॉर्क पोस्ट से बात करते हुए बताया कि पटेल, जो बोंगिनो के करीबी माने जाते हैं, उनके साथ ही बाहर भी जा सकते हैं। अधिकारी ने कहा कि काश और डैन हमेशा से एक-दूसरे के साथ रहे हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि उस स्थिति में क्या होगा, लेकिन, आप जानते हैं, दोनों ने पारदर्शिता के लिए लड़ाई लड़ी है, और ऐसी दुनिया में जहाँ इसे दबाया जा रहा है, उन्हें इसके लिए खड़ा होते देखना कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी।

EU और मैक्सिको को ट्रंप की सख्त चेतावनी, टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर भेजा पत्र

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन और मैक्सिको को भी टैरिफ लेटर जारी कर दिया है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट शेयर करके यह जानकारी दी है। अमेरिका ने मैक्सिको और यूरोपीय यूनियन (EU) पर 30 फीसदी का टैरिफ लगाया है। यह टैरिफ रेट 1 अगस्त से लागू होगी। अपने टैरिफ लेटर में डोनाल्ड ट्रंप ने मैक्सिको को अमेरिका में ड्रग्स तस्करी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। वहीं ट्रंप ने कहा है कि ईयू की वजह से व्यापार में असंतुलन का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने छह व्यापारिक साझेदारों का टैरिफ लेटर जारी किया था। इसमें लीबिया, अल्जीरिया, इराक, मोल्दोवा, फ्लीपीन्स और ब्रुनोई शामिल थे। डोनाल्ड ट्रंप 20 से ज्यादा देशों के लिए टैरिफ का ऐलान कर चुके हैं। इनमें म्यांमार, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और जापान भी शामिल है। गौर करने वाली बात है कि टैरिफ से डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगियों को भी नहीं बख्शा है। वहीं भारत को लेकर सस्पेंस अब भी बरकरार है। फिलहाल अमेरिका ने भारत को टैरिफ लेटर नहीं भेजा है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप ने अल्जीरिया, इराक और लाबिया पर 30 फीसदी और ब्रुनेई, मोल्दोवा पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया है। वहीं फिलीपीन्स पर 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप कजाकिस्तान, कंबोडिया, बोस्निया, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, मलेशिया, कोरिया, इंडोनेशिया और ब्राजील के लिए भी टैरिफ का ऐलान कर चुके हैं। अमेरिका ने कहा है कि 10 फीसदी की बेसिक ड्यूटी पहले की ही तरह बरकरार रहेगी। किस देश पर कितना टैरिफ अमेरिका ने ब्राजील पर सबसे ज्यादा 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। दूसरे नंबर पर म्यांमार और लाओस पर 40-40 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है। कंबोडिया और थाईलैंड पर 36 फीसदी, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35 फीसदी, इंडोनेशिया पर 32, बोस्निया और हर्जेगोविना पर 30 फीसदी, दक्षिण अफ्रीका पर 30 फ्रतिशत, जापान, कजाखस्तान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और ट्यूनीशइया पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया गया है।  

पीएम मोदी और ओडिशा सीएम मोहन माझी की बैठक, राज्य के विकास पर हुई चर्चा

नई दिल्ली ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। पीएम मोदी से सीएम माझी की यह मुलाकात ओडिशा में विकास कार्यों को गति देने और केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री माझी ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं ओडिशा के विकास के लिए उनके निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए आभारी हूं।” उन्होंने बताया कि बैठक में ओडिशा के विकास के रोडमैप, भविष्य की योजनाओं और केंद्र-राज्य के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। माझी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बैठक में ओडिशा में चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं पर जोर दिया गया। इस मुलाकात के दौरान सीएम माझी ने प्रधानमंत्री मोदी को राज्य में कल्याणकारी योजनाओं को तेजी से लागू करने की योजना के बारे में बताया। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार से ओडिशा के लिए और अधिक सहयोग की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस मुलाकात को सकारात्मक बताया और ओडिशा की प्रगति के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया। दोनों नेताओं ने यह सुनिश्चित करने पर सहमति जताई कि केंद्र और राज्य मिलकर जनता के कल्याण और विकास के लिए काम करेंगे। इस मुलाकात को ओडिशा में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ने राजनीति से संन्यास लेने का किया ऐलान

संबलपुर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री और ओडिशा के वरिष्ठ भाजपा नेता जुएल उरांव ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में जुएल उरांव ने घोषणा की कि वो अब भविष्य में कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेंगे। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ओडिशा के संबलपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा, “मैंने तय किया है कि अब कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। अब मैं पार्टी के लिए काम करूंगा और युवाओं को आगे लाने में मदद करूंगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वो पार्टी के निर्देशों के अनुसार ही आगे कोई भी भूमिका निभाएंगे। जिम्मेदारी जो पार्टी उन्हें सौंपेगी, वो उसे स्वीकार करेंगे। मीडिया से बातचीत में जुएल उरांव ने अपनी घोषणा को दोहराया। उन्होंने कहा, “मैं 8 बार लोकसभा और दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुका हूं। इसलिए चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। ये मेरा फैसला है, लेकिन अगर पार्टी कोई निर्णय करती है तो ये अलग बात होगी।” उन्होंने कहा, “अब वक्त आ गया है कि युवाओं को नेतृत्व संभालने का अवसर मिले और वो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए जनता का प्रतिनिधित्व करें।” हालांकि, जुएल उरांव ने राज्यसभा सदस्य या राज्यपाल बनने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं राज्यपाल या राज्यसभा का सदस्य बन सकता हूं। अगर नहीं भी बनता हूं तो पार्टी के लिए काम करता रहूंगा।” केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। जुएल उरांव ओडिशा में भाजपा के एक प्रमुख आदिवासी चेहरा हैं। राज्य में पार्टी की जड़ें मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वो सुंदरगढ़ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए 1998 से 12वीं, 13वीं, 14वीं, 16वीं और 17वीं लोकसभा के सदस्य रहे। जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मंत्रालय का गठन किया तब ओराम ने 13 अक्टूबर 1999 को जनजातीय मामलों के पहले केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी। साल 2024 में केंद्र में एनडीए की तीसरी बार सरकार बनने पर जुएल उरांव को मंत्री बनाया गया।  

अमरनाथ यात्रा जारी, अब तक 1.63 लाख श्रद्धालु हुए दर्शन लाभ के पात्र

श्रीनगर अमरनाथ यात्रा ने आस्था और भक्ति का एक नया इतिहास रच दिया है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस पवित्र यात्रा में अब तक 1.63 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं। इसके साथ ही शनिवार को जम्मू से 6,639 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने बताया कि 3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में अब तक 1.63 लाख लोग बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। आज 6,639 तीर्थयात्रियों का एक और समूह जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों के साथ कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने कहा कि 2,337 यात्रियों को लेकर 116 वाहनों का पहला सुरक्षा काफिला तड़के 2.50 बजे बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ, जबकि 4,302 यात्रियों को लेकर 161 वाहनों का दूसरा सुरक्षा काफिला तड़के 3.55 बजे नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। पहलगाम में गुरुवार को ‘छड़ी मुबारक’ (भगवान शिव की पवित्र गदा) का भूमि पूजन किया गया। इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यह यात्रा पहलगाम हमले के बाद हो रही है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी। 180 अतिरिक्त सीएपीएफ कंपनियों को सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत बढ़ाने के लिए लाया गया है। जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से गुफा मंदिर तक के पूरे रास्ते और दोनों आधार शिविरों के रास्ते में सभी पारगमन शिविरों को सुरक्षा बलों ने सुरक्षित कर लिया है। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत को बढ़ाने के लिए सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियां लाई गई हैं। पूरे मार्ग को सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और 46 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं। तीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं। वहीं, छोटे बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यात्रा पूरी करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौटना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस वर्ष यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 38 दिनों के बाद 9 अगस्त को समाप्त होगी, जो श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन का दिन है। श्री अमरनाथ जी यात्रा भक्तों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है, क्योंकि किंवदंती है कि भगवान शिव ने इस गुफा के अंदर माता पार्वती को शाश्वत जीवन और अमरता के रहस्य बताए थे।  

निपाह वायरस पर सख्त कदम: केरल सरकार की तैयारियों पर बोले राजन खोबरागड़े

तिरुवनंतपुरम केरल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजन खोबरागड़े ने कहा कि निपाह के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम के लिए कई रणनीतियां तैयार की हैं और उन्हें लागू किया है। डॉ. खोबरागड़े ने कल यहां आयोजित 'निपाह और अन्य जूनोटिक स्पिलओवर-रोकथाम के लिए स्वास्थ्य रणनीतियों का एकीकरण' विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ये टिप्पणियां कीं और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। जंगली जानवरों से मनुष्यों में रोगजनकों के संचरण को ‘जूनोटिक स्पिलओवर’ कहा जाता है। उन्होंने 2019 से राज्य को प्रभावित करने वाली महामारियों का पता लगाने एवं उनकी रोकथाम करने के राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए वर्तमान परिदृश्य में ‘वन हेल्थ’ अवधारणा के महत्व पर प्रकाश डाला और राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए उन्नत वायरोलॉजी संस्थान जैसे संस्थानों से सहयोग मांगा। यह सम्मेलन संक्रामक रोग विभाग, सरकारी मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम और केरल वन हेल्थ सेंटर फॉर निपाह रिसर्च एंड रेजिलिएंस के सहयोग से आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की संयुक्त निदेशक डॉ. सिम्मी तिवारी ने उन्नत विषाणु विज्ञान संस्थान (आईएवी) की स्थापना के लिए केरल सरकार को बधाई दी और कहा कि संस्थान ने पहले ही विषाणु विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बना ली है और संस्थान राज्य तथा देश दोनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी की तैयारी में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने राज्य को अक्सर प्रभावित करने वाले जूनोटिक स्पिलओवर संक्रमणों का समय पर पता लगाने के लिए नैदानिक सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें विभिन्न विषयों पर सत्र प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा दिए गए।  

रेलवे भर्ती में सख्ती: जीरो टॉलरेंस नीति के साथ फास्ट ट्रैक एग्जाम शुरू

नई दिल्ली  रेल मंत्रालय ने देश के करोड़ों नौकरी चाहने वाले युवाओं को बड़ी राहत दी है। रेलवे की भर्ती प्रक्रिया में अब पूरी तरह से पारदर्शिता और तकनीक का इस्तेमाल होगा। इससे न सिर्फ उम्मीदवारों को फायदा मिलेगा, बल्कि भर्ती की पूरी प्रक्रिया भी तेज और निष्पक्ष हो जाएगी। नए बदलावों का मकसद परीक्षा में पारदर्शिता लाना, धोखाधड़ी पर रोक लगाना और योग्य उम्मीदवारों को समय पर नौकरी देना है। अब नहीं रहेगा बार-बार फ़ॉर्म भरने का झंझट: 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन' अब हर बार फ़ॉर्म भरने का झंझट नहीं रहेगा। रेलवे ने "वन टाइम रजिस्ट्रेशन" (OTR) सिस्टम लागू किया है। इससे एक बार रजिस्ट्रेशन करके उम्मीदवार आने वाली सभी भर्तियों में आसानी से आवेदन कर सकेंगे। ये खासकर उन लाखों युवाओं के लिए राहत की खबर है, जो हर भर्ती के लिए नया आवेदन करते-करते थक जाते थे। आधार और फ़ेस रिकग्निशन से धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम रेलवे अब परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए e-KYC और रियल-टाइम फ़ेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल करेगा। इसका मतलब है कि परीक्षा के समय आधार कार्ड से पहचान की पुष्टि की जाएगी और चेहरा मिलान कर ये पक्का किया जाएगा कि परीक्षा वही उम्मीदवार दे रहा है जिसने फ़ॉर्म भरा है। इससे "जीरो चीटिंग" का दावा किया जा रहा है। हर साल मिलेगा परीक्षा का कैलेंडर, प्रक्रिया में आएगी तेज़ी रेल मंत्रालय ने अब सभी ग्रुप C पदों के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की व्यवस्था लागू कर दी है। इससे युवाओं को पहले से पता होगा कि कब कौन-सी भर्ती निकलेगी, कब आवेदन शुरू होंगे और परीक्षा कब होगी। रेलवे की तरफ से बताया गया है कि 2024 में कुल 1,08,000 से ज़्यादा पदों पर भर्तियां निकाली गईं। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन (प्रमुख पदों के लिए करोड़ों आवेदन) होने के बावजूद, रेलवे ने भर्ती प्रक्रिया को पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ कर दिया है। अब भर्ती की अधिसूचना जारी होने से लेकर परीक्षा कराने तक का औसत समय 8 महीने रह गया है, जिसे भविष्य में और कम किया जाएगा। परीक्षा केंद्र घर के पास, मोबाइल जैमर से पूरी सुरक्षा रेलवे ने उम्मीदवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तय किया है कि अब परीक्षा केंद्र उम्मीदवार के घर से 250 किलोमीटर के भीतर ही होगा और अधिकतम दूरी 500 किलोमीटर रखी गई है। इतना ही नहीं, सभी केंद्रों पर 100% मोबाइल जैमर लगाए गए हैं ताकि कोई तकनीकी धोखाधड़ी न हो। जून 2025 की परीक्षा में इसका असर दिखा, जहाँ किसी भी तरह की चीटिंग की कोई खबर नहीं आई। इंटरनल प्रमोशन और वेटिंग लिस्ट में भी सुधार अब रेलवे के आंतरिक पदोन्नति के लिए भी CBAT और टैबलेट आधारित परीक्षा होगी, जिससे योग्य कर्मचारियों को जल्द प्रमोशन मिलेगा। लेवल-1 पदों के लिए 10वीं, ITI या नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट रखने वाले युवा पात्र माने जाएंगे। जो उम्मीदवार नियुक्ति के बाद जॉइन नहीं करेंगे, उनकी जगह वेटिंग लिस्ट से दूसरे उम्मीदवार को मौका तुरंत दिया जाएगा।  

तनाव के बाद संवाद की पहल: भारत और कनाडा के अधिकारी करेंगे रिश्तों की नई शुरुआत पर चर्चा

नई दिल्ली  भारत और कनाडा अगले हफ्ते अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करने के लिए अहम बातचीत करने जा रहे हैं। यह बैठक पिछले महीने दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने पर बनी सहमति के बाद पहली बार होगी। बातचीत में सुरक्षा मुद्दों और राजनयिक रिश्तों को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। कनाडा के इंडो-पैसिफिक मामलों के असिस्टेंट डिप्टी मिनिस्टर वेल्डन एप (Weldon Epp)  अगले हफ्ते नई दिल्ली आएंगे। वह मलेशिया में आसियान (ASEAN) से जुड़ी बैठक के बाद भारत आएंगे और यहां भारत के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) के नागराज नायडू से मिलेंगे। पिछले महीने कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी  और भारतीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की कनाडा के रॉकीज में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात में दोनों देशों ने आपसी रिश्ते फिर से पटरी पर लाने के लिए ‘‘संतुलित और रचनात्मक कदम’’ उठाने पर सहमति जताई थी। वेल्डन एप इस समझौते के बाद भारत आने वाले पहले वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी होंगे। बातचीत में दोनों देशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग बढ़ाना, आपसी खुफिया जानकारी साझा करना और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।   साथ ही दोनों देश फिर से काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक शुरू करने पर भी विचार करेंगे, जो पिछले दो साल से बंद है।भारत अपनी तरफ से कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों और उनके आपराधिक गतिविधियों को लेकर फिर से चिंता जताएगा। दोनों देश एक-दूसरे की राजधानी में नए उच्चायुक्त भी तैनात करने जा रहे हैं। भारत के स्पेन में राजदूत  दिनेश पटनायक को ओटावा में भारत का नया उच्चायुक्त बनाया जाएगा। वहीं, कनाडा की ओर से क्रिस्टोफर कूटर जो अभी इज़राइल में कनाडा के चार्ज द’अफेयर्स हैं, भारत में नए उच्चायुक्त होंगे। इन नियुक्तियों की औपचारिक घोषणा जल्द होगी और अगस्त के अंत तक नई तैनाती पूरी होने की उम्मीद है। क्यों बिगड़े थे रिश्ते? भारत-कनाडा के रिश्तों में दरार तब आई थी जब कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सितंबर 2023 में आरोप लगाया था कि खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंसियों का हाथ है। भारत ने इसे ‘‘बेहूदगी’’ बताया और इसके बाद दोनों देशों ने आपसी व्यापार वार्ता रोक दी, दर्जनों राजनयिकों को देश से निकाल दिया और रिश्ते काफी खराब हो गए थे।अब पीएम मोदी और पीएम कार्नी की मुलाकात के बाद रिश्तों को नए सिरे से शुरू करने की कोशिश की जा रही है। कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने इसे द्विपक्षीय रिश्तों के लिए ‘‘महत्वपूर्ण कदम’’ बताया है।  

निमिषा प्रिया केस: यमन में फांसी की सजा तय, जानिए कौन हैं वो और क्या है अपराध?

नई दिल्ली केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया को यमन की राजधानी सना में 16 जुलाई को फांसी की सजा दी जाएगी। उन्हें 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। मामला कूटनीतिक जटिलताओं और कानूनी पेचिदगियों के कारण उलझा हुआ है और भारत सरकार की ओर से की जा रही तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। कौन हैं निमिषा प्रिया? निमिषा प्रिया 2011 में नर्स के तौर पर काम करने के लिए यमन गई थीं। 2014 में उनके पति और बेटी भारत लौट आए, लेकिन वे वहीं रहीं ताकि परिवार को आर्थिक रूप से सहारा दे सकें। उन्होंने यमन के एक नागरिक तालाल अब्दो महदी के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेशी नागरिकों के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर ही क्लिनिक खोलने की इजाजत मिलती है। बाद में निमिषा ने आरोप लगाया कि महदी ने फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए उनसे शादी का दावा किया, उनका यौन और मानसिक शोषण किया और पासपोर्ट जब्त करके उन्हें कैद जैसे रखा। निमिषा पर आरोप है कि उन्होंने 2017 में महदी को बेहोश करने के लिए दवा दी ताकि वह उसका पासपोर्ट लेकर भारत लौट सकें। लेकिन महदी की मौत हो गई। बाद में स्थानीय महिला हनान की मदद से उन्होंने शव के टुकड़े कर उन्हें पानी की टंकी में फेंक दिया। 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया और 2023 में हौती प्रशासन की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने इस फैसले को बरकरार रखा। भारत सरकार की कोशिशें भारत सरकार इस मामले को लेकर लगातार सक्रिय है। अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्रालय यमन के प्रशासन और निमिषा के परिवार से लगातार संपर्क में है। भारत ने ब्लड मनी का विकल्प भी तलाशा। यमन के कानून के अनुसार पीड़ित के परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान कर सजा माफ कराई जा सकती है। लेकिन इस दिशा में स्थानीय स्तर पर बातचीत अटक गई है। निमिषा की मां प्रेमकुमारी बेटी को बचाने के लिए खुद यमन तक गईं। उन्होंने यमन के अधिकारियों से मुलाकात की और बेटी की सजा को माफ करने की गुहार लगाई। मानवाधिकार संगठनों और आम नागरिकों द्वारा भी भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप करने की अपील की जा रही है। अब 16 जुलाई को फांसी की तारीख तय है। सना की जेल में बंद निमिषा अब आखिरी उम्मीदों का इंतजार कर रही हैं। भारत सरकार ने कहा है कि वह मामले पर करीब से नजर रखे हुए है और हरसंभव मदद कर रही है।  

हादसे की रिपोर्ट आने तक इंतज़ार करें: एयर इंडिया मामले पर बोले केंद्रीय मंत्री

नई दिल्ली केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने शनिवार को कहा कि अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट 171 की दुर्घटना पर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट अभी प्राथमिक जांच पर आधारित है। उन्होंने कहा कि जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें किसी नतीजे पर कूदना चाहिए। हमारे पास दुनिया के सबसे बेहतरीन पायलट और क्रू हैं। मुझे उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए। वे हमारे नागर विमानन क्षेत्र की रीढ़ हैं। हम उनके कल्याण की चिंता करते हैं। इसलिए इस वक्त निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, हमें अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।” मंत्री नायडू ने दोहराया, “तकनीकी पहलू जुड़े होते हैं। इसलिए किसी भी टिप्पणी के लिए यह समय बहुत जल्दबाजी भरा है। अभी प्राथमिक रिपोर्ट आई है, अंतिम और ठोस निष्कर्ष का इंतजार करना चाहिए।” यह बयान उस वक्त आया जब AAIB ने शनिवार को इस भीषण दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की, जिसमें ईंधन फीडिंग स्विच बंद होने और उसके बाद कॉकपिट में पायलटों के बीच भ्रम की स्थिति को संभावित कारण बताया गया है। क्या कहती है AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट? AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, 12 जून को टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद विमान के दोनों इंजनों में ईंधन की सप्लाई देने वाले स्विच एक-एक सेकंड के अंतराल पर बंद हो गए। इसके कारण इंजन 1 और इंजन 2 की स्पीड तेजी से घटने लगी। रिपोर्ट में कहा गया, “विमान ने 08:08:42 UTC पर अधिकतम गति 180 नॉट्स IAS हासिल की, और इसके तुरंत बाद, दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच RUN से CUTOFF में बदल गए।” कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग के अनुसार, एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने ईंधन कट क्यों किया, तो उत्तर मिला कि उसने ऐसा नहीं किया। इससे पायलटों के बीच भ्रम की स्थिति का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विमान में इस्तेमाल हुए ईंधन के नमूने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की लैब्स में जांचे गए और उन्हें संतोषजनक पाया गया। मंत्री ने दी पारदर्शिता की गारंटी नागर विमानन मंत्री नायडू ने कहा कि पीड़ितों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए मंत्रालय हर संभव सहायता कर रहा है। उन्होंने AAIB की जांच प्रक्रिया की भी सराहना करते हुए कहा, “ब्लैक बॉक्स को सुरक्षित निकालने और उसका डेटा डिकोड करने का कार्य पहली बार पूरी तरह भारत में किया जा रहा है। यह एक पारदर्शी जांच है।” उन्होंने यह भी कहा कि जांच में सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया है। इससे पहले नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने विमान दुर्घटना पर एएआईबी की रिपोर्ट को लेकर कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता क्योंकि पायलटों की बातचीत बहुत संक्षिप्त थी। हादसे में भारी जनहानि यह भीषण दुर्घटना अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में हुई जहां विमान BJ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स क्वार्टर्स पर गिरा। विमान में सवार 242 यात्रियों और क्रू में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा। जमीन पर कॉलेज से जुड़े नौ छात्रों और उनके परिजनों समेत कई लोगों की जान गई।